बरहज/देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)l मंगलवार की दोपहर पूर्वी नगरपालिका के पटेल नगर की दर्जनों महिलाओं ने स्वामीनाथ यादव के नेतृत्व में तहसील परिसर में विद्युत विभाग के खिलाफ जमकर प्रदर्शन करते हुए महिलाओं ने स्मार्ट मीटर हटाकर पुराने को मीटर लगाने की मांग की।
प्रदर्शनकारी महिलाओं का आरोप है कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद हर महीने वास्तविक खपत से अधिक बिल आ रहा है। कई उपभोक्ताओं ने कहा कि एकमुश्त समाधान योजना में पूरा बकाया राशि जमा कर दिया गया है, फिर भी बिल में अधिभार और बकाया दिख रहा है जिससे कि उपभोक्ता परेशान हैं।
महिलाओं ने बताया कि एसडीएम ने समाधान के लिए मंगलवार को तहसील बुलाया था, लेकिन मौके पर कोई भी जिम्मेदार अधिकारी मौजूद नहीं मिला। इससे आक्रोशित महिलाओं ने तहसील में नारेबाजी की और ज्ञापन देने के लिए अधिकारियों का इंतजार किया।
प्रदर्शन में शिवम तिवारी, छगुरी देवी, रीता देवी, तारा देवी, शकुंतला, राजमती, किरण, उषा, रिंकू, पुष्पा, सुशीला, संध्या, संगीता समेत दर्जनों महिलाएं शामिल रहीं। सभी ने चेतावनी दी कि समस्या का समाधान न हुआ तो आंदोलन तेज किया जाएगा।
स्मार्ट मीटर मे ज्यादा बिल आने को लेकर महिलाओं का प्रदर्शन
महाराणा प्रताप इंटर कॉलेज के छात्र आदर्श गिरी ने JEE में लहराया परचम
आदर्श की सफलता से विद्यालय में हर्ष का माहौल
गोरखपुर(राष्ट्र की परम्परा)l महाराणा प्रताप इंटर कॉलेज के मेधावी छात्र आदर्श गिरी ने संयुक्त प्रवेश परीक्षा (JEE Main) 2026 में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर विद्यालय और अपने परिवार का नाम रोशन किया है। आदर्श ने 99.4337132 परसेंटाइल अंक प्राप्त कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है।
आदर्श गिरी विद्यालय के एक नियमित छात्र हैं और अंग्रेजी माध्यम में शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। उनकी इस उपलब्धि पर विद्यालय परिवार में हर्ष का माहौल है। आदर्श की सफलता का सफर उनकी कड़ी मेहनत और निरंतर लगन का परिणाम है। साधारण पृष्ठभूमि से आने वाले आदर्श के पिता सुशील गिरी एक निजी कंपनी में कार्यरत हैं। अपनी सीमित संसाधनों के बावजूद, आदर्श ने विद्यालय की कक्षाओं के साथ-साथ स्वयं के आत्म-अध्ययन को प्राथमिकता दी और इस प्रतिष्ठित मुकाम को हासिल किया।
विद्यालय के प्रधानाचार्य डॉ. अरुण कुमार सिंह ने आदर्श की इस शानदार सफलता पर उन्हें हार्दिक बधाई दी। उन्होंने कहा, आदर्श की यह उपलब्धि हम सभी के लिए अत्यंत गर्व का विषय है। उसने साबित कर दिया है कि विद्यालय में मिलने वाली शिक्षा और दृढ़ संकल्प के मेल से किसी भी शिखर को छुआ जा सकता है। मैं उसके उज्ज्वल भविष्य की कामना करता हूँ और आशा करता हूँ कि वह आगे भी इसी प्रकार अपनी मेहनत और लगन से नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेगा।
विद्यालय के अन्य शिक्षकों ने भी आदर्श की इस उपलब्धि पर हर्ष व्यक्त करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है। शिक्षकों का कहना है कि आदर्श न केवल पढ़ाई में अनुशासित है, बल्कि वह अन्य छात्रों के लिए प्रेरणा का स्रोत भी है।
आदर्श गिरी ने अपनी इस सफलता का श्रेय अपने माता-पिता के आशीर्वाद और अपने शिक्षकों के मार्गदर्शन को दिया है। उनके इस शानदार प्रदर्शन ने न केवल विद्यालय का मान बढ़ाया है, बल्कि क्षेत्र के अन्य विद्यार्थियों के लिए भी सफलता के नए द्वार खोले हैं।
लखनऊ में एमपी-यूपी समन्वय पर चर्चा, सम्पतिया उइके और राजो मालवीय से बीटीएसएस के आनंद सिंह की मुलाकात
लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा)। राजधानी स्थित वीवीआईपी गेस्ट हाउस (साकेत) में मध्य प्रदेश सरकार की मंत्री सम्पतिया उइके तथा मध्य प्रदेश भाजपा की प्रदेश मंत्री राजो मालवीय से भारत तिब्बत समन्वय संघ (बीटीएसएस) पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र के क्षेत्रीय उपाध्यक्ष (युवा) आनंद सिंह की मुलाकात हुई। इस दौरान मध्य प्रदेश सरकार के कार्यों, भाजपा संगठन और बीटीएसएस की गतिविधियों को लेकर विस्तृत चर्चा हुई और कई महत्वपूर्ण तथ्यात्मक जानकारियां साझा की गईं।
बैठक में उत्तर प्रदेश के वर्तमान राजनीतिक और सामाजिक परिदृश्य, संगठन विस्तार, युवाओं की भागीदारी और जनसरोकार से जुड़े मुद्दों पर गंभीर मंथन किया गया। साथ ही दोनों राज्यों में संचालित विकास योजनाओं, विशेषकर पेयजल आपूर्ति और आधारभूत सुविधाओं के विस्तार को लेकर अनुभवों का आदान-प्रदान हुआ।
सम्पतिया उइके के पास लोक स्वास्थ्य अभियांत्रिकी मंत्रालय का दायित्व है, जो ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल और जल प्रबंधन से जुड़ा महत्वपूर्ण विभाग है। उत्तर प्रदेश में इसी विभाग की जिम्मेदारी स्वतंत्र देव सिंह के पास है। मंडला की मूल निवासी उइके वर्तमान में आलीराजपुर और सिंगरौली जिलों की प्रभारी मंत्री भी हैं और आदिवासी क्षेत्रों में विकास कार्यों में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।
वहीं नर्मदापुरम की निवासी राजो मालवीय भारत तिब्बत समन्वय संघ की राष्ट्रीय महामंत्री हैं। संगठन के माध्यम से राष्ट्रीय एकता, सीमावर्ती क्षेत्रों के मुद्दों और सामाजिक जागरूकता को लेकर उनके प्रयासों की भी चर्चा हुई।
मुलाकात के दौरान आपसी समन्वय को मजबूत करने, संगठनात्मक गतिविधियों को और प्रभावी बनाने तथा भविष्य में संयुक्त कार्यक्रम आयोजित करने पर सहमति बनी। दोनों नेताओं के सुलझे और सकारात्मक विचारों की सराहना करते हुए इस मुलाकात को उपयोगी और प्रेरणादायक बताया गया।
इस अवसर पर उन्हें उत्तर प्रदेश की सूचना निदर्शिनी, मथुरा का तिलक और बीटीएसएस की चाभी के गुच्छे भेंट किए गए।
रामुडीह में गेहूं के डंठल में लगी आग से पांच बच्चे झुलसे
घटना की जानकारी मिलते ही एसडीएम सदर मौके पर पहुंचे, तत्काल इलाज की व्यवस्था
गोरखपुर(राष्ट्र की परम्परा)l रामुडीह गांव में मंगलवार को एक दर्दनाक हादसा हो गया, जब खेत में पड़े गेहूं के सूखे डंठलों में लगी आग की चपेट में आकर रास्ते से गुजर रहे पांच बच्चे झुलस गए। घटना के बाद गांव में अफरा-तफरी मच गई और ग्रामीण तुरंत राहत एवं बचाव कार्य में जुट गए।
जानकारी के अनुसार, गेहूं की कटाई के बाद खेत में सूखे डंठल पड़े हुए थे, जिनमें अचानक आग लग गई। उसी दौरान पास के रास्ते से गुजर रहे पांच बच्चे आग की चपेट में आ गए और गंभीर रूप से झुलस गए। बच्चों की चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे और किसी तरह आग पर काबू पाकर उन्हें बाहर निकाला।
घटना की जानकारी मिलते ही एसडीएम सदर दीपक गुप्ता तत्काल मौके पर पहुंच गए और स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने बिना देरी किए घायलों को तुरंत अस्पताल पहुंचाने के निर्देश दिए और एम्बुलेंस की व्यवस्था कराकर बच्चों को इलाज के लिए भेजा।
प्रशासन की तत्परता से चार बच्चों को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है, जबकि एक बच्चे की हालत गंभीर होने पर उसे बेहतर उपचार के लिए बीआरडी मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया है। डॉक्टरों की टीम सभी घायलों की स्थिति पर नजर बनाए हुए है।
एसडीएम दीपक गुप्ता ने अस्पताल पहुंचकर भी बच्चों का हाल जाना और चिकित्सकों को समुचित उपचार सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने परिजनों को हर संभव सहायता का भरोसा दिलाया।
प्रारंभिक जांच में आग लगने का कारण स्पष्ट नहीं हो पाया है, हालांकि आशंका जताई जा रही है कि सूखे डंठलों में किसी चिंगारी या लापरवाही के चलते आग लगी होगी। प्रशासन द्वारा मामले की जांच कराई जा रही है।
ग्रामीणों ने बताया कि फसल कटाई के बाद खेतों में पड़े सूखे अवशेषों में अक्सर आग लग जाती है, जिससे इस तरह की घटनाएं सामने आती हैं। उन्होंने प्रशासन से ऐसे मामलों में सतर्कता और जागरूकता बढ़ाने की मांग की है।
फिलहाल सभी घायलों का इलाज जारी है और प्रशासन पूरी स्थिति पर नजर बनाए हुए है।
गोरखपुर में 1592 प्रगणकों का प्रशिक्षण शुरू, अधिकारियों ने किया निरीक्षण
गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। सदर तहसील अंतर्गत बड़े स्तर पर होने वाले सर्वेक्षण/गणना कार्य को सफल बनाने के लिए मंगलवार से त्रिस्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। यह प्रशिक्षण गोरखपुर शहर के राजकीय जुबली इंटर कॉलेज और अयोध्या प्रसाद कन्या इंटर कॉलेज में आयोजित किया जा रहा है, जहां सात-सात कक्षाओं में प्रशिक्षण सत्र संचालित हो रहे हैं।
इस कार्यक्रम के तहत कुल 1592 प्रगणकों, 261 सुपरवाइजर और 26 प्रशिक्षकों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। प्रशिक्षण को तीन चरणों में विभाजित किया गया है, जिसमें पहला चरण शुरू हो चुका है और 23 अप्रैल तक चलेगा।
अधिकारियों ने लिया जायजा
प्रशिक्षण की व्यवस्था का निरीक्षण करने के लिए एसडीएम सदर दीपक गुप्ता और तहसीलदार ज्ञान प्रताप सिंह दोनों केंद्रों पर पहुंचे। उन्होंने प्रशिक्षण ले रहे प्रगणकों, सुपरवाइजरों और प्रशिक्षकों से संवाद कर व्यवस्थाओं और प्रशिक्षण की गुणवत्ता का जायजा लिया।
अधिकारियों ने प्रतिभागियों से उनकी समस्याओं के बारे में पूछा और प्रशिक्षकों को निर्देश दिए कि सभी विषयों को सरल और स्पष्ट तरीके से समझाया जाए।
क्या बोले अधिकारी?
एसडीएम दीपक गुप्ता ने कहा कि यह प्रशिक्षण आगामी कार्यों की सफलता की नींव है, इसलिए सभी प्रतिभागी इसे गंभीरता से लें और हर पहलू को अच्छे से समझें।
वहीं तहसीलदार ज्ञान प्रताप सिंह ने कहा कि प्रगणकों और सुपरवाइजरों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है, इसलिए सभी समय पर उपस्थित रहें और निर्देशों का पालन करें।
आगे कब होंगे प्रशिक्षण के चरण?
• दूसरा चरण: 28, 29 और 30 अप्रैल
• तीसरा चरण: 4, 5 और 6 मई
इन चरणों में भी बड़ी संख्या में कार्मिकों को प्रशिक्षित किया जाएगा।
प्रशिक्षण का उद्देश्य
प्रशासन का लक्ष्य है कि सभी संबंधित कर्मचारियों को पूरी तरह प्रशिक्षित कर फील्ड में किसी भी प्रकार की त्रुटि न होने दी जाए। इसके लिए प्रशिक्षण को चरणबद्ध और व्यवस्थित तरीके से संचालित किया जा रहा है।
प्रगणकों की भूमिका क्या होती है?
• घर-घर सर्वे करना
• सही डेटा एकत्र करना
• सरकारी योजनाओं के लिए जानकारी देना
SSC GD Exam 2026: 500 किमी दूर मिले परीक्षा केंद्र से नाराज़ अभ्यर्थी, जानिए क्या है पूरा मामला और कैसे बदलें एग्जाम सेंटर
लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा)। SSC GD कांस्टेबल परीक्षा को लेकर अभ्यर्थियों में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। बड़ी संख्या में उम्मीदवारों का आरोप है कि उन्होंने आवेदन के दौरान अपने नजदीकी परीक्षा केंद्रों का चयन किया था, लेकिन इसके बावजूद उन्हें लगभग 500 किलोमीटर दूर केंद्र आवंटित कर दिया गया।
क्या है अभ्यर्थियों की समस्या?
अभ्यर्थियों का कहना है कि:
• उन्होंने 3 नजदीकी शहरों को प्राथमिकता दी थी
• फिर भी दूर के केंद्र दिए गए
• इससे यात्रा और खर्च बढ़ गया
कई छात्रों को रहने और आने-जाने में दिक्कत हो रही है।
छात्रों ने क्या कहा?
एक अभ्यर्थी ने नाराजगी जताते हुए कहा:
“हमने पास का केंद्र चुना था, फिर भी 500 किमी दूर भेज दिया गया, यह गलत है।”
सोशल मीडिया पर बढ़ा विरोध
इस मुद्दे को लेकर सोशल मीडिया पर भी विरोध तेज हो गया है। छात्र SSC से पारदर्शिता और सुधार की मांग कर रहे हैं।

एग्जाम सेंटर कैसे बदलें?
अगर आपको भी दूर सेंटर मिला है, तो ये उपाय करें:
• SSC की आधिकारिक वेबसाइट पर लॉगिन करें
• “Correction Window” (यदि उपलब्ध हो) चेक करें
• SSC हेल्पलाइन या ईमेल पर संपर्क करें
• एडमिट कार्ड आने के बाद nearest center request भेजें
नोट: हर बार center change संभव नहीं होता, लेकिन request जरूर करें।
परीक्षा के लिए तैयारी कैसे करें?
• यात्रा की पहले से योजना बनाएं
• परीक्षा से 1 दिन पहले पहुंच जाएं
• जरूरी documents साथ रखें
• समय पर एडमिट कार्ड डाउनलोड करें
छात्रों की क्या मांग है?
• नजदीकी परीक्षा केंद्र दिए जाएं
• center allotment में transparency हो
• दूर केंद्र वाले छात्रों को राहत मिले
बलिया में भीषण आग: कई घर जलकर राख, पीड़ितों को भारी नुकसान, जानिए सरकार से कैसे मिलेगा मुआवजा
बलिया (राष्ट्र की परम्परा)। सिकंदरपुर क्षेत्र के भीमहर गांव में उस समय हड़कंप मच गया जब आग की चिंगारी ने विकराल रूप धारण कर लिया। बताया जा रहा है कि पास के डुबोली गांव में गेहूं की पराली जलाने के दौरान उठी चिंगारी तेज हवा के कारण फैलते हुए भीमहर गांव तक पहुंच गई।
देखते ही देखते आग ने कई झोपड़ियों को अपनी चपेट में ले लिया और ग्रामीणों के बीच अफरा-तफरी मच गई। लोगों ने आग बुझाने की काफी कोशिश की, लेकिन तेज हवा के कारण आग पर काबू पाना मुश्किल हो गया।
कितने लोगों को हुआ नुकसान?
इस हादसे में कई परिवारों को भारी नुकसान उठाना पड़ा, जिनमें शामिल हैं:
अक्षय लाल, लक्ष्मण राम, जगलाल, संतोष राम, देवेन्द्र राम, वीरेन्द्र राम, आजाद राम, चन्द्रशेखर राम, नन्दलाल और परमेश्वर राम।
इनके घर, अनाज, कपड़े, जेवर और नगदी पूरी तरह जलकर नष्ट हो गए।
कुछ परिवारों के शादी के लिए रखे गए सामान भी आग में जल गए।
कितना नुकसान हुआ?
• 4 झोपड़ियां पूरी तरह जलकर राख
• लगभग 40 मन भूसा नष्ट
• बड़ी मात्रा में अनाज जल गया
कई परिवार अब खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं।
प्रशासन की क्या कार्रवाई?
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन मौके पर पहुंचा और राहत कार्य शुरू कराया। पीड़ितों को जल्द सहायता दिलाने का आश्वासन दिया गया है।

ये भी पढ़े- बलिया में आग पीड़ितों को मिली राहत: समाजसेवी अमित वर्मा ने बांटी सामग्री, जानिए सरकार से कैसे मिलेगी मदद
आग पीड़ितों को सरकार से कैसे मिलता है मुआवजा?
ऐसे मामलों में सरकार द्वारा ये मदद दी जाती है:
• आपदा राहत कोष से आर्थिक सहायता
• अस्थायी रहने की व्यवस्था
• राशन और जरूरी सामान
• घर के नुकसान पर मुआवजा
पीड़ित व्यक्ति लेखपाल/तहसील कार्यालय में आवेदन कर सकते हैं।
मुआवजा पाने के लिए जरूरी दस्तावेज
• आधार कार्ड
• निवास प्रमाण पत्र
• बैंक खाता
• घटना की रिपोर्ट (पुलिस/राजस्व विभाग)
आग से बचने के लिए क्या करें?
• खेतों में पराली जलाते समय सावधानी रखें
• तेज हवा में आग न जलाएं
• पास में पानी या रेत रखें
• बच्चों को आग से दूर रखें
ये भी पढ़े – मणिपुर भूकंप: 5.2 तीव्रता से कांपी धरती, लोग घरों से भागे, जानिए कैसे बचें भूकंप से
जमाना गया
इक्कीसवीं शताब्दी का
छब्बीसवाँ साल आ चुका है,
आध्यात्मिकता का स्थान,
भौतिकता ने ले लिया है,
भारतीय सभ्यता और
हमारी सनातन संस्कृति में
पाश्चात्य की आधुनिकता
का मुलम्मा चढ़ चुका है।
आदित्य की बात सही है,
जमाना बहुत बदल चुका है।
सारा सिस्टम भ्रष्टाचार
की भेंट चढ़ चुका है,
केवल और केवल पैसे के
लालच में जुटा है,
जमाने से अब इंसानियत
खत्म हो चुकी है,
स्वार्थ में इन्सान इन्सान
का शत्रु बन चुका है।
आदित्य की बात सही है,
जमाना बहुत बदल चुका है।
शहर हो या देहात हो, बस
पैसे का बोलबाला है,
प्रेम, दया, क्षमा, सौहार्द,
स्वार्थ की भेंट चढ़ चुके हैं,
पराये तो पराये, अपने भी
सब पराये हो चुके हैं,
सभी सगे और दूर के रिश्ते
पैसे के साथी बन चुके हैं।
आदित्य की बात सही है,
जमाना बहुत बदल चुका है।
डा० कर्नल आदिशंकर मिश्र ‘आदित्य’
हीटवेव से फसलों की सुरक्षा के लिए कृषि विभाग ने जारी किए जरूरी दिशा-निर्देश
देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। बढ़ते तापमान और संभावित हीटवेव को देखते हुए कृषि विभाग ने किसानों को फसलों की सुरक्षा के लिए आवश्यक उपाय अपनाने की सलाह दी है। जिला कृषि अधिकारी उदय शंकर सिंह ने बताया कि लू का प्रभाव फसलों पर पड़ सकता है, ऐसे में जल व नमी संरक्षण पर विशेष ध्यान देना जरूरी है।
उन्होंने किसानों से अपील की कि फसल कटाई के बाद खेतों में अवशेष न जलाएं और नमी बनाए रखने के लिए मल्चिंग व खरपतवार नियंत्रण अपनाएं। जैव उत्पादों व फसल अवशेषों को मल्च के रूप में उपयोग करना लाभकारी बताया गया है।
सिंचाई के लिए स्प्रिंकलर और ड्रिप पद्धति अपनाने की सलाह दी गई है। साथ ही खेतों में नियमित अंतराल पर सायंकाल हल्की सिंचाई करने से नमी बनी रहती है और पानी की बचत होती है। अंतःकर्षण क्रियाओं से तैयार मल्च वाष्पीकरण को कम करने में सहायक होगा।
जिला कृषि अधिकारी ने रासायनिक उर्वरकों के बजाय जैविक खाद के उपयोग पर जोर दिया और कहा कि अधिक तापमान में रासायनिक उर्वरकों का असर फसलों पर नकारात्मक पड़ सकता है। बुवाई पंक्तियों में करने तथा खेतों को समतल रखने से सिंचाई जल का समान वितरण सुनिश्चित किया जा सकता है।
धान की नर्सरी में नमी बनाए रखने के लिए सायंकाल सिंचाई करने और अधिक जलभराव की स्थिति में तुरंत निकासी करने की सलाह भी दी गई है।
25 से 27 अप्रैल तक होगी होमगार्ड भर्ती परीक्षा, नकलविहीन कराने के सख्त निर्देश
संतकबीरनगर (राष्ट्र की परम्परा)। जनपद के 7 परीक्षा केंद्रों पर 25, 26 और 27 अप्रैल 2026 को होमगार्ड्स एनरोलमेंट-2025 की ऑफलाइन लिखित परीक्षा दो पालियों में आयोजित की जाएगी। प्रथम पाली सुबह 10:00 से 12:00 बजे तक तथा द्वितीय पाली दोपहर 3:00 से शाम 5:00 बजे तक होगी। परीक्षा को नकलविहीन व शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए प्रशासन ने कड़े निर्देश जारी किए हैं।
अपर जिलाधिकारी (वित्त व राजस्व) जयप्रकाश एवं अपर पुलिस अधीक्षक सुशील कुमार सिंह ने कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित समीक्षा बैठक व प्रशिक्षण सत्र के दौरान सेक्टर मजिस्ट्रेट, स्टेटिक मजिस्ट्रेट, केंद्र व्यवस्थापकों और संबंधित अधिकारियों को परीक्षा की शुचिता व सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। पुलिस ऑब्जर्वर ए.के. वर्मा भी इस दौरान मौजूद रहे।
अपर जिलाधिकारी ने कहा कि सभी अधिकारी सतत मॉनिटरिंग रखें और अपने दायित्वों का पूरी निष्ठा से निर्वहन करें। किसी भी प्रकार की लापरवाही या अनियमितता पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
अपर पुलिस अधीक्षक ने निर्देश दिए कि परीक्षा केंद्रों पर प्रवेश से पूर्व अभ्यर्थियों की सघन तलाशी (फ्रिस्किंग) अनिवार्य रूप से की जाए। किसी भी प्रकार के इलेक्ट्रॉनिक गैजेट या प्रतिबंधित सामग्री को अंदर ले जाना पूर्णतः वर्जित रहेगा। साथ ही केंद्रों के बाहर भीड़ नियंत्रण, यातायात व्यवस्था सुचारु रखने और संदिग्ध गतिविधियों पर पैनी नजर रखने के निर्देश दिए गए।
उन्होंने सभी पुलिसकर्मियों व केंद्र व्यवस्थापकों को समय से पूर्व ड्यूटी स्थल पर पहुंचने, सेक्टर व जोनल मजिस्ट्रेट से समन्वय बनाए रखने तथा कंट्रोल रूम को नियमित सूचना भेजने को कहा।
अपर जिलाधिकारी ने कहा कि परीक्षा की पवित्रता बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है और सभी अधिकारी टीम भावना के साथ कार्य करें, ताकि अभ्यर्थियों को निष्पक्ष व सुरक्षित वातावरण मिल सके।
बैठक में उप जिलाधिकारी खलीलाबाद हृदय राम तिवारी, अपर उप जिलाधिकारी सुधीर कुमार, क्षेत्राधिकारी यातायात प्रियम राजशेखर पांडेय, जिला विद्यालय निरीक्षक हरिश्चंद्र नाथ, वरिष्ठ कोषाधिकारी त्रिभुवन लाल, उप कृषि निदेशक डॉ. राकेश कुमार सिंह, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी अमित कुमार सिंह, जिला पूर्ति अधिकारी राजीव कुमार सहित सभी संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।
घर से निकले युवक का शव रेलवे लाइन पर मिला, परिवार में मचा कोहराम
सलेमपुर रेलवे लाइन पर मिला बनकटा निवासी का शव, क्षेत्र में सनसनी
देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। जनपद के बनकटा थाना क्षेत्र के भैसही गांव निवासी अवधेश चन्द्र जायसवाल का शव सलेमपुर रेलवे लाइन पर मिलने से इलाके में हड़कंप मच गया। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और रेलवे पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी। इस घटना के बाद परिवार में कोहराम मच गया है और गांव में शोक की लहर दौड़ गई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, मंगलवार सुबह स्थानीय लोगों ने सलेमपुर रेलवे ट्रैक पर एक व्यक्ति का शव देखा। देखते ही देखते मौके पर लोगों की भीड़ इकट्ठा हो गई। शव की पहचान बाद में बनकटा थाना क्षेत्र के भैसही गांव निवासी अवधेश चन्द्र जायसवाल के रूप में हुई। पहचान होते ही परिजनों को सूचना दी गई, जिसके बाद वे मौके पर पहुंचे और रो-रोकर उनका बुरा हाल हो गया।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सुबह के समय ट्रैक के किनारे शव पड़ा देखा गया, जिसके बाद तुरंत पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर घटनास्थल का निरीक्षण किया और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि यह हादसा है या आत्महत्या अथवा किसी अन्य कारण से हुई मौत। पुलिस सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए जांच कर रही है।
ये भी पढ़ें – बलिया में आग पीड़ितों को मिली राहत: समाजसेवी अमित वर्मा ने बांटी सामग्री, जानिए सरकार से कैसे मिलेगी मदद
परिजनों के अनुसार, अवधेश चन्द्र जायसवाल अपने घर से कब और कैसे निकले, इसकी स्पष्ट जानकारी नहीं मिल पाई है। परिवार के लोगों ने बताया कि वह सामान्य रूप से घर पर ही रहते थे और किसी प्रकार की परेशानी की जानकारी उन्हें नहीं थी। अचानक इस तरह शव मिलने से परिवार पूरी तरह सदमे में है।
घटना के बाद गांव में तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। कुछ लोग इसे ट्रेन से कटकर हुई दुर्घटना मान रहे हैं, जबकि कुछ इसे संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत बता रहे हैं। हालांकि, पुलिस ने अभी किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से इनकार किया है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है। आसपास के लोगों से पूछताछ की जा रही है और रेलवे ट्रैक के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की भी जांच की जा सकती है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के कारणों का स्पष्ट खुलासा हो सकेगा।
ये भी पढ़ें – बलिया में निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर: 120 लोगों की जांच, 35 ने किया रक्तदान, जानिए ऐसे कैंप का लाभ कैसे लें
इस घटना ने एक बार फिर रेलवे ट्रैक के आसपास सुरक्षा व्यवस्था और लोगों की सतर्कता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अक्सर रेलवे लाइनों के पास इस तरह की घटनाएं सामने आती रहती हैं, जिनमें कभी दुर्घटना तो कभी आत्महत्या के मामले सामने आते हैं। ऐसे में प्रशासन और रेलवे विभाग को इस दिशा में ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।
फिलहाल पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर विधिक कार्रवाई शुरू कर दी है। मामले की जांच जारी है और परिजनों को न्याय दिलाने का आश्वासन दिया गया है। पूरे इलाके में इस घटना को लेकर शोक और चिंता का माहौल बना हुआ है।
दिल हुए पत्थर (हिंदी कविता)
✍️ – संजय एम. तराणेकर
जहाँ दिल ‘पत्थर’ के हो जाते हैं,
वहाँ पे सोना भी पिघलता नहीं।
आँखों का पानी सूख जाता है,
दर्द फिर बाहर निकलता नहीं।
जब शब्दों में कड़वाहट भर जाए,
तब रिश्ते धीरे-धीरे टूटने लगते हैं।
जिस मन में जमा हो सन्नाटा,
वो आँसू बनकर भी छूटते नहीं।
सुनिए—थोड़ा प्रेम, थोड़ी करुणा,
जीवन को सहज बना देती है।
मीठी बोली, शांत विचार,
हर एक पीड़ा भुला देती है।
जो क्रोध, घृणा और अहंकार से,
मन का दीपक बुझ जाता है।
मौन, धैर्य और स्नेह से ही,
जीवन सच्चा होकर संवर जाता है।
बलिया में निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर: 120 लोगों की जांच, 35 ने किया रक्तदान, जानिए ऐसे कैंप का लाभ कैसे लें
सुखपुरा/बलिया (राष्ट्र की परम्परा)। ए.एस.एम. कॉन्वेंट स्कूल के संस्थापक स्व. आनंद सिंह (पिंटू) की पांचवीं पुण्यतिथि पर विद्यालय परिसर में निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर और रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लेकर स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठाया।
कार्यक्रम का शुभारंभ स्व. आनंद सिंह के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर और दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया। इस अवसर पर कई गणमान्य लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी।
शिविर में क्या-क्या सेवाएं मिलीं?
स्वास्थ्य शिविर में लोगों को विभिन्न प्रकार की मुफ्त जांच और उपचार की सुविधा दी गई:
• 70 लोगों की ब्लड प्रेशर जांच
• 75 लोगों की ब्लड शुगर जांच
• 13 महिलाओं की स्त्री रोग जांच
• 47 लोगों का एक्यूप्रेशर उपचार
• 120 लोगों की नेत्र जांच
• 32 लोगों की दंत जांच
साथ ही जरूरतमंदों को मुफ्त दवाइयां और चश्मे भी दिए गए।
रक्तदान शिविर में लोगों का उत्साह
इस कार्यक्रम का एक अहम हिस्सा रक्तदान शिविर रहा, जिसमें 35 से अधिक लोगों ने रक्तदान किया। लोगों ने “रक्तदान महादान है” की भावना के साथ समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाई।
निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर का लाभ कैसे लें?
अगर आप भी ऐसे शिविर का लाभ लेना चाहते हैं:
• अपने क्षेत्र में लगने वाले सरकारी/NGO कैंप की जानकारी लें
• आधार कार्ड या पहचान पत्र साथ रखें
• समय पर पहुंचकर रजिस्ट्रेशन कराएं
• डॉक्टर की सलाह के अनुसार जांच कराएं
ऐसे शिविरों में मुफ्त इलाज और जांच का लाभ मिलता है।
रक्तदान क्यों है जरूरी?
• एक यूनिट रक्त कई लोगों की जान बचा सकता है
• शरीर में नया रक्त बनने की प्रक्रिया तेज होती है
• स्वास्थ्य पर सकारात्मक असर पड़ता है
कार्यक्रम में कौन-कौन रहे मौजूद?
कार्यक्रम में विद्यालय प्रबंधन, शिक्षक, सामाजिक कार्यकर्ता और क्षेत्र के कई सम्मानित नागरिक उपस्थित रहे। सभी ने स्व. आनंद सिंह के समाजसेवी कार्यों को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी।
ये भी पढ़े – बलिया में आग पीड़ितों को मिली राहत: समाजसेवी अमित वर्मा ने बांटी सामग्री, जानिए सरकार से कैसे मिलेगी मदद
अक्षय तृतीया पर जिला कारागार में सजी रचनात्मकता—महिला बंदियों की मेंहदी प्रतियोगिता ने बिखेरा उत्साह
संतकबीरनगर (राष्ट्र की परम्परा)। अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर जिला कारागार में एक अनूठी और प्रेरणादायक पहल देखने को मिली, जब निरुद्ध महिला बंदियों के बीच मेंहदी प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम ने न केवल कारागार के वातावरण को सकारात्मक ऊर्जा से भर दिया, बल्कि बंदियों के भीतर छिपी प्रतिभा और रचनात्मकता को भी एक नया मंच प्रदान किया।
प्रतियोगिता में शामिल महिला बंदियों ने अपने हाथों पर बेहद खूबसूरत और कलात्मक मेंहदी डिजाइनों को उकेरकर अपनी कल्पनाशीलता का परिचय दिया। किसी ने पारंपरिक भारतीय डिजाइनों को जीवंत किया, तो किसी ने आधुनिक पैटर्न के माध्यम से अपनी कला का प्रदर्शन किया। हर प्रतिभागी के चेहरे पर उत्साह और आत्मविश्वास साफ झलक रहा था।
इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य महिला बंदियों को सकारात्मक गतिविधियों से जोड़ना और उनके मानसिक एवं भावनात्मक विकास को बढ़ावा देना था। कारागार प्रशासन का मानना है कि इस तरह की रचनात्मक गतिविधियां बंदियों के जीवन में नई उम्मीद जगाने के साथ-साथ उन्हें समाज की मुख्यधारा में पुनः जुड़ने के लिए प्रेरित करती हैं।
ये भी पढ़ें – 01 किलो 400 ग्राम अवैध गांजा के साथ गिरफ्तार
कार्यक्रम के दौरान कारागार परिसर का माहौल पूरी तरह बदल गया। जहां आम दिनों में सन्नाटा पसरा रहता है, वहीं इस विशेष अवसर पर हंसी, उत्साह और रचनात्मकता का रंग देखने को मिला। महिला बंदियों ने एक-दूसरे की कला की सराहना करते हुए स्वस्थ प्रतिस्पर्धा का परिचय दिया।
कार्यक्रम के समापन अवसर पर कारागार अधीक्षक कुलदीप सिंह ने सभी प्रतिभागियों को सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि “ऐसी गतिविधियां बंदियों के व्यक्तित्व विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। यह न केवल उनके आत्मविश्वास को बढ़ाती हैं, बल्कि उन्हें सकारात्मक सोच की ओर भी अग्रसर करती हैं।” उन्होंने आगे कहा कि भविष्य में भी इस तरह के कार्यक्रमों का आयोजन लगातार किया जाएगा, जिससे बंदियों को अपनी प्रतिभा दिखाने के अधिक अवसर मिल सकें।
इस पहल को कारागार प्रशासन के साथ-साथ समाज के विभिन्न वर्गों द्वारा भी सराहा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि सुधारात्मक गतिविधियों के माध्यम से बंदियों में सकारात्मक परिवर्तन लाना संभव है और यह आयोजन उसी दिशा में एक सार्थक कदम है।
कुल मिलाकर, यह मेंहदी प्रतियोगिता केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं थी, बल्कि यह एक प्रयास था बंदियों के जीवन में रंग भरने का, उन्हें आत्मनिर्भर और आत्मविश्वासी बनाने का। ऐसे आयोजन निश्चित रूप से समाज में सुधारात्मक न्याय प्रणाली को मजबूत करने में सहायक सिद्ध होंगे।
