Thursday, April 30, 2026
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अंधेरे से उजाले की ओर: कालीचरण घाट को मिली बड़ी सौगात

घाट पर रोशनी का वादा, गांवों पर मंडराता कटान का साया


देवरिया/भागलपुर (राष्ट्र की परम्परा)। सरयू नदी के किनारे स्थित कालीचरण घाट पर वर्षों से व्याप्त अंधेरे की समस्या अब जल्द समाप्त होने की उम्मीद जगी है। सलेमपुर के सांसद रामाशंकर विद्यार्थी ने घाट पर हाईमास्ट लाइट लगवाने की घोषणा कर क्षेत्रवासियों को बड़ी राहत देने का आश्वासन दिया है। यह पहल समाजसेवी जगत जायसवाल के प्रयासों का परिणाम है, जिन्होंने इस जनसमस्या को प्रमुखता से उठाया।
यह मुद्दा धरमेर महलिया में आयोजित अंबेडकर जयंती कार्यक्रम के दौरान सामने आया, जहां बड़ी संख्या में स्थानीय लोग और जनप्रतिनिधि मौजूद थे। कार्यक्रम में बोलते हुए समाजसेवी जगत जायसवाल ने कालीचरण घाट की गंभीर स्थिति का विस्तार से उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि यह घाट भले ही सलेमपुर संसदीय क्षेत्र में नहीं आता, लेकिन आसपास के कई गांवों के लोग अंतिम संस्कार, धार्मिक अनुष्ठान और स्नान जैसे महत्वपूर्ण कार्यों के लिए इसी स्थान पर निर्भर हैं।

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उन्होंने यह भी कहा कि रात के समय घाट पर घना अंधेरा छाया रहता है, जिससे लोगों को मोबाइल की टॉर्च या अस्थायी रोशनी के सहारे अपने धार्मिक कार्य करने पड़ते हैं। यह स्थिति न केवल असुविधाजनक है, बल्कि कई बार दुर्घटनाओं का कारण भी बन सकती है। लंबे समय से यह समस्या जनप्रतिनिधियों के सामने उठाई जाती रही, लेकिन समाधान नहीं हो सका था।
सांसद रामाशंकर विद्यार्थी ने इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए मानवीय दृष्टिकोण अपनाया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि क्षेत्र उनके संसदीय दायरे में न होने के बावजूद, मानवता के आधार पर वे अपने सांसद निधि से कालीचरण घाट पर हाईमास्ट लाइट लगाने का कार्य कराएंगे। उनके इस आश्वासन से उपस्थित लोगों में संतोष और उम्मीद की भावना देखने को मिली।
कार्यक्रम के दौरान एक और गंभीर मुद्दा भी जोर-शोर से उठा। उदय प्रताप सिंह ने सरयू नदी के किनारे प्रतिबंधित क्षेत्रों में हो रहे अवैध खनन पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगाई गई, तो आसपास के गांवों—भागलपुर, जीरासो, छिछूपुर, इशारू और धरमेर महलिया—पर गंभीर खतरा मंडरा सकता है।

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उन्होंने कहा कि अवैध खनन के कारण नदी का प्राकृतिक स्वरूप तेजी से बदल रहा है। इससे नदी के किनारों पर कटान बढ़ता जा रहा है, जो ग्रामीणों की जमीन और आवास के लिए बड़ा खतरा बन सकता है। ग्रामीणों में इस स्थिति को लेकर भय और असुरक्षा का माहौल है।
कार्यक्रम में मौजूद अन्य लोगों ने भी दोनों मुद्दों पर अपनी सहमति जताई और प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की। लोगों का कहना था कि एक ओर जहां घाट पर रोशनी की व्यवस्था मानवता और सम्मान से जुड़ा विषय है, वहीं अवैध खनन रोकना पर्यावरण और जनजीवन की सुरक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक है।
कालीचरण घाट पर हाईमास्ट लाइट की घोषणा जहां एक सकारात्मक पहल के रूप में देखी जा रही है, वहीं सरयू किनारे अवैध खनन का मुद्दा प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बनकर उभरा है। अब देखने वाली बात यह होगी कि प्रशासन इन दोनों मुद्दों पर कितनी तेजी और प्रभावशीलता से कार्रवाई करता है।

आपसी विवाद में एक व्यक्ति ने कुल्हाड़ी से हमला कर तीन लोगों को घायल कर दिया


सिकंदरपुर /बलिया(राष्ट्र की परम्परा)। सिकंदरपुर थाना क्षेत्र के बघूड़ी गांव में उस समय हड़कंप मच गया जब आपसी विवाद में एक व्यक्ति ने कुल्हाड़ी से हमला कर तीन लोगों को घायल कर दिया। घटना में सुरेंद्र राम (50), देवेंद्र राम (56) और मानती देवी (50), पत्नी शिव कुमार, गंभीर रूप से घायल हो गए। सभी घायलों को तत्काल उपचार के लिए जिला अस्पताल मऊ में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज चल रहा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, आरोपी राज कुमार दास और घायल पक्ष सभी एक ही गांव बघूड़ी के निवासी हैं। हालांकि वर्तमान समय में आरोपी दूसरे स्थान पर रह रहा था, लेकिन वह सुरेंद्र राम की माता जी के तेरही कार्यक्रम में शामिल होने के लिए गांव आया हुआ था। इसी दौरान किसी बात को लेकर कहासुनी हो गई, जो देखते ही देखते हिंसक रूप ले बैठी।
आरोप है कि विवाद के दौरान राज कुमार दास ने कुल्हाड़ी से हमला कर दिया, जिससे तीनों लोग घायल हो गए। घटना के बाद गांव में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और तत्परता दिखाते हुए आरोपी को भागते समय गिरफ्तार कर लिया।पुलिस ने घायलों को अस्पताल पहुंचाने में भी सहयोग किया। मामले में आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जा रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि घटना की जांच की जा रही है और दोषी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

सीमा पर सख्ती: 928 ग्राम गांजा के साथ नेपाली तस्कर गिरफ्तार, बाइक भी बरामद

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। भारत-नेपाल सीमा पर नशीले पदार्थों की तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत थाना निचलौल पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। सघन चेकिंग के दौरान पुलिस ने एक नेपाली तस्कर को गिरफ्तार कर उसके कब्जे से 928 ग्राम अवैध गांजा और एक बजाज एवेंजर मोटरसाइकिल बरामद की है।
पुलिस अधीक्षक महराजगंज शक्ति मोहन अवस्थी के निर्देशन में सीमावर्ती क्षेत्रों में अवैध तस्करी पर अंकुश लगाने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में थाना निचलौल पुलिस द्वारा भारत-नेपाल बॉर्डर पर संघन वाहन एवं व्यक्ति चेकिंग की जा रही थी। तभी मुखबिर की सूचना पर मोटर साईकिल संख्या लू 26 प 5135 पर सवार एक संदिग्ध व्यक्ति को रोक कर तलाशी ली गई।
तलाशी के दौरान उसके पास से 928 ग्राम अवैध गांजा बरामद हुआ। पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए आरोपी को हिरासत में ले लिया। पकड़े गए अभियुक्त की पहचान आयुष थापा 22 वर्ष पुत्र ओम लाल, निवासी शंकर नगर, थाना योगी कुटी, जिला रुपन्देही (नेपाल) के रूप में हुई है।
पुलिस ने आरोपी के खिलाफ थाना निचलौल में एनडीपीएस एक्ट की सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज कर उसे महराजगंज न्यायालय भेज दिया है।
इस कार्रवाई में उप-निरीक्षक अमित कुमार राय, उप-निरीक्षक मनोज कुमार गुप्ता, उप-निरीक्षक कपिल प्रजापति चन्द्र प्रकाश यादव, संतोष गौड़, आशुतोष कुमार, मानिक चन्द्र, अजीत कुमार और विवेक कुमार पाण्डेय की सराहनीय भूमिका रही।

21 अप्रैल को होगी मठ की कृषि भूमि की नीलामी, इच्छुक अभ्यर्थियों को मिलेगा अवस

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)
जनपद में स्थित पशुपति नाथ गुद्दर बाबा मठ, बरडीहा दल की कृषि योग्य भूमि की नीलामी एक बार फिर आयोजित की जा रही है। नीलामी समिति के अध्यक्ष जजी देवरिया रवि यादव के अनुसार, यह प्रक्रिया जनपद न्यायाधीश के आदेश के अनुपालन में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए कराई जा रही है।
नीलामी कार्यक्रम 21 अप्रैल 2026 को अपराह्न 4:30 बजे दीवानी न्यायालय परिसर स्थित केंद्रीय सभागार कक्ष में संपन्न होगा। इस दौरान रबी और खरीफ दोनों फसलों के लिए दो फसली नीलामी की जाएगी, जिससे किसानों और इच्छुक अभ्यर्थियों को कृषि भूमि उपयोग का अवसर प्राप्त होगा।
प्रशासन द्वारा नीलामी प्रक्रिया को पारदर्शी और व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने की तैयारी की गई है। नीलामी समिति की निगरानी में पूरी प्रक्रिया पूरी की जाएगी, जिसमें निर्धारित शर्तों के तहत प्रतिभागियों को भाग लेने की अनुमति दी जाएगी।
नीलामी का उद्देश्य मठ की कृषि भूमि का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करना और स्थानीय किसानों को खेती के लिए अवसर उपलब्ध कराना है। इच्छुक व्यक्ति समय पर पहुंचकर निर्धारित नियमों के अनुसार नीलामी में भाग ले सकते हैं।

टायर फटते ही पलटी डीसीएम, सड़क बनी फिसलन का जाल

महराजगंज में सड़क हादसा टला, पुलिस की तत्परता से बची बड़ी दुर्घटना


महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। जनपद के परतावल चौराहे के पास बुधवार शाम करीब 4 बजे एक बड़ा सड़क हादसा होते-होते टल गया। गोरखपुर की ओर से आ रही रिफाइंड तेल से लदी डीसीएम (UP 56 AT 2510) का अचानक टायर फट गया, जिससे वाहन अनियंत्रित होकर सड़क किनारे बने डिवाइडर पर पलट गया। हादसे के बाद वाहन में लदा तेल सड़क पर बहने लगा, जिससे पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, टायर फटने की आवाज इतनी तेज थी कि आसपास मौजूद लोग सहम गए। कुछ ही पलों में डीसीएम का संतुलन बिगड़ा और वह डिवाइडर से टकराकर पलट गई। वाहन के पलटते ही उसमें भरे रिफाइंड तेल के कंटेनर लीक हो गए, जिससे सड़क पर तेल फैल गया और फिसलन की खतरनाक स्थिति बन गई। इस वजह से पीछे से आ रहे वाहनों के लिए दुर्घटना की आशंका बढ़ गई थी।

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घटना के बीच सबसे राहत की बात यह रही कि चालक पूरी तरह सुरक्षित रहा और किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि वाहन तेज रफ्तार में होता या उस समय सड़क पर अधिक भीड़ होती, तो हादसा गंभीर रूप ले सकता था।
सूचना मिलते ही थाना श्यामदेउरवा क्षेत्र की परतावल चौकी पुलिस मौके पर पहुंच गई और स्थिति को नियंत्रित करने में जुट गई। पुलिस ने तुरंत यातायात को डायवर्ट कर सुरक्षित निकासी सुनिश्चित की। साथ ही सड़क पर फैले तेल को साफ कराने के लिए आवश्यक कदम उठाए गए, ताकि फिसलन के कारण कोई अन्य हादसा न हो।

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कुछ समय के लिए क्षेत्र में जाम जैसी स्थिति बनी रही, लेकिन पुलिस की सक्रियता और स्थानीय लोगों के सहयोग से यातायात जल्द ही सामान्य कर दिया गया। मौके पर मौजूद लोगों ने पुलिस की तत्परता की सराहना की और समय रहते स्थिति संभालने को बड़ी राहत बताया।

राख से उठती लौ: आँसूओं से जन्मी हिम्मत की कहानी

उन दीवारों से पूछो वो ‘रातें’ कैसी थीं,
जब ‘रोटी’ भी छुप-छुप के खाती थी।
उनके आँसू भी ‘आवाज़’ न करें कहीं,
इस डर से हर ‘पीड़ा’ दबाई जाती थी।
नन्ही-सी उम्र में सपने देखें थे कोमल,
लेकिन किस्मत ने यूं बोझ थमा दिया।
अपनों के मध्य में ही ‘पराया’ बनाकर,
ज़िन्दगी जीना जैसे ‘सज़ा’ बना दिया।
हर एक चोट ने दिल को ‘तोड़ा’ जरूर,
पर स्वयं की हिम्मत को तोड़ ना पाई।
यहाँ ‘अंधेरों’ ने भी लाख कोशिशे की,
पर एक आशा की किरण बुझ न पाई।
एक दिन जब हद से ही गुज़र गया दर्द,
और साँसें भी ज्यादा भारी लगने लगीं।
तबसे ‘भीतर’ की एक छोटी-सी उम्मीद,
अंदर ही हौले-हौले से फिर जगने लगी।
कहा—”तू खत्म होने के लिए नहीं बनी,
तू तो एक नवद कहानी है बदलाव की।
जो राख से भी उठकर जल उठेगी फिर,
एक नई उजली होके निकले आग सी।”
आँसू को ताकत बना डर को छोड़ दिया,
जो रोटी छुपके खाती रिश्ता तोड़ दिया।
ये वही चेहरा जिसने अंधेरों को हराया है,
ये कहती—”तू उठ, तेरा भी वक्त आया है।”
(संदर्भ – मप्र की आईएएस सविता प्रधान की कहानी)

रचयिता:
✍️ संजय एम तराणेकर
(कवि, लेखक व समीक्षक)
इन्दौर-452011 (मध्य प्रदेश)

जय रामगढ़ में धूमधाम से मनाई गई बाबा साहब की जयंती

प्रतियोगिता में बच्चों को किया गया सम्मानित

कोपागंज/मऊ(राष्ट्र की परम्परा )
ब्लाक कोपागंज अंतर्गत जय रामगढ़ में अम्बेडकर समिति द्वारा संविधान निर्माता भारत रत्न बाबा साहब डॉ. भीमराव अम्बेडकर की जयंती बड़े ही धूमधाम और उत्साह के साथ मनाई गई। कार्यक्रम में क्षेत्र के गणमान्य लोगों के साथ बच्चों की उत्साहपूर्ण भागीदारी रही।
इस अवसर पर समिति के सदस्यों द्वारा बच्चों के सर्वांगीण विकास और ज्ञानवर्धन के उद्देश्य से जनरल नॉलेज प्रतियोगिता का आयोजन कराया गया, जिसमें कई बच्चों ने प्रतिभाग किया। प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले पांच बच्चों को विशेष रूप से सम्मानित किया गया।
प्रतियोगिता में सफल होने वाले बच्चों में आस्था कुमारी, काव्या गौतम, रागिनी, प्रांजलि एवं रिहानस को पुरस्कार प्रदान कर उनका उत्साहवर्धन किया गया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित भाजपा की मंडल उपाध्यक्ष ममता पांडेय द्वारा विजेता बच्चों को पुरस्कार देकर सम्मानित किया। इस दौरान उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि ऐसी प्रतियोगिताएं बच्चों के ज्ञान और आत्मविश्वास को बढ़ाने में सहायक होती हैं तथा उन्हें भविष्य में आगे बढ़ने की प्रेरणा देती हैं।
उन्होंने सभी लोगों से अपील करते हुए कहा कि समाज में आपसी भेदभाव को भुलाकर बाबा साहेब के बताए हुए मार्ग पर चलने की आवश्यकता है, तभी समाज और देश का समुचित विकास संभव है।
कार्यक्रम के दौरान पंकज कुमार, कर्मचंद, रूदल कुमार, अनुप कुमार, रोहित कुमार, बृजेश, अजित कुमार, गुलशन कुमार, आकाश कुमार, संदेश कुमार सहित मंडल उपाध्यक्ष ममता पाण्डेय एवं अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

गोरखपुर जोन में पुलिस का सघन अभियान 159 वारंटी और 113 वांछित गिरफ्तार

170 बीएनएसएस के तहत 550 व्यक्तियों पर कार्रवाई 330 प्रकरणों में हुई कार्यवाही

गोरखपुर(राष्ट्र की परम्परा)
गोरखपुर जोन में अपराधियों के खिलाफ चलाए गए विशेष सघन अभियान में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। वारंटियों और वांछित अभियुक्तों की गिरफ्तारी के लिए 13 अप्रैल शाम 4 बजे से 15 अप्रैल सुबह 6 बजे तक चलाए गए अभियान में जोन के सभी जनपदों में व्यापक स्तर पर कार्रवाई की गई।
अभियान के दौरान पुलिस टीमों ने लगातार दबिश देकर 159 वारंटियों और 113 वांछित अभियुक्तों को गिरफ्तार कर जेल भेजा। इसके साथ ही 170 बीएनएसएस के तहत 330 प्रकरणों में कुल 550 व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई की गई।
इस सघन अभियान में पुरुष और महिला पुलिस कर्मियों की पर्याप्त संख्या लगाई गई थी, जिन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय रूप से छापेमारी कर अपराधियों को पकड़ने का कार्य किया। पुलिस अधिकारियों द्वारा स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि वारंटियों और वांछित अभियुक्तों की गिरफ्तारी में किसी प्रकार की ढिलाई न बरती जाए।
अभियान के तहत जोन के सभी जनपदों में एक साथ कार्रवाई की गई, जिससे अपराधियों में हड़कंप मच गया। पुलिस की इस कार्रवाई को अपराध नियंत्रण की दिशा में एक प्रभावी कदम माना जा रहा है।
पुलिस का कहना है कि आगे भी इस तरह के अभियान लगातार चलाए जाएंगे, ताकि क्षेत्र में कानून व्यवस्था मजबूत बनी रहे और अपराधियों पर सख्त अंकुश लगाया जा सके।

किसान दिवस में गूंजी किसानों की समस्याएं, समाधान के दिए गए सख्त निर्देश

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)
मुख्य विकास अधिकारी विवेक कुमार श्रीवास्तव की अध्यक्षता में विकास भवन सभागार में किसान दिवस का आयोजन किया गया, जिसमें जनपद के विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में किसान शामिल हुए। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों की समस्याओं को सुनकर उनका त्वरित समाधान सुनिश्चित करना और सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम पायदान तक पहुंचाना रहा।
बैठक में जिला कृषि अधिकारी सोम प्रकाश गुप्ता ने पिछली किसान दिवस बैठक में प्राप्त शिकायतों के निस्तारण की जानकारी किसानों के सामने प्रस्तुत की। इस दौरान किसानों की समस्याओं को गंभीरता से सुनते हुए मुख्य विकास अधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए कड़े निर्देश दिए।
रतनपुरा क्षेत्र के किसानों ने क्रय केंद्रों पर बोरे की कमी के कारण उपज बेचने में आ रही परेशानी को प्रमुखता से उठाया। इस पर मुख्य विकास अधिकारी ने तत्काल सभी क्रय केंद्रों पर बोरे की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। वहीं कई किसानों ने जंगली नीलगायों से फसलों को हो रहे नुकसान की समस्या भी रखी, जिस पर आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया गया। हथिनी से सरवा मार्ग की खराब स्थिति को लेकर भी मरम्मत की मांग की गई।
डुमरांव क्षेत्र के एक किसान ने खराब पड़े इंडिया मार्का हैंडपंप की शिकायत की, जिस पर संबंधित विभाग को जल्द मरम्मत कराने के निर्देश दिए गए। बैठक में कृषि योजनाओं की जानकारी देते हुए किसानों को अधिक से अधिक लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया गया।
मुख्य विकास अधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिए कि तहसील स्तर पर प्राप्त शिकायतों का निस्तारण 7 कार्य दिवस के भीतर किया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि शिकायतों के समाधान में लापरवाही पाई गई तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
अंत में जिला कृषि अधिकारी ने किसानों से फार्मर आईडी बनवाने की अपील करते हुए कहा कि भविष्य में सभी कृषि योजनाओं का लाभ इसी के माध्यम से मिलेगा। बिना फार्मर आईडी के किसान सरकारी योजनाओं से वंचित हो सकते हैं।
किसान दिवस कार्यक्रम में प्रगतिशील किसानों के साथ विभिन्न विभागों के अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।

बंद दुकान से युवती का सड़ा गला शव बराम

3 दिन से अंदर पड़ी थी लाश, सिर पर चोट के निशान; साथ काम करने वाला युवक गायब

गोरखपुर(राष्ट्र की परम्परा)
कैंट थाना क्षेत्र में बुधवार को एक बंद दुकान के अंदर 32 वर्षीय युवती का सड़ा गला हुआ शव मिलने से इलाके में हड़कंप मच गया। बदबू फैलने पर आसपास के दुकानदारों ने पुलिस को सूचना दी, जिसके बाद शटर खोलकर अंदर पहुंची पुलिस ने केबिन में युवती की लाश बरामद की।
मृतका की पहचान गंगोत्री यादव (32) के रूप में हुई है, जो फ्लैक्स, डिजिटल और ऑफसेट प्रिंटिंग का काम करती थी। बताया जा रहा है कि शव करीब तीन दिन पुराना है और काफी सड़ चुका था।
दुकान संचालक के अनुसार, यह दुकान उनकी माता के नाम पर है, जिसे करीब डेढ़ साल पहले महाराजगंज की रहने वाली गंगोत्री ने किराए पर लिया था। बुधवार को जब दुकान से तेज बदबू आने लगी तो वह मौके पर पहुंचे और पुलिस को सूचना दी।
गंगोत्री के भाई रमेश यादव ने बताया कि वह रविवार को बहन से दुकान पर मिले थे, तब सब सामान्य था। सोमवार से उसका फोन नहीं लग रहा था, जिससे परिवार के लोग चिंतित हो गए। बुधवार को छोटा भाई श्रीकांत दुकान पहुंचा तो शटर बंद था, लेकिन अंदर से तेज बदबू आ रही थी।
सूचना पर पहुंची पुलिस ने शटर खोलकर अंदर प्रवेश किया तो केबिन में गंगोत्री का शव पड़ा मिला। शव की स्थिति बेहद खराब थी और उससे तरल पदार्थ निकल रहा था, जिससे आसपास दुर्गंध फैल गई थी।
पुलिस जांच में सामने आया कि गंगोत्री पिछले करीब 8 वर्षों से अनिल नाम के युवक के साथ मिलकर प्रिंटिंग प्रेस चला रही थी। घटना के बाद से अनिल संदिग्ध रूप से गायब है। पुलिस ने उससे संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन उसने कॉल रिसीव कर मोबाइल बंद कर दिया। इसके बाद पुलिस उसकी तलाश में जुट गई है और उससे जुड़े लोगों से पूछताछ की जा रही है।
परिजनों के अनुसार, गंगोत्री तीन भाइयों में सबसे छोटी थी और परिवार उसकी शादी की तैयारी कर रहा था। उसकी अचानक मौत से परिवार में कोहराम मचा हुआ है।
एसपी सिटी निमिष पाटिल ने बताया कि बंद दुकान में युवती का शव मिला है। मौके से उसका मोबाइल भी बरामद हुआ है। प्राथमिक जांच में सिर पर चोट के निशान मिले हैं। मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है और जल्द ही पूरे घटनाक्रम का खुलासा किया जाएगा।

गोरखनाथ मंदिर में टाटा संस चेयरमैन ने किए गुरु गोरखनाथ के दर्शन-पूजन

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उपस्थिति में संपन्न हुआ कार्यक्रम

गोरखपुर(राष्ट्र की परम्परा)
गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की गरिमामयी उपस्थिति में बुधवार को गोरखनाथ मंदिर में टाटा संस लिमिटेड के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने शिवावतारी महायोगी गुरु गोरखनाथ के दर्शन-पूजन किए।
इस दौरान मंदिर परिसर में आध्यात्मिक वातावरण रहा और विधि-विधान से पूजा-अर्चना संपन्न हुई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी कार्यक्रम में उपस्थित रहकर अतिथि का स्वागत किया।
दर्शन-पूजन के पश्चात एन. चंद्रशेखरन ने मंदिर की परंपरा और आध्यात्मिक विरासत के प्रति श्रद्धा व्यक्त की।

महराजगंज में साइबर गैंग का भंडाफोड़: 05 गिरफ्तार, 318 मोबाइल बरामद

कंबल,बर्तन के बदले जुटाए जाते थे पुराने मोबाइल, 80 लाख के 318 फोन बरामद

कोलकाता के जरिए साइबर अपराधियों तक पहुंचता था नेटवर्क

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। जनपद में साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत 15 अप्रैल 2026 को पुलिस को बड़ी सफलता मिली। अपर पुलिस महानिदेशक गोरखपुर जोन अशोक मुथा जैन और पुलिस उप महानिरीक्षक गोरखपुर रेंज एस चनप्पा के निर्देश पर पुलिस अधीक्षक शक्ति मोहन अवस्थी के नेतृत्व में प्रभावी कार्रवाई करते हुए साइबर क्राइम थाना और थाना श्यामदेंउरवा की संयुक्त टीम ने 5 शातिर साइबर अपराधियों को गिरफ्तार कर लिया। यह गिरफ्तारी परतावल नहर पटरी से की गई।
पुलिस जांच में सामने आया कि यह गिरोह एक संगठित अंतर्राज्यीय साइबर नेटवर्क का हिस्सा है, जो साइबर अपराधियों को तकनीकी इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराता था।
बरामद मोबाइल फोन के आईएमईआई और डेटा का तकनीकी विश्लेषण किया जा रहा है, जबकि गिरोह के अन्य सदस्यों और एक नामजद आरोपी की तलाश जारी है। साथ ही वित्तीय लेन-देन की भी गहन जांच की जा रही है।
पूछ-ताछ में अभियुक्तों ने खुलासा किया कि सरकार द्वारा साइबर अपराध में इस्तेमाल होने वाले मोबाइल फोनों के आईएमईआई नंबर ब्लॉक किए जाने के बाद उन्होंने नया तरीका अपनाया। वे गांव-गांव घूमकर लोगों को पुराने मोबाइल फोन के बदले कंबल या बर्तन देकर मोबाइल इकट्ठा करते थे। इसके बाद इन मोबाइलों को कोलकाता ले जाकर अपने एक साथी को बेच देते थे, जो इन्हें साइबर अपराधियों तक पहुंचाता था। इन मोबाइलों के मदरबोर्ड में मौजूद आईएमईआई का उपयोग कर ओटीपी फ्रॉड, फिशिंग और फर्जी कॉलिंग जैसी घटनाओं को अंजाम दिया जाता था।
जानकारी के अनुसार सभी आरोपी 5 अप्रैल 2026 से थाना श्यामदेंउरवा क्षेत्र के परतावल में रह रहे थे और यहीं से अपने नेटवर्क को संचालित कर रहे थे। गिरोह का एक सदस्य मुन्ना कुमार पहले से ही इस तरह के अपराधों में सक्रिय रहा है।गिरफ्तार अभियुक्तों में विकेश कुमार, रमाकांत साहनी, बृजबिहारी, मुन्ना कुमार और रामदरश शामिल हैं, जो बिहार के पूर्वी चम्पारण और मोतिहारी जिले के निवासी हैं। पुलिस ने इनके कब्जे से 318 एंड्रॉइड मोबाइल फोन (लगभग 80 लाख रुपये मूल्य), 110 मोबाइल मदरबोर्ड, 5 मोबाइल फोन, 55 फर्जी बिल, 5700 रुपये नकद और 5 मोटर साईकिल बरामद की हैं। इन उपकरणों का उपयोग साइबर ठगी में किया जाना था।
यह कार्रवाई साइबर थाना प्रभारी निरीक्षक सजनू यादव और थानाध्यक्ष अभिषेक सिंह के नेतृत्व में पुलिस टीम द्वारा की गई, जिसमें अन्य पुलिसकर्मियों की भी अहम भूमिका रही।
पुलिस अधीक्षक शक्ति मोहन अवस्थी ने इस सफलता पर टीम को बधाई देते हुए कहा कि साइबर अपराध के खिलाफ सख्त कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। उन्होंने आम जनता से अपील की कि पुराने मोबाइल फोन बेचते समय सावधानी बरतें और केवल अधिकृत या विश्वसनीय माध्यमों के जरिए ही लेन-देन करें।

रोवर्स/रेंजर्स प्रशिक्षण शिविर का सफल समापन, विद्यार्थियों को मिला जीवन कौशल का संदेश


देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। भारत स्काउट एवं गाइड उत्तर प्रदेश, जिला संस्था दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय, गोरखपुर द्वारा संचालित रोवर्स/रेंजर्स का अनिवार्य प्रशिक्षण शिविर संत विनोबा पी.जी. कॉलेज, देवरिया में 13 अप्रैल 2026 को प्रारंभ हुआ, जिसका समापन 15 अप्रैल 2026 को सम्पन्न हुआ।
समापन समारोह के मुख्य अतिथि महाविद्यालय के हिन्दी विभागाध्यक्ष प्रोफेसर शैलेंद्र कुमार राव रहे। उन्होंने ध्वजारोहण कर एवं मां सरस्वती के चित्र पर दीप प्रज्वलन व पुष्पांजलि अर्पित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। अपने उद्बोधन में उन्होंने कहा कि स्काउट/गाइड केवल एक गतिविधि नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला है, जो व्यक्ति को विपरीत परिस्थितियों में सहयोग, आत्मनिर्भरता और सेवा की भावना सिखाती है। उन्होंने बताया कि स्काउटिंग से विद्यार्थियों में अनुशासन, समाज सेवा और देशभक्ति का विकास होता है।
विशिष्ट अतिथि प्रोफेसर भूपेश मणि त्रिपाठी ने रोवर्स/रेंजर्स की स्थापना एवं उसके महत्व पर प्रकाश डालते हुए विद्यार्थियों को इसके उद्देश्य से अवगत कराया। मुख्य प्रशिक्षक एवं जिला संगठन आयुक्त सूरज चन्द (रोवर) ने कहा कि यदि प्रशिक्षु स्काउटिंग के नौ नियमों को अपने जीवन में अपनाते हैं, तो वे निश्चित रूप से सफलता की ओर अग्रसर होते हैं। उन्होंने स्काउटिंग के तीन मूल सिद्धांत—ईश्वर के प्रति कर्तव्य, दूसरों के प्रति कर्तव्य एवं स्वयं के प्रति कर्तव्य—की विस्तृत जानकारी दी।
रेंजर्स प्रभारी डॉ. शगुफ्ता अफरोज ने अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया, जबकि कार्यक्रम का संचालन रोवर्स प्रभारी डॉ. राज कुमार गुप्ता ने किया। कार्यक्रम के सफल आयोजन में महाविद्यालय के चीफ प्रॉक्टर डॉ. विवेक मिश्र, डॉ. चन्द्रेश बारी, डॉ. तूलिका पाण्डेय, डॉ. अभिनव चौबे, डॉ. राजेश कुमार मिश्र सहित समस्त कर्मचारियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। प्रशिक्षण शिविर को सफल बनाने में प्रशिक्षक शिवा कुमार की भूमिका भी सराहनीय रही।

नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023: सशक्तिकरण या प्रॉक्सी राजनीति का नया खतरा?

नारी शक्ति कानून पर सवाल: क्या बढ़ेगा प्रॉक्सी कंट्रोल?

विशेष संसद सत्र (16-18 अप्रैल 2026) के संदर्भ में नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 एक बार फिर राष्ट्रीय विमर्श के केंद्र में है। यह अधिनियम संसद और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देकर राजनीतिक भागीदारी में ऐतिहासिक परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त करता है। इसका उद्देश्य केवल संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि लोकतंत्र को अधिक समावेशी, संतुलित और न्यायपूर्ण बनाना है।
हालांकि, इस महत्वपूर्ण पहल के साथ कई गंभीर चुनौतियाँ भी सामने आ रही हैं। सबसे बड़ी चिंता प्रॉक्सी राजनीति और बैक-डोर कंट्रोल की है, जहाँ निर्वाचित महिला प्रतिनिधि के स्थान पर वास्तविक शक्ति उनके पति या अन्य पुरुष रिश्तेदारों के हाथों में होती है। पंचायत स्तर पर “सरपंच पति” की प्रवृत्ति पहले से ही स्थापित उदाहरण है, जो इस खतरे की गंभीरता को दर्शाती है।

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लोकतंत्र का मूल आधार प्रतिनिधित्व और जवाबदेही है। जब मतदाता किसी महिला को उसकी क्षमता और नेतृत्व के आधार पर चुनते हैं, तो वे उससे सक्रिय भूमिका की अपेक्षा करते हैं। लेकिन यदि निर्णय कोई और लेता है, तो यह मतदाता के विश्वास के साथ धोखा है और लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर करता है।
दूसरा महत्वपूर्ण पहलू यह है कि आरक्षण लागू होने के बाद राजनीतिक दल अपने प्रभाव को बनाए रखने के लिए परिवार की महिलाओं को उम्मीदवार बनाकर अप्रत्यक्ष नियंत्रण स्थापित कर सकते हैं। यह प्रवृत्ति न केवल वंशवाद को बढ़ावा देती है, बल्कि वास्तविक महिला नेतृत्व के उभरने में बाधा भी बनती है।
तीसरा बड़ा खतरा आपराधिक दखल का है। विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार, कई मामलों में महिलाओं को आपराधिक नेटवर्क द्वारा ढाल के रूप में इस्तेमाल किया जाता है, क्योंकि उन पर कम संदेह होता है। यदि यही प्रवृत्ति राजनीति में प्रवेश करती है, तो यह लोकतंत्र और कानून व्यवस्था दोनों के लिए गंभीर चुनौती बन सकती है।
हालांकि, यह भी सच है कि किसी भी सामाजिक परिवर्तन के शुरुआती दौर में चुनौतियाँ स्वाभाविक होती हैं। अंतरराष्ट्रीय अनुभव बताते हैं कि जब महिला आरक्षण को शिक्षा, प्रशिक्षण और संस्थागत सुधारों के साथ जोड़ा गया, तो सकारात्मक परिणाम सामने आए। रवांडा, नॉर्वे और फ्रांस जैसे देशों में महिला नेतृत्व ने नीतिगत गुणवत्ता और सामाजिक विकास को नई दिशा दी है।

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भारतीय संदर्भ में भी समाधान स्पष्ट है। केवल आरक्षण पर्याप्त नहीं है, बल्कि इसके साथ ठोस सुधार आवश्यक हैं। सबसे पहले, प्रॉक्सी नेतृत्व को रोकने के लिए स्पष्ट कानूनी प्रावधान और कठोर दंड व्यवस्था लागू करनी होगी। यदि यह साबित हो कि कोई प्रतिनिधि केवल नाममात्र का है और वास्तविक नियंत्रण किसी अन्य व्यक्ति के पास है, तो उस पर और संबंधित व्यक्ति पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
दूसरा, महिला जनप्रतिनिधियों के लिए अनिवार्य राजनीतिक और प्रशासनिक प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किए जाने चाहिए, ताकि वे आत्मनिर्भर और प्रभावी नेता बन सकें। तीसरा, राजनीतिक दलों को अपनी आंतरिक संरचना में पारदर्शिता लानी होगी और महिलाओं को केवल प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि वास्तविक नेतृत्व के रूप में आगे बढ़ाना होगा।
इसके अलावा, मीडिया और नागरिक समाज की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। उन्हें ऐसे मामलों को उजागर करना होगा जहाँ महिलाओं का दुरुपयोग हो रहा हो। इससे न केवल जवाबदेही बढ़ेगी, बल्कि समाज में जागरूकता भी विकसित होगी।
संवैधानिक दृष्टि से भी यह अधिनियम संतुलित है। समानता के अधिकार के साथ-साथ महिलाओं के लिए विशेष प्रावधान की अनुमति भारतीय संविधान देता है। इसलिए यह जरूरी है कि इस नीति को न्याय और अवसर के संतुलन के साथ लागू किया जाए, ताकि यह किसी नए असंतुलन को जन्म न दे।
अंततः, नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 भारत के लोकतांत्रिक विकास की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि हम इसे “संख्यात्मक प्रतिनिधित्व” से आगे बढ़ाकर “वास्तविक सशक्तिकरण” में कैसे बदलते हैं। यदि प्रॉक्सी राजनीति, आपराधिक हस्तक्षेप और बैक-डोर कंट्रोल पर प्रभावी रोक लगाई गई, तो यह अधिनियम देश के लिए एक सामाजिक क्रांति साबित हो सकता है।

नीतीश युग का अंत, सम्राट चौधरी के साथ नई राजनीति की शुरुआत

बिहार में सत्ता का नया अध्याय: सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने से बदलेगा राजनीतिक समीकरण


पटना (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)बिहार की राजनीति में एक ऐतिहासिक मोड़ आ चुका है। लंबे समय से चले आ रहे राजनीतिक दौर के बाद अब राज्य को नया नेतृत्व मिलने जा रहा है। सम्राट चौधरी का मुख्यमंत्री बनना न सिर्फ सत्ता परिवर्तन है, बल्कि यह सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों में बड़े बदलाव का संकेत भी है। पहली बार भारतीय जनता पार्टी का कोई चेहरा बिहार के मुख्यमंत्री पद पर आसीन होने जा रहा है, जिससे प्रदेश की राजनीति में एक नया युग शुरू होने की चर्चा तेज हो गई है।
करीब दो दशकों तक बिहार की राजनीति में नीतीश कुमार का वर्चस्व रहा। लालू प्रसाद यादव के दौर के बाद नीतीश कुमार को सर्वमान्य नेता के रूप में देखा जाता रहा है। लेकिन अब उनके राज्यसभा जाने और मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद राजनीतिक परिदृश्य पूरी तरह बदल गया है। बीजेपी विधायक दल ने सम्राट चौधरी को अपना नेता चुनकर स्पष्ट कर दिया है कि अब पार्टी खुद नेतृत्व की कमान संभालने को तैयार है।
सम्राट चौधरी का राजनीतिक सफर काफी दिलचस्प रहा है। वे एक मजबूत राजनीतिक परिवार से आते हैं। उनके पिता शकुनी चौधरी छह बार विधायक और सांसद रह चुके हैं, जबकि उनकी मां भी विधायक रही हैं। इस पारिवारिक पृष्ठभूमि ने उन्हें राजनीति की बारीकियों को समझने में मदद की। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राष्ट्रीय जनता दल के साथ की थी और राबड़ी देवी सरकार में सबसे कम उम्र के मंत्री बने थे। बाद में उन्होंने बीजेपी का दामन थामा और संगठन में अपनी अलग पहचान बनाई।

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बीजेपी में आने के बाद सम्राट चौधरी ने संगठन को मजबूती देने में अहम भूमिका निभाई। प्रदेश अध्यक्ष के रूप में उन्होंने पार्टी को जमीनी स्तर पर मजबूत किया। वर्तमान में वे उपमुख्यमंत्री और गृह मंत्री के रूप में भी काम कर चुके हैं, जिससे उन्हें प्रशासनिक अनुभव भी मिला है। यही अनुभव अब मुख्यमंत्री पद पर उनकी कार्यशैली को और प्रभावी बना सकता है।
सम्राट चौधरी अति पिछड़ा वर्ग से आते हैं और कुशवाहा समाज का प्रतिनिधित्व करते हैं। बिहार की राजनीति में जातीय समीकरण हमेशा महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं। नीतीश कुमार को अति पिछड़ा और पिछड़ा वर्ग का मजबूत समर्थन प्राप्त था। ऐसे में सम्राट चौधरी की ताजपोशी बीजेपी की एक रणनीतिक चाल मानी जा रही है, जिससे वह इस सामाजिक आधार को अपने पक्ष में बनाए रखना चाहती है।
तारापुर विधानसभा क्षेत्र से विधायक सम्राट चौधरी की छवि एक सक्रिय और जमीनी नेता की है। वे संगठन और सरकार दोनों में अपनी क्षमता साबित कर चुके हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उनके नेतृत्व में बीजेपी बिहार में अपनी पकड़ और मजबूत करेगी। अब तक सरकार को समर्थन देने वाली बीजेपी पहली बार पूरी तरह ‘ड्राइविंग सीट’ पर नजर आएगी।
सम्राट चौधरी का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि उन्होंने नीतीश कुमार का विश्वास भी हासिल किया। यही कारण है कि वे गठबंधन राजनीति के बीच भी संतुलन बनाने में सक्षम माने जाते हैं। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि वे प्रशासनिक स्तर पर कितनी तेजी से फैसले लेते हैं और जनता की अपेक्षाओं पर कितना खरे उतरते हैं।

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बिहार में विकास, रोजगार, कानून-व्यवस्था और बुनियादी ढांचे जैसे मुद्दे लंबे समय से चर्चा में रहे हैं। अब सम्राट चौधरी के सामने सबसे बड़ी चुनौती इन मुद्दों पर ठोस काम करने की होगी। यदि वे इन क्षेत्रों में प्रभावी प्रदर्शन करते हैं, तो यह न केवल उनके राजनीतिक भविष्य को मजबूत करेगा, बल्कि बीजेपी के लिए भी राज्य में स्थायी आधार तैयार कर सकता है।
कुल मिलाकर, सम्राट चौधरी का मुख्यमंत्री बनना बिहार की राजनीति में एक बड़े बदलाव का संकेत है। यह बदलाव केवल चेहरे का नहीं, बल्कि राजनीतिक संस्कृति और नेतृत्व शैली का भी हो सकता है। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि यह नया नेतृत्व बिहार को किस दिशा में ले जाता है।