Friday, July 3, 2026
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बैतूल में नाबालिग के साथ कार में हुई दरिंदगी, दो आरोपी गिरफ्तार; चालक की तलाश जारी

बैतूल/मध्यप्रदेश (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। जिले के आमला थाना क्षेत्र में एक नाबालिग के साथ लिफ्ट देने के बहाने कार में हुई ज्यादती के मामले ने सनसनी मचा दी है। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि तीसरा आरोपी, जो वाहन चालक है, अभी फरार है। घटना में प्रयुक्त स्कॉर्पियो वाहन जब्त कर लिया गया है।

घटना 31 अक्तूबर 2025 की शाम करीब 5 बजे की है। 14 वर्षीय किशोरी अपनी सहेलियों के साथ नेहरू पार्क घूमने गई थी। इस दौरान तीन युवकों ने उसे यह कहकर गाड़ी में बैठा लिया कि वे उसे घर छोड़ देंगे। इसके बाद कार को कमानी पुलिया के पास सुनसान इलाके की ओर ले जाकर किशोरी के साथ अपराध किया गया। आरोपियों ने उसे धमकाते हुए रात करीब साढ़े आठ बजे आमला रेलवे स्टेशन के पास छोड़ दिया।

डरी-सहमी किशोरी ने पूरी रात स्टेशन पर गुजारी। सुबह जीआरपी पुलिस की नजर उस पर पड़ी, जिसके बाद सूचना आमला थाना पुलिस को दी गई। जांच के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर दो मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। फरार चालक की तलाश के लिए विशेष टीम गठित की गई है।

एसपी वीरेंद्र जैन ने बताया कि दोनों गिरफ्तार आरोपी पहले भी आपराधिक गतिविधियों में लिप्त रहे हैं। पुलिस ने पीड़िता के बयान के आधार पर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है और तीसरे आरोपी की गिरफ्तारी के प्रयास जारी हैं।

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सलूंबर हादसा: कुएं में नहाने गईं दो सगी बहनों समेत तीन बच्चों की डूबने से मौत, गांव में मचा कोहराम

सलूंबर/राजसमंद (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। जिले के झल्लारा थाना क्षेत्र के धोलाकाकर गांव में रविवार शाम एक दर्दनाक हादसे ने पूरे गांव को शोक में डुबो दिया। नहाने के लिए घर से निकली दो सगी बहनें और एक पड़ोसी बालक पानी से भरे कुएं में डूब गए। तीनों के शव देर रात बरामद किए गए।

जानकारी के अनुसार, ग्राम पंचायत घटेढ़ के धोलाकाकर गांव निवासी खुशबू मीणा (10) और माया मीणा (14) पुत्री चोखा मीणा तथा पड़ोसी लोकेश (13) पुत्र रूपलाल रविवार शाम करीब साढ़े चार बजे घर से नहाने जाने की बात कहकर निकले थे। जब वे देर रात तक घर नहीं लौटे तो परिजनों ने तलाश शुरू की। कुएं के पास पहुंचने पर तीनों के शव पानी में तैरते मिले।

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सूचना मिलने पर झल्लारा थानाधिकारी धर्मेंद्र सिंह वाघेला, पटवारी दीपेश पाटीदार और उप सरपंच दामोदरलाल मौके पर पहुंचे। ग्रामीणों की मदद से शवों को कुएं से बाहर निकाला गया। बताया जा रहा है कि बारिश के कारण कुआं ऊपरी सतह तक पानी से भरा हुआ था। संभावना है कि पहले किसी बच्चे का पैर फिसला और बाकी दो उसे बचाने की कोशिश में डूब गए।

पुलिस ने शवों को सलूंबर जिला अस्पताल की मोर्चरी में रखवाया है। सोमवार को पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंपे जाएंगे। हादसे के बाद गांव में शोक और मातम का माहौल है।

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7 नवम्बर से सात दिवसीय श्रीमद भागवत कथा का होगा शुभारंभ

बड़हलगंज (राष्ट्र की परम्परा)। स्थानीय थाना अंतर्गत ग्राम सभा देंदापार में सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन 7 नवम्बर से 14 नवम्बर को होगा, जिसके मुख्य कथा वाचक पंडित ज्ञानदेवी महराज श्री वृन्दावन धाम होंगे। यह जानकारी देंदापार निवासी कथा के मुख्य यजमान गिरजेश तिवारी ने बताया कि सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया गया है।

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जिसके मुख्य कथा वाचक वृन्दावन धाम से पधारे पंडित ज्ञानदेव महराज रहेगें, जिसका शुभारंभ 7 नवम्बर को दिन सोमवार को होगा और समापन और महाप्रसाद वितरण का आयोजन 14 नवम्बर दिन शुक्रवार को होना तय किया गया है, कथा का शुभारंभ कलश यात्रा 7 नवम्बर को सुबह 10 बजे से होगा तत्पश्चात शायं 4 बजे से रात 8 बजे तक कथा चलेगी अंतिम दिन 14 नवम्बर को समापन और महाप्रसाद का वितरण कार्यक्रम होगा।

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जयपुर में भीषण सड़क हादसा: बेकाबू डंपर ने 40 वाहनों को मारी टक्कर, 11 की मौत, कई घायल

जयपुर (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। राजस्थान की राजधानी जयपुर में सोमवार (3 नवंबर) को बड़ा सड़क हादसा हुआ। हरमन इलाके में एक बेकाबू डंपर ने करीब 40 वाहनों को जोरदार टक्कर मार दी। हादसे में कम से कम 11 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, डंपर का ब्रेक फेल होने के कारण यह हादसा हुआ।

हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस और रेस्क्यू टीमें मौके पर पहुंचीं और राहत कार्य शुरू किया। घायलों को SMS अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जिनमें कई की हालत नाजुक बताई जा रही है। आशंका जताई जा रही है कि मृतकों की संख्या और बढ़ सकती है।

स्थानीय लोगों ने बताया कि डंपर अनियंत्रित होकर तेज़ रफ्तार में आया और कुछ ही पलों में चारपहिया और दोपहिया वाहनों को कुचलता चला गया। हादसे के बाद मुख्य मार्ग पर ट्रैफिक डायवर्ट कर दिया गया है और कई किलोमीटर लंबा जाम लग गया है।

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बताया जा रहा है कि डंपर ने एक के बाद एक वाहनों को इतनी तेज़ी से टक्कर मारी कि कई गाड़ियां पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गईं। पुलिस ने डंपर चालक को हिरासत में लेकर मामले की जांच शुरू कर दी है।

गौरतलब है कि इससे पहले रविवार (2 नवंबर) को जोधपुर में दो सड़क हादसों में 18 लोगों की मौत हो गई थी। लगातार बढ़ते सड़क हादसों ने प्रदेश में सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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इतिहास के आईने में 3 नवम्बर: विश्व और भारत के परिवर्तनकारी क्षणों का साक्षी दिवस

इतिहास के पन्नों में 3 नवम्बर का दिन अनेक महत्वपूर्ण घटनाओं से भरा हुआ है। यह तिथि न केवल राजनीतिक और धार्मिक दृष्टि से, बल्कि सामाजिक, सांस्कृतिक और वैश्विक परिप्रेक्ष्य में भी विशेष महत्व रखती है। इस दिन विश्व के कई देशों ने निर्णायक मोड़ देखे — चाहे वह युद्ध हो, विद्रोह, खोज या फिर कूटनीतिक समझौते। आइए जानते हैं 3 नवम्बर को घटित प्रमुख ऐतिहासिक घटनाओं के बारे में विस्तार से।
🕋 644 ईस्वी – दूसरे खलीफा उमर इब्न अल-खत्ताब की हत्या
इस दिन इस्लामी इतिहास के दूसरे खलीफा उमर इब्न अल-खत्ताब की हत्या मदीना में एक फारसी गुलाम द्वारा कर दी गई थी। उमर की नीतियों ने इस्लामी शासन को संगठित और विस्तारित किया। उनके निधन के बाद खलीफा प्रणाली में सत्ता संघर्ष शुरू हुआ, जिसने इस्लामिक इतिहास को नई दिशा दी।
⚔️ 1394 – फ्रांस से यहूदियों का निष्कासन
फ्रांस के राजा चार्ल्स षष्ठम ने इस दिन यहूदियों को फ्रांस से निष्कासित कर दिया। यह यूरोप में धार्मिक असहिष्णुता और सामाजिक असमानता का प्रतीक बना। इससे यूरोपीय यहूदी समुदायों का पलायन और बिखराव बढ़ा, जिसका प्रभाव सदियों तक देखा गया।
🧭 1493 – क्रिस्टोफर कोलंबस ने खोजा डोमिनिका द्वीप
प्रसिद्ध खोजकर्ता क्रिस्टोफर कोलंबस ने अपनी दूसरी समुद्री यात्रा के दौरान 3 नवम्बर को डोमिनिका द्वीप की खोज की। यह खोज नई दुनिया (अमेरिका महाद्वीप) के विस्तार की दिशा में एक बड़ा कदम थी, जिसने वैश्विक व्यापार और उपनिवेशवाद की नींव रखी।
🤝 1655 – इंग्लैंड और फ्रांस के बीच समझौते
इस दिन इंग्लैंड और फ्रांस के बीच सैन्य और आर्थिक समझौतों पर हस्ताक्षर हुए। इस संधि ने यूरोपीय राजनीति में शक्ति-संतुलन को प्रभावित किया और औपनिवेशिक प्रतिस्पर्धा को नया आयाम दिया।
🕊️ 1762 – ब्रिटेन और स्पेन के बीच पेरिस की संधि
ब्रिटेन और स्पेन ने पेरिस की संधि पर हस्ताक्षर कर अपने व्यापारिक और औपनिवेशिक विवादों को सुलझाने की कोशिश की। यह समझौता सात वर्षों के युद्ध के बाद यूरोपीय कूटनीति की दिशा तय करने वाला माना गया।
🇺🇸 1796 – जॉन एडम्स बने अमेरिका के राष्ट्रपति
3 नवम्बर 1796 को जॉन एडम्स अमेरिका के दूसरे राष्ट्रपति चुने गए। उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम के बाद नवजात अमेरिकी गणराज्य को स्थिरता देने में अहम भूमिका निभाई।
⚖️ 1857 – नानाराव की संपत्ति पर कार्रवाई
भारत के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के बाद 3 नवम्बर 1857 को ब्रिटिश प्रशासन ने नानाराव पेशवा की मथुरा स्थित संपत्ति को ध्वस्त करने के आदेश दिए। यह ब्रिटिश दमन और भारतीय प्रतिरोध का प्रतीक बना।
🏈 1869 – कनाडा में हैमिल्टन फुटबॉल क्लब की स्थापना
इस दिन कनाडा में हैमिल्टन फुटबॉल क्लब अस्तित्व में आया, जिसने बाद में आधुनिक फुटबॉल के विकास में योगदान दिया। यह खेल संगठन आज भी कनाडा की खेल संस्कृति की धरोहर माना जाता है।
🇵🇦 1903 – पनामा को कोलंबिया से स्वतंत्रता
3 नवम्बर 1903 को पनामा ने कोलंबिया से स्वतंत्रता प्राप्त की। अमेरिकी समर्थन से बनी इस स्वतंत्रता ने पनामा नहर के निर्माण का मार्ग प्रशस्त किया, जो विश्व व्यापार की रीढ़ बन गई।
🕉️ 1938 – असम हिंदी प्रचार समिति की स्थापना
असम में हिंदी के प्रचार-प्रसार हेतु असम हिंदी प्रचार समिति का गठन हुआ। इस संस्था ने पूर्वोत्तर भारत में हिंदी भाषा की शिक्षा और साहित्य के प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
🇮🇳 1948 – नेहरू का पहला संयुक्त राष्ट्र संबोधन
भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपना पहला भाषण दिया। यह भारत की स्वतंत्र विदेश नीति की शुरुआत का प्रतीक था, जिसमें शांति, समानता और वैश्विक सहयोग की भावना झलकती थी।
☢️ 1958 – सोवियत संघ का परमाणु परीक्षण
इस दिन तत्कालीन सोवियत संघ ने परमाणु परीक्षण किया। यह अमेरिका-सोवियत संघ के बीच बढ़ती हथियारों की होड़ का संकेत था, जिसने शीत युद्ध के तनाव को और बढ़ाया।
💰 1962 – भारत में गोल्ड बॉन्ड योजना की घोषणा
चीन के हमले के दौरान भारत सरकार ने देश की आर्थिक स्थिरता बनाए रखने के लिए गोल्ड बॉन्ड स्कीम शुरू की। यह देश की जनता से आर्थिक सहयोग प्राप्त करने का अभिनव प्रयास था।
🔥 1984 – सिख विरोधी दंगे
3 नवम्बर 1984 को भारत में सिख विरोधी दंगों में हजारों निर्दोष लोग मारे गए। यह घटना भारतीय इतिहास का एक दर्दनाक अध्याय बन गई जिसने राष्ट्रीय एकता और साम्प्रदायिक सद्भाव को गहराई से झकझोरा।
🇮🇳 1988 – भारतीय सेना का मालदीव में हस्तक्षेप
भारतीय वायुसेना ने ऑपरेशन कैक्टस के तहत मालदीव में हुए सैन्य विद्रोह को दबाने में उसकी सरकार की मदद की। यह भारत की त्वरित सैन्य कार्रवाई और दक्षिण एशिया में नेतृत्व क्षमता का उदाहरण बना।
🌐 1997 – जी-15 शिखर सम्मेलन की शुरुआत
कुआलालम्पुर में जी-15 समूह का सातवां शिखर सम्मेलन प्रारंभ हुआ। इस बैठक का उद्देश्य विकासशील देशों के बीच आर्थिक सहयोग और साझेदारी को मजबूत बनाना था।
📡 2000 – डीटीएच सेवा की शुरुआत
भारत सरकार ने 3 नवम्बर 2000 को डायरेक्ट-टू-होम (DTH) सेवा को आम जनता के लिए प्रारंभ किया। इससे भारतीय मनोरंजन जगत में तकनीकी क्रांति आई और ग्रामीण क्षेत्रों तक भी प्रसारण पहुंचा।
⚖️ 2001 – आतंकवादी संगठनों पर अमेरिकी प्रतिबंध
अमेरिका ने लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकी संगठनों पर प्रतिबंध लगाया। यह 9/11 हमलों के बाद वैश्विक आतंकवाद के विरुद्ध आरंभ किए गए अभियान का महत्वपूर्ण कदम था।
🕊️ 2002 – लिट्टे का मुख्यधारा में आने का संकेत
नखोम पाथोम बैठक में लिट्टे (LTTE) ने राजनीति की मुख्यधारा में आने की इच्छा प्रकट की। यह श्रीलंका में दशकों से चल रहे गृहयुद्ध को समाप्त करने की दिशा में सकारात्मक संकेत था।
🇵🇰🇨🇳 2003 – पाकिस्तान-चीन के आठ समझौते
बीजिंग में पाकिस्तान और चीन के बीच आठ महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर हुए। ये समझौते रक्षा, व्यापार और प्रौद्योगिकी सहयोग को सुदृढ़ करने वाले माने गए।
🇮🇳 2006 – भारत-बेल्जियम सामाजिक सुरक्षा समझौता
भारत और बेल्जियम ने सामाजिक सुरक्षा गारंटी पर समझौता किया, जिससे दोनों देशों के कर्मचारियों और व्यवसायिक साझेदारों को सामाजिक लाभों की सुरक्षा मिली।
🚨 2007 – पाकिस्तान में आपातकाल
इस दिन परवेज मुशर्रफ ने पाकिस्तान में आपातकाल लागू करते हुए संविधान को निलंबित कर दिया और सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को पद से हटा दिया। साथ ही, बेनजीर भुट्टो को नजरबंद कर दिया गया। यह पाकिस्तानी राजनीति का संकट काल था।
💹 2008 – यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की दरों में कमी
भारतीय बैंकिंग क्षेत्र में राहत देते हुए यूनियन बैंक ऑफ इंडिया ने अपनी उधारी दरों में 0.5% की कमी की। यह वैश्विक आर्थिक मंदी के दौर में भारतीय अर्थव्यवस्था को स्थिर करने की दिशा में कदम था।
💶 2011 – फ्रांस के कैन्स में जी-20 शिखर सम्मेलन
कैन्स (फ्रांस) में जी-20 देशों का सम्मेलन प्रारंभ हुआ, जिसमें यूरोजोन ऋण संकट और वैश्विक अर्थव्यवस्था की स्थिरता पर विचार-विमर्श हुआ। यह वैश्विक वित्तीय सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण मंच साबित हुआ।
🏙️ 2014 – अमेरिका में नए वर्ल्ड ट्रेड सेंटर का उद्घाटन
11 सितम्बर 2001 के आतंकी हमले के तेरह वर्ष बाद उसी स्थान पर नए वर्ल्ड ट्रेड सेंटर का उद्घाटन हुआ। यह अमेरिका की पुनर्निर्माण क्षमता, दृढ़ता और एकजुटता का प्रतीक बना।
3 नवम्बर की ये ऐतिहासिक घटनाएँ न केवल बीते युग की गाथाएँ हैं, बल्कि ये हमें यह भी सिखाती हैं कि कैसे समय के साथ दुनिया बदलती रही है — सत्ता, संघर्ष, शांति, विज्ञान और संस्कृति, सबने इस तिथि को इतिहास के पन्नों में स्थायी स्थान दिया है।

3 नवम्बर– प्रेरणा के पाँच अद्वितीय प्रसंग

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आज-प्रसंग (03 नवम्बर) पर जन्मे पाँच महानुभावों एक दृष्टि। इनके जीवन-संग्राम, स्थान, दृष्टि व योगदान हमें शिक्षा-जीवन में सशक्त प्रेरणा देते हैं।
. सवाई जयसिंह II (३ नवम्बर १६८८)
जन्म 03 नवम्बर 1688 को अमेर (वर्तमान जयपुर, राजस्थान) में हुआ था। बाल्यकाल में ही, लगभग 11 वर्ष की आयु में पिता की मृत्यु के बाद राजत्व प्राप्त किया।
उन्होंने राजनैतिक कूटनीति, भू-सैन्य व्यवस्था तथा खगोल विज्ञान / अभियोंत्रिकी में अद्भुत रुचि दिखाई। जयपुर-नगर का प्रथम-रूपांतरण तथा वेधशालाएँ (जैसे जंतर मंतर, जयपुर) स्थापना का श्रेय उन्हें है।
शिक्षण-संदेश: नेतृत्व मात्र वंश-संपत्ति से नहीं, अध्ययन-विवेचना-नवीनता से तैयार होता है। जयसिंह II का जीवन हमें “शिक्षा + नवोन्मेष” के संयोजन की प्रेरणा देता है।
२. पृथ्वीराज कपूर (३ नवम्बर १९०६)
03 नवम्बर 1906 को समुंद्रि (अब पाकिस्तान) में जन्मे। हिन्दी रंगमंच एवं फिल्म जगत के पायनियर माने जाते हैं। उन्होंने 1944 में मुंबई (जुहू) स्थित पृथ्वी थिएटर की स्थापना की।
उनका योगदान सिर्फ अभिनय तक सीमित नहीं रहा — उन्होंने भारतीय रंग-मंच को संगठित किया, अभिनय-शिक्षा को जन-मानस तक पहुँचाया।
शिक्षण-संदेश: कला-शिक्षा का विस्तार-जेवर समाज-सुधार का रूप ले सकती है। पृथ्वीराज कपूर का जीवन हमें सिखाता है कि “रंगमंच = शिक्षा + सामाजिक सहभागिता” हो सकती है।
३. लक्ष्मीकांत (संगीतकार) (३ नवम्बर १९३७)
03 नवम्बर 1937 को बंबई (मुम्बई) में जन्मे, वे संगीत-जुगलबन्दी Laxmikant–Pyarelal के “लक्ष्मीकांत” भाग थे। गरीबी में जन्मकर उन्होंने संगीत-अध्ययन कर अपनी पहचान बनाई।
करीब 750 से अधिक फिल्मों में संगीत देने वाले इस जोड़ी ने हिन्दी सिनेमा की धरोहर संगीतमय बनाई।
शिक्षण-संदेश: कठिन-परिस्थितियों में भी निरन्तर अभ्यास और समर्पण से शिक्षा-शक्ति बनती है। संगीत-शिक्षण जीवन-शिक्षा बन सकती है।
४. अमर्त्य सेन (३ नवम्बर १९३३)

03 नवम्बर 1933 को शांतिनिकेतन (पश्चिम बंगाल) में जन्मे। अर्थशास्त्र व दर्शनशास्त्र के विद्वान, इन्हें 1998 में अर्थशास्त्र में नोबेल पुरस्कार प्राप्त हुआ।
उनका अध्ययन-पथ कलकत्ता, केम्ब्रिज, आक्सफोर्ड और हार्वर्ड तक गया। उन्होंने “भुखमरी के कारण”, “मानव-क्षमता” जैसे सामाजिक विषयों पर शोध किया।
शिक्षण-संदेश: शिक्षा-शुद्ध शोध और सामाजिक जागरूकता से मानव-उन्नति संभव है। अमर्त्य सेन का जीवन हमें बताता है कि “शिक्षा मात्र संख्या नहीं, चिंतन-परिवर्तन है।”
५. मानवजीत सिंह संधू (३ नवम्बर १९७६)
03 नवम्बर 1976 को भारत के गोलीबाजि खिलाड़ी के रूप में जन्मे। उन्होंने ट्रैप शूटिंग में देश को गौरव-शाली बनायाः विश्व चैंपियन व विश्व रैंक नंबर 1 रह चुके।
उनका संघर्ष, निरन्तर अभ्यास और उत्कृष्टता-प्राप्ति हम सबके लिए शिक्षा-प्रेरणा है।
शिक्षण-संदेश: शिक्षा ही नहीं, निरन्तर अभ्यास और प्रतिदिन सुधार की चाह ही महान उपलब्धि की नींव है। मानवजीत सिंह का जीवन हमें बताता है कि “शिक्षा + अभ्यास = उत्कृष्ठता”।

03 नवम्बर को जन्मे ये पाँच-महान व्यक्ति — सवाई जयसिंह II, पृथ्वीराज कपूर, लक्ष्मीकांत, अमर्त्य सेन, मानवजीत सिंह संधू — भिन्न-भिन्न क्षेत्रों (राजनैतिक-शासन, रंगमंच-सिनेमा, संगीत, अर्थशास्त्र, खेल) में अपनी-अपनी छाप छोड़ गए। पर उनसे एक साझा सूत्र मिलता है: शिक्षा का संस्कार, निरन्तर अभ्यास, और सामाजिक-उद्देश्य।
आज-यदि हम अपने अध्ययन-पथ, जीवन-लक्ष्यों, सामाजिक दायित्वों को देखें — तो इन पाँचों की कथा-प्रेरणा हमें याद दिलाती है कि केवल “ज्ञानी होना” पर्याप्त नहीं, बल्कि “ज्ञान को क्रियाशील बनाना” है। शिक्षा का समग्र अर्थ तभी पूरा होता है जब वह जीवन-परिवर्तन-वरदान बन जाए।

जो बोएगा वही पाएगा,तेरा किया आगे आएगा,सुख-दुख है क्या, फल कर्मों का जैसी करनी वैसी भरनी

हमारा कर्म ही हमारा भविष्य हैं- धार्मिक, सामाजिक आध्यात्मिक और राजनीतिक दृष्टि से एक गहन विश्लेषण

परिश्रम,अनुशासन और नवाचार का बीज बोनें वाले,विश्व मेंअग्रणी बने-लापरवाही, भ्रष्टाचार और विभाजन का बीज बोए पिछड़ गए, कड़वी सच्चाई- एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र

गोंदिया – वैश्विक स्तरपर मानव जीवन का सबसे बड़ा सत्य यह है कि कर्म के बिना कोई फल नहीं। “जो बोएगा वही पाएगा, तेरा किया आगे आएगा”यह केवल एक कहावत नहीं बल्कि समूचे जीवन का सिद्धांत है।यह वाक्य धार्मिक,सामाजिक,आध्यात्मिक और राजनीतिक, चारों स्तरों पर समान रूप से लागू होता है। हर धर्म, हर दर्शन और हर सभ्यता ने किसी न किसी रूप में कर्म के परिणाम को स्वीकार किया है। मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र यह मानता हूं कि आज जब दुनिययाँ तेज़ रफ़्तार से आगे बढ़ रही है, तब यह पंक्ति हमें चेतावनी देती है कि हर क्रिया का परिणाम निश्चित है,चाहे वह व्यक्ति का कर्म हो या राष्ट्र की नीतियाँ।

साथियों बात अगर हम इस बात को धार्मिक दृष्टिकोण से देखकर समझने की करें तो, ईश्वर न्यायकारी है, पर कर्म निर्णायक हैं, हर धर्म की आत्मा में कर्म का सिद्धांत रचा-बसा है।हिंदू धर्म में कहा गया है,“कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन”अर्थात मनुष्य का अधिकार केवल कर्म करने में है,फल की चिंता उसे नहीं करनी चाहिए, क्योंकि फल तो उसके कर्मों का ही परिणाम है। भगवान श्रीकृष्ण ने गीता में स्पष्ट किया कि अच्छे कर्म शुभ फल लाते हैं, और अधर्म विनाश का कारण बनता है।बौद्ध धर्म में भी यही सिद्धांत “कर्म” और “कर्मफल” के रूप में समझाया गया है,कि प्रत्येक प्राणी अपने कर्मों से ही पुनर्जन्म या मुक्ति प्राप्त करता है।इस्लाम में भी कुरान कहता है कि “हर आत्मा अपने कर्मों के बदले जवाबदेह होगी”। इसी प्रकार ईसाई धर्म में यह वाक्य मिलता है“एस यू सॉव, सो शेल्ल यू रीप.” यानी जो तुम बोओगे, वही काटोगे,इन सब धर्मों का निष्कर्ष यही है कि ईश्वर निष्पक्ष है, परंतु कर्म ही भविष्य का मार्ग प्रशस्त करते हैं।

साथियों बात अगर हम इस बात को आध्यात्मिक दृष्टिकोण से समझने की कोशिश करें तो,कर्म ही आत्मा की यात्रा का साधन, आध्यात्मिकता का उद्देश्य केवल मोक्ष या मुक्ति नहीं, बल्कि आत्म-साक्षात्कार है। आत्मा शाश्वत है, परंतु उसके अनुभव कर्मों से निर्मित होते हैं।

यदि कोई व्यक्ति प्रेम, सत्य और दया का बीज बोता है, तो उसकी आत्मा शांति और आनंद का फल प्राप्त करती है। परंतु यदि वह घृणा, लोभ और हिंसा का बीज बोता है, तो उसका परिणाम पीड़ा और अशांति के रूप में सामने आता है। आध्यात्मिक दृष्टि से कर्म योग ही जीवन का परम मार्ग है,जब व्यक्ति बिना स्वार्थ, बिना अहंकार, केवल कर्तव्य भावना से कार्य करता है, तब वह ईश्वर के समीप पहुँचता है।आज के युग में जब तनाव, प्रतिस्पर्धा और असंतोष बढ़ गया है, तब यह संदेश अत्यंत प्रासंगिक है कि मनुष्य का प्रत्येक कर्म उसके भीतर ऊर्जा के रूप में अंकित होता है। वही ऊर्जा भविष्य में सुख या दुख के रूप में उसे लौटती है।

साथियों बात अगर हम इस बात को सामाजिक दृष्टिकोण से समझने की करें तो, जैसा समाज बोएगा, वैसा ही फल पाएगा, समाज व्यक्तियों से बनता है, और व्यक्तियों के कर्मों का सम्मिलित प्रभाव ही समाज की दिशा तय करता है।,यदि समाज शिक्षा, समानता, और सेवा का बीज बोता है, तो वह प्रगति, शांति और भाईचारे का फल पाता है।पर यदि समाज जातिवाद, भ्रष्टाचार, हिंसा और असहिष्णुता का बीज बोता है, तो उसका परिणाम अव्यवस्था, गरीबी और विघटन के रूप में प्रकट होता है।भारत जैसे देश में, जहाँ “वसुधैव कुटुम्बकम्” का आदर्श रहा है, वहां आज भी यह पंक्ति सामाजिक नैतिकता की रीढ़ है।हर नागरिक यदि अपने स्तर पर ईमानदारी, सह-अस्तित्व और सेवा की भावना अपनाए,तो राष्ट्र स्वयं बदल जाएगा सामाजिक विज्ञान कहता है कि “सामूहिक कर्म संस्कृति बनाते हैं”, और संस्कृति राष्ट्र की पहचान। इसलिए समाज का प्रत्येक कदम आने वाली पीढ़ियों का बीज है,जैसा आज हम बो रहे हैं, वैसा ही कल हमारा समाज पाएगा।

साथियों बातें कर हम इस बात को राजनीतिक दृष्टिकोण से समझने की करें तो,राजनीति में भी कर्मफल का अटल नियम हैँ,राजनीति वह मंच है जहाँ राष्ट्र का भाग्य लिखा जाता है। परंतु यहाँ भी कर्म का सिद्धांत उतना ही प्रबल है।जो नेता जनता के विश्वास को तोड़ते हैं, जो सत्ता के लिए झूठ और छल का सहारा लेते हैं,उन्हें इतिहास भुला देता है।राजनीतिक इतिहास साक्षी है कि जिन शासकों ने न्याय, सेवा और जनहित का बीज बोया, वे युगों-युगों तक पूजे गए।महात्मा गांधी ने सत्य और अहिंसा का बीज बोया, और आज भी उनका नाम मानवता का प्रतीक है। वहीं, जिन तानाशाहों ने अत्याचार और अहंकार का बीज बोया, उन्हें इतिहास ने धूल में मिला दिया। आधुनिक राजनीति में भी “कर्म का फल” तत्काल या दीर्घकाल में सामने आता है। जो सरकारें जनता के हित में कार्य करती हैं, उन्हें पुनः जनादेश मिलता है; और जो केवल वादों का बीज बोती हैं, वे पराजित होती हैं।इसलिए राजनीति में भी यह सिद्धांत अमर है,“तेरा किया आगे आएगा।” राजनीतिक नैतिकता और कर्मफल का सन्देश-जब राजनीति केवल सत्ता प्राप्ति का साधन बन जाए, तब “कर्मफल सिद्धांत” सबसे बड़ा सुधारक सिद्ध होता है।राजनेता, जो आज झूठे वादे बोते हैं, उन्हें कल जनता की नाराज़गी का फल मिलता है।जो नेता सेवा और समर्पण बोते हैं, उन्हें इतिहास सम्मान देता है।भारत, अमेरिका, जापान, दक्षिण अफ्रीका या ब्रिटेन,हर लोकतंत्र में यह नियम समान रूप से लागू है कि जनता वही पाती है, जो उसने चुना है; और नेता वही पाते हैं, जो उन्होंने बोया है। 

साथियों बात अगर हम कर्म, भाग्य और विज्ञान ऊर्जा के परिपेक्ष में के संरक्षण का सिद्धांत को समझने की करें तो 

यह सिद्धांत केवल धार्मिक नहीं, बल्कि वैज्ञानिक दृष्टि से भी सत्य है।भौतिकी का“एनर्जी कंसर्वेशन लॉ ”कहता है कि ऊर्जा कभी नष्ट नहीं होती, केवल रूप बदलती है।ठीक वैसे ही मनुष्य के कर्म भी ऊर्जा के रूप में ब्रह्मांड में अंकित रहते हैं। जबव्यक्ति कोई अच्छा या बुरा कार्य करता है, तो उसकी ऊर्जा लौटकर उसी के जीवन में किसी रूप में प्रभाव डालती है।आधुनिक मनोविज्ञान भी मानता है कि व्यक्ति का व्यवहारिक कर्म उसकी मानसिक स्थिति का दर्पण होता है।जो व्यक्ति नकारात्मक कर्म करता है, वह भीतर से अशांत रहता है। जो व्यक्ति सकारात्मक कर्म करता है, उसके चेहरे पर आत्मविश्वास और संतोष झलकता है।बहुत से लोग अपने जीवन की कठिनाइयों को भाग्य या किस्मत पर डाल देते हैं। परंतु वास्तव में भाग्य भी पूर्व कर्मों का परिणाम है।गीता में कहा गया है कि “कर्म बीज है और भाग्य उसका फल।” यदि कोई व्यक्ति आलस्य, अज्ञान या भय का बीज बोता है, तो उसका भाग्य उसी के अनुसार फल देता है।कर्मशील व्यक्ति अपना भाग्य स्वयं गढ़ता है। राष्ट्र भी यही सिद्धांत अपनाते हैं, जिन्होंने परिश्रम, अनुशासन और नवाचार का बीज बोया, वे विश्व में अग्रणी बने; जिन्होंने लापरवाही, भ्रष्टाचार और विभाजन का बीज बोया, वे पिछड़ गए। 

साथियों बात अगर हम इस बात को वैश्विक स्तर पर आधुनिक परिप्रेक्ष्य में समझने की करें तो वैश्विक स्तर पर कर्म का प्रभाव- आज विश्व एक “ग्लोबल विलेज” बन चुका है। एक देश के कर्म दूसरे देश को भयंकर प्रभावित करते हैं।जलवायु परिवर्तन का भयंकर युद्ध,आतंकवाद या शांति,सब किसी न किसी राष्ट्र या समूह के कर्मों का परिणाम हैं।जो देश पर्यावरण की अनदेखी करते हैं,वेप्राकृतिक आपदाओं का सामना करते हैं।जो राष्ट्र शांति और सहयोग की नीति अपनाते हैं, वे स्थिरता और समृद्धि का फल पाते हैं।इस प्रकार “जैसी करनी वैसी भरनी” केवल व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरे वैश्विक समाज का नियम बन चुका है।मानवता के स्तरपर,कर्म का सार्वभौमिक संदेश-कर्म का यह सिद्धांत मानवता के लिए सबसे बड़ा नैतिक मार्गदर्शन है। यह कहता है कि हर मनुष्य अपने कर्मों से ही ईश्वर का प्रतिनिधि बन सकता है।यदि हर व्यक्ति अपने जीवन में सत्य, करुणा और सेवा का बीज बोए, तो पूरी पृथ्वी स्वर्ग बन सकती है।“तेरा किया आगे आएगा”,यह हमें चेताता है कि हमारे हर शब्द, हर विचार और हर कार्य का असर इस सृष्टि पर पड़ता है।इसलिए जीवन में विवेक और संवेदना का बीज बोना ही सच्चा धर्म है।

अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका विशेषण करें तो हम पाएंगे कि कर्म का बीज, जीवन का फल,अंततः यह कहा जा सकता है कि “जो बोएगा वही पाएगा” केवल एक वाक्य नहीं, बल्कि जीवन का शाश्वत नियम है।धर्म इसे ईश्वर का न्याय कहता है, समाज इसे नैतिकता का आधार, अध्यात्म इसे आत्म- साक्षात्कार का मार्ग, और राजनीति इसे उत्तरदायित्व का दर्पण।यदि हम चाहते हैं कि हमारा भविष्य सुखमय, राष्ट्र समृद्ध और विश्व शांतिपूर्ण बने, तो हमें आज ही सद्कर्म का बीज बोना होगा।क्योंकि जैसा कर्म हम करेंगे, वैसा ही परिणाम हमें मिलेगा, “तेरा किया आगे आएगा, सुख- दुख है फल कर्मों का, जैसी करनी वैसी भरनी।”

-संकलनकर्ता लेखक – कर विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए(एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र

कार्तिक पूर्णिमा स्नान: कल दोपहर से अयोध्या में भारी वाहनों का प्रवेश बंद, बुधवार को उमड़ेगी श्रद्धालुओं की भीड़

अयोध्या (राष्ट्र की परम्परा)। आगामी कार्तिक पूर्णिमा स्नान (5 नवंबर) के अवसर पर रामनगरी अयोध्या में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ की संभावना को देखते हुए प्रशासन ने 4 नवंबर दोपहर 12 बजे से यातायात डायवर्जन लागू करने का निर्णय लिया है। यह व्यवस्था 5 नवंबर की रात तक भीड़ समाप्त होने तक प्रभावी रहेगी। इस दौरान भारी वाहनों का प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।

गोंडा दिशा से आने वाले वाहनों को पुराना सरयू पुल होते हुए लता मंगेशकर चौक की ओर आने से रोका जाएगा और उन्हें लोलपुर बाईपास की ओर मोड़ा जाएगा।
साकेत पेट्रोल पंप बैरियर से नया घाट व लता मंगेशकर चौक की ओर वाहनों का प्रवेश नहीं होगा। प्रशासन ने साकेत पुल, बालूघाट मल्टीलेवल, सूर्या पैलेस और बैकुंठ धाम के पास अस्थायी पार्किंग की व्यवस्था की है।

हनुमानगुफा चौराहा से नयाघाट, रामघाट चौराहा, तपस्वी छावनी, विद्याकुंड बैरियर और उदया चौराहा की ओर वाहनों के आवागमन पर भी प्रतिबंध रहेगा। चार पहिया वाहनों को उदया फ्लाईओवर और गैस गोदाम तिराहा से होकर भेजा जाएगा।
दोपहिया वाहनों को रानोपाली क्रॉसिंग से लंगड़वीर चौराहा होकर मार्ग परिवर्तन के तहत भेजा जाएगा। वहीं टेढ़ी बाजार, चूड़ामणि चौराहा और गैस गोदाम से काशीराम कॉलोनी की ओर भी यातायात बंद रहेगा।

प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे निर्धारित पार्किंग स्थलों का ही उपयोग करें और यातायात पुलिस के निर्देशों का पालन करें, ताकि कार्तिक पूर्णिमा स्नान महापर्व शांतिपूर्ण व सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न हो सके।

NH पर हादसों पर सख्ती: 500 मीटर दायरे में दोबारा दुर्घटना तो ठेकेदार पर ₹50 लाख तक जुर्माना

सड़क हादसों पर लगाम कसने के लिए केंद्र सरकार ने सख्त कदम उठाया है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने निर्देश जारी किए हैं कि यदि किसी राष्ट्रीय राजमार्ग (NH) के 500 मीटर क्षेत्र में एक वर्ष के भीतर एक से अधिक सड़क हादसे होते हैं, तो निर्माण करने वाले ठेकेदार पर 25 से 50 लाख रुपये तक जुर्माना लगाया जाएगा।

सड़क परिवहन सचिव वी. उमाशंकर ने बताया कि मंत्रालय ने बिल्ड-ऑपरेट-ट्रांसफर (BOT) मॉडल के अनुबंधों में बदलाव किया है। अब ठेकेदारों को हादसे के बाद क्रैश मैनेजमेंट और सुधारात्मक कदम उठाना अनिवार्य होगा। यदि अगले वर्ष भी उसी स्थान पर हादसा होता है, तो जुर्माना ₹50 लाख तक बढ़ जाएगा।

सरकार ने बताया कि देशभर में अब तक 3,500 ब्लैक स्पॉट (दुर्घटना संभावित क्षेत्र) चिह्नित किए जा चुके हैं, जहां विशेष निगरानी और सुरक्षा सुधार कार्य चल रहा है।

कैशलेस इलाज योजना जल्द शुरू

सड़क हादसों के पीड़ितों के लिए केंद्र जल्द ही कैशलेस इलाज योजना शुरू करने जा रहा है। इसके तहत दुर्घटना पीड़ितों को नामित अस्पतालों में सात दिनों तक ₹1.5 लाख तक का मुफ्त इलाज मिलेगा।
यह योजना मार्च में चंडीगढ़ में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू हुई थी और अब इसे छह राज्यों में विस्तार दिया गया है। मंत्रालय का कहना है कि यह पहल सड़क दुर्घटना में समय पर इलाज न मिलने से होने वाली मौतों को कम करने में मदद करेगी।

देवरिया में गैंगस्टर राजेश यादव पुलिस मुठभेड़ में गिरफ्तार, पैर में लगी गोली

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत सलेमपुर पुलिस ने सोमवार को गैंगस्टर एक्ट में वांछित अपराधी राजेश यादव को मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार कर लिया। मुठभेड़ में आरोपी के दाहिने पैर में गोली लगी, जिसके बाद उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

जानकारी के अनुसार, राजेश यादव पुत्र मुन्नर यादव निवासी जगदीशपुर थाना जहाँगीरगंज, अम्बेडकरनगर को थाना लार पुलिस ने गैंगस्टर एक्ट में गिरफ्तार किया था। लेकिन इलाज के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सलेमपुर ले जाते समय उसने उपनिरीक्षक की सरकारी पिस्टल छीन ली और फायरिंग करते हुए भागने की कोशिश की।

सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने चकरवा–बहोरदास मार्ग पर घेराबंदी की। जवाबी कार्रवाई में पुलिस की गोली लगने से राजेश घायल हो गया और दोबारा गिरफ्तार कर लिया गया।

मौके से पुलिस ने एक सरकारी पिस्टल (9 एमएम), एक खोखा कारतूस और सात जिंदा कारतूस बरामद किए। आरोपी के खिलाफ कई मामले दर्ज हैं, जिनमें —
1️⃣ मुकदमा संख्या 80/2024: धारा 3/5ए/8 गोवध निवारण अधिनियम, पशु क्रूरता निवारण अधिनियम व 429 भादवि, थाना लार।
2️⃣ मुकदमा संख्या 421/2024: धारा 3(1) गैंगस्टर एक्ट, थाना लार।

मुठभेड़ में शामिल पुलिस टीम में प्रभारी निरीक्षक संतोष कुमार सिंह (थाना लार), निरीक्षक सादिक परवेज (सर्विलांस सेल), थानाध्यक्ष महेन्द्र कुमार चतुर्वेदी (थाना सलेमपुर) सहित अन्य जवान शामिल रहे।

पुलिस अधीक्षक देवरिया ने टीम की सराहना करते हुए कहा कि जनपद में अपराधियों के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा।

सुबह की धूप से लेकर स्ट्रेस मैनेजमेंट तक: ब्रेस्ट कैंसर से बचाव के 5 आसान उपाय

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा)। ब्रेस्ट कैंसर आज महिलाओं में सबसे आम कैंसर में से एक बन चुका है। भारत में भी हर साल लाखों महिलाएं इससे प्रभावित होती हैं। हालांकि, सही लाइफस्टाइल, संतुलित आहार और समय पर जांच से ब्रेस्ट कैंसर के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। एक्सपर्ट्स ने ब्रेस्ट कैंसर से बचाव के पांच आसान और असरदार उपाय बताए हैं।

  1. सुबह की धूप और नियमित एक्सरसाइज करें
    एक्सपर्ट्स के अनुसार, रोजाना कुछ देर वॉकिंग, जॉगिंग, साइकलिंग या योगा करने से शरीर मजबूत होता है और विटामिन D की कमी पूरी होती है। सुबह की धूप लेने से इम्यून सिस्टम मजबूत होता है, जिससे ब्रेस्ट कैंसर का खतरा घटता है।

  1. आहार में प्रोटीन शामिल करें
    प्रोटीन सिर्फ मसल्स बनाने के लिए नहीं बल्कि टिशू रिपेयर और एंटीबॉडी निर्माण के लिए भी जरूरी है। हर दिन अपने खाने में दालें, अंडा, पनीर या सोया प्रोटीन शामिल करने से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और कैंसर सेल्स से लड़ने में मदद मिलती है।

  1. शुगर और जंक फूड से दूरी रखें
    एक्सपर्ट्स का मानना है कि “कैंसर का खाना शुगर है।” ऐसे में जंक फूड, मिठाई, चॉकलेट, कोल्ड ड्रिंक और अल्कोहल का सेवन सीमित करें। कभी-कभी सेवन ठीक है, लेकिन इसे रोजमर्रा की आदत बनाना सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है।

  1. तनाव और नींद की कमी से बचें
    लगातार स्ट्रेस और नींद की कमी से हार्मोनल बैलेंस बिगड़ता है और इम्यून सिस्टम कमजोर होता है। पर्याप्त नींद लें, मेडिटेशन करें और मानसिक शांति बनाए रखें। यह ब्रेस्ट कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों से बचाव में सहायक होता है।

  1. नियमित जांच और सेल्फ एग्जामिनेशन करें
    हर महिला को महीने में एक बार ब्रेस्ट सेल्फ एग्जामिनेशन करना चाहिए और साल में कम से कम एक बार डॉक्टर से जांच करवानी चाहिए। समय पर पता चलने पर ब्रेस्ट कैंसर का इलाज पूरी तरह संभव है।

52 साल बाद भारत बना महिला वर्ल्ड कप चैंपियन, दक्षिण अफ्रीका को 52 रन से हराकर रचा इतिहास

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खेल (राष्ट्र की परम्परा)। भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने 52 साल लंबे इंतजार को खत्म करते हुए पहली बार महिला वनडे वर्ल्ड कप 2025 का खिताब जीत लिया है। रविवार को डीवाई पाटिल स्टेडियम में खेले गए रोमांचक फाइनल मुकाबले में भारत ने दक्षिण अफ्रीका को 52 रन से हराकर इतिहास रच दिया।

पहले बल्लेबाजी करते हुए भारत ने 298 रन का मजबूत स्कोर खड़ा किया। जवाब में दक्षिण अफ्रीकी टीम 246 रन पर सिमट गई। कप्तान हरमनप्रीत कौर की अगुवाई में भारतीय टीम ने पहली बार विश्व विजेता बनने का गौरव हासिल किया।

भारत की ओर से शेफाली वर्मा ने फाइनल में 87 रन की यादगार पारी खेली और गेंद से भी कमाल किया। उन्होंने सून लूस और मैरिजेन काप जैसे अहम विकेट झटके। वहीं दीप्ति शर्मा ने गेंदबाजी में धमाका करते हुए 9.3 ओवर में 39 रन देकर 5 विकेट चटकाए। उन्होंने दक्षिण अफ्रीकी कप्तान लॉरा वुल्फार्ट (101 रन) को आउट कर भारत की जीत सुनिश्चित की।

महिला वर्ल्ड कप की शुरुआत 1973 में हुई थी, लेकिन भारत ने कभी खिताब नहीं जीता था। इससे पहले टीम इंडिया 2005 और 2017 में फाइनल तक पहुंची थी। अब 2025 में भारत ने पहली बार वर्ल्ड कप जीतकर नया इतिहास लिखा है।

इससे पहले केवल ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड और न्यूजीलैंड ही यह खिताब जीत पाए थे। 25 साल बाद महिला वनडे क्रिकेट को नया चैंपियन भारत के रूप में मिला है।

कूटरचित दस्तावेजों से जमीन की धोखाधड़ी करने वाला वांछित अभियुक्त गिरफ्तार

गोरखपुर(राष्ट्र क़ी परम्परा)l धोखाधड़ी और कूटरचित दस्तावेजों के जरिए जमीन की खरीद-फरोख्त करने के आरोप में पुलिस ने एक वांछित अभियुक्त को गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान प्रदीप कुमार पुत्र स्वर्गीय राम सूरत निवासी डांगीपार, थाना खोराबार, जनपद गोरखपुर के रूप में हुई है।

थाना रामगढ़ताल में दर्ज मुकदमा संख्या 12/2023 धारा 419, 420, 467, 468, 471, 406, 506, 120बी भादंवि से संबंधित इस मामले में अभियुक्त पर आरोप है कि उसने कूटरचित दस्तावेज तैयार कर दूसरे की जमीन को धोखाधड़ी से बैनामा कराया और बाद में उसी जमीन को वादी के नाम बेचने का प्रयास किया।

पुलिस ने मुखबिर की सूचना पर कार्रवाई करते हुए अभियुक्त को गिरफ्तार किया। इस संबंध में पुलिस ने बताया कि आरोपी के विरुद्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की विधिक कार्रवाई की जा रही है। पुलिस का कहना है कि ऐसे फर्जीवाड़े में लिप्त व्यक्तियों पर कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी।

दादा साहब फाल्के इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल अवार्ड 2025 से नवाजे गए सांसद रवि किशन

गोरखपुर(राष्ट्र क़ी परम्परा)l सांसद और फिल्म अभिनेता रवि किशन शुक्ला को एक और बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। उन्हें वर्ष 2025 के “दादा साहब फाल्के इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल अवार्ड” से सम्मानित किया गया है। हाल ही में उन्हें हिंदी फिल्म “लापता लेडीज” के लिए फिल्मफेयर अवार्ड भी मिला था। लगातार दो प्रतिष्ठित सम्मान मिलने से उनके समर्थकों और प्रशंसकों में खुशी की लहर दौड़ गई।

रवि किशन मूल रूप से जौनपुर जिले के केराकत के रहने वाले हैं और वर्तमान में गोरखपुर से दूसरी बार बीजेपी सांसद हैं। उन्होंने 33 वर्षों के फिल्मी सफर में करीब 200 से अधिक हिंदी, भोजपुरी और दक्षिण भारतीय फिल्मों में काम किया है।

सांसद रवि किशन ने सम्मान मिलने पर कहा कि यह मेरे माता-पिता, समर्थकों और गुरु गोरखनाथ बाबा के आशीर्वाद का परिणाम है। मुझे प्रेरणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलती है। उनके पीआरओ पवन दुबे ने बताया कि रवि किशन ने यह मुकाम अपनी मेहनत और लगन से हासिल किया है। इस सम्मान की घोषणा होते ही गोरखपुर और उनके गांव में बधाइयों का तांता लग गया।

आंध्र प्रदेश में श्रद्धा के सैलाब में मचा कोहराम, नौ की मौत — प्रशासन और प्रबंधन पर उठे गंभीर सवाल

श्रीकाकुलम (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)।आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम जिले के काशीबुग्गा गांव स्थित श्री वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर में कार्तिक एकादशी के पावन अवसर पर श्रद्धालु दर्शन के लिए उमड़ पड़े, लेकिन यह श्रद्धा का सैलाब मातम में बदल गया। भीड़ के दबाव और अव्यवस्थित प्रबंधन के चलते भगदड़ मचने से नौ लोगों की मौत हो गई, जिनमें आठ महिलाएं और एक 13 वर्षीय बच्चा शामिल हैं। वहीं, 25 से अधिक लोग घायल हुए हैं, जिनमें कई की हालत गंभीर बताई जा रही है।

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यह मंदिर 94 वर्षीय ओडिशा के सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारी हरि मुकुंद पांडा द्वारा बनाया गया है और महज चार महीने पहले ही खोला गया था। बताया जा रहा है कि यह मंदिर तिरुमाला तिरुपति बालाजी मंदिर की तर्ज पर निर्मित है, जहां हर शनिवार को औसतन तीन हजार श्रद्धालु आते हैं।
मगर इस बार कार्तिक एकादशी के पहले आयोजन पर करीब 20,000 श्रद्धालु उमड़ पड़े। प्रशासन को इसकी कोई जानकारी नहीं दी गई थी और न ही किसी तरह के सुरक्षा इंतजाम किए गए थे।

सुबह करीब 9 बजे एक ही गेट से प्रवेश और निकासी, संकरी सीढ़ियों और कमजोर रेलिंग के कारण हालात बेकाबू हो गए। जिलाधिकारी के वी. महेश्वर रेड्डी के अनुसार, “जैसे ही एक व्यक्ति गिरा, लोगों का संतुलन बिगड़ गया और अफरा-तफरी फैल गई।” चंद मिनटों में सीढ़ियों की रेलिंग टूट गई और चीख-पुकार के बीच कई लोग एक-दूसरे पर गिर पड़े।

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मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने हादसे पर गहरा शोक जताते हुए कहा कि, “यदि भीड़ की जानकारी पहले दी जाती, तो बेहतर प्रबंधन संभव था।” उन्होंने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और पीड़ित परिवारों को सहायता देने का आश्वासन दिया।
वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी घटना पर दुख व्यक्त करते हुए मृतकों के परिवारों को ₹2 लाख और घायलों को ₹50,000 की आर्थिक सहायता की घोषणा की है।

पुलिस ने बताया कि मंदिर राज्य के मंदिर एंडॉवमेंट विभाग में पंजीकृत नहीं है और बड़ी धार्मिक सभाओं की अनुमति भी नहीं ली गई थी।
फिलहाल भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 100 के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है और चार मंदिर कर्मचारियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।

गौरतलब है कि यह इस वर्ष आंध्र प्रदेश की तीसरी बड़ी मंदिर दुर्घटना है। इससे पहले जनवरी में तिरुपति में छह और अप्रैल में विशाखापट्टनम के सिम्हाचलम मंदिर में सात लोगों की जान जा चुकी है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह हादसा “ईश्वर की इच्छा” नहीं बल्कि प्रबंधन की घोर लापरवाही का परिणाम है।

घायलों का इलाज जारी है और जिला प्रशासन ने स्थिति पर कड़ी नजर बनाए रखी है।