
देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। जब पूरा शहर तूफानी बारिश से बचने के लिए घरों में सिमटा था, तब जिलाधिकारी खुद जलभराव के बीच मैदान में उतरकर हालात का जायजा ले रहे थे। तेज बारिश, कड़कती बिजली और तेज हवाओं के बीच जिलाधिकारी ने शहर के जलभराव वाले क्षेत्रों का निरीक्षण किया और संबंधित अधिकारियों को तत्काल जलनिकासी की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
रात के प्रतिकूल मौसम में जिलाधिकारी का इस तरह मौके पर पहुंचना लोगों के बीच चर्चा का विषय बना रहा। जिस समय आम नागरिक बारिश और जलभराव के कारण घरों से निकलने से बच रहे थे, उसी दौरान जिलाधिकारी पानी के बीच पहुंचकर जमीनी स्थिति को समझते नजर आए। निरीक्षण के दौरान उन्होंने जलभराव वाले स्थानों की स्थिति देखी और अधिकारियों से जलनिकासी की व्यवस्था को प्रभावी बनाने के संबंध में जानकारी ली।
जिलाधिकारी के इस प्रयास से यह संदेश गया कि प्रशासन केवल कार्यालयों तक सीमित नहीं है, बल्कि आपदा अथवा परेशानी की स्थिति में मौके पर पहुंचकर समस्याओं का जायजा लेने के लिए भी तैयार है। रात के अंधेरे, तेज हवा और लगातार हो रही बारिश के बीच जिलाधिकारी का जलभराव में उतरकर निरीक्षण करना निश्चित रूप से प्रशासनिक सक्रियता का उदाहरण है।
हालांकि, शहर में जलभराव की समस्या को स्थायी रूप से दूर करने के लिए नगर पालिका परिषद देवरिया की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। जलनिकासी नालों की नियमित सफाई, अवरोधों को हटाने और जलनिकासी व्यवस्था को दुरुस्त रखने की जरूरत है, ताकि बारिश के दौरान आम नागरिकों को सड़कों पर पानी भरने से होने वाली परेशानी से राहत मिल सके।
स्थानीय नागरिकों के बीच जिलाधिकारी के इस कदम की सराहना की जा रही है। लोगों का कहना है कि “धन्य हैं आप, जो ऐसे मौसम में भी जनता की परेशानी देखने खुद मौके पर पहुंचे।” अब जरूरत इस बात की है कि निरीक्षण के साथ-साथ जलभराव की समस्या के स्थायी समाधान के लिए संबंधित विभागों पर भी प्रभावी निगरानी और सख्ती बरती जाए।
