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सिस्टम का बोझ और बुजुर्ग की पीठ…!

ज़नाब, जूते न गंदे हो जाएँ युवा साहब के,देखो इंसानियत को कीचड़ में बहा दिया।इस उम्र में उन्हें लाठी का सहारा देना था,उस उम्र में बुजुर्ग को ही घोड़ा बना…