Tuesday, June 16, 2026
Home Blog Page 15

डीएम व एसपी ने नमाज स्थलों का किया निरीक्षण, सुरक्षा व्यवस्था का लिया जायजा

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। ईद-उल-अजहा (बकरीद) पर्व को शांतिपूर्ण एवं सौहार्दपूर्ण वातावरण में सम्पन्न कराने के दृष्टिगत जिलाधिकारी आलोक कुमार एवं पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार मीना ने खलीलाबाद के मोतीनगर ईदगाह सहित विभिन्न क्षेत्रों का स्थलीय भ्रमण एवं पैदल गश्त कर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया। अधिकारियों ने लोगों से आपसी भाईचारे और सौहार्दपूर्ण माहौल में त्योहार मनाने की अपील की। इस दौरान अपर पुलिस अधीक्षक सुशील कुमार सिंह भी मौजूद रहे।
भ्रमण के दौरान अधिकारियों ने पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों से मुलाकात कर सुरक्षा व्यवस्था के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। जनपद में बकरीद की नमाज शांतिपूर्ण एवं सकुशल ढंग से सम्पन्न हुई।
त्योहार के दौरान किसी भी प्रकार की अराजकता फैलाने, सोशल मीडिया पर भ्रामक खबरें प्रसारित करने तथा वर्चुअल या प्रत्यक्ष रूप से गड़बड़ी करने वालों पर सतर्क निगरानी रखी जा रही है। सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफार्मों की लगातार मॉनिटरिंग के साथ-साथ जनपद के विभिन्न क्षेत्रों में ड्रोन कैमरों से भी निगरानी की जा रही है। जनपदीय पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारी अपने-अपने क्षेत्रों में लगातार भ्रमणशील रहकर पर्व को सकुशल सम्पन्न करा रहे हैं।
इस अवसर पर उप जिलाधिकारी खलीलाबाद हृदय राम तिवारी, पुलिस क्षेत्राधिकारी प्रियम राजशेखर पांडेय, उपायुक्त उद्योग राजकुमार शर्मा, अधिशासी अधिकारी नगर पालिका अवधेश भारती सहित संबंधित अधिकारी एवं पुलिस बल के जवान उपस्थित रहे।

हिंदी पत्रकारिता दिवस पर दो दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन

“200 वर्ष हिंदी पत्रकारिता: विरासत, संघर्ष और भविष्य” विषय पर होगा मंथन

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। हिंदी पत्रकारिता दिवस के अवसर पर 30 और 31 मई 2026 को गोरखपुर जर्नलिस्ट्स प्रेस क्लब के तृतीय तल स्थित वातानुकूलित सभागार में दो दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया जाएगा। कार्यक्रम में हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में “200 वर्ष हिंदी पत्रकारिता: विरासत, संघर्ष और भविष्य” विषय पर विस्तार से चर्चा होगी।

30 मई को आयोजित संगोष्ठी में “आधुनिक युग में हिंदी पत्रकारिता” विषय पर विचार-विमर्श किया जाएगा। इसमें बदलते मीडिया परिदृश्य, डिजिटल दौर की चुनौतियां और जनसरोकार से जुड़ी पत्रकारिता की भूमिका पर विशेषज्ञ मंथन करेंगे।

वहीं 31 मई को हिंदी पत्रकारिता की 200 वर्षों की यात्रा, उसके संघर्ष, उपलब्धियां और भविष्य की दिशा पर गहन चर्चा की जाएगी। कार्यक्रम का उद्देश्य पत्रकारिता के बदलते स्वरूप और लोकतंत्र में उसकी भूमिका पर सार्थक संवाद स्थापित करना है।

संगोष्ठी 30 मई को दोपहर 1:00 बजे से तथा 31 मई को अपराह्न 12:30 बजे से प्रारंभ होगी। दोनों दिनों में पत्रकारों, बुद्धिजीवियों, शिक्षाविदों और मीडिया जगत से जुड़े लोगों की सहभागिता रहेगी।

आयोजकों ने सभी पत्रकार साथियों, मीडिया कर्मियों और आमजन से अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर संगोष्ठी में भाग लेने की अपील की है, ताकि हिंदी पत्रकारिता के गौरवशाली इतिहास और उसके भविष्य पर होने वाली चर्चा का हिस्सा बना जा सके।

गढ़िया रंगीन क्षेत्र में शांति और सौहार्द के साथ मनाई गई बकरीद

ईदगाहों में अदा की गई नमाज, अमन-चैन और खुशहाली की मांगी दुआ

शाहजहांपुर (राष्ट्र की परम्परा)। जैतीपुर थाना क्षेत्र के गढ़िया रंगीन में ईद-उल-अजहा (बकरीद) का पर्व सोमवार को पूरे उत्साह, भाईचारे और शांतिपूर्ण माहौल में मनाया गया। क्षेत्र की विभिन्न ईदगाहों में मुस्लिम समुदाय के लोगों ने नमाज अदा कर देश में अमन-चैन और खुशहाली की दुआ मांगी।
गढ़िया रंगीन, जरगवां, दुवला, करीमनगर, टाटराबाद और डभौरा सहित कई स्थानों पर नमाज शांतिपूर्वक संपन्न हुई। त्योहार को लेकर पुलिस प्रशासन पूरी तरह सतर्क नजर आया।

थाना प्रभारी Harikesh Singh पुलिस बल के साथ लगातार क्षेत्र में भ्रमण करते रहे और विभिन्न ईदगाहों का निरीक्षण कर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया।

सुरक्षा व्यवस्था के तहत पर्याप्त पुलिस बल तैनात रहा, जिससे पूरे क्षेत्र में कानून व्यवस्था पूरी तरह सामान्य बनी रही। नमाज के बाद लोगों ने एक-दूसरे को गले लगाकर ईद की मुबारकबाद दी और आपसी भाईचारे तथा सौहार्द का संदेश दिया।

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर डीडीयू में होंगे विविध आयोजन

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 को इस वर्ष विशेष जनसहभागिता, सामाजिक समावेशन एवं वैश्विक सहभागिता के साथ भव्य रूप से मनाया जाएगा। विश्वविद्यालय द्वारा 1 जून से योग आधारित विविध कार्यक्रमों एवं जागरूकता अभियानों की श्रृंखला प्रारंभ की जाएगी, जो 21 जून को आयोजित होने वाले मुख्य समारोह तक निरंतर संचालित रहेगी।
इस संबंध में कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने बताया कि विश्वविद्यालय इस वर्ष योग को केवल एक औपचारिक आयोजन तक सीमित न रखते हुए समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुँचाने के लिए विशेष पहल कर रहा है। उन्होंने कहा कि योग भारत की प्राचीन सांस्कृतिक धरोहर होने के साथ-साथ स्वस्थ, संतुलित एवं सकारात्मक जीवनशैली का आधार भी है।
उन्होंने जानकारी दी कि कार्यक्रमों के अंतर्गत वरिष्ठ नागरिकों के लिए विशेष योग सत्र, गर्भवती महिलाओं हेतु स्वास्थ्य एवं योग कार्यक्रम, रामगढ़ ताल परिसर में सामूहिक योग आयोजन, विश्वविद्यालय द्वारा गोद लिए गए गाँवों में योग जागरूकता अभियान तथा बाल सुधार गृह एवं चिल्ड्रेन होम में विशेष योग सत्र आयोजित किए जाएंगे। इन आयोजनों का उद्देश्य योग के माध्यम से समाज के विभिन्न वर्गों में स्वास्थ्य, अनुशासन एवं मानसिक संतुलन के प्रति जागरूकता विकसित करना है।
योग दिवस समारोह को अंतरराष्ट्रीय स्वरूप प्रदान करते हुए विश्वविद्यालय मलेशिया, थाईलैंड, यूएई, नेपाल सहित अन्य देशों के सहयोगी विश्वविद्यालयों के साथ संयुक्त योग कार्यक्रम एवं संवाद सत्र भी आयोजित करेगा। इससे योग के वैश्विक संदेश को और अधिक सशक्त बनाने के साथ भारतीय ज्ञान परंपरा एवं सांस्कृतिक विरासत को अंतरराष्ट्रीय मंच पर नई पहचान मिलेगी।
विश्वविद्यालय से संबद्ध गोरखपुर, देवरिया एवं कुशीनगर जनपदों के महाविद्यालयों में भी योग आधारित विविध गतिविधियाँ, कार्यशालाएँ एवं जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिससे युवाओं एवं विद्यार्थियों में स्वस्थ जीवनशैली के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित किया जा सके।
कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने कहा कि वर्तमान समय में योग केवल व्यायाम का माध्यम नहीं, बल्कि तनावमुक्त, संतुलित एवं स्वस्थ जीवन का प्रभावी मार्ग बन चुका है। विश्वविद्यालय का उद्देश्य योग को जन-आंदोलन के रूप में विकसित करना तथा युवाओं को शारीरिक एवं मानसिक रूप से सशक्त बनाना है।
उन्होंने बताया कि अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का मुख्य समारोह 21 जून को विश्वविद्यालय परिसर स्थित खेल मैदान में भव्य रूप से आयोजित किया जाएगा। इस आयोजन में विश्वविद्यालय परिवार के साथ-साथ समाज के विभिन्न वर्गों की व्यापक सहभागिता सुनिश्चित करने की तैयारी की जा रही है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने सभी शिक्षकों, कर्मचारियों, विद्यार्थियों एवं आमजन से योग कार्यक्रमों में सक्रिय सहभागिता की अपील की है।

यूपी टैलेंट हंट 2026 में विद्यार्थियों का दिखा अद्भुत उत्साह

जिले के 100 से अधिक विद्यालयों के हजारों छात्र-छात्राओं ने लिया हिस्सा

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। जिले में आयोजित जिला स्तरीय प्रतियोगी परीक्षा “यूपी टैलेंट हंट 2026” में विद्यार्थियों का अभूतपूर्व उत्साह देखने को मिला। शिक्षा उड़ान फाउंडेशन द्वारा आयोजित यह प्रतियोगी परीक्षा बुधवार को वी.एन. अकादमी परिसर में शांतिपूर्ण और सफलतापूर्वक संपन्न हुई।

प्रतियोगी परीक्षा में जनपद के 100 से अधिक विद्यालयों के हजारों छात्र-छात्राओं ने प्रतिभाग करते हुए अपनी प्रतिभा, शैक्षणिक क्षमता और प्रतिस्पर्धात्मक कौशल का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। परीक्षा केंद्र पर सुबह से ही विद्यार्थियों और अभिभावकों की भारी भीड़ देखने को मिली। पूरे परिसर में उत्साह, अनुशासन और सकारात्मक माहौल बना रहा।

परीक्षा को निष्पक्ष और सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए आयोजकों द्वारा विशेष व्यवस्थाएं की गई थीं। सुरक्षा, बैठने की व्यवस्था, पेयजल और अन्य आवश्यक सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा गया। संस्था के स्वयंसेवकों और सदस्यों ने विद्यार्थियों को आवश्यक मार्गदर्शन प्रदान करते हुए परीक्षा प्रक्रिया को सुचारु रूप से संचालित किया।

प्रतिभाग करने वाले विद्यार्थियों ने पूरे आत्मविश्वास और उत्साह के साथ परीक्षा दी। कई विद्यार्थियों ने इसे अपने भविष्य को नई दिशा देने वाला महत्वपूर्ण अवसर बताया। वहीं अभिभावकों ने भी इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बच्चों को अपनी प्रतिभा निखारने का बेहतर मंच प्रदान करते हैं।

इस अवसर पर शिक्षा उड़ान फाउंडेशन के पदाधिकारियों ने बताया कि संस्था का उद्देश्य आर्थिक और सामाजिक रूप से हर वर्ग के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को आगे बढ़ने का अवसर देना है, ताकि वे शिक्षा के माध्यम से अपने सपनों को साकार कर सकें। उन्होंने कहा कि “यूपी टैलेंट हंट 2026” केवल एक परीक्षा नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के आत्मविश्वास, ज्ञान और उज्ज्वल भविष्य निर्माण का महत्वपूर्ण अभियान है।

संस्था की ओर से जानकारी दी गई कि परीक्षा परिणाम जल्द घोषित किए जाएंगे तथा उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित और पुरस्कृत किया जाएगा।

कार्यक्रम को सफल बनाने में कृष्ण मोहन गुप्ता, आदर्श आनंद, दिनेश आनंद, निदेशक Ashwini Patel, अध्यक्ष Dr. Arjun Patel तथा विद्यालय प्रबंधन का विशेष योगदान रहा।

दौलत की अंधी दौड़ में टूटते रिश्ते, बदलती जीवनशैली से बिखर रहा पारिवारिक ताना-बाना

मोबाइल, पैसा और दिखावे की दुनिया ने कम किया अपनों के बीच संवाद

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। आधुनिक जीवनशैली और भौतिक सुख-सुविधाओं की अंधी दौड़ ने समाज के पारिवारिक ढांचे को गहराई से प्रभावित करना शुरू कर दिया है। बदलते सामाजिक परिवेश में रिश्तों की गर्माहट कम होती जा रही है और लोग अपने ही परिवार से भावनात्मक रूप से दूर होते नजर आ रहे हैं। कभी संयुक्त परिवार, प्रेम, त्याग और अपनापन भारतीय समाज की पहचान हुआ करते थे, लेकिन अब मोबाइल, पैसा और दिखावे की संस्कृति ने रिश्तों की नींव को कमजोर कर दिया है।

आज का व्यक्ति सुबह से रात तक धन कमाने, बेहतर जीवनशैली दिखाने और सामाजिक प्रतिस्पर्धा में आगे निकलने की दौड़ में व्यस्त है। आर्थिक सफलता को ही जीवन का सबसे बड़ा लक्ष्य मान लिया गया है। इसका परिणाम यह हो रहा है कि परिवार के सदस्यों के बीच संवाद लगातार कम होता जा रहा है। लोग एक ही घर में रहते हुए भी मोबाइल और सोशल मीडिया की दुनिया में खोए हुए हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक जीवनशैली का सबसे अधिक प्रभाव पारिवारिक रिश्तों पर पड़ा है। वृद्ध माता-पिता अकेलेपन का जीवन जीने को मजबूर हैं। नौकरी और व्यवसाय के कारण युवा महानगरों की ओर पलायन कर रहे हैं, जिससे गांव और घर खाली होते जा रहे हैं। वहीं भाई-भाई के बीच जमीन और संपत्ति को लेकर विवाद बढ़ते जा रहे हैं। पति-पत्नी के रिश्तों में भी विश्वास, धैर्य और संवाद की कमी देखने को मिल रही है।

बढ़ती महत्वाकांक्षा और दिखावे की संस्कृति मानसिक तनाव को भी बढ़ा रही है। सोशल मीडिया पर खुशहाल और सफल दिखने की होड़ ने लोगों को वास्तविक जीवन की सच्ची खुशियों से दूर कर दिया है। लोग परिवार के साथ समय बिताने की बजाय मोबाइल स्क्रीन पर अधिक समय व्यतीत कर रहे हैं।
पहले ग्रामीण क्षेत्रों में संयुक्त परिवारों की मजबूत परंपरा थी। गांवों में लोग एक-दूसरे के सुख-दुख में साथ खड़े रहते थे और बुजुर्गों का सम्मान समाज को जोड़े रखता था। लेकिन अब ग्रामीण समाज भी तेजी से बदल रहा है। छोटी-छोटी बातों पर परिवार टूट रहे हैं और संपत्ति विवाद अदालतों तक पहुंच रहे हैं।

समाजशास्त्रियों का कहना है कि आर्थिक विकास जरूरी है, लेकिन यदि विकास के साथ रिश्तों की संवेदनाएं समाप्त हो जाएं तो समाज में असंतुलन पैदा होना स्वाभाविक है। धन जीवन की जरूरतें पूरी कर सकता है, लेकिन सच्चा अपनापन, भावनात्मक सहारा और पारिवारिक सुख नहीं खरीद सकता।

विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की है कि वे व्यस्त जीवन से थोड़ा समय परिवार और समाज के लिए भी निकालें। बच्चों के साथ समय बिताना, बुजुर्गों का सम्मान करना और रिश्तों में संवाद बनाए रखना आज की सबसे बड़ी जरूरत बन गया है।

बदलते दौर में यह आवश्यक हो गया है कि लोग आधुनिकता के साथ-साथ पारिवारिक मूल्यों को भी महत्व दें। रिश्तों में प्रेम, विश्वास और संवेदनाएं ही समाज को मजबूत बनाती हैं। जीवन की अंतिम यात्रा में धन नहीं, बल्कि अपनों का साथ ही सबसे बड़ा सहारा होता है।

जल संरक्षण को जनआंदोलन बनाने की अपील

एडीएम सिटी गजेंद्र कुमार का संदेश

सरकारी बैठकों में पानी की बर्बादी पर जताई चिंता

गोरखपुर(राष्ट्र की परम्परा)
बढ़ते जल संकट और लगातार गिरते भूजल स्तर को लेकर प्रशासन अब और अधिक सतर्क नजर आ रहा है। इसी क्रम में एडीएम सिटी गजेंद्र कुमार ने जनपदवासियों, अधिकारियों एवं कर्मचारियों से जल संरक्षण को लेकर एक विस्तृत अपील जारी की है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में जल का महत्व पहले से कहीं अधिक बढ़ गया है और इसकी एक-एक बूंद को बचाना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
एडीएम सिटी ने अपने संदेश में विशेष रूप से शासकीय बैठकों, समीक्षा सम्मेलनों और विभिन्न सरकारी कार्यक्रमों में पानी के उपयोग की स्थिति पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि अक्सर यह देखा जाता है कि अधिकारियों और कर्मचारियों को जो छोटी या मध्यम आकार की पानी की बोतलें उपलब्ध कराई जाती हैं, उनका पूरा उपयोग नहीं हो पाता। कई बार बोतलें आधी या उससे भी कम उपयोग के बाद छोड़ दी जाती हैं और शेष पानी व्यर्थ हो जाता है। यह प्रवृत्ति न केवल जल की बर्बादी है, बल्कि संसाधनों के प्रति लापरवाही को भी दर्शाती है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि पानी की बर्बादी का प्रभाव केवल उतने ही पानी तक सीमित नहीं होता, जितना हम देख पाते हैं। आरओ (RO) प्रणाली का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि एक लीटर शुद्ध पानी प्राप्त करने के लिए लगभग तीन लीटर पानी अतिरिक्त रूप से नष्ट हो जाता है। ऐसे में यदि हम एक छोटी सी बोतल का भी पूरा उपयोग नहीं करते, तो वास्तव में उससे कई गुना अधिक पानी की बर्बादी होती है। यह स्थिति तब और गंभीर हो जाती है, जब इसे बड़े पैमाने पर देखा जाए, जहां हर दिन सैकड़ों बैठकों और कार्यक्रमों में हजारों बोतलें उपयोग में लाई जाती हैं।
एडीएम सिटी गजेंद्र कुमार ने कहा कि जल संरक्षण को केवल एक औपचारिक विषय न मानते हुए इसे अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाना होगा। उन्होंने प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री द्वारा समय-समय पर किए गए जल संरक्षण के आह्वान का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार स्तर पर इस दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन जनसहभागिता के बिना इन प्रयासों को पूर्ण सफलता नहीं मिल सकती।
उन्होंने अधिकारियों और कर्मचारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि जब भी किसी बैठक या कार्यक्रम में पानी की बोतल उपलब्ध कराई जाए, तो उसका पूर्ण उपयोग सुनिश्चित किया जाए। यदि किसी कारणवश बैठक के दौरान पूरा पानी नहीं पीया जा सके, तो उस बोतल को अपने साथ ले जाकर बाद में उपयोग करना चाहिए, ताकि पानी व्यर्थ न जाए।
इसके साथ ही उन्होंने संबंधित विभागों को यह भी निर्देश दिया कि जहां संभव हो, वहां बोतलबंद पानी के स्थान पर वैकल्पिक व्यवस्था अपनाई जाए। जैसे कि गिलास और फिल्टर पानी की व्यवस्था की जाए, जिससे प्लास्टिक बोतलों का उपयोग भी कम होगा और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि यह कदम न केवल जल संरक्षण में सहायक होगा, बल्कि प्लास्टिक कचरे को कम करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
एडीएम सिटी ने कार्यालयों में जागरूकता बढ़ाने पर विशेष जोर देते हुए कहा कि सभी सरकारी कार्यालयों में जल संरक्षण से संबंधित संदेशों वाले सूचना पट्ट लगाए जाएं। इन पट्टों पर “जल ही जीवन है, इसका सम्मान करें”, “हर बूंद की कीमत समझें” जैसे प्रेरणादायक संदेश अंकित किए जाएं, ताकि कर्मचारियों और आमजन को लगातार इस विषय की याद दिलाई जा सके।
उन्होंने यह भी कहा कि जल संरक्षण केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। घरों, दफ्तरों और सार्वजनिक स्थानों पर पानी का उपयोग सोच-समझकर करना चाहिए। छोटी-छोटी आदतें, जैसे कि नल को खुला न छोड़ना, जरूरत के अनुसार ही पानी का उपयोग करना और वर्षा जल संचयन को अपनाना, बड़े बदलाव ला सकती हैं।
गजेंद्र कुमार ने यह भी रेखांकित किया कि यदि अभी से ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले समय में जल संकट और गंभीर रूप ले सकता है। उन्होंने कहा कि कई क्षेत्रों में पहले से ही पानी की कमी देखी जा रही है और भविष्य में यह समस्या और बढ़ सकती है। इसलिए यह जरूरी है कि हम अभी से जागरूक हों और जल संरक्षण को प्राथमिकता दें।
एडीएम सिटी ने सभी जनपदवासियों से भावनात्मक अपील करते हुए कहा कि जल केवल एक संसाधन नहीं, बल्कि जीवन का आधार है। इसे बचाना हम सभी की नैतिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि यदि हर व्यक्ति अपने स्तर पर थोड़ा-सा प्रयास करे, तो मिलकर एक बड़ा परिवर्तन लाया जा सकता है। जल संरक्षण की दिशा में उठाया गया हर छोटा कदम आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित करेगा।

आधुनिक भारत के निर्माता थे पंडित जवाहर लाल नेहरू – डॉ धर्मेन्द्र पांडेय

पंडित नेहरु के प्रतिमा पर माल्यार्पण कर कांग्रेसियों ने मनाई पुण्यतिथि

सलेमपुर देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)
देश के प्रथम प्रधानमंत्री आजादी के नायक पंडित जवाहर लाल नेहरू की 62 वीं पुण्य तिथि कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने नगर स्थित उनके प्रतिमा पर माल्यार्पण कर कार्यालय पर गोष्ठी का आयोजन कर मनाया। इस दौरान सम्बोधित करते हुए जिला उपाध्यक्ष डॉ धर्मेन्द्र पांडेय ने कहा कि पंडित नेहरू आधुनिक भारत के निर्माता थे,उन्होंने देश में पंचवर्षीय योजना लागू कर देश के विकास की बुनियाद रखी। आईआईटी, एम्स का निर्माण कराया। गुटनिरपेक्ष आंदोलन के सूत्रधार के रूप में पूरी दुनिया में भारत का मान-सम्मान बढ़ाया। ब्लॉक अध्यक्ष मनीष रजक ने कहा कि नेहरू जी का विजन आज भी उतना ही प्रासंगिक है।उनका सपना था कि भारत विज्ञान और तकनीक में आगे बढ़े और हर बच्चा शिक्षित हो। युवा कांग्रेस के सोशल मीडिया के प्रदेश संयोजक सत्यम पांडेय ने कहा कि वह युवाओं के प्रेरणा श्रोत थे उनका सम्पूर्ण जीवन देश की सेवा के लिए समर्पित था।कांग्रेस के पूर्व जिला सचिव शीत कुमार मिश्र ने कहा कि पंडित नेहरू के सिद्धांतों पर चलना ही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि है। कार्यक्रम को रामविलास तिवारी, लालसाहब यादव, चुन्नू श्रीवास्तव, दिनेश गुप्ता, गंगासागर मिश्र, नकछेद प्रसाद, अशोक कुमार,मोहन प्रसाद,राकेश कुमार, सत्यवान पांडेय आदि ने सम्बोधित किया।

नशा मुक्ति रैली मे एनसीसी कैडेट्स ने दिया जागरूकता का संदेश

मईल/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)
भरोसा घर मिशन क्रिश्चियन इंटर कॉलेज के प्रांगण में चल रहे शिविर संख्या-154 के आठवें दिन की शुरुआत उत्साह और जनजागरूकता के माहौल के साथ हुई। दिनांक 27 मई 2026 को आयोजित कार्यक्रम में नशा मुक्ति अभियान के अंतर्गत भव्य रैली निकाली गई। शिविर के कमान अधिकारी कर्नल सुनील जेठैलिया ने हरी झंडी दिखाकर रैली को रवाना किया।
रैली में एसडी, एसडब्ल्यू, जेडी एवं जेडब्ल्यू कैडेट्स ने पूरे जोश और उत्साह के साथ भाग लिया। कैडेट्स ने नशा मुक्ति से जुड़े स्लोगन और प्रेरणादायक नारों के माध्यम से लोगों को जागरूक किया। रैली के दौरान “नशा छोड़ो, जीवन जोड़ो” और “स्वस्थ युवा, सशक्त भारत” जैसे नारों से पूरा परिसर गूंज उठा।
इसके उपरांत कैडेट्स के लिए आपातकालीन प्राथमिक चिकित्सा एवं तनाव प्रबंधन विषय पर विशेष कक्षाओं का आयोजन किया गया। लेफ्टिनेंट दीपशिका मौर्य, जेसीआई अर्चना चौहान एवं श्वेता यादव ने प्रशिक्षण देते हुए आपात स्थितियों में प्राथमिक उपचार और मानसिक तनाव से बचाव के महत्वपूर्ण उपायों की जानकारी दी।
हवलदार पूरण द्वारा 5.56 एमएम हथियार पर प्रशिक्षण सत्र आयोजित किया गया, जिसमें कैडेट्स को हथियार खोलने-जोड़ने, फायरिंग की प्रक्रिया, एम्युनिशन भरने और खाली करने की तकनीकी जानकारी दी गई। प्रशिक्षण के दौरान कैडेट्स ने बड़े ध्यान और अनुशासन के साथ अभ्यास किया।
वहीं पीई शान सिंह ने “फाइंडिंग योर ओन पोजीशन ऑन मैप एंड ग्राउंड” विषय पर क्लास ली। इस दौरान जेसीओ कमलजीत सिंह ने प्रैक्टिकल के माध्यम से कैडेट्स को मैप रीडिंग और ग्राउंड पोजीशन पहचानने की बारीकियां सिखाईं।
इसी क्रम में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने भी शिविर का निरीक्षण किया तथा कैडेट्स को हेल्थ एंड हाइजीन विषय पर महत्वपूर्ण जानकारी देते हुए स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया।

अवैध खनन पर प्रशासन का चला डंडा क्षेत्र में हड़कंप ट्रैक्टर-ट्राली सीज

शाहजहांपुर(राष्ट्र की परम्परा)
थाना गढ़िया रंगीन क्षेत्र के मड़िहान बिरिया कला गांव में लंबे समय से चल रहे अवैध खनन पर प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। गुप्त सूचना के आधार पर हुई इस छापेमारी से खनन माफियाओं में हड़कंप मच गया।
अधिकारियों को देख भागे माफिया
सूचना मिलते ही एसडीएम जलालाबाद और तहसीलदार भारी टीम के साथ मौके पर पहुंचे, प्रशासनिक अमले को अचानक सामने देख खनन माफियाओं में अफरा-तफरी मच गई। चालक अपने-अपने ट्रैक्टर-ट्रालियां और मशीनें छोड़कर खेतों की तरफ भागने लगे। इस दौरान कई वाहन चालकों ने गाड़ियां भगाने का प्रयास भी किया, लेकिन पुलिस और प्रशासन की मुस्तैद व घेराबंदी के कारण वे नाकाम रहे। टीम ने मौके से एक ट्रैक्टर-ट्राली को रंगे हाथ दबोच लिया।

होगी सख्त विधिक कार्रवाई

कार्रवाई के दौरान थाना गढ़िया रंगीन प्रभारी हरकेश सिंह और उपनिरीक्षक विवेक सिंह पुलिस बल के साथ मुस्तैद रहे। पुलिस ने जब्त की गई ट्रैक्टर-ट्राली को कब्जे में लेकर सीज कर दिया है और संबंधित धाराओं में विधिक कार्रवाई शुरू कर दी है।

थाना प्रभारी का कड़ा संदेश

क्षेत्र में किसी भी कीमत पर अवैध खनन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पर्यावरण और सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाने वाले माफियाओं के खिलाफ यह अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा।

परसिया भगवती में भागवत कथा का आयोजन:महराज ने कृष्ण की मृद भक्षण लीला का किया वर्णन

सलेमपुर/देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)मगहरा के परसिया भगवती में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन परमपूज्य ब्रजेश मणि त्रिपाठी ने भगवान श्रीकृष्ण के बाल चरित्र का मनोहारी वर्णन किया। उन्होंने बताया कि जब भी भगवान धरती पर अवतरित होते हैं, प्रकृति स्वयं अद्भुत रूप से सज जाती है। नदियां, आकाश, अग्नि, भूमि और वायु सभी निर्मल हो जाते हैं, जिससे ब्रजवासियों को परम आनंद की अनुभूति होती है।

श्री ब्रजेश मणि ने बताया कि भगवान के जन्म के बाद छह दिनों तक उत्सव मनाया गया। इसके उपरांत पूतना, शकटासुर और छह महीने की अवस्था में तृणावर्त जैसे विघ्नों का उद्धार कर भगवान श्रीकृष्ण ने यह संदेश दिया कि दिव्य शक्ति अपने आरंभिक जीवन से ही धर्म की स्थापना में संलग्न हो जाती है।
इस अवसर पर उन्होंने श्रीकृष्ण की प्रसिद्ध ‘मृद भक्षण लीला’ का भावपूर्ण वर्णन किया। कथा के अनुसार, एक दिन बालकृष्ण अपने सखाओं और बलराम के साथ खेलते हुए मिट्टी खा लेते हैं। सखाओं की शिकायत पर माता यशोदा उन्हें डांटती हैं। कृष्ण मासूमियत से इनकार करते हुए अपना मुख खोलने को कहते हैं।

जब माता यशोदा ने उनका मुख देखा, तो उसमें संपूर्ण ब्रह्मांड—सप्त द्वीप, सूर्य, चंद्रमा, नक्षत्र, आकाश और स्वयं को भी देखकर स्तब्ध रह गईं। इस अद्भुत दृश्य से यशोदा मैया भयभीत हो गईं, लेकिन भगवान ने अपनी वैष्णवी माया से उन्हें पुनः सब कुछ भुला दिया, जिससे वे उन्हें अपने पुत्र रूप में ही स्नेह करती रहीं।

कथावाचक परमपूज्य ब्रजेश मणि ने इस लीला के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह प्रसंग दर्शाता है कि परमात्मा, जो पूरे ब्रह्मांड के स्वामी हैं, वे भक्तों के प्रेम के वशीभूत होकर एक साधारण बालक का रूप धारण कर लेते हैं।

उन्होंने जोर दिया कि मिट्टी खाने जैसी साधारण घटना के भीतर ब्रह्मांड का दर्शन यह संदेश देता है कि सृष्टि का कण-कण ईश्वर का ही स्वरूप है। अंत में, आचार्य त्रिपाठी ने कहा कि सच्ची भक्ति में इतनी शक्ति होती है कि स्वयं ब्रह्मांड नायक भी भक्त के प्रेम में बंध जाते हैं।
इस अवसर पर यजमान इंद्रावती देवी, गौरीशंकर पाण्डेय, माधुरी देवी, रविप्रताप पाण्डेय,राजेश दूबे,चंदन पाण्डेय, राकेश सिंह, ग्राम प्रधान बसंत कुमार आदि मौजूद रहे।

अवैध खनन पर प्रशासन का बड़ा प्रहार: दो दिनों में 71 वाहन सीज,माफियाओं में हड़कं

महराजगंज(राष्ट्र की परम्परा)। जनपद में अवैध खनन और अवैध परिवहन के खिलाफ पुलिस- प्रशासन ने अब तक की बड़ी संयुक्त कार्रवाई करते हुए दो दिनों में 71 वाहनों को सीज कर दिया। इस सख्त कार्रवाई से अवैध खनन में संलिप्त माफियाओं और परिवहनकर्ताओं में हड़कंप मच गया है।
पुलिस अधीक्षक शक्ति मोहन अवस्थी के निर्देशन में अपराध नियंत्रण एवं अवैध गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश लगाने हेतु चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत पुलिस और प्रशासन की संयुक्त टीम ने जनपद के विभिन्न थाना क्षेत्रों में सघन छापेमारी अभियान चलाया।
अभियान के दौरान नदी तटों, खनन प्रभावित क्षेत्रों, निर्माणाधीन स्थलों एवं संवेदनशील इलाकों में विशेष निगरानी रखी गई। संयुक्त टीम ने संदिग्ध वाहनों की गहन जांच करते हुए अवैध रूप से मिट्टी और बालू खनन तथा परिवहन में लगे वाहनों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की।
26 मई 2026 को हुई कार्रवाई में 13 ट्रैक्टर- ट्रॉली, 7 लोडर, 2 जेसीबी मशीन और 2 डंपर 27 सीज किए गए। वहीं 27 मई 2026 को अभियान और तेज करते हुए 32 ट्रैक्टर-ट्रॉली, 05 लोडर, 2 जेसीबी मशीन, 05 डंपर,01 ट्रक, 01 पिकअप वाहन तथा 01 दोपहिया वाहन को सीज किया गया।
दो दिनों की संयुक्त कार्रवाई में कुल 45 ट्रैक्टर-ट्रॉली, 12 लोडर, 4 जेसीबी मशीन, 7 डम्पर, 1 ट्रक, 1 पिकअप और 1 दोपहिया वाहन सहित कुल 71 वाहनों पर सीज की कार्रवाई की गई।
जांच के दौरान वाहन चालकों एवं स्वामियों से खनन अनुमति पत्र, परिवहन प्रपत्र और अन्य आवश्यक दस्तावेज मांगे गए, लेकिन संतोषजनक अभिलेख प्रस्तुत न किए जाने पर अवैध खनन और परिवहन की पुष्टि हुई। इसके बाद सभी वाहनों के विरुद्ध नियमानुसार सीज की कार्रवाई करते हुए अग्रिम विधिक प्रक्रिया शुरू कर दी गई।
अधिकारियों ने अभियान के दौरान कई स्थानों पर विशेष निगरानी रखते हुए अवैध खनन में संलिप्त लोगों की गतिविधियों पर पैनी नजर बनाए रखी। प्रशासन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि जनपद में अवैध खनन और अवैध परिवहन किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों के खिलाफ लगातार कठोर कार्रवाई जारी रहेगी।
पुलिस अधीक्षक शक्ति मोहन अवस्थी ने कहा कि अवैध खनन से जहां सरकार को भारी राजस्व हानि होती है, वहीं पर्यावरणीय संतुलन और कानून व्यवस्था पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इसी को देखते हुए जनपद में लगातार विशेष अभियान चलाकर ऐसे तत्वों पर शिकंजा कसा जा रहा है।
उन्होंने सभी थाना प्रभारियों को निर्देशित किया है कि अपने- अपने क्षेत्रों में सतत निगरानी बनाए रखें और अवैध खनन तथा अवैध परिवहन में शामिल लोगों के विरुद्ध कठोर एवं प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करें।

तुलसी महिमा एवं एकादशी व्रत की कथा से गूंज उठा कालीचरण घाट

भागलपुर/देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)
सरयू नदी के पावन तट स्थित कालीचरण घाट पर गुरुवार को आस्था और श्रद्धा का अद्भुत संगम देखने को मिला। हजारों श्रद्धालुओं ने प्रातःकाल सरयू में स्नान कर पूजा-अर्चना की तथा तुलसी पूजन, एकादशी व्रत और सनातन परंपराओं की महिमा का श्रवण किया। धार्मिक आयोजन में कथावाचकों और विद्वानों ने तुलसी माता की महत्ता, एकादशी व्रत तथा भगवान विष्णु और वृंदा की पौराणिक कथा का विस्तृत वर्णन किया।
कथावाचकों ने बताया कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार चतुर्दशी और एकादशी तिथि पर तुलसी जी को जल अर्पित नहीं किया जाता, क्योंकि इन दिनों तुलसी माता स्वयं व्रत रखती हैं। वहीं बृहस्पतिवार को तुलसी पूजन और जल अर्पण का विशेष महत्व बताया गया। प्रदोष काल में भी तुलसी को जल न चढ़ाने की परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा गया कि तुलसी को मोक्षदायिनी माना गया है और मृत्यु के समय व्यक्ति को तुलसी दल एवं गंगाजल देने की परंपरा इसी आस्था से जुड़ी हुई है।
धार्मिक प्रवचन के दौरान जालंधर और उसकी पत्नी वृंदा की कथा का भी उल्लेख हुआ। बताया गया कि दैत्यराज जालंधर की पत्नी वृंदा अत्यंत पतिव्रता थीं, जिनके तप और सतीत्व के प्रभाव से देवताओं के लिए जालंधर को पराजित करना असंभव हो गया था। तब भगवान विष्णु ने जालंधर का रूप धारण कर वृंदा की तपस्या भंग की, जिससे उसका पतिव्रत टूट गया और युद्ध में जालंधर का अंत संभव हो सका। इस घटना से आहत वृंदा ने भगवान विष्णु को श्राप दिया, जिसे उन्होंने सहर्ष स्वीकार किया। मान्यता है कि इसी श्राप के फलस्वरूप भगवान शालिग्राम रूप में पूजित हुए।
कथा में आगे बताया गया कि भगवान विष्णु ने वृंदा को वरदान दिया कि वे मृत्यु लोक में तुलसी के रूप में पूजित होंगी और समस्त प्राणियों के कष्टों का निवारण करेंगी। तभी से तुलसी को सनातन धर्म में विशेष स्थान प्राप्त है। वक्ताओं ने कहा कि तुलसी केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि औषधीय गुणों से भी भरपूर है और अनेक रोगों में लाभकारी मानी जाती है।
रामायण प्रसंग का उल्लेख करते हुए कथावाचकों ने बताया कि जब हनुमान जी लंका पहुंचे थे, तब उन्होंने विभीषण के घर पर तुलसी का पौधा और “राम-राम” अंकित घर देखा था। यह देखकर हनुमान जी अत्यंत प्रसन्न हुए थे। इस प्रसंग को सुनकर श्रद्धालुओं ने जय श्रीराम और हरि नाम के उद्घोष लगाए।
धार्मिक सभा में यह भी बताया गया कि बिना तुलसी और गंगाजल के कोई भी शुभ कार्य पूर्ण नहीं माना जाता। जन्म से लेकर अंतिम संस्कार तक सनातन परंपराओं में तुलसी और गंगाजल का विशेष महत्व है। अमृत बेला और अंतिम समय में भी श्रद्धालुओं को तुलसी दल और गंगाजल देने की परंपरा मोक्ष प्राप्ति की भावना से जुड़ी मानी जाती है।

घर-घर पहुंच रही जनगणना टीम, 20 जून तक पूरी होगी मकानों की गणना

जनगणना कार्य में तेजी, प्रगणकों और सुपरवाइजरों को दिए गए आवश्यक निर्देश

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व)/जिला जनगणना अधिकारी सत्य प्रकाश ने बताया कि भारत की जनगणना 2027 के अंतर्गत मकानों की गणना का कार्य 22 मई 2026 से 20 जून 2026 तक कराया जा रहा है। जनपद के सभी मकानों की गणना सुनिश्चित करने के लिए समस्त चार्ज अधिकारियों को निर्देश जारी किए गए हैं।
उन्होंने बताया कि चार्ज अधिकारी अपने-अपने क्षेत्रों में जाकर जनगणना कार्य में लगे प्रगणकों एवं सुपरवाइजरों से संपर्क कर रहे हैं तथा कार्य में आने वाली प्रक्रियागत समस्याओं का निराकरण कर प्रगति सुनिश्चित कर रहे हैं। आमजन से भी जनगणना कार्य में सहयोग करने की अपील की गई है।
इसी क्रम में चार्ज ऑफिसर एवं तहसीलदार खलीलाबाद आनंद ओझा, नगर पंचायत बेलहर के अधिशाषी अधिकारी अमित सिंह, तहसीलदार धनघटा रामजी, नगर पंचायत मेंहदावल के अधिशाषी अधिकारी तथा बेसिक शिक्षा अधिकारी अमित कुमार सिंह द्वारा विभिन्न क्षेत्रों का भ्रमण कर जनगणना कार्य का निरीक्षण किया गया। अधिकारियों ने प्रगणकों और क्षेत्रवासियों से संवाद कर जनगणना कार्य में सहयोग का संदेश दिया।
मेहदावल तहसील में एचएलबी 0621 के प्रगणक शिवचंद्र कुमार मौर्य एवं उनके सुपरवाइजर राम अनुज द्वारा अपने पूरे ब्लॉक के 156 जनगणना मकानों की गणना पूर्ण कर नक्शा जमा किया गया। कम समय में किए गए इस कार्य की सराहना की गई।

नई दिल्ली में चार लोकतांत्रिक शक्तियों का मंथन: क्या चीन की चुनौती का जवाब बन चुका है क्वॉड?

दिल्ली में क्वॉड का रणनीतिक मंथन: क्या अब बदल जाएगी वैश्विक शक्ति व्यवस्था?



✒️ लेखक : एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी, गोंदिया महाराष्ट्र


नई दिल्ली में 26 मई 2026 को संपन्न हुई क्वॉड विदेश मंत्रियों की बैठक केवल एक औपचारिक कूटनीतिक आयोजन नहीं थी, बल्कि बदलती वैश्विक राजनीति के बीच चार प्रमुख लोकतांत्रिक शक्तियों — भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया — का रणनीतिक मंथन थी।
ऐसे समय में जब पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, ऊर्जा संकट और वैश्विक सप्लाई चेन पर खतरे गहराते जा रहे हैं तथा हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की बढ़ती आक्रामकता अंतरराष्ट्रीय चिंताओं को बढ़ा रही है, तब नई दिल्ली में हुई यह बैठक वैश्विक शक्ति संतुलन की नई दिशा तय करती दिखाई दी।
भारतीय विदेश मंत्री की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो, ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग और जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोटेगी की उपस्थिति ने स्पष्ट संकेत दिया कि क्वॉड अब केवल संवाद मंच नहीं, बल्कि रणनीतिक सहयोग का प्रभावशाली वैश्विक समूह बन चुका है।

इंडो-पैसिफिक बना वैश्विक रणनीति का केंद्र
बैठक में हिंद-प्रशांत क्षेत्र को वैश्विक विकास और स्थिरता का मुख्य इंजन बताया गया। भारत ने स्पष्ट किया कि क्षेत्र में स्वतंत्र, खुला और समावेशी वातावरण बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है।
भारत ने अप्रत्यक्ष रूप से चीन की विस्तारवादी नीतियों और समुद्री आक्रामकता पर चिंता जताते हुए कहा कि किसी भी प्रकार का दबाव या शक्ति प्रदर्शन क्षेत्रीय संतुलन के लिए खतरा बन सकता है।
यह संदेश विशेष रूप से दक्षिण चीन सागर, ताइवान जलडमरूमध्य और हिंद महासागर में बढ़ती सामरिक गतिविधियों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
समुद्री सुरक्षा और फ्रीडम ऑफ नेविगेशन पर जोर
क्वॉड बैठक का सबसे महत्वपूर्ण विषय समुद्री सुरक्षा रहा। हिंद-प्रशांत क्षेत्र विश्व व्यापार का प्रमुख समुद्री मार्ग है, जहां से वैश्विक व्यापार का बड़ा हिस्सा गुजरता है।
बैठक में इस बात पर सहमति बनी कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों का पालन सुनिश्चित किया जाए और किसी भी देश को एकतरफा तरीके से समुद्री नियंत्रण स्थापित करने की अनुमति न मिले।
विशेषज्ञों के अनुसार यह संदेश चीन की समुद्री रणनीति को संतुलित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
सप्लाई चेन और क्रिटिकल मिनरल्स पर बड़ा फोकस
कोविड महामारी, रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया संकट के बाद वैश्विक सप्लाई चेन की कमजोरी सामने आ चुकी है। इसी कारण क्वॉड देशों ने क्रिटिकल मिनरल्स और रेयर अर्थ सप्लाई चेन को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया।
इलेक्ट्रिक वाहन, सेमीकंडक्टर, रक्षा उपकरण और आधुनिक तकनीक में इन खनिजों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। अभी तक इन क्षेत्रों में चीन का बड़ा दबदबा रहा है, लेकिन क्वॉड अब वैकल्पिक आपूर्ति नेटवर्क विकसित करना चाहता है।
भारत और अमेरिका के बीच क्रिटिकल मिनरल्स सप्लाई चेन सहयोग को इस बैठक की महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
तकनीक, साइबर सुरक्षा और एआई सहयोग
बैठक में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), क्वांटम कंप्यूटिंग, सेमीकंडक्टर, साइबर डिफेंस और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर व्यापक चर्चा हुई।
डिजिटल जासूसी, साइबर अपराध और डेटा सुरक्षा जैसे मुद्दों को भविष्य की वैश्विक सुरक्षा से जोड़ते हुए क्वॉड देशों ने सुरक्षित तकनीकी पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने पर सहमति जताई।
यह स्पष्ट संकेत है कि भविष्य के शक्ति संघर्ष केवल सीमाओं तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि डेटा, साइबर स्पेस और डिजिटल नेटवर्क भी रणनीतिक युद्धक्षेत्र बनेंगे।
आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस
बैठक का एक महत्वपूर्ण संदेश आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति को दोहराना रहा।
भारत लंबे समय से सीमा पार आतंकवाद का मुद्दा वैश्विक मंचों पर उठाता रहा है। इस बार भी भारत ने स्पष्ट कहा कि आतंकवाद मानवता और वैश्विक स्थिरता के लिए सबसे बड़ा खतरा है तथा इसके खिलाफ कठोर वैश्विक सहयोग आवश्यक है।
यह संदेश उन ताकतों के लिए भी महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है जो प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से आतंकवाद को समर्थन देती हैं।
मिडिल ईस्ट संकट और ऊर्जा सुरक्षा
ईरान से जुड़े तनाव, अमेरिकी सैन्य गतिविधियों और पश्चिम एशिया के संघर्षों ने वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा को नई चुनौती दी है।
क्वॉड देशों ने चिंता व्यक्त की कि यदि यह संकट और गहराया तो वैश्विक तेल आपूर्ति, समुद्री व्यापार और आर्थिक स्थिरता प्रभावित हो सकती है।
इसी कारण नई दिल्ली बैठक में मिडिल ईस्ट के हालात पर विशेष रणनीतिक चर्चा की गई।
क्यों चीन क्वॉड को “एशियाई नाटो” कहता है?
चीन लंबे समय से क्वॉड को “एशियाई नाटो” कहता रहा है। इसका प्रमुख कारण यह है कि क्वॉड की बढ़ती सक्रियता हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की रणनीतिक महत्वाकांक्षाओं के लिए चुनौती बनती दिखाई दे रही है।
हालांकि क्वॉड देश लगातार यह कहते रहे हैं कि यह किसी सैन्य गठबंधन के रूप में नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक सहयोग मंच के रूप में कार्य कर रहा है, लेकिन वास्तविकता यह है कि चीन की बढ़ती समुद्री और सामरिक गतिविधियों ने इस समूह को और अधिक प्रासंगिक बना दिया है।
भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका
नई दिल्ली में सफल क्वॉड बैठक ने यह स्पष्ट कर दिया कि भारत अब केवल दक्षिण एशिया की शक्ति नहीं, बल्कि वैश्विक रणनीतिक विमर्श का प्रमुख केंद्र बन चुका है।
रूस-यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया संकट और इंडो-पैसिफिक सुरक्षा जैसे जटिल मुद्दों पर भारत ने संतुलित और बहुआयामी कूटनीति का परिचय दिया है।
भारत की सक्रिय भूमिका यह संकेत देती है कि आने वाले समय में विश्व राजनीति अधिक बहुध्रुवीय स्वरूप की ओर बढ़ सकती है, जहां लोकतांत्रिक शक्तियां मिलकर वैश्विक संतुलन बनाए रखने का प्रयास करेंगी।
नई दिल्ली में संपन्न क्वॉड विदेश मंत्रियों की बैठक ने स्पष्ट संकेत दिया है कि विश्व राजनीति एक निर्णायक मोड़ पर खड़ी है।
इंडो-पैसिफिक सुरक्षा, पश्चिम एशिया संकट, ऊर्जा आपूर्ति, साइबर सुरक्षा, क्रिटिकल मिनरल्स और वैश्विक सप्लाई चेन जैसे मुद्दे अब आपस में गहराई से जुड़ चुके हैं।
भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया का यह रणनीतिक सहयोग आने वाले वर्षों में वैश्विक शक्ति संतुलन को नई दिशा दे सकता है।
दिल्ली में हुआ यह मंथन केवल चार देशों की बैठक नहीं, बल्कि बदलती विश्व व्यवस्था की नई पटकथा का संकेत माना जा रहा है।
लेखक – एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी
कर विशेषज्ञ, स्तंभकार, साहित्यकार, अंतरराष्ट्रीय लेखक, चिंतक, कवि एवं संगीत साधक
गोंदिया, महाराष्ट्र