संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। जनपद में बुधवार शाम मौसम ने अचानक करवट ली, जिससे भीषण गर्मी से राहत तो मिली, लेकिन तेज आंधी, धूलभरी हवाओं और ओलावृष्टि ने जनजीवन को पूरी तरह प्रभावित कर दिया। शाम होते-होते आसमान में धूल का घना गुबार छा गया, जिससे दिन में ही अंधेरे जैसा माहौल बन गया और सड़कों पर वाहनों की रफ्तार धीमी हो गई।
दोपहर तक तेज धूप और उमस से परेशान लोगों को शाम होते ही मौसम के उग्र रूप का सामना करना पड़ा। जिले के कई इलाकों में धूल की चादर छा गई और दृश्यता काफी कम हो गई, जिससे दोपहिया वाहन चालकों और ई-रिक्शा चालकों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। सुरक्षा के दृष्टिकोण से राहगीरों को अपने वाहन सड़क किनारे खड़े करने पड़े और कई लोग दुकानों व सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने को मजबूर दिखे।
इसी दौरान कई स्थानों पर बड़े पेड़ गिरने से सड़कें जाम हो गईं और आवागमन बाधित हो गया। जनपद गोरखपुर को संत कबीर नगर को जोड़ने वाले एक प्रमुख मार्ग मगहर-कटसहरा रोड पर विशाल पेड़ गिरने से दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई। स्थानीय लोग मौके पर जुटकर टहनियां हटाने और रास्ता साफ करने में लग गए, जिससे काफी देर बाद आंशिक रूप से यातायात बहाल हो सका।
आंधी के कारण कई जगहों पर पेड़ों की टहनियां टूटकर गिर गईं और बिजली के तार क्षतिग्रस्त होने की भी खबरें हैं, जिससे विद्युत आपूर्ति बाधित हुई। कुछ क्षेत्रों में बड़े-बड़े ओले गिरने से मौसम का मिजाज और अधिक बिगड़ गया। हालांकि तेज हवाओं और बारिश के चलते पारे में गिरावट दर्ज की गई, जिससे लोगों को गर्मी से राहत मिली।
वहीं इस दोहरे असर वाले मौसम ने किसानों की चिंता भी बढ़ा दी है, क्योंकि इस समय फसलों के प्रबंधन का महत्वपूर्ण दौर चल रहा है। देर शाम तक रुक-रुक कर बारिश का सिलसिला जारी रहा और पूरा जनपद ठंडी हवाओं की चपेट में रहा।
आंधी-ओलावृष्टि से बदला मौसम, पेड़ गिरने से सड़क जाम, जनजीवन प्रभावित
उच्च शिक्षा में ‘मार्केट फॉर लेमन्स’: गुणवत्ता बनाम विस्तार की चुनौती
लेखिका: डॉ. प्रियंका सौरभ
हरियाणा (राष्ट्र की परम्परा)। भारत में उच्च शिक्षा का तीव्र विस्तार अवसरों के साथ-साथ गंभीर चुनौतियाँ भी लेकर आया है। एक ओर विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों और निजी शिक्षण संस्थानों की संख्या तेजी से बढ़ी है, वहीं दूसरी ओर गुणवत्ता, पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर लगातार प्रश्न उठ रहे हैं। ऐसे समय में अर्थशास्त्री जॉर्ज अकेलॉफ का ‘मार्केट फॉर लेमन्स’ सिद्धांत अत्यंत प्रासंगिक दिखाई देता है। इस सिद्धांत के अनुसार जब उपभोक्ता को किसी वस्तु की वास्तविक गुणवत्ता की सही जानकारी नहीं होती, तब निम्न गुणवत्ता वाले उत्पाद बाजार पर हावी हो जाते हैं और अच्छे उत्पाद पीछे हट जाते हैं। उच्च शिक्षा के क्षेत्र में विद्यार्थी उपभोक्ता हैं और संस्थान सेवा प्रदाता। जब विद्यार्थियों को संस्थानों की वास्तविक स्थिति, शिक्षकों की गुणवत्ता, रोजगार संभावनाओं, शोध कार्य और आधारभूत सुविधाओं की सही जानकारी नहीं मिलती, तब वे कमज़ोर संस्थानों में प्रवेश लेने को विवश हो जाते हैं।
भारत में उच्च शिक्षा का विस्तार मुख्य रूप से नीतिगत प्रयासों के कारण हुआ है। नई शिक्षा नीति ने उच्च शिक्षा में नामांकन बढ़ाने, दूरस्थ शिक्षा को प्रोत्साहन देने, ऑनलाइन शिक्षण को बढ़ावा देने और निजी निवेश को आकर्षित करने पर बल दिया।
इससे शिक्षा तक पहुँच बढ़ी और अधिक विद्यार्थियों को अवसर मिला, परंतु संस्थानों की गुणवत्ता उसी गति से विकसित नहीं हो सकी। अनेक निजी संस्थान आकर्षक विज्ञापन, भव्य परिसर और बड़े-बड़े दावे करके विद्यार्थियों को अपनी ओर खींचते हैं, जबकि वास्तविकता में वहाँ योग्य शिक्षक, शोध वातावरण और रोजगारपरक शिक्षा का अभाव होता है। सरकारी आँकड़े भी अक्सर विलंब से आते हैं या सामान्य लोगों की समझ से परे जटिल रूप में उपलब्ध होते हैं। परिणामस्वरूप विद्यार्थी और अभिभावक सही निर्णय नहीं ले पाते। यही स्थिति निम्न गुणवत्ता वाले शिक्षा बाजार को जन्म देती है।
इसी समस्या को दूर करने के लिए भारत सरकार ने राष्ट्रीय संस्थागत रैंकिंग व्यवस्था प्रारंभ की। इसका उद्देश्य देश के उच्च शिक्षण संस्थानों का मूल्यांकन निश्चित मानकों के आधार पर करना है। इसमें शिक्षण व्यवस्था, संसाधन, शोध कार्य, स्नातक परिणाम, समावेशन और प्रतिष्ठा जैसे पहलुओं को देखा जाता है। इस व्यवस्था ने पहली बार विद्यार्थियों को एक ऐसा मंच दिया जहाँ वे विभिन्न संस्थानों की तुलनात्मक स्थिति जान सकते हैं। इससे संस्थानों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा बढ़ी और अनेक महाविद्यालयों तथा विश्वविद्यालयों ने शिक्षकों की नियुक्ति, शोध प्रकाशनों, रोजगार सहायता केंद्रों और आधारभूत सुविधाओं में सुधार करना प्रारंभ किया।
इस रैंकिंग व्यवस्था की सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि उसने उच्च शिक्षा क्षेत्र में गुणवत्ता के संकेत उपलब्ध कराए। अब विद्यार्थी केवल विज्ञापनों या प्रचार सामग्री पर निर्भर नहीं रहते, बल्कि संस्थान की स्थिति, शोध प्रदर्शन, परीक्षा परिणाम और समावेशन जैसी जानकारियों को देखकर निर्णय ले सकते हैं। इससे सूचना के अभाव की समस्या में कुछ कमी आई है। सरकार के लिए भी यह एक महत्त्वपूर्ण नीति उपकरण सिद्ध हुआ है, जिसके माध्यम से विभिन्न संस्थानों की स्थिति का तुलनात्मक अध्ययन संभव हुआ है।
फिर भी यह व्यवस्था पूर्ण समाधान नहीं है। इसकी सबसे बड़ी सीमा यह है कि यह काफी हद तक संस्थानों द्वारा स्वयं दिए गए आँकड़ों पर आधारित रहती है। यदि कोई संस्थान गलत या बढ़ा-चढ़ाकर जानकारी दे, तो रैंकिंग की विश्वसनीयता प्रभावित होती है। दूसरा, शोध कार्य को अधिक महत्व मिलने से वे महाविद्यालय पीछे रह जाते हैं जो मुख्य रूप से शिक्षण पर केंद्रित हैं।
तीसरा, ग्रामीण क्षेत्रों या नवस्थापित संस्थानों के लिए बड़े और पुराने शहरी संस्थानों से प्रतिस्पर्धा करना कठिन हो जाता है। चौथा, रैंकिंग वर्ष में एक बार आती है, जबकि विद्यार्थियों को कई बार वास्तविक समय की जानकारी की आवश्यकता होती है। पाँचवाँ, देश के विशाल उच्च शिक्षा ढाँचे की तुलना में सीमित संस्थान ही प्रमुखता से सामने आते हैं, जिससे अनेक संस्थान पारदर्शी मूल्यांकन से बाहर रह जाते हैं।
विश्व स्तर पर विभिन्न देशों में विश्वविद्यालयों की रैंकिंग के लिए ऐसे मॉडल अपनाए जाते हैं जिनमें पूर्व छात्रों की संतुष्टि, अंतरराष्ट्रीय पहचान, नियोक्ताओं की राय, शोध प्रभाव और वैश्विक सहयोग जैसे पहलुओं को भी महत्व दिया जाता है। भारत भी अपनी व्यवस्था को अधिक व्यापक और बहुआयामी बनाकर इन अनुभवों से सीख सकता है।
विद्यार्थियों के हितों की रक्षा के लिए कुछ ठोस सुधार आवश्यक हैं। सबसे पहले, संस्थानों द्वारा दिए गए आँकड़ों का स्वतंत्र एजेंसियों से सत्यापन कराया जाए, ताकि गलत जानकारी देने की प्रवृत्ति समाप्त हो। दूसरा, शिक्षण गुणवत्ता, छात्र-शिक्षक अनुपात, रोजगार उपलब्धता और शुल्क के मुकाबले लाभ को अधिक महत्व दिया जाए। तीसरा, केवल क्रम संख्या देने के स्थान पर समूह आधारित श्रेणी व्यवस्था अपनाई जाए, जिससे छोटे और उभरते संस्थानों को भी सम्मानजनक स्थान मिल सके।
चौथा, एक केंद्रीकृत डिजिटल मंच विकसित किया जाए जहाँ प्रत्येक संस्थान की अद्यतन जानकारी उपलब्ध हो। पाँचवाँ, राज्य स्तर और क्षेत्रीय स्तर पर भी रैंकिंग तैयार की जाए, ताकि स्थानीय विद्यार्थियों को अपने आसपास बेहतर विकल्प मिल सकें। छठा, विद्यार्थियों और अभिभावकों की प्रतिक्रिया को भी मूल्यांकन प्रक्रिया का हिस्सा बनाया जाए।
अंततः उच्च शिक्षा केवल संस्थानों की संख्या बढ़ाने का विषय नहीं है, बल्कि गुणवत्ता, विश्वास और समान अवसर का प्रश्न है। यदि पारदर्शिता का अभाव रहेगा तो विद्यार्थी निम्न स्तर के संस्थानों के जाल में फँसते रहेंगे और उनका भविष्य प्रभावित होगा। राष्ट्रीय रैंकिंग व्यवस्था ने सकारात्मक शुरुआत अवश्य की है, किंतु इसे अधिक स्वतंत्र, विश्वसनीय और विद्यार्थी-केंद्रित बनाना समय की आवश्यकता है। जब सही जानकारी, प्रभावी नियमन और गुणवत्तापूर्ण संस्थान एक साथ सामने आएँगे, तभी भारत वास्तव में ज्ञान आधारित विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में मजबूती से आगे बढ़ सकेगा।
सर्राफा दुकान लूटकांड का खुलासा: मुठभेड़ में पांच आरोपी गिरफ्तार, दो घायल
गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। उत्तर प्रदेश के Gorakhpur जिले में गोला कस्बे की सर्राफा दुकान लूटकांड का पुलिस ने सफल खुलासा कर दिया है। क्राइम ब्रांच और स्थानीय पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। मुठभेड़ के दौरान दो बदमाशों के पैरों में गोली लगी, जबकि तीन अन्य को पुलिस ने घेराबंदी कर पीछा करते हुए दबोच लिया।
मुठभेड़ में दो बदमाश घायल
पुलिस के अनुसार, मुठभेड़ के दौरान आरोपी रेहान के बाएं पैर और मेहंदी हसन के दाएं पैर में गोली लगी। दोनों घायलों को तत्काल इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया है। वहीं उनके साथी सागिर, मुस्तफा और अफजल को पुलिस ने भागते समय गिरफ्तार कर लिया।
पकड़े गए आरोपियों में चार Deoband (सहारनपुर) के निवासी बताए जा रहे हैं, जबकि एक आरोपी Muzaffarnagar का रहने वाला है।
लूटा गया माल और हथियार बरामद
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से:
• लूटे गए सोने-चांदी के आभूषण
• वारदात में इस्तेमाल की गई दो बाइक
• 315 बोर के दो तमंचे
बरामद किए हैं। पुलिस अब गिरोह के अन्य सदस्यों और उनके आपराधिक नेटवर्क की भी जांच कर रही है।
ऐसे दिया गया था वारदात को अंजाम
दोपहर करीब 2:20 बजे दो युवक ग्राहक बनकर दुकान में घुसे और आभूषण देखने के बहाने अचानक करीब 20 ग्राम वजन के चार-पांच जोड़ी कान के झाले झपटकर भागने लगे।
बताया जा रहा है कि सोमवार को गोला क्षेत्र के वार्ड नंबर 17 स्थित देवांश स्वर्णकला केंद्र में लूट की घटना हुई थी। दुकान संचालक राकेश वर्मा अपनी बड़ी बेटी की सगाई का निमंत्रण देने बाहर गए हुए थे, जबकि दुकान पर उनकी छोटी बेटी अमृता वर्मा मौजूद थीं।

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बेटी अमृता ने दिखाया साहस
घटना के दौरान अमृता वर्मा ने बहादुरी दिखाते हुए शोर मचाया और बदमाशों का पीछा किया। उन्होंने एक आरोपी को पकड़कर गिरा भी दिया, लेकिन वह किसी तरह छूटकर फरार हो गया। इस दौरान अमृता के हाथ में चोट भी आई।
उनकी इस बहादुरी की स्थानीय स्तर पर जमकर सराहना हो रही है।
CCTV फुटेज से मिली अहम जानकारी
घटना के बाद पुलिस ने आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। जांच में पता चला कि एक आरोपी दुकान के अंदर वारदात को अंजाम दे रहा था, जबकि उसका साथी सरया सब्जी मंडी के पास बाइक लेकर तैयार खड़ा था। वारदात के बाद दोनों बाइक से फरार हो गए थे।
गिरोह का काम करने का तरीका
Dinesh Kumar Puri (एसपी दक्षिणी) के अनुसार, यह गिरोह चश्मा बेचने के बहाने Gorakhpur, Basti और Azamgarh मंडल के अलग-अलग इलाकों में घूमता था। इसी दौरान आरोपी दुकानों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों की रेकी करते थे और मौका मिलते ही लूट की घटनाओं को अंजाम देते थे।
व्यापारियों में राहत, पुलिस की सराहना
इस कार्रवाई के बाद सर्राफा व्यापारियों ने राहत की सांस ली है। स्थानीय व्यापारियों ने पुलिस की तत्परता और त्वरित कार्रवाई की सराहना की है।
सियालदह से बलिया पहुंच रहे रोजाना 15 कुंतल फूल, शादी बाजार गुलजार
फूलों से महक उठे बलिया के विवाह मंडप, सज रहीं दूल्हों की शाही गाड़ियां
घनश्याम तिवारी, पत्रकार
बलिया (राष्ट्र की परम्परा)पूर्वांचल में इन दिनों शादियों का सीजन पूरे शबाब पर है। विवाह समारोहों की रौनक बढ़ाने में पश्चिम बंगाल से आने वाले रंग-बिरंगे और सुगंधित फूल खास भूमिका निभा रहे हैं। बलिया जिले के विवाह मंडप, जयमाल स्टेज और दूल्हा-दुल्हन की गाड़ियां इन फूलों की खुशबू से महक उठी हैं। गर्मी और चुनावी हलचल के बीच पश्चिम बंगाल के फूल पूर्वांचल की शादियों में आकर्षण का प्रमुख केंद्र बने हुए हैं।
जिले में गेंदा, गुलाब और रजनीगंधा जैसे फूलों की मांग तेजी से बढ़ गई है। स्थानीय व्यापारियों के अनुसार, प्रतिदिन करीब 15 कुंतल फूल पश्चिम बंगाल के सियालदह से ट्रेन के जरिए बलिया पहुंच रहे हैं। पार्सल के माध्यम से भेजे गए ये फूल अगले दिन सुबह तक मंडियों और दुकानों तक पहुंच जाते हैं।
शहर के एलआईसी रोड स्थित फूल बाजारों में इन दिनों ग्राहकों की भारी भीड़ देखने को मिल रही है। शादी-विवाह के साथ धार्मिक आयोजनों में भी फूलों की मांग लगातार बढ़ी है। वाहन सजावट, स्टेज डेकोरेशन और जयमाल के लिए अलग-अलग किस्म के फूलों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
फूल कारोबारी रवि सैनी बताते हैं कि पश्चिम बंगाल के अलावा महाराष्ट्र के नासिक से पिंक गुलाब, बेबी स्मिथ और सजावटी पत्तियां भी मंगाई जाती हैं। वहीं वाराणसी, छपरा, सिवान और गोपालगंज की मंडियों से भी फूलों की आपूर्ति हो रही है। स्थानीय स्तर पर उत्पादन सीमित होने के कारण व्यापारियों को बाहरी राज्यों पर निर्भर रहना पड़ता है।
दूल्हे की गाड़ियों की सजावट इस बार खास आकर्षण बनी हुई है। ग्राहकों की पसंद और बजट के अनुसार अलग-अलग डिजाइन तैयार किए जा रहे हैं। फूल व्यापारियों के अनुसार, एक गाड़ी सजाने में दो हजार से चार हजार रुपये तक खर्च आता है, जबकि जयमाल की माला की कीमत चार सौ से पांच सौ रुपये प्रति जोड़ी तक पहुंच गई है।
बलिया जिले में फूलों की खेती अभी बेहद सीमित है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार जिले में केवल एक हेक्टेयर क्षेत्र में फूलों की खेती हो रही है। मुरलीछपरा ब्लॉक के दलनछपरा और हनुमानगंज के इंदरपुर क्षेत्र में गेंदा की खेती होती है, जबकि सिकन्दरपुर क्षेत्र में गुलाब की खेती अब सिमटती जा रही है।
फूलों की ताजगी बनाए रखने के लिए व्यापारियों द्वारा विशेष व्यवस्था की जाती है। फूलों को बांस के बड़े खचोलों में बोरियों के अंदर पैक कर ऊपर से पानी डाला जाता है, जिससे वे लंबे समय तक ताजे बने रहते हैं।
कुल मिलाकर, पश्चिम बंगाल से आने वाले फूल इन दिनों बलिया के शादी समारोहों में चार चांद लगा रहे हैं। इनकी खुशबू और रंगत से विवाह समारोहों की रौनक कई गुना बढ़ गई है।
देवरिया में तेज रफ्तार ट्रक बना काल, टहलने निकले व्यक्ति की मौके पर मौत
बरहज/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)।देवरिया जिले के बरहज थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पैना में बुधवार सुबह एक दर्दनाक सड़क हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर दिया। डाकघर के समीप अनियंत्रित होकर पलटे 16 चक्का ट्रक की चपेट में आने से मॉर्निंग वॉक पर निकले 50 वर्षीय गुड्डू सिंह की मौत हो गई। घटना के बाद गांव में मातम पसरा हुआ है।
जानकारी के अनुसार पैना गांव निवासी गुड्डू सिंह प्रतिदिन की तरह सुबह टहलने निकले थे। इसी दौरान राम जानकी मार्ग पर पश्चिम दिशा से तेज रफ्तार में आ रहा एक भारी ट्रक अचानक सड़क किनारे बनी नाली से टकराकर अनियंत्रित हो गया और पलट गया। हादसे में गुड्डू सिंह ट्रक के नीचे दब गए।
घटना होते ही मौके पर चीख-पुकार मच गई। आसपास मौजूद लोगों और ग्रामीणों ने उन्हें बचाने का काफी प्रयास किया, लेकिन ट्रक के नीचे बुरी तरह फंस जाने के कारण उन्हें बाहर निकालने में समय लग गया। सूचना मिलने पर बरहज थाना अध्यक्ष विशाल उपाध्याय पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे। स्थानीय लोगों की मदद से घायल को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए मेडिकल कॉलेज देवरिया भेज दिया है। हादसे के बाद मृतक के परिवार में कोहराम मचा हुआ है। गुड्डू सिंह अपने पीछे दो बेटे और एक बेटी छोड़ गए हैं। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
स्थानीय लोगों ने क्षेत्र में भारी वाहनों की तेज रफ्तार पर चिंता जताते हुए प्रशासन से सड़क सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग की है।
खेल और फिटनेस को बढ़ावा देने की दिशा में ग्लोबल मार्क स्कूल की नई पहल
ग्लोबल मार्क स्कूल में स्विमिंग अकैडमी का भव्य शुभारंभ, बच्चों को मिलेगा आधुनिक तैराकी प्रशिक्षण

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा )सोंदा चौराहे स्थित ग्लोबल मार्क स्कूल में मंगलवार को अत्याधुनिक स्विमिंग अकैडमी का भव्य शुभारंभ किया गया। अकैडमी की शुरुआत का उद्देश्य स्थानीय बच्चों को शारीरिक शिक्षा से जोड़ना, तैराकी के प्रति रुचि बढ़ाना और उनकी खेल प्रतिभा को नई दिशा देना है। उद्घाटन समारोह में बड़ी संख्या में अभिभावक, शिक्षक और गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जिला स्विमिंग एसोसिएशन के अध्यक्ष श्री गंगतेश्वर सिंह तथा विशिष्ट अतिथि श्री संजीव दुबे ने फीता काटकर स्विमिंग अकैडमी का उद्घाटन किया। इस दौरान विद्यालय परिसर में उत्साहपूर्ण माहौल देखने को मिला।
मुख्य अतिथि श्री गंगतेश्वर सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि बच्चों के सर्वांगीण विकास में खेलों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। उन्होंने कहा कि ग्लोबल मार्क स्कूल द्वारा शुरू की गई यह पहल जिले में खेल और शारीरिक शिक्षा को नई पहचान देगी। तैराकी जैसी गतिविधियां बच्चों में आत्मविश्वास, अनुशासन और शारीरिक क्षमता को मजबूत बनाती हैं।
विद्यालय प्रबंधन ने बताया कि ग्लोबल मार्क स्कूल जिले का पहला ऐसा विद्यालय बन गया है, जहां विद्यार्थियों के लिए आधुनिक सुविधाओं से युक्त स्विमिंग अकैडमी उपलब्ध कराई गई है। इससे स्थानीय छात्र-छात्राओं को बेहतर प्रशिक्षण मिलेगा और वे भविष्य में जिला एवं राज्य स्तर की प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए तैयार हो सकेंगे।
इस अवसर पर विद्यालय के प्रबंधक श्री विकास शाही, प्रधानाचार्य इंजीनियर शुभांगी शाही, उप-प्रधानाचार्य मिस सुरभि मालवीय, मैनेजर आकाश सिंह सहित शिक्षिका प्रिया चौबे, अंजलि द्विवेदी, कुसुम, प्रिया मिश्रा, शालिनी सिंह, शिवानी वर्मा, अंतिम विश्वकर्मा, खुशी तथा शिक्षक प्रियेश मिश्रा और दुर्गेंद्र यादव समेत अनेक लोग मौजूद रहे।
देवरिया में मेधावी छात्रों का सम्मान, डीएम दिव्या मित्तल ने बढ़ाया हौसला
देवरिया की प्रतिभा को मिला सम्मान, डीएम दिव्या मित्तल ने किया सम्मानित
देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। जिले के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान मॉडर्न सिटी मॉन्टेसरी इण्टर कॉलेज देवरिया ( Modern City Montessori Inter College )के लिए गर्व का क्षण उस समय बना, जब विद्यालय की प्रतिभा को जिला प्रशासन द्वारा आयोजित “प्रतिभा सम्मान समारोह” में सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में जिलाधिकारी दिव्या मित्तल ने मेधावी छात्र-छात्राओं को सम्मानित करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
यह सम्मान विद्यार्थियों की मेहनत, अनुशासन, लगन और निरंतर प्रयासों का परिणाम है। समारोह में सम्मानित होने वाले छात्र-छात्राओं ने अपनी उपलब्धियों से न केवल विद्यालय बल्कि पूरे जनपद का नाम रोशन किया। जिलाधिकारी ने कहा कि सफलता उन्हीं को मिलती है जो कठिन परिस्थितियों में भी अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहते हैं।
विद्यालय प्रबंधन ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह सम्मान अन्य विद्यार्थियों को भी प्रेरित करेगा। शिक्षकों और अभिभावकों ने इसे बच्चों की मेहनत और सकारात्मक सोच का परिणाम बताया।
प्रतिभा सम्मान समारोह जैसे आयोजन विद्यार्थियों के आत्मविश्वास को बढ़ाने के साथ उन्हें आगे बढ़ने की नई ऊर्जा प्रदान करते हैं। सम्मानित विद्यार्थियों ने कहा कि यह उपलब्धि उनके लिए नई जिम्मेदारी और भविष्य में बेहतर प्रदर्शन की प्रेरणा है।
विद्यालय परिसर में सम्मान मिलने के बाद खुशी का माहौल देखने को मिला। छात्र-छात्राओं ने इसे अपने जीवन का यादगार पल बताया और भविष्य में शिक्षा, समाज और देश के लिए बेहतर कार्य करने का संकल्प लिया।
भवानीपुर से बंगाल तक: दूसरे और अंतिम चरण में रिकॉर्ड मतदान, ममता बनर्जी बनाम शुभेंदु अधिकारी मुकाबले पर देश की नजर
कोलकाता (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे और अंतिम चरण के मतदान में मंगलवार सुबह से ही मतदाताओं में भारी उत्साह देखने को मिला। सुबह सात बजे मतदान शुरू होने के बाद पहले तीन घंटों में ही 20.39 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। चुनाव आयोग के अनुसार कई जिलों में मतदान केंद्रों के बाहर लंबी कतारें लगी रहीं और लोग लोकतंत्र के इस महापर्व में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते दिखाई दिए।
निर्वाचन आयोग के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि सुबह नौ बजे तक पूर्व बर्धमान जिले में सबसे अधिक 20.86 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। इसके बाद हुगली में 20.16 प्रतिशत, नदिया में 18.50 प्रतिशत, उत्तर 24 परगना में 17.81 प्रतिशत, कोलकाता उत्तर में 17.28 प्रतिशत, दक्षिण 24 परगना में 17.25 प्रतिशत और कोलकाता दक्षिण में 16.81 प्रतिशत मतदान हुआ।
हालांकि कुछ इलाकों से मामूली तनाव और बहस की घटनाएं सामने आईं, लेकिन चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि कुल मिलाकर मतदान शांतिपूर्ण ढंग से जारी है। सभी संवेदनशील क्षेत्रों में केंद्रीय बलों की तैनाती की गई है और लगातार निगरानी रखी जा रही है।
इस चरण में 142 विधानसभा सीटों पर मतदान हो रहा है, जहां 1,448 उम्मीदवारों की किस्मत ईवीएम में कैद हो रही है। कुल 3,21,73,837 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग कर रहे हैं। इनमें 1,64,35,627 पुरुष, 1,57,37,418 महिलाएं और 792 ट्रांसजेंडर मतदाता शामिल हैं। चुनाव आयोग ने 41,001 मतदान केंद्र बनाए हैं, जिनकी वेबकास्टिंग के जरिए निगरानी की जा रही है।

इस चुनाव का सबसे चर्चित केंद्र भवानीपुर बना हुआ है, जहां मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी के बीच सीधी राजनीतिक टक्कर देखने को मिल रही है। भवानीपुर को तृणमूल कांग्रेस का मजबूत गढ़ माना जाता है, लेकिन भाजपा ने यहां पूरी ताकत झोंक दी है। राजनीतिक रैलियों, तीखी बयानबाजी और लगातार हो रहे रोड शो ने इस सीट को हाई प्रोफाइल बना दिया है।
भवानीपुर में मतदान से पहले तनाव की स्थिति भी देखने को मिली। चक्रबेरिया रोड इलाके में टीएमसी और भाजपा समर्थकों के आमने-सामने आने के बाद पुलिस और केंद्रीय बलों को मोर्चा संभालना पड़ा। हालात को नियंत्रित करने के लिए सीआरपीएफ ने फ्लैग मार्च निकाला और कई स्थानों पर ह्यूमन चेन बनाकर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की गई।
मतदाताओं में किसी तरह का भय न रहे, इसके लिए चुनाव आयोग ने भवानीपुर समेत कई संवेदनशील इलाकों में ड्रोन निगरानी शुरू की है। संकरी गलियों और बहुमंजिला इमारतों पर विशेष नजर रखी जा रही है। सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि मतदाता बिना किसी दबाव और डर के मतदान कर सकें, इसके लिए हर जरूरी कदम उठाए गए हैं।
भवानीपुर सीट राजनीतिक रूप से इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि यहां बंगाली, गुजराती, पंजाबी और मारवाड़ी समुदाय की बड़ी आबादी रहती है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भवानीपुर का परिणाम केवल एक सीट का नतीजा नहीं होगा, बल्कि यह पूरे बंगाल के राजनीतिक मूड का संकेत देगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की आक्रामक चुनावी रैलियों ने इस चुनाव को बेहद दिलचस्प बना दिया है। वहीं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी लगातार भाजपा पर हमलावर रहीं। अब 4 मई को आने वाले नतीजे तय करेंगे कि बंगाल में ममता बनर्जी की सत्ता वापसी होगी या भाजपा इतिहास रचेगी।
‘विद्यार्थी दर्पण’ का भव्य अनावरण: शिक्षा में नवाचार और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास की नई पहल
गोपालगंज (राष्ट्र की परम्परा)। बिहार के Gopalganj में शिक्षा के क्षेत्र में एक नई पहल के तहत त्रैमासिक शैक्षिक पत्रिका ‘विद्यार्थी दर्पण’ का भव्य अनावरण किया गया। यह कार्यक्रम प्रदेश की प्रमुख प्रोफेशनल लर्निंग कम्युनिटी Teachers of Bihar एवं जिला शिक्षा विभाग गोपालगंज के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित हुआ। इस आयोजन को ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से सफलतापूर्वक संपन्न किया गया।
यह पहल विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास, नवाचार और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
कार्यक्रम में प्रमुख अधिकारियों की उपस्थिति
इस गरिमामयी अवसर पर Pawan Kumar Sinha (जिला पदाधिकारी), Yogesh Kumar (जिला शिक्षा पदाधिकारी) एवं Sandeep Kumar (ओएसडी) की विशेष उपस्थिति रही। कार्यक्रम के दौरान शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार, गुणवत्तापूर्ण शिक्षण और विद्यार्थियों के समग्र विकास पर विस्तार से चर्चा की गई।
‘विद्यार्थी दर्पण’ बनेगी ज्ञान का सशक्त माध्यम
पत्रिका का अनावरण करते हुए जिलाधिकारी Pawan Kumar Sinha ने कहा कि ‘विद्यार्थी दर्पण’ विद्यार्थियों के लिए ज्ञान, विज्ञान, नवाचार, कौशल विकास और करियर मार्गदर्शन का एक प्रभावी मंच साबित होगी। उन्होंने विश्वास जताया कि यह पत्रिका छात्रों को नई दिशा देने के साथ-साथ उनकी प्रतिभा को निखारने में भी मदद करेगी।
संपादकीय टीम का योगदान
इस पत्रिका के मुख्य संपादक उच्च विद्यालय लरौली के कंप्यूटर विज्ञान शिक्षक Manish Kumar हैं, जिन्होंने इस पहल को साकार रूप देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वहीं, पत्रिका को तकनीकी रूप से सशक्त और आकर्षक बनाने में Shivendra Prakash Suman का अहम योगदान रहा।
यह पत्रिका District Education Department Gopalganj और Teachers of Bihar के संयुक्त प्रयास का परिणाम है।
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छात्रों के लिए उपयोगी विषयों का समावेश
जिला शिक्षा पदाधिकारी Yogesh Kumar ने बताया कि पत्रिका में विभिन्न विषयों को शामिल किया गया है, जैसे:
• विज्ञान एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता
• पर्यावरण एवं स्वच्छ ऊर्जा
• प्रेरणादायक कहानियां और पुस्तकें
• करियर मार्गदर्शन
• जीवन कौशल विकास
उन्होंने कहा कि यह पत्रिका विशेष रूप से कक्षा 6 से 12 तक के विद्यार्थियों के लिए बेहद उपयोगी साबित होगी।
नवाचार और रचनात्मकता को मिलेगा बढ़ावा
Shiv Kumar (फाउंडर, Teachers of Bihar) और Shivendra Prakash Suman ने संयुक्त रूप से कहा कि ‘विद्यार्थी दर्पण’ विद्यार्थियों में रचनात्मक सोच, नवाचार की भावना और आत्मविश्वास को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
शिक्षा में सकारात्मक बदलाव की पहल
कार्यक्रम की जानकारी देते हुए Ranjesh Kumar (प्रदेश प्रवक्ता) और Mrityunjay Kumar (प्रदेश मीडिया संयोजक) ने कहा कि यह पत्रिका शिक्षा के क्षेत्र में गुणवत्ता, नवाचार और सकारात्मक परिवर्तन को बढ़ावा देने की दिशा में एक प्रेरणादायक कदम है।
जिलाधिकारी ने जनगणना-2027 प्रशिक्षण का किया निरीक्षण, दिए आवश्यक निर्देश
शाहजहांपुर (राष्ट्र की परम्परा)। उत्तर प्रदेश के Shahjahanpur में जनगणना-2027 की तैयारियों को लेकर प्रशासन पूरी तरह सक्रिय नजर आ रहा है। इसी क्रम में जिलाधिकारी Dharmendra Pratap Singh ने संजय कुमार सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज पहुंचकर प्रशिक्षण कार्यक्रम का निरीक्षण किया और कार्मिकों को जरूरी दिशा-निर्देश दिए।
प्रशिक्षण कार्यक्रम का लिया जायजा
जिलाधिकारी ने जनगणना-2027 के प्रथम चरण “मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना” के तहत चल रहे प्रशिक्षण का गहन निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने प्रशिक्षण ले रहे कर्मचारियों से सीधे संवाद कर उनकी समझ, तैयारी और प्रशिक्षण की गुणवत्ता के बारे में जानकारी ली।
उन्होंने यह सुनिश्चित करने पर जोर दिया कि प्रशिक्षण केवल औपचारिक न रहकर पूरी तरह व्यावहारिक हो, ताकि कार्मिक फील्ड में बिना किसी भ्रम के प्रभावी तरीके से काम कर सकें।
प्रशिक्षकों को दिए स्पष्ट निर्देश
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने प्रशिक्षकों को निर्देशित किया कि वे प्रशिक्षण को अधिक विस्तृत और व्यवहारिक बनाएं। उन्होंने कहा कि हर पहलू को विस्तार से समझाया जाए, जिससे कार्मिकों को वास्तविक परिस्थितियों में काम करने में कोई कठिनाई न हो।
उन्होंने यह भी कहा कि:
• प्रशिक्षण के दौरान सभी बिंदुओं को सरल भाषा में समझाया जाए
• फील्ड से जुड़े उदाहरणों का अधिक उपयोग किया जाए
• हर कर्मचारी की शंकाओं का समाधान मौके पर ही किया जाए
कार्मिकों से लिया फीडबैक
जिलाधिकारी ने प्रशिक्षण में शामिल कार्मिकों से उनकी समस्याओं और सुझावों के बारे में भी जानकारी ली। उन्होंने पूछा कि प्रशिक्षण के दौरान उन्हें किन-किन कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है और किन क्षेत्रों में सुधार की आवश्यकता है।
इससे प्रशासन को प्रशिक्षण की गुणवत्ता को और बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।
व्यवस्थाओं की भी की समीक्षा
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने प्रशिक्षण स्थल पर भोजन, पेयजल और अन्य मूलभूत सुविधाओं की भी समीक्षा की। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी व्यवस्थाएं सुचारु रूप से सुनिश्चित की जाएं, ताकि प्रशिक्षण में किसी प्रकार की बाधा न आए।
जनगणना कार्य को बताया बेहद महत्वपूर्ण
जिलाधिकारी Dharmendra Pratap Singh ने कार्मिकों को संबोधित करते हुए कहा कि जनगणना एक अत्यंत महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्य है, जो देश की नीतियों और योजनाओं के निर्माण में अहम भूमिका निभाता है। इसलिए इसे पूरी गंभीरता और जिम्मेदारी के साथ किया जाना चाहिए।
उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
अधिकारी भी रहे मौजूद
इस दौरान अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) अरविंद कुमार सहित अन्य संबंधित अधिकारी भी उपस्थित रहे और प्रशिक्षण कार्यक्रम की निगरानी में सहयोग करते नजर आए।
नवानगर में दिव्यांगजन चिन्हांकन शिविर आयोजित, 41 लाभार्थियों का चयन
सिकंदरपुर /बलिया(राष्ट्र की परम्परा)
दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक पहुंचाने के उद्देश्य से मंगलवार को विकास खंड नवानगर परिसर में चिन्हांकन शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में क्षेत्र के कुल 41 दिव्यांगजनों का चिन्हांकन किया गया, ताकि उन्हें विभागीय योजनाओं के तहत निशुल्क सहायक उपकरण एवं सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें।खंड विकास अधिकारी विनोद कुमार बिंद्रा ने बताया कि शिविर में ट्राई साइकिल, बैटरी चालित ट्राई साइकिल, बैसाखी सहित अन्य सहायक उपकरणों के लिए पात्र व्यक्तियों का चयन किया गया। चिन्हांकन के दौरान कई दिव्यांगजनों को उनकी आवश्यकता के अनुरूप ट्राई साइकिल, बैसाखी तथा बैटरी चालित ट्राई साइकिल हेतु चयनित किया गया। इसके अतिरिक्त एक मूक-बधिर व्यक्ति एवं एक मानसिक रूप से दिव्यांग व्यक्ति का भी चिन्हांकन किया गया, जबकि दो अन्य मानसिक रूप से विशेष आवश्यकता वाले व्यक्तियों को भी सूची में शामिल किया गया।शिविर का आयोजन खंड विकास अधिकारी विनोद कुमार बिंद्रा की देखरेख में संपन्न हुआ। इस दौरान जिले से आए रितेश कुमार मिश्रा एवं डॉ. सतीश कुमार सिंह ने दिव्यांगजनों का परीक्षण कर उनका चिन्हांकन किया।खंड विकास अधिकारी ने जानकारी दी कि जो पात्र व्यक्ति किसी कारणवश इस शिविर में शामिल नहीं हो सके हैं, वे अपना दिव्यांग प्रमाण पत्र लेकर विकास खंड कार्यालय में संपर्क कर सकते हैं। उन्हें भी विभागीय योजनाओं के अंतर्गत निशुल्क लाभ प्रदान किया जाएगा। साथ ही एक व्यक्ति को दिव्यांग प्रमाण पत्र बनवाने के लिए भी चिन्हित किया गया।शिविर के सफल आयोजन से क्षेत्र के दिव्यांगजनों में खुशी देखी गई। स्थानीय लोगों ने इस पहल को सरकार की जनहितकारी योजना बताते हुए सराहना की।
सिकंदरपुर में 29 अप्रैल को मनाई जाएगी पृथ्वीराज चौहान जयंत
सिकंदरपुर /बलिया(राष्ट्र की परम्परा)
जनता क्रान्ति पार्टी (राष्ट्रवादी) के तत्वावधान में वीर शिरोमणि पृथ्वीराज चौहान की जयंती 29 अप्रैल बुधवार को प्रातः 10 बजे घुरी बाबा का टोला, सिकंदरपुर में आयोजित की जाएगी। कार्यक्रम को लेकर पार्टी कार्यकर्ताओं में उत्साह का माहौल है और तैयारियां जोरों पर चल रही हैं। इस अवसर पर पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष कमलेश चौहान मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। कार्यक्रम को भव्य और सुव्यवस्थित बनाने के लिए मंच, बैठक व्यवस्था सहित सभी तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है।कार्यक्रम की जानकारी देते हुए विधानसभा अध्यक्ष लक्ष्मण चौहान ने बताया कि पृथ्वीराज चौहान भारतीय इतिहास के महान योद्धा और वीरता के प्रतीक हैं। उनकी जयंती मनाने का उद्देश्य समाज और विशेष रूप से युवाओं को उनके आदर्शों से प्रेरित करना है।उन्होंने पार्टी के सभी पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं एवं क्षेत्रीय लोगों से अपील की है कि वे अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर कार्यक्रम को सफल बनाएं। कार्यक्रम में वक्ताओं द्वारा पृथ्वीराज चौहान के जीवन, उनके संघर्ष और ऐतिहासिक योगदान पर प्रकाश डाला जाएगा।आयोजकों के अनुसार यह कार्यक्रम न केवल ऐतिहासिक स्मरण का अवसर होगा, बल्कि समाज में एकता और जागरूकता का संदेश भी देगा।
95 की उम्र में दुलारी देवी के हाथों खुला पेंशनर कक्ष, भावुक हुआ माहौल
संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। जिला मुख्यालय स्थित कलेक्ट्रेट परिसर मंगलवार को एक भावुक पल का साक्षी बना, जब 95 वर्षीय वयोवृद्ध पेंशनर दुलारी देवी ने नए पेंशनर कक्ष का फीता काटकर उद्घाटन किया। जिलाधिकारी आलोक कुमार ने इस सम्मान के साथ न सिर्फ एक सुविधा की शुरुआत की, बल्कि बुजुर्गों के प्रति आदर का संदेश भी दिया। मुख्य विकास अधिकारी जयकेश त्रिपाठी भी इस अवसर पर मौजूद रहे।
फीता कटते ही तालियों की गूंज के बीच दुलारी देवी को पुष्पगुच्छ और अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया गया। उनके चेहरे की मुस्कान ने पूरे माहौल को भावुक कर दिया। जिलाधिकारी ने कहा कि अब ट्रेजरी कार्यालय आने वाले पेंशनरों को सम्मानजनक ढंग से बैठने और आराम करने की सुविधा मिलेगी, और आगे इस कक्ष को और बेहतर बनाया जाएगा।
इस दौरान वरिष्ठ कोषाधिकारी त्रिभुवन लाल, पेंशनर संघ के अध्यक्ष सुभाष चंद्र यादव, रमेश चंद्र प्रजापति, घनश्याम पांडेय, दीनानाथ उपाध्याय, अभिमन्यु सिंह, ऋषि मुनि चौधरी और रामस्वरूप सहित बड़ी संख्या में पेंशनर मौजूद रहे।
अभ्युदय योजना के लिए आवेदन 31 मई
संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना के तहत शैक्षणिक सत्र 2026-27 के संचालन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। जिला समाज कल्याण अधिकारी महेंद्र कुमार ने जानकारी दी कि सत्र 01 जुलाई 2026 से प्रारम्भ होगा। इसके लिए आवेदन फार्म 25 अप्रैल 2026 से 31 मई 2026 तक स्वीकार किए जाएंगे।
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार प्रवेश परीक्षा जून माह के प्रथम सप्ताह में प्रस्तावित है। इसके बाद काउंसलिंग व मेरिट के आधार पर चयनित अभ्यर्थियों का रजिस्ट्रेशन 10 जून से 20 जून 2026 तक पूर्ण किया जाएगा। कोचिंग कक्षाएं 01 जुलाई 2026 से शुरू होने की संभावना है।
अधिकारी ने बताया कि अभ्यर्थी जेईई और नीट की तैयारी के लिए डीएबी इंटर कॉलेज मेंहदावल व उमा महेश्वर डिग्री कॉलेज भोगीपुर में आवेदन कर सकते हैं। वहीं सिविल सेवा, नीट, जेईई, एनडीए, सीडीएस, एसएससी सहित अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए एचआरपीजी कॉलेज खलीलाबाद केंद्र निर्धारित किया गया है। आवेदन ऑफलाइन के साथ-साथ अभ्युदय पोर्टल (Abhyuday.one) के माध्यम से भी किया जा सकता है।
अधिक जानकारी के लिए अभ्यर्थी एचआरपीजी कॉलेज खलीलाबाद के कोर्स कोऑर्डिनेटर कमलेश सिंह (मो. 9598953600) तथा डीएबी इंटर कॉलेज मेहदावल के प्रमोद कुमार भारती (मो. 9792871813) से संपर्क कर सकते हैं।
तीन मंजिला इमारत से गिरा शाखामृग, घंटों चला रेस्क्यू—नहीं बच सकी जान
महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। उत्तर प्रदेश के Maharajganj जिले में एक हृदय विदारक घटना सामने आई है, जिसने पूरे इलाके को गमगीन कर दिया। सिसवा ब्लॉक के ग्राम पंचायत बरवां विद्यापति में एक शाखामृग (हिरण) तीन मंजिला इमारत से गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गया। घंटों तक चले रेस्क्यू और उपचार के बावजूद उसकी जान नहीं बच सकी।
अचानक हुई घटना से गांव में मचा हड़कंप
जानकारी के अनुसार, यह घटना उस समय हुई जब एक शाखामृग अचानक किसी तरह तीन मंजिला भवन पर पहुंच गया और संतुलन बिगड़ने से नीचे गिर पड़ा। गिरने के बाद वह बुरी तरह घायल हो गया। जैसे ही घटना की खबर गांव में फैली, मौके पर ग्रामीणों की भारी भीड़ जुट गई।
हर कोई इस बेजुबान की जान बचाने के लिए चिंतित था और लोग दुआ कर रहे थे कि किसी तरह उसे बचा लिया जाए।
तत्काल शुरू हुआ रेस्क्यू ऑपरेशन
घटना की सूचना मिलते ही पशु अस्पताल शिकारपुर की टीम मौके पर पहुंची और घायल शाखामृग को प्राथमिक उपचार दिया। इसके बाद उसे बेहतर इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया।
ग्रामीणों ने भी पूरी संवेदनशीलता दिखाते हुए रेस्क्यू ऑपरेशन में सहयोग किया। साथ ही डायल 112 पुलिस सेवा और वन विभाग को भी सूचना दी गई, जिसके बाद प्रशासनिक टीम भी मौके पर पहुंच गई।
घंटों इलाज के बाद भी नहीं बच सकी जान
चिकित्सकों ने शाखामृग को बचाने के लिए हर संभव प्रयास किया, लेकिन उसकी हालत लगातार गंभीर बनी रही। लंबे समय तक चले इलाज और प्रयासों के बावजूद देर रात उसकी मौत हो गई।
जैसे ही उसकी मौत की खबर गांव में पहुंची, पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई। लोगों की उम्मीदें और प्रार्थनाएं अधूरी रह गईं।
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नम आंखों से दी गई अंतिम विदाई
घटना की सूचना वन विभाग के अधिकारियों को दी गई, जिसके बाद विभागीय टीम ने मृत शाखामृग को अपने कब्जे में लिया। नहर नारायणी की पटरी पर पूरे सम्मान के साथ उसका अंतिम संस्कार किया गया।
ग्रामीणों ने गाजे-बाजे और विधि-विधान के साथ इस बेजुबान को विदाई दी। यह दृश्य बेहद भावुक कर देने वाला था, जहां बड़ी संख्या में महिलाएं और पुरुष नम आंखों से मौजूद रहे।
ग्रामीणों की संवेदनशीलता बनी मिसाल
इस घटना ने यह साबित कर दिया कि इंसान और प्रकृति के बीच गहरा भावनात्मक जुड़ाव आज भी जीवित है। ग्रामीणों ने जिस तरह से एक बेजुबान जानवर के प्रति संवेदनशीलता दिखाई, वह काबिले तारीफ है।
मौके पर डॉ. गजेंद्र प्रताप सिंह, ग्राम प्रधान प्रतिनिधि रामदयाल, सुनील यादव, अमरजीत, टिंकू कश्यप, अमरनाथ और रंजीत समेत कई लोग मौजूद रहे।
बढ़ती घटनाओं पर उठे सवाल
इस घटना ने यह भी सवाल खड़े किए हैं कि आखिर वन्य जीव आबादी वाले क्षेत्रों में कैसे पहुंच रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जंगलों के घटते क्षेत्र और बढ़ते शहरीकरण के कारण वन्य जीव अक्सर भटककर आबादी वाले इलाकों में आ जाते हैं, जिससे इस तरह की घटनाएं होती हैं।
