जम्मू-कश्मीर में विधायकों की सैलरी बढ़ाने की तैयारी, 1.80 लाख से 3 लाख रुपये करने का प्रस्ताव

श्रीनगर (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने सोमवार को विधानसभा के चल रहे पतझड़ सत्र में पांच महत्वपूर्ण विधेयक पेश किए। इनमें विधायकों और मंत्रियों के वेतन-भत्तों में संशोधन, पूर्व विधायकों की पेंशन बढ़ाने, जीएसटी कानून में बदलाव और कारोबार को आसान बनाने से जुड़े प्रस्ताव शामिल हैं।
सबसे अधिक चर्चा विधायकों के मासिक पारिश्रमिक में प्रस्तावित बढ़ोतरी को लेकर है। प्रस्ताव के अनुसार मौजूदा करीब 1.80 लाख रुपये मासिक कुल पारिश्रमिक को बढ़ाकर 3 लाख रुपये प्रति माह किए जाने की सिफारिश की गई है। हालांकि, यह अभी प्रस्ताव के स्तर पर है और अंतिम फैसला विधायी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
मुख्यमंत्री ने जम्मू-कश्मीर विधानसभा के सदस्यों के वेतन एवं भत्तों से संबंधित कानून में संशोधन का विधेयक भी सदन में रखा। इसके साथ ही ‘जम्मू-कश्मीर राज्य विधानसभा सदस्य पेंशन अधिनियम, 1984’ में संशोधन का प्रस्ताव रखा गया है। इन प्रावधानों का उद्देश्य मौजूदा विधायकों, मंत्रियों और पूर्व सदस्यों को मिलने वाले वेतन, भत्तों तथा पेंशन की मौजूदा व्यवस्था की समीक्षा करना है।
सदन की समिति की सिफारिश के बाद आया प्रस्ताव
विधायकों के पारिश्रमिक में बदलाव का प्रस्ताव विधानसभा के पिछले सत्र में हुई चर्चा के बाद सामने आया है। इस विषय पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के सदस्यों वाली सदन की समिति ने विचार-विमर्श किया था। समिति की सिफारिशों के आधार पर मासिक पारिश्रमिक में संशोधन का प्रस्ताव तैयार किया गया है।
प्रस्ताव में टेलीफोन खर्च, आवास और हाउसिंग लोन समेत विभिन्न सुविधाओं एवं भत्तों से जुड़े प्रावधानों को भी शामिल किया गया है। हालांकि, इन सभी बदलावों की अंतिम स्थिति विधेयकों पर सदन में होने वाली चर्चा और आवश्यक विधायी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही तय होगी।
कारोबार आसान बनाने पर भी जोर
वेतन और पेंशन से जुड़े प्रस्तावों के अलावा मुख्यमंत्री ने ऐसा विधेयक भी पेश किया, जिसका उद्देश्य विभिन्न कानूनों को एकीकृत करते हुए अनुमति आधारित नियंत्रणों की जगह अधिक नियम आधारित व्यवस्था विकसित करना है।
प्रस्तावित कानून के जरिए नागरिकों और कारोबारियों के लिए निवेश, व्यवसाय संचालन और योजनाओं को लेकर अधिक स्पष्टता और निश्चितता लाने की बात कही गई है। इसके प्रमुख उद्देश्यों में जम्मू-कश्मीर में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस और ईज ऑफ लिविंग को बेहतर करना, रोजगार के अवसर बढ़ाना, निवेश को प्रोत्साहित करना और दीर्घकालिक आर्थिक विकास को गति देना शामिल है।
GST कानून में भी संशोधन का प्रस्ताव
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने वित्त मंत्री के रूप में जम्मू-कश्मीर गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स एक्ट, 2017 में संशोधन से संबंधित विधेयक भी सदन में पेश किया। यह मौजूदा पतझड़ सत्र में पेश किए गए पांच विधेयकों में शामिल है।
सोमवार को पेश विधेयकों में वेतन-भत्तों और पूर्व विधायकों की पेंशन से जुड़े प्रस्तावों के अलावा जीएसटी कानून में संशोधन तथा कुछ अपराधों से संबंधित प्रावधानों को तर्कसंगत बनाने का प्रस्ताव भी शामिल है। अब इन विधेयकों पर विधानसभा की निर्धारित प्रक्रिया के तहत चर्चा और आगे की कार्रवाई होगी।