देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)l जनपद में मूक-बधिर बच्चों के जीवन को बेहतर बनाने के उद्देश्य से राज्य सरकार द्वारा कॉक्लियर इम्प्लांट योजना संचालित की जा रही है। जिला दिव्यांगजन सशक्तिकरण अधिकारी प्रियंका चौधरी ने बताया कि इस योजना के तहत 0 से 5 वर्ष आयु वर्ग के ऐसे बच्चों को लाभ दिया जाएगा, जो सुनने और बोलने में असमर्थ हैं।योजना के अंतर्गत श्रवण बाधित बच्चों का कॉक्लियर इम्प्लांट कराया जाता है, जिससे वे सुनने और बोलने में सक्षम हो सकें। इसके लिए प्रति बच्चे लगभग ₹6 लाख तक का अनुदान सरकार द्वारा प्रदान किया जाता है। विभाग द्वारा चयनित चिकित्सालयों में ही यह सुविधा उपलब्ध कराई जाती है, ताकि उपचार की गुणवत्ता सुनिश्चित हो सके।अभिभावकों से अपील की गई है कि वे अपने पात्र बच्चों के लिए निर्धारित समय सीमा के भीतर आवेदन करें। आवेदन के साथ दिव्यांग प्रमाण पत्र, यूडीआईडी कार्ड, आधार कार्ड, पासपोर्ट साइज फोटो, माता-पिता का आय प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र और जाति प्रमाण पत्र जैसे आवश्यक दस्तावेज संलग्न करना अनिवार्य होगा।आवेदन पत्र जिला दिव्यांगजन सशक्तिकरण अधिकारी कार्यालय, विकास भवन, कक्ष संख्या-17 में 25 अप्रैल 2026 तक जमा किए जा सकते हैं। प्राप्त आवेदनों के आधार पर पात्र बच्चों का परीक्षण कराया जाएगा और चयनित बच्चों को योजना का लाभ दिलाया जाएगा।यह योजना न केवल बच्चों के स्वास्थ्य और संचार क्षमता में सुधार लाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है, बल्कि उनके भविष्य को संवारने में भी सहायक सिद्ध होगी।
पूर्व सैनिक ने पुलिस अधीक्षक से लगाई गुहार
बरहज/देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)l स्थानीय क्षेत्र के पकडी तिवारी गांव निवासी सेवानिवृत सैनिक रामकरन यादव ने पुलिस अधीक्षक देवरिया को पत्रक देकर बेटी की शादी में पुलिस द्वारा किसी प्रकार के व्यवधान न डालने की गुहार लगाई है।
एसपी को दिये गये पत्रक में पूर्व सैनिक ने यह बताया है कि उनके भाई गामा यादव जो दूबौली के ग्राम प्रधान है, उनके व परिवार के साथ किसी भी प्रकार का व्यक्तिगत संबंध नही है, उनकी बेटी की शादी अप्रैल माह मे है। शादी में पुलिस द्वारा किसी भी प्रकार का व्यवधान न किया जाय, वह स्वयं सेना मे हवलदार रहे है, वह हमेशा कानून का पालन करते रहे है। उन्होने बताया कि शादी को लेकर स्थानीय पुलिस द्वारा उन्हे व परिवार को अनावश्यक रूप से परेशान न करने, अनावश्यक पुछताछ न करने की गुहार लगाई है।
संसद में रणनीति बनाम लोकतंत्र: किसकी होगी जीत?
संसद का रण: महिला आरक्षण पर सियासी शतरंज, रूल 66 ने बदली बहस की दिशा

भारत की संसद में 16 से 18 अप्रैल 2026 के विशेष सत्र के दौरान जो घटनाक्रम सामने आया, उसने लोकतांत्रिक प्रक्रिया को एक नए विमर्श के केंद्र में ला खड़ा किया है। यह केवल विधायी कार्यवाही नहीं, बल्कि रणनीति, संवैधानिक व्याख्या और राजनीतिक शक्ति संतुलन का जटिल संगम बन चुका है। केंद्र सरकार द्वारा महिला आरक्षण, परिसीमन और केंद्र शासित प्रदेशों से जुड़े तीन महत्वपूर्ण विधेयकों को एक साथ प्रस्तुत करना और फिर रूल 66 को निलंबित करना इस पूरे घटनाक्रम को असाधारण बना देता है।
नारी शक्ति वंदन अधिनियम के माध्यम से संसद और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रस्ताव लंबे समय से लंबित रहा है। सरकार इसे महिला सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम बता रही है, वहीं विपक्ष इसका समर्थन करते हुए भी इसके साथ जोड़े गए परिसीमन विधेयक पर गंभीर आपत्ति जता रहा है। परिसीमन का मुद्दा विशेष रूप से उत्तर और दक्षिण भारत के बीच प्रतिनिधित्व के संतुलन को लेकर नई बहस छेड़ रहा है।
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लोकसभा की कार्यप्रणाली में रूल 66 एक तकनीकी लेकिन अत्यंत महत्वपूर्ण प्रावधान है, जो यह सुनिश्चित करता है कि यदि कोई विधेयक दूसरे पर निर्भर है, तो दोनों पर अलग-अलग विचार और मतदान हो। लेकिन इस नियम के निलंबन के बाद सरकार ने तीनों विधेयकों को एक साथ पारित कराने का रास्ता खोल दिया है। यही वह बिंदु है जहां से पूरी राजनीतिक शतरंज शुरू होती है।
सरकार की यह रणनीति विपक्ष को एक कठिन स्थिति में डाल देती है। विपक्ष के सामने अब केवल दो विकल्प हैं—या तो तीनों विधेयकों के पक्ष में मतदान करे या तीनों के खिलाफ। यदि वह महिला आरक्षण का समर्थन करता है, तो परिसीमन भी स्वतः पारित हो जाएगा, और यदि परिसीमन का विरोध करता है, तो उसे महिला आरक्षण के खिलाफ खड़ा होना पड़ेगा। यही कारण है कि इसे “आगे कुआं, पीछे खाई” की स्थिति कहा जा रहा है।
संख्या बल के लिहाज से भी यह मामला रोचक है। संविधान संशोधन के लिए दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होती है, जबकि सरकार के पास पूर्ण संख्या नहीं है। ऐसे में रणनीति, समय प्रबंधन और विपक्ष की एकजुटता या बिखराव इस पूरे खेल में निर्णायक भूमिका निभा रहे हैं।
इस बीच अधिसूचना को लेकर भी विवाद गहरा गया है। 2023 के संविधान संशोधन को लागू करने की अधिसूचना ऐसे समय जारी की गई, जब उसी कानून में संशोधन पर बहस चल रही थी। विपक्ष ने इसे प्रक्रिया के विपरीत बताते हुए सरकार पर जल्दबाजी और नियमों के दुरुपयोग का आरोप लगाया है।
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संसद में बहस के दौरान तृणमूल कांग्रेस के सांसद कल्याण बनर्जी का “चैरिटी बिगिन्स एट होम” वाला बयान सियासी तापमान को और बढ़ा गया। उन्होंने सत्ताधारी दल से मांग की कि पहले अपने संगठन और सरकार में महिलाओं को पर्याप्त प्रतिनिधित्व दें, यहां तक कि प्रधानमंत्री पद को भी रोटेशन के आधार पर महिलाओं को सौंपने का सुझाव दिया। इस बयान ने सदन में तीखी प्रतिक्रिया और हंगामे को जन्म दिया।
परिसीमन का मुद्दा भी इस पूरे घटनाक्रम का संवेदनशील पहलू है। 1971 की जनगणना के आधार पर सीटों का निर्धारण लंबे समय से स्थगित रहा है। अब जब इसे फिर से उठाया गया है, तो दक्षिण भारत के राज्यों को आशंका है कि जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन के बावजूद उनकी राजनीतिक हिस्सेदारी घट सकती है। इससे क्षेत्रीय असंतुलन की नई बहस शुरू हो गई है।
पूरे घटनाक्रम ने एक महत्वपूर्ण प्रश्न खड़ा कर दिया है—क्या संसदीय नियमों का इस प्रकार उपयोग लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप है? सरकार इसे सुधारों को गति देने का प्रयास बता रही है, जबकि विपक्ष इसे बहस को सीमित करने और प्रक्रिया को कमजोर करने का प्रयास मानता है।
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वैश्विक स्तर पर भी इस घटनाक्रम पर नजरें टिकी हुई हैं। भारत, जिसे दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र माना जाता है, उसकी संसद में होने वाली हर बड़ी घटना अंतरराष्ट्रीय विमर्श का हिस्सा बनती है। यह स्थिति भारत की लोकतांत्रिक छवि को या तो मजबूत कर सकती है या सवालों के घेरे में ला सकती है।
अंततः यह स्पष्ट है कि संसद में चल रहा यह संघर्ष केवल तीन विधेयकों तक सीमित नहीं है। यह भारतीय लोकतंत्र की कार्यप्रणाली, संवैधानिक मर्यादाओं और राजनीतिक रणनीति की परीक्षा है। रूल 66 का निलंबन, संयुक्त मतदान और अधिसूचना का समय—ये सभी कदम एक बड़े सियासी खेल का हिस्सा हैं, जिसके परिणाम दूरगामी होंगे।
— एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी, गोंदिया (महाराष्ट्र)
रात के अंधेरे में लूट खनन माफियाओ का बोलबाला
राजस्व और जन सुरक्षा दोनों पर गहरा रहा है संकट
भागलपुर/देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)
सरयू नदी के किनारों पर चल रहा खनन अब केवल पर्यावरण या स्थानीय समस्या नहीं रह गया है, बल्कि यह एक गहरी प्रशासनिक विफलता और संभावित मिलीभगत का संकेत देता है। एक ओर बाढ़ से बचाव के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर नदी किनारे पत्थर डाले जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर रात के अंधेरे में अवैध खनन उसी सुरक्षा व्यवस्था को खोखला कर रहा है। जबकि आम जनता के इन अमूल्य धरोहर को
बेख़ौफ़ माफियाओं द्वारा चंद रुपयों के लिए मिटाया जा रहा है और प्रशासन मूक दर्शक बना हुआ है।
यह विरोधाभास कई गंभीर सवाल खड़े करता है—क्या प्रशासन को इसकी जानकारी नहीं है, या फिर सब कुछ जानते हुए भी अनदेखी की जा रही है?
राजस्व का खुला नुकसान
अवैध खनन सीधे-सीधे सरकार के राजस्व पर चोट है। बिना अनुमति मिट्टी और बालू का दोहन कर खनन माफिया लाखों-करोड़ों का मुनाफा कमा रहे हैं, जबकि सरकार को मिलने वाला टैक्स और रॉयल्टी शून्य हो जाती है। यह न केवल आर्थिक अपराध है, बल्कि देश के संसाधनों की खुली लूट भी है।
सुरक्षा कार्यों पर पानी फेरता खनन
भागलपुर क्षेत्र में बाढ़ और कटान से बचाव के लिए वर्षों से करोड़ों रुपये खर्च किए जा चुके हैं—स्पर, बोल्डर पिचिंग, और कटाव रोधी कार्य। लेकिन अवैध खनन इन सभी प्रयासों को निष्प्रभावी बना देता है। नदी की धारा बदलती है, किनारे कमजोर होते हैं और बस्तियां पुनः खतरे में आ जाती हैं।
मिलीभगत के संकेत
स्थानीय स्तर पर यह चर्चा आम है कि खनन माफिया बिना प्रशासनिक संरक्षण के इतने बड़े पैमाने पर काम नहीं कर सकते। रात में मशीनों की आवाज, ट्रैक्टर-ट्रॉली की आवाजाही और पुल के पास गतिविधियां—ये सब बिना किसी रोक-टोक के चल रही हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या जिम्मेदार अधिकारी जानबूझकर आंखें मूंदे हुए हैं?
पर्यावरण और भविष्य पर खतरा
नदी का प्राकृतिक संतुलन बिगड़ने से
जलस्तर, जैव विविधता और आसपास के खेतों पर भी असर पड़ता है। यदि यही स्थिति बनी रही, तो आने वाले समय में यह समस्या और विकराल रूप ले सकती है
क्या होना चाहिए समाधान?
अवैध खनन पर तत्काल और सख्त कार्रवाई
जिम्मेदार अधिकारियों की जांच और जवाबदेही तय करना
रात में गश्त और निगरानी के लिए विशेष टीमों का गठन
स्थानीय लोगों की शिकायतों को गंभीरता से लेना
सरयू किनारे हो रहा अवैध खनन
केवल कानून का उल्लंघन नहीं, बल्कि देश के संसाधनों और जनता की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ है। जब तक प्रशासनिक तंत्र ईमानदारी से कार्रवाई नहीं करेगा, तब तक “विकास” के नाम पर हो रहा यह खेल यूं ही चलता रहेगा। अब समय है कि इस गठजोड़ को तोड़ा जाए और व्यवस्था को पारदर्शी बनाया जाए।
सिकंदरपुर में 18 अप्रैल को बजरंग दल का विरोध प्रदर्शन, बैठक में बनी रूपरेखा
सिकंदरपुर/बलिया(राष्ट्र की परम्परा)
स्थानीय जलपा माता मंदिर प्रांगण में शुक्रवार को बजरंग दल की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें आगामी 18 अप्रैल को प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन की रूपरेखा तय की गई। बैठक में संगठन के पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं ने देशभर में आयोजित किए जा रहे विरोध कार्यक्रमों के तहत सिकंदरपुर में भी प्रदर्शन करने का निर्णय लिया।बैठक में जानकारी दी गई कि 18 अप्रैल दिन शनिवार को शाम 5:00 बजे से विरोध प्रदर्शन प्रारंभ होगा। इसके लिए सभी कार्यकर्ता एवं समर्थक संघस्थान महाराणा प्रताप शाखा, पुराना पोस्ट ऑफिस पर एकत्रित होंगे, जहां से प्रदर्शन की शुरुआत की जाएगी। आयोजन को सफल बनाने के लिए जिम्मेदारियां भी निर्धारित की गईं और कार्यकर्ताओं से अधिक से अधिक लोगों को जोड़ने का आह्वान किया गया।जिला संयोजक प्रतीक राय ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि संगठन द्वारा देशव्यापी स्तर पर यह विरोध प्रदर्शन विभिन्न मुद्दों को लेकर किया जा रहा है। उन्होंने क्षेत्र के लोगों से अपील की कि वे इस कार्यक्रम में बढ़-चढ़कर भाग लें और अपनी उपस्थिति दर्ज कराएं। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण और संगठित तरीके से अपनी बात रखने के लिए इस तरह के कार्यक्रम आवश्यक हैं।
बैठक के दौरान उपस्थित कार्यकर्ताओं ने कार्यक्रम को सफल और प्रभावी बनाने का संकल्प लिया। उन्होंने कहा कि अधिक से अधिक लोगों तक सूचना पहुंचाने के लिए जनसंपर्क अभियान चलाया जाएगा, ताकि कार्यक्रम में व्यापक भागीदारी सुनिश्चित हो सके।इस अवसर पर आकाश राय, सार्थक राय, सौरभ मिश्रा, आलोक सोनी, आर्यन पांडे, अर्जुन, रमेश गुप्ता, आदित्य बरनवाल सहित दर्जनों कार्यकर्ता उपस्थित रहे। सभी ने अपने-अपने स्तर से कार्यक्रम को सफल बनाने की जिम्मेदारी ली।बैठक का समापन संगठन के पदाधिकारियों द्वारा एकजुटता और अनुशासन बनाए रखते हुए कार्यक्रम को सफल बनाने के संकल्प के साथ किया गया।
8 माह से मानदेय बकाया: 12 ब्लॉकों में मनरेगा कर्मियों की कलमबंद हड़ताल, विकास कार्य ठप
महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। जनपद में मनरेगा कर्मियों का आक्रोश अब खुलकर सामने आ गया है। 8 माह से लंबित मानदेय, ईपीएफ कटौती की राशि जमा न होने और अन्य समस्याओं के विरोध में जिले के सभी 12 विकास खंडों में ग्राम रोजगार सेवकों सहित मनरेगा कर्मियों ने शुक्रवार से कलमबंद हड़ताल शुरू कर दी है। हड़ताल के चलते मनरेगा से जुड़े सभी कार्य पूरी तरह ठप हो गए हैं, जिससे ग्रामीण विकास योजनाएं प्रभावित हो रही हैं।
उत्तर प्रदेश ग्राम रोजगार सेवक संघ के जिलाध्यक्ष एवं प्रदेश उपाध्यक्ष ब्रह्मानंद ने बताया कि पिछले 8 महीनों से मानदेय का भुगतान नहीं हुआ है। इससे कर्मचारियों के सामने आर्थिक संकट गहरा गया है और परिवार चलाना मुश्किल हो गया है। अप्रैल माह में बच्चों के स्कूल में दाखिले तक प्रभावित हो रहे हैं।

जिले के सदर, परतावल, घुघली, पनियरा, फरेंदा, निचलौल, धानी, बृजमनगंज और मिठौरा समेत सभी ब्लॉकों के मनरेगा कर्मचारी हड़ताल में शामिल हैं। कर्मचारियों ने संबंधित खंड विकास अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर कार्य बहिष्कार की सूचना दे दी है।
संघ के जिला महासचिव इंद्रमणि विश्वकर्मा ने कहा कि बीते 20 वर्षों से कर्मचारी मनरेगा के साथ-साथ जीरो पॉवर्टी सर्वे, एसआईआर सर्वे, क्राफ्ट सर्वे, प्रधानमंत्री आवास योजना और मुख्यमंत्री आवास योजना में पूरी निष्ठा से काम कर रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद समय पर मानदेय नहीं मिल रहा है।

घुघली ब्लॉक अध्यक्ष बंधु मद्धेशिया ने चेतावनी दी कि जब तक बकाया मानदेय का भुगतान और ईपीएफ की राशि खातों में जमा नहीं होती, तब तक हड़ताल जारी रहेगी। वहीं निचलौल ब्लॉक अध्यक्ष घनश्याम कन्नौजिया ने प्रशासन पर कर्मचारियों की समस्याओं के प्रति उदासीनता का आरोप लगाया।
परतावल ब्लॉक में अध्यक्ष अमित पटेल के नेतृत्व में प्रभारी बीडीओ श्याम सुंदर तिवारी को ज्ञापन सौंपा गया। इसी प्रकार अन्य सभी ब्लॉकों में भी अधिकारियों को सूचना देकर काम बंद कर दिया गया है।

हड़ताल का सीधा असर मनरेगा के तहत चल रहे विकास कार्यों पर पड़ा है। मजदूरों को काम आवंटन, मस्टर रोल जारी करना, भुगतान प्रक्रिया और निर्माण कार्यों की निगरानी पूरी तरह प्रभावित हो गई है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्य ठप हो गए हैं।
अब देखना यह है कि प्रशासन इस बढ़ते असंतोष को कैसे संभालता है और कर्मचारियों की मांगों पर कब तक ठोस निर्णय लिया जाता है। फिलहाल, आंदोलन जारी रहने के संकेत हैं।
कलेक्ट्रेट का कायाकल्प डीएम के नवाचारों से सिर्फ सूरत ही नहीं सीरत भी बदल रही
शाहजहांपुर(राष्ट्र की परम्परा)
कलेक्ट्रेट का स्वरूप इन दिनों एक कुशल प्रशासक की दूरदर्शी सोच का शानदार उदाहरण पेश कर रहा है। जिलाधिकारी धर्मेंद्र प्रताप सिंह के पदभार ग्रहण करने के बाद से न केवल पूरे जनपद में, बल्कि कलेक्ट्रेट परिसर में भी ऐसे अभूतपूर्व बदलाव देखने को मिल रहे हैं, जो हर किसी का दिल खुश कर रहे हैं। सरकारी दफ्तरों की नीरस छवि को पीछे छोड़ते हुए शाहजहांपुर कलेक्ट्रेट अब सुविधा, सुव्यवस्था और सुंदरता के एक नए प्रतिमान के रूप में उभर रहा है।इस बदलाव की सुखद बानगी बीते 26 जनवरी (गणतंत्र दिवस) से पूर्व देखने को मिली, जब कलेक्ट्रेट का पूरा भवन ‘फसाड लाइटिंग’ के जरिए तिरंगे की शानदार रोशनी में नहा उठा। शहीदों की इस पावन नगरी के गौरव को और गहराई से उकेरते हुए कलेक्ट्रेट स्थित मुख्य सभागार का भी भव्य रूप से नवीनीकरण कराया गया है। अब इस सभागार को महान क्रांतिकारी अमर शहीद राम प्रसाद ‘बिस्मिल’ के सम्मान में ‘बिस्मिल सभागार’ नाम दिया गया है, जो यहां आने वाले हर शख्स के भीतर देशभक्ति की भावना और गर्व का संचार करता है।
सुंदरता और देशभक्ति के साथ-साथ आम जनता की सहूलियत का भी यहां पूरी संवेदनशीलता से ख्याल रखा जा रहा है। अक्सर दूर-दराज के गांवों से लोग अपनी समस्याएं लेकर ‘जनसुनवाई’ में पहुंचते हैं। उन्हें मौसम की मार न सहनी पड़े और उनका इंतजार सुविधाजनक हो, इसके लिए कलेक्ट्रेट में आम लोगों के लिए एक विशेष वातानुकूलित (एसी) पुस्तकालय का निर्माण कराया गया है। यह एक ऐसा नवाचार है जहां लोग सुकून से बैठकर अपनी बारी का इंतजार कर सकते हैं और किताबें पढ़कर अपना समय सार्थक कर सकते हैं।
कलेक्ट्रेट की व्यवस्था में एक और बड़ा और साफ दिखने वाला सुधार यातायात और पार्किंग को लेकर हुआ है।
पहले जहां अधिकारियों और कर्मचारियों के वाहन परिसर में कहीं भी, बेतरतीब ढंग से खड़े हो जाते थे, वहीं अब अनुशासन का नया स्वरूप देखने को मिल रहा है। अब व्यवस्थित तरीके से निशान बना दिए गए हैं कि किस अधिकारी की गाड़ी कहां खड़ी होगी, जिससे परिसर बेहद खुला और सुव्यवस्थित नजर आता है।इस पूरे कायाकल्प में चार चांद लगा रही हैं कलेक्ट्रेट की दीवारों पर उकेरी जा रही मनमोहक और सुंदर चित्रकारियां। ये कलाकृतियां परिसर को एक नई जीवंतता प्रदान कर रही हैं।जिलाधिकारी के इन प्रयासों ने यह साबित कर दिया है कि सकारात्मक इच्छाशक्ति से एक सरकारी परिसर को न सिर्फ अनुशासित और जन-सुविधाजनक बनाया जा सकता है, बल्कि उसे इतना आकर्षक रूप भी दिया जा सकता है कि वहां आने वाले हर व्यक्ति का मन प्रफुल्लित हो उठे।
अवैध खनन पर सख्ती: घुघली पुलिस की बड़ी कार्रवाई, 2 डंफर व ट्रैक्टर-ट्रॉली स
महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। जनपद में अवैध खनन और ओवरलोड परिवहन के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत पुलिस ने सख्त रुख अपनाते हुए प्रभावी कार्रवाई की है। पुलिस अधीक्षक शक्ति मोहन अवस्थी के निर्देश पर जनपद भर में अवैध खनन व ओवरलोड वाहनों के खिलाफ लगातार चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है, जिसके क्रम में थाना घुघली पुलिस को अहम सफलता मिली है।
अपर पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ के पर्यवेक्षण में 16 अप्रैल 2026 को घुघली पुलिस टीम द्वारा क्षेत्र में संघन वाहन चेकिंग की जा रही थी। इसी दौरान पुलिस ने दो डंफर वाहन संख्या- UP57AT5376 और UP57AT4202 तथा एक ट्रैक्टर-ट्रॉली वाहन संख्या UP57BN2285 को रोककर जांच की। जांच के दौरान तीनों वाहनों में ओवरलोड लाल मिट्टी लदी पाई गई, जो अवैध रूप से परिवहन की जा रही थी।
पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए तीनों वाहनों को मोटर वाहन अधिनियम की धारा 207 के तहत सीज कर थाना परिसर में सुरक्षित खड़ा करा दिया। साथ ही मामले की जानकारी खनन विभाग को भी दे दी गई है, ताकि संबंधित के खिलाफ आवश्यक विधिक कार्रवाई की जा सके।
कार्रवाई के दौरान तीनों वाहनों के चालकों की पहचान भी की गई, जिनमें शेषनाथ पुत्र गंगा यादव निवासी अकटंई भरपुरवां, थाना जटहां बाजार, जनपद कुशीनगर,अरविंद पटेल पुत्र ओम प्रकाश पटेल निवासी बेलभरियां, थाना जटहां बाजार, जनपद कुशीनगर; तथा सुदामा यादव पुत्र रामा यादव निवासी रायपुर फुलवरिया, थाना नेंबुआ नौरंगिया, जनपद- कुशीनगर शामिल हैं।
इस पूरी कार्रवाई में उपनिरीक्षक विनीत कुमार राय, कांस्टेबल रतन जायसवाल एवं कांस्टेबल उज्ज्वल दीक्षित की सक्रिय भूमिका रही।
पुलिस टीम की तत्परता और सजगता के चलते अवैध खनन से जुड़े इस मामले का समय रहते खुलासा हो सका।
पुलिस अधीक्षक ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जनपद में अवैध खनन और ओवरलोड परिवहन को किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ऐसे मामलों में संलिप्त लोगों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी और यह अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा।
अभियोजन समीक्षा बैठक में सख्ती के निर्देश, अपराधियों पर कड़ी कार्रवाई पर जोर
देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)
कलेक्ट्रेट सभागार में जिलाधिकारी प्रवीण मिश्र की अध्यक्षता में अभियोजन कार्यों एवं कानून व्यवस्था की मासिक समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में जनपद में लंबित वादों के निस्तारण, अपराध नियंत्रण और अभियोजन की प्रगति पर विस्तार से चर्चा की गई तथा संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।
अपर निदेशक अभियोजन ने जानकारी दी कि अधीनस्थ न्यायालयों में भारतीय दंड संहिता के अंतर्गत 157 वादों का निस्तारण हुआ, जिनमें 77 में सजा, 16 में रिहाई और 33 मामलों में सुलह हुई। अन्य अधिनियमों के तहत 253 मामलों का निस्तारण हुआ, जिनमें 250 में सजा दी गई। सत्र न्यायालय में भी विभिन्न मामलों में निस्तारण और सजा के आंकड़े प्रस्तुत किए गए, जिनमें एससी-एसटी एक्ट और अन्य गंभीर मामलों में सजा सुनिश्चित की गई।
जिलाधिकारी ने विशेष रूप से महिलाओं और बच्चों से जुड़े अपराधों, खासकर पॉक्सो एक्ट के मामलों में त्वरित और सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने पर जोर दिया। उन्होंने निर्देश दिया कि न्यायालय में गवाहों की समय पर उपस्थिति सुनिश्चित की जाए, जिससे मुकदमों का शीघ्र निस्तारण हो सके।
बैठक में माफिया और शातिर अपराधियों के खिलाफ प्रभावी पैरवी करने, पुलिस और अभियोजन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने तथा साक्ष्यों के आधार पर मजबूत केस तैयार करने के निर्देश दिए गए। जिलाधिकारी ने कहा कि किसी भी अपराधी को साक्ष्यों के अभाव में छूटने नहीं दिया जाएगा।
कानून व्यवस्था की समीक्षा करते हुए पुलिस विभाग को सतर्क और सक्रिय रहने के निर्देश दिए गए। जनपद में सक्रिय अपराधियों के विरुद्ध गैंगस्टर एक्ट और गुंडा एक्ट के तहत कठोर कार्रवाई जारी रखने, अवैध शराब, मादक पदार्थों की तस्करी और गोवंश के अवैध परिवहन पर रोक लगाने के लिए गश्त बढ़ाने को कहा गया। साथ ही शहर की यातायात व्यवस्था सुधारने और अतिक्रमण हटाने के लिए नियमित अभियान चलाने के निर्देश दिए गए।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि जनपद में कानून का राज स्थापित करना प्रशासन की प्राथमिकता है और कार्य में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी। बैठक में पुलिस अधीक्षक, मुख्य विकास अधिकारी, अपर जिलाधिकारी सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
निजीकरण के खिलाफ रोडवेज कर्मियों का बिगुल, सरकार को दी आर-पार की चेतावनी
महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम में बढ़ते निजीकरण और निगम विरोधी नीतियों के खिलाफ रोडवेज कर्मचारी संयुक्त परिषद ने प्रांतीय नेतृत्व के निर्देश के क्रम में खुलकर मोर्चा खोल दिया है। महराजगंज रोडवेज परिसर में आयोजित गेट मीटिंग में कर्मचारियों का गुस्सा फूट पड़ा और सरकार के खिलाफ तीखी नाराजगी देखने को मिली।
परिषद के अध्यक्ष केदारनाथ गुप्ता एवं मंत्री राजीव कुमार के नेतृत्व में आयोजित इस बैठक में वक्ताओं ने दो टूक शब्दों में कहा कि सरकार की वर्तमान नीतियां निगम को कमजोर करने की साजिश हैं। निजीकरण को बढ़ावा देकर न केवल विभाग की कार्यप्रणाली प्रभावित हो रही है, बल्कि हजारों कर्मचारियों का भविष्य भी अधर में लटक गया है।
बैठक में कर्मचारियों ने एक स्वर में मांग उठाई कि निगम के बकाया देयकों का तत्काल भुगतान किया जाए तथा महंगाई भत्ता समय से जारी किया जाए। इसके साथ ही संविदा चालकों एवं परिचालकों के नियमितीकरण, आउटसोर्सिंग कर्मियों को विभाग में समायोजित करने और कर्मचारी हितों के खिलाफ जारी आदेशों को तत्काल वापस लेने की मांग की गई।
वक्ताओं ने आरोप लगाया कि सरकार लगातार कर्मचारी विरोधी निर्णय ले रही है, जिससे रोडवेज की स्थिति दिन-प्रतिदिन कमजोर होती जा रही है। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते इन समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो प्रदेशव्यापी आंदोलन छेड़ा जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
गेट मीटिंग के दौरान कर्मचारियों ने एकजुटता का परिचय देते हुए संघर्ष को निर्णायक मोड़ तक पहुंचाने का संकल्प लिया। उन्होंने चेतावनी दी कि जरूरत पड़ने पर धरना-प्रदर्शन, कार्य बहिष्कार और चक्का जाम जैसे कठोर कदम उठाने से भी पीछे नहीं हटेंगे।
इस मौके पर उपाध्यक्ष राजन सिंह, संगठन मंत्री रितेश पांडेय, उत्तम पांडेय, शरीफ खान, अंकित पांडेय, धीरज पांडेय, संदीप गुप्ता, राजू विश्वकर्मा, जितेंद्र चौधरी, स्वामीनाथ यादव, अखिलेश मुनि त्रिपाठी, विनय भारती, राजेश कुमार, विशाल, मार्कंडेय पांडेय, ओम प्रकाश प्रजापति, जटाशंकर, सतीश यादव, सुनील, रंजीत प्रजापति, शैलेंद्र कन्नौजिया, संदीप मद्धेशिया सहित बड़ी संख्या में कर्मचारी मौजूद रहें।
कुल मिलाकर, गेट मीटिंग ने साफ संकेत दे दिया है कि यदि सरकार ने कर्मचारी हितों की अनदेखी जारी रखी, तो आने वाले दिनों में रोडवेज विभाग में बड़ा आंदोलन खड़ा हो सकता है।
कड़ी मेहनत का मिला फल, सीबीएसई बोर्ड परीक्षा में छात्रों ने रचा सफलता का नया कीर्तिमान
बड़हलगंज/गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। सीबीएसई बोर्ड द्वारा वर्ष 2026 की 10वीं कक्षा के घोषित परीक्षा परिणाम में असम्पशन पब्लिक स्कूल, सिधुआपार बड़हलगंज के छात्रों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए विद्यालय का नाम रोशन किया है।
परीक्षा परिणाम में आदित्य राज ने 96% अंक प्राप्त कर प्रथम स्थान हासिल किया, जबकि प्रियांशु गुप्ता ने 94% अंक के साथ द्वितीय स्थान प्राप्त किया। शुभम कुमार और प्रिया तिवारी ने 91% अंक हासिल कर संयुक्त रूप से तृतीय स्थान प्राप्त किया।
इसके अलावा अन्य मेधावी छात्रों में अंकु यादव (89%), विशाल यादव (86%) और सोनम जायसवाल (84%) ने भी बेहतरीन प्रदर्शन किया। वहीं सफल छात्रों की सूची में अमित कुमार यादव (83%), रितम गुप्ता (79%), शिवम निगम (79%), जाह्नवी पांडेय (77%) और फैजल अंसारी (75%) शामिल हैं।
विद्यालय के प्रबंधक भीम सिंह तिवारी ने सभी सफल छात्रों को इस उपलब्धि पर बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा कि यह सफलता छात्रों की मेहनत, अनुशासन और शिक्षकों के मार्गदर्शन का परिणाम है। इस अवसर पर विद्यालय परिवार द्वारा सभी छात्रों को सम्मानित किया गया।
850 सीटों की लोकसभा: प्रतिनिधित्व बढ़ेगा या संतुलन बिगड़ेगा?
महिला आरक्षण से आगे बढ़ी बहस: परिसीमन के साथ जुड़ते ही ‘सत्ता संतुलन’ का राष्ट्रीय सवाल बना मुद्दा

भारत की संसदीय राजनीति इस समय एक निर्णायक मोड़ पर खड़ी है, जहां महिला सशक्तिकरण के ऐतिहासिक प्रयास के साथ-साथ क्षेत्रीय संतुलन और राजनीतिक शक्ति के पुनर्वितरण को लेकर गहरी बहस छिड़ गई है। विशेष संसद सत्र (16-18 अप्रैल 2026) में पेश किए गए महिला आरक्षण, परिसीमन और केंद्र शासित प्रदेशों से जुड़े तीन महत्वपूर्ण विधेयकों ने देश की राजनीति को नई दिशा में मोड़ दिया है।
महिला आरक्षण से संबंधित संवैधानिक संशोधन विधेयक 2026 के तहत लोकसभा सीटों को 543 से बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव है, जिसमें लगभग 272 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की जाएंगी। यह कदम जहां लोकतंत्र को अधिक समावेशी बनाने की दिशा में एक बड़ा प्रयास है, वहीं परिसीमन के साथ इसके जुड़ने से राजनीतिक विवाद गहराता जा रहा है।
संसद में इस विधेयक को ध्वनि मत से पारित करने की कोशिश विफल रही और वोटिंग करानी पड़ी। परिणामस्वरूप सरकार को 251 सांसदों का समर्थन मिला, जबकि 185 सांसदों ने विरोध किया। यह आंकड़ा साफ संकेत देता है कि यह मुद्दा केवल नीतिगत नहीं बल्कि राजनीतिक और क्षेत्रीय विभाजन का केंद्र बन चुका है।
विवाद का मूल बिंदु महिला आरक्षण नहीं, बल्कि उसे परिसीमन प्रक्रिया से जोड़ना है। विपक्ष स्पष्ट रूप से कह रहा है कि वह महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने के पक्ष में है, लेकिन इसे जनगणना और परिसीमन के बाद लागू करने की शर्त का विरोध करता है। विपक्ष इसे एक ‘डिले टैक्टिक’ मानता है, जबकि सरकार इसे संरचनात्मक सुधार का आवश्यक हिस्सा बताती है।

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परिसीमन का गणित इस पूरे विवाद का सबसे संवेदनशील पहलू बन गया है। 1971 की जनगणना के आधार पर लंबे समय तक सीटों का निर्धारण स्थिर रखा गया था ताकि जनसंख्या नियंत्रण करने वाले राज्यों को नुकसान न हो। 1976 में यह तय किया गया कि 2026 तक परिसीमन नहीं होगा। अब जब यह प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है, तो जनसंख्या आधारित प्रतिनिधित्व का सवाल खड़ा हो गया है।
यदि सीटों का पुनर्वितरण जनसंख्या के आधार पर होता है, तो उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश जैसे अधिक जनसंख्या वाले राज्यों को अधिक सीटें मिलेंगी, जबकि तमिलनाडु, केरल और कर्नाटक जैसे दक्षिणी राज्यों की हिस्सेदारी घट सकती है। यही वह बिंदु है जहां यह बहस ‘महिला सशक्तिकरण’ से आगे बढ़कर ‘उत्तर बनाम दक्षिण’ के राजनीतिक विमर्श में बदल गई है।
दक्षिण भारत के राज्यों का तर्क है कि उन्होंने जनसंख्या नियंत्रण, शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन किया है, और अब उन्हें कम प्रतिनिधित्व देकर ‘सजा’ दी जा रही है। उनका मानना है कि इससे संसद में उनकी आवाज कमजोर होगी और संघीय ढांचा प्रभावित हो सकता है।
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दूसरी ओर, सरकार का पक्ष यह है कि सीटों में वृद्धि सभी राज्यों के लिए समान अनुपात में की जाएगी और किसी राज्य का वर्तमान प्रतिनिधित्व कम नहीं होगा। सरकार का दावा है कि परिसीमन आयोग निष्पक्ष तरीके से काम करेगा और यह प्रक्रिया केवल जनसंख्या ही नहीं बल्कि प्रशासनिक संतुलन को भी ध्यान में रखकर की जाएगी।
विपक्ष की एक बड़ी आशंका यह भी है कि यह पूरी प्रक्रिया राजनीतिक लाभ के लिए तैयार की गई रणनीति हो सकती है। उनका कहना है कि जिन राज्यों में सत्ताधारी दल की मजबूत पकड़ है, वहां सीटें बढ़ने से संसद में सत्ता संतुलन एकतरफा हो सकता है।
जनगणना का मुद्दा भी इस विवाद में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। विपक्ष का कहना है कि बिना नई जनगणना के परिसीमन करना तर्कसंगत नहीं है। वहीं सरकार ने संविधान में संशोधन कर यह प्रावधान किया है कि संसद जिस जनगणना को मान्यता देगी, उसी के आधार पर परिसीमन किया जा सकेगा, जिससे लचीलापन तो बढ़ता है लेकिन पारदर्शिता पर सवाल भी उठते हैं।
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लोकसभा का प्रस्तावित विस्तार भी अपने आप में ऐतिहासिक है। 850 सीटों वाली लोकसभा दुनिया की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक संस्था को और विशाल बना देगी। इससे प्रतिनिधित्व बढ़ेगा, लेकिन निर्णय लेने की प्रक्रिया जटिल भी हो सकती है।
अंततः यह पूरा मुद्दा भारतीय लोकतंत्र के लिए एक दोधारी तलवार जैसा है। एक ओर यह महिलाओं को राजनीतिक मुख्यधारा में लाने का अवसर देता है, वहीं दूसरी ओर क्षेत्रीय असंतुलन और राजनीतिक ध्रुवीकरण को बढ़ाने का खतरा भी पैदा करता है। यह केवल एक विधेयक नहीं, बल्कि भारत के राजनीतिक भविष्य की दिशा तय करने वाला निर्णय है।
यदि इसे पारदर्शिता, संतुलन और सहमति के साथ लागू किया गया, तो यह लोकतंत्र को मजबूत करेगा। लेकिन यदि इसमें राजनीतिक हित हावी रहे, तो यह उत्तर-दक्षिण विभाजन को और गहरा कर सकता है।
— संकलनकर्ता: एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी, गोंदिया (महाराष्ट्र)
UP में खौफनाक वारदात: मामूली विवाद पर पति ने पत्नी को कुल्हाड़ी से काट डाला
बांदा (राष्ट्र की परम्परा)। उत्तर प्रदेश के बांदा जिले से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां एक मामूली घरेलू विवाद ने खौफनाक रूप ले लिया। बबेरू कोतवाली क्षेत्र के बगेहटा गांव में एक पति ने अपनी पत्नी की कुल्हाड़ी से हमला कर हत्या कर दी।
घटना के बाद आरोपी मौके से फरार हो गया, जबकि परिवार और गांव में दहशत का माहौल है।
बेटी के बिना खाना खाए जाने से शुरू हुआ विवाद
जानकारी के अनुसार, बगेहटा गांव निवासी 48 वर्षीय सरीफन के घर में आए दिन विवाद होता रहता था। सोमवार सुबह भी खाना न बनने और बेटी के बिना खाना खाए कोचिंग जाने को लेकर पति मोबीन शेख और पत्नी के बीच कहासुनी शुरू हो गई।
यह विवाद धीरे-धीरे बढ़ता गया और स्थिति इतनी बिगड़ गई कि मोबीन शेख ने अपना आपा खो दिया।
नहाते समय पत्नी पर किया हमला
विवाद के दौरान आरोपी पति ने घर में रखी कुल्हाड़ी उठा ली और नहा रही पत्नी पर ताबड़तोड़ हमला कर दिया।
बताया जा रहा है कि उसने पत्नी पर तीन बार वार किया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना इतनी अचानक और भयावह थी कि किसी को संभलने का मौका तक नहीं मिला।
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बेटी ने देखा लहूलुहान शव
घटना के समय घर पर मौजूद छोटी बेटी कोचिंग गई हुई थी। जब वह वापस लौटी तो उसने अपनी मां को खून से लथपथ हालत में पड़ा देखा।
यह दृश्य देखकर वह चीख पड़ी, जिसके बाद आसपास के लोग मौके पर पहुंचे और घटना की जानकारी मिली।
पुलिस और फॉरेंसिक टीम पहुंची मौके पर
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची। कोतवाली प्रभारी राजेंद्र सिंह राजावत पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर पहुंचे और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
फॉरेंसिक टीम ने भी मौके का निरीक्षण कर जरूरी साक्ष्य जुटाए हैं।
आरोपी फरार, तलाश जारी
वारदात के बाद आरोपी पति मौके से फरार हो गया है। पुलिस ने उसके खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और उसकी तलाश के लिए टीम गठित कर दी गई है।
अपर पुलिस अधीक्षक शिवराज के अनुसार, आरोपी को जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
परिवार की स्थिति
मृतका के पांच बेटे और दो बेटियां हैं। सभी बेटे मुंबई में काम करते हैं, जबकि घर पर केवल एक छोटी बेटी ही रहती थी।
इस घटना के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है और पूरे गांव में शोक का माहौल है।
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Tech Tips: गर्मियों में नहीं होगा फोन गर्म, कूल-कूल रखने के लिए अपनाएं ये आसान तरीके
गर्मियों का मौसम शुरू होते ही तापमान तेजी से बढ़ने लगता है और कई जगहों पर पारा 40 डिग्री के करीब पहुंच जाता है। ऐसे में स्मार्टफोन समेत कई इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स में ओवरहीटिंग की समस्या बढ़ जाती है।
दरअसल, ज्यादा तापमान का सीधा असर फोन की बैटरी और परफॉर्मेंस पर पड़ता है। थोड़ी देर इस्तेमाल करने पर ही फोन गर्म होने लगता है और कई बार काम करना भी बंद कर देता है। इसलिए जरूरी है कि गर्मियों में फोन को ठंडा रखने के लिए सही तरीके अपनाए जाएं।
यहां हम आपको कुछ आसान और असरदार टिप्स बता रहे हैं, जिनकी मदद से आप अपने स्मार्टफोन को ओवरहीट होने से बचा सकते हैं।
स्क्रीन ब्राइटनेस रखें कम
फोन की स्क्रीन सबसे ज्यादा बैटरी का इस्तेमाल करती है। जब आप ब्राइटनेस को फुल रखते हैं तो बैटरी पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है और इससे हीट पैदा होती है।
ऐसे में बेहतर होगा कि आप जरूरत के हिसाब से ही ब्राइटनेस रखें। कम ब्राइटनेस से बैटरी पर लोड कम पड़ेगा और फोन ज्यादा गर्म नहीं होगा।
फ्लाइट मोड का करें इस्तेमाल
अगर आप कुछ समय के लिए फोन का इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं तो उसे फ्लाइट मोड पर डाल देना एक अच्छा विकल्प है।
फ्लाइट मोड ऑन करने से फोन नेटवर्क सर्च करना बंद कर देता है, जिससे बैटरी की खपत कम होती है और फोन को आराम मिलता है। खासकर यात्रा के दौरान यह तरीका काफी मददगार साबित हो सकता है।
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फोन कवर हटा लें
फोन कवर जहां सुरक्षा देता है, वहीं यह हीट को बाहर निकलने से रोकता भी है।
जब फोन गर्म होता है तो कवर की वजह से अंदर की गर्मी बाहर नहीं निकल पाती, जिससे ओवरहीटिंग बढ़ जाती है। इसलिए चार्जिंग या लंबे समय तक इस्तेमाल करते वक्त फोन का कवर हटा देना बेहतर होता है।
धूप में इस्तेमाल करने से बचें
गर्मियों में सीधी धूप फोन के लिए सबसे बड़ा खतरा होती है।
अगर आप धूप में फोन इस्तेमाल करते हैं तो आपको ब्राइटनेस भी बढ़ानी पड़ती है, जिससे फोन पर डबल दबाव पड़ता है। एक तरफ बाहरी गर्मी और दूसरी तरफ बैटरी का लोड, दोनों मिलकर फोन को तेजी से गर्म कर देते हैं।
इसलिए कोशिश करें कि फोन को सीधे धूप में इस्तेमाल न करें।
ओवरचार्जिंग से बचें
फोन को ज्यादा देर तक चार्ज पर लगाए रखना भी ओवरहीटिंग का कारण बन सकता है।
जब बैटरी फुल चार्ज हो जाए तो फोन को चार्जर से हटा लें। इससे बैटरी सुरक्षित रहती है और फोन का तापमान भी नियंत्रित रहता है।
गर्मियों में फोन का रखें खास ख्याल
गर्मी के मौसम में थोड़ी-सी लापरवाही आपके फोन की परफॉर्मेंस और बैटरी लाइफ को प्रभावित कर सकती है।
अगर आप ऊपर बताए गए आसान टिप्स को अपनाते हैं तो न सिर्फ आपका फोन ठंडा रहेगा, बल्कि उसकी लाइफ और परफॉर्मेंस भी बेहतर बनी रहेगी।
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