गोरखपुर(राष्ट्र की परम्परा)l संत निरंकारी सत्संग भवन सूरजकुंड में आयोजित प्रेरणा दिवस संत समागम के अवसर पर स्टेज पर बिराजमान महात्मा डॉ0एम0डी0मिश्र निरंकारी बाबा हरदेव सिंह महाराज की शिक्षाओं का जिक्र करते हुए बताया कि निरंकारी बाबा हरदेव सिंह महाराज जीवन पर्यन्त मानवता का कल्याण करते रहे। आपकी विनम्रता और महानता भरे कार्यों से संपूर्ण जगत अवगत है भोला मुख, मीठी मुस्कान ,चेहरे पर अद्वितीय नूरानी चमक और हर किसी का दर्द बांटने वाला आपका स्वभाव अद्भुत और दिव्य आकर्षण से भरा हुआ था।आपके बाल्यकाल में भोला हरदेव, युवा अवस्था में युवा हरदेव और मानवता के पथ प्रदर्शक सद्गुरु बाबा हरदेव सिंह महाराज वाला रूप संसार ने निकट से देखा और आपके हर कल्याणकारी कदम की सराहना की। आपका दिव्यता से भरपूर दिव्य हरदेव और मानवता पर किए गए अनंत उपकारों से युक्त युगदृष्टा उपकारी हरदेव वाला स्वरूप अविस्मरणीय है जो कभी बुलाया नहीं जा सकता।
तेरे एहसान का बदला चुकाया जा नहीं सकता,
करम ऐसा किया तूने बुलाया जा नहीं सकता। मानवता का कल्याण करना आपका स्वभाव था और हर दिल में बस जाना आपकी वृत्ति। आप सहजता से लोगों को अपनी ओर आकर्षित करते फिर प्यार और माधुर्य से उनके दिलों को जीत लेते और अद्भुत उत्साह लेकर जीवन पथ पर आगे बढ़ जाते।बाल ,युवा ,बुजुर्ग, स्त्री -पुरुष सभी आपसे प्रेरित-प्रोत्साहित होते। आपकी शिक्षा थी–समस्या का कारण नहीं, समाधान बनें, दलीलें नहीं दिल जीतें। दलीलों से किसी को निरुत्तर तो किया जा सकता है, लेकिन बात तो दिल से जीतने से ही बनती है।
युग सुंदर सदियां सुंदर, हर पल सुंदर गर मानव जीवन हो सुंदर
बाबा हरदेव सिंह महाराज का जीवन गंगा की तरह पवन था जिसके समक्ष सारी दुनिया ने सर झुकाया आपका दिल दया, प्यार, उपकार से भरा हुआ था युवा अवस्था में अपने सेवादल की वर्दी पहनकर सतगुरु की सेवा को अंगीकार किया। गुरु ने जो कहा वो कर्म किया।आपने सुबह-शाम अमन- चैन का पैगाम दिया। आज आपके सपनों को पूरा करने का वक्त है। प्रेम पुंज की प्रेम भरी बातों को सारे संसार में फैलने का वक्त है। गुनाह माफ कर सबको गले लगाने का वक्त है। आपके आदेशों- उपदेशों पर अपना जीवन ढालने का वक्त है।
प्रेरणा दिवस संत समागम का भव्य आयोजन
निजी गाड़ी छोड़ ऑटो से जिला मुख्यालय पहुंचे सदर विधायक, ऊर्जा संरक्षण का दिया संदेश
महराजगंज(राष्ट्र की परम्परा)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आह्वान पर ऊर्जा संरक्षण और वैश्विक तेल संकट के प्रति लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से सदर विधायक जय मंगल कन्नौजिया बुद्धवार को अपनी निजी गाड़ी छोड़ आटो से जिला मुख्यालय पहुंचे। विधायक के इस कदम की जिले में खूब चर्चा रही और लोगों ने इसे जन-जागरूकता की दिशा में सकारात्मक पहल बताया।
जिला मुख्यालय पहुंचने के बाद विधायक जय मंगल कन्नौजिया ने विभिन्न विभागों के अधिकारियों के साथ बैठक कर आम जनता की समस्याओं के निस्तारण की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि जनता से जुड़े मामलों का समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से समाधान सुनिश्चित किया जाए, ताकि लोगों को अनावश्यक परेशानियों का सामना न करना पड़े।
इस दौरान विधायक जय मंगल कन्नौजिया ने कहा कि वर्तमान समय में पूरी दुनिया ऊर्जा संकट की चुनौती से जूझ रही है। इजरायल, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव तथा युद्ध जैसे हालातों के कारण अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित हो रही है, जिसका असर भारत सहित कई देशों पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि पेट्रोल और डीजल की बढ़ती खपत को कम करना समय की सबसे बड़ी जरूरत बन चुकी है।
विधायक ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार लोगों से संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग की अपील कर रहे हैं। उसी क्रम में उन्होंने स्वयं निजी वाहन का उपयोग न कर आटो से यात्रा करने का निर्णय लिया, ताकि जनता के बीच यह संदेश पहुंचे कि छोटी-छोटी पहल से भी बड़े बदलाव संभव हैं।
उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि अनावश्यक वाहन प्रयोग से बचें, सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा दें और ईंधन की बचत करें। इससे जहां एक ओर आर्थिक बचत होगी, वहीं पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा। विधायक ने कहा कि देशहित में प्रत्येक नागरिक को अपनी जिम्मेदारी समझते हुए ऊर्जा बचत अभियान से जुड़ना चाहिए।
इस अवसर पर संजीव शुक्ला, मंडल अध्यक्ष हेमंत गुप्ता, शिवाकांत गुप्ता सहित अन्य कार्यकर्ता मौजूद रहें।
भाजपा क्षेत्रीय संगठन मंत्री का सिकंदरपुर में आगमन, पूर्व विधायाक के आवास पर हुआ भव्य स्वागत
बलिया (राष्ट्र की परम्परा )
भारतीय जनता पार्टी बिहार एवं झारखंड प्रदेश के क्षेत्रीय संगठन मंत्री नागेन्द्र के सिकंदरपुर आगमन पर भाजपा कार्यकर्ताओं में खासा उत्साह देखने को मिला। पूर्व विधायक एवं पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष संजय यादव के आवास पर आयोजित स्वागत कार्यक्रम में कार्यकर्ताओं ने उनका जोरदार अभिनंदन किया। इस दौरान पूर्व विधायक संजय यादव ने समर्थकों एवं पार्टी पदाधिकारियों के साथ क्षेत्रीय संगठन मंत्री का पुष्पगुच्छ एवं माल्यार्पण कर स्वागत किया। कार्यक्रम स्थल पर भाजपा कार्यकर्ताओं की भारी भीड़ जुटी रही और पूरे माहौल में उत्साह एवं संगठनात्मक ऊर्जा देखने को मिली। बैठक के दौरान संगठन को और अधिक मजबूत बनाने, जनसंपर्क अभियान को गति देने तथा आगामी राजनीतिक गतिविधियों को लेकर विस्तार से चर्चा की गई। क्षेत्रीय संगठन मंत्री नागेन्द्र ने कार्यकर्ताओं से संगठन की नीतियों को जन-जन तक पहुंचाने और बूथ स्तर तक पार्टी को मजबूत करने का आह्वान किया।कार्यक्रम में भाजपा के मंडल अध्यक्ष आकाश तिवारी क्षितिज प्रताप सिंह सत्येंद्र राजभर सहित सहित कई वरिष्ठ पदाधिकारी, मंडल एवं सेक्टर प्रभारी, युवा कार्यकर्ता तथा स्थानीय जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। क्षेत्रीय संगठन मंत्री के आगमन को भाजपा कार्यकर्ताओं ने संगठन के लिए प्रेरणादायक बताया।
जमीन मालिक की गैरमौजूदगी का उठाया फायदा
मृतक के नाम पर फर्जी व्यक्ति खड़ा कर कराई रजिस्ट्री
डीएम से गुहार के बाद प्रेस क्लब में फूटा परिवार का दर्द, निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग
गोरखपुर(राष्ट्र की परम्परा)
जनपद में जमीन से जुड़े कथित फर्जीवाड़े का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने न केवल रजिस्ट्री प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि प्रशासनिक तंत्र की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर चिंता जताई है। आरोप है कि वर्ष 1996 में मृत हो चुके बृज गोपाल दास शाह के नाम पर वर्ष 2016 में जमीन की रजिस्ट्री कराई गई। इस पूरे प्रकरण में सविता त्रिपाठी का नाम सामने आ रहा है, जिन पर मृत व्यक्ति को जीवित दिखाकर संपत्ति अपने नाम कराने का आरोप लगाया गया है।
मामला कैंपियरगंज क्षेत्र के अलगटपुर स्थित लगभग चार एकड़ मूल्यवान जमीन से जुड़ा हुआ है। पीड़ित परिवार का कहना है कि जमीन के वास्तविक मालिक उस समय अन्य प्रदेश में नौकरी कर रहे थे, जिसका फायदा उठाकर कथित रूप से यह फर्जीवाड़ा किया गया। आरोप है कि मृतक के नाम से मिलता-जुलता एक व्यक्ति खड़ा कर रजिस्ट्री प्रक्रिया पूरी कराई गई।
परिजनों के अनुसार, बृज गोपाल दास शाह की मृत्यु वर्ष 1996 में हो चुकी थी, जिसका प्रमाण सरकारी अभिलेखों में दर्ज है। इसके बावजूद वर्ष 2016 में “बृज गोपाल” नाम के आधार पर रजिस्ट्री कराई गई। उनका कहना है कि दस्तावेजों में नाम की समानता का लाभ उठाकर और पहचान संबंधी कागजातों में हेरफेर कर यह पूरा खेल रचा गया।
परिवार का यह भी कहना है कि इस मामले की जांच पूर्व में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक स्तर से कराई जा चुकी है, जिसमें यह पुष्टि हो चुकी है कि “बृज गोपाल दास” और “बृज गोपाल दास शाह” एक ही व्यक्ति हैं और उनकी मृत्यु 1996 में ही हो गई थी। ऐसे में 2016 में उनके नाम से रजिस्ट्री होना गंभीर सवाल खड़े करता है।
न्याय की मांग को लेकर मृतक के परिजन—पोता, पोती, दामाद एवं अन्य परिजन—जिलाधिकारी दीपक मीणा से मिल चुके हैं और पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग की है। परिजनों ने डीएम को दिए गए प्रार्थना पत्र में फर्जी रजिस्ट्री को निरस्त करने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की अपील की है।
इसके बाद गोरखपुर जर्नलिस्ट्स प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस वार्ता में विजय कृष्ण गर्ग, प्रियमबदा गर्ग, महेंद्र अग्रवाल और सुरेंद्र अग्रवाल सहित अन्य परिजन मौजूद रहे। प्रेस वार्ता के दौरान परिजनों ने भावुक होते हुए कहा, “अगर हमारे मृत बाबा जिंदा हैं, तो उन्हें सामने लाकर खड़ा कर दीजिए। जिनका हमने वर्ष 1996 में अंतिम संस्कार किया, वह अचानक 2016 में जिंदा कैसे हो गए?”
पीड़ित परिवार ने इस पूरे प्रकरण में राजेश यादव पुत्र बैजनाथ यादव, निवासी तिलक नगर, गोरखनाथ को मास्टरमाइंड बताते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि पूरे फर्जीवाड़े की साजिश रचने और उसे अंजाम तक पहुंचाने में उक्त व्यक्ति की मुख्य भूमिका रही है।
पीड़ित परिवार ने मांग की है कि पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए और दोषियों पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह के मामलों पर प्रभावी रोक लग सके।
नपा अध्यक्ष श्वेता जायसवाल के सफलता के तीन वर्ष पूर्ण
नपा अध्यक्ष ने विकास के नए कीर्तिमान स्थापित किये
बरहज/देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)
बुधवार 13/05/2026 को नपा अध्यक्ष श्वेता जायसवाल ने बरहज नगरपालिका क्षेत्र मे विकास के नए कीर्तिमान स्थापित करते हुए सफलता के तीन वर्ष पूर्ण किये।
बताते चले कि नगर पालिका परिषद गौरा बरहज में जनसेवा, विकास एवं नगरहित को समर्पित सफल तीन वर्ष का कार्यकाल पूर्ण हुआ।
यह तीन वर्ष केवल एक कार्यकाल नहीं, बल्कि नगर के विकास, जनता के विश्वास एवं निरंतर जनसेवा के संकल्प की एक महत्वपूर्ण यात्रा रहा हैं।
इन वर्षों में शासन की विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत नगर क्षेत्र के समग्र विकास हेतु अनेक महत्वपूर्ण एवं जनहितकारी कार्य कराए गए। नगर की मूलभूत सुविधाओं को मजबूत बनाने के उद्देश्य से सड़क, नाली, पुलिया, जल निकासी, इंटरलॉकिंग, स्ट्रीट लाइट, घाट निर्माण, तालाब संरक्षण, पार्क सौंदर्यीकरण, सामुदायिक भवन एवं स्वच्छता से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता दी गई।
लगभग 85 करोड़ रुपये से अधिक लागत की विभिन्न विकास योजनाओं को, स्वीकृति दिलाने एवं उन्हें धरातल पर उतारने की दिशा में निरंतर प्रयास किया गया। मुख्यमंत्री नगर सृजन योजना, अमृत योजना, पेयजल व्यवस्था योजना, पण्डित दीनदयाल उपाध्याय नगर विकास योजना, नगरीय सीवरेज एवं जलनिकासी योजना, नगरीय झील/तालाब/पोखरा संरक्षण योजना, अवस्थापना विकास निधि, 15वीं वित्त आयोग एवं राज्य वित्त आयोग सहित विभिन्न योजनाओं के माध्यम से नगर के सभी वार्डों में सी.सी. रोड निर्माण, मुख्य मार्गों का चौड़ीकरण, आर.सी.सी. नाला निर्माण, जल निकासी व्यवस्था सुदृढ़ीकरण, पेयजल पाइप लाइन विस्तार, इंटरलॉकिंग सड़कें, घाट निर्माण, बहुप्रतीक्षित रेलवे सड़क व गौरा सड़क (दोनों सड़क कार्य प्रगति पर है) एवं सार्वजनिक स्थलों के सौंदर्यीकरण जैसे महत्वपूर्ण कार्य कराए गए।
नगर में स्वच्छता व्यवस्था को बेहतर बनाने हेतु नियमित सफाई अभियान, डोर-टू-डोर कूड़ा संग्रहण एवं जनजागरूकता कार्यक्रम संचालित किए गए। साथ ही नगरवासियों की समस्याओं के त्वरित समाधान हेतु लगातार स्थलीय निरीक्षण, जनसंपर्क एवं अधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित कर विकास कार्यों की गुणवत्ता एवं पारदर्शिता सुनिश्चित करने का प्रयास किया गया।
नगरपालिका अध्यक्ष श्वेता जायसवाल का यह कार्यकाल केवल जनप्रतिनिधि के रूप में अपनी जिम्मेदारी निभाने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि नगर की सम्मानित जनता के साथ आत्मीय जुड़ाव, विश्वास एवं सहभागिता का भी प्रतीक बना। नगरवासियों ने हर परिस्थिति में इन्हें अपना स्नेह, सहयोग एवं आशीर्वाद देकर इनको निरंतर जनसेवा के लिए प्रेरित किया। जनता का यही विश्वास सबसे बड़ी पूंजी एवं कार्य करने की ऊर्जा है।
श्वेता जायसवाल ने कहा कि नगर की सम्मानित जनता, वरिष्ठजनों, कर्मचारियों, सभासदगण, सामाजिक संगठनों एवं सभी सहयोगियों का अध्यक्ष हृदय से आभार व्यक्त करती हूँ और धन्यवाद ज्ञापित करती हूँ। आप लोगो के सहयोग एवं मार्गदर्शन से विकास की इस यात्रा पर निरंतर आगे बढ़ती रही हूँ ।
उन्होंने कहा कि मेरा प्रयास केवल निर्माण कार्य कराना नहीं, बल्कि गौरा बरहज को एक स्वच्छ, सुंदर, व्यवस्थित एवं विकसित नगर के रूप में स्थापित करना है। उन्होंने कहा कि नगरहित, जनकल्याण एवं विकास कार्य इसी संकल्प के साथ पूरी निष्ठा, ईमानदारी एवं प्रतिबद्धता से कार्य संपादित किये जाएंगे।
आप सभी का स्नेह, विश्वास एवं आशीर्वाद सदैव इसी प्रकार बना रहे।
अवैध मिट्टी खनन पर प्रशासन का बड़ा प्रहार, संयुक्त छापेमारी में दो वाहन सीज
पुरन्दरपुर पुलिस और राजस्व विभाग की कार्रवाई से खनन माफियाओं में मचा हड़कंप
महराजगंज(राष्ट्र की परम्परा)। जनपद में अवैध मिट्टी खनन के खिलाफ प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए मंगलवार को बड़ी कार्रवाई की। थाना पुरन्दरपुर पुलिस एवं राजस्व विभाग की संयुक्त टीम ने ग्राम झामट में छापेमारी कर अवैध रूप से संचालित मिट्टी खनन के खेल का खुलासा किया। कार्रवाई के दौरान मिट्टी लदी एक ट्रैक्टर- ट्रॉली तथा एक लोडर सहित ट्रैक्टर को कब्जे में लेकर सीज कर दिया गया। इस कार्रवाई के बाद क्षेत्र में खनन माफियाओं में हड़कंप की स्थिति बनी रही।
पुलिस अधीक्षक शक्ति मोहन अवस्थी द्वारा जनपद भर में अवैध खनन के विरुद्ध चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत यह कार्रवाई की गई। अपर पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ एवं क्षेत्राधिकारी फरेन्दा के पर्यवेक्षण में थाना पुरन्दरपुर पुलिस और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम ने ग्राम झामट में सघन चेकिंग अभियान चलाया।
बताया जा रहा है कि प्रशासन को लंबे समय से क्षेत्र में अवैध मिट्टी खनन की शिकायतें मिल रही थीं। शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए संयुक्त टीम ने मौके पर पहुंच कर छापेमारी की, जहां बिना अनुमति मिट्टी की खुदाई और परिवहन किया जा रहा था। टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए अवैध खनन में प्रयुक्त एक ट्रैक्टर-ट्रॉली, जिसमें मिट्टी लदी हुई थी, तथा एक ट्रैक्टर के साथ लोडर मशीन को कब्जे में ले लिया।
कार्रवाई के दौरान मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। पुलिस और राजस्व टीम को देख कर कई लोग मौके से फरार हो गए। संयुक्त टीम ने दोनों वाहनों को थाना पुरन्दरपुर लाकर खड़ा कराया और आवश्यक कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी। साथ ही पूरे मामले की रिपोर्ट अग्रिम कार्रवाई के लिए खनन विभाग को भी भेज दी गई है।
प्रशासनिक अधिकारियों ने स्पष्ट कहा है कि जनपद में अवैध खनन किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अवैध रूप से मिट्टी खनन कर सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई लगातार जारी रहेगी। अधिकारियों ने यह भी कहा कि आने वाले दिनों में ऐसे अभियान और तेज किए जाएंगे।
स्थानीय ग्रामीणों ने प्रशासन की इस कार्रवाई की सराहना करते हुए कहा कि अवैध मिट्टी खनन के कारण ग्रामीण सड़कों को भारी नुकसान पहुंच रहा था। भारी वाहनों के संचालन से सड़कें जर्जर हो रही थीं, वहीं खेतों और पर्यावरण पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा था। लोगों ने प्रशासन से नियमित रूप से ऐसे अभियान चलाने की मांग की है ताकि अवैध खनन पर पूरी तरह रोक लग सके।
संयुक्त कार्रवाई में शामिल
राजस्व विभाग की टीम में
अंकित अग्रवाल, नायब तहसीलदार फरेंदा
सूरज कुमार, राजस्व लेखपाल फरेंदा
पुलिस टीम में
उप-निरीक्षक अजय यादव,उप-निरीक्षक देवेश प्रताप सिंह,कांस्टेबल सुनेन्द्र कुमार,कांस्टेबल आदित्य यादव,रिजर्व कांस्टेबल फिरोज
रिजर्व आरक्षी शुभम पाल शामिल रहें।
शादी मे आया व्यक्ति छत से गिरकर गंभीर तथा सड़क दुर्घटना मे तीन युवक घायल
बरहज,/देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)
थाना क्षेत्र के एक गाँव मे मंगलवार को शादी मे आया व्यक्ति छत से गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गया, वही शादी मे जा रहे तीन युवक कपरवार के पास अनियंत्रित बाईक की ठोकर से घायल हो गये। प्राथमिक उपचार के बाद सभी को जिला अस्पताल देवरिया रेफर कर दिया गया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार बरहज थाना क्षेत्र के एक गाँव मे आये ग्राम अमेठी,देवरिया नीवासी राइफार राजभर 50,पुत्र स्व गिरधारी राजभर का मंगलवार की रात छत से गिरने पर गंभीर रूप से घायल हो गए, आनन फानन मे परिजन उन्हें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बरहज लाये जहाँ डॉक्टर ने प्राथमिक ईलाज कर, महर्षि देवरहवा बाबा मेडिकल कॉलेज देवरिया रेफर कर दिया। वही मंगलवार की रात शादी मे अपनी बाईक जा रहे बरहज थाना क्षेत्र के ग्राम पलिया निवासी तीन युवक, पवन पुत्र विजय 17, राका पुत्र नगीना 23, किशन पुत्र घुरा 16 वर्ष, अभी वें लोग कपरवार पहुँचे थे कि सामने से आ रही अनियंत्रित दो पहिया वाहन कि ठोकर से घायल हो गए। स्थानीय लोगो की मदद से उन्हें सीएचसी बरहज पहुंचाया गया जहाँ डॉक्टर ने प्राथमिक उपचार कर जिला अस्पताल देवरिया रेफर कर दिया।
सांध्य ‘नित्य हलचल’ पर पीएचडी बनी विश्व का प्रथम शोधकार्य
शोधार्थी डॉ. मुकुट अग्रवाल के नाम दर्ज हुआ विश्व-रिकार्ड
नारनौल/हरियाणा(राष्ट्र की परम्परा)
हरियाणा की हिंदी-पत्रकारिता के विकास में ‘नित्य हलचल’ की भूमिका’ विषय पर सिंघानिया विश्वविद्यालय, पचेरी बड़ी (राजस्थान) से पीएचडी करने वाले शोधार्थी मुकुट अग्रवाल का नाम विश्व के किसी भी सांध्य हिंदी-दैनिक पर पीएचडी करने वाले प्रथम शोधार्थी के रूप में गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज हो गया है। इसके साथ ही, ‘नित्य हलचल’ विश्व का प्रथम सांध्य हिंदी-दैनिक बन गया है, जिस पर पीएचडी हुई है तथा सिंघानिया विश्वविद्यालय विश्व का प्रथम विश्वविद्यालय बन गया है, जहाँ यह शोधकार्य संपन्न हुआ है। गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स प्रबंधन द्वारा प्रदत्त प्रमाण-पत्र, मैडल, प्रतीक-चिह्न और टीशर्ट शोधार्थी डॉ. मुकुट अग्रवाल को भेंटकर सम्मानित करते हुए, सिंघानिया विश्वविद्यालय के कुलपति तथा भारतीय प्रशासनिक सेवा के पूर्व अधिकारी डॉ. मनोजकुमार गर्ग ने कहा कि डॉ. मुकुट अग्रवाल की यह विशिष्ट उपलब्धि सिंघानिया विश्वविद्यालय के लिए भी बड़े गौरव और गर्व का विषय है। उन्होंने विश्वास दिलाया कि हमारा विश्वविद्यालय नवाचार को इसी प्रकार प्राथमिकता और प्रोत्साहन देता रहेगा। आचार्य एवं सांस्कृतिक संकाय अधिष्ठाता तथा विख्यात साहित्यकार डॉ. रामनिवास ‘मानव’ ने भी, इस महत्त्वपूर्ण उपलब्धि हेतु डॉ. मुकुट अग्रवाल को बधाई देते हुए, स्पष्ट किया कि ‘नित्य हलचल’ जैसे किसी सांध्य हिंदी-दैनिक पर पीएचडी होना सचमुच एक ऐतिहासिक घटना है। उन्होंने आशा प्रकट की कि इससे पत्रकारिता के विकास में सांध्यकालीन समाचार-पत्रों की भूमिका और उनके योगदान के महत्त्व को रेखांकित करने में सहायता मिलेगी। इस अवसर पर आयोजित संक्षिप्त कार्यक्रम में 20वीं शताब्दी के अंतिम दशक में हिसार से प्रकाशित ‘नित्य हलचल’ की संपादक रही और वर्तमान में नारनौल निवासी डॉ. कांता भारती, शोध-निर्देशक डॉ. आरती प्रजापति, उपकुलपति डॉ. पवन त्रिपाठी, कुलसचिव एमआई हाशमी, शोध-अधिष्ठाता डॉ. सुमेर सिंह, मीडिया-संकाय अधिष्ठाता डॉ. मनोज वर्गीज, लोक-संपर्क अधिकारी डॉ. मोनिका सैनी तथा ऋतु मुकुट अग्रवाल की उपस्थिति उल्लेखनीय रही। ज्ञातव्य है कि उक्त शोध-प्रबंध प्रकाशित होकर शीघ्र ही पाठकों को उपलब्ध होने जा रहा है।
नीट संकट और परीक्षा-व्यवस्था की विश्वसनीयता
पारदर्शिता के नाम पर बार-बार टूटता भरोसा, और सुधार की अनिवार्य चुनौती
नीट-2026 को लेकर उत्पन्न अनिश्चितता और रद्दीकरण संबंधी आशंकाओं ने लाखों विद्यार्थियों और अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है। प्रतियोगी परीक्षाएँ केवल चयन की प्रक्रिया नहीं, बल्कि युवाओं के भविष्य, परिश्रम और विश्वास का आधार होती हैं। यदि परीक्षा-प्रणाली पर बार-बार सवाल उठते हैं, तो इसका सबसे बड़ा असर ईमानदारी से तैयारी करने वाले छात्रों पर पड़ता है। ऐसी स्थिति में प्रशासन की जिम्मेदारी केवल परीक्षा आयोजित करने तक सीमित नहीं रहती, बल्कि पारदर्शिता, समयबद्ध सूचना और निष्पक्षता सुनिश्चित करना भी उतना ही आवश्यक हो जाता है। परीक्षा-व्यवस्था में भरोसा बनाए रखना किसी भी लोकतांत्रिक शिक्षा-तंत्र की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।
भारत की प्रतियोगी परीक्षा-व्यवस्था केवल प्रवेश की प्रक्रिया नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय, अवसर और प्रतिभा-परीक्षण का आधार है। जब राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा यानी नीट जैसी राष्ट्रीय परीक्षा को लेकर अनियमितता, संदिग्धता या रद्दीकरण की स्थिति बनती है, तो केवल एक परीक्षा प्रभावित नहीं होती, बल्कि लाखों विद्यार्थियों का भरोसा, समय और मानसिक संतुलन भी टूटता है। परीक्षा किसी तकनीकी आयोजन भर का नाम नहीं है; यह उस भरोसे का प्रतीक है जिसमें राज्य यह सुनिश्चित करता है कि परिश्रम, योग्यता और तैयारी का उचित मूल्य मिलेगा। इसलिए परीक्षा-प्रणाली की विश्वसनीयता किसी भी लोकतांत्रिक शिक्षा-व्यवस्था की रीढ़ होती है।
नीट जैसे मामलों में सबसे चिंताजनक तथ्य केवल यह नहीं कि कोई एक घटना घट गई, बल्कि यह है कि ऐसी घटनाएँ बार-बार क्यों सामने आती हैं। जब कोई राष्ट्रीय परीक्षा संदेह के घेरे में आती है, तो पूरा सार्वजनिक विश्वास डगमगाने लगता है। विद्यार्थी, अभिभावक, शिक्षक, कोचिंग संस्थान और प्रशासन—सभी एक ऐसे प्रश्न से जूझते हैं जिसका उत्तर केवल प्रेस विज्ञप्तियों से नहीं मिल सकता। प्रश्न यह है कि क्या हमारी परीक्षा-व्यवस्था वास्तव में इतनी मजबूत है कि वह पारदर्शिता, निष्पक्षता और सुरक्षा—तीनों मोर्चों पर एक साथ टिक सके? यदि नहीं, तो समस्या केवल एक परीक्षा की नहीं, बल्कि पूरे तंत्र की है।
परीक्षा-व्यवस्था का संकट अचानक पैदा नहीं होता। यह उन छोटी-छोटी कमजोरियों से बनता है जिन्हें समय रहते ठीक नहीं किया जाता। प्रश्नपत्र निर्माण की प्रक्रिया, गोपनीय सामग्री का संरक्षण, लॉजिस्टिक ट्रांसपोर्ट, परीक्षा केंद्रों की निगरानी, तकनीकी सत्यापन, पहचान-प्रक्रिया और उत्तर-पत्रों की हैंडलिंग—इन सभी स्तरों पर यदि एक भी कड़ी कमजोर हो जाए, तो पूरी व्यवस्था संदेह के घेरे में आ सकती है। आधुनिक समय में परीक्षा केवल कागज और कलम का आयोजन नहीं रह गई है; वह सूचना, सुरक्षा और नियंत्रण के अत्यंत जटिल नेटवर्क से जुड़ी प्रणाली बन चुकी है। इसलिए किसी भी स्तर पर हुई लापरवाही का सीधा प्रभाव छात्रों के भविष्य पर पड़ता है।
यह भी समझना होगा कि परीक्षा-प्रणाली में भरोसा केवल पारदर्शिता से नहीं बनता, बल्कि निरंतरता से बनता है। यदि विद्यार्थी को यह आश्वासन न हो कि उसकी मेहनत का मूल्य स्थिर और सुरक्षित है, तो उसकी तैयारी अनिश्चितता में बदल जाती है। एक ईमानदार छात्र परीक्षा केंद्र तक पहुँचने से पहले ही मन में कई प्रश्न लेकर आता है—क्या प्रश्नपत्र सुरक्षित रहेगा? क्या कोई अनुचित लाभ नहीं ले जाएगा? क्या पूरी प्रक्रिया निष्पक्ष होगी? जब ऐसे प्रश्न सामान्य हो जाएँ, तब समझ लेना चाहिए कि संकट केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि नैतिक भी है। शिक्षा का मूल उद्देश्य अवसर की समानता है, और यदि वही कमजोर पड़ जाए, तो व्यवस्था अपने उद्देश्य से भटक जाती है।
राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा जैसी परीक्षा में यह चिंता और अधिक गंभीर हो जाती है, क्योंकि यह केवल एक पेशेवर प्रवेश-परीक्षा नहीं, बल्कि लाखों परिवारों के सामाजिक-आर्थिक सपनों का केंद्र है। ग्रामीण क्षेत्रों के छात्र, निम्न-मध्यम वर्ग के अभ्यर्थी और छोटे शहरों के युवा सीमित संसाधनों के बावजूद अपनी योग्यता के बल पर आगे बढ़ने का सपना देखते हैं। लेकिन जब परीक्षा की शुचिता पर प्रश्न उठते हैं, तब सबसे अधिक नुकसान इन्हीं विद्यार्थियों का होता है। जिनके पास प्रभाव, संसाधन या नेटवर्क है, वे कई बार व्यवस्था की कमजोरियों से निकल जाते हैं; पर जिनके पास केवल मेहनत है, वे सबसे अधिक प्रभावित होते हैं। इसलिए परीक्षा की पारदर्शिता केवल प्रशासनिक सुधार नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय का भी प्रश्न है।
परीक्षा-व्यवस्था का संकट विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी गहरा असर डालता है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी पहले ही अत्यधिक तनावपूर्ण होती है। छात्र लंबे समय तक कठोर अनुशासन, सीमित सामाजिक जीवन, पारिवारिक अपेक्षाओं और भविष्य की अनिश्चितता के बीच रहते हैं। जब ऐसी स्थिति में परीक्षा का भविष्य ही संदिग्ध हो जाए, तो मानसिक दबाव कई गुना बढ़ जाता है। कुछ विद्यार्थी हताश हो जाते हैं, कुछ अपनी रणनीति बार-बार बदलते हैं, और कुछ गहरे अवसाद में भी चले जाते हैं। इसलिए परीक्षा-प्रशासन को यह समझना चाहिए कि वह केवल तिथियाँ घोषित करने या केंद्र स्थापित करने का काम नहीं कर रहा, बल्कि युवाओं के भविष्य का भरोसा संभाल रहा है।
डिजिटल युग ने परीक्षा-प्रशासन को सुविधाएँ भी दी हैं और नई चुनौतियाँ भी। ऑनलाइन पंजीकरण, डिजिटल पहचान, सीसीटीवी निगरानी, एन्क्रिप्टेड डेटा और केंद्रीकृत नियंत्रण जैसी व्यवस्थाओं ने परीक्षा प्रणाली को आधुनिक बनाया है। लेकिन इसी के साथ तकनीकी जोखिम भी बढ़े हैं। डेटा लीक, सॉफ्टवेयर में छेड़छाड़, आंतरिक मिलीभगत, साइबर घुसपैठ और गलत सूचना का प्रसार—ये सभी नई चुनौतियाँ बनकर सामने आए हैं। इसलिए केवल तकनीक अपनाना पर्याप्त नहीं है; उसकी सुरक्षा, ऑडिट और जवाबदेही भी उतनी ही मजबूत होनी चाहिए। यदि तकनीक ही कमजोर हो जाए, तो पारदर्शिता का दावा खोखला साबित होगा।
परीक्षा-व्यवस्था में सुधार के लिए सबसे पहले जवाबदेही तय करनी होगी। जब कोई परीक्षा विवाद में आती है, तो अक्सर ध्यान केवल घटना पर केंद्रित रहता है। लेकिन असली प्रश्न यह है कि उस घटना की अनुमति किसकी लापरवाही से मिली। परीक्षा-आयोजक संस्था, संबंधित मंत्रालय, सुरक्षा एजेंसियाँ, केंद्र-स्तरीय अधिकारी और स्थानीय प्रशासन—सभी की भूमिका की समीक्षा आवश्यक है। जवाबदेही का अर्थ केवल किसी एक अधिकारी को हटाना नहीं, बल्कि पूरे ढाँचे का पुनर्मूल्यांकन करना है। यदि दोषी पकड़े नहीं जाते, प्रक्रिया की कमियाँ सार्वजनिक नहीं होतीं और सुधारात्मक कदम नहीं उठाए जाते, तो हर बार वही संकट दोहराया जाएगा।
दूसरी आवश्यकता स्वतंत्र और समयबद्ध ऑडिट की है। प्रश्नपत्र निर्माण से लेकर परीक्षा-समापन तक हर चरण का सुरक्षित रिकॉर्ड होना चाहिए। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की स्थिति में तत्काल जांच संभव हो, इसके लिए ऐसा तंत्र चाहिए जो पारदर्शी भी हो और तेज भी। साथ ही परीक्षा-प्रबंधन में बहुस्तरीय निगरानी व्यवस्था विकसित करनी होगी, जहाँ कोई एक व्यक्ति या विभाग पूरी प्रक्रिया पर एकाधिकार न रखे। नियंत्रण का विकेंद्रीकरण और निगरानी का केंद्रीकरण—यही संतुलन सुरक्षित परीक्षा-तंत्र की आधारशिला बन सकता है।
तीसरी आवश्यकता विश्वसनीय संवाद व्यवस्था की है। सोशल मीडिया के दौर में अफवाहें बहुत तेजी से फैलती हैं। ऐसे में संस्थाओं को केवल सही सूचना ही नहीं, बल्कि समय पर सूचना भी देनी चाहिए। अस्पष्टता संदेह को जन्म देती है। यदि छात्रों को यह स्पष्ट न हो कि अगला कदम क्या होगा, परिणाम कब आएगा, या पुनर्परीक्षा होगी या नहीं, तो वे अनावश्यक तनाव में घिर जाते हैं। इसलिए परीक्षा-प्रशासन को अपने संवाद को औपचारिकता से निकालकर भरोसेमंद सार्वजनिक सेवा में बदलना होगा।
चौथी और सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता कठोर और निश्चित दंड व्यवस्था की है। प्रश्नपत्र लीक, जालसाजी, सेंधमारी या आंतरिक सहयोग जैसी अनियमितताओं पर केवल नैतिक निंदा पर्याप्त नहीं है। जब तक अपराधियों को त्वरित और निश्चित दंड नहीं मिलेगा, तब तक व्यवस्था में सुधार अधूरा रहेगा। शिक्षा-क्षेत्र में दंड का उद्देश्य प्रतिशोध नहीं, बल्कि निवारण होना चाहिए। व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए कि अनियमितता करने वाला यह समझ सके कि उसे लाभ नहीं, बल्कि त्वरित क्षति मिलेगी। तभी ईमानदार विद्यार्थी को यह भरोसा मिलेगा कि उसकी मेहनत सुरक्षित है।
भारत को अब ऐसी परीक्षा-संस्कृति की आवश्यकता है जिसमें छात्र को शक नहीं, सुरक्षा का अनुभव हो; जिसमें प्रशासन केवल आदेश देने वाला नहीं, बल्कि उत्तरदायी संरक्षक बने; और जिसमें पारदर्शिता केवल शब्दों में नहीं, बल्कि हर प्रक्रिया में दिखाई दे। यही वह मार्ग है जिससे शिक्षा-व्यवस्था पर लौटता विश्वास संभव हो सकता है। यदि सुधार अभी नहीं किए गए, तो हर नई परीक्षा पुराने संदेहों की पुनरावृत्ति बनती रहेगी। और जब भरोसा बार-बार टूटता है, तो केवल एक परीक्षा नहीं, बल्कि एक पीढ़ी का आत्मविश्वास भी आहत होता है।
इसलिए नीट संकट को केवल एक घटना मानकर भूल जाना समाधान नहीं होगा। इसे एक चेतावनी की तरह समझना होगा। यह चेतावनी है कि यदि परीक्षा-व्यवस्था को तकनीकी चमक, औपचारिक घोषणाओं और तात्कालिक प्रतिक्रियाओं के भरोसे छोड़ दिया गया, तो भविष्य में संकट और गहरे होंगे। अब समय आ गया है कि परीक्षा-व्यवस्था को केवल नियंत्रण का नहीं, बल्कि न्याय, विश्वास और जवाबदेही का संस्थान बनाया जाए। यही सुधार आने वाली पीढ़ियों के लिए आवश्यक है और वर्तमान विद्यार्थियों के प्रति राज्य की नैतिक जिम्मेदारी भी।
डॉo सत्यवान सौरभ
कवि एवं सामाजिक विचारक
साइबर ठगी के शिकार युवक को मिली बड़ी राहत, पुलिस ने वापस कराए 65 हजार रुपये
थाना चौक साइबर सेल की तत्परता से पीड़ित के खाते में लौटी धनराशि, पुलिस टीम की हो रही सराहना
महराजगंज(राष्ट्र की परम्परा)। जनपद के थाना चौक क्षेत्र में साइबर ठगी का शिकार हुए एक युवक को पुलिस की सक्रियता और त्वरित कार्रवाई के चलते बड़ी राहत मिली है। थाना चौक साइबर सेल टीम ने प्रभावी प्रयास करते हुए ठगी गई धनराशि में से 65,481 रुपये पीड़ित के खाते में वापस करा दिए। इस सराहनीय कार्यवाही से आमजन में पुलिस के प्रति विश्वास और मजबूत हुआ है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार थाना चौक क्षेत्र के चैनपुर निवासी चित्रांगद चौरसिया पुत्र सिब्बन लाल वर्मा के साथ ऑन-लाइन फ्रॉड के माध्यम से 95,481 रुपये की साइबर ठगी कर ली गई थी। ठगी का एहसास होते ही पीड़ित ने तत्काल ऑन-लाइन शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद मामला थाना चौक साइबर सेल के संज्ञान में आया।
पुलिस अधीक्षक शक्ति मोहन अवस्थी के निर्देश पर थाना चौक साइबर सेल टीम ने मामले को गंभीरता से लेते हुए त्वरित कार्रवाई शुरू की। साइबर तकनीकी जांच एवं आवश्यक विधिक प्रक्रिया अपनाते हुए टीम ने संबंधित माध्यमों से संपर्क कर धनराशि को होल्ड कराया। लगातार प्रयासों और पीड़ित की सजगता के परिणामस्वरूप 65,481 रुपये सफलतापूर्वक पीड़ित के बैंक खाते में वापस करा दिए गए।
धनराशि वापस मिलने पर पीड़ित एवं उसके परिजनों ने महराजगंज पुलिस का आभार व्यक्त किया। वहीं क्षेत्र में साइबर सेल की इस कार्रवाई की व्यापक सराहना की जा रही है। पुलिस अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि किसी भी प्रकार की ऑन-लाइन ठगी होने पर तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 अथवा संबंधित थाने में शिकायत दर्ज कराएं, ताकि समय रहते प्रभावी कार्रवाई की जा सके।
इस कार्यवाही मे
उप-निरीक्षक अंकित कुमार राय,कंप्यूटर ऑपरेटर ग्रेड-ए प्रिया सिंह,कांस्टेबल विशाल प्रजापति, की अहम भूमिका रही।
पुलिस की इस त्वरित एवं सफल कार्रवाई ने यह साबित कर दिया है कि जागरूकता और समय पर शिकायत दर्ज कराने से साइबर अपराधों में ठगी गई धनराशि वापस पाना संभव है।
सड़क और नाली की समस्या से जूझ रही केवटलिया की जनता
सड़क के धंसने से हादसों का खतरा
बरहज/देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)
नगरपालिका स्थित केवटलिया की जनता सड़क और बजबजाती नाली की समस्या से परेशान हैं।
देई माता मंदिर के सामने से केवटलिया पूरब को जाने वाली प्रमुख सड़क काफ़ी हद तक धंस गई है, जगह-जगह गहरे गड्ढे होने से बाइक और चार पहिया वाहनों का निकलना मुश्किल हो गया है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि आए दिन वाहन पलट जाते हैं और लोग घायल हो जाते हैं। बरसात में स्थिति और खराब हो जाती है। लोगो ने कहा की नगर पालिका से कई बार सड़क बनवाने की गुहार लगाई गई, लेकिन आज तक कोई कार्यवाही नहीं हुई।
केवटलिया के घुरा प्रसाद, स्नेही राजभर, शिवजीत और हृदया पाण्डेय ने शीघ्र सड़क निर्माण की मांग की है। वहीं सरवन पाण्डेय ने बताया कि सफाई कर्मि कभी नाली की सफाई नही करते है । उन्होंने कहा की नाली जाम होने से गंदा पानी सड़क पर फैल रहा है। इससे बीमारियों के फैलने की आशंका बनी हुई है।
पूछे जाने पर अधिशासी अधिकारी निरुपमा प्रताप ने बताया कि सड़के प्रस्तावित हैं नाली की सफाई के लिए कर्मचारियों को भेज कर तत्काल समस्या का समाधान करा दिया जाएगा।
पुरुषोत्तम मास के स्वामी हैं भगवान विष्णु – आचार्य अजय
17 मई रविवार से शुरू होकर 15 जून सोमवार तक रहेगा पुरुषोत्तम मास
सलेमपुर, देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)। भगवान विष्णु के अर्चना और पूजन को समर्पित पुरुषोत्तम मास जिसे अधिक मास भी कहते हैं, इसे भगवान विष्णु की भक्ति के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इस साल इस महीने की शुरुआत 17 मई दिन रविवार को हो रहा है ,समापन 15 जून सोमवार को होगा। उक्त बातें बताते हुए आचार्य अजय शुक्ल ने कहा कि इस महीने में शुभ कार्य जैसे विवाह, गृह प्रवेश, उपनयन संस्कार जैसे मांगलिक कार्य वर्जित माना जाता है।लेकिन पूजा, जप,तप और दान का करोड़ गुना अधिक शुभ फल प्राप्त होता है।पौराणिक कथाओं के अनुसार इस अधिक मास के स्वामी स्वयं भगवान विष्णु हैं इस लिए इसे पुरुषोत्तम मास कहते हैं।यह महीना हिन्दू पंचांग और ऋतु के संतुलन के लिए होता है।चंद्र और सौर वर्ष के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए अधिक मास 30 दिनों का समय जोड़ता है,जो ऋतुओं के अनुसार सही समय की गणना सुनिश्चित करता है।
आचार्य अजय शुक्ल ने बताया कि यह महीना सत्कर्म और मुक्ति का मार्ग प्रशस्त करने वाला है।इस साल यह ज्येष्ठ मास में लग रहा है तो इसे अधिक ज्येष्ठ मास भी कहेंगे।
श्रीराम कथा एवं भागवत कथा का भव्य आयोजन 17मई से
बरहज/देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)
नगरपालिका क्षेत्र केवटलिया स्थित हनुमान ज़ी की कुटी पर 17 मई से श्रीमद् भागवत कथा का भव्य आयोजन होगा एवं दिव्य कथा का समापन 24 मई को होगा।
ततपश्चात 25 जून से श्रीराम कथा के साथ सुंदरकांड का विधिवत पाठ आयोजित किया जा रहा है, इसको लेकर भव्य आयोजन की तैयारी जोरों पर चल रही है।
मंदिर के प्रमुख पुजारी केशरी दास ने बताया कि यह पूरा आयोजन भक्तिभाव के माहौल के साथ संपन्न होगा। उन्होंने कहा कि धरती माँ भक्तो की भक्ति के बल पर ही टिकी हुई है। इसलिए सभी श्रद्धालुओं से आग्रह है कि भगवान के इस दिव्य कार्यक्रम मे भारी संख्या में पहुंचकर कथा का श्रवण कर पुण्य लाभ अर्जित करें।
केशरी दास ने बताया कि कथा के दौरान प्रतिदिन हजारों श्रद्धालुओं के आने की संभावना है। इसके लिए मंदिर परिसर में पंडाल, पेयजल और बैठने की समुचित व्यवस्था की जा रही है।
वहीं पुजारी ने बताया कि मंदिर परिसर के दीवाल की जर्जर स्थिति पर चिंता जताई, कहा कि मंदिर की दीवाल का दक्षिणी हिस्सा काफी फट हो चुका है जो कभी भी गिर सकता है। यदि यह किसी श्रद्धालु पर गिरा तो बड़ा हादसा हो सकता है।
उन्होंने नगर के लोगों और शासन प्रशासन से मांग की है कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा को देखते हुए बाउंड्री के दीवाल की तत्काल मरम्मत कराई जाए। केशरी दास ने कथा में सहयोग के लिए क्षेत्र के सम्मानित जनमानस से अपील की है।
छुट्टी पर प्रधानमन्त्री मौज मस्ती में मोदी
आलेख-बादल सरोज
जितनी फुर्सत में भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी हैं, उतनी निश्चिन्तता और मौजमस्ती में दुनिया का शायद ही कोई राष्ट्र प्रमुख हो ।
पूरी दुनिया फिक्रमंद हुई पड़ी है, ट्रम्प और नेतन्याहू के थोपे गए ईरान युद्ध और लेबनान हमलों के प्रभावों और नतीजों का आंकलन कर रही है। होरमुज़ जलडमरूमध्य की पहले बंदी और अब अमरीकी नाकेबंदी के निहितार्थ को समझने में लगी हैं। उनके असरात से अपने-अपने देशों की अर्थव्यवस्थाओं को बचाने और संभालने के लिए रास्ते ढूँढने में जुटी है। आर्थिक जगत की वैश्विक संस्थाएं भारत की आर्थिक गति-प्रगति को लेकर सवाल पर सवाल खड़े कर रही हैं, जिनके जवाब देने और अगर वे सही हैं, तो जरूरी दुरुस्ती और सुधार करने के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय उनका इन्तजार कर रहा है, मगर लगता है देश के प्रधानमंत्री छुट्टी पर हैं और उस पद पर विराजे नरेंद्र मोदी वीतरागी, तटस्थ, निस्पृह भाव के साथ पूरी बेफिक्री से मौजमस्ती और सैर सपाटे में मशगूल हैं।
उनकी पिछले कुछ दिनों की ‘व्यस्तताओं’ पर ही नजर डालने से बात और साफ़ हो जाती है। जब केंद्र सरकार भारतीय नागरिकों के लिए किसी भी मार्ग से ईरान की यात्रा न करने की हिदायत जारी कर रही थी, भारत के झंडे लगे जहाज होरमुज़ में असमंजस में खड़े थे, अमरीकी नाकेबंदी ने उनकी सलामती खतरे में डाल दी थी, ऐसे में प्रधानमंत्री कहाँ थे? वे बंगाल चुनाव प्रचार के दौरान हुगली नदी में नाव में सचमुच की सैर करते हुए एक महंगे कैमरे से न जाने किसकी तस्वीरे खीचने का अभिनय कर रहे थे। ऐसा करते हुए हुए आठों आयामों पर तैनात अपने फोटोग्राफरों से अपनी ही तस्वीर उतरवा रहे थे।
इस फोटोशूट से फारिग होते ही वे सीधे गंगटोक जा पहुंचे और सिक्किम के 50वें राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर स्थानीय बच्चों के साथ स्पोर्ट्स जैकेट और जूतों में फुटबॉल खेलते हुए तस्वीरें खिंचवाई। उनकी सरकार की विज्ञप्तियों में इसे ऊर्जा से भरे मोदी का अवतार बताया गया। यहाँ से उड़कर वे अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी (बनारस) में अवतरित हुए, जहां वे अब तक 5 बार गंगा आरती में भाग लेते हुए फोटो भी खिंचवा चुके हैं और फिल्म भी बनवा चुके हैं। इस बार यहाँ दो दिन तक रुककर अनेक विशेष फोटो शूट करवाए और वीडियो बनवाये। महिलाओं के सम्मेलन में पहले भाषण देते हुए, फिर उनसे चर्चा करते हुए फोटो शूट का अगला चरण पूरा किया।
अगले दिन बनारस में ही 14 किलोमीटर लंबा रोड शो कर दिखाया। इस रोड शो में फूलों से सजी खुली गाड़ी में उनकी तस्वीरें और काशी की गलियों में लोगों का अभिवादन स्वीकार करते हुए उनके फोटोशूट सामने आए। रोड शो के समापन पर उन्होंने काशी विश्वनाथ के मन्दिर में हाजिरी लगाई।
मंदिर परिसर से बाहर निकलते समय उन्होंने सबसे मारक फोटो शूट कराया। शंकर के वेश में श्रृंगार करके एक हाथ में त्रिशूल और दूसरे में डमरू लेकर तस्वीरें खिंचाई और इन्हें “भक्ति और शक्ति” के प्रतीक के रूप में अपने ही ट्विटर (अब एक्स) हैंडल से दुनिया भर को दिखाया भी। लगता है, यहाँ थोड़ी सी चूक हुई है : शिव का वेश धरते हुए डमरू और त्रिशूल तो थाम लिया, मगर गले में सांप पहनना भूल गए।
इसके पहले असम के डिब्रूगढ़ के एक चाय बागान में काम करने वाली महिलाओं के साथ फोटो सेशन किया जा चुका था। नित नए, कई बार एक ही दिन में अनेक नए-नए परिधान में फोटो खिंचाने के इस चरण की पूर्णाहुति विधानसभा चुनाव नतीजे आने के बाद भाजपा कार्यालय में हुए उत्सव में हुई। यहाँ उन्होंने पारंपरिक बंगाली धोती और पहनावे में तस्वीरें खिंचवाई। इन सबके पहले वे अंडमान निकोबार की सैर कर आये थे और एक भरा-पूरा फोटो अलबम बनवा लाये थे। प्रधानमंत्री के सैर-सपाटे की यह अभी-अभी की ताज़ी-ताज़ी झलकें हैं। अपने 12 वर्ष के कार्यकाल में उन्होंने कितने दिन इस तरह के कामों के लिए निकाले हैं, इसका विवरण उनकी आधिकारिक साईट में भी नहीं समा पाया है।
फोटो शूट करवाने की उनकी आसक्ति कितनी अधिक है, यह बात 14 फरवरी 2019 को हुए पुलवामा आतंकी हमले के दौरान देखी भी जा चुकी है और जम्मू-कश्मीर के तत्कालीन राज्यपाल एवं प्रशासक सतपाल मलिक द्वारा दर्ज भी की जा चुकी है। मलिक ने बताया था कि जब पुलवामा पर हमला हुआ था, उस समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क में डिस्कवरी चैनल के लिए एक शूटिंग में व्यस्त थे। यह काम उन्हें इतना जरूरी लगा था कि दोपहर 3 बजकर 10 मिनट पर इस आतंकी हमले की खबर आने के बाद भी वे शाम करीब 6:30 बजे तक बोट सफारी और फोटोशूट करवाते रहे थे।
इन मौज मस्ती की यात्राओं के अलावा इसी दौरान बाकी का समय मोदी जी ने उस काम – चुनाव अभियान – में लगाया, जिसमें वे सिद्धहस्त और पारंगत दोनों हैं। हाल में निबटे 2026 के पांच राज्यों — पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी — के विधानसभा चुनावों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कुल 23 चुनावी रैलियां और रोड शो किए। मोदी का सबसे अधिक ध्यान पश्चिम बंगाल पर रहा, जहाँ उन्होंने सबसे ज्यादा 18 रैलियां और रोड शो किये। असम में 2, तमिलनाडू, केरल और पूदुचेरी में एक-एक रैली की।
चुनावी आमसभाओं में घनगरज उनका प्रिय शगल रहा है और यह लगातार बढ़ता जा रहा है। 2024 के लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने कुल 206 रैलियां, रोड शो और जनसभाएं कीं थीं। यह संख्या 2019 में की गई 142 रैलियों की तुलना में 64 अधिक थी, जो एक नया रिकॉर्ड है। प्रायोजित टीवी और मीडिया में दिए 80 से अधिक इंटरव्यूज इसके अलावा हैं। विदेशी यात्राओं की आधिकारिक सूची पीएमओ की वेबसाइट पर नियमित रूप से अपडेट की जाती है, लेकिन घरेलू यात्राओं के कुल दिनों का नवीनतम आंकड़ा सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध नहीं है। सिर्फ 2018 तक की रिपोर्ट है, जो 313 दिनों तक मोदी के दिल्ली में न रहने का उल्लेख करती है।
अगर देश का प्रधानमंत्री यही सब कर रहा है, तो फिर प्रधानमंत्री का काम कौन कर रहा है? अगर यही मौज मस्ती, फोटो बाजी, पर्यटन और चुनावी रैलियाँ ही प्रधानमंत्री का काम है, तो सवाल उठता है कि वो कौन है, जो असल में वह काम कर रहा है, जिसके लिये प्रधानमंत्री नियुक्त किया जाता है। देश के सामने दरपेश सवालों पर कैबिनेट की मीटिंग करके रास्ते निकालने और जरूरी कदम उठाने का काम कौन कर रहा है – और अगर कर रहा है, तो किस अधिकार से कर रहा है? ध्यान रहे, ये वही प्रधानमंत्री हैं, जिनके बारे में उनकी भक्त मंडली दावा करती है कि वे कभी छुट्टी नहीं लेते, कि वे 18-18 घंटे काम करते हैं।
यह सिर्फ देश के भीतर के पर्यटन भर का मामला नहीं है, मोदी के नाम भारत के सबसे अधिक विदेश यात्रा करने वाले प्रधानमंत्री का रिकॉर्ड भी है। अभी तक वे 99 अंतर्राष्ट्रीय यात्राएं कर चुके हैं, जिसमें वे 79 से अधिक देशों में , कईयों में दो-दो, तीन-तीन बार भी गए। वर्ष 2014 में पदभार ग्रहण करने के बाद से वे पृथ्वी के 7 महाद्वीपों में से 6 महाद्वीपों की यात्रा कर चुके है। इस मामले में उनका जो रिकॉर्ड है, वह दुनिया के किसी भी राजनेता के नाम नहीं होगा।
सातवें महाद्वीप अन्टार्कटिका भी वे जाते-जाते रह गए। अप्रैल 2025 में, चिली – जिसे अंटार्कटिका का प्रवेश द्वार माना जाता है — के राष्ट्रपति ने उन्हें अंटार्कटिका का दौरा करने के लिए आमंत्रित किया था, इसलिए यह मानकर चला जाना चाहिए कि वे इस महाद्वीप को भी जाए बिना नहीं छोड़ेंगे, वहां भी फोटो शूट करवाकर ही मानेंगे।
इसी महीने मई 2026 में वे चार यूरोपीय देशों — नॉर्वे, स्वीडन, नीदरलैंड और इटली — की यात्रा पर जाने वाले हैं। यह यात्रा 15 से 20 मई के बीच निर्धारित है, जो यूरोपीय संघ के साथ हालिया समझौते के बाद उनकी पहली यूरोप यात्रा है। एक रिपोर्ट के मुताबिक उनकी अब तक की विदेश यात्राओं पर कोई 66 अरब रुपयों का खर्चा हो चुका है।
प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं पर खर्च ज्यादा मायने नहीं रखता। मायने वह हासिल रखता है, जो इन यात्राओं के बाद हुआ होता है। संसदीय लोकतंत्र में हर विदेश यात्रा के बाद प्रधानमंत्री संसद के जरिये पूरे देश को यह बताया करते थे, उस यात्रा में उन्होंने क्या किया, किन मुद्दों पर चर्चा हुई, देश को क्या मिला। मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद से संसद को सूचित किये जाने की यह प्रथा भी समाप्त हो गई है ।
अब मास्को से लौटते हुए बीच रास्ते में अचानक फ्लाइट लाहौर की तरफ मुड़ जाती है और भारत का प्रधान मंत्री, बिन बुलाये मेहमान के रूप में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ की नवासी की शादी में बनारसी साड़ियों और पठानी सूट्स का भात लेकर पहुँच जाता है। उस यात्रा में क्या हुआ, यह किसी को नहीं पता चलता। पाकिस्तान और दूसरे देशों के मीडिया से पता चलता है कि चौंकाने वाली इस कूटनीति के पीछे सौजन्य कम था, विदेश नीति और भी कम थी, अडानी की बिजली और जिंदल की स्टील फैक्ट्री का लेना-देना कुछ अधिक था। सिर्फ यहीं भर नहीं, अधिकाँश विदेश यात्राओं में प्रधानमंत्री के दल में अडानी की मौजूदगी और ऑस्ट्रेलिया से मोजाम्बिक तक हुए अडानी के धंधे से जुड़े करार इन यात्राओं की ‘उपलब्धियों’ के बारे में बता देते हैं।
विदेशों की यात्राएं उन देशों के साथ मित्रता को गाढ़ी और मजबूत करने के लिए होती हैं। नए व्यापारिक अनुबंधों और परस्पर बढ़ते-बढाते सांस्कृतिक संबंधों के लिए होती हैं। नए गठबंधन बनाने के लिए होती हैं। संकट में एक-दूसरे का साथ देने के वादे करने के लिए होती हैं। इतनी सारी, रिकॉर्ड तोड़ विदेश यात्राओं के बाद हासिल क्या हुआ है, यह आज पूरी दुनिया में भारत की स्थिति को देखकर पता चल जाता है।
एक भी पड़ोसी देश ऐसा नहीं है, जिसका नाम लेकर यह बताया जा सके कि उसके साथ हमारे रिश्ते सामान्य हैं। परम्परा से जिन देशों के साथ दोस्ती और विश्वास बना रहा, वह नेपाल और बांग्ला देश तक आज हमारे साथ नहीं हैं। कम से कम उस तरह तो बिलकुल नहीं है, जिस तरह से मोदी सरकार के आने के पहले हुआ करते थे।
मोदी जी द्वारा अपनी यात्राओं से लगभग पूरी दुनिया नाप लेने के बाद आज वैश्विक परिदृश्य में भारत अब तक के सबसे मुश्किल मुकाम पर खडा हुआ है। न अपनी मर्जी से तेल देख पा रहा हैं, न उसकी धार देख पा रहा है। अपने विश्वस्त और सदा-सर्वदा साथ देने वाले मित्र देशों के साथ अमरीका और इजरायल जैसे दुष्ट देशों द्वारा किये जा रहे सरासर गैरकानूनी बर्ताव पर मुंह खोलने तक का साहस नहीं कर पा रहा है। अपनी खुद की संप्रभुता पर होने वाली टीका-टिप्पणियों तक का जवाब नहीं दे पा रहा है।
इतना डरा हुआ है कि ब्रिक्स जैसे जिन साझे मंचों का अध्यक्ष है, उनमें भी नेतृत्वकारी भूमिका तक नहीं निबाह पा रहा है। इसका मतलब यही हुआ कि ज्यादातर विदेश यात्राएं या तो पर्यटन बनकर रह गयीं या अडानी-अम्बानी के व्यावसयिक हितों का माध्यम या दोनों ही बन कर रह गयीं।
कुल जमा यह कि भारत का प्रधानमंत्री अनुपस्थित है। उसे जहां होना चाहिए, वहां छोड़कर बाकी सब जगह वह उपस्थित है : कभी सैर सपाटों में, कभी फोटो शूट में, अक्सर चुनावी रैलियों में और बाकी बचे समय में दुनिया घूमने में व्यस्त है। उसके पास उसी देश के बारे में कुछ अच्छा करने का वक़्त नहीं है, जिसका वह निर्वाचित मुखिया है। और ऐसा होना कतई अच्छी बात नहीं है।
