Tuesday, April 28, 2026
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अक्षय तृतीया पर भक्ति का महासंगम, परशुराम सेना ने किया प्रेरणादायी आयोजन

भगवान परशुराम जयंती पर बरहज में भक्ति और श्रद्धा का संगम, बीएसएस परशुराम सेना ने किया भव्य आयोजन

बरहज/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर गौरा बरहज स्थित श्रीराम जानकी बाल विद्या मंदिर परिसर में बीएसएस परशुराम सेना द्वारा भगवान परशुराम जी की जयंती श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ मनाई गई। कार्यक्रम का आयोजन संगठन के जिलाध्यक्ष विनय पाठक के नेतृत्व में किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और गणमान्य व्यक्तियों ने भाग लिया।
कार्यक्रम की शुरुआत भगवान परशुराम जी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर की गई। मुख्य अतिथि समाजसेवी श्रीप्रकाश पाल एवं विशिष्ट अतिथि डॉ. अशोक पाण्डेय ने विधिवत पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद प्राप्त किया। इसके बाद उपस्थित सभी श्रद्धालुओं ने भी पुष्प अर्पित कर भगवान परशुराम के प्रति अपनी आस्था व्यक्त की।
इस अवसर पर वक्ताओं ने भगवान परशुराम के जीवन, उनके आदर्शों और उनके द्वारा स्थापित नैतिक मूल्यों पर प्रकाश डाला। मुख्य अतिथि श्रीप्रकाश पाल ने अपने संबोधन में कहा कि भगवान परशुराम का जीवन हमें अन्याय के विरुद्ध संघर्ष और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। उन्होंने सभी से उनके आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने का आह्वान किया।

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विशिष्ट अतिथि डॉ. अशोक पाण्डेय ने भगवान परशुराम के व्यक्तित्व और कृतित्व पर विस्तार से चर्चा करते हुए बताया कि वे केवल एक योद्धा ही नहीं, बल्कि ज्ञान, तप और संयम के प्रतीक भी थे। उनका जीवन समाज के लिए मार्गदर्शक है और आज के समय में भी उनके सिद्धांत प्रासंगिक हैं।
कार्यक्रम में भालचंद्र तिवारी, बाल बिहारी तिवारी, अभ्यानंद तिवारी सहित कई अन्य वक्ताओं ने भी अपने विचार व्यक्त किए और भगवान परशुराम के आदर्शों को अपनाने पर जोर दिया। सभी वक्ताओं ने समाज में नैतिकता, संस्कार और एकता को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. अशोक द्वारा कुशलतापूर्वक किया गया, जिससे आयोजन में अनुशासन और गरिमा बनी रही। इस दौरान पवन पाण्डेय, कपिल देव, प्रेमशंकर तिवारी, मिथिलेश सिंह, राजेंद्र जायसवाल, चंदन कुमार, विद्यानंद पाण्डेय, राजेश यादव, एडवोकेट विकास पाण्डेय, अखिलानंद तिवारी, श्रीराम तिवारी, हरे कृष्ण तिवारी, कृष्ण देव तिवारी, रामआश्रय तिवारी सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का माहौल पूरी तरह से भक्तिमय और उत्साहपूर्ण रहा। श्रद्धालुओं ने भक्ति गीतों और जयकारों के साथ वातावरण को आध्यात्मिक बना दिया। आयोजन के अंत में सभी ने समाज में सद्भाव, भाईचारा और धर्म के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।
यह आयोजन न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा, बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक मूल्यों को सुदृढ़ करने का भी एक सशक्त माध्यम बना। बीएसएस परशुराम सेना द्वारा इस तरह के आयोजन समाज में सकारात्मक संदेश देने का कार्य कर रहे हैं।

तेल-डॉलर समीकरण बिगड़ा तो दुनिया में आर्थिक भूचाल तय

तेल-डॉलर समीकरण और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर मंडराता संकट


— प्रभात पटनायक


अमेरिका और इज़राइल की सैन्य कार्रवाई के जवाब में ईरान द्वारा होर्मुज़ जलडमरूमध्य को बंद करने से वैश्विक तेल आपूर्ति बाधित हो गई है। इस घटनाक्रम ने विश्व अर्थव्यवस्था को गहरे संकट में धकेल दिया है। तेल की कीमतें डॉलर के मुकाबले तेजी से बढ़ रही हैं, जिससे एशियाई समेत कई मुद्राओं का अवमूल्यन हुआ है और मुद्रास्फीति का दबाव खासकर विकासशील देशों में तीव्र हो गया है।
मुद्रास्फीति सीधे तौर पर लोगों की क्रय शक्ति को कमजोर करती है। इसका परिणाम यह होता है कि मांग घटती है और अर्थव्यवस्था मंदी की ओर बढ़ने लगती है। परिधीय अर्थव्यवस्थाओं—यानी विकासशील और गरीब देशों—पर इसका प्रभाव और अधिक गंभीर होता है। तेल संकट के कारण उर्वरकों की उपलब्धता भी प्रभावित हो रही है, जिससे खाद्य उत्पादन पर खतरा मंडरा रहा है और वैश्विक दक्षिण के मेहनतकश वर्ग की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
यह स्थिति इसलिए और चिंताजनक है क्योंकि इस संकट की जड़ में जारी युद्ध का कोई स्पष्ट अंत नजर नहीं आता। यह युद्ध न केवल राजनीतिक अस्थिरता पैदा कर रहा है, बल्कि वैश्विक आर्थिक संतुलन को भी झकझोर रहा है।

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विडंबना यह है कि विश्व अर्थव्यवस्था में तेल का प्रत्यक्ष योगदान बहुत कम है—2023 में यह वैश्विक जीडीपी का मात्र 2.3% था। इसके बावजूद इसका प्रभाव अत्यधिक व्यापक है। इसका कारण यह है कि तेल एक “सार्वभौमिक मध्यस्थ” की भूमिका निभाता है। विनिर्माण से लेकर परिवहन और कृषि तक लगभग हर क्षेत्र तेल पर निर्भर है।
अर्थशास्त्रियों के अनुसार, कच्चे माल का मूल्य भले ही कम हो, लेकिन उनके बिना उत्पादन संभव नहीं है। तेल की कीमत में वृद्धि का प्रभाव कई “स्तरों” से गुजरते हुए अंतिम उत्पादों तक पहुंचता है, जिससे महंगाई का प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है। जितने अधिक स्तर होंगे, कीमतों में वृद्धि का असर उतना ही अधिक होगा।
आज की वैश्विक अर्थव्यवस्था में एक महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि डॉलर, जो दुनिया की प्रमुख आरक्षित मुद्रा है, अप्रत्यक्ष रूप से तेल से जुड़ा हुआ है। इसे “तेल-डॉलर मानक” कहा जा सकता है। इसका मतलब यह है कि डॉलर की स्थिरता इस बात पर निर्भर करती है कि तेल की कीमतें लंबे समय तक अनियंत्रित रूप से न बढ़ें।

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अमेरिका के दशकों से जारी भुगतान घाटे के कारण दुनिया में डॉलर की अधिकता हो चुकी है। इन डॉलरों का मूल्य बनाए रखने के लिए जरूरी है कि तेल की कीमतों में स्थिरता बनी रहे। यही कारण है कि अमेरिका तेल उत्पादक देशों पर राजनीतिक प्रभाव बनाए रखने की कोशिश करता रहा है।
खाड़ी देशों पर उसका प्रभाव पहले से मौजूद है, और ईरान व वेनेजुएला को भी अपने दायरे में लाने की रणनीति इसी का हिस्सा रही है। हालांकि, ईरान के मामले में यह रणनीति उलटी पड़ती दिख रही है। मौजूदा संकट ने तेल की कीमतों को अस्थिर कर दिया है, जिससे डॉलर की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
यह स्थिति न केवल आर्थिक अस्थिरता को जन्म दे रही है, बल्कि वैश्विक स्तर पर असंतोष भी बढ़ा रही है। यदि हालात ऐसे ही बने रहे, तो यह असंतोष बड़े सामाजिक और राजनीतिक उथल-पुथल का रूप ले सकता है।

‘म्हारी माट्टी, म्हारे आखर’ से हरियाणवी साहित्य को नई उड़ान

हरियाणवी लघुकथा का नया अध्याय: ‘म्हारी माट्टी, म्हारे आखर’ बना साहित्यिक मील का पत्थर

पंजाब/नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा) हरियाणवी साहित्य को नई पहचान देने वाला लघुकथा संकलन ‘म्हारी माट्टी, म्हारे आखर’ इन दिनों साहित्य प्रेमियों के बीच खासा चर्चा में है। यह कृति पहली बार देश-विदेश के 33 हरियाणवी लघुकथाकारों को एक मंच पर लाकर 99 लघुकथाओं के माध्यम से हरियाणा की माटी, लोकसंस्कृति और मानवीय संवेदनाओं का जीवंत दस्तावेज प्रस्तुत करती है।
यह संकलन युवा प्रेरणा स्रोत स्वर्गीय मनुमुक्त ‘मानव’, आईपीएस की स्मृति को समर्पित है। डॉ. रामनिवास ‘मानव’ के मार्गदर्शन में तैयार इस पुस्तक का संकलन डॉ. प्रियंका सौरभ ने किया है, जबकि संपादन डॉ. सत्यवान सौरभ ने संभाला है। सुरेंद्र बांसल द्वारा सुसज्जित आवरण के साथ 121 पृष्ठों की यह पुस्तक वर्ष 2026 में ₹275 मूल्य के साथ प्रकाशित हुई है।

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हर भाषा की असली शक्ति उसकी मिट्टी से आती है और वही मिट्टी उसके शब्दों को जीवन देती है। ‘म्हारी माट्टी, म्हारे आखर’ इसी सोंधी सुगंध को समेटे हुए एक ऐसा संग्रह है, जो हरियाणवी बोली की जीवंतता के साथ-साथ लघुकथा जैसी प्रभावशाली विधा को भी मजबूती देता है।
इस संकलन की खासियत इसकी संक्षिप्तता में गहराई है। हर लघुकथा कम शब्दों में एक गहरी सामाजिक, भावनात्मक या मानवीय स्थिति को सामने लाती है। पाठक इन कहानियों को केवल पढ़ता ही नहीं, बल्कि महसूस भी करता है। यही इस पुस्तक की सबसे बड़ी ताकत है।
विषय-विविधता इस संग्रह को और समृद्ध बनाती है। “तड़कै की माँ” में मातृत्व की संवेदना है, “इज्जत की परिभासा” सामाजिक मानकों पर सवाल उठाती है, “बहू बिहार की” पूर्वाग्रहों को उजागर करती है, जबकि “माटी की सोंध” और “घूंघट अर घड़ी” हरियाणा की सांस्कृतिक जड़ों को जीवंत करती हैं।
भाषा की सादगी और सहजता इस पुस्तक को और प्रभावशाली बनाती है। कहीं भी कृत्रिमता नहीं, बल्कि सीधी, सरल और दिल तक पहुंचने वाली अभिव्यक्ति देखने को मिलती है। हालांकि, विभिन्न लेखकों के कारण हरियाणवी के अलग-अलग रूप सामने आते हैं, जिससे भाषाई एकरूपता का अभाव महसूस होता है। फिर भी यह विविधता हरियाणवी भाषा के विकासशील स्वरूप को ही दर्शाती है।

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संकलन की कई लघुकथाएँ समाज की विसंगतियों पर तीखा प्रहार करती हैं। “दोगला”, “कागजी समाज सेवा”, “लीडर” और “भीड़ अर नेता” जैसी रचनाएँ पाखंड और दिखावे पर कटाक्ष करती हैं। वहीं “बेटी का मान”, “शेरनी माँ” और “लुगाइयां के हक” स्त्री सशक्तिकरण और आत्मसम्मान की प्रभावशाली प्रस्तुति हैं।
इस पुस्तक में नए और अनुभवी दोनों तरह के रचनाकारों को स्थान देकर संतुलन बनाए रखा गया है। इससे न केवल साहित्यिक विविधता बढ़ी है, बल्कि नई प्रतिभाओं को भी मंच मिला है।
डॉ. रामनिवास ‘मानव’ की प्रस्तावना इस संकलन को वैचारिक मजबूती देती है, वहीं सुरेंद्र बांसल का विचार इस प्रयास को एक सकारात्मक साहित्यिक पहल के रूप में स्थापित करता है।
समग्र रूप से देखा जाए तो ‘म्हारी माट्टी, म्हारे आखर’ केवल एक पुस्तक नहीं, बल्कि हरियाणवी साहित्य का एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है। यह न केवल वर्तमान लेखन को सामने लाती है, बल्कि भविष्य की संभावनाओं को भी दिशा देती है।
यह संकलन पाठकों को मनोरंजन के साथ-साथ सोचने और समाज को नए नजरिए से देखने की प्रेरणा देता है। हरियाणवी भाषा प्रेमियों के लिए यह एक संग्रहणीय कृति है, जो अपनी मिट्टी की खुशबू और शब्दों की ताकत को सशक्त रूप में प्रस्तुत करती है।

रेलवे चौकी के पास चोरी की वारदात विफल, युवक पकड़ा गया

देवरिया में दिनदहाड़े स्कूटी चोरी की कोशिश नाकाम, सतर्क नागरिकों ने आरोपी को दबोचा


देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। शहर के व्यस्त रेलवे स्टेशन रोड पर रविवार सुबह उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब दिनदहाड़े एक स्कूटी चोरी की कोशिश को स्थानीय लोगों की सतर्कता ने नाकाम कर दिया। घटना रेलवे पुलिस चौकी से चंद कदम की दूरी पर हुई, जिससे सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, रविवार सुबह करीब 11 बजे स्टेशन रोड पर खड़ी एक स्कूटी को निशाना बनाते हुए एक युवक ने उसे चोरी करने का प्रयास किया। आरोपी काफी देर से मौके की रेकी कर रहा था और जैसे ही उसे मौका मिला, उसने स्कूटी का लॉक तोड़ने की कोशिश शुरू कर दी। हालांकि, आसपास मौजूद दुकानदारों और राहगीरों की नजर उस पर पड़ गई।
लोगों ने तुरंत मुस्तैदी दिखाते हुए आरोपी को रंगेहाथ पकड़ लिया। अचानक हुए इस घटनाक्रम से मौके पर भीड़ जमा हो गई। चोरी की कोशिश से नाराज लोगों का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने आरोपी की जमकर पिटाई कर दी। कुछ देर तक मौके पर अफरा-तफरी और हंगामे का माहौल बना रहा।

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घटना की सूचना मिलते ही आसपास के लोग भी बड़ी संख्या में मौके पर पहुंच गए। भीड़ के बढ़ते दबाव और स्थिति को देखते हुए कुछ समझदार लोगों ने बीच-बचाव किया और आरोपी को भीड़ से छुड़ाकर रेलवे पुलिस के हवाले कर दिया। इसके बाद आरोपी को पास स्थित रेलवे पुलिस चौकी में सौंप दिया गया।
पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि आरोपी अकेले काम कर रहा था या किसी गिरोह का हिस्सा है। साथ ही, उसके आपराधिक इतिहास की भी जांच की जा रही है।
इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि नागरिकों की सतर्कता से अपराधों पर अंकुश लगाया जा सकता है। हालांकि, रेलवे पुलिस चौकी के इतने करीब इस तरह की घटना का होना सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल जरूर खड़े करता है।

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स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि स्टेशन रोड पर आए दिन चोरी और संदिग्ध गतिविधियों की घटनाएं सामने आती रहती हैं। उन्होंने पुलिस प्रशासन से इस क्षेत्र में गश्त बढ़ाने और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की मांग की है।
फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है और आरोपी से पूछताछ के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। इस घटना के बाद क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर लोगों में चिंता का माहौल भी देखा जा रहा है।

सुरक्षा के बीच बजरंग दल का शक्ति प्रदर्शन, चौराहे पर जलाया पुतला

सिकंदरपुर में बजरंग दल का उग्र प्रदर्शन, चौराहे पर पुतला दहन कर जताया विरोध

सिकंदरपुर/बलिया (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। नगर क्षेत्र में शनिवार को बजरंग दल के तत्वावधान में प्रस्तावित विरोध-प्रदर्शन जोरदार तरीके से आयोजित किया गया। लव जेहाद जैसे संवेदनशील मुद्दे को लेकर आयोजित इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं की भागीदारी रही, जिससे पूरे नगर क्षेत्र में लंबे समय तक हलचल और चर्चा का माहौल बना रहा। कार्यक्रम शांतिपूर्ण रहा, लेकिन कार्यकर्ताओं के तेवर काफी तीखे नजर आए।
तय कार्यक्रम के अनुसार बजरंग दल के कार्यकर्ता सबसे पहले संघस्थान महाराणा प्रताप शाखा, जो पुराने पोस्ट ऑफिस के समीप स्थित है, वहां एकत्र हुए। यहां से उन्होंने संगठित रूप में नारेबाजी करते हुए जुलूस निकाला। जुलूस नगर के प्रमुख मार्गों से गुजरता हुआ मुख्य चौराहे तक पहुंचा। इस दौरान कार्यकर्ता विभिन्न नारों के माध्यम से अपनी नाराजगी और विरोध प्रकट करते रहे, जिससे राहगीरों और स्थानीय लोगों का ध्यान भी इस प्रदर्शन की ओर आकर्षित हुआ।

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मुख्य चौराहे पर पहुंचकर प्रदर्शन ने उग्र रूप ले लिया। कार्यकर्ताओं ने जमकर नारेबाजी की और विरोध स्वरूप पुतला दहन किया। पुतला दहन के दौरान माहौल कुछ समय के लिए काफी गरम हो गया, लेकिन पुलिस और प्रशासन की सतर्कता के चलते स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में रही। मौके पर पर्याप्त पुलिस बल की तैनाती की गई थी, जिससे किसी भी अप्रिय घटना को होने से रोका जा सका।
प्रदर्शन के दौरान बजरंग दल के जिला संयोजक प्रतीक राय और विश्व हिंदू परिषद के जिला अध्यक्ष राजीव सिंह चंदेल ने कार्यकर्ताओं को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि देश के विभिन्न हिस्सों में सामने आ रही घटनाओं को लेकर संगठन में गहरा आक्रोश है। उन्होंने नासिक स्थित एक निजी कंपनी कार्यालय से जुड़े मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसी घटनाएं समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय बनती जा रही हैं और इन पर तत्काल कठोर कार्रवाई की आवश्यकता है।
वक्ताओं ने यह भी कहा कि इस प्रकार के मामलों को लेकर समाज में जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है और प्रशासन को भी ऐसे मामलों में सख्ती दिखानी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह प्रदर्शन किसी एक घटना तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक व्यापक सामाजिक मुद्दे के खिलाफ जनभावनाओं का प्रतीक है। कार्यकर्ताओं ने प्रशासन के माध्यम से संबंधित विषयों पर कार्रवाई की मांग करते हुए ज्ञापन देने की भी बात कही।

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कार्यक्रम के दौरान अरुण सिंह, आलोक सोनी, अर्जुन, मंजीत, नीरज, सोनू, अविनाश मिश्रा, विजय बहादुर सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे। सभी ने एकजुट होकर संगठन की नीतियों के समर्थन में आवाज उठाई और अपने-अपने विचार व्यक्त किए।
हालांकि पूरे कार्यक्रम के दौरान माहौल काफी गरम रहा, लेकिन किसी भी प्रकार की हिंसा या अव्यवस्था की सूचना नहीं मिली। प्रशासन और पुलिस की सक्रियता के कारण प्रदर्शन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ। स्थानीय लोगों ने भी इस आयोजन को लेकर विभिन्न प्रतिक्रियाएं दीं, जिससे यह मुद्दा क्षेत्र में चर्चा का केंद्र बना रहा।
यह प्रदर्शन यह दर्शाता है कि सामाजिक और सांस्कृतिक मुद्दों को लेकर संगठनों में संवेदनशीलता और सक्रियता लगातार बढ़ रही है। आने वाले समय में इस तरह के मुद्दों पर प्रशासन की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है, ताकि कानून-व्यवस्था बनाए रखते हुए जनभावनाओं का सम्मान किया जा सके।

घोसी बस स्टेशन निर्माण में मिली खामियां, सीडीओ ने जताई नाराजगी

घोसी (राष्ट्र की परम्परा)तहसील घोसी में बस स्टेशन के पुनर्निर्माण एवं उच्चीकरण कार्य का मुख्य विकास अधिकारी विवेक कुमार श्रीवास्तव ने निरीक्षण किया। निरीक्षण का उद्देश्य निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और प्रगति का आकलन करना रहा। यह कार्य आवास एवं विकास परिषद खंड आजमगढ़ द्वारा कराया जा रहा है।
निरीक्षण के दौरान बस स्टेशन के एडमिन ब्लॉक में कराए गए फ्लोर टाइल्स के कार्य में गुणवत्ता की कमी पाई गई, जिसे मानक के विपरीत बताते हुए मुख्य विकास अधिकारी ने गहरी नाराजगी जताई। उन्होंने संबंधित कार्यदायी संस्था को निर्देश दिया कि टाइल्स का कार्य गुणवत्तापूर्ण और निर्धारित मानकों के अनुरूप दोबारा कराया जाए।

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इसके अलावा बस स्टेशन परिसर में बनाए जा रहे बस प्लेटफार्म की दीवार की चिनाई भी गलत तरीके से की जा रही थी। इस पर तत्काल कार्रवाई करते हुए सीडीओ ने संबंधित हिस्से को तोड़कर पुनः सही तरीके से निर्माण कार्य कराने के निर्देश दिए।
मुख्य विकास अधिकारी ने कार्यदायी संस्था के अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी कमियों को दूर कर एक सप्ताह के भीतर सुधारात्मक कार्यों की विस्तृत आख्या प्रस्तुत करें। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और गुणवत्ता से समझौता नहीं होगा।

समाधान दिवस में उमड़ा जनसैलाब, प्रशासन ने दिखाई सख्ती

मऊ–औरैया–देवरिया: समाधान दिवस में उमड़ी भीड़, सैकड़ों शिकायतें दर्ज, मौके पर निस्तारण से मिली राहत


लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)मऊ, औरैया और देवरिया जनपदों में आयोजित सम्पूर्ण समाधान दिवस में आमजन की समस्याओं को सुनने के लिए प्रशासनिक अमला पूरी सक्रियता के साथ मौजूद रहा। तीनों जनपदों में बड़ी संख्या में फरियादी अपनी शिकायतों के साथ पहुंचे, जहां अधिकारियों ने त्वरित और गुणवत्तापूर्ण निस्तारण पर जोर दिया। कई मामलों का मौके पर ही समाधान कर लोगों को राहत दी गई, जबकि शेष मामलों के लिए संबंधित विभागों को समयबद्ध कार्रवाई के निर्देश दिए गए।
मऊ जनपद की तहसील मोहम्मदाबाद गोहना में आयोजित समाधान दिवस में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में जनसुनवाई हुई। इस दौरान कुल 140 शिकायतें दर्ज की गईं, जिनमें से 85 मामले राजस्व और पुलिस विभाग से जुड़े थे। अधिकारियों ने गंभीरता दिखाते हुए 7 शिकायतों का मौके पर ही निस्तारण किया। वहीं 6 जटिल मामलों के लिए संयुक्त टीमों का गठन कर उन्हें मौके पर भेजा गया। जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिए कि शिकायतों का ऐसा समाधान किया जाए जिससे फरियादियों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें। उन्होंने अधिकारियों को चेताया कि लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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औरैया जनपद में जिलाधिकारी डॉ. इन्द्रमणि त्रिपाठी ने बिधूना तहसील सभागार में लेखपालों के साथ बैठक कर ‘मिशन समाधान’ के तहत राजस्व वादों के त्वरित निस्तारण पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि लंबित मामलों के कारण ही जनसुनवाई में शिकायतों की संख्या बढ़ती है, इसलिए जमीनी स्तर पर ही समस्याओं का समाधान सुनिश्चित किया जाए। लेखपालों को निर्देश दिया गया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में राजस्व वादों का समयबद्ध निस्तारण करें और उसकी रिपोर्ट जिला प्रशासन के साथ संबंधित थानों को भी उपलब्ध कराएं।
बैठक में एक संवेदनशील पहल के तहत यह भी निर्देश दिए गए कि यदि किसी किसान की मृत्यु होती है तो लेखपाल परिवार को विरासत प्रमाण पत्र के साथ एक पौधा और संवेदना पत्र प्रदान करें। इसका उद्देश्य पीड़ित परिवार को सहानुभूति देना और अनावश्यक प्रशासनिक दौड़भाग से बचाना है। साथ ही फार्मर रजिस्ट्री की प्रगति की समीक्षा करते हुए सभी कास्तकारों का डेटा निर्धारित समय में पूरा करने के निर्देश दिए गए। तहसील स्तर पर हेल्प डेस्क स्थापित कर नाम संशोधन सहित अन्य समस्याओं का त्वरित समाधान करने पर भी जोर दिया गया।

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देवरिया जनपद की सदर तहसील में आयोजित समाधान दिवस में जिलाधिकारी दिव्या मित्तल और पुलिस अधीक्षक अभिजीत आर. शंकर ने स्वयं उपस्थित रहकर फरियादियों की समस्याएं सुनीं। यहां कुल 73 शिकायतें प्राप्त हुईं, जिनमें 33 राजस्व, 15 पुलिस, 4 विकास और 21 अन्य विभागों से संबंधित थीं। इनमें से 7 शिकायतों का मौके पर ही निस्तारण किया गया। इसके अतिरिक्त पात्र लाभार्थियों को अन्त्योदय राशन कार्ड और दिव्यांग प्रमाण पत्र भी वितरित किए गए, जिससे कार्यक्रम की उपयोगिता और बढ़ गई।
अधिकारियों ने सभी विभागों को निर्देशित किया कि शिकायतों का निस्तारण केवल औपचारिकता न बनकर वास्तविक समाधान प्रदान करने वाला हो। उन्होंने कहा कि हर प्रकरण की नियमित समीक्षा की जाएगी और किसी भी स्तर पर लापरवाही मिलने पर कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। पुलिस विभाग को भी निर्देश दिया गया कि संबंधित मामलों में प्राथमिकता के आधार पर त्वरित कार्रवाई की जाए।
तीनों जनपदों में आयोजित इस समाधान दिवस ने एक बार फिर यह स्पष्ट किया कि प्रशासन आमजन की समस्याओं के समाधान के प्रति गंभीर है। हालांकि बड़ी संख्या में प्राप्त शिकायतें यह भी संकेत देती हैं कि जमीनी स्तर पर अभी और सुधार की आवश्यकता है। यदि विभागीय स्तर पर समय रहते समस्याओं का निस्तारण हो, तो समाधान दिवस में आने वाली भीड़ को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

यातायात पुलिस का सघन चेकिंग अभियान, 152 वाहनों का चालान और 04 वाहन सीज

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा) जनपद में सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम और यातायात नियमों के पालन को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से यातायात पुलिस द्वारा सघन चेकिंग अभियान चलाया गया। यह अभियान पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में यातायात प्रभारी के नेतृत्व में शहर क्षेत्र के प्रमुख स्थानों पर संचालित किया गया।
अभियान के दौरान बस स्टैंड, सुभाष चौक और कसया ओवरब्रिज सहित विभिन्न स्थानों पर बस, ऑटो और ई-रिक्शा की जांच की गई। बिना ड्राइविंग लाइसेंस, बिना फिटनेस तथा निर्धारित नियमों का उल्लंघन कर चल रहे वाहनों के खिलाफ कार्रवाई की गई। इसके साथ ही सुभाष चौक पर बिना हेलमेट, तीन सवारी लेकर चलने वाले दोपहिया वाहनों तथा मोडिफाई साइलेंसर लगे वाहनों पर भी सख्ती दिखाई गई।

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चेकिंग अभियान के दौरान कुल 152 वाहनों का ई-चालान किया गया, जबकि 04 वाहनों को सीज किया गया। कार्रवाई के दौरान यातायात नियमों के उल्लंघन पर सख्त रुख अपनाया गया, जिससे सड़क सुरक्षा को बढ़ावा मिल सके।
अधिकारियों के अनुसार इस तरह के नियमित अभियान से न केवल यातायात व्यवस्था बेहतर होती है, बल्कि सड़क दुर्घटनाओं में भी कमी आती है। साथ ही वाहन चालकों को नियमों का पालन करने के प्रति जागरूक किया जाता है।

निर्माण स्थल बना मौत का जाल—लिंटर गिरने से मजदूर मलबे में दबे

निर्माणाधीन मैरिज हॉल का लिंटर ढहा, मलबे में दबे मजदूर—एक की हालत गंभीर


शाहजहांपुर (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। जलालाबाद थाना क्षेत्र के याकूबपुर में शनिवार को एक दर्दनाक हादसे ने निर्माण कार्यों में लापरवाही और सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। फर्रुखाबाद-जलालाबाद स्टेट हाईवे स्थित गंगा चिकित्सालय के पास बन रहे एक मैरिज हॉल का लिंटर अचानक भरभराकर गिर गया। हादसे के समय मौके पर काम कर रहे मजदूरों में अफरा-तफरी मच गई और तीन मजदूर मलबे में दबकर घायल हो गए, जिनमें एक की हालत गंभीर बताई जा रही है।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, घटना उस वक्त हुई जब निर्माणाधीन भवन में लिंटर डाला जा रहा था और नीचे शटरिंग का कार्य चल रहा था। अचानक तेज धमाके जैसी आवाज आई और देखते ही देखते पूरा लिंटर नीचे गिर गया। आसपास मौजूद लोग तुरंत घटनास्थल की ओर दौड़े और राहत-बचाव कार्य शुरू किया। स्थानीय लोगों की तत्परता से मलबे में दबे मजदूरों को बाहर निकाला गया।

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घायलों को तत्काल इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन इस दौरान एक नया विवाद भी सामने आया। सूत्रों का दावा है कि मैरिज हॉल का मालिक एक निजी अस्पताल से जुड़ा डॉक्टर है और उसने मामले को दबाने के प्रयास में घायलों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाने के बजाय सीधे अपने निजी अस्पताल में भर्ती कराया। इस बात को लेकर स्थानीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है।
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और पूरे घटनास्थल का निरीक्षण किया। साथ ही अस्पताल पहुंचकर स्टाफ से पूछताछ भी की गई। थाना प्रभारी राजीव तोमर ने बताया कि तीन से चार मजदूरों के घायल होने की सूचना है, जिनका इलाज जारी है। हालांकि, एक मजदूर की हालत गंभीर बताई जा रही है और उस पर विशेष निगरानी रखी जा रही है।
प्राथमिक जांच में यह सवाल उठ रहा है कि क्या निर्माण कार्य निर्धारित मानकों के अनुसार किया जा रहा था या नहीं। विशेषज्ञों का मानना है कि लिंटर गिरने जैसी घटनाएं आमतौर पर कमजोर शटरिंग, घटिया सामग्री या तकनीकी लापरवाही के कारण होती हैं। यदि सुरक्षा मानकों का सही पालन नहीं किया गया, तो यह हादसा मानव जीवन के प्रति गंभीर लापरवाही का मामला बन सकता है।

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मौके पर मौजूद लोगों का कहना है कि निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं थे। मजदूर बिना किसी सुरक्षा उपकरण के काम कर रहे थे, जिससे हादसे का खतरा और बढ़ गया। इस तरह की घटनाएं न केवल मजदूरों की जान को जोखिम में डालती हैं, बल्कि निर्माण क्षेत्र में नियमों की अनदेखी को भी उजागर करती हैं।
मीडिया के मौके पर पहुंचने पर भवन मालिक ने कोई स्पष्ट जानकारी देने से इनकार कर दिया, जिससे संदेह और गहरा गया है। प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि पूरे मामले की गहन जांच कराई जाएगी और यदि किसी प्रकार की लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
यह हादसा एक बार फिर यह याद दिलाता है कि निर्माण कार्यों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी कितनी भारी पड़ सकती है। मजदूरों की सुरक्षा सुनिश्चित करना केवल कानूनी दायित्व ही नहीं, बल्कि नैतिक जिम्मेदारी भी है। यदि समय रहते ऐसे मामलों पर सख्ती नहीं बरती गई, तो भविष्य में और भी गंभीर हादसे हो सकते हैं।

मोटर साइकिल चोरी गिरोह का भंडाफोड़, 04 घटनाओं का खुलासा करते हुए 02 गिरफ्तार

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)थाना गौरीबाजार पुलिस ने मोटर साइकिल चोरी की चार घटनाओं का सफल अनावरण करते हुए दो अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने इनके कब्जे से चोरी की एक मोटर साइकिल, घटना में प्रयुक्त एक अन्य मोटर साइकिल, ₹13,000 नकद, एक फर्जी नंबर प्लेट और चार मास्टर चाबियां बरामद की हैं।

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पुलिस अधीक्षक के निर्देशन, अपर पुलिस अधीक्षक (उत्तरी) के मार्गदर्शन तथा क्षेत्राधिकारी रुद्रपुर के पर्यवेक्षण में चलाए जा रहे अपराध नियंत्रण अभियान के तहत यह कार्रवाई की गई। थाना गौरीबाजार में दर्ज एक मोटर साइकिल चोरी के मामले की जांच के दौरान पुलिस ने मुखबिर की सूचना पर चीनी मिल ग्राउंड के पास से दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया।
घटना 16 अप्रैल 2026 की है, जब वादी अपनी बजाज प्लेटिना मोटर साइकिल खड़ा कर कुछ देर के लिए गया था और वापस आने पर वाहन गायब मिला। इस संबंध में मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई थी।

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पूछताछ में आरोपियों ने जिले और आसपास के क्षेत्रों से मोटर साइकिल चोरी की अन्य घटनाओं को भी स्वीकार किया। उन्होंने बताया कि चोरी की गई गाड़ियों को बिहार बॉर्डर के पास अलग-अलग लोगों को बेचा जाता था और प्राप्त धनराशि को आपस में खर्च कर दिया जाता था। पुलिस के अनुसार दोनों आरोपी पहले भी कई चोरी की घटनाओं में शामिल रहे हैं, जिनमें अलग-अलग थाना क्षेत्रों में मुकदमे दर्ज हैं।
गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ आवश्यक विधिक कार्रवाई की जा रही है। पुलिस टीम ने इस सफल खुलासे में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

समाज बनाम नशा: क्यों यह लड़ाई पुलिस नहीं, हर नागरिक की है

अदृश्य संकटों का महायुद्ध: बौद्धिक प्रदूषण और नशे के खिलाफ समाज की साझा जिम्मेदारी

21वीं सदी मानव सभ्यता को तकनीक, विज्ञान, स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में अभूतपूर्व ऊँचाइयों तक ले जा रही है। लेकिन इसी प्रगति के समानांतर दुनिया दो ऐसे अदृश्य संकटों से जूझ रही है, जिनका प्रभाव गहरा, व्यापक और दीर्घकालिक है—बौद्धिक प्रदूषण और नशा। ये दोनों चुनौतियाँ विशेष रूप से युवाओं को प्रभावित कर रही हैं और समाज की बुनियादी संरचना को भीतर से कमजोर कर रही हैं।
पर्यावरणीय प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए कानून, तकनीक और वैश्विक तंत्र सक्रिय हैं, लेकिन बौद्धिक प्रदूषण और नशे के खिलाफ सामाजिक चेतना उतनी तेज़ी से विकसित नहीं हो पाई है। यह स्पष्ट है कि जब समस्या मानव विचार, चेतना और मानसिकता से जुड़ी हो, तो समाधान भी केवल तकनीकी नहीं, बल्कि नैतिक, शैक्षिक और सामाजिक होना चाहिए।
बौद्धिक प्रदूषण वह स्थिति है, जब व्यक्ति की सोच, विवेक और निर्णय क्षमता गलत, भ्रमित और पक्षपातपूर्ण सूचनाओं से प्रभावित हो जाती है। यह प्रदूषण दिखाई नहीं देता, लेकिन इसका असर किसी भी भौतिक प्रदूषण से अधिक खतरनाक हो सकता है। फेक न्यूज, दुष्प्रचार, नफरत आधारित सामग्री, सोशल मीडिया एल्गोरिद्म और डिजिटल हेरफेर इसके प्रमुख स्रोत बन चुके हैं। इंटरनेट ने सूचना को सुलभ बनाया, लेकिन साथ ही असत्य को भी तेजी से फैलाने का माध्यम बन गया।

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इसका परिणाम यह है कि व्यक्ति सत्य और असत्य के बीच अंतर करने में कठिनाई महसूस करने लगा है। यह स्थिति लोकतंत्र, सामाजिक सद्भाव, वैज्ञानिक सोच और मानवीय मूल्यों के लिए गंभीर खतरा बनती जा रही है। इतिहास यह बताता है कि सभ्यताएँ बाहरी आक्रमणों से कम और आंतरिक भ्रम एवं वैचारिक प्रदूषण से अधिक कमजोर होती हैं।
बौद्धिक प्रदूषण का समाधान किसी एक कानून या संस्था से संभव नहीं है। इसके लिए समालोचनात्मक सोच पर आधारित शिक्षा, डिजिटल साक्षरता, तथ्य-आधारित संवाद, मीडिया की जिम्मेदारी और सामाजिक जागरूकता आवश्यक है। जब तक समाज तर्क को प्राथमिकता नहीं देगा और शिक्षा को केवल नौकरी नहीं बल्कि चेतना निर्माण का माध्यम नहीं बनाएगा, तब तक यह संकट बना रहेगा।
दूसरी ओर, नशा आज केवल स्वास्थ्य समस्या नहीं रह गया है, बल्कि यह सामाजिक, आर्थिक और सुरक्षा से जुड़ा बहुआयामी संकट बन चुका है। ड्रग्स, शराब, तंबाकू, सिंथेटिक पदार्थों के साथ-साथ डिजिटल और गेमिंग एडिक्शन भी इसके आधुनिक रूप हैं। नशे की जड़ें मानसिक तनाव, पारिवारिक विघटन, बेरोजगारी, अकेलापन और सामाजिक दबाव में छिपी होती हैं।
यह मानना कि नशे को केवल पुलिस और कानून के जरिए खत्म किया जा सकता है, एक सीमित दृष्टिकोण है। कानून केवल अपराध को नियंत्रित कर सकता है, लेकिन आदत और मानसिकता को नहीं बदल सकता। इसलिए नशे के खिलाफ लड़ाई वास्तव में एक सामाजिक युद्ध है, जिसमें परिवार, स्कूल, समाज, स्वास्थ्य संस्थान, मीडिया और सरकार सभी की भूमिका समान रूप से महत्वपूर्ण है।

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समाज को नशे को अपराध नहीं बल्कि एक बीमारी के रूप में समझना होगा। पुनर्वास, परामर्श, जागरूकता और सामाजिक सहयोग ही इसके स्थायी समाधान हैं। परिवारों को प्रारंभिक संकेत पहचानने होंगे, स्कूलों को निवारक शिक्षा देनी होगी और समाज को नशे के शिकार व्यक्ति को समर्थन देना होगा।
अंततः, बौद्धिक प्रदूषण और नशा दोनों ऐसे अदृश्य संकट हैं, जिनके परिणाम अत्यंत विनाशकारी हैं। एक मानव की सोच को विकृत करता है, तो दूसरा शरीर और जीवन को नष्ट करता है। इनसे लड़ाई केवल सरकार या कानून नहीं जीत सकते, बल्कि यह पूरे समाज की जिम्मेदारी है। यदि विचार शुद्ध होंगे और समाज जागरूक होगा, तो मानवता इन चुनौतियों पर विजय प्राप्त कर सकती है।

— लेखक: एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी, गोंदिया (महाराष्ट्र)

संसद की हलचल से बाजार में भूचाल: निवेशकों का भरोसा क्यों डगमगाया

संसद से सेंसेक्स तक: 16-17 अप्रैल 2026 के राजनीतिक झटके ने कैसे हिलाया बाजार का विश्वास


भारत में शेयर बाजार को अक्सर केवल आर्थिक आंकड़ों और कॉर्पोरेट प्रदर्शन के आधार पर समझने की कोशिश की जाती है, लेकिन सच्चाई इससे कहीं अधिक गहरी है। बाजार का असली आधार “विश्वास” होता है—और यह विश्वास सीधे तौर पर राजनीतिक स्थिरता, नीतिगत स्पष्टता और शासन की विश्वसनीयता से जुड़ा होता है। 16-17 अप्रैल 2026 के संसदीय घटनाक्रम ने इसी विश्वास को झकझोर दिया।
लोकसभा में 528 सांसदों की भागीदारी के बावजूद संवैधानिक संशोधन विधेयक का दो-तिहाई बहुमत से पारित न हो पाना केवल एक राजनीतिक घटना नहीं, बल्कि बाजार के लिए एक गंभीर संकेत है। 298 समर्थन और 230 विरोध के बीच अटक गया यह विधेयक निवेशकों को यह संदेश देता है कि बड़े आर्थिक सुधारों को लागू करने में सरकार को भविष्य में भी कठिनाई हो सकती है। यहीं से बाजार में अनिश्चितता की शुरुआत होती है—और अनिश्चितता ही निवेश की सबसे बड़ी दुश्मन है।

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वैश्विक निवेशकों के लिए भारत केवल एक उभरती अर्थव्यवस्था नहीं, बल्कि एक “पॉलिसी स्टेबिलिटी स्टोरी” भी रहा है। जब संसद में बड़े विधेयक विफल होते हैं, तो अंतरराष्ट्रीय संस्थागत निवेशक—चाहे वे IMF जैसे संगठन हों या वर्ल्ड बैंक से जुड़े विश्लेषक—देश की जोखिम प्रोफाइल को नए सिरे से आंकते हैं। इससे विदेशी पूंजी प्रवाह पर सीधा असर पड़ता है और “वेट एंड वॉच” रणनीति हावी हो जाती है।
शेयर बाजार की प्रकृति ही मनोवैज्ञानिक है। यह अपेक्षाओं और भरोसे पर चलता है। जैसे ही राजनीतिक अस्थिरता या नीति संबंधी अनिश्चितता सामने आती है, निवेशकों का आत्मविश्वास डगमगाने लगता है। इसका तात्कालिक असर बाजार में गिरावट, वोलैटिलिटी और एफआईआई की बिकवाली के रूप में दिखाई देता है। विशेष रूप से तब, जब बाजार पहले से दबाव में हो।
इस घटनाक्रम में एक और महत्वपूर्ण पहलू “प्रोसीजरल रिस्क” का रहा। संसद में रूल 66 का निलंबन और विधेयकों का समेकन केवल राजनीतिक रणनीति नहीं, बल्कि बाजार के लिए एक संकेत था कि निर्णय लेने की प्रक्रिया में पारदर्शिता कम हो रही है। जब प्रक्रिया पर सवाल उठते हैं, तो “गवर्नेंस रिस्क प्रीमियम” बढ़ जाता है और निवेशक अतिरिक्त सावधानी बरतते हैं।
इसका प्रभाव केवल शेयर बाजार तक सीमित नहीं रहता। विदेशी निवेशकों की निकासी से रुपये पर दबाव बढ़ सकता है, जिससे वह डॉलर के मुकाबले कमजोर होता है। बॉन्ड मार्केट में यील्ड बढ़ती है, जिससे सरकार और कंपनियों के लिए उधारी महंगी हो जाती है। वहीं इक्विटी मार्केट में कंपनियों के भविष्य के मुनाफे को लेकर अनिश्चितता बढ़ जाती है, जिससे शेयरों में गिरावट आती है।

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हालांकि इस पूरी तस्वीर का एक सकारात्मक पहलू भी है। महिला सशक्तिकरण जैसे कदम, जैसे नारी शक्ति वंदन अधिनियम, दीर्घकाल में अर्थव्यवस्था के लिए बेहद फायदेमंद साबित हो सकते हैं। यदि महिला श्रम भागीदारी बढ़ती है, तो उपभोक्ता मांग, उत्पादन और जीडीपी तीनों में वृद्धि होती है। यह शेयर बाजार के लिए एक मजबूत “लॉन्ग-टर्म बुलिश ट्रिगर” बन सकता है।
दूसरी ओर, स्टार्टअप और क्विक-कॉमर्स सेक्टर में बढ़ते विवाद बाजार के लिए एक नया जोखिम बनकर उभरे हैं। ब्लिंकिट, स्विगी इंस्टामार्ट और जेप्टो जैसे प्लेटफॉर्म्स पर प्रेडेटरी प्राइसिंग के आरोप और पारंपरिक व्यापारियों का विरोध निवेशकों के लिए चिंता का विषय है। यदि घाटे में चल रही कंपनियां ऊंचे वैल्यूएशन पर आईपीओ लाती हैं और लिस्टिंग के बाद गिरती हैं, तो यह बाजार के भरोसे को कमजोर कर सकता है।
ऐसे समय में नियामक संस्थाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है। यदि वे निवेशकों के हितों की रक्षा नहीं कर पातीं, तो यह विदेशी निवेशकों के लिए “रेड फ्लैग” बन सकता है और पूंजी अन्य देशों की ओर मुड़ सकती है।
निष्कर्ष रूप में, 16-17 अप्रैल 2026 का घटनाक्रम यह स्पष्ट करता है कि राजनीति और बाजार अलग-अलग नहीं हैं। नीतिगत अनिश्चितता का असर तत्काल बाजार पर पड़ता है और निवेशकों का विश्वास सबसे महत्वपूर्ण कारक होता है।

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अब सवाल यह है—क्या यह गिरावट अवसर है या चेतावनी? इतिहास बताता है कि हर गिरावट जोखिम नहीं होती, कई बार यह अवसर भी बनती है। यदि सरकार आने वाले समय में नीतिगत स्पष्टता बढ़ाती है, आर्थिक सुधारों को गति देती है और निवेशकों का भरोसा बहाल करती है, तो यही गिरावट एक मजबूत “बाइंग अपॉर्च्युनिटी” साबित हो सकती है। लेकिन यदि अनिश्चितता बनी रहती है, तो यह दीर्घकालिक चुनौती में बदल सकती है।
भारतीय शेयर बाजार का भविष्य अब इस संतुलन पर टिका है—राजनीतिक स्थिरता और आर्थिक सुधारों के बीच सामंजस्य कितना मजबूत बनता है।

लेखक: एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी, गोंदिया (महाराष्ट्र)

सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण का संदेश देती काव्य गोष्ठी में प्रतिभाओं का सम्मान

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। राजकीय बौद्ध संग्रहालय गोरखपुर में विश्व धरोहर दिवस के अवसर पर क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्र, गोरखपुर एवं गोरखपुर लिटरेरी सोसायटी के संयुक्त तत्वावधान में “एक शाम भारतीय सांस्कृतिक धरोहर एवं संविधान के शिल्पकार के नाम” विषयक काव्य गोष्ठी एवं सम्मान समारोह आयोजित किया गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि कुलपति प्रो. पूनम टंडन, उप निदेशक डॉ. यशवन्त सिंह राठौड, डॉ. रीना मालवीय, परमजीत कौर, भारतीय स्टेट बैंक गोरखपुर के मुख्य प्रबंधक मनोज श्रीवास्तव, वरिष्ठ कलाकार हरप्रसाद सिंह एवं डॉ. भारतभूषण द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। मुख्य अतिथि कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने अपने संबोधन में कहा कि अपनी सांस्कृतिक धरोहरों का संरक्षण हम सभी की नैतिक जिम्मेदारी है। हमारी विरासत का संरक्षण भारतीय सांस्कृतिक वैभव को अभिव्यक्त करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

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कार्यक्रम की शुरुआत आसिया गोरखपुरी द्वारा सरस्वती वंदना से हुई। संचालन मिन्नत गोरखपुरी ने किया। काव्य गोष्ठी में अवधेश निगम “राजू”, सुभाष चंद्र यादव, प्रमोद चोखानी, कुंवर सचिन सिंह, एकता उपाध्याय, उत्कर्ष शुक्ला, गौतम गोरखपुरी, आसिया गोरखपुरी एवं रूद्रा शुक्ला ने काव्य पाठ कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया। कार्यक्रम संयोजक मिन्नत गोरखपुरी ने बताया कि इस अवसर पर सामाजिक एवं साहित्यिक क्षेत्र में योगदान देने वाले हसन जमाल बाबुआ भाई, डॉ. रीना मालवीय, संजय मिश्रा, स्वेच्छा श्रीवास्तव, अरेना बेग, डॉ. शाहीदा रहमान, बैजनाथ विश्वकर्मा, ज्ञान पाण्डेय एवं पूजा गुप्ता सहित कई लोगों को सम्मानित किया गया। उप निदेशक डॉ. यशवन्त सिंह राठौड ने विश्व धरोहर दिवस के महत्व पर प्रकाश डालते हुए “सोमनाथ स्वाभिमान पर्व” के अंतर्गत 19 अप्रैल 2026 को लखनऊ से सोमनाथ के लिए प्रारंभ होने वाली यात्रा की जानकारी दी। साथ ही संग्रहालय द्वारा भारत सरकार से प्राप्त “सोमनाथ स्वाभिमान पर्व” बुकलेट का वितरण भी किया गया।

विदाई समारोह में भावुक हुए छात्र, नए सफर के लिए मिली प्रेरणा

बरहज/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)l बी.आर.डी.बी.डी. पी.जी. कॉलेज आश्रम बरहज में बी.ए. छठवें सेमेस्टर के राजनीति विज्ञान विभाग के विद्यार्थियों का विदाई समारोह धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ आयोजित किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती एवं बाबा राघवदास के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन के साथ हुई।

इस अवसर पर अदिति राजभर, वर्षा पांडेय और पूजा ने मंगलाचरण, सरस्वती वंदना एवं स्वागत गीत प्रस्तुत कर वातावरण को भक्ति और उत्साह से भर दिया।

मुख्य अतिथि प्राचार्य प्रो. शम्भुनाथ तिवारी ने कहा कि विद्यार्थी जीवन का यह चरण नई जिम्मेदारियों की शुरुआत है और मेहनत व अनुशासन से ही सफलता प्राप्त की जा सकती है। उन्होंने विद्यार्थियों से जहां भी जाएं, अपने संस्कार और ज्ञान से संस्थान का नाम रोशन करने का आह्वान किया।

कार्यक्रम अध्यक्ष प्रो. दर्शना श्रीवास्तव ने कहा कि विदाई अंत नहीं, बल्कि नए सफर की शुरुआत है। राजनीति विज्ञान के विद्यार्थी समाज और राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

विशिष्ट अतिथि डॉ. अरविन्द पाण्डेय ने लक्ष्य निर्धारित कर निरंतर आगे बढ़ने की सलाह दी। डॉ. मंजू यादव ने आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच को सफलता की कुंजी बताया, जबकि डॉ. वेद प्रकाश सिंह ने समय के सदुपयोग और निरंतर अध्ययन पर जोर दिया।

इस दौरान सोनू जायसवाल सहित कई छात्र-छात्राओं ने अपने अनुभव साझा करते हुए महाविद्यालय में बिताए गए यादगार पलों को याद किया। राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। समारोह में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

करौंदी में जमीनी विवाद ने लिया खौफनाक मोड़: लाठी-डंडों से हमले में 70 वर्षीय वृद्ध की मौत, 10 नामजद

फाइल फोटो


बरहज/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। थाना क्षेत्र के ग्राम करौंदी में लंबे समय से चले आ रहे जमीनी विवाद ने शनिवार को हिंसक रूप ले लिया। मामूली कहासुनी के बाद दो पक्ष आमने-सामने आ गए और देखते ही देखते लाठी-डंडों से जमकर मारपीट शुरू हो गई। इस घटना में एक 70 वर्षीय वृद्ध की मौत हो गई, जबकि आधा दर्जन से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। पुलिस ने मामले में 10 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है और प्रधान समेत तीन आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है।
ग्रामीणों के अनुसार, करौंदी गांव में मवाजा यादव और बाबूलाल के बीच काफी समय से जमीन को लेकर विवाद चल रहा था। शनिवार को विवाद उस समय और बढ़ गया जब बाबूलाल के पुत्र द्वारा कथित रूप से विवादित भूमि पर मिट्टी डाली जा रही थी। इस पर मवाजा यादव ने आपत्ति जताई, जिससे दोनों पक्षों के बीच पहले कहासुनी हुई और फिर मामला हिंसक झड़प में बदल गया।
आरोप है कि एक पक्ष के लोगों ने घर में घुसकर न केवल वृद्ध बल्कि महिलाओं को भी बेरहमी से पीटा। लाठी-डंडों से किए गए हमले में कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों को आनन-फानन में महर्षि देवरहा बाबा मेडिकल कॉलेज, देवरिया में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान मवाजा यादव (70) पुत्र अलगू की मौत हो गई। उनकी मौत के बाद गांव में तनाव और बढ़ गया है।

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इस घटना में मवाजा यादव के अलावा कांता यादव (80), जयराम यादव (38), कलमी देवी (68) और ममता देवी (35) गंभीर रूप से घायल हुए हैं। वहीं दूसरे पक्ष के शिवकुमार यादव को भी चोटें आई हैं। सभी घायलों का इलाज चल रहा है।
मृतक के पुत्र जयराम यादव ने थाने में दी गई तहरीर में आरोप लगाया है कि मिट्टी डालने से मना करने पर ग्राम प्रधान राजकुमार (35), शिवकुमार पुत्र हरि यादव, राजेश, शेषनाथ, विनीत, बाबूलाल, अंकित, सत्यम, मुन्नी देवी और नंदिनी ने गाली-गलौज करते हुए लाठी-डंडों से हमला कर दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि हमलावरों ने घर में घुसकर जानलेवा हमला किया और परिवार की महिलाओं को भी नहीं बख्शा।
पुलिस ने तहरीर के आधार पर सभी 10 आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है। थानाध्यक्ष विशाल उपाध्याय ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए तीन आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। अन्य आरोपियों की तलाश जारी है और जल्द ही सभी को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

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घटना के बाद गांव में तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि हालात पूरी तरह नियंत्रण में हैं और शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए लगातार निगरानी की जा रही है। प्रशासन ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और शांति बनाए रखने की अपील की है।
इस घटना ने एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में जमीन विवादों के कारण बढ़ती हिंसा को उजागर कर दिया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते विवाद का समाधान किया जाता, तो इतनी बड़ी घटना टाली जा सकती थी।