कविता

माँ सरस्वती सब पर प्रसन्न हों

वसन्त पंचमी की नवपूजा होगी,माँ सरस्वती तव अर्चना होगी,वीणावादिनि की आरती होगी,माँ शारदे श्वेतवस्त्रालंकृता होंगी। वीणा के तार सरगम झंकृत…

2 years ago

विदाई में बजी शहनाई

अपनी माँ की ममता का सागरबेटी सबकी आँखों का तारा है,मैं बतलाऊँ कैसे हमने कितने,लाड़, प्यार, नाज़ों से पाला है।…

2 years ago

दर्पण नहीं मुखौटे बदलते रहते हैं

दर्पण नहीं मुखौटे बदलते रहते हैं,लोकतंत्र में संविधान नहीं साँसद,विधायक व मंत्री बदलते रहते हैं,संत्री से लेकर सचिव वही रहते…

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सच्चे मन से सच्चा मन मिलता है

भाषाई शब्द ऐसे परिधान होते हैंजिन्हें शालीनता से पहना जाता है,शालीनता त्याग देते ही इंसान कासारा व्यक्तित्व निर्वस्त्र हो जाता…

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जीवनसाथी

हमारे माता-पिता, पति-पत्नी,पुत्र-पुत्री, मित्र, सगे सम्बन्धी,क्या वास्तव में ये जीवनसाथी हैं,नहीं, जीवनसाथी तो शरीर है । शरीर साँसे लेना बंद…

2 years ago

बड़ा घर और वृद्घ माँ-पिता

सुनिए एक मेहनतकश की कहानी,अब तक की उसकी ही ज़ुबानी,जब मैं छोटा था, हम केवल एककमरे वाले छोटे से घर…

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आया बसन्त

आया बसन्त आया बसन्त,दिवदिगन्त में छाया बसन्त।तरु पल्लव किसलय झूम रहे,खेतों में सरसों फूल रहे,नवकलिका आँखे खोल रहीं,वासंती छटा निहार…

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बाल धूप सफेद!

मैंने बाल धूप में नहीं सफ़ेद किए हैं,बुजुर्गों के अनुभव अनमोल होते हैं,यह अनुभव उनकी उम्र के बितायेहुए बेशक़ीमती वक्त…

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आबे मोर खेत म मयार

रद्दा देखत रइहौंव तोर, गियां रे मंझनिया के पहाती।आबे मोर खेत म मयारू, टोरे ल तिवरा, चना भाजी।। केंवची-केंवची पाना…

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आया वसंत

अम्बर से उड़ उड़कर भँवराजब धरती पर आता है,देख देख सुनहरे बाग को,भ्रमर वहीं मँडराता है,कुसुमित पुष्पों की सुरभित,कलियों पर…

2 years ago