संजा – मिट्टी की खुशबू का पर्व
हाँ, कच्ची दीवारों पर जब, संजा मुस्कुराती थी,मिट्टी-गोबर-फूलों से बेटियाँ दुनिया सजाती थीं।नन्ही-सी उँगलियों में पूरा “गाँव” उतर आता था,हर दिन आकृति में मन का सपना मुस्काता था।सहेलियाँ गीत सुनातीं,…
निष्पक्ष खबर, सशक्त विचार
हाँ, कच्ची दीवारों पर जब, संजा मुस्कुराती थी,मिट्टी-गोबर-फूलों से बेटियाँ दुनिया सजाती थीं।नन्ही-सी उँगलियों में पूरा “गाँव” उतर आता था,हर दिन आकृति में मन का सपना मुस्काता था।सहेलियाँ गीत सुनातीं,…