Sunday, May 31, 2026
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Export Levies: पेट्रोल, डीजल और ATF के निर्यात पर केंद्र सरकार ने बढ़ाया शुल्क, 1 जून से लागू होंगी नई दरें

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा)। केंद्र सरकार ने पेट्रोल, डीजल और विमानन टर्बाइन ईंधन (ATF) के निर्यात पर लगने वाले शुल्क की नई दरों की घोषणा कर दी है। वित्त मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार नई दरें 1 जून 2026 से अगले 15 दिनों तक प्रभावी रहेंगी। सरकार का कहना है कि यह फैसला देश में पेट्रोलियम उत्पादों की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने और निर्यात को संतुलित करने के उद्देश्य से लिया गया है।

पश्चिम एशिया संकट के बीच सरकार का बड़ा कदम

गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने 27 मार्च 2026 को पेट्रोल, डीजल और ATF के निर्यात पर विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (SAED) और रोड एवं इंफ्रास्ट्रक्चर सेस (RIC) लागू किया था। उस समय पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक तेल बाजार में बढ़ती अनिश्चितता के चलते यह निर्णय लिया गया था।

सरकार का उद्देश्य घरेलू जरूरतों को प्राथमिकता देना और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर भारतीय बाजार पर कम करना है।

हर 15 दिन में होती है शुल्क दरों की समीक्षा

वित्त मंत्रालय के अनुसार, पेट्रोलियम उत्पादों पर लगाए गए निर्यात शुल्क की समीक्षा प्रत्येक 15 दिन में की जाती है। समीक्षा के दौरान अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल, पेट्रोल, डीजल और ATF की औसत कीमतों का विश्लेषण किया जाता है और उसी आधार पर नई दरें तय की जाती हैं।

इससे पहले शुल्क दरों में संशोधन 16 मई 2026 को किया गया था।

1 जून से लागू नई निर्यात शुल्क दरें

नई अधिसूचना के अनुसार:

  • पेट्रोल के निर्यात पर शुल्क: ₹1.5 प्रति लीटर
  • डीजल के निर्यात पर शुल्क: ₹13.5 प्रति लीटर
  • ATF (एविएशन टर्बाइन फ्यूल) के निर्यात पर शुल्क: ₹9.5 प्रति लीटर

इन शुल्कों का बड़ा हिस्सा विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (SAED) के रूप में वसूला जाएगा।

आम उपभोक्ताओं पर नहीं पड़ेगा असर

सरकार ने स्पष्ट किया है कि घरेलू बाजार में बिक्री के लिए उपलब्ध पेट्रोल और डीजल पर लगने वाले केंद्रीय उत्पाद शुल्क में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इसका मतलब है कि फिलहाल आम उपभोक्ताओं को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में इस फैसले के कारण कोई सीधा असर देखने को नहीं मिलेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि निर्यात शुल्क जारी रखने से देश में ईंधन की उपलब्धता सुनिश्चित होगी और वैश्विक बाजार में संभावित मूल्य वृद्धि का प्रभाव घरेलू बाजार पर सीमित रहेगा।

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