75 जिलों में से 50 का सर्वे पूरा, 25 जिलों में काम बाकी; पंचायत चुनाव की तैयारी और आरक्षण प्रक्रिया पर टिकी निगाहें


लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की तैयारियों के बीच पिछड़ा वर्ग आयोग के सर्वे ने नई चुनौती खड़ी कर दी है। गांवों की सरकार चुनने का इंतजार कर रहे लोगों के लिए चुनाव की राह अब और लंबी होने की आशंका जताई जा रही है। आयोग के सर्वे की रफ्तार और रिपोर्ट तैयार करने में लगने वाले समय को देखते हुए 20 नवंबर तक सरकार को रिपोर्ट सौंपना मुश्किल माना जा रहा है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, आयोग कम से कम तीन महीने का अतिरिक्त समय मांग सकता है। हालांकि, इस संबंध में आयोग और सरकार की ओर से आधिकारिक पुष्टि होने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होगी।
75 जिलों में सर्वे, 25 जिलों का काम अब भी बाकी
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में पिछड़े वर्ग के आरक्षण का आधार तैयार करने के लिए समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग जिलों का दौरा कर सर्वे और जनसुनवाई कर रहा है। इसका उद्देश्य संबंधित आंकड़े जुटाना, उनका परीक्षण करना और आरक्षण निर्धारण के लिए आवश्यक आधार तैयार करना है। रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश के 75 जिलों में से अब तक 50 जिलों का भ्रमण पूरा हो चुका है, जबकि 25 जिलों में सर्वे और जनसुनवाई की प्रक्रिया अभी बाकी है। शेष जिलों का काम पूरा करने के साथ आंकड़ों का संकलन और उनकी जांच भी करनी होगी। यही वजह है कि निर्धारित समयसीमा में रिपोर्ट तैयार करना आयोग के लिए चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है।
तीन महीने की मोहलत मांग सकता है आयोग
सूत्रों के हवाले से सामने आई जानकारी के मुताबिक, आयोग सरकार से रिपोर्ट सौंपने के लिए कम से कम तीन महीने का अतिरिक्त समय मांग सकता है। मौजूदा परिस्थितियों में 31 दिसंबर से पहले रिपोर्ट सौंप पाना भी कठिन बताया जा रहा है। हालांकि, समय विस्तार की औपचारिक मांग की गई है या नहीं, इस पर आधिकारिक जानकारी सामने आना बाकी है। अतिरिक्त समय देने का फैसला भी सरकार को ही करना होगा।
हाईकोर्ट के आदेश और चुनावी समयसीमा पर नजर
पंचायत चुनाव को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 14 अक्टूबर 2026 को राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग को तीन महीने के भीतर चुनाव प्रक्रिया पूरी कराने का निर्देश दिया था। ऐसे में आयोग की रिपोर्ट में संभावित देरी प्रशासनिक और कानूनी स्तर पर महत्वपूर्ण हो सकती है। यदि आरक्षण निर्धारण की प्रक्रिया में विलंब होता है, तो चुनाव की तैयारियों के सामने व्यावहारिक मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं। हालांकि, आयोग की रिपोर्ट में देरी होने से अदालत की समयसीमा अपने आप नहीं बदल जाती। आगे की स्थिति अदालत के आदेश, सरकार की कार्रवाई और संबंधित कानूनी प्रक्रियाओं पर निर्भर करेगी।
आरक्षण के बाद ही आगे बढ़ेगी चुनावी प्रक्रिया?
पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट आने के बाद सरकार उसकी सिफारिशों पर विचार करेगी। इसके बाद पंचायतों में आरक्षण निर्धारण और चुनाव से जुड़ी अन्य तैयारियों को आगे बढ़ाया जाएगा। चुनाव कार्यक्रम जारी करने और मतदान कराने की जिम्मेदारी राज्य निर्वाचन आयोग की होगी।
यूपी पंचायत चुनाव कब होंगे?
फिलहाल पंचायत चुनाव की तारीखों को लेकर आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। एक ओर हाईकोर्ट के निर्देश के अनुसार चुनाव प्रक्रिया पूरी करने की समयसीमा है, तो दूसरी ओर सर्वे और रिपोर्ट में संभावित देरी की चर्चा है। ऐसे में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आयोग समय पर रिपोर्ट सौंप पाएगा या सरकार से अतिरिक्त मोहलत मांगेगा। गांवों की सरकार चुनने का रास्ता कब साफ होगा, इस पर अब आयोग की रिपोर्ट और सरकार के अगले फैसले से तस्वीर स्पष्ट होने की उम्मीद है।
डिस्क्लेमर: रिपोर्ट में उल्लिखित सर्वे की स्थिति और संभावित समय विस्तार मीडिया रिपोर्टों एवं सूत्रों के हवाले से प्राप्त जानकारी पर आधारित हैं। आधिकारिक पुष्टि और चुनाव कार्यक्रम की घोषणा संबंधित प्राधिकरणों द्वारा किए जाने के बाद ही अंतिम स्थिति स्पष्ट होगी।