Wednesday, June 17, 2026
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शिव मंदिर में रहस्यमयी चोरी से मचा हड़कंप, घड़ा और घंटी गायब; पुलिस जांच में जुटी

भागलपुर/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। उत्तर प्रदेश के Deoria जनपद के मईल थाना क्षेत्र स्थित भागलपुर गांव में उत्तरी शिव मंदिर में लगातार हो रही चोरी की घटनाओं से क्षेत्र में हड़कंप मच गया है। मंदिर से पहले घड़ा और अब नगाड़े के साथ लगी पीतल की घंटी चोरी होने से ग्रामीणों में चिंता और आक्रोश दोनों बढ़ गया है।

मंदिर से एक के बाद एक सामान चोरी

मंदिर के पुजारी ओमप्रकाश तिवारी के अनुसार, कुछ दिन पहले मंदिर से एक घड़ा चोरी हो गया था। इसके बाद अब अज्ञात चोरों ने मंदिर में बजाए जाने वाले पीतल के नगाड़े के साथ लगी घंटी को खोलकर गायब कर दिया।
लगातार हो रही इन घटनाओं ने मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

ग्रामीणों में आक्रोश, कार्रवाई की मांग

मंदिर के संरक्षक सतीश जायसवाल ने प्रशासन से इस मामले को गंभीरता से लेते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

वहीं स्थानीय निवासी शिव शंकर जायसवाल ने आशंका जताई कि यह घटना केवल आर्थिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि किसी की दुर्भावना या जलन का परिणाम भी हो सकती है, क्योंकि चोरी हुए सामान की कीमत ज्यादा नहीं है।

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पुलिस मौके पर पहुंची, जांच शुरू

घटना की सूचना मिलते ही मईल थाना पुलिस सक्रिय हुई। Kamlesh (एसआई) अपनी टीम के साथ मंदिर पहुंचे और मौके का निरीक्षण किया।
पुलिस ने आसपास के हालात का जायजा लिया और संभावित सुराग जुटाने का प्रयास किया। देर शाम तक मंदिर परिसर में ग्रामीणों की भीड़ लगी रही।

अभी तक नहीं मिली तहरीर

पुलिस के अनुसार, मंदिर चोरी के मामले में अभी तक कोई लिखित शिकायत (तहरीर) प्राप्त नहीं हुई है। इसी क्षेत्र में हाल के दिनों में हुई मारपीट की घटनाओं में भी अभी तक कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है।

क्षेत्र में बढ़ी सतर्कता

सूत्रों के मुताबिक, भागलपुर क्षेत्र में पिछले कुछ दिनों से हो रही घटनाओं को देखते हुए पुलिस पहले से ही सतर्क है। अब मंदिर चोरी की घटना के बाद निगरानी और बढ़ा दी गई है।

हिंदी विभाग के पुरातन छात्रों ने रची संवाद की नई मिसाल

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। Deen Dayal Upadhyaya Gorakhpur University के हिंदी विभाग में आयोजित पुरातन छात्र सम्मेलन ने पीढ़ियों के बीच संवाद, स्मृतियों और अनुभवों के आदान-प्रदान की एक प्रेरक मिसाल पेश की। इस आयोजन में दशकों पुराने विद्यार्थियों से लेकर वर्तमान सत्र के छात्र-छात्राओं तक ने भाग लेकर इसे विशेष बना दिया।

कुलपति ने संवाद और समन्वय पर दिया जोर

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति Prof. Poonam Tandon ने कहा कि हिंदी विभाग की समृद्ध परंपरा रही है और यहां के पुरातन छात्रों ने समाज में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है।

उन्होंने कहा कि:
• पुरातन छात्रों के साथ संवाद बनाए रखना जरूरी है
• इससे वर्तमान पीढ़ी को मार्गदर्शन मिलता है
• शिक्षा केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं, बल्कि अनुभवों से भी विकसित होती है

उन्होंने यह भी कहा कि सम्मान और प्रोत्साहन किसी भी स्वस्थ समाज की पहचान होते हैं और ऐसे आयोजन इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

स्मृतियों का महत्व: पद्मश्री विश्वनाथ प्रसाद तिवारी

इस अवसर पर Vishwanath Prasad Tiwari ने स्मृतियों के महत्व पर गहन विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि:

“जीवन का मूल आधार स्मृति है। यदि स्मृतियां समाप्त हो जाएं, तो मनुष्य का अस्तित्व भी निरर्थक हो जाता है।”

उन्होंने यह भी बताया कि मानव मस्तिष्क की प्रवृत्ति होती है कि वह बुरी स्मृतियों को अधिक याद रखता है और अच्छी स्मृतियों को भूल जाता है। इस प्रवृत्ति से ऊपर उठना ही जीवन को सही दिशा देता है।

पुरातन छात्रों ने साझा किए अनुभव

कार्यक्रम में कई पुरातन छात्रों और शिक्षकों ने अपने अनुभव और यादें साझा कीं, जिनमें प्रमुख रूप से:

• प्रो. अनंत मिश्र
• रामदरश राय
• अरविंद त्रिपाठी
• अनिल राय
• रंजना जायसवाल
• प्रभा सिंह

इन सभी ने अपने छात्र जीवन की स्मृतियों को साझा करते हुए वर्तमान पीढ़ी को प्रेरित किया।

आयोजन की विशेषताएं

• 1957 बैच से लेकर वर्तमान सत्र तक के छात्रों की भागीदारी
• पीढ़ियों के बीच जीवंत संवाद
• शिक्षा, साहित्य और जीवन मूल्यों पर चर्चा
• अनुभव और मार्गदर्शन का आदान-प्रदान

हिंदी विभाग के अध्यक्ष Vimlesh Kumar Mishra ने सभी अतिथियों का स्वागत किया। कार्यक्रम का संचालन Rajesh Mall ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन Sunil Yadav ने दिया।

पेट्रोल-डीजल की कमी न होने दें: डीएसओ ने ऑयल कंपनियों को दिए सख्त निर्देश

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। उत्तर प्रदेश के Gorakhpur जनपद में पेट्रोल-डीजल की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए जिला पूर्ति अधिकारी (डीएसओ) Ramendra Pratap Singh ने ऑयल कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ अहम बैठक की। बैठक में उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि किसी भी पेट्रोल पंप पर ईंधन की कमी नहीं होनी चाहिए, क्योंकि जिले में पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है।

समय पर ऑर्डर देने के निर्देश

डीएसओ ने सभी पेट्रोल पंप संचालकों को निर्देशित किया कि वे समय रहते ईंधन की आपूर्ति के लिए ऑर्डर बुक करें।
उन्होंने कहा कि जैसे ही स्टॉक कम होने लगे, तुरंत नई खेप के लिए आदेश दिया जाए, ताकि आपूर्ति श्रृंखला में कोई बाधा न आए और उपभोक्ताओं को परेशानी का सामना न करना पड़े।

लापरवाही पर होगी कार्रवाई

Ramendra Pratap Singh ने सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि किसी भी पंप पर ईंधन खत्म होना लापरवाही मानी जाएगी।
ऐसी स्थिति में संबंधित संचालकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

नियमित निगरानी के निर्देश

अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि वे नियमित रूप से पेट्रोल पंपों की निगरानी करें और आपूर्ति की स्थिति का जायजा लेते रहें। इससे किसी भी संभावित समस्या का समय रहते समाधान किया जा सकेगा।

समन्वय पर जोर

बैठक में ऑयल कंपनियों के प्रतिनिधियों से बेहतर समन्वय बनाकर काम करने पर जोर दिया गया। प्रशासन का कहना है कि आपूर्ति व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए सभी संबंधित पक्षों का सहयोग जरूरी है।

जनता को नहीं होगी परेशानी

प्रशासन ने साफ किया है कि जिले में पेट्रोल-डीजल की पर्याप्त उपलब्धता है और आम जनता को ईंधन के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा। आपूर्ति व्यवस्था को बनाए रखने के लिए हर स्तर पर निगरानी और आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।

बेमौसम बारिश में टूटा नाला, नगर आयुक्त ने दिए तत्काल मरम्मत के निर्देश

क्वालिटी से समझौता नहीं होगा, गोलघर–कलेक्ट्रेट चौराहे के कार्यों की जांच के आदेश

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। उत्तर प्रदेश के Gorakhpur में बेमौसम तेज बारिश के बाद निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो गए हैं। शहर के व्यस्त गोलघर–कलेक्ट्रेट चौराहे पर बन रहा नाला क्षतिग्रस्त हो गया, जिससे जल निकासी व्यवस्था प्रभावित होने का खतरा पैदा हो गया।

नगर आयुक्त ने लिया संज्ञान

मामले को गंभीरता से लेते हुए नगर आयुक्त Gaurav Singh Sogarwal ने तत्काल नाले की मरम्मत के निर्देश दिए। उन्होंने संबंधित अधिकारियों और कार्यदायी संस्था को स्पष्ट कहा कि प्राथमिकता के आधार पर क्षतिग्रस्त हिस्से को ठीक किया जाए, ताकि आम जनता को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

गुणवत्ता पर सख्त रुख

नगर आयुक्त ने दो टूक कहा कि निर्माण कार्यों की गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि बारिश के दौरान ही निर्माण कार्यों की वास्तविक गुणवत्ता की परख होती है, इसलिए जहां भी खामियां सामने आएं, उन्हें तुरंत दुरुस्त किया जाए।

जांच के दिए आदेश

गोलघर–कलेक्ट्रेट क्षेत्र में चल रहे सभी निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की जांच कराने के निर्देश भी दिए गए हैं। अधिकारियों को चेतावनी दी गई है कि यदि किसी भी स्तर पर लापरवाही या घटिया सामग्री के उपयोग की पुष्टि हुई, तो संबंधित के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

विभागों में मचा हड़कंप

नगर आयुक्त की सख्ती के बाद संबंधित विभागों में हलचल तेज हो गई है। निर्माण कार्यों को सुधारने और खामियों को दूर करने के लिए तेजी से काम शुरू कर दिया गया है।

लोकतंत्र की हत्या! शांतिपूर्ण प्रदर्शन से पहले सपा नेता विजय प्रताप यादव हाउस अरेस्ट

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। उत्तर प्रदेश के Deoria जनपद के बरहज विधानसभा क्षेत्र में उस समय राजनीतिक माहौल गरमा गया, जब समाजवादी पार्टी के नेता विजय प्रताप यादव को पुलिस ने उनके आवास पर नजरबंद (हाउस अरेस्ट) कर दिया। यह कार्रवाई उस वक्त हुई जब सपा कार्यकर्ता कानून-व्यवस्था और कथित फर्जी मुकदमों के विरोध में शांतिपूर्ण प्रदर्शन की तैयारी कर रहे थे।

प्रदर्शन से पहले कार्रवाई, उठे सवाल

मिली जानकारी के अनुसार, पुलिस प्रशासन ने एहतियातन कदम उठाते हुए विजय प्रताप यादव को घर से बाहर निकलने से रोक दिया। इस कार्रवाई को लेकर विपक्ष ने तीखी प्रतिक्रिया दी है और इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताया है।

समाजवादी पार्टी के नेताओं का कहना है कि शांतिपूर्ण विरोध हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है और इस तरह की कार्रवाई लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है।

सपा का आरोप: आवाज दबाने की कोशिश

Samajwadi Party ने इस कदम को सरकार की “हताशा” करार देते हुए आरोप लगाया कि प्रशासन का इस्तेमाल विपक्ष की आवाज दबाने के लिए किया जा रहा है।

विजय प्रताप यादव ने कहा:
“अन्याय के खिलाफ शांतिपूर्ण तरीके से आवाज उठाना हमारा अधिकार है। अगर यह ‘गलती’ है, तो हम इसे बार-बार करेंगे।”

पार्टी का यह भी कहना है कि प्रदेश में बढ़ते अपराध और निर्दोष लोगों पर दर्ज हो रहे कथित फर्जी मुकदमों को लेकर जनता में असंतोष है।

कार्यकर्ताओं का समर्थन, संघर्ष का ऐलान

सपा कार्यकर्ताओं ने दावा किया कि वे पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष Akhilesh Yadav के सिद्धांतों पर चलते हुए संघर्ष जारी रखेंगे। उनका कहना है कि “जुल्म और अन्याय के खिलाफ लड़ना समाजवादियों के डीएनए में है।”

प्रशासन का पक्ष

हालांकि प्रशासन की ओर से इस मामले पर विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन सूत्रों के अनुसार यह कार्रवाई कानून-व्यवस्था बनाए रखने के मद्देनजर की गई है, ताकि किसी भी संभावित अव्यवस्था को रोका जा सके।

राजनीतिक माहौल गरमाया

बरहज की यह घटना प्रदेश की वर्तमान राजनीतिक स्थिति को भी दर्शाती है, जहां विपक्ष लगातार सत्ता पक्ष पर लोकतांत्रिक मूल्यों के हनन के आरोप लगा रहा है।
वहीं सपा ने स्पष्ट किया है कि वह इस मुद्दे को लेकर आगे भी विरोध दर्ज कराती रहेगी और “पुलिसिया कार्रवाई” के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करेगी।

ब्रह्म ज्ञान: संस्कार और विज्ञान के बीच सेतु

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। उत्तर प्रदेश के Maharajganj में आयोजित एक वैचारिक विमर्श में यह प्रश्न प्रमुखता से उभरा कि क्या ब्रह्म ज्ञान केवल आध्यात्मिक संस्कारों की देन है या इसे आधुनिक विज्ञान के संदर्भ में भी समझा जा सकता है। आज जब दुनिया तेज़ी से विज्ञान और तकनीक की ओर बढ़ रही है, वहीं आध्यात्मिक चिंतन की प्रासंगिकता भी बनी हुई है।

ब्रह्म ज्ञान: भारतीय दर्शन की मूल अवधारणा

भारतीय दर्शन में ब्रह्म ज्ञान को आत्मा और परमात्मा के एकत्व का अनुभव माना गया है। यह केवल बौद्धिक समझ नहीं, बल्कि एक गहन चेतनात्मक अनुभूति है। परंपरागत रूप से यह ज्ञान गुरु-शिष्य परंपरा, साधना, तप और ध्यान के माध्यम से प्राप्त किया जाता रहा है।

यह ज्ञान व्यक्ति को बाहरी जगत की अस्थिरता से ऊपर उठाकर आंतरिक शांति और आत्मबोध की ओर ले जाता है। पीढ़ियों से यह संस्कारों के रूप में समाज में प्रवाहित होता रहा है और नैतिक मूल्यों की नींव को मजबूत करता है।

विज्ञान की दृष्टि से ब्रह्म ज्ञान

आधुनिक समय में Neuroscience और मनोविज्ञान के क्षेत्र में हुए शोधों ने ध्यान, योग और मेडिटेशन के प्रभावों को प्रमाणित किया है।

• नियमित ध्यान से मस्तिष्क की संरचना में बदलाव देखा गया
• मानसिक तनाव में कमी और एकाग्रता में वृद्धि होती है
• भावनात्मक संतुलन बेहतर होता है

इन निष्कर्षों से यह संकेत मिलता है कि ब्रह्म ज्ञान की प्रक्रिया से जुड़े अभ्यासों का वैज्ञानिक आधार भी है। यानी इसका एक हिस्सा अनुभव के साथ-साथ विज्ञान की कसौटी पर भी खरा उतरता है।

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सीमाएं: जहां विज्ञान और आध्यात्म अलग हो जाते हैं

हालांकि, ब्रह्म ज्ञान को पूरी तरह विज्ञान के दायरे में रखना संभव नहीं है।

• विज्ञान प्रमाण और पुनरावृत्ति पर आधारित है
• ब्रह्म ज्ञान व्यक्तिगत अनुभूति और चेतना का विषय है

हर व्यक्ति का अनुभव अलग होता है, जिसे प्रयोगशाला में पूरी तरह मापा या दोहराया नहीं जा सकता। यही कारण है कि इसे केवल वैज्ञानिक या केवल आध्यात्मिक दृष्टिकोण से समझना अधूरा होगा।

संस्कार और विज्ञान: एक संतुलित सेतु

वास्तव में ब्रह्म ज्ञान इन दोनों के बीच एक संतुलित सेतु का कार्य करता है:

• संस्कार व्यक्ति को इस मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं
• विज्ञान उसे समझने और विश्लेषण करने का दृष्टिकोण प्रदान करता है

जब आस्था और तर्क का संतुलन बनता है, तभी व्यक्ति का समग्र विकास संभव होता है।

आधुनिक समाज में प्रासंगिकता

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में मानसिक तनाव, चिंता और असंतुलन बढ़ रहा है। ऐसे में ब्रह्म ज्ञान को यदि सही रूप में समझा जाए, तो यह:

• मानसिक स्वास्थ्य सुधारने में सहायक हो सकता है
• आत्म अनुशासन और सकारात्मक सोच विकसित करता है
• जीवन के प्रति संतुलित दृष्टिकोण देता है

शिक्षा प्रणाली में भी यदि वैज्ञानिक सोच के साथ आध्यात्मिक मूल्यों का समावेश किया जाए, तो आने वाली पीढ़ी अधिक संवेदनशील और विवेकशील बन सकती है।

सोशल मीडिया, हेट स्पीच और कानून : 2026 के ऐतिहासिक फैसले का बड़ा संदेश

अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बनाम हेट स्पीच : डिजिटल युग में कानून, लोकतंत्र और सामाजिक संतुलन का बड़ा सवाल


डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बढ़ती नफरत भरी भाषा ने सामाजिक सौहार्द और लोकतांत्रिक मूल्यों के सामने गंभीर चुनौती खड़ी कर दी है। सुप्रीम कोर्ट के 29 अप्रैल 2026 के फैसले ने स्पष्ट किया कि भारत में हेट स्पीच रोकने के लिए कानून पर्याप्त हैं, आवश्यकता केवल सख्त और निष्पक्ष क्रियान्वयन की है।
✒️ कलमकार : एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी, गोंदिया महाराष्ट्र

भारत सहित पूरी दुनिया में डिजिटल क्रांति ने संवाद और सूचना के स्वरूप को पूरी तरह बदल दिया है। इंटरनेट, सोशल मीडिया और 24×7 डिजिटल प्रसारण ने विचारों के आदान-प्रदान को अभूतपूर्व गति दी है। अब किसी भी व्यक्ति का बयान कुछ ही मिनटों में करोड़ों लोगों तक पहुंच जाता है। यह परिवर्तन लोकतंत्र, पारदर्शिता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को मजबूत करने वाला साबित हुआ है, लेकिन इसके साथ एक गंभीर संकट भी तेजी से उभरा है — हेट स्पीच यानी नफरत फैलाने वाली भाषा।
आज हेट स्पीच केवल ऑनलाइन बहस तक सीमित नहीं रह गई है। कई मामलों में यह सामाजिक तनाव, सांप्रदायिक विभाजन, हिंसा और दंगों का कारण बनती दिखाई देती है। सोशल मीडिया एल्गोरिदम विवादास्पद और उत्तेजक कंटेंट को अधिक तेजी से फैलाते हैं, जिससे नफरत और ध्रुवीकरण की प्रवृत्ति बढ़ती है। यही वजह है कि भारत में हेट स्पीच को नियंत्रित करने के लिए कठोर कानून और प्रभावी कार्रवाई की मांग लगातार बढ़ रही है।
इसी पृष्ठभूमि में 29 अप्रैल 2026 को सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने हेट स्पीच को लेकर अतिरिक्त दिशा-निर्देश जारी करने या नए न्यायिक हस्तक्षेप से इनकार करते हुए स्पष्ट कहा कि वर्तमान कानूनी ढांचा पर्याप्त है। अदालत ने कहा कि समस्या कानूनों की कमी नहीं, बल्कि उनके प्रभावी और निष्पक्ष क्रियान्वयन की है।
यह फैसला भारतीय लोकतंत्र में शक्तियों के पृथक्करण के सिद्धांत को भी मजबूत करता है। अदालत ने साफ कहा कि कानून बनाना संसद और विधानसभाओं का कार्य है। न्यायपालिका कानून की व्याख्या कर सकती है, लेकिन स्वयं कानून नहीं बना सकती। इस प्रकार सुप्रीम कोर्ट ने न्यायिक मर्यादा और संवैधानिक संतुलन दोनों को बनाए रखा।
याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि वर्तमान कानून अस्पष्ट हैं और राजनीतिक भाषणों, धार्मिक मंचों तथा सोशल मीडिया के जरिए फैल रही नफरत को रोकने में असफल साबित हो रहे हैं। उन्होंने अदालत से व्यापक दिशानिर्देश और सख्त कानूनी ढांचा तैयार करने की मांग की थी। लेकिन अदालत ने इन मांगों को स्वीकार नहीं किया और कहा कि मौजूदा कानूनों में पर्याप्त शक्ति मौजूद है।
सुप्रीम Court ने अपने फैसले में भारतीय न्याय संहिता 2023 की कई धाराओं का उल्लेख किया। धारा 196 वैमनस्य फैलाने, जबकि धारा 299 धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने जैसे मामलों को कवर करती है। इसके अतिरिक्त भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 के तहत संज्ञेय अपराधों में एफआईआर दर्ज करना अनिवार्य है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि पुलिस कार्रवाई नहीं करती, तो पीड़ित व्यक्ति पुलिस अधीक्षक या मजिस्ट्रेट की शरण ले सकता है।
फैसले का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और हेट स्पीच के बीच संतुलन को लेकर रहा। भारतीय संविधान का अनुच्छेद 19(1)(a) प्रत्येक नागरिक को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता देता है, लेकिन अनुच्छेद 19(2) सार्वजनिक व्यवस्था, नैतिकता और राष्ट्रीय सुरक्षा के हित में उचित प्रतिबंध लगाने की अनुमति भी देता है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि हर कठोर, विवादास्पद या असहमति वाला बयान हेट स्पीच नहीं माना जा सकता। यदि ऐसा किया गया तो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अनावश्यक हनन होगा। केवल वही भाषण प्रतिबंधित होना चाहिए जो वास्तव में हिंसा, घृणा या सामाजिक वैमनस्य को बढ़ावा देता हो।
यह दृष्टिकोण सुप्रीम कोर्ट के पूर्व के कई महत्वपूर्ण फैसलों के अनुरूप है। श्रेया सिंघल बनाम यूनियन ऑफ इंडिया मामले में अदालत ने आईटी एक्ट की धारा 66A को रद्द करते हुए कहा था कि केवल उकसावे वाले भाषणों पर ही प्रतिबंध लगाया जा सकता है। अमिश देवगन बनाम यूनियन ऑफ इंडिया में अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसा भाषण जो किसी समुदाय के खिलाफ घृणा या हिंसा को बढ़ावा दे, वही हेट स्पीच की श्रेणी में आएगा।
इसी प्रकार सुब्रमण्यम स्वामी बनाम यूनियन ऑफ इंडिया में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पूर्ण अधिकार नहीं है और इसमें दूसरों की प्रतिष्ठा और गरिमा की रक्षा भी शामिल है। वहीं तहसीन एस. पूनावाला बनाम यूनियन ऑफ इंडिया मामले में अदालत ने मॉब लिंचिंग और नफरत फैलाने वाले भाषणों पर कठोर रुख अपनाया था।
इन सभी निर्णयों को देखने पर स्पष्ट होता है कि भारतीय न्यायपालिका लगातार संतुलित दृष्टिकोण अपनाती रही है। अदालत ने न तो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को असीमित माना और न ही हेट स्पीच के नाम पर लोकतांत्रिक अधिकारों को दबाने का समर्थन किया।
फिर भी सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि जब पर्याप्त कानून मौजूद हैं, तो हेट स्पीच की घटनाएं लगातार क्यों बढ़ रही हैं? इसका उत्तर प्रशासनिक और राजनीतिक क्रियान्वयन में छिपा है। कई बार पुलिस समय पर एफआईआर दर्ज नहीं करती, जांच में देरी होती है या निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं। राजनीतिक दबाव और सामाजिक ध्रुवीकरण भी कार्रवाई को प्रभावित करते हैं।
डिजिटल युग ने इस चुनौती को और जटिल बना दिया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म सनसनीखेज और भावनात्मक सामग्री को अधिक तेजी से प्रसारित करते हैं। फेक न्यूज और अफवाहें समाज में अविश्वास और नफरत को बढ़ाने का काम करती हैं। इसलिए केवल कानूनी उपाय पर्याप्त नहीं हैं।
समस्या के समाधान के लिए बहुआयामी रणनीति अपनानी होगी। सबसे पहले कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करना होगा। पुलिस और प्रशासन को प्रशिक्षित, संवेदनशील और जवाबदेह बनाना आवश्यक है। दूसरा, सोशल मीडिया कंपनियों को भी जिम्मेदारी निभानी होगी और हेट स्पीच के खिलाफ सख्त नीतियां लागू करनी होंगी। तीसरा, समाज में डिजिटल साक्षरता और संवैधानिक जागरूकता बढ़ानी होगी ताकि लोग नफरत फैलाने वाले संदेशों की पहचान कर सकें।
स्पष्ट है कि हेट स्पीच केवल कानूनी मुद्दा नहीं बल्कि सामाजिक, नैतिक और राजनीतिक चुनौती भी है। सुप्रीम कोर्ट का हालिया फैसला यह संदेश देता है कि लोकतंत्र में संतुलन सबसे महत्वपूर्ण है — अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता भी सुरक्षित रहे और उसके नाम पर समाज में नफरत व हिंसा को बढ़ावा भी न मिले।
जब तक सरकार, न्यायपालिका, मीडिया, तकनीकी कंपनियां और आम नागरिक मिलकर जिम्मेदारी नहीं निभाएंगे, तब तक इस चुनौती का स्थायी समाधान संभव नहीं होगा। एक शांतिपूर्ण, समावेशी और मजबूत लोकतंत्र की दिशा में यही सबसे आवश्यक मार्ग है।


✒️ संकलनकर्ता : कर विशेषज्ञ, स्तंभकार, साहित्यकार, अंतरराष्ट्रीय लेखक, चिंतक, कवि, संगीत माध्यमा, सीए (एटीसी), एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी, गोंदिया महाराष्ट्र

बलिया में पीपा पुल टूटा, तत्परता से 5 लोगों को सुरक्षित निकाला गया

बलिया (राष्ट्र की परम्परा)। उत्तर प्रदेश के Ballia जनपद के माल्देपुर क्षेत्र में बुधवार को पीपा पुल के क्षतिग्रस्त होने की सूचना से अफरा-तफरी मच गई। हालांकि प्रशासन की त्वरित कार्रवाई और संयुक्त रेस्क्यू अभियान की बदौलत पुल पर फंसे पांच लोगों को सकुशल बाहर निकाल लिया गया। राहत की बात यह रही कि इस घटना में कोई जनहानि नहीं हुई।

सूचना मिलते ही सक्रिय हुआ प्रशासन

घटना की जानकारी मिलते ही जिला आपदा कंट्रोल रूम तुरंत सक्रिय हो गया और राहत एवं बचाव कार्य शुरू कर दिया गया। प्रारंभिक सूचना के अनुसार, पुल टूटने के कारण लगभग 5–6 लोग उस पर फंस गए थे, जिससे स्थिति गंभीर हो गई थी।

अपर जिलाधिकारी (वि.रा.) ने तत्काल अग्निशमन एवं आपात सेवा की टीम को मौके पर भेजने के निर्देश दिए। साथ ही लोक निर्माण विभाग (PWD) के अधिशासी अभियंता और उप जिलाधिकारी सदर को भी मौके पर पहुंचकर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया।

संयुक्त रेस्क्यू ऑपरेशन से बचाई गई जान

मौके पर Uttar Pradesh Police की कोतवाली पीआरबी 6430 टीम पहुंची और बचाव कार्य में जुट गई। पास में मौजूद एल एंड टी कंपनी की स्टीमर की मदद से पुलिस और राहत दल ने संयुक्त अभियान चलाया।

काफी मशक्कत के बाद पीपा पुल पर फंसे सभी पांच लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। इस अभियान में स्थानीय नाविकों ने भी अहम भूमिका निभाई और प्रशासन का पूरा सहयोग किया।

कोई जनहानि नहीं, स्थिति नियंत्रण में

प्रशासन के अनुसार, इस घटना में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। सभी लोगों को सुरक्षित निकाल लेने के बाद क्षेत्र में स्थिति सामान्य हो गई है।
अधिकारियों ने बताया कि पूरे घटनाक्रम पर नजर रखी जा रही है और एहतियात के तौर पर क्षेत्र में सतर्कता बढ़ा दी गई है।

खराब मौसम को देखते हुए अलर्ट

खराब मौसम की आशंका को देखते हुए आपदा कंट्रोल रूम को अलर्ट मोड पर रखा गया है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सके।

निपुण भारत व पोषण योजनाओं की समीक्षा में सख्त दिखे डीएम, लापरवाही पर जताई नाराजगी

कायाकल्प कार्यों में देरी पर फटकार, कुपोषण दूर करने को मिशन मोड में काम के निर्देश

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। जिलाधिकारी संतोष कुमार शर्मा की अध्यक्षता में निपुण भारत मिशन एवं जिला पोषण समिति की समीक्षा बैठक कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित की गई, जिसमें शिक्षा और पोषण से जुड़े विभिन्न बिंदुओं पर गहन समीक्षा की गई। बैठक में जिलाधिकारी ने स्पष्ट कहा कि बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है, इसलिए संबंधित विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य करें और जमीनी स्तर पर परिणाम सुनिश्चित करें।
समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी ने ऑपरेशन कायाकल्प के अंतर्गत प्राथमिक विद्यालयों में चल रहे सुधार कार्यों की प्रगति पर असंतोष व्यक्त किया। उन्होंने भवनों की मरम्मत, निर्माण, शौचालय, चहारदीवारी और कक्षाओं के टाइलिंग जैसे कार्यों में देरी को गंभीरता से लेते हुए निर्देश दिया कि सभी असंतृप्त मानकों को शीघ्र पूर्ण कराया जाए। बीएसए रिद्धि पांडेय ने जानकारी दी कि दिव्यांग शौचालय के 291 मामलों में 226 कार्य अभी शुरू ही नहीं हुए हैं, वहीं 33 चहारदीवारी के सभी कार्य अनारंभ हैं।शिक्षण कक्ष टाइलिंग के 59 मामलों में 43 कार्य लंबित हैं। इस पर डीएम ने नाराजगी जताते हुए संबंधित अधिकारियों को कार्यों में तेजी लाने के सख्त निर्देश दिए।
आधारशिला क्रियान्वयन संदर्शिका के कम उपयोग पर भी जिलाधिकारी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। लक्ष्मीपुर, सिसवां, नौतनवां और परतावल ब्लॉकों में इसका उपयोग बेहद कम पाए जाने पर संबंधित खंड शिक्षा अधिकारियों को स्पष्टीकरण जारी करने के निर्देश दिए गए। उन्होंने कहा कि डीटीएफ और बीटीएफ टीमों द्वारा विद्यालयों का नियमित निरीक्षण किया जाए और शिक्षण गुणवत्ता में सुधार सुनिश्चित किया जाए।
उन्होंने बच्चों के लर्निंग आउटकम में सुधार को प्राथमिकता देते हुए कहा कि इसकी जिम्मेदारी तय की जाए और ठोस परिणाम सामने आएं। उन्होंने सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे विद्यालयों के शैक्षणिक वातावरण में गुणात्मक सुधार के लिए प्रभावी निगरानी करें।
जिला पोषण समिति की समीक्षा के दौरान कुपोषण की स्थिति पर भी चर्चा की गई। जिला कार्यक्रम अधिकारी ने बताया कि जनपद में 478 बच्चे गंभीर कुपोषित और 2638 बच्चे मध्यम कुपोषित श्रेणी में चिन्हित हैं। इन बच्चों के पोषण सुधार के लिए उन्हें एनआरसी में रेफर किया जा रहा है तथा आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों द्वारा घर-घर जाकर परामर्श दिया जा रहा है। साथ ही स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से चिकित्सीय सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जा रही हैं।कुपोषण को जड़ से समाप्त करने के लिए मिशन मोड में कार्य करने के निर्देश दिए और कहा कि टीएचआर प्लांट से पोषाहार का वितरण नियमित व पारदर्शी ढंग से सुनिश्चित किया जाए। इसके साथ ही प्रधानमंत्री मातृ वंदन योजना के तहत अधिक से अधिक गर्भवती महिलाओं का पंजीकरण कराने पर जोर दिया गया। बैठक के अंत में जिलाधिकारी ने सभी विभागों को निर्देशित किया कि वे योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए जिम्मेदारी के साथ कार्य करें, ताकि जनपद में शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में ठोस सुधार दिखाई दे।
इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी महेंद्र कुमार सिंह, डीडीओ बी.एन. कन्नौजिया, डीसी एनआरएलएम, डीपीआरओ तथा जिला कार्यक्रम अधिकारी सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित रहें।

जिला कारागार में बच्चों के संरक्षण पर फोकस, ‘सुरक्षित बचपन योजना’ के तहत निरीक्षण

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)l जिला कारागार में ‘सुरक्षित बचपन योजना’ के अंतर्गत गठित संयुक्त निगरानी समिति ने निरीक्षण कर महिला बंदियों के साथ रह रहे बच्चों की देखभाल, सुरक्षा और समग्र विकास व्यवस्थाओं का जायजा लिया। निरीक्षण की अध्यक्षता अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) प्रेम नारायण सिंह ने की।
निरीक्षण का मुख्य उद्देश्य 0 से 6 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, मनोरंजन, मनोसामाजिक परामर्श और भावनात्मक सहयोग से जुड़ी व्यवस्थाओं को परखना तथा उनके समुचित संरक्षण को सुनिश्चित करना रहा। इस दौरान कारागार में पांच बच्चे आवासित पाए गए, जिनके लिए उपलब्ध सुविधाओं की समीक्षा की गई।
निरीक्षण उच्च न्यायालय के आदेशों के अनुपालन में किया गया। जिला बाल संरक्षण इकाई द्वारा किशोर न्याय अधिनियम के तहत बच्चों की व्यक्तिगत देखरेख योजना तैयार किए जाने की जानकारी दी गई। अधिकारियों ने संबंधित विभागों को शासनादेश के अनुसार नियमित निरीक्षण और आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
महिला कल्याण विभाग ने महिला बंदियों के साथ रह रहे बच्चों को स्पॉन्सरशिप योजना और मुख्यमंत्री जब बाल सेवा योजना (सामान्य) से लाभान्वित किए जाने की जानकारी दी। जेल प्रशासन ने बताया कि बच्चों को शासनादेश के अनुरूप सभी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से बच्चों के स्वास्थ्य परीक्षण के साथ पौष्टिक आहार और विटामिन उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया। शिक्षा विभाग ने बच्चों को शैक्षिक योजनाओं से जोड़ने तथा बाल विकास विभाग ने आंगनबाड़ी सेवाओं से आच्छादित करने की बात कही। निरीक्षण के दौरान प्रशासन, स्वास्थ्य, शिक्षा, पुलिस, महिला कल्याण और बाल संरक्षण से जुड़े अधिकारियों ने समन्वित प्रयासों के जरिए बच्चों के बेहतर भविष्य पर बल दिया।
यह निरीक्षण कारागार में रह रहे बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा और उनके विकास के लिए प्रशासन की गंभीरता को दर्शाता है।

नागरिक सुरक्षा स्वयंसेवकों को मिला आपदा और प्राथमिक उपचार का प्रशिक्षण

औरैया (राष्ट्र की परम्परा)l जनपद में नागरिक सुरक्षा स्वयंसेवकों को आपदा प्रबंधन और चिकित्सा संबंधी जानकारी से सशक्त बनाने के उद्देश्य से तहसील सदर सभागार में प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। नागरिक सुरक्षा विभाग और जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में स्वयंसेवकों को हीटवेव, प्राथमिक उपचार और आपदा से बचाव के व्यावहारिक उपायों की जानकारी दी गई।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में नागरिक सुरक्षा और सिविल डिफेंस के इतिहास, महत्व और समाज में इसकी भूमिका पर विस्तार से चर्चा की गई। स्वयंसेवकों को अपने-अपने क्षेत्र में जागरूकता फैलाने तथा आपदा की स्थिति में नेतृत्वकारी भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया गया।
विशेषज्ञ चिकित्सकों ने प्रशिक्षणार्थियों को प्राथमिक उपचार, हीटवेव से बचाव, वज्रपात, सर्पदंश और सीपीआर जैसी जीवनरक्षक तकनीकों की जानकारी दी। प्रशिक्षण के दौरान आपात स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया और बचाव उपायों पर भी व्यावहारिक मार्गदर्शन दिया गया।
कार्यक्रम के समापन पर नवनियुक्त स्वयंसेवकों सहित प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र वितरित किए गए। साथ ही हीटवेव और प्राथमिक चिकित्सा संबंधी पंपलेट भी वितरित कर जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया गया। कार्यक्रम के सफल संचालन में आपदा प्रबंधन और नागरिक सुरक्षा विभाग की टीम ने सक्रिय सहयोग दिया।
प्रशासन की इस पहल को आपदा प्रबंधन क्षमता मजबूत करने और नागरिक सुरक्षा स्वयंसेवकों को प्रशिक्षित कर समाज की सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

झमाझम बारिश से बदला मौसम, किसानों के चेहरों पर लौटी मुस्कान

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। लंबे समय से भीषण गर्मी और उमस से जूझ रहे जनपद वासियों को बुधवार की सायंकाल हुई झमाझम बारिश ने बड़ी राहत दी। बारिश के साथ ही जहां मौसम सुहावना हो गया, वहीं किसानों के चेहरों पर भी खुशी साफ झलकने लगी। कई दिनों से सूखे जैसे हालात झेल रहे किसानों के लिए यह बारिश किसी वरदान से कम नहीं मानी जा रही है।
बारिश के चलते खेतों में पर्याप्त नमी लौट आई है, जिससे खरीफ सीजन की तैयारियों को नई गति मिल गई है। विशेष रूप से धान, मक्का और अरहर जैसी प्रमुख फसलों की बुवाई के लिए अब अनुकूल परिस्थितियां बन गई हैं।
गांव-देहात में इस बारिश को लेकर उत्साह का माहौल है। किसान अब तेजी से खेतों की जुताई, बुवाई और अन्य कृषि कार्यों में जुटने की तैयारी कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि यदि इसी तरह समय- समय पर बारिश होती रही, तो इस बार अच्छी पैदावार की पूरी संभावना है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति भी मजबूत होगी।
बारिश का सकारात्मक असर पशुपालन पर भी पड़ने की उम्मीद जताई जा रही है। खेतों और चरागाहों में हरियाली बढ़ने से पशुओं के लिए चारे की उपलब्धता बेहतर होगी, जिससे पशुपालकों को भी राहत मिलेगी।
हालांकि, कुछ निचले इलाकों में हल्का जल-भराव देखने को मिला, लेकिन कुल मिलाकर यह बारिश खेती और जनजीवन के लिए बेहद लाभकारी साबित हो रही है। मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में भी हल्की से मध्यम बारिश की संभावना बनी हुई है, जिससे किसानों की उम्मीदें और मजबूत हो गई हैं।
इस बारिश ने न सिर्फ धरती को तर-बतर किया है, बल्कि किसानों के मन में भी नई उम्मीदों के बीज बो दिए हैं, जिससे पूरे जनपद में सकारात्मक माहौल देखने को मिल रहा है।

अज्ञात नंबर से गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी, कार्रवाई न होने पर प्रोफेसर ने एसएसपी से लगाई गुहार

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के उर्दू विभाग में कार्यरत असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. महबूब हसन ने अज्ञात नंबर से आए आपत्तिजनक व्हाट्सऐप संदेश और जान से मारने की धमकी को लेकर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को प्रार्थना पत्र देकर न्याय की मांग की है।
एसएसपी को दिए गए प्रार्थना पत्र के अनुसार 16 मार्च 2026 को रात 8:11 बजे उनके मोबाइल नंबर पर एक अज्ञात नंबर से उर्दू में आपत्तिजनक संदेश भेजा गया, जिससे उनके आत्मसम्मान और व्यक्तिगत गरिमा को ठेस पहुंची। इस घटना से वे मानसिक रूप से व्यथित हैं। उन्होंने 17 मार्च को थाना गुलरिहा में जन-सुनवाई के तहत शिकायत (क्र. सं. 1122) दर्ज कराई थी, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाया है।
डॉ. हसन ने यह भी बताया कि इससे पहले भी उन्हें गुमनाम चिट्ठी के माध्यम से अपशब्दों के साथ जान से मारने की धमकी मिल चुकी है, जिससे वे असुरक्षा महसूस कर रहे हैं। उन्होंने पुलिस प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

लोक अदालत को सफल बनाने के लिए प्रशासनिक अमला सक्रिय, तैयारियों की समीक्षा

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। आगामी 09 मई 2026 को आयोजित होने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत की तैयारियों को लेकर जनपद न्यायालय सभागार में प्रशासनिक अधिकारियों की बैठक आयोजित की गई। बैठक जनपद न्यायाधीश रणधीर सिंह के निर्देशन में हुई, जिसकी अध्यक्षता अपर जनपद न्यायाधीश-पॉस्को/नोडल अधिकारी लोक अदालत कृष्ण कुमार-v ने की।
बैठक में नोडल अधिकारी ने सभी विभागीय अधिकारियों से अपने-अपने स्तर पर अधिकतम वादों के निस्तारण के लिए सक्रिय प्रयास करने का आह्वान किया। उन्होंने निर्देश दिया कि लोक अदालत के दिन अधिक से अधिक मामलों को सुलझाकर जनता को त्वरित न्याय दिलाया जाए।
कलेक्ट्रेट के प्रभारी अधिकारी ने बताया कि लोक अदालत से संबंधित सभी तैयारियां पूर्ण कर ली गई हैं और अधिकाधिक मामलों के निस्तारण के लिए समन्वित प्रयास जारी हैं। वहीं पुलिस विभाग ने अवगत कराया कि न्यायालय से प्राप्त नोटिसों की तामील सुनिश्चित कराई जा रही है तथा सभी थानों को इस संबंध में आवश्यक निर्देश दिए गए हैं।
नोडल अधिकारी ने अधिकारियों से लोक अदालत की सफलता के लिए समन्वय और सहयोग बनाए रखने की अपेक्षा जताई।
बैठक में अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ0 राम रतन, पुलिस क्षेत्राधिकारी अजय सिंह, जिला आबकारी अधिकारी संजय कुमार, सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी प्रियंवदा सिंह, जिला पूर्ति अधिकारी राजीव कुमार, समाज कल्याण अधिकारी महेंद्र कुमार, नायब तहसीलदार खलीलाबाद हरे राम यादव, क्षेत्रीय वनाधिकारी आईबी सोनकर, डॉ0 मुबारक अली, सहायक आयुक्त जीएसटी धम्म प्रिय सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

हीटवेव से बचाव को प्रशासन अलर्ट, जारी की गई विस्तृत एडवाइजरी

औरैया (राष्ट्र की परम्परा)l जनपद में लगातार बढ़ रहे हीटवेव और लू के प्रकोप को देखते हुए जिला प्रशासन ने आमजन की सुरक्षा के लिए व्यापक एडवाइजरी जारी की है। अपर जिलाधिकारी (वि0/रा0) अविनाश चन्द्र मौर्य ने बताया कि अत्यधिक गर्मी और लू से जनहानि की आशंका को देखते हुए जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा बचाव संबंधी जरूरी दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं, ताकि लोग सतर्क रहें और लू के प्रभाव से सुरक्षित रह सकें।
जारी एडवाइजरी में लोगों से घर से बाहर निकलते समय गमछा, टोपी, चश्मा और छाते का उपयोग करने की अपील की गई है। हल्के रंग के सूती कपड़े पहनने, कड़ी धूप से बचने तथा पर्याप्त मात्रा में पानी, छाछ, लस्सी, नींबू पानी, नमक-चीनी घोल और आम के पने जैसे तरल पदार्थों के सेवन की सलाह दी गई है। निर्जलीकरण से बचाव के लिए ओआरएस घोल के प्रयोग पर भी जोर दिया गया है।
प्रशासन ने यात्रियों को पानी साथ रखने, हल्का और संतुलित भोजन करने तथा दिन के समय अनावश्यक बाहर न निकलने की सलाह दी है। घरों को ठंडा रखने के लिए खिड़कियों-दरवाजों पर रिफ्लेक्टर, गत्ते या काले पर्दे लगाने और छतों पर सफेद पेंट या चूने के प्रयोग की भी सलाह दी गई है। वृद्धों, बच्चों और गर्भवती महिलाओं के विशेष संरक्षण पर बल दिया गया है।
एडवाइजरी में लू लगने के लक्षणों—कमजोरी, सिरदर्द, उल्टी, मांसपेशियों में ऐंठन और चक्कर—को पहचानने तथा ऐसी स्थिति में तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेने के निर्देश दिए गए हैं। लू प्रभावित व्यक्ति को छाया में लिटाकर गीले कपड़े से शरीर ठंडा करने और पानी का छिड़काव करने की सलाह दी गई है। पशुओं को भी छाया और पर्याप्त पानी उपलब्ध कराने की अपील की गई है।
प्रशासन ने लोगों को चाय, कॉफी और शराब से दूरी बनाने, तेज धूप में बाहर न निकलने, अत्यधिक गर्मी में व्यायाम न करने तथा बच्चों और पालतू जानवरों को बंद वाहनों में न छोड़ने की चेतावनी दी है। साथ ही बासी और अधिक प्रोटीन युक्त भोजन से बचने को कहा गया है। स्थानीय मौसम पूर्वानुमान पर नजर रखने और तापमान में बदलाव को लेकर सतर्क रहने की अपील भी की गई है।
प्रशासन का उद्देश्य हीटवेव के प्रभाव को कम करते हुए जनमानस को जागरूक करना और संभावित जनहानि को रोकना है। जिला प्रशासन ने लोगों से एडवाइजरी का पालन कर सुरक्षित रहने की अपील की है।