Friday, May 1, 2026
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सुहागरात पर दुल्हन की सच्चाई से चौंका दूल्हा, मैनपुरी में धोखाधड़ी का मामला दर्ज

मैनपुरी (राष्ट्र की परम्परा)। उत्तर प्रदेश के मैनपुरी जिले के किशनी थाना क्षेत्र से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां शादी के बाद दूल्हे को अपनी दुल्हन की पहचान को लेकर बड़ा खुलासा हुआ। सुहागरात के दौरान सच्चाई सामने आने पर युवक के होश उड़ गए और उसने इसे धोखाधड़ी बताते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।

जानकारी के अनुसार, युवक की शादी 25 मार्च को बिछवां थाना क्षेत्र की एक युवती से धूमधाम से हुई थी। शादी के बाद जब दुल्हन विदा होकर ससुराल पहुंची तो परिवार में खुशियों का माहौल था। लेकिन शादी के कुछ ही दिनों बाद युवक को पता चला कि उसकी दुल्हन मंगलामुखी (किन्नर) है।

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इस खुलासे के बाद परिवार में तनाव का माहौल बन गया। युवक ने आरोप लगाया कि ससुराल पक्ष ने यह जानकारी जानबूझकर छिपाई और धोखे में रखकर शादी कराई। युवक ने थाने पहुंचकर तहरीर दी और मामले में कार्रवाई की मांग की।

युवक के अनुसार, सच्चाई सामने आने के बाद दुल्हन अपने मायके लौट गई और साथ में शादी के जेवर और नकदी भी ले गई। इस घटना से आहत युवक और उसका परिवार न्याय की मांग कर रहा है।

पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है और दोनों पक्षों से पूछताछ की जा रही है। यह मामला क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।

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UPPSC RO/ARO मुख्य परीक्षा 2023 का रिजल्ट जारी, 419 अभ्यर्थी सफल

लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा)। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) ने समीक्षा अधिकारी (RO) और सहायक समीक्षा अधिकारी (ARO) मुख्य परीक्षा 2023 का फाइनल रिजल्ट जारी कर दिया है। इस भर्ती परीक्षा में कुल 419 अभ्यर्थियों को सफल घोषित किया गया है।

उम्मीदवार आयोग की आधिकारिक वेबसाइट http://uppsc.up.nic.in पर जाकर अपना परिणाम देख सकते हैं। रिजल्ट जारी होने के बाद सफल अभ्यर्थियों में खुशी की लहर है।

यह परीक्षा उत्तर प्रदेश के विभिन्न विभागों में समीक्षा अधिकारी और सहायक समीक्षा अधिकारी के पदों पर भर्ती के लिए आयोजित की गई थी। चयनित उम्मीदवारों को आगे की प्रक्रिया के लिए आयोग द्वारा निर्देश दिए जाएंगे।

अभ्यर्थियों को सलाह दी जाती है कि वे आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर अपना रिजल्ट चेक करें और भविष्य के लिए जरूरी दस्तावेज तैयार रखें।

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खेत गई महिला की संदिग्ध मौत से सनसनी, देवरिया में रहस्यमयी घटना से उठे सवाल

भागलपुर/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। देवरिया जिले के भागलपुर क्षेत्र में रविवार सुबह एक महिला की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत से इलाके में सनसनी फैल गई। खेत में काम करने गई महिला का शव अचेत अवस्था में मिलने से ग्रामीणों में आक्रोश और भय का माहौल है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, मृतका सजमा खातून अपने पति रहादत और बेटे साहिल के साथ नदी किनारे स्थित खेत में सब्जी तोड़ने गई थी। सब्जी तोड़ने के बाद पति बाजार चले गए, जबकि महिला खेत पर ही रुक गई। बेटे साहिल के अनुसार, वह बकरी चराने चला गया था और शाम करीब 4:30 बजे लौटने पर मां को आवाज देने पर कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली।

खोजबीन के दौरान महिला झोपड़ी के पास अचेत अवस्था में मिली, उसके कपड़े अस्त-व्यस्त थे, जिससे घटना संदिग्ध लग रही है। परिजनों की मदद से महिला को तत्काल भागलपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

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घटना की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण अस्पताल पहुंच गए और तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर पति और बेटे के बयान दर्ज किए हैं और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
ग्रामीणों के अनुसार, नदी किनारे के खेतों में अक्सर बाहरी लोगों का आना-जाना रहता है, जिससे विवाद की आशंका बनी रहती है। पुलिस इस पहलू को भी जांच में शामिल कर रही है।

मृतका अपने पीछे दो बेटे और तीन बेटियां छोड़ गई हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर बताई जा रही है। पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के कारणों का स्पष्ट खुलासा हो सकेगा।

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15 अप्रैल से बजेगी शहनाई, जानें कब-कब हैं शादी के शुभ मुहूर्त

खरमास समाप्ति के बाद बजेगी शहनाई: 15 अप्रैल से शुरू होगा मांगलिक कार्यों का शुभ दौर, जून तक लग्न की धूम

लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा धार्मिक डेस्क)। भारतीय सनातन परंपरा में खरमास का विशेष महत्व है, और इसके समाप्त होते ही विवाह जैसे मांगलिक कार्यों की शुरुआत हो जाती है। इस वर्ष 14 अप्रैल को खरमास समाप्त हो रहा है, जिसके अगले ही दिन 15 अप्रैल से शहनाइयों की गूंज सुनाई देने लगेगी। शहर से लेकर गांव तक शादी-ब्याह का माहौल बन जाएगा और बैंड-बाजे, ढोल-ताशों की धुन पर लोग जश्न में डूबेंगे।
ज्योतिषाचार्य पंडित सुधीर मिश्र के अनुसार, 15 मार्च को सूर्य देव के मीन राशि में प्रवेश के साथ ही खरमास की शुरुआत हुई थी। इस अवधि में विवाह, गृह प्रवेश और अन्य शुभ कार्य वर्जित माने जाते हैं। शास्त्रों के अनुसार जब सूर्य धनु या मीन राशि में रहते हैं, तब खरमास लगता है। 14 अप्रैल को इसके समाप्त होते ही सभी मांगलिक कार्यों पर लगी रोक हट जाएगी और शुभ कार्यों का सिलसिला फिर से शुरू हो जाएगा।
पंडित सत्य प्रकाश पाण्डेय बताते हैं कि यह शुभ अवधि ज्यादा लंबी नहीं रहेगी। 6 जुलाई को देवशयनी एकादशी के साथ चातुर्मास का आरंभ हो जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन से भगवान विष्णु योग निद्रा में चले जाते हैं और चार महीने तक विवाह सहित अन्य मांगलिक कार्य नहीं किए जाते। इसके बाद देवोत्थान एकादशी पर भगवान के जागने के साथ ही पुनः शुभ कार्य प्रारंभ होते हैं।
इस बार अप्रैल से जून के अंतिम सप्ताह तक लग्न का विशेष संयोग बन रहा है, जिससे विवाह समारोहों की भरमार देखने को मिलेगी। सड़कों, गलियों और विवाह स्थलों पर रौनक बढ़ेगी, बधाइयों और उत्सव का माहौल चरम पर होगा।
हालांकि, इस बार शादियों का खर्च मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए चिंता का कारण बनता जा रहा है। बदलते ट्रेंड और नई रस्मों ने विवाह को पहले की तुलना में अधिक महंगा बना दिया है। बैंड-बाजा, ढोल-ताशा, कैटरिंग, लाइटिंग, सजावट और गाड़ियों के किराए में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इसके अलावा पगड़ी समारोह, रैंप वॉक जैसे नए चलन भी बजट पर अतिरिक्त बोझ डाल रहे हैं।
एलपीजी सिलिंडर की कमी और कॉमर्शियल गैस की उपलब्धता में आ रही बाधाओं ने भी शादी के खर्च को बढ़ाया है। ऐसे में बेटी का विवाह करना अब मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए किसी बड़ी परीक्षा से कम नहीं रह गया है। कई परिवार खर्च को संतुलित करने के लिए सीमित कार्यक्रम और सादगीपूर्ण विवाह का विकल्प भी अपना रहे हैं।
धार्मिक दृष्टि से देखें तो अप्रैल, मई और जून में कई शुभ मुहूर्त उपलब्ध हैं, जिनमें विवाह संपन्न किए जा सकते हैं।
अप्रैल में 15, 20, 21, 25, 27, 28 और 29 तारीखें शुभ मानी गई हैं।
मई में 1, 3, 5, 6, 7, 8, 13 और 14 को उत्तम लग्न हैं।
जून में 21, 22, 23, 24, 25, 26, 27 और 29 तारीखों को विवाह के लिए श्रेष्ठ योग बन रहे हैं।

धर्माचार्यों का कहना है कि इन शुभ तिथियों में विवाह करने से दांपत्य जीवन में सुख, समृद्धि और स्थिरता आती है। ऐसे में लोग अपनी सुविधा और परंपराओं के अनुसार इन मुहूर्तों का चयन कर सकते हैं।
खरमास समाप्ति के साथ ही जहां एक ओर मांगलिक कार्यों की बहार आएगी, वहीं दूसरी ओर बढ़ती महंगाई और बदलते ट्रेंड के बीच विवाह आयोजन एक बड़ी आर्थिक चुनौती भी बनकर सामने आ रहा है। इसके बावजूद भारतीय समाज में विवाह केवल एक रस्म नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक और आध्यात्मिक उत्सव के रूप में मनाया जाता है।

बिहार में मासूम सुरक्षित नहीं! स्कूल हॉस्टल बना मौत का अड्डा

जहानाबाद हॉस्टल में 5 साल के मासूम की बेरहमी से हत्या, गला रेतकर मौत से इलाके में सनसनी


जहानाबाद (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)बिहार के जहानाबाद जिले से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जिसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। एक निजी स्कूल के हॉस्टल में रह रहे महज 5 साल के मासूम बच्चे की संदिग्ध परिस्थितियों में गला काटकर हत्या कर दी गई। इस घटना के बाद परिजनों और स्थानीय लोगों में जबरदस्त आक्रोश देखने को मिला और देखते ही देखते मामला उग्र विरोध प्रदर्शन में बदल गया।
मृतक बच्चे की पहचान कड़ौना थाना क्षेत्र के बुलाकी बिगहा गांव निवासी आशू कुमार के रूप में हुई है। जानकारी के अनुसार, आशू को करीब 10 दिन पहले ही पढ़ाई के लिए इस निजी स्कूल के हॉस्टल में रखा गया था। परिवार को उम्मीद थी कि बच्चा बेहतर शिक्षा प्राप्त करेगा, लेकिन जो हुआ उसने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया।
घटना उस समय सामने आई जब बच्चे को गंभीर रूप से घायल अवस्था में पाया गया। उसके गले पर धारदार हथियार से हमला किया गया था। आनन-फानन में परिजन उसे इलाज के लिए पटना के पीएमसीएच ले जा रहे थे, लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई। बच्चे की मौत की खबर मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया और गांव के लोग भी आक्रोशित हो उठे।
घटना की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण और स्थानीय लोग स्कूल परिसर में इकट्ठा हो गए। लोगों ने स्कूल प्रशासन पर गंभीर लापरवाही और साजिश का आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा किया। गुस्साए लोगों ने कनौदी के पास पटना-गया मुख्य मार्ग एनएच-22 को जाम कर दिया, जिससे यातायात पूरी तरह ठप हो गया और कई किलोमीटर तक वाहनों की लंबी कतार लग गई।
विरोध प्रदर्शन के दौरान लोगों ने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की और दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को मौके पर पहुंचना पड़ा। पुलिस अधिकारियों ने लोगों को समझाने की कोशिश की और काफी मशक्कत के बाद जाम को हटवाया गया।
पुलिस ने बच्चे के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल भेज दिया है। वहीं, इस मामले में अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है और हत्या के पीछे का कारण भी स्पष्ट नहीं हो पाया है। पुलिस का कहना है कि सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए जांच की जा रही है, जिसमें स्कूल स्टाफ, हॉस्टल प्रबंधन और आसपास के लोगों से पूछताछ शामिल है।
यह घटना न केवल कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है, बल्कि निजी स्कूलों और हॉस्टल की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर चिंता पैदा करती है। आखिर एक छोटे बच्चे के साथ इतनी क्रूरता कैसे हो सकती है और वह भी उस जगह पर जहां उसे सुरक्षित रहना चाहिए था — यह सवाल हर किसी के मन में है।
परिजनों ने प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई है और दोषियों को सख्त से सख्त सजा देने की मांग की है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर जल्द ही आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
फिलहाल पूरे इलाके में तनाव का माहौल बना हुआ है और पुलिस स्थिति पर नजर बनाए हुए है। यह घटना समाज के लिए एक चेतावनी है कि बच्चों की सुरक्षा को लेकर कोई भी लापरवाही बेहद खतरनाक साबित हो सकती है।

IPL 2026: विराट कोहली ने रोहित शर्मा का रिकॉर्ड तोड़ा, भुवनेश्वर कुमार ने रचा इतिहास, CSK vs RCB में रिकॉर्ड्स की बरसात

इंडियन प्रीमियर लीग 2026 में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) ने चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) को 43 रनों से हराकर लगातार दूसरी जीत दर्ज की।
एम. चिन्नास्वामी स्टेडियम में खेले गए इस मुकाबले में RCB ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 250/3 का विशाल स्कोर खड़ा किया।
जवाब में CSK की टीम 207 रन पर ऑलआउट हो गई और उसे लगातार तीसरी हार झेलनी पड़ी।

CSK के खिलाफ सबसे बड़ा स्कोर

RCB ने इस मैच में 250 रन बनाकर इतिहास रच दिया:

• CSK के खिलाफ IPL का सबसे बड़ा स्कोर
• पिछला रिकॉर्ड: 231 रन (गुजरात टाइटंस, पंजाब किंग्स)

छक्कों की बारिश – नया रिकॉर्ड

RCB के बल्लेबाजों ने इस मैच में कुल:

🔹 19 छक्के लगाए
🔹 CSK के खिलाफ IPL इतिहास में सबसे ज्यादा

इससे पहले RR और KKR ने 17-17 छक्के लगाए थे।

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भुवनेश्वर कुमार का ऐतिहासिक कारनामा

भुवनेश्वर कुमार ने इस मैच में बड़ा मुकाम हासिल किया:

• IPL में 200 विकेट पूरे

• ऐसा करने वाले पहले तेज गेंदबाज
• 192 मैचों में उपलब्धि

अब उनसे ज्यादा विकेट सिर्फ युजवेंद्र चहल (224) के नाम हैं।

विराट कोहली ने तोड़ा रोहित शर्मा का रिकॉर्ड

विराट कोहली ने एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की:

• एक टीम के खिलाफ IPL में सबसे ज्यादा रन
• CSK के खिलाफ 1188 रन
• इससे पहले:
रोहित शर्मा – KKR के खिलाफ 1161 रन

मैच बना रिकॉर्ड्स का पावरहाउस

इस हाई-स्कोरिंग मुकाबले में कई बड़े रिकॉर्ड टूटे और बने, जिससे IPL 2026 का यह मैच अब तक का सबसे चर्चित मुकाबला बन गया है।

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US-Iran Ceasefire: 45 दिन के युद्धविराम की चर्चा तेज, ट्रंप की धमकी के बाद बड़ा कूटनीतिक मोड़

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच एक बड़ी खबर सामने आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सख्त चेतावनी के बाद अब दोनों देशों के बीच 45 दिन के संभावित सीजफायर (Ceasefire) पर बातचीत की खबरें सामने आ रही हैं।

ट्रंप ने ईरान को अल्टीमेटम देते हुए कहा कि अगर तेहरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Hormuz Strait) को नहीं खोला, तो अमेरिका कड़ा सैन्य एक्शन ले सकता है।

तीन देशों के जरिए हो रही गुप्त बातचीत

Axios की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत सीधे नहीं बल्कि मध्यस्थ देशों के जरिए हो रही है। इसमें शामिल हैं:

• पाकिस्तान
• मिस्र
• तुर्किए

बताया जा रहा है कि अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ और ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के बीच गुप्त संपर्क जारी है।

48 घंटे में समझौते की उम्मीद कम

रिपोर्ट के अनुसार, अगले 48 घंटों में किसी ठोस समझौते की संभावना कम है। हालांकि, इसे युद्ध टालने का “अंतिम कूटनीतिक प्रयास” माना जा रहा है।

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ट्रंप ने बढ़ाई डेडलाइन

ट्रंप ने ईरान को दी गई डेडलाइन को 24 घंटे के लिए बढ़ा दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर चेतावनी देते हुए कहा:

“अगर ईरान ने होर्मुज नहीं खोला, तो उसके पावर प्लांट और ब्रिज तबाह कर दिए जाएंगे।”

ईरान को दी कड़ी चेतावनी

ट्रंप ने यह भी दावा किया कि यदि युद्ध होता है, तो ईरान को दोबारा खड़ा होने में 20 साल तक लग सकते हैं।

ईरान का जवाब

ईरान ने अमेरिका की धमकियों को सिरे से खारिज कर दिया है। ईरानी संसद के स्पीकर ने कहा:

• युद्ध अपराधों से कोई समाधान नहीं निकलेगा
• अमेरिका को ईरानी जनता के अधिकारों का सम्मान करना चाहिए

क्या टल जाएगा युद्ध?

हालात बेहद तनावपूर्ण हैं, लेकिन कूटनीतिक कोशिशें जारी हैं। अगर 45 दिन का सीजफायर होता है, तो यह मध्य पूर्व में बड़े युद्ध को टाल सकता है।

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तेहरान और कोम में रहस्यमयी तबाही: ‘अपरिचित दुश्मन’ के हमलों से दहला ईरान

तेहरान (RKP News Desk)तेहरान और कोम जैसे सुरक्षित माने जाने वाले शहरों में सोमवार तड़के हुए भीषण हमलों ने पूरी दुनिया को चौंका दिया है। इन हमलों की सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि अब तक किसी भी देश या संगठन ने इसकी जिम्मेदारी नहीं ली है। न तो इजराइल और न ही अमेरिका ने इस हमले से खुद को जोड़ा है, जिससे रहस्य और गहरा गया है।
हमलों की टाइमिंग भी बेहद संवेदनशील मानी जा रही है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी देते हुए होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने की बात कही थी। इस चेतावनी के तुरंत बाद हुए हमलों ने वैश्विक स्तर पर तनाव बढ़ा दिया है।
तेहरान में तड़के हुए हवाई हमलों में प्रतिष्ठित शरीफ प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय को निशाना बनाया गया। ईरानी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, विश्वविद्यालय परिसर के आसपास स्थित इमारतों को भारी नुकसान पहुंचा है। इसके साथ ही पास के एक प्राकृतिक गैस वितरण केंद्र पर भी असर पड़ा है। हालांकि यह अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाया है कि विश्वविद्यालय के भीतर किस विशेष हिस्से को निशाना बनाया गया।
ध्यान देने वाली बात यह है कि वर्तमान परिस्थितियों के चलते विश्वविद्यालय में ऑनलाइन कक्षाएं चल रही थीं और परिसर लगभग खाली था। इस कारण संभावित जनहानि को कुछ हद तक टाला जा सका। यह विश्वविद्यालय लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय निगरानी में रहा है, क्योंकि इसके ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम से जुड़े होने के आरोप लगते रहे हैं। यह कार्यक्रम रिवोल्यूशनरी गार्ड के नियंत्रण में माना जाता है।
हमलों के दौरान पूरी रात तेहरान में धमाकों की गूंज सुनाई देती रही। स्थानीय लोगों के अनुसार, कम ऊंचाई पर उड़ते लड़ाकू विमानों की आवाजें कई घंटों तक सुनाई देती रहीं। इससे यह संकेत मिलता है कि हमले अत्यधिक संगठित और तकनीकी रूप से उन्नत थे।
वहीं दूसरी ओर, कोम में हुए हमलों ने और अधिक चिंता बढ़ा दी है। ईरान के सरकारी समाचार पत्र ‘ईरान’ के अनुसार, दक्षिण तेहरान के निकट स्थित कोम के एक रिहायशी इलाके में हुए हवाई हमले में कम से कम पांच लोगों की मौत हो गई। हालांकि यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि इस क्षेत्र में किस लक्ष्य को निशाना बनाया गया।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह हमला पारंपरिक सैन्य रणनीति से अलग है। बिना जिम्मेदारी लिए इस तरह के सटीक हमले करना किसी अत्याधुनिक तकनीक या गुप्त ऑपरेशन की ओर इशारा करता है। कुछ विश्लेषकों का यह भी कहना है कि यह साइबर और ड्रोन तकनीक के मिश्रण का परिणाम हो सकता है।
इस पूरे घटनाक्रम ने ईरान की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। जिन शहरों को अब तक सुरक्षित माना जाता था, वहां इस तरह के हमले होना सुरक्षा तंत्र में संभावित खामियों की ओर संकेत करता है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस घटना को गंभीरता से लिया जा रहा है। विभिन्न देशों ने इस रहस्यमयी हमले पर चिंता व्यक्त की है और स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। हालांकि, जब तक हमलावर की पहचान स्पष्ट नहीं होती, तब तक इस घटना के पीछे की असली मंशा पर सवाल बने रहेंगे।
स्थिति अभी भी तनावपूर्ण बनी हुई है और ईरानी सुरक्षा बल लगातार जांच में जुटे हैं। आने वाले दिनों में इस रहस्य से पर्दा उठने की उम्मीद की जा रही है, लेकिन फिलहाल यह घटना वैश्विक सुरक्षा के लिए एक नई चुनौती बनकर सामने आई है।

पंजाब में बेअदबी कानून पर हलचल तेज, अमृतसर में SGPC की अहम बैठक आज


अमृतसर (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)धार्मिक ग्रंथों की बेअदबी (Sacrilege) जैसे अत्यंत संवेदनशील मुद्दे पर पंजाब की राजनीति और पंथिक संगठनों में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) ने 6 अप्रैल को अमृतसर स्थित अपने मुख्यालय में सभी प्रमुख सिख संगठनों की एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य पंजाब सरकार द्वारा प्रस्तावित नए बेअदबी विरोधी कानून पर विचार-विमर्श करना और एक साझा ‘पंथिक’ दृष्टिकोण तैयार करना है।
इस अहम बैठक में विभिन्न सिख संगठनों, धार्मिक नेताओं और प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है, जिससे इस मुद्दे पर एक व्यापक सहमति बनाने की कोशिश की जाएगी। बीते वर्षों में बेअदबी की घटनाओं ने पंजाब में सामाजिक और धार्मिक माहौल को कई बार प्रभावित किया है, ऐसे में यह बैठक बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
बैठक से पहले SGPC अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी ने मीडिया से बातचीत में कहा कि यह विषय केवल कानून का नहीं, बल्कि सिख समुदाय की आस्था और सम्मान से जुड़ा हुआ है। उन्होंने इसे “बेहद संवेदनशील” बताते हुए कहा कि किसी भी निर्णय से पहले सभी पंथिक संगठनों की राय लेना जरूरी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि SGPC इस मुद्दे पर एकजुट रुख अपनाने के पक्ष में है, ताकि सरकार के सामने मजबूत और स्पष्ट प्रस्ताव रखा जा सके।
सूत्रों के अनुसार, प्रस्तावित कानून में धार्मिक ग्रंथों की बेअदबी के मामलों में सख्त सजा का प्रावधान किया जा सकता है। हालांकि, इस पर विभिन्न संगठनों के बीच कुछ मतभेद भी सामने आए हैं, खासकर सजा की प्रकृति और उसके कानूनी स्वरूप को लेकर। इसी कारण SGPC सभी पक्षों को एक मंच पर लाकर सामूहिक सहमति बनाने की कोशिश कर रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह बैठक पंजाब सरकार और सिख संगठनों के बीच संवाद का एक महत्वपूर्ण सेतु बन सकती है। यदि इस बैठक में सहमति बनती है, तो इससे राज्य में कानून व्यवस्था और धार्मिक सद्भाव बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
पिछले कुछ वर्षों में बेअदबी की घटनाओं को लेकर पंजाब में कई बार विरोध प्रदर्शन हुए हैं। इन घटनाओं ने राजनीतिक माहौल को भी प्रभावित किया है और सरकारों पर सख्त कानून बनाने का दबाव बढ़ाया है। ऐसे में SGPC की यह पहल इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
फिलहाल, सभी की निगाहें अमृतसर में होने वाली इस बैठक पर टिकी हैं, जहां से बेअदबी कानून को लेकर आगे की रणनीति और रुख स्पष्ट होने की उम्मीद है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या सभी पंथिक संगठन एकजुट होकर कोई साझा प्रस्ताव तैयार कर पाते हैं या नहीं।

डर से भरोसे तक: जन विश्वास कानून 2026 कैसे बदल रहा है भारत का कानूनी ढांचा

700+ प्रावधानों में बदलाव: जन विश्वास अधिनियम से व्यापार और नागरिकों को बड़ी राहत

गोंदिया – वैश्विक स्तरपर भारत जैसे विशाल और विविधतापूर्ण लोकतंत्र में न्याय प्रणाली की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है,लंबित मामलों का अत्यधिक बोझ। वर्षों से अदालतों में करोड़ों मामले लंबित हैं,जिनमें से एक बड़ा हिस्सा ऐसे छोटे- छोटे तकनीकी या प्रक्रियात्मक उल्लंघनों से जुड़ा है,जिनका समाज पर गंभीर आपराधिक प्रभाव नहीं होता।इसी पृष्ठभूमि में केंद्र सरकार द्वारा पारित जन विश्वास (संशोधन प्रावधान) अधिनियम, 2026 एक ऐतिहासिक और संरचनात्मक सुधार के रूप में सामने आता है। यह केवल एक विधायी परिवर्तन नहीं,बल्कि शासन की सोच में बदलाव का प्रतीक है,जहां दंड आधारित नियंत्रण से हटकर विश्वास आधारित अनुपालन की दिशा में कदम बढ़ाया गया है। इस कानून के लागू होने से अनुमानतःलगभग 5 करोड़ तक छोटे-मोटे मामले समाप्त हो सकते हैं, जिससे न केवल न्यायपालिका पर दबाव कम होगा,बल्किनागरिकों और छोटे कारोबारियों को भी बड़ी राहत मिलेगी। मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र यह मानता हूं कि इस अधिनियम की मूल भावना है,छोटे अपराधों को अपराध की श्रेणी से बाहर करना अर्थात डिक्रिमिनलाइजेशन लंबे समय से यह देखा गया है कि भारत में अनेक कानूनों में मामूली उल्लंघनों के लिए भी आपराधिक प्रावधान मौजूद थे,जिनके कारण लोगों को अनावश्यक रूप से पुलिस,कोर्ट और कानूनी प्रक्रियाओं के चक्रव्यूह में फंसना पड़ता था। इससे न केवल समय और संसाधनों की बर्बादी होती थी, बल्कि व्यवसायिक माहौल भी प्रभावित होता था।जन विश्वास अधिनियम 2026 इस समस्या का समाधान प्रस्तुत करता है, जिसमें 23 मंत्रालयों के अंतर्गत आने वाले 79 केंद्रीय कानूनों में संशोधन किया गया है और लगभग 700 से अधिक प्रावधानों में जेल की सजा को हटाकर केवल आर्थिक दंड (जुर्माना) का प्रावधान किया गया है। 

साथियों बात अगर हम यह विधेयक पहले लाए गए जन विश्वास विधेयक, 2025 का विस्तारित और अधिक व्यापक रूप है इसको समझने की करें तो, प्रारंभिक प्रस्ताव में जहां 17 कानूनों में संशोधन की बात थी, वहीं संसद की सेलेक्ट कमेटी की सिफारिशों के बाद इसका दायरा काफी बढ़ा दिया गया। यह विस्तार इस बात का संकेत है कि सरकार ने विभिन्न हितधारकों उद्योग, नागरिक समाज, विधि विशेषज्ञों और प्रशासनिक संस्थाओं की चिंताओं को गंभीरता से लिया और एक संतुलित कानून तैयार करने का प्रयास किया।इस प्रकार, यह अधिनियम केवल एक राजनीतिक पहल नहीं, बल्कि एक व्यापक परामर्श प्रक्रिया का परिणाम है।इस कानून का सबसे महत्वपूर्ण पहलू है अपराधमुक्ति (डिक्रीमिनालिजेशन ) लगभग 717 प्रावधानों को आपराधिक श्रेणी से बाहर कर दिया गया है, जिनमें पहले जेल की सजा का प्रावधान था। अब इन मामलों में केवल जुर्माना लगाया जाएगा। यह बदलाव विशेष रूप से छोटे व्यापारियों, स्टार्टअप्स और आम नागरिकों के लिए राहतकारी है क्योंकि वे अक्सर अनजाने में या तकनीकी कारणों से कानून का उल्लंघन कर बैठते थे और उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने पड़ते थे।उदाहरण के लिए, ड्राइविंग लाइसेंस के नवीनीकरण में देरी, जन्म या मृत्यु की सूचना समय पर न देना, या सार्वजनिक स्थानों पर मामूली नियमों का उल्लंघन इन सभी मामलों में अब जेल नहीं, बल्कि प्रशासनिक दंड का प्रावधान होगा।व्यापारिक दृष्टिकोण से यह कानून अत्यंत महत्वपूर्ण है। भारत लंबे समय से ईजी ऑफ़ डूइंग बिज़नेस यानें व्यापार करने की आसानी के क्षेत्र में सुधार करने का प्रयास कर रहा है। हालांकि, जटिल नियमों और कठोर दंडात्मक प्रावधानों के कारण छोटे और मध्यम उद्योगों को कई समस्याओं का सामना करना पड़ता था। जन विश्वास अधिनियम 2026 इस दिशा में एक बड़ा कदम है, क्योंकि यह इंस्पेक्टर राज को सीमित करता है और व्यवसायियों को अनावश्यक डर से मुक्त करता है। अब मामूली तकनीकी त्रुटियों के लिए जेल जाने का खतरा नहीं होगा, जिससे उद्यमिता को बढ़ावा मिलेगा और निवेश का माहौल बेहतर होगा। 

साथियों बात कर हम इसकानून के तहत कई प्रमुख क्षेत्रों में बदलाव किए गए हैं इसको समझने की करें तो उदाहरण के लिए,मोटर वाहन अधिनियम, 1988 के अंतर्गत कुछउल्लंघनों में जेल की सजा को हटाकर जुर्माना कर दिया गया है। इसी प्रकार, ड्रग्स और कॉस्मेटिक्स कानून में भी कुछ तकनीकी उल्लंघनों के लिए जेल की जगह आर्थिक दंड का प्रावधान किया गया है, जो एक लाख रुपये तक हो सकता है। यह बदलाव विशेष रूप से उन छोटे व्यवसायों के लिए महत्वपूर्ण है जो जटिल अनुपालन आवश्यकताओं के कारण अक्सर कठिनाइयों का सामना करते थे।सार्वजनिक जीवन से जुड़े मामलों में भी इस कानून का प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। मेट्रो में धूम्रपान करना, सड़क संकेतों को नुकसान पहुंचाना या सार्वजनिक स्थानों पर गंदगी फैलाना इन सभी मामलों में अब एफआईआर दर्ज करने के बजाय केवल जुर्माना लगाया जाएगा। इससे पुलिस और न्यायपालिका का समय बच सकेगा और वे गंभीर अपराधों पर अधिक ध्यान केंद्रित कर सकेंगे। यह परिवर्तन “स्मार्ट गवर्नेंस” की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जहां संसाधनों का उपयोग अधिक प्रभावी तरीके से किया जाता है।श्रम कानूनों में भी इस अधिनियम के तहत नरमी लाई गई है। उदाहरण के लिए, एप्रेंटिस एक्ट, 1961 के तहत पहले या दूसरे उल्लंघन पर अब सख्त कार्रवाई के बजाय चेतावनी या सलाह दी जाएगी। यह दृष्टिकोण यह दर्शाता है कि सरकार अब दंड देने के बजाय सुधार और मार्गदर्शन पर अधिक जोर दे रही है। इससे उद्योगों और श्रमिकों के बीच बेहतर संबंध स्थापित हो सकते हैं और अनुपालन की संस्कृति को सटीक रूप से प्रोत्साहन मिल सकता है। 

साथियों बात अगर हम इस कानून को  आलोचनात्मक दृष्टिकोण से देखें तो हालांकि, इस कानून के कई सकारात्मक पहलुओं के बावजूद, इसके कुछ आलोचनात्मक पक्ष भी हैं। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि अत्यधिक डिक्रिमिनलाइजेशन से कानूनों का प्रभाव कमजोर हो सकता है और लोग नियमों को हल्के में लेने लग सकते हैं। यदि दंड केवल आर्थिक जुर्माने तक सीमित रह जाए, तो बड़े कारोबारी या संपन्न व्यक्ति इसे आसानी से वहन कर सकते हैं और नियमों का उल्लंघन जारी रख सकते हैं। इसलिए यह आवश्यक है कि जुर्माने की राशि उचित और प्रभावी हो, ताकि वह एकवास्तविक निवारक (डिटर्रेंट) के रूप में कार्य कर सके।इसके अतिरिक्त, इस कानून के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए प्रशासनिक ढांचे को भी मजबूत करना होगा। केवल कानून बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी आवश्यक है कि इसका सही तरीके से पालन हो। इसके लिए डिजिटल सिस्टम, पारदर्शी प्रक्रियाएं और जवाबदेही तंत्र विकसित करना होगा। यदि यह पहल सही तरीके से लागू की जाती है, तो यह भारत की न्याय प्रणाली में एक क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है।अंतरराष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में देखें तो कई विकसित देशों ने पहले ही इस प्रकार के सुधार अपनाए हैं, जहां छोटे उल्लंघनों के लिए आपराधिक दंड के बजाय प्रशासनिक दंड का प्रावधान होता है। इससे न केवल न्याय प्रणाली पर दबाव कम होता है, बल्कि नागरिकों और सरकार के बीच विश्वास भी बढ़ता है। भारत का यह कदम वैश्विक मानकों के अनुरूप है और यह दर्शाता है कि देश अपनी कानूनी प्रणाली को अधिक आधुनिक और प्रभावी बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। 

अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि,जन विश्वास (संशोधन प्रावधान) अधिनियम, 2026 भारत कीविधायी और प्रशासनिक व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। यह कानून न केवल न्याय प्रणाली को अधिक कुशल बनाने में सहायक होगा, बल्कि आर्थिक विकास को भी गति देगा।यह डर आधारित शासन से विश्वास आधारित शासन की ओर एक निर्णायक बदलाव है। हालांकि इसके सफल क्रियान्वयन के लिए सतत निगरानी, संतुलित नीति और मजबूत प्रशासनिक व्यवस्था आवश्यक होगी, लेकिन यदि यह सभी तत्व सही तरीके से कार्य करते हैं, तो यह अधिनियम भारत को एक अधिक न्यायसंगत, पारदर्शी और व्यवसाय अनुकूल देश बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

-संकलनकर्ता लेखक – क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यम सीए (एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र

जमीन विवाद से बढ़ा तनाव: बुजुर्ग वकील की मौत, प्रधान पर हत्या जैसे आरोप

प्रशासनिक लापरवाही या साजिश? सड़क विवाद में अधिवक्ता की संदिग्ध मौत

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा) जिले के बरहज थाना क्षेत्र से एक बेहद संवेदनशील और दुखद घटना सामने आई है, जहां सड़क निर्माण को लेकर शुरू हुआ विवाद एक बुजुर्ग अधिवक्ता की मौत पर जाकर खत्म हुआ। इस घटना ने पूरे इलाके में आक्रोश और तनाव का माहौल पैदा कर दिया है। परिजनों ने ग्राम प्रधान समेत कई लोगों पर गंभीर आरोप लगाए हैं, वहीं प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
मिली जानकारी के अनुसार, बरहज थाना क्षेत्र के काशीपुर गांव निवासी प्रशांत सिंह ने पुलिस को दी गई तहरीर में बताया कि उनके मकान के सामने स्थित चकमार्ग पर ग्राम प्रधान राजेश यादव द्वारा जबरन सड़क निर्माण कराया जा रहा था। इस निर्माण को लेकर पहले से ही विवाद चल रहा था और प्रशांत सिंह के पिता स्वर्गीय विजेन्द्र सिंह (68 वर्ष), जो बरहज तहसील के वरिष्ठ अधिवक्ता थे, ने इस मामले में प्रशासन से शिकायत कर निर्माण कार्य रुकवाने की मांग की थी।

बताया जा रहा है कि लगभग दस दिन पहले नायब तहसीलदार मौके पर पहुंचे थे और उन्होंने जांच के बाद सड़क निर्माण को रुकवा दिया था। इसके बावजूद आरोप है कि ग्राम प्रधान राजेश यादव लगातार निर्माण कराने का प्रयास करता रहा और मृतक अधिवक्ता को धमकियां भी दी जाती रहीं।
घटना के दिन 05 अप्रैल 2026 को दोपहर करीब 12:30 बजे स्थिति अचानक बिगड़ गई। आरोप के अनुसार, ग्राम प्रधान अपने सहयोगियों के साथ मौके पर पहुंचा और कथित रूप से हथियारों के बल पर दोबारा सड़क निर्माण शुरू करा दिया। जब अधिवक्ता विजेन्द्र सिंह ने इसका विरोध किया तो उनके साथ गाली-गलौज, धक्का-मुक्की और अभद्र व्यवहार किया गया।
परिजनों का आरोप है कि इस दौरान मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया और विवाद बढ़ता चला गया। स्थिति को संभालने के लिए स्थानीय प्रशासन को सूचना दी गई। आरोप यह भी है कि जब एसडीएम बरहज मौके पर पहुंचे तो उन्होंने निष्पक्ष कार्रवाई करने के बजाय ग्राम प्रधान का पक्ष लिया और अधिवक्ता को ही धमकाने का प्रयास किया।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच बुजुर्ग अधिवक्ता की तबीयत अचानक बिगड़ गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, वह अत्यधिक तनाव और धक्का-मुक्की के कारण गिर पड़े और मौके पर ही उनकी मौत हो गई। इस घटना के बाद मौके पर मौजूद लोगों में दहशत फैल गई और गांव में भारी तनाव का माहौल बन गया।
मृतक के परिजनों ने इस घटना को एक सुनियोजित साजिश बताया है। उनका कहना है कि ग्राम प्रधान और उसके सहयोगियों द्वारा लगातार दबाव बनाया जा रहा था और प्रशासन की मिलीभगत के चलते यह दुखद घटना हुई। परिजनों ने दोषियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रण में लिया। शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू कर दी गई है और सभी आरोपों की निष्पक्ष जांच की जाएगी।
इस घटना ने न केवल स्थानीय स्तर पर बल्कि पूरे जिले में प्रशासनिक कार्यशैली और कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते विवाद का सही समाधान किया गया होता तो शायद यह घटना टाली जा सकती थी।
फिलहाल गांव में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके। प्रशासन का कहना है कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा और कानून के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।
यह घटना इस बात का उदाहरण बनकर सामने आई है कि छोटे-छोटे स्थानीय विवाद यदि समय रहते सुलझाए न जाएं तो वे किस तरह गंभीर और जानलेवा रूप ले सकते हैं।

संस्कार, अनुशासन और आत्मनिर्भरता से ही बनती है विशिष्ट पहचान: वैभव चतुर्वेदी

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। जिला मुख्यालय स्थित प्रभादेवी स्नातकोत्तर महाविद्यालय में स्नातक-परास्नातक के विद्यार्थियों के लिए भव्य फेयरवेल समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में उत्साह, आत्मीयता, भावुकता और सांस्कृतिक उल्लास का सुंदर संगम देखने को मिला। नए विद्यार्थियों के स्वागत के साथ विदा हो रहे छात्र-छात्राओं को सम्मान, स्मृतियों और शुभकामनाओं के साथ विदाई दी गई।

समारोह के दौरान विद्यार्थियों ने इंद्रधनुषी सांस्कृतिक कार्यक्रमों की आकर्षक प्रस्तुतियां दीं। गीत, नृत्य, कविता पाठ आदि ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। कुछ प्रस्तुतियों में कॉलेज जीवन की यादों को भावुक अंदाज में प्रस्तुत किया गया, जिससे वातावरण भावनात्मक हो उठा। कार्यक्रम में प्रतिभाग करने वाले विद्यार्थियों को स्मृति चिह्न देकर सम्मानित भी किया गया।
मुख्य अतिथि कॉलेज के डायरेक्टर वैभव चतुर्वेदी ने कहा कि ऐसे आयोजन केवल औपचारिक कार्यक्रम नहीं होते, बल्कि ये विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास, संवाद-कौशल, आत्मविश्वास और आपसी संबंधों को मजबूत करने के प्रभावी माध्यम होते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ-साथ संस्कार, अनुशासन और आत्मनिर्भरता को समान महत्व देने की सलाह दी, ताकि वे भविष्य में अपनी विशिष्ट पहचान बना सकें।

अध्यक्षीय उद्बोधन में प्राचार्य डॉ. प्रमोद कुमार त्रिपाठी ने कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल डिग्री प्राप्त करना नहीं, बल्कि संवेदनशील, सशक्त और मूल्यनिष्ठ व्यक्तित्व का निर्माण करना है। उन्होंने सभी विद्यार्थियों को जीवन में कठिन परिश्रम, सकारात्मक सोच और नैतिक मूल्यों को अपनाने के लिए प्रेरित किया।
इसके पूर्व मुख्य अतिथि ने फीता काटकर और मां सरस्वती का पूजन – अर्चन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
इस अवसर पर चैनल मैनेजर रितेश त्रिपाठी, डॉ. के.एम. त्रिपाठी, डॉ. रमेश कुमार, विनोद मिश्रा, डॉ. अमरनाथ पाण्डेय, श्रीकृष्ण पाण्डेय, दीपक सिंह, अमन राय, विशाल सिंह, सीमा मिश्रा, शालिनी मिश्रा, प्रिय श्रीवास्तव, जिज्ञासा पाण्डेय, पूनम उपाध्याय, अरुण त्रिपाठी, शक्ति उपाध्याय, सुनीता गौतम, मुस्कान गुप्ता, मनीष सिंह, संतोष गौड़, आलोक कुमार, अजय कुमार सहित छात्र छात्राएं उपस्थित रहीं।

ग्राम प्रधान के अधिकार छीने जाने से बढ़ी अव्यवस्था ग्रामीणों में आक्रोश

शाहजहांपुर (राष्ट्र की परम्परा)l जनपद के गढ़िया रंगीन कस्बे में इन दिनों सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई है, जिससे ग्रामीणों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि ग्राम प्रधान के अधिकार छीने जाने के बाद कर्मचारियों की मनमानी बढ़ गई है और प्रशासन समस्याओं के समाधान में पूरी तरह निष्क्रिय बना हुआ है।
गढ़िया रंगीन बायपास रोड के किनारे बने नाले पिछले करीब एक महीने से बंद पड़े हैं। इनमें गंदगी जमा होने से दुर्गंध फैल रही है और मच्छरों का प्रकोप तेजी से बढ़ गया है। इससे क्षेत्र में बीमारियों का खतरा भी गहराने लगा है, लेकिन शिकायतों के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी ध्यान नहीं दे रहे हैं।
ग्रामीण सहदेव सक्सेना, प्रवेश राठौर, अजय कश्यप और रामवीर सक्सेना ने बताया कि छोटी-छोटी समस्याओं के समाधान के लिए भी उन्हें ब्लॉक के चक्कर लगाने पड़ते हैं, जहां सुनवाई नहीं होती। उन्होंने प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए चेतावनी दी कि यदि जल्द ही सफाई व्यवस्था दुरुस्त नहीं की गई तो ग्रामीण आंदोलन को मजबूर होंगे।

भूमि विवाद निस्तारण व फॉर्मर रजिस्ट्री में तेजी लाएं, लापरवाही पर होगी कार्रवाई: डीएम

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। जनपद में भूमि विवाद मुक्त राजस्व ग्राम अभियान और फॉर्मर रजिस्ट्री को गति देने के लिए जिलाधिकारी ने ऑन-लाइन समीक्षा बैठक कर अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए। समीक्षा के दौरान तहसीलों द्वारा अवगत कराया गया कि अब तक लगभग 50 प्रतिशत ग्रामों में भूमि विवादों का चिन्हांकन पूरा कर लिया गया है, जबकि शेष कार्य प्रगति पर है। उन्होंने निर्देशित किया कि आगामी 2–3 दिनों के भीतर शत-प्रतिशत चिन्हांकन कार्य पूर्ण कर लिया जाए और इसके तुरंत बाद वादों के निस्तारण की प्रक्रिया युद्धस्तर पर शुरू की जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि एक सप्ताह के भीतर अभियान का असर धरातल पर दिखना चाहिए, जिसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित उप जिलाधिकारी और तहसीलदारों की होगी।
फॉर्मर रजिस्ट्री अभियान की समीक्षा करते हुए डीएम ने इसे शासन की शीर्ष प्राथमिकता बताते हुए सभी विभागों को आपसी समन्वय से कार्य करने के निर्देश दिए। उन्होंने लेखपालों की भूमिका को अहम बताते हुए कहा कि वे गांवों में आवश्यकतानुसार रात्रि निवास कर किसानों की खतौनी से जुड़ी समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित करें और रजिस्ट्री कार्य को समयबद्ध तरीके से पूरा कराएं।
डीएम ने 6 अप्रैल से 15 अप्रैल 2026 तक विशेष अभियान चलाने के निर्देश देते हुए कहा कि ऐसे ग्रामों को प्राथमिकता पर लिया जाए, जहां फॉर्मर रजिस्ट्री का कार्य न्यूनतम हुआ है। इन गांवों में कैम्प आयोजित कर खतौनी शुद्धिकरण, नेम मैच स्कोर और अंश निर्धारण की प्रक्रिया पूरी कराते हुए अधिक से अधिक किसानों को फॉर्मर रजिस्ट्री से जोड़ा जाए।
उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि राजस्व विभाग के लेखपाल, कृषि विभाग के तकनीकी सहायक वर्ग-सी, खंड तकनीकी प्रबंधक एवं सहायक तकनीकी प्रबंधक को कैम्प मोड में ऑपरेटर के रूप में तैनात कर मिशन मोड में कार्य किया जाए। साथ ही कैम्प स्थलों पर बिजली, इंटरनेट, कुर्सी और मेज जैसी आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं, ताकि आमजन को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
डीएम ने साफ कहा कि भूमि विवाद मुक्त ग्राम और फॉर्मर रजिस्ट्री अभियान शासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल हैं। भविष्य में किसानों को अधिकांश योजनाओं का लाभ फॉर्मर आईडी के माध्यम से ही मिलेगा, इसलिए इसमें किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
अंत में जिलाधिकारी ने आमजन और किसानों से अपील की कि वे इन अभियानों को सफल बनाने में सहयोग करें और कैम्पों में पहुंचकर अपनी फॉर्मर आईडी बनवाएं, ताकि उन्हें शासकीय योजनाओं का पूरा लाभ मिल सके।

मोबाईल नंबर जिन उपभोक्ताओं बदला उनकी परेशानी ब

सिकंदरपुर /बलिया( राष्ट्र की परम्परा)

गैस बुकिंग और केवाईसी प्रक्रिया को लेकर उपभोक्ताओं की परेशानियां लगातार बढ़ती जा रही हैं। मोबाइल नंबर बदलने के बाद एजेंसी में समय से सूचना न देने पर उपभोक्ताओं को ओटीपी प्राप्त करने में दिक्कत हो रही है, जिससे गैस बुकिंग प्रभावित हो रही है। वहीं, आदर्श नगर पंचायत सिकंदरपुर क्षेत्र में कमर्शियल गैस की बुकिंग न होने से छोटे व्यापारियों के सामने रोज़गार का संकट खड़ा हो गया है।जलपा चौक निवासी मुन्ना मोदी ने बताया कि कई दिनों से कमर्शियल गैस की बुकिंग नहीं हो पा रही है, जिससे दुकान संचालन में भारी परेशानी हो रही है। उन्होंने कहा कि एजेंसी स्तर पर समस्या का समाधान नहीं होने से व्यापार प्रभावित हो रहा है। इसी तरह बस स्टेशन चौराहे पर चाय-नाश्ते की दुकान लगाने वाले बड़ा निवासी आशीष कुमार ने बताया कि वह रोज़ सुबह छोला-भटूरा की दुकान लगाते थे, लेकिन गैस सिलेंडर उपलब्ध न होने के कारण पिछले दो दिनों से उनकी दुकान बंद है।छोटे-छोटे दुकानदारों का कहना है कि गैस की कमी और बुकिंग की दिक्कतों के चलते उनका कारोबार ठप पड़ता जा रहा है। उन्हें आर्थिक नुकसान के साथ-साथ रोज़मर्रा की जरूरतों को पूरा करने में भी कठिनाई हो रही है। उपभोक्ताओं ने संबंधित अधिकारियों से मांग की है कि गैस बुकिंग व्यवस्था को सुचारू किया जाए और केवाईसी व ओटीपी से जुड़ी समस्याओं का त्वरित समाधान किया जाए, ताकि आम जनता और व्यापारियों को राहत मिल एचपी गैस के मैनेजर झुनझुन कुमार ने बताया की लोगो की समस्याओ को दूर किया जा रहा है हमारी गाड़ी गाव गाव घूम रही है पेपर से जो दिक्क़त है उसको हम ठीक कर रहे है