माता पिता बच्चे का तुतलाना
भी कैसे पूरी तरह समझ लेते हैं,
बच्चा माँगे तोतली बोली में जो,
माता-पिता वह सब लाकर देते हैं।
पिता गोद में ले, कंधे पर बैठाकर
घुमाने बच्चों को ले कर जाता है,
घोड़ा घोड़ी ख़ुद बनकर पीठ पर,
बैठाकर ख़ुद सवारी बन जाता है।
सारी ममता, प्यार और वात्सल्य,
माता पिता से बच्चों को मिलता है,
बदले में किस प्रकार तिरस्कार,
उनको वृद्धावस्था में मिलता है।
बड़े हुये बच्चे जब हर बात पर,
“आप नहीं समझोगे” कह देते हैं,
अपनी बातें जबरन मनवाने को,
प्यार के बोल कड़वे कर देते हैं।
आधुनिकता ने ढीठ बना डाला है,
आज इस बदलते हुये जमाने ने,
आदित्य मात-पिता प्रेम भाव ही,
भुला दिया उल्टे उनको समझाने में।
•कर्नल आदि शंकर मिश्र ‘आदित्य’
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