कविता

आधुनिकता ने ढीठ बना डाला

माता पिता बच्चे का तुतलानाभी कैसे पूरी तरह समझ लेते हैं,बच्चा माँगे तोतली बोली में जो,माता-पिता वह सब लाकर देते…

2 years ago

यथार्थ बोध

यथार्थ बोध के बिना,यथार्थ ज्ञान नहीं मिले,यथार्थ ज्ञान के बिना,विनीत भाव नहीं मिले। विनीत भाव के बिना,प्रेम-प्रीति नहीं मिले,प्रेम- प्रीति…

2 years ago

नि:स्वार्थ श्रम करता है किसान

खामोशी से सभी काम होते हैं,किसान खेत में काम करते हैं,जैसे पेंड़ और पौधे छाया देते हैं,किसान हम सबको अनाज…

2 years ago

समालोचना

कविता की रचना जब कोई कविअपनी कल्पना में जाकर करता है,यदि पाठक रचना में गलती खोजे,समालोचना उसका हक़ होता है।…

2 years ago

भेड़िया आया-भेड़िया आया

सच बोलना मूलभूत प्रकृति वसंवेदनशील सहज प्रवृत्ति है,झूठ सुनकर यदि हमें दुख होता है,ऐसे झूठ से ग़ैर को भी दुख…

2 years ago

भुवन भास्कर को प्रणाम

अंबर से धरती तक तीनों लोकों में,चमक रहे सूर्यदेव उनको प्रणाम है।जगत प्रकाशित जिनसे होता है,भुवन भास्कर तुमको प्रणाम है।…

2 years ago

हे पाहि पाहि दातार हरे

हे भोलेनाथ कृपालु हरे,शिव शम्भू हे औढरदानी।दयालु हृदय हे करुणाकर,महादेव की अकथ कहानी॥ निमिषमात्र, नवनिधि दाता हैं,दयानिधि भोले हैं महा…

2 years ago

परम शत्रु भी मित्र बन जाते हैं

बड़े बड़े महलों को ढहते देखा है,उन महलों में रहने वालों को देखा है,भूखे प्यासे दर दर भटकते देखा है,उनकी…

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परंपरा व आस्था पर प्रहार

परंपरा व आस्था पर प्रहार,सरेआम आधुनिक भारत में,अपने ही लोगों के द्वारा देखा,वो रौंद गये एक लक्ष्मण रेखा। होली के…

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वादा दिवस :: पतिदेव की कहानी

वादा करो कि बेलन का उपयोगचपाती बनाने के लिये ही करोगी,वादा दिवस, पति देव की कहानीसुनिये कहानी, उनकी ही ज़ुबानी।…

2 years ago