महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। बुद्ध पूर्णिमा के पावन अवसर पर जनपद के बनर्सिहा कला स्थित देवदह—जिसे भगवान गौतम बुद्ध का ननिहाल माना जाता है—में शुक्रवार को श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। यहां स्थित प्राचीन राजमहल टीले पर बौद्ध भिक्षुओं एवं श्रद्धालुओं ने एकत्र होकर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और बुद्ध वंदना के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ किया। पूरे परिसर में बुद्धम् शरणम् गच्छामि के उद्घोष से वातावरण भक्तिमय हो उठा।
कार्यक्रम की शुरुआत तथागत गौतम बुद्ध की वंदना, त्रिशरण एवं पंचशील के पाठ के साथ हुई। इसके बाद राजमहल टीले पर भव्य धम्मसभा का आयोजन किया गया, जिसमें बौद्ध भिक्षुओं ने अपने उपदेशों के माध्यम से लोगों को ध्यान, ज्ञान और करुणा के मार्ग पर चलने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि बौद्ध धर्म मानव जीवन को शांति, संतुलन और सद्भाव की ओर ले जाता है और वर्तमान समय में इसकी प्रासंगिकता और भी बढ़ गई है।
कार्यक्रम के आयोजक एवं देवदह रामग्राम बौद्ध विकास समिति के अध्यक्ष जितेंद्र राव ने बुद्ध पूर्णिमा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह दिन भगवान गौतम बुद्ध के जन्म, ज्ञान प्राप्ति और महापरिनिर्वाण—तीनों का प्रतीक है। यह पर्व न केवल धार्मिक, बल्कि सामाजिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है, जो मानवता को शांति, करुणा और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि बौद्ध धर्म की मूल भावना अहिंसा और परोपकार है, जिसे अपनाकर व्यक्ति अपने जीवन को सुखमय और संतुलित बना सकता है। धम्म सभा के दौरान श्रद्धालुओं ने ध्यान साधना और सामूहिक प्रार्थना में भाग लिया तथा दीप प्रज्वलित कर भगवान बुद्ध को नमन किया। इस अवसर पर महेंद्र जायसवाल, लक्ष्मीचंद पटेल, रोहित गौतम, राम बेलश प्रसाद, प्रहलाद गौतम, बब्लू तिवारी, अमरनाथ चौधरी, प्रहलाद बीडीसी, मंगल प्रसाद, रामलगन गौतम, शिवभुजा पाण्डेय, नन्दलाल गौतम, सुग्रीव कुमार बौद्ध सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर आयोजित यह कार्यक्रम न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बना, बल्कि समाज में शांति, सद्भाव और मानवता के मूल्यों को मजबूत करने की दिशा में एक प्रेरणादायी पहल भी साबित हुआ।
