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नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों और ईरान के साथ जारी तनाव के बीच भारत से जुड़े एक कथित समुद्री नेटवर्क पर अमेरिकी प्रशासन ने शिकंजा कस दिया है। अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने भारतीय कारोबारी सुनील कुमार शर्मा, उनकी पत्नी जसप्रीत प्रीति शाहिद और भारत स्थित कई कंपनियों के खिलाफ प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की घोषणा की है। आरोप है कि इस नेटवर्क ने फर्जी समुद्री रजिस्ट्रेशन और झंडे से जुड़े दस्तावेजों के जरिए ईरान के प्रतिबंधित तेल कारोबार को जारी रखने में मदद की। हालांकि, ये अमेरिकी प्रशासन के आरोप हैं, जिन्हें स्वतंत्र रूप से सिद्ध तथ्य नहीं माना जाना चाहिए।
अमेरिकी वित्त मंत्रालय के मुताबिक, यह कार्रवाई ट्रंप प्रशासन के कथित अभियान ‘ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट’ के तहत की गई है। इसका उद्देश्य ईरान की तेल बिक्री से होने वाली आय और उसके आर्थिक नेटवर्क पर दबाव बढ़ाना है। इस कार्रवाई से भारत से जुड़ी कंपनियों और अंतरराष्ट्रीय समुद्री कारोबार में हलचल तेज होने की आशंका है।
चंडीगढ़ से कथित नेटवर्क चलाने का आरोप
अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि सुनील कुमार शर्मा और उनकी पत्नी चंडीगढ़ से कथित नेटवर्क का संचालन कर रहे थे। आरोप है कि दोनों ने विभिन्न देशों के समुद्री प्रशासनिक प्राधिकरणों के नाम और पहचान का दुरुपयोग कर ऐसी वेबसाइटें बनाईं, जो जहाजों का पंजीकरण, समुद्री झंडा, नाविक प्रशिक्षण और जहाजों के वर्गीकरण जैसी सेवाएं देने का दावा करती थीं। संबंधित देशों ने कथित तौर पर इन सेवाओं की अनुमति नहीं दी थी।
अमेरिकी वित्त मंत्रालय के अनुसार, इस गतिविधि की शुरुआत वर्ष 2014 के आसपास हुई थी, जब डोमिनिका के समुद्री झंडा प्राधिकरण के रूप में पेश आने की कोशिश की गई। वर्ष 2023 में सिंगापुर में ‘एस्वातिनी मैरीटाइम अफेयर्स एंड इंटरनेशनल शिप रजिस्ट्री पीटीई लिमिटेड’ नाम से कंपनी स्थापित किए जाने का भी उल्लेख किया गया है। मंत्रालय का दावा है कि एस्वातिनी के अधिकारियों ने इस संगठन से संबंध होने से इनकार किया था।
भारत की कंपनियां भी प्रतिबंधों के घेरे में
अमेरिकी कार्रवाई में ओशनिक टेक्नोलॉजीज इंडिया, आर्यावर्त शिप मैनेजमेंट, प्रिसेप्ट ट्रेंड्स, पॉलीनेशिया मैरीटाइम, एलेक्सार्या फिनसर्व, एलेक्सार्या मीडिया एंड एंटरटेनमेंट, विहाराबोटिंग और आर्यावर्त मैरीटाइम एंड एजुकेशनल ट्रस्ट समेत भारत से जुड़ी संस्थाओं के नाम सामने आए हैं। अमेरिकी मंत्रालय ने अश्वनी कुमार धीमान और इश्विंदर सिंह का भी कथित नेटवर्क से जुड़े व्यक्तियों के रूप में उल्लेख किया है।
मंत्रालय का आरोप है कि इन संस्थाओं के माध्यम से फर्जी जहाज रजिस्ट्रेशन तैयार किए गए और प्रतिबंधित तेल की ढुलाई करने वाले जहाजों को अपनी पहचान छिपाने में मदद मिली। ऐसे मामलों में प्रतिबंधों के उल्लंघन के साथ समुद्री सुरक्षा, बीमा और पर्यावरणीय नुकसान का जोखिम भी बढ़ सकता है।
ईरान की मदद करने वालों को ट्रंप प्रशासन की चेतावनी
अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा है कि ईरान की मदद करने वाले व्यक्तियों और संस्थाओं के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी। प्रशासन का कहना है कि जमीन, समुद्र या हवाई मार्ग से ईरान को सहायता देने वाले नेटवर्क को निशाना बनाया जाएगा।
चुनावी झटके के बीच ट्रंप की ईरान नीति चर्चा में
अमेरिकी मध्यावधि चुनावों में रिपब्लिकन पार्टी को झटका लगने और ईरान के साथ संघर्ष के आर्थिक प्रभावों को लेकर भी बहस तेज है। ईंधन की बढ़ती कीमतें और युद्ध का खर्च अमेरिकी मतदाताओं की नाराजगी से जुड़े मुद्दे बताए जा रहे हैं। हालांकि, चुनाव परिणामों और भारत से जुड़ी प्रतिबंधात्मक कार्रवाई के बीच सीधे संबंध का दावा करने के लिए ठोस प्रमाण जरूरी हैं।
अमेरिका की यह कार्रवाई संकेत देती है कि ईरान के तेल कारोबार पर दबाव बनाने की उसकी रणनीति अब कथित समुद्री मध्यस्थों और अंतरराष्ट्रीय पंजीकरण नेटवर्क तक पहुंच रही है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि प्रतिबंधों का भारतीय कंपनियों के कारोबार और भारत-अमेरिका आर्थिक संबंधों पर क्या असर पड़ता है।