Tuesday, June 16, 2026
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पुलिस विभाग में बड़ा फेरबदल 17 निरीक्षक व उपनिरीक्षकों के तबादले

शाहजहांपुर(राष्ट्र की परम्परा)l जनपद में कानून व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने के उद्देश्य से पुलिस अधीक्षक ने पुलिस महकमे में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया है। जारी आदेश के तहत 17 निरीक्षक और उपनिरीक्षकों के तबादले तत्काल प्रभाव से किए गए हैं। कई प्रमुख थानों के प्रभारियों को बदला गया है, जबकि कुछ अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।
आदेश के अनुसार निरीक्षक प्रदीप राय को थाना बंडा से हटाकर कोतवाली का प्रभारी निरीक्षक बनाया गया है। रोजा थाना प्रभारी राजीव कुमार को सदर बाजार थाने की कमान सौंपी गई है, जबकि पुलिस अधीक्षक के पीआरओ विजय प्रताप सिंह को थाना कांट का प्रभारी निरीक्षक बनाया गया है।
खुदागंज थाना प्रभारी सत्यप्रकाश सिंह को मदनापुर थाने की जिम्मेदारी दी गई है। सेहरामऊ दक्षिणी के थानाध्यक्ष उमेश कुमार मिश्रा अब रोजा थाना संभालेंगे। वहीं जलालाबाद के प्रभारी निरीक्षक राजीव कुमार को सेहरामऊ दक्षिणी भेजा गया है।
परौर थानाध्यक्ष रामेन्द्र सिंह को बंडा थाना सौंपा गया है। जैतीपुर थाना प्रभारी प्रिन्स शर्मा को तिलहर भेजा गया है, जबकि कांट थाना प्रभारी राकेश कुमार मौर्य को खुदागंज का नया प्रभारी बनाया गया है।
कोतवाली प्रभारी अश्वनी कुमार को जैतीपुर थाना दिया गया है। डीसीआरबी प्रभारी अरविंद सिंह चौहान को जलालाबाद का प्रभारी निरीक्षक बनाया गया है। तिलहर थाना प्रभारी जुगुल किशोर को परौर थाने की जिम्मेदारी मिली है।
सदर बाजार थाना प्रभारी बृजेश कुमार सिंह को एएचटीयू का प्रभारी बनाया गया है। वहीं एएचटीयू प्रभारी महेंद्र सिंह यादव को डीसीआरबी भेजा गया है। मदनापुर थाना प्रभारी विश्वजीत प्रताप सिंह को आईजीआरएस एवं जन शिकायत प्रकोष्ठ में तैनाती दी गई है।
आईजीआरएस प्रभारी प्रभाष चंद्र को पुलिस अधीक्षक का नया पीआरओ बनाया गया है। साथ ही रोजा थाने के अपराध निरीक्षक गंगा सिंह को निगोही थाने में अपराध निरीक्षक के पद पर तैनात किया गया है।
पुलिस अधीक्षक कार्यालय की ओर से सभी संबंधित अधिकारियों को तत्काल कार्यभार ग्रहण कर अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश जारी किए गए हैं।

चोरो ने एक घर को बनाया निशाना नगदी सहित जेवरत पर किया हाथ साफ

बरहज/देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)
थाना क्षेत्र के ग्राम बिजलापार मे शुक्रवार की चोरों ने एक घर को निशाना बनाया और नगदी सहित जेवरात पर हाथ साफ किया।
घर के परिजन ने पुलिस को तहरीर देकर कार्यवाही की मांग की है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार बरहज थाना क्षेत्र के ग्राम बिजलापर निवासी राकेश यादव ने रविवार को बरहज पुलिस को तहरीर देकर बताया कि, शुक्रवार की रात वह अपने ससुराल मांगलिक कार्यक्रम में सम्मिलित होने के लिए गए हुए थे, और उसी समय बारिश एवं ओलावृष्टि का फायदा उठाकर अज्ञात चोरों ने मेरे घर में रखा नगदी सहित जेवरात उड़ा ले गए। उन्होंने बताया कि मेरा भतीजा घर के बरामदे में एवं भैया भाभी अपने कमरे में सो रहे थे, चोरों ने पीछे के रास्ते से छत पर चढ़कर सीढ़ियों के रास्ते घर के आँगन मे उतर गए और सबसे पहले कमरों में बाहर से कुंडी लगा दिया जिसमे लोग सो रहे थे,उसके बाद मेरे कमरे का ताला तोड़कर घर में रखा जेवरात एवं सामान उठा ले गए। पुलिस ने तत्काल कार्यवाही करते हुए संबंधित धाराओं में अभियोग पंजीकृत कर आधा दर्जन संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है।
उपनिरीक्षक करूणेश राय ने कहा कि तहरीर मिली कुछ संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ किया जा रहा है जल्द ही घटना का खुलासा कर दिया जाएगा।

कवि सम्मेलन व मुशायरे में बही संवेदना और व्यंग्य की धारा बजती रही तालियां

विभिन्न शहरों से आए कवियों ने शब्दों से बांधा समां, अंगवस्त्र व स्मृति चिन्ह देकर हुआ सम्मान

गोरखपुर(राष्ट्र की परम्परा)l हिन्दी पत्रकारिता के 200 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में गोरखपुर जर्नलिस्ट्स प्रेस क्लब कार्यकारिणी द्वारा आयोजित किए जा रहे कार्यक्रमों की श्रृंखला में प्रेस क्लब सभागार में भव्य कवि सम्मेलन एवं मुशायरे का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ उपस्थित कवियों एवं अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन एवं मां सरस्वती के माल्यार्पण के साथ किया गया। अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार बालादिन बेसहारा ने की, जबकि संचालन मशहूर शायर फारूक जमाल ने किया। रविवार को आयोजित इस कार्यक्रम में साहित्य, पत्रकारिता और समाज की संवेदनाओं का अद्भुत संगम देखने को मिला, जहां विभिन्न जनपदों से आए कवियों और शायरों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से न केवल श्रोताओं का मनोरंजन किया, बल्कि सामाजिक सरोकारों, पारिवारिक मूल्यों और वर्तमान समय की चुनौतियों पर भी गहरी बात कही। कार्यक्रम में दो सौ से अधिक पत्रकारों की उपस्थिति ने माहौल को और भी गरिमामय बना दिया।
कवयित्री विभा सिंह ने अपनी काव्य प्रस्तुति में भक्ति, प्रेम और संवेदना के भावों को बड़ी खूबसूरती से पिरोया। उन्होंने कहा—
बहती हुई हवा सुहानी है तेरी मेरी कहानी है तू मेरे आंखों में बसा है तेरा चेहरा नूरानी है …, प्यार दुख है ना बाधा है प्यार बिन हर मनुष्य आधा है वहीं आनंद श्रीवास्तव (प्रयागराज) ने बचपन की यादों और पारिवारिक भावनाओं को छूते हुए कहा—
“अपना बचपन भी कितना प्यारा था मां के आंखों का तारा था… वह भी क्या दौर जमाना था… फर्ज बेटे यू निभाया है धर में कैमरा लगाया है एक मुद्दत से धर नहीं आया है।
संचालन कर रहे फर्रुख जमाल ने अपनी शायरी से भी श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया
“रहता नहीं खुश नमी आदमी के साथ मिलते रहो हर एक के साथ.. मुझे कुछ दिन हिरानी बहुत है कभी फुरत पाऊं तो डूब जाऊं झूठों को परेशानी है, जबकि सत्यमबदा शर्मा ने समाज के बदलते स्वरूप और सच्चाई की कीमत पर तीखा प्रहार किया—
“जो जुमला बोल किरदार को ताजा नहीं रखता यह दुनिया उसको सस्ते में लुट लेती है.. उसके अचल में कभी दाग नहीं हो सकता .. जब रंग ढंग दिखाते है क्यों बेटे खुशी में कुत्ते पाल लेते है मां बाप को वृद्धा आश्रम छोड़ आते ”
वीरेंद्र मिश्र ‘दीपक’ ने भोजपुरी शैली में व्यंग्य और सामाजिक यथार्थ को प्रस्तुत करते हुए कहा—
“काहे मुंह झूराइल बा निम्मन दिनवा आइल बा, कुल बेहा का फुलवा फुलाइल बा काहे मुहवा झुराइल बा वही राजेश सिंह ‘बसर’ ने अपनी प्रभावशाली शायरी से समाज और सियासत पर गहरी चोट की—
“सह के सूरज की तपन चांदनी देता मां की आंचल .. जो आजू बाजू है उनको ईनाम दे देना हम तो यहां काम करते.. जिंदाबाद मुर्दाबाद जरूरी है मेरे दोस्त किसी कोने में इंकलाब रहने दे मेरे दोस्त .. तेरे शहर में आदमी रहते है इस सवाल का जवाब रहने दे, जिंदगी में कुछ बेहिसाब रहने दे .. जबकि मुकेश श्रीवास्तव ने मां, धर्म और इंसानियत पर भावुक प्रस्तुति देते हुए कहा कि
“निगाहे चुगली करती है मेरी पीड़ा पराई है वह किस्मत वाले है मां जो अपने आंचल रखे अम्मा जरा बचा रखना जरा चांदनी की छांव है अम्मा… हमको समझ ना पाएंगे धर्म के अंधे .. उर्दू से मोहब्बत है हिंदी के है बंदे मस्जिद भी उन्हीं का मंदिर भी उन्हीं का .. हमारे सीने पर सर जो सोया था .. विदा तो कर दिया उसे हंसते लेकिन फिर लिपट के रोया था ”भालचंद त्रिपाठी (आजमगढ़) ने सामाजिक विसंगतियों पर कटाक्ष करते हुए कहा—
“उनपे कुरबार हो गए है क्या इतने नादान हो गए है क्या चाहते है सर झुकाए भगवान हो गए है क्या।
अध्यक्षता कर रहे बालादिन बेसहारा ने अपनी प्रस्तुति में गांव, समाज और बेटियों की पीड़ा को स्वर दिया—
“देखत देखत लगल अपन गांव बाप हो गई, जहां बाप करे मजदूरी .. एक कोखी क जनमंल गुल्ली डंडा ओला पोती वही सुजीत पांडेय ने बेटी के दर्द को शब्द देते हुए कहा—
कैसे लिखूं बेटी की दास्ता बचपन में सुनती थी मेरी दस्ता .. पलकों में थामे आसू ..
कार्यक्रम के अंत में सभी आमंत्रित कवियों एवं शायरों को अंगवस्त्र एवं स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। अंत में प्रेस क्लब के अध्यक्ष ओंकार धर द्विवेदी ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि 30 मई को हिन्दी पत्रकारिता के 200 वर्ष पूर्ण हो रहे हैं, जिसके क्रम में यह कार्यक्रम आयोजित किया गया है और आगे भी पत्रकारों के ज्ञानवर्धन व साहित्यिक कार्यक्रम लगातार आयोजित किए जाते रहेंगे।
कार्यक्रम में मंत्री पंकज श्रीवास्तव संयुक्त मंत्री महेंद्र गौड़, कोषाध्यक्ष दुर्गेश यादव, पुस्तकालय मंत्री संजय कुमार, कार्यकारिणी सदस्य डॉ. मनोज मिश्रा, रजनीश त्रिपाठी के साथ ही पूर्व संपादक दैनिक जागरण सुजीत पांडेय, पूर्व संपादक अमर उजाला जगदीश लाल श्रीवास्तव, पूर्व अध्यक्ष अरविंद राय, पूर्व अध्यक्ष अशोक चौधरी, पूर्व अध्यक्ष रीतेश मिश्र, पूर्व उपाध्यक्ष अजीत यादव, मृत्युंजय शंकर सिन्हा, मनोज यादव, कुंदन उपाध्याय, पूर्व मंत्री विजय जायसवाल, धीरज श्रीवास्तव, वरिष्ठ पत्रकार अजय शंकर त्रिवेदी, उत्तम दुबे, शैलेन्द्र श्रीवास्तव, टीपी शाही, यतीन्द्र मिश्रा,उमेश पाठक, बच्चा पांडेय, आलोक शुक्ला, सतीश पांडेय, दामोदर उपाध्याय, मुर्तजा हुसैन, अनवर अली, जावेद, तनवीर अहमद, हरेंद्र दुबे, राजेश सोनकर, हरिकेश सिंह ,अशोक राव, संजय दुबे, प्रमोद सिंह ,सहित पत्रकार और गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

कलेक्ट्रेट सभागार में मीडिया कर्मियों ने किया ऑनलाइन स्व-जनगणना पंजीकर

आमजन को भी जागरूक करने की अपील

देवरियया(राष्ट्र की परम्परा)
कलेक्ट्रेट सभागार में मीडिया बंधुओं की उपस्थिति में ऑनलाइन स्व-जनगणना कराई गई। इस दौरान मीडिया प्रतिनिधियों ने स्वयं अपनी स्व-जनगणना प्रक्रिया पूरी की तथा जनगणना से संबंधित विभिन्न जानकारियां प्राप्त कीं। कार्यक्रम में अधिकारियों ने मीडिया कर्मियों से आमजन के बीच स्व-जनगणना के प्रति जागरूकता फैलाने की अपील भी की।
जनगणना प्रभारी एवं अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) रामशंकर ने कहा कि स्व-जनगणना की व्यवस्था आमजन की सुविधा को ध्यान में रखते हुए शुरू की गई है। इसके माध्यम से लोग स्वयं ऑनलाइन अपनी जनगणना आसानी से कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि यदि कोई व्यक्ति किसी कारणवश घर से बाहर रहता है अथवा किसी कार्य में व्यस्त रहता है, तब भी वह ऑनलाइन स्व-जनगणना कर अपनी जानकारी दर्ज करा सकता है।
उन्होंने कहा कि स्व-जनगणना पूर्ण होने के बाद संबंधित व्यक्ति को एक यूनिक आईडी नंबर प्राप्त होगा। बाद में जब गणनाकर्मी घर-घर पहुंचेंगे तो उक्त आईडी नंबर के माध्यम से जनगणना प्रक्रिया को सरलता एवं शीघ्रता से पूरा किया जा सकेगा। इससे आमजन को किसी प्रकार की असुविधा नहीं होगी तथा जनगणना कार्य भी अधिक सुगमता से संपन्न हो सकेगा।
अपर जिलाधिकारी ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि अधिक से अधिक लोग स्वयं स्व-जनगणना कर इस महत्वपूर्ण कार्य को सफल बनाने में सहयोग करें। उन्होंने मीडिया प्रतिनिधियों से भी अपेक्षा की कि वे जनसामान्य को जागरूक कर स्व-जनगणना के प्रति प्रेरित करें, ताकि अधिकाधिक लोग इस सुविधा का लाभ उठा सकें।

जिलाधिकारी ने किया गैस एजेंसियों का औचक निरीक्षण

गैस वितरण व्यवस्था सुनिश्चित करने के दिए निर्देश

देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)
जिलाधिकारी मधुसूदन हुल्गी ने रविवार को भारत गैस एजेंसी, भाटपाररानी तथा एचपी गैस ग्रामीण वितरण केंद्र, खुखुन्दू का औचक निरीक्षण कर गैस वितरण व्यवस्था एवं उपभोक्ता सेवाओं का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने गैस वितरण प्रणाली, अभिलेखों एवं उपभोक्ताओं को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं की जानकारी ली।
जिलाधिकारी ने एजेंसी संचालकों को निर्देशित किया कि, उपभोक्ताओं को निर्धारित समय पर पारदर्शी एवं व्यवस्थित तरीके से गैस सिलेंडरों की आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि वितरण व्यवस्था में किसी भी प्रकार की अनियमितता अथवा उपभोक्ताओं की शिकायत मिलने पर संबंधित के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने वितरण रजिस्टर एवं उपभोक्ता अभिलेखों की जांच करते हुए गैस आपूर्ति की प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाए रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आमजन को सुगम एवं समयबद्ध सेवाएं, उपलब्ध कराना प्राथमिकता होनी चाहिए।
जिलाधिकारी ने मौजूद उपभोक्ताओं से भी बातचीत कर गैस आपूर्ति एवं एजेंसी की कार्यप्रणाली के संबंध में जानकारी प्राप्त की। उन्होंने संबंधित अधिकारियों एवं एजेंसी संचालकों को निर्देश दिया कि उपभोक्ताओं की शिकायतों का त्वरित एवं प्रभावी निस्तारण सुनिश्चित किया जाए।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि गैस वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता एवं सुरक्षा मानकों के पालन से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि वितरण कार्य में लापरवाही अथवा अनियमितता पाए जाने पर संबंधित के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी

यूपी मंत्रिमंडल विस्तार: 8 मंत्रियों ने ली शपथ, भूपेंद्र चौधरी और मनोज पांडेय बने कैबिनेट मंत्री

लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा)। प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार में रविवार को मंत्रिपरिषद का विस्तार किया गया। आनंदीबेन पटेल ने राजभवन में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में नवनियुक्त मंत्रियों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक एवं केशव प्रसाद मौर्य सहित सरकार और संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारी उपस्थित रहे।
मंत्रिमंडल विस्तार में मनोज कुमार पाण्डेय और भूपेंद्र सिंह चौधरी को कैबिनेट मंत्री बनाया गया। वहीं सोमेंद्र सिंह तोमर और अजीत सिंह पाल को राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) की जिम्मेदारी सौंपी गई।
इसके अलावा कृष्ण पासवान, कैलाश राजपूत, सुरेन्द्र दिलेर तथा हंसराज विश्वकर्मा ने राज्य मंत्री पद की शपथ ग्रहण की। मंत्रिमंडल विस्तार में कुल छह नए चेहरों को शामिल किया गया, जबकि दो राज्य मंत्रियों को पदोन्नत कर स्वतंत्र प्रभार दिया गया।

राजभवन परिसर में समारोह को लेकर विशेष सुरक्षा एवं प्रशासनिक व्यवस्थाएं की गई थीं। शपथ ग्रहण समारोह के दौरान जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, समर्थकों और आमंत्रित अतिथियों की उपस्थिति रही। गरिमामय वातावरण में संपन्न हुए कार्यक्रम के बाद समर्थकों और शुभचिंतकों ने नवनियुक्त मंत्रियों का स्वागत करते हुए उन्हें बधाई दी।

आमी नदी स्वच्छता अभियान की मनोनीत सभासदों ने की शुरुआत

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत अभियान से प्रेरित होकर नगर पंचायत मगहर में आमी नदी को स्वच्छ बनाने के लिए विशेष अभियान की शुरुआत की गई। इस अभियान में मनोनीत सभासद गौरव निषाद और ई. अरुण गुप्ता ने सक्रिय भागीदारी निभाते हुए नदी की सफाई के लिए हर संभव सहयोग देने का संकल्प लिया।
सभासद गौरव निषाद ने कहा कि आमी नदी क्षेत्र की पहचान और सांस्कृतिक धरोहर है। इसकी स्वच्छता और संरक्षण के लिए समाज के प्रत्येक व्यक्ति को आगे आना चाहिए। उन्होंने कहा कि जनसहभागिता से ही स्वच्छता अभियान को सफल बनाया जा सकता है।
सभासद ई. अरुण गुप्ता ने कहा कि स्वच्छ वातावरण और स्वच्छ जल स्रोत स्वस्थ समाज की नींव हैं। आमी नदी की सफाई के लिए नगर पंचायत के साथ-साथ आम लोगों की सहभागिता भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि यह अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा।
अभियान के दौरान नगर के सफाई कर्मियों ने पूरे मनोयोग और समर्पण के साथ नदी सफाई कार्य में योगदान दिया, जिसके लिए सभी ने उनका आभार व्यक्त किया। इस मौके पर पूर्व सभासद प्रत्याशी विक्की खान, विशाल रावत, अमरजीत वर्मा, विद्याधर यादव, सपा नेता अमन कन्नौजिया, मनीष कन्नौजिया, सबलू अंसारी सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
अभियान में शामिल लोगों ने कहा कि आमी नदी की स्वच्छता केवल एक अभियान नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी है और इसके संरक्षण के लिए जनसहभागिता बेहद आवश्यक है।

तहसीलदार अलका सिंह: प्रशासनिक सख्ती के बीच ममता की मिसाल

मां भी, अधिकारी भी: तहसीलदार अलका सिंह ने पेश की जिम्मेदारी की अनोखी मिसाल

सलेमपुर/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)सलेमपुर। प्रशासनिक जिम्मेदारियों और मातृत्व के बीच संतुलन बनाना आसान नहीं होता, लेकिन सलेमपुर की तहसीलदार अलका सिंह इस भूमिका को बेहद संवेदनशीलता और समर्पण के साथ निभा रही हैं। कुशीनगर जनपद की रहने वाली अलका सिंह जहां एक ओर तहसील में आने वाले फरियादियों की समस्याओं का समाधान करती हैं, वहीं दूसरी ओर अपनी साढ़े तीन वर्षीय बेटी अनन्या की देखभाल की जिम्मेदारी भी पूरी आत्मीयता से निभा रही हैं।
शनिवार को तहसील सभागार में आयोजित लोक अदालत के चलते पूरा दिन व्यस्तताओं से भरा रहा। दोपहर तक लगातार मामलों की सुनवाई करने के बाद भी तहसीलदार अलका सिंह अपने कार्यालय में बैठकर फरियादियों की समस्याएं सुन रही थीं। इसी दौरान स्कूल से लौटने के बाद मां को खोजती छोटी अनन्या हाथ में किताब और कॉपी लेकर सीधे तहसील कार्यालय पहुंच गई।
कार्यालय में मौजूद लोगों की नजर तब उस भावुक दृश्य पर टिक गई, जब अलका सिंह ने अपनी बेटी को पास बुलाकर बैठाया और फरियाद सुनते-सुनते उसे पढ़ाई करने के लिए कहा। मां की आवाज सुनते ही अनन्या मुस्कुराते हुए बगल में बैठ गई और अपनी किताब खोलकर पढ़ने लगी।
तहसील कार्यालय में मौजूद कर्मचारियों और फरियादियों ने इस दृश्य को जिम्मेदार मां और संवेदनशील प्रशासनिक अधिकारी के सुंदर संगम के रूप में देखा। लोगों का कहना था कि प्रशासनिक दबाव और व्यस्तताओं के बीच जिस तरह अलका सिंह अपनी बेटी के प्रति जिम्मेदारी निभा रही हैं, वह समाज के लिए प्रेरणादायक उदाहरण है।

घर की पहली शिक्षक माँ और बदलता पालन-पोषण

माँ केवल एक शब्द नहीं, बल्कि जीवन की सबसे गहरी अनुभूति है। संसार में बच्चे की पहली पहचान, पहला स्पर्श, पहला भरोसा और पहली शिक्षा माँ से ही शुरू होती है। किसी भी समाज की सभ्यता और संवेदनशीलता इस बात से आँकी जा सकती है कि वहाँ मातृत्व को कितना सम्मान और महत्व दिया जाता है। आधुनिक समय में भले ही शिक्षा के बड़े-बड़े संस्थान, डिजिटल तकनीक और करियर की दौड़ ने जीवन की दिशा बदल दी हो, लेकिन आज भी यह सत्य उतना ही मजबूत है कि बच्चे की पहली शिक्षक उसकी माँ ही होती है।
बच्चा जब जन्म लेता है, तब वह इस दुनिया की भाषा नहीं जानता। वह शब्दों को नहीं समझता, लेकिन भावनाओं को महसूस करता है। माँ की गोद में उसे सुरक्षा मिलती है, उसके स्पर्श में अपनापन और उसकी आवाज़ में विश्वास मिलता है। यही वह शुरुआती शिक्षा है जो किसी किताब या स्कूल में नहीं मिलती। माँ बच्चे को केवल चलना या बोलना नहीं सिखाती, बल्कि जीवन को समझना भी सिखाती है। प्यार क्या होता है, दूसरों का सम्मान कैसे करना चाहिए, दुख में धैर्य कैसे रखना चाहिए और रिश्तों को कैसे निभाना चाहिए—इन सबका पहला पाठ घर में माँ ही पढ़ाती है।
विद्यालय बच्चों को विज्ञान, गणित और भाषा सिखाते हैं, लेकिन नैतिक मूल्य घर से आते हैं। बच्चा अपनी माँ के व्यवहार को रोज़ देखता है। वह देखता है कि माँ पूरे परिवार की ज़रूरतों का ध्यान कैसे रखती है, बिना थके हर सदस्य की चिंता कैसे करती है और अपने हिस्से की इच्छाओं का त्याग करके परिवार को प्राथमिकता कैसे देती है। यही दृश्य बच्चे के भीतर संवेदनशीलता, सहानुभूति और जिम्मेदारी की भावना पैदा करते हैं। बच्चा बोलने से पहले देखना सीखता है और वही देखी हुई बातें उसके व्यक्तित्व का हिस्सा बन जाती हैं।
माँ बच्चे के चरित्र निर्माण की सबसे बड़ी आधारशिला होती है। यदि घर का वातावरण प्रेमपूर्ण और सम्मानजनक होगा, तो बच्चा भी समाज के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करेगा। यदि माँ दूसरों के प्रति दया और सहानुभूति दिखाती है, तो बच्चा भी वही सीखता है। यही कारण है कि समाज की वास्तविक शिक्षा घरों में होती है, स्कूलों में केवल उसका विस्तार होता है।
लेकिन बदलते समय के साथ पालन-पोषण का स्वरूप भी बदल रहा है। आज की दुनिया पहले जैसी नहीं रही। महंगाई, करियर की प्रतिस्पर्धा और आधुनिक जीवनशैली ने परिवारों की संरचना और रिश्तों के स्वरूप को प्रभावित किया है। पहले संयुक्त परिवारों में बच्चे दादा-दादी, चाचा-चाची और पूरे परिवार के बीच बड़े होते थे। अब अधिकांश परिवार छोटे हो गए हैं। माता-पिता दोनों कामकाजी हैं और बच्चों के साथ बिताने का समय सीमित होता जा रहा है।
विशेष रूप से कामकाजी माताओं के सामने आज सबसे बड़ी चुनौती है—करियर और मातृत्व के बीच संतुलन बनाना। समाज अक्सर यह मान लेता है कि यदि माँ घर से बाहर काम कर रही है तो वह बच्चों को पर्याप्त समय नहीं दे पा रही होगी। लेकिन यह सोच अधूरी है। आज की माँ केवल घर संभालने तक सीमित नहीं है, बल्कि वह आर्थिक जिम्मेदारियाँ भी निभा रही है। वह ऑफिस में काम करती है, घर लौटकर बच्चों की देखभाल करती है और परिवार की भावनात्मक जरूरतों को भी पूरा करती है। यह दोहरी जिम्मेदारी आसान नहीं है।
कई बार कामकाजी माताएँ अपराधबोध का शिकार हो जाती हैं कि वे अपने बच्चों को उतना समय नहीं दे पा रहीं जितना देना चाहिए। लेकिन पालन-पोषण केवल समय की मात्रा से तय नहीं होता, बल्कि उस समय की गुणवत्ता से तय होता है। यदि माँ सीमित समय में भी बच्चों के साथ संवाद करती है, उनकी भावनाओं को समझती है और सही संस्कार देती है, तो उसका प्रभाव गहरा होता है।
आज के बच्चे पहले की तुलना में अधिक आत्मनिर्भर हो रहे हैं। माता-पिता के व्यस्त रहने के कारण वे अपने छोटे-छोटे काम स्वयं करना सीख रहे हैं। वे समय का प्रबंधन करना, अकेले रहना और बदलते परिवेश में खुद को ढालना सीख रहे हैं। कई बच्चे अकेले समय में नई रचनात्मक गतिविधियों की ओर भी बढ़ रहे हैं। यह बदलाव सकारात्मक भी हो सकता है, यदि बच्चों को सही दिशा और भावनात्मक सहयोग मिलता रहे।
लेकिन इस बदलते पालन-पोषण के कुछ खतरे भी हैं। आज तकनीक ने बच्चों की दुनिया को पूरी तरह बदल दिया है। मोबाइल फोन, सोशल मीडिया और इंटरनेट बच्चों के जीवन का बड़ा हिस्सा बन चुके हैं। कई बार माता-पिता की व्यस्तता बच्चों को भावनात्मक रूप से अकेला कर देती है। बच्चे अपनी समस्याएँ साझा करने के बजाय डिजिटल दुनिया में खोने लगते हैं। ऐसे समय में माँ की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। उसे केवल बच्चों की पढ़ाई या भोजन तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उनके मन की स्थिति को भी समझना चाहिए।
बच्चे को सबसे ज्यादा जरूरत संवाद की होती है। यदि माँ बच्चे से खुलकर बात करती है, उसकी परेशानियों को सुनती है और बिना डर के अपनी भावनाएँ व्यक्त करने का माहौल देती है, तो बच्चा मानसिक रूप से मजबूत बनता है। लेकिन यदि घर में संवाद खत्म हो जाए, तो बच्चा अंदर ही अंदर अकेलापन महसूस करने लगता है। यही अकेलापन आगे चलकर तनाव, अवसाद और व्यवहारिक समस्याओं का कारण बन सकता है।
दुर्भाग्य से आधुनिक समाज में मातृत्व को लेकर भी एक कृत्रिम छवि बनाई जा रही है। सोशल मीडिया पर “परफेक्ट माँ” की तस्वीरें दिखाई जाती हैं—जो हमेशा मुस्कुराती रहती है, हर काम बिना थके करती है और कभी परेशान नहीं होती। लेकिन वास्तविक जीवन इससे अलग है। माँ भी इंसान है। उसकी भी अपनी थकान, परेशानियाँ और भावनाएँ हैं। इसलिए मातृत्व को केवल त्याग और बलिदान की मूर्ति बनाकर देखना उचित नहीं है। माँ को भी भावनात्मक सहयोग, सम्मान और विश्राम की आवश्यकता होती है।
भारतीय संस्कृति में माँ को हमेशा सर्वोच्च स्थान दिया गया है। “मातृ देवो भवः” केवल एक धार्मिक वाक्य नहीं, बल्कि हमारे सामाजिक जीवन का मूल दर्शन है। लेकिन विडंबना यह है कि जिस माँ को सम्मान का प्रतीक माना जाता है, उसी के श्रम को अक्सर सामान्य मान लिया जाता है। घर का काम, बच्चों की देखभाल और परिवार की जिम्मेदारियाँ आज भी “काम” नहीं मानी जातीं। यह सोच बदलनी होगी। बच्चों को बचपन से यह सिखाना होगा कि माँ का श्रम केवल कर्तव्य नहीं, बल्कि प्रेम और समर्पण का अद्भुत उदाहरण है।
समाज और सरकार दोनों की जिम्मेदारी है कि वे मातृत्व को सहयोग देने वाली नीतियाँ बनाएं। कामकाजी महिलाओं के लिए सुरक्षित कार्यस्थल, पर्याप्त मातृत्व अवकाश, डे-केयर सुविधाएँ और मानसिक स्वास्थ्य सहायता जैसी व्यवस्थाएँ आवश्यक हैं। क्योंकि यदि माँ तनाव और असुरक्षा में रहेगी, तो उसका प्रभाव बच्चों पर भी पड़ेगा।
अंततः यह कहना गलत नहीं होगा कि माँ केवल बच्चे को जन्म नहीं देती, बल्कि उसके व्यक्तित्व को गढ़ती है। वह बच्चे की पहली पाठशाला है, जहाँ से जीवन की सबसे महत्वपूर्ण शिक्षा मिलती है। उसकी गोद में बच्चा केवल अक्षर नहीं, बल्कि इंसानियत सीखता है। वह सिखाती है कि रिश्तों की कीमत क्या होती है, दूसरों के लिए त्याग कैसे किया जाता है और कठिन परिस्थितियों में भी उम्मीद कैसे बनाए रखी जाती है।
आज जब दुनिया तेजी से बदल रही है, तब भी माँ का महत्व कम नहीं हुआ है। बल्कि बदलते समय में उसकी भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। क्योंकि आधुनिक जीवन की भागदौड़ में यदि कोई रिश्ता बच्चे को भावनात्मक सुरक्षा, नैतिक दिशा और निस्वार्थ प्रेम दे सकता है, तो वह केवल माँ का रिश्ता है। इसलिए यह सच आज भी उतना ही प्रासंगिक है कि घर की पहली शिक्षक माँ ही होती है और उसके दिए संस्कार जीवनभर बच्चे के व्यक्तित्व की नींव बने रहते हैं।

(डॉ. सत्यवान सौरभ कवि और सामाजिक विचारक

राष्ट्र की परम्परा समाचार पत्र के खबर का हुआ असर

विद्युत विभाग ने पोल और ग्यारह हजार बोल्ट के तार को सही किया

बरहज/देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)
ग्राम कहाँव क्षेत्र में 11 हजार वोल्ट विद्युत लाइन का पोल झुक जाने तथा हाईटेंशन तार नीचे लटकने से आमजन एवं किसानों के लिए गंभीर दुर्घटना का खतरा बना हुआ था। इस जनहित की समस्या को लेकर संजयदीप कुशवाहा, प्रदेश अध्यक्ष, राष्ट्रीय समानता दल ने लगातार प्रयास किया।
उन्होंने इस संबंध में अधिशासी अभियंता, बरहज को पत्र देकर समस्या के त्वरित समाधान की मांग की। साथ ही पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड, जिलाधिकारी देवरिया एवं उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X के माध्यम से भी मामले से अवगत कराया। क्षेत्र की इस गंभीर समस्या को समाचार पत्र राष्ट्र की परम्परा ने भी प्रमुखता से प्रकाशित किया, जिसके बाद विद्युत विभाग हरकत में आया।
विद्युत विभाग द्वारा त्वरित कार्रवाई करते हुए झुके हुए पोल एवं नीचे लटक रहे तार को सही करा दिया गया है। समस्या के समाधान होने से ग्रामीणों एवं किसानों ने राहत की सांस ली है तथा विभाग के प्रति आभार व्यक्त किया है।
संजयदीप कुशवाहा ने कहा कि जनहित से जुड़ी समस्याओं को उठाना उनकी प्राथमिकता है और भविष्य में भी जनता की आवाज को मजबूती से उठाते रहेंगे।

महाराणा प्रताप जयंती समारोह ने जगाई राष्ट्रभक्ति और एकता की अलख

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। वीरता, स्वाभिमान और मातृभूमि के प्रति समर्पण के प्रतीक महाराणा प्रताप की 486वीं जन्मजयंती देवरिया नागरी प्रचारिणी सभा के गौरवशाली तुलसी सभागार में अत्यंत गरिमामय वातावरण में मनाई गई। समारोह में समाज के विभिन्न वर्गों की प्रभावशाली सहभागिता ने आयोजन को ऐतिहासिक एवं प्रेरणादायी स्वरूप प्रदान किया।
कार्यक्रम में उपस्थित सम्मानित अतिथियों, नागरी प्रचारिणी सभा के पदाधिकारियों एवं सदस्यों, अखिल भारतीय क्षत्रिय समाज के प्रतिनिधियों, विभिन्न सामाजिक संस्थाओं से जुड़े प्रबुद्धजनों, बुद्धिजीवियों, युवाओं तथा मातृशक्ति ने महाराणा प्रताप के राष्ट्रप्रेम, अदम्य साहस और स्वाभिमान से प्रेरणा लेने का संकल्प व्यक्त किया।
समारोह के दौरान वक्ताओं ने कहा कि महाराणा प्रताप केवल इतिहास के महान योद्धा नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, राष्ट्र गौरव और आत्मसम्मान के जीवंत प्रतीक हैं। उनके संघर्ष, त्याग और मातृभूमि के प्रति अटूट समर्पण की भावना आज भी समाज को राष्ट्रहित में कार्य करने की प्रेरणा देती है।
आयोजन को सफल बनाने में जुटे सभी समर्पित सहयोगियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और युवाओं के प्रयासों की भी सराहना की गई। वक्ताओं ने कहा कि सामूहिक सहयोग, संगठन क्षमता और राष्ट्रभक्ति की भावना से ही ऐसे प्रेरणादायी कार्यक्रम समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं।
समारोह के अंत में सभी आगंतुकों एवं सहयोगियों के प्रति हृदय से आभार व्यक्त करते हुए राष्ट्र, समाज और संस्कृति के प्रति एकता, समर्पण और जागरूकता बनाए रखने की कामना की गई। कार्यक्रम का वातावरण पूरे समय राष्ट्रभक्ति, सांस्कृतिक गौरव और सामाजिक एकजुटता से ओतप्रोत बना रहा।

प्रेमिका से शादी की मांग को लेकर युवक मोबाइल टावर पर चढ़ा, गांव में मचा हड़कंप

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। जिले के बखिरा थाना क्षेत्र के एक गांव में शनिवार को उस समय अफरा-तफरी का माहौल बन गया, जब एक युवक मोबाइल टावर पर चढ़ गया। युवक प्रेमिका से विवाह कराने की मांग पर अड़ा था। टावर पर युवक को चढ़ा देख बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर जुट गए और क्षेत्र में हड़कंप मच गया।
मिली जानकारी के अनुसार युवक का एक युवती से लंबे समय से प्रेम संबंध बताया जा रहा है। पारिवारिक स्तर पर सहमति नहीं बनने से नाराज युवक अचानक गांव के पास स्थित मोबाइल टावर पर चढ़ गया। वह ऊपर बैठकर लगातार अपनी शादी कराने की मांग करता रहा।
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और स्थानीय प्रशासन मौके पर पहुंच गया। पुलिसकर्मियों ने लोगों की भीड़ को नियंत्रित करते हुए युवक को समझाने का प्रयास शुरू किया। काफी देर तक चले समझाने-बुझाने के दौरान स्थानीय लोग और परिजन भी युवक को नीचे उतरने के लिए मनाते रहे।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार युवक बार-बार अपनी मांग पूरी होने तक नीचे न उतरने की बात कह रहा था। स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने सतर्कता बरतते हुए युवक से लगातार संवाद बनाए रखा। काफी मशक्कत के बाद उसे सुरक्षित नीचे उतारने की कोशिश जारी रही।
घटना को लेकर पूरे इलाके में चर्चा का माहौल बना रहा और बड़ी संख्या में लोग मौके पर मौजूद रहे।

राष्ट्रभक्ति, स्वाभिमान और शौर्य के प्रतीक महाराणा प्रताप का 486वां जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया

युवाओं से महाराणा प्रताप के आदर्शों को जीवन में उतारने का किया गया आह्वान

महराजगंज(राष्ट्र की परम्परा)। जनपद में शनिवार को क्षत्रिय शिरोमणि महाराणा प्रताप का 486वां जन्मोत्सव श्रद्धा, उत्साह और गौरवपूर्ण वातावरण में बड़े ही धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर आयोजित भव्य समारोह में समाज के लोगों ने महाराणा प्रताप के त्याग, बलिदान, स्वाभिमान और राष्ट्रभक्ति से प्रेरणा लेते हुए राष्ट्रहित एवं समाज हित में कार्य करने का सामूहिक संकल्प लिया। कार्यक्रम के दौरान देशभक्ति और सामाजिक एकता का संदेश भी दिया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के राष्ट्रीय प्रवक्ता कालिका सिंह द्वारा भगवान श्रीराम एवं महाराणा प्रताप की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर किया गया। इसके पश्चात पूर्व प्रधानाचार्य विजय बहादुर सिंह ने महाराणा प्रताप के चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। कार्यक्रम स्थल पर उपस्थित लोगों ने महाराणा प्रताप अमर रहें के जयघोष के साथ वीर शिरोमणि को नमन किया।
अपने संबोधन में कालिका सिंह ने कहा कि महाराणा प्रताप भारतीय इतिहास के ऐसे महान योद्धा थे, जिन्होंने मातृभूमि की रक्षा और स्वाभिमान के खातिर अपना पूरा जीवन संघर्ष में व्यतीत कर दिया, लेकिन कभी भी मुगलों की अधीनता स्वीकार नहीं की। उन्होंने कहा कि महाराणा प्रताप का जीवन त्याग, साहस, आत्मसम्मान और राष्ट्र निष्ठा की अनुपम मिसाल है। उनके आदर्श आज भी समाज और विशेष कर युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत हैं।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में समाज को एकजुट होकर राष्ट्र निर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। समाज के हर वर्ग को साथ लेकर चलना और देशहित को सर्वोपरि रखना ही महाराणा प्रताप के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। वक्ताओं ने युवाओं से आह्वान किया कि वे अपने इतिहास और संस्कृति पर गर्व करें तथा राष्ट्र और समाज के लिए सकारात्मक कार्यों में बढ़-चढ़कर भागीदारी निभाएं।
यह आयोजन दिनेश सिंह के आवास पर आयोजित किया गया, जहां बड़ी संख्या में समाज के लोगों की उपस्थिति रही। कार्यक्रम में जिलाध्यक्ष अभय सिंह, श्रीराम शाही, दिनेश सिंह, नमित सिंह, परमहंस सिंह, रघुवंश सिंह, आदित्य सिंह, विजय बहादुर सिंह, विपुल सिंह, सुनील शाही, राकेश सिंह, उत्सव सिंह, विपिन सिंह एवं सौरभ सिंह सहित अनेक गणमान्य लोग मौजूद रहें।
समारोह के दौरान वक्ताओं ने महाराणा प्रताप के शौर्य, पराक्रम, संघर्ष और मातृभूमि के प्रति उनके अद्वितीय समर्पण को याद करते हुए कहा कि उनका जीवन देशभक्ति की अमर गाथा है। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित लोगों ने समाज में भाई-चारा, राष्ट्रभक्ति और सांस्कृतिक मूल्यों को मजबूत करने का संकल्प लिया। पूरे आयोजन के दौरान उत्साह, उमंग और गौरव का माहौल बना रहा।

जनसंघर्ष से सत्ता के शिखर तक : सुवेंदु अधिकारी की राजनीतिक यात्रा

  • नवनीत मिश्र

नव नियुक्त मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी का नाम आज पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक प्रभावशाली और निर्णायक नेता के रूप में लिया जाता है। जमीनी राजनीति, संगठन क्षमता और आक्रामक राजनीतिक शैली ने उन्हें राज्य की राजनीति के केंद्र में स्थापित किया है। पश्चिम बंगाल में पहली बार भाजपा सरकार बनने के बाद सुवेंदु अधिकारी की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण मानी जा रही है। लंबे समय तक जन आंदोलनों और विपक्ष की राजनीति का चेहरा रहे सुवेंदु अधिकारी अब बंगाल की नई राजनीतिक दिशा के प्रमुख सूत्रधारों में गिने जाते हैं।
पूर्व मेदिनीपुर जिले के करकुली गांव में वर्ष 1970 में जन्मे सुवेंदु अधिकारी ऐसे परिवार से आते हैं, जिसकी पहचान राष्ट्रवादी विचारधारा और स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भागीदारी के लिए रही है। उनके पूर्वजों ने अंग्रेजी शासन के खिलाफ संघर्ष किया और कई कठिन परिस्थितियों का सामना किया। यही कारण है कि बचपन से ही उनके भीतर जनसेवा और राजनीतिक चेतना के संस्कार विकसित हुए।
उन्होंने रवींद्र भारती यूनिवर्सिटी से उच्च शिक्षा प्राप्त की। छात्र जीवन से ही सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय सुवेंदु अधिकारी ने राजनीति को केवल सत्ता प्राप्ति का माध्यम नहीं, बल्कि समाज परिवर्तन का साधन माना। सार्वजनिक जीवन के प्रति समर्पण का अंदाजा इसी बात से लगाया जाता है कि उन्होंने निजी जीवन की अपेक्षा जनसेवा को प्राथमिकता दी।
उनकी राजनीतिक यात्रा स्थानीय निकायों से शुरू हुई। नगर निकाय की राजनीति में सक्रिय रहते हुए उन्होंने आम जनता से सीधा संवाद स्थापित किया। धीरे-धीरे वे ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में लोकप्रिय होते गए। संगठन निर्माण और कार्यकर्ताओं के बीच मजबूत पकड़ ने उन्हें राज्य राजनीति में तेजी से आगे बढ़ाया।
सुवेंदु अधिकारी कई बार विधायक और सांसद चुने गए। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के रूप में उन्होंने सरकार को विभिन्न मुद्दों पर घेरा और विपक्ष की आवाज को मुखर बनाया। उनकी भाषण शैली और राजनीतिक रणनीति ने उन्हें बंगाल की राजनीति का प्रमुख चेहरा बना दिया।
प्रशासनिक अनुभव भी उनकी राजनीतिक यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। परिवहन और सिंचाई जैसे विभागों में मंत्री रहते हुए उन्होंने आधारभूत संरचना, सड़क संपर्क और विकास योजनाओं को गति देने का प्रयास किया। हल्दिया विकास प्राधिकरण से जुड़े रहते हुए उन्होंने औद्योगिक विकास और निवेश को बढ़ावा देने में भूमिका निभाई।
सुवेंदु अधिकारी की पहचान केवल एक राजनेता के रूप में नहीं, बल्कि जनसंपर्क में विश्वास रखने वाले नेता के रूप में भी है। गांवों, कस्बों और छोटे शहरों में उनकी सक्रियता ने उन्हें जनता के बीच मजबूत आधार दिया। वे किसानों, युवाओं और मध्यम वर्ग से जुड़े मुद्दों को लगातार उठाते रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बंगाल की राजनीति में आए बड़े बदलावों में सुवेंदु अधिकारी की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। उन्होंने राज्य की राजनीति में वैचारिक संघर्ष को नई दिशा दी और विपक्ष को एक सशक्त स्वर प्रदान किया।
आज सुवेंदु अधिकारी पश्चिम बंगाल की राजनीति में परिवर्तन, संघर्ष और संगठन शक्ति के प्रतीक माने जाते हैं। समर्थकों के लिए वे जननेता हैं, जबकि विरोधियों के लिए एक मजबूत राजनीतिक चुनौती। लेकिन यह निर्विवाद है कि बंगाल की समकालीन राजनीति में उनका प्रभाव लगातार बढ़ता गया है और आने वाले समय में भी वे राज्य की राजनीति के केंद्र में बने रहेंगे।

अटल बिहारी बाजपेयी प्रेक्षागृह में मनाई गई महाराणा प्रताप की 486वीं जयंती

ओमनी इंटरनेशनल स्कूल के विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों ने बांधा समां,

वक्ताओं ने महाराणा प्रताप के आदर्शों को बताया प्रेरणास्रोत

बस्ती(राष्ट्र की परम्परा)l मां भारती के वीर सपूत एवं वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप जयंती के पावन अवसर पर भारत रत्न अटल बिहारी बाजपेयी प्रेक्षागृह में भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सांसद जगदंबिका पाल रहे। वहीं विशेष रूप से कर्मा देवी ग्रुप के चेयरमैन (सेवानिवृत्त आईएएस) ओ.एन. सिंह की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं महाराणा प्रताप के चित्र पर पुष्प अर्पित कर किया गया।
इस अवसर पर ओमनी इंटरनेशनल स्कूल के छात्र-छात्राओं द्वारा देशभक्ति एवं वीरता से ओतप्रोत आकर्षक सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ दी गईं, जिन्होंने उपस्थित दर्शकों को भावविभोर कर दिया। विद्यार्थियों ने अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से महाराणा प्रताप के साहस, त्याग और राष्ट्रभक्ति को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया।
मुख्य अतिथि सांसद जगदंबिका पाल ने अपने संबोधन में कहा कि महाराणा प्रताप का जीवन साहस, स्वाभिमान और राष्ट्रभक्ति की अद्भुत मिसाल है। उन्होंने युवाओं से उनके आदर्शों को अपनाकर राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया।
वहीं कर्मा देवी ग्रुप के चेयरमैन ओ.एन. सिंह ने कहा कि इस प्रकार के आयोजन नई पीढ़ी को देश के गौरवशाली इतिहास और महान वीरों के संघर्ष से परिचित कराते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
कार्यक्रम संयोजक पूर्व ब्लाक प्रमुख कृष्ण चन्द्र सिंह ने कहा कि महाराणा प्रताप केवल एक वीर योद्धा ही नहीं, बल्कि राष्ट्रभक्ति, स्वाभिमान और त्याग के प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन युवाओं को अपने गौरवशाली इतिहास से जोड़ने और उनमें राष्ट्रप्रेम की भावना जागृत करने का कार्य करते हैं। अन्य वक्ताओं ने हल्दीघाटी के युद्ध को स्वाभिमान, साहस और राष्ट्रभक्ति का प्रतीक बताते हुए महाराणा प्रताप के संघर्षों को प्रेरणादायी बताया।
कार्यक्रम के दौरान अन्य प्रतिभागियों द्वारा प्रस्तुत देशभक्ति गीतों ने वातावरण को राष्ट्रप्रेम से ओतप्रोत कर दिया। कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधियों, शिक्षकों, विद्यार्थियों एवं गणमान्य नागरिकों की सहभागिता रही।