Wednesday, April 29, 2026
Home Blog Page 7

नौदा में वोटिंग के बीच बमबारी: मुर्शिदाबाद में हिंसा से दहशत, कई घायल, सुरक्षा पर उठे सवाल


कोलकाता (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण के दौरान गुरुवार को मुर्शिदाबाद जिले के नौदा इलाके में हिंसा की एक गंभीर घटना ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया। मतदान के बीच अज्ञात उपद्रवियों ने देसी बमों से हमला कर दिया, जिससे कई स्थानीय लोग और मतदाता घायल हो गए। घटना के बाद पूरे इलाके में तनाव का माहौल है और मतदान केंद्रों के बाहर दहशत साफ महसूस की गई।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, हमला उस समय हुआ जब मतदाता लंबी कतारों में खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे। अचानक हुए धमाकों से पूरा इलाका दहल उठा। लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। कुछ लोगों को मौके पर ही चोटें आईं, जबकि कई घायल व्यक्तियों को तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुंचाया गया।
घटना में घायल एक व्यक्ति ने समाचार एजेंसी पीटीआई से बातचीत में कहा, “हम सिर्फ वोट डालने आए थे। हमें गालियां दी गईं और अचानक हमला कर दिया गया। हम किसी से झगड़ा नहीं कर रहे थे।” इस बयान ने पूरे घटनाक्रम की गंभीरता को और बढ़ा दिया है।
यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब निर्वाचन आयोग ने मुर्शिदाबाद को पहले ही ‘अति संवेदनशील’ घोषित किया था। सुरक्षा के मद्देनजर यहां केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) की कई कंपनियां तैनात की गई थीं। इसके अलावा, आधुनिक तकनीक के तहत ‘AI सर्विलांस’ और ‘वेबकास्टिंग’ की व्यवस्था भी लागू की गई थी, ताकि मतदान प्रक्रिया पारदर्शी और सुरक्षित रह सके। इसके बावजूद बमबारी की घटना ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
घटना के तुरंत बाद राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई। सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने इस हमले के लिए बाहरी तत्वों को जिम्मेदार ठहराया है। पार्टी का कहना है कि चुनावी माहौल को बिगाड़ने के लिए साजिश के तहत ऐसी घटनाएं कराई जा रही हैं। वहीं, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और अन्य विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि यह मतदाताओं को डराने और मतदान प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश है।
स्थानीय प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रण में लेने के लिए तुरंत अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती कर दी है। नौदा और आसपास के संवेदनशील इलाकों में गश्त बढ़ा दी गई है। पुलिस ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाने शुरू कर दिए हैं और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर संदिग्धों की पहचान की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि दोषियों को जल्द ही गिरफ्तार किया जाएगा।
चिकित्सकों के अनुसार, अस्पताल में भर्ती घायलों की हालत फिलहाल स्थिर है, हालांकि कुछ लोगों को गंभीर चोटें आई हैं। प्रशासन ने सभी घायलों को उचित इलाज का भरोसा दिलाया है। वहीं, निर्वाचन आयोग ने इस पूरे मामले पर विस्तृत रिपोर्ट तलब की है और अधिकारियों से जवाब मांगा है।
इस घटना ने एक बार फिर चुनावी हिंसा के पुराने सवालों को जिंदा कर दिया है। लोकतंत्र के सबसे बड़े पर्व के दौरान इस तरह की घटनाएं न केवल मतदाताओं के मन में भय पैदा करती हैं, बल्कि चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर भी असर डालती हैं। हालांकि प्रशासन का दावा है कि हालात नियंत्रण में हैं और मतदान प्रक्रिया जारी है, लेकिन नौदा की घटना ने चुनावी सुरक्षा व्यवस्था की चुनौतियों को उजागर कर दिया है।

अनिशा पाण्डेय मृत्यु प्रकरण में बड़ा मोड़, हाईकोर्ट ने डॉक्टरों की गिरफ्तारी पर लगाई अंतरिम रोक

बलिया (राष्ट्र की परम्परा)।जनपद के चर्चित अनिशा पाण्डे मृत्यु प्रकरण में अब एक अहम कानूनी मोड़ सामने आया है, जिसने पूरे मामले को नई दिशा दे दी है। अपूर्वा नर्सिंग होम में 22 मार्च को पथरी के ऑपरेशन के दौरान हुई इस दर्दनाक घटना ने न केवल परिजनों को झकझोर दिया था, बल्कि पूरे क्षेत्र में आक्रोश और सवालों का माहौल पैदा कर दिया था। इलाज में लापरवाही के आरोपों के बीच मामला न्यायालय तक पहुंचा और अब इस पर महत्वपूर्ण अंतरिम फैसला सामने आया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, माननीय उच्च न्यायालय ने इस मामले में आरोपी चिकित्सकों को फिलहाल राहत देते हुए उनकी गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगा दी है। यह राहत अस्थायी रूप से दी गई है, जिससे संबंधित डॉक्टरों को अपनी बात रखने और कानूनी प्रक्रिया के तहत अपना पक्ष मजबूती से प्रस्तुत करने का अवसर मिल सके।
न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि आरोपी पक्ष को तीन सप्ताह के भीतर शपथ पत्र (अफिडेविट) के साथ अपना प्रत्युत्तर दाखिल करना होगा। यह निर्देश इस बात का संकेत है कि अदालत मामले की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए दोनों पक्षों को सुनने के बाद ही कोई अंतिम निर्णय लेना चाहती है। न्यायालय की इस संतुलित दृष्टिकोण से यह स्पष्ट है कि न्याय प्रक्रिया को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाए रखने का पूरा प्रयास किया जा रहा है।
गौरतलब है कि अनिशा पाण्डे की मृत्यु के बाद उनके परिजनों ने इलाज में गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया था। उनका कहना था कि ऑपरेशन के दौरान चिकित्सकीय मानकों का पालन नहीं किया गया, जिसके चलते मरीज की जान चली गई। इस घटना के बाद स्थानीय लोगों में भी भारी रोष देखा गया और निजी नर्सिंग होम्स की कार्यप्रणाली तथा स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे।
दूसरी ओर, आरोपी डॉक्टरों का पक्ष इससे अलग है। उनका कहना है कि उन्होंने उपचार के दौरान सभी आवश्यक सावधानियों और चिकित्सा मानकों का पालन किया था। उनके अनुसार यह एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना है, जिसे लापरवाही का परिणाम नहीं कहा जा सकता। इस विरोधाभासी स्थिति ने मामले को और भी जटिल बना दिया है, जिसके चलते न्यायालय की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो गई है।
फिलहाल, न्यायालय के आदेश के बाद डॉक्टरों को अस्थायी राहत जरूर मिली है, लेकिन यह अंतिम निर्णय नहीं है। मामले की अगली सुनवाई 25 मई 2026 को निर्धारित की गई है। उस दिन दोनों पक्षों के तर्क, साक्ष्य और प्रस्तुत दस्तावेजों के आधार पर आगे की प्रक्रिया तय होगी।
इस पूरे प्रकरण पर जनपद की नजरें टिकी हुई हैं। एक ओर जहां पीड़ित परिवार न्याय की उम्मीद लगाए बैठा है, वहीं दूसरी ओर चिकित्सा समुदाय भी इस मामले के निष्कर्ष को लेकर चिंतित है। यह मामला न केवल एक व्यक्ति की मौत तक सीमित है, बल्कि इससे स्वास्थ्य सेवाओं की विश्वसनीयता और जवाबदेही जैसे बड़े मुद्दे भी जुड़े हुए हैं।
आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि न्यायालय इस संवेदनशील मामले में क्या अंतिम निर्णय देता है। तब तक के लिए यह मामला जनचर्चा और कानूनी बहस का केंद्र बना रहेगा।

सुभाष चौक पर बेकाबू कार का कहर: तेज रफ्तार होंडा सिटी ने तीन युवकों को मारी टक्कर, दो की हालत गंभीर

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। जनपद के घुघली थाना क्षेत्र में बुधवार देर रात एक तेज रफ्तार कार ने सड़क पर चल रहे तीन युवकों को टक्कर मार दी। इस हादसे ने पूरे इलाके में दहशत और अफरा-तफरी का माहौल पैदा कर दिया। घटना रात करीब 9:20 बजे घुघली कस्बे के व्यस्त सुभाष चौक पर हुई, जहां एक अनियंत्रित होंडा सिटी कार अचानक राहगीरों पर चढ़ गई।प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कार चालक तेज गति में वाहन चला रहा था और वाहन पर उसका नियंत्रण नहीं रहा। अचानक संतुलन बिगड़ने के बाद कार सड़क किनारे खड़े तीन युवकों को जोरदार टक्कर मारते हुए आगे बढ़ गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि तीनों युवक दूर जा गिरे और गंभीर रूप से घायल हो गए।हादसे के तुरंत बाद स्थानीय लोगों की भारी भीड़ मौके पर जुट गई। कुछ देर के लिए स्थिति बेहद तनावपूर्ण हो गई, लेकिन पुलिस की तत्परता से हालात को जल्द ही संभाल लिया गया। घटना की सूचना मिलते ही चौकी प्रभारी कस्बा घुघली पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और राहत एवं बचाव कार्य शुरू कराया।पुलिस और स्थानीय नागरिकों की मदद से घायलों को तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र घुघली पहुंचाया गया। घायलों की पहचान सुधांशु (30 वर्ष), समीउल्लाह (30 वर्ष) और देवेंद्र सिंह (23 वर्ष) के रूप में हुई है। प्राथमिक उपचार के बाद चिकित्सकों ने सुधांशु और समीउल्लाह की हालत गंभीर देखते हुए उन्हें संयुक्त जिला चिकित्सालय महराजगंज रेफर कर दिया, जबकि देवेंद्र सिंह का इलाज स्थानीय स्तर पर जारी है।

डॉक्टरों के अनुसार दोनों गंभीर घायलों को सिर और शरीर के अन्य हिस्सों में गंभीर चोटें आई हैं। उनकी हालत पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। वहीं तीसरे घायल की स्थिति स्थिर बताई जा रही है।घटना के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दुर्घटनाग्रस्त कार को अपने कब्जे में ले लिया है। वाहन चालक की पहचान करने और उसे गिरफ्तार करने के लिए पुलिस टीम सक्रिय हो गई है। आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है, ताकि हादसे के सही कारणों का पता लगाया जा सके।थानाध्यक्ष घुघली कुंवर गौरव सिंह ने बताया कि मामले में विधिक कार्रवाई की जा रही है और दोषी चालक के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने लोगों से अपील की कि सड़क पर वाहन चलाते समय सावधानी बरतें और निर्धारित गति सीमा का पालन करें।इस घटना ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। तेज रफ्तार और लापरवाही से वाहन चलाना न केवल चालक बल्कि आम नागरिकों के लिए भी जानलेवा साबित हो सकता है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि सुभाष चौक जैसे भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में यातायात नियंत्रण के लिए सख्त कदम उठाए जाएं, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।फिलहाल पुलिस मामले की हर पहलू से जांच कर रही है और घायलों के परिजनों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया गया है।

न्याय को जन-जन तक पहुंचाने का मिशन तेज, मऊ में बड़ा प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित

पराविधिक स्वयंसेवकों के प्रशिक्षण से न्याय व्यवस्था को मिलेगी नई मजबूती: संजय कुमार यादव


मऊ (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। समाज के अंतिम व्यक्ति तक न्याय पहुंचाने की दिशा में पराविधिक स्वयंसेवकों की भूमिका बेहद अहम है। इसी उद्देश्य को साकार करने के लिए 22 अप्रैल 2026 को उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ के निर्देशन में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, मऊ द्वारा संवर्धन योजना के अंतर्गत क्लस्टर आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रम का भव्य शुभारंभ किया गया। इस कार्यक्रम का उद्घाटन माननीय जनपद न्यायाधीश एवं अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, मऊ श्री संजय कुमार यादव द्वारा मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन कर किया गया।
कार्यक्रम में पीठासीन अधिकारी मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण श्री चन्द्रगुप्त, प्रधान न्यायाधीश परिवार न्यायालय, अपर जनपद न्यायाधीश एफटीसी श्री दीप नारायण तिवारी, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट डॉ. कृष्ण प्रताप सिंह, सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण श्रीमती साक्षी सिंह तथा पुलिस अधीक्षक मऊ श्री कमलेश बहादुर सिंह सहित अनेक वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
इस अवसर पर विभिन्न जनपदों एवं मऊ जिले के उत्कृष्ट कार्य करने वाले पराविधिक स्वयंसेवकों (पीएलवी) एवं अधिकार मित्रों को प्रशस्ति पत्र एवं स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। यह सम्मान न केवल उनके कार्यों की सराहना था, बल्कि अन्य स्वयंसेवकों के लिए प्रेरणा का स्रोत भी बना।
माननीय जनपद न्यायाधीश श्री संजय कुमार यादव ने अपने संबोधन में कहा कि पराविधिक स्वयंसेवक न्याय प्रणाली और आम जनता के बीच सेतु का कार्य करते हैं। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि समाज के कमजोर, वंचित एवं जरूरतमंद वर्गों तक विधिक सहायता पहुंचाना इनका मुख्य दायित्व है। यदि ये स्वयंसेवक लोगों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करते हैं, तो न्याय व्यवस्था और अधिक सशक्त हो सकती है।
पुलिस अधीक्षक श्री कमलेश बहादुर सिंह ने कहा कि पराविधिक स्वयंसेवकों से केवल कानून की जानकारी फैलाने की ही अपेक्षा नहीं है, बल्कि वे छोटे-छोटे विवादों को आपसी समझदारी और संवाद के माध्यम से सुलझाने में भी अहम भूमिका निभा सकते हैं। इससे न्यायालयों पर भार कम होगा और समाज में सौहार्द बढ़ेगा।
कार्यक्रम का संचालन करते हुए सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, मऊ श्रीमती साक्षी सिंह ने नालसा की विभिन्न योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने विशेष रूप से नालसा साथी योजना, वरिष्ठ नागरिकों के लिए संचालित योजनाएं तथा मानव तस्करी और व्यावसायिक यौन शोषण के पीड़ितों के लिए उपलब्ध सहायता योजनाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि इन योजनाओं का उद्देश्य समाज के कमजोर वर्गों को न्याय दिलाना और उन्हें सशक्त बनाना है।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में देवरिया, महाराजगंज, कुशीनगर और बलिया जिलों के जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिवों ने भी भाग लिया और पराविधिक स्वयंसेवकों को विभिन्न योजनाओं के बारे में जानकारी दी। इससे प्रतिभागियों को व्यापक अनुभव और ज्ञान प्राप्त हुआ।
इसके अतिरिक्त जिला प्रोबेशन अधिकारी डॉ. श्वेता त्रिपाठी, सहायक श्रमायुक्त श्री प्रभात कुमार सिंह और समाज कल्याण अधिकारी श्री अनुज कुमार ने भी शासन द्वारा संचालित विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इन योजनाओं का लाभ जरूरतमंद लोगों तक पहुंचाना सभी का सामूहिक दायित्व है।
यह प्रशिक्षण कार्यक्रम न केवल पराविधिक स्वयंसेवकों के कौशल को विकसित करने का माध्यम बना, बल्कि उन्हें समाज में न्याय और अधिकारों के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए प्रेरित भी किया। कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों ने संकल्प लिया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में लोगों को विधिक जानकारी देकर उन्हें सशक्त बनाएंगे।

ज़ेप्टो आईपीओ और भारत का रिटेल युद्ध: 10 मिनट डिलीवरी बनाम किराना अस्तित्व


भारत का खुदरा बाजार एक निर्णायक मोड़ पर खड़ा है। एक ओर सदियों पुराना पारंपरिक किराना मॉडल है, जो सामाजिक और आर्थिक संरचना की रीढ़ रहा है, वहीं दूसरी ओर तकनीक और पूंजी से संचालित क्विक-कॉमर्स मॉडल तेजी से अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है।
हालिया रिपोर्ट्स के अनुसार भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड ने Zepto के लगभग 11,000–12,000 करोड़ रुपये के प्रस्तावित आईपीओ को सैद्धांतिक मंजूरी दी है। यह आईपीओ 2026 के मध्य (जुलाई–सितंबर) के बीच बाजार में आ सकता है।
यह केवल एक वित्तीय प्रक्रिया नहीं, बल्कि भारत के रिटेल सेक्टर के भविष्य को लेकर उठता बड़ा सवाल है।
किराना दुकानों की सामाजिक और आर्थिक भूमिका
भारत में किराना दुकानें सिर्फ व्यापार नहीं हैं, बल्कि सामाजिक जीवन का अहम हिस्सा हैं।
ये दुकानें भरोसे, उधार व्यवस्था और व्यक्तिगत संबंधों पर आधारित होती हैं।
स्थानीय अर्थव्यवस्था का प्रवाह इन्हीं छोटे व्यापारों के माध्यम से चलता है।
लेकिन बदलते समय में उपभोक्ता सुविधा, गति और डिजिटल अनुभव को प्राथमिकता दे रहे हैं, जिससे पारंपरिक मॉडल पर दबाव बढ़ रहा है।

क्विक-कॉमर्स और डार्क स्टोर मॉडल
क्विक-कॉमर्स कंपनियां “डार्क स्टोर” मॉडल पर काम करती हैं, जो केवल ऑनलाइन ऑर्डर पूरे करने के लिए बनाए गए गोदाम होते हैं।
इससे पारंपरिक सप्लाई चेन कमजोर होती है और डिस्ट्रीब्यूटर्स तथा छोटे दुकानदारों की भूमिका घटती जाती है।
10 मिनट डिलीवरी, भारी छूट और ऐप आधारित सुविधा उपभोक्ताओं को तेजी से आकर्षित कर रही है, जिससे किराना दुकानों की बिक्री प्रभावित हो रही है।
व्यापारियों की चेतावनी और रोजगार संकट
हजारों डिस्ट्रीब्यूटर्स ने नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर चेतावनी दी है कि यदि इस सेक्टर को बिना नियंत्रण विस्तार दिया गया, तो लाखों किराना दुकानें बंद हो सकती हैं।
अनुमान के अनुसार
वित्त वर्ष 2025 में लगभग 2 लाख दुकानें बंद हुईं
वित्त वर्ष 2026 में यह संख्या 10 लाख तक पहुंच सकती है
यह स्थिति केवल व्यापार नहीं बल्कि करोड़ों लोगों के रोजगार और जीवन पर असर डाल सकती है।
ज़ेप्टो का दृष्टिकोण और विस्तार रणनीति
2020 में स्थापित Zepto ने तेजी से विकास किया है।
कंपनी का राजस्व FY24 में लगभग 4,454 करोड़ रुपये से बढ़कर FY25 में लगभग 9,669 करोड़ रुपये होने का अनुमान है।
हालांकि कंपनी अभी भी भारी निवेश और सब्सिडी पर निर्भर है।
आईपीओ के माध्यम से जुटाई गई पूंजी से कंपनी अपने डार्क स्टोर्स और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क का विस्तार करना चाहती है।
वैश्विक परिदृश्य और संभावित खतरे
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ई-कॉमर्स के विस्तार ने पारंपरिक रिटेल को चुनौती दी है।
Amazon और Walmart के बीच प्रतिस्पर्धा इसका उदाहरण है।
विशेषज्ञों का मानना है कि शुरुआती दौर में भारी छूट देकर बाजार कब्जाने के बाद कंपनियां कीमतों को नियंत्रित कर सकती हैं, जिससे एकाधिकार की स्थिति बन सकती है।
सरकार की भूमिका और संभावित समाधान
सरकार के सामने चुनौती है कि वह नवाचार को बढ़ावा देते हुए पारंपरिक व्यापार की सुरक्षा भी सुनिश्चित करे।
संभावित समाधान
डार्क स्टोर पर नियंत्रण
प्रिडेटरी प्राइसिंग पर रोक
किराना दुकानों का डिजिटलीकरण
हाइब्रिड रिटेल मॉडल को बढ़ावा
भविष्य की दिशा और निष्कर्ष
Zepto का आईपीओ भारत के आर्थिक भविष्य की दिशा तय करने वाला संकेत है।
यह संघर्ष तकनीक बनाम परंपरा का नहीं, बल्कि संतुलन का है।
यदि सही नीति और समन्वय अपनाया गया तो यह बदलाव अवसर बन सकता है।
अन्यथा 10 मिनट की डिलीवरी की यह दौड़ लाखों लोगों की आजीविका पर भारी पड़ सकती है।

संकलनकर्ता लेखक – कर विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए(एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र 

उत्तर बंगाल बना चुनावी रणभूमि, पहले चरण में दिखा जनता का जोश

पश्चिम बंगाल में पहले चरण का मतदान शुरू, 152 सीटों पर लोकतंत्र का महासंग्राम


कलकत्ता (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के पहले चरण की शुरुआत बृहस्पतिवार सुबह कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच हो गई। उत्तर में दार्जिलिंग की पहाड़ियों से लेकर दक्षिण के मैदानी क्षेत्रों तक फैले 152 विधानसभा क्षेत्रों में सुबह सात बजे से ही मतदान केंद्रों पर लंबी कतारें देखने को मिलीं। यह चरण न केवल सीटों की संख्या के लिहाज से अहम है, बल्कि राज्य की राजनीतिक दिशा तय करने वाला भी माना जा रहा है।
राज्य की कुल 294 सीटों में से आधे से अधिक पर इस चरण में मतदान हो रहा है, जिससे इसका महत्व और बढ़ जाता है। चुनावी माहौल में मतदाताओं का उत्साह साफ दिखाई दे रहा है, खासकर महिलाओं और युवाओं की भागीदारी उल्लेखनीय है।
प्रधानमंत्री Narendra Modi ने मतदाताओं से बढ़-चढ़कर मतदान करने की अपील की है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा कि लोकतंत्र के इस पर्व में हर नागरिक को अपनी भागीदारी सुनिश्चित करनी चाहिए, विशेषकर युवा और महिलाएं बड़ी संख्या में मतदान करें।
निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के अनुसार, इस चरण में 3.60 करोड़ से अधिक मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। इनमें करीब 1.75 करोड़ महिला मतदाता और 465 थर्ड जेंडर मतदाता शामिल हैं। चुनाव को शांतिपूर्ण और निष्पक्ष बनाने के लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की लगभग 2,450 कंपनियां, यानी करीब 2.5 लाख जवान, विभिन्न संवेदनशील क्षेत्रों में तैनात किए गए हैं।

ये भी पढ़ें – देवरिया में संचारी रोग नियंत्रण अभियान तेज, गांव-गांव जागरूकता

आयोग ने 8,000 से अधिक मतदान केंद्रों को अति संवेदनशील घोषित किया है। मालदा, मुर्शिदाबाद, उत्तर दिनाजपुर, कूचबिहार, बीरभूम और पूर्व बर्धमान जैसे जिलों को विशेष निगरानी में रखा गया है। प्रशासन की ओर से लगातार निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की जा रही है, ताकि किसी भी प्रकार की गड़बड़ी को रोका जा सके।
राजनीतिक दृष्टि से यह चरण खास तौर पर उत्तर बंगाल के कारण महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जहां की सभी 54 सीटों पर मतदान हो रहा है। 2019 के लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने इसी क्षेत्र में मजबूत प्रदर्शन किया था, जिसने 2021 के विधानसभा चुनाव में उसे एक प्रमुख चुनौतीकर्ता के रूप में स्थापित किया।
2021 के चुनाव परिणामों पर नजर डालें तो इन 152 सीटों में से भाजपा ने 59 सीटें जीती थीं, जबकि Mamata Banerjee के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस ने 93 सीटों पर जीत दर्ज की थी। ऐसे में इस बार भाजपा के लिए उत्तर बंगाल में अपनी पकड़ बनाए रखना बेहद जरूरी है, जबकि तृणमूल कांग्रेस की कोशिश होगी कि वह भाजपा को बड़ी बढ़त लेने से रोके।
इस चरण में कई बड़े राजनीतिक चेहरे मैदान में हैं, जिससे मुकाबला और दिलचस्प हो गया है। नंदीग्राम से Suvendu Adhikari, माथाभांगा से निशीथ प्रमाणिक, दिनहाटा से उदयन गुहा, सिलीगुड़ी से गौतम देव और बहरामपुर से Adhir Ranjan Chowdhury जैसे दिग्गज उम्मीदवार चुनावी मैदान में हैं।
इस बार का चुनाव इसलिए भी खास है क्योंकि इससे पहले मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण किया गया था, जिसमें करीब 91 लाख नाम हटाए गए। इसे लेकर राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी देखने को मिला।
चुनाव के अगले चरण 29 अप्रैल को होंगे, जबकि मतगणना 4 मई को की जाएगी। पहले चरण का मतदान यह संकेत देगा कि राज्य की जनता किस दिशा में अपना समर्थन दे रही है और आगे की राजनीतिक रणनीति किस तरह तय होगी।

अमेरिका में बढ़ती मुस्लिम-विरोधी बयानबाजी: लोकतंत्र और सामाजिक सौहार्द के लिए खतरे की घंटी

लेखक: राजकुमार अग्रवाल

संयुक्त राज्य अमेरिका में शुरुआती 2025 से रिपब्लिकन पार्टी के निर्वाचित अधिकारियों द्वारा मुस्लिम-विरोधी बयानबाजी में चिंताजनक और नाटकीय वृद्धि देखी गई है। सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ ऑर्गनाइज्ड हेट (CSOH) की रिपोर्ट के अनुसार, कांग्रेस के रिपब्लिकन सदस्यों और गवर्नरों ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया खातों से 1,100 से अधिक पोस्ट साझा किए, जिनमें मुस्लिम अमेरिकियों को लेकर साजिश सिद्धांतों को बढ़ावा दिया गया।
इन पोस्ट्स में मुसलमानों के निर्वासन और नागरिकता समाप्त करने जैसी मांगें उठाई गईं, इस्लाम का नकारात्मक चित्रण किया गया, और मुस्लिम आबादी वाले शहरों को “आक्रमण” या “कब्जा” बताया गया। इतना ही नहीं, घरेलू आतंकवादी घटनाओं का इस्तेमाल कर मुसलमानों को बदनाम करने की कोशिश की गई, भले ही उन घटनाओं का मुसलमानों से कोई संबंध न हो।
इस तरह की भाषा और विचारधारा समाज में भय और घृणा का माहौल तैयार करती है। यह “डेंजरस स्पीच” की श्रेणी में आती है, क्योंकि इससे लोगों में किसी समुदाय के खिलाफ हिंसा को उचित ठहराने की प्रवृत्ति बढ़ सकती है। स्थिति और भी गंभीर इसलिए हो जाती है क्योंकि यह बयानबाजी निर्वाचित जनप्रतिनिधियों द्वारा की जा रही है, जिससे इसे वैधता का आभास मिलता है।
रिपोर्ट के अनुसार, फरवरी 2025 से मार्च 2026 के बीच 46 रिपब्लिकन अधिकारियों ने मुस्लिम अमेरिकियों को निशाना बनाते हुए 1,111 पोस्ट किए। इस अवधि में ऐसे पोस्ट्स की संख्या में 1,450 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इनमें से पांच कांग्रेस सदस्यों ने कुल पोस्ट्स का 73 प्रतिशत हिस्सा बनाया, जबकि टेक्सास और फ्लोरिडा के नेताओं का योगदान 71 प्रतिशत रहा।

ये भी पढ़ें – संतकबीरनगर में सड़क सुरक्षा सख्त: ब्लैक स्पॉट पर रम्बल स्ट्रिप अनिवार्य

“शरिया” से जुड़ी साजिशें लगभग आधे पोस्ट्स में दिखाई दीं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह अभियान एक विशेष नैरेटिव के तहत संचालित किया गया। “आक्रमण”, “इस्लामीकरण” और “विजय” जैसे शब्दों का प्रयोग कर मुसलमानों को एक खतरे के रूप में प्रस्तुत किया गया। लगभग एक-तिहाई पोस्ट्स में मुसलमानों को आतंकवाद और राष्ट्रीय सुरक्षा के नजरिए से जोड़कर देखा गया।
इसके साथ ही, इस बयानबाजी का असर विधायी स्तर पर भी दिखा। जून 2025 से मार्च 2026 के बीच “शरिया” का उल्लेख करने वाले आठ विधेयक पेश किए गए। दिसंबर 2025 में “शरिया-फ्री अमेरिका” कैकस की स्थापना हुई, जो कुछ ही महीनों में 62 सदस्यों तक पहुंच गई। कुल मिलाकर 89 रिपब्लिकन अधिकारियों ने इस अभियान के किसी न किसी रूप में भाग लिया।
इस पूरे अभियान की शुरुआत 24 फरवरी 2025 को टेक्सास के गवर्नर द्वारा एक सोशल मीडिया पोस्ट से हुई, जिसमें एक प्रस्तावित मुस्लिम हाउसिंग प्रोजेक्ट को “शरिया शहर” बताया गया। इसके बाद यह मुद्दा तेजी से फैलता गया और सोशल मीडिया से लेकर विधायिका तक पहुंच गया।

ये भी पढ़ें – देवरिया में संचारी रोग नियंत्रण अभियान तेज, गांव-गांव जागरूकता

यह घटनाक्रम केवल अमेरिका तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक स्तर पर सामाजिक समरसता और लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए एक चेतावनी है। जब सार्वजनिक पदों पर बैठे लोग किसी विशेष समुदाय के खिलाफ इस तरह की भाषा का प्रयोग करते हैं, तो इससे न केवल उस समुदाय की सुरक्षा खतरे में पड़ती है, बल्कि समाज में विभाजन और अविश्वास भी गहराता है।
लोकतंत्र की मजबूती के लिए आवश्यक है कि राजनीतिक नेतृत्व जिम्मेदार और समावेशी भाषा का उपयोग करे। किसी भी प्रकार की घृणा और भेदभाव को बढ़ावा देना अंततः पूरे समाज के लिए हानिकारक सिद्ध होता है।

UP Board Result 2026: आज जारी होगा रिजल्ट, ऐसे करें तुरंत चेक

लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा)। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (UPMSP) आज यानी 23 अप्रैल 2026 को कक्षा 10वीं और 12वीं का रिजल्ट जारी करने जा रहा है। बोर्ड की ओर से शाम 4 बजे रिजल्ट घोषित किया जाएगा।

रिजल्ट जारी होते ही छात्र-छात्राएं आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर अपना परिणाम देख सकेंगे।

कहां देखें रिजल्ट?

छात्र इन वेबसाइट्स पर जाकर रिजल्ट चेक कर सकते हैं:

http://upmsp.edu.in
http://upresults.nic.in

रिजल्ट देखने के लिए रोल नंबर जरूरी होगा।

कब हुई थी परीक्षा?

यूपी बोर्ड की 12वीं की परीक्षा:

• 18 फरवरी से 12 मार्च 2026 तक आयोजित हुई थी
• अब छात्रों का इंतजार खत्म होने जा रहा है।

ऐसे करें रिजल्ट चेक (Step-by-Step)

रिजल्ट देखने के लिए ये आसान स्टेप्स फॉलो करें:

• आधिकारिक वेबसाइट खोलें
• “UP Board Result 2026” लिंक पर क्लिक करें
• अपना रोल नंबर दर्ज करें
• Submit पर क्लिक करें
• आपका रिजल्ट स्क्रीन पर दिखाई देगा

रिजल्ट डाउनलोड करके प्रिंट जरूर निकाल लें।

जल्दी रिजल्ट देखने के ट्रिक्स

ज्यादा ट्रैफिक के कारण वेबसाइट स्लो हो सकती है, ऐसे में:

• अलग-अलग डिवाइस (मोबाइल/लैपटॉप) पर साइट खोलें
• बार-बार refresh करें
• दूसरी वेबसाइट्स भी ट्राई करें

मार्कशीट में क्या नया?

इस बार यूपी बोर्ड की मार्कशीट में कई बदलाव किए गए हैं:

• A4 साइज की मार्कशीट
• नया मोनोग्राम (सूरज की रोशनी में रंग बदलेगा)
• ज्यादा सुरक्षित और छेड़छाड़-रोधी

जरूरी सलाह

रिजल्ट देखने के बाद:

• सभी डिटेल्स ध्यान से चेक करें
• किसी भी गलती पर तुरंत स्कूल से संपर्क करें

देवरिया में खेत की आग से दर्दनाक हादसा, झोपड़ी जली, दिव्यांग महिला की मौत

बरहज/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। जनपद के बरहज थाना क्षेत्र के कोटवा देवरा गांव में बुधवार दोपहर एक दर्दनाक हादसा हो गया। खेत में लगी आग ने विकराल रूप धारण कर लिया और पास में बनी झोपड़ी को अपनी चपेट में ले लिया। इस हादसे में झोपड़ी में मौजूद एक दिव्यांग महिला की झुलसकर मौत हो गई।

कैसे हुआ हादसा?

प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम पैना निवासी श्रीकिशुन ने दियारा क्षेत्र में फसलों और पशुओं की देखरेख के लिए एक झोपड़ी बना रखी थी। बुधवार दोपहर अज्ञात कारणों से खेत में गेहूं के डंठलों में आग लग गई। तेज पछुआ हवा के कारण आग तेजी से फैलती हुई झोपड़ी तक पहुंच गई।

महिला की दर्दनाक मौत

उस समय झोपड़ी में श्रीकिशुन की 40 वर्षीय दिव्यांग पत्नी बच्ची देवी अकेली मौजूद थीं।
आग की लपटें तेज होने के कारण उन्हें बाहर निकलने का मौका नहीं मिल सका।

ग्रामीणों ने बचाने का प्रयास किया, लेकिन झोपड़ी पूरी तरह जल चुकी थी और महिला गंभीर रूप से झुलस गई थीं। उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।

मौके पर पहुंचे अधिकारी

घटना की सूचना मिलते ही प्रशासन हरकत में आया।

उपजिलाधिकारी हरिशंकर लाल, तहसीलदार अरुण कुमार और थाना अध्यक्ष विशाल उपाध्याय मौके पर पहुंचे और घटना की जानकारी ली।

आग पीड़ितों को कैसे मिलता है मुआवजा?

ऐसे मामलों में सरकार द्वारा सहायता दी जाती है:

• आपदा राहत कोष से आर्थिक मदद
• झोपड़ी/घर के नुकसान पर मुआवजा
• राशन और जरूरी सामग्री
• अस्थायी रहने की व्यवस्था

पीड़ित परिवार तहसील/लेखपाल के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं।

आग से बचाव के जरूरी उपाय

• खेतों में आग लगने पर तुरंत सूचना दें
• तेज हवा में आग जलाने से बचें
• आसपास पानी या मिट्टी रखें
• झोपड़ी/घर को खेत से सुरक्षित दूरी पर रखें

देवरिया में निःशुल्क बीज मिनीकिट व अनुदानित बीज की ऑनलाइन बुकिंग शुरू

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। जनपद में किसानों के लिए खरीफ-2026 सीजन हेतु निःशुल्क बीज मिनीकिट एवं अनुदानित बीज उपलब्ध कराने के लिए ऑनलाइन बुकिंग प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इस संबंध में जिला कृषि अधिकारी उदय शंकर सिंह ने जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि कृषि निदेशालय उत्तर प्रदेश द्वारा बीज वितरण व्यवस्था में बदलाव किया गया है, जिससे किसानों के बीच पारदर्शी और समान वितरण सुनिश्चित किया जा सके।

नई व्यवस्था के तहत किसान अपनी आवश्यकता के अनुसार बीज की अग्रिम ऑनलाइन बुकिंग करेंगे। यदि बुकिंग निर्धारित लक्ष्य से अधिक होती है, तो लाभार्थियों का चयन ई-लॉटरी के माध्यम से किया जाएगा।

चयनित किसान अपने विकास खंड के राजकीय कृषि बीज भंडार से पॉस मशीन पर अंगूठा लगाकर निःशुल्क मिनीकिट प्राप्त कर सकेंगे। वहीं, अनुदानित बीज लेने के लिए किसानों को निर्धारित कृषक अंश जमा करना होगा।

जनपद में निःशुल्क वितरण के लिए अरहर, मूंग, उड़द, मूंगफली, तिल एवं श्रीअन्न के मिनीकिट उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके अलावा सामान्य वितरण के तहत ढैंचा, धान, अरहर, मूंग, उड़द और संकर बीज (मक्का व धान) अनुदान पर दिए जाएंगे।

बीजों की ऑनलाइन बुकिंग प्रक्रिया 22 अप्रैल 2026 से शुरू हो चुकी है। इच्छुक किसान कृषि विभाग के आधिकारिक पोर्टल https://agriculture.up.gov.in पर जाकर आवेदन कर सकते हैं।

दिल्ली में मोमोज खाने से 12 लोग बीमार, बच्चे की हालत गंभीर

दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा)। राजधानी दिल्ली के पटपड़गंज इलाके से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहां सड़क किनारे बिक रहे मोमोज खाने के बाद एक दर्जन से अधिक लोग बीमार पड़ गए। इस घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया।

क्या है पूरा मामला?

सूत्रों के अनुसार, सभी बीमार लोगों ने एक ही ठेले से मोमोज खाए थे।

खाने के कुछ ही समय बाद लोगों को:

• उल्टी
• दस्त
• पेट दर्द
जैसी समस्याएं होने लगीं।

तबीयत बिगड़ने पर सभी को तुरंत नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया।

बच्चे की हालत गंभीर

इस घटना में एक छोटे बच्चे की हालत बेहद गंभीर बताई जा रही है। डॉक्टरों की टीम उसकी लगातार निगरानी कर रही है।

जांच में जुटा प्रशासन

घटना की सूचना मिलते ही:

• पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीम मौके पर पहुंची
• मोमोज के सैंपल जांच के लिए भेजे गए
• ठेला संचालक से पूछताछ जारी है

प्रारंभिक जांच में मामला फूड प्वाइजनिंग का माना जा रहा है।

बाहर का खाना खाने से कैसे बचें?

फूड प्वाइजनिंग से बचने के लिए ये सावधानियां अपनाएं:

• हमेशा साफ-सुथरी जगह का खाना ही खाएं
• सड़क किनारे खुले में रखे खाने से बचें
• ताजा और गर्म खाना ही लें
• हाथ धोकर ही भोजन करें
• दूषित पानी से बने खाने से बचें

फूड प्वाइजनिंग के लक्षण

• उल्टी और दस्त
• पेट में दर्द
• बुखार
• कमजोरी

ऐसे लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

लोगों में डर और आक्रोश

घटना के बाद स्थानीय लोगों में भय और आक्रोश का माहौल है। लोगों ने सड़क किनारे बिकने वाले खाने की गुणवत्ता पर सवाल उठाए हैं।

देवरिया में संचारी रोग नियंत्रण अभियान तेज, गांव-गांव जागरूकता

भलुअनी/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। जिले में संचारी रोगों से बचाव के लिए एक अप्रैल से 30 अप्रैल तक विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत रोगी हितकारी मंच (पीएसपी) के सदस्य गांव-गांव जाकर लोगों को जागरूक कर रहे हैं और साफ-सफाई के प्रति प्रेरित कर रहे हैं।

तीन ब्लॉकों में सक्रिय पीएसपी टीम

जिले के पथरदेवा, भटनी और भलुअनी ब्लॉक के 13 आयुष्मान आरोग्य मंदिरों पर गठित पीएसपी (Patient Stakeholder Platform) के सदस्य लगातार स्वास्थ्य जागरूकता अभियान चला रहे हैं।
इस अभियान में सीएचओ, ग्राम प्रधान, एएनएम, आशा, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और अन्य लोग मिलकर सहयोग कर रहे हैं।

साफ-सफाई पर दिया जा रहा जोर

अभियान के तहत:

• गांवों में साफ-सफाई कराई जा रही है
• नालियों में एंटी-लार्वा का छिड़काव किया जा रहा है
• कूलर का पानी नियमित बदलने की सलाह दी जा रही है

लोगों को स्वच्छता अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

किन बीमारियों से बचाव पर फोकस?

पीएसपी सदस्य लोगों को इन बीमारियों से बचाव के लिए जागरूक कर रहे हैं:

• मलेरिया
• डेंगू
• चिकनगुनिया
• फाइलेरिया
• कालाजार
• बुखार और खांसी

संचारी रोगों से बचने के आसान उपाय

अपनी सुरक्षा के लिए ये जरूरी कदम अपनाएं:

• घर के आसपास पानी जमा न होने दें
• मच्छरदानी का उपयोग करें
• खिड़की-दरवाजों में जाली लगवाएं
• साफ और शुद्ध पानी पिएं
• खाने से पहले हाथ साबुन से धोएं
• खुले में शौच न करें

लोगों से अपील

स्वास्थ्य विभाग और पीएसपी टीम ने लोगों से अपील की है कि वे साफ-सफाई रखें और स्वास्थ्य नियमों का पालन करें, ताकि संचारी रोगों को फैलने से रोका जा सके।

संतकबीरनगर में सड़क सुरक्षा सख्त: ब्लैक स्पॉट पर रम्बल स्ट्रिप अनिवार्य

संतकबीरनगर (राष्ट्र की परम्परा)। जिले में सड़क हादसों पर नियंत्रण के लिए प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। जिलाधिकारी Alok Kumar ने जिला सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में निर्देश दिए कि सभी ब्लैक स्पॉट पर टेबल टॉप रम्बल स्ट्रिप अनिवार्य रूप से बनाई जाएं।

कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित बैठक में मुख्य विकास अधिकारी जयकेश त्रिपाठी सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।

ब्लैक स्पॉट पर विशेष ध्यान

जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि दुर्घटना संभावित स्थानों (ब्लैक स्पॉट) पर:

• रम्बल स्ट्रिप बनाई जाए
• संकेतक (साइन बोर्ड) लगाए जाएं
• सड़क किनारे की झाड़ियों की सफाई हो
इससे हादसों में कमी लाने का लक्ष्य रखा गया है।

ट्रैफिक नियमों का कड़ाई से पालन

परिवहन विभाग और यातायात पुलिस को निर्देश दिए गए कि:

• गलत दिशा में चलने वालों पर कार्रवाई हो
• नो-पार्किंग में खड़े वाहनों का चालान किया जाए
• हेलमेट और सीट बेल्ट का सख्ती से पालन कराया जाए

वाहनों के लिए जरूरी निर्देश

• ट्रैक्टर-ट्रॉली व मालवाहक वाहनों पर रिफ्लेक्टर पट्टी अनिवार्य
• अनफिट और पुराने वाहनों पर कार्रवाई
• 15 साल से अधिक पुराने वाहनों का चिन्हीकरण

आपातकालीन सुविधा पर जोर

दुर्घटना की स्थिति में:

• एंबुलेंस और क्रेन की उपलब्धता सुनिश्चित करने
• एनएचएआई सड़कों की मरम्मत और अवैध कट्स बंद करने के निर्देश दिए गए

स्कूली वाहनों की जांच

जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि:

• सभी स्कूली वाहनों का सत्यापन किया जाए
• फिटनेस और परमिट की नियमित जांच हो
• अनफिट वाहनों को तुरंत बंद किया जाए

सड़क हादसों से बचने के उपाय

अपनी सुरक्षा के लिए ये नियम अपनाएं:

• हमेशा हेलमेट और सीट बेल्ट पहनें
• ओवरस्पीडिंग से बचें
• ट्रैफिक सिग्नल का पालन करें
• गलत दिशा में वाहन न चलाएं

महिलाओं के अधिकार में देरी क्यों? कांग्रेस ने सरकार से मांगा जवाब

सलेमपुर, देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। सलेमपुर स्थित कांग्रेस कार्यालय पर आयोजित कार्यकर्ताओं की बैठक में महिला आरक्षण बिल को लेकर जोरदार चर्चा हुई और इसे तत्काल लागू करने की मांग उठाई गई। बैठक में सलेमपुर और भाटपाररानी विधानसभा क्षेत्रों के संगठन की गहन समीक्षा भी की गई। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे।
बैठक को संबोधित करते हुए जिलाध्यक्ष विजयशेखर मल्ल रोशन ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि महिला आरक्षण बिल को जनगणना और परिसीमन जैसी शर्तों से जोड़ना महिलाओं के अधिकारों को टालने जैसा है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि सरकार को बिना किसी देरी के इस बिल को लागू करना चाहिए, ताकि संसद और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत प्रतिनिधित्व मिल सके।

ये भी पढ़ें – बलिया में निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर: 120 लोगों की जांच, 35 ने किया रक्तदान, जानिए ऐसे कैंप का लाभ कैसे लें

उन्होंने कहा कि महिलाओं को राजनीतिक भागीदारी दिलाने की लड़ाई कांग्रेस ने वर्षों पहले शुरू की थी। वर्ष 2010 में यूपीए सरकार के दौरान महिला आरक्षण बिल राज्यसभा से पारित भी हुआ था, लेकिन लोकसभा में आवश्यक समर्थन न मिलने के कारण यह कानून का रूप नहीं ले सका। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय विपक्ष के विरोध के चलते यह ऐतिहासिक अवसर छिन गया। रोशन ने कहा कि यदि सभी दल उस समय साथ आते, तो आज देश की महिलाओं को 14 वर्ष पहले ही उनका अधिकार मिल चुका होता।
उन्होंने वर्तमान सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि मौजूदा महिला आरक्षण बिल को लागू करने में जानबूझकर देरी की जा रही है। जनगणना और परिसीमन की अनिवार्यता जोड़कर इसे वर्ष 2029 तक टालने की रणनीति अपनाई गई है, जो महिलाओं के साथ न्याय नहीं है।
संगठन की समीक्षा के दौरान जिलाध्यक्ष ने ब्लॉक अध्यक्षों को निर्देश दिया कि वे जल्द से जल्द बूथ स्तर पर कमेटियों का गठन पूरा करें। उन्होंने कहा कि मजबूत संगठन ही चुनावी सफलता की कुंजी है और इसके लिए जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं की सक्रियता जरूरी है।
जिला उपाध्यक्ष डॉ. धर्मेन्द्र पांडेय ने अपने संबोधन में भाजपा पर जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि महिलाओं को जो भी अधिकार आज तक मिले हैं, उनमें कांग्रेस की अहम भूमिका रही है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे जनता के बीच जाकर सच्चाई को सामने रखें।

ये भी पढ़ें – दिल हुए पत्थर (हिंदी कविता)

जिला उपाध्यक्ष अब्दुल जब्बार ने कहा कि वर्तमान शासन से जनता में निराशा बढ़ रही है और लोग बदलाव चाहते हैं। उन्होंने कहा कि जनता को अब यह एहसास हो गया है कि देश के विकास और सामाजिक न्याय के लिए कांग्रेस का मजबूत होना आवश्यक है।
बैठक में जिला महासचिव मार्कण्डेय मिश्र, जगरनाथ यादव, वशिष्ठ मोदनवाल, दीनदयाल प्रसाद, सत्यम पांडेय, रजनीश प्रसाद, धर्मेन्द्र कुमार पाण्डेय, मनीष रजक, बृजेश यादव, डॉ. रमेश कुशवाहा, वजीर अहमद, ध्रुवप्रसाद आर्य, परमानन्द प्रसाद, सत्यवान पाण्डेय, शमशुल आजम, मोजाहिद लारी, रोहित यादव, राहुल मिश्र, डॉ. याहिया अंजुम, रामविलास शर्मा, परवेज लारी, गौरव नारायण यादव, सैयद फिरोज अहमद और डॉ. नरेन्द्र यादव समेत कई अन्य नेताओं ने भी अपने विचार रखे।
बैठक का मुख्य उद्देश्य संगठन को मजबूत करना और आगामी राजनीतिक रणनीति तैयार करना रहा। कार्यकर्ताओं में जोश और उत्साह देखने को मिला तथा सभी ने एकजुट होकर पार्टी को मजबूत बनाने का संकल्प लिया।

दुल्हन की विदाई के बाद लौट रही कार की ट्रक से भिड़ंत, दूल्हे के जीजा की मौत, तीन घायल

संतकबीरनगर (राष्ट्र की परम्परा)। जिले के महुली थाना क्षेत्र के भगता गांव के पास बुधवार को कार और ट्रक की आमने-सामने की टक्कर में दूल्हे के जीजा संतोष सोनी की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दूल्हा-दुल्हन समेत तीन लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। सभी घायलों का जिला संयुक्त चिकित्सालय में इलाज चल रहा है।
हादसे में घायल दूल्हा अजय वर्मा (26), दुल्हन बबीता सोनी (22) और नैना सोनी (20) को पुलिस ने स्थानीय लोगों की मदद से अस्पताल पहुंचाया। टक्कर इतनी तेज थी कि कार पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई।

ये भी पढ़ें – SSC GD Exam 2026: 500 किमी दूर मिले परीक्षा केंद्र से नाराज़ अभ्यर्थी, जानिए क्या है पूरा मामला और कैसे बदलें एग्जाम सेंटर

पुलिस के अनुसार कार में कुल चार लोग सवार थे और इसे संतोष सोनी चला रहे थे, जो पैकवलिया, थाना गौर (बस्ती) के निवासी थे। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।


बताया गया कि अजय सोनी निवासी हैंसर (धनघटा) की शादी दानोंकुइया (दुधारा) निवासी बबीता सोनी के साथ हुई थी। 21 अप्रैल को बारात बस्ती के एक मैरिज हॉल में गई थी और विवाह के बाद 22 अप्रैल को विदाई के बाद सभी लोग कार से घर लौट रहे थे, तभी रास्ते में यह हादसा हो गया।
थानाध्यक्ष दुर्गेश पांडेय ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है।