हरितालिका तीज व्रत पर आचार्य अजय शुक्ल ने बताया धार्मिक
महत्व

सलेमपुर/देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)
हरितालिका तीज व्रत सनातन धर्म व संस्कृति में विशेष धार्मिक एवं आध्यात्मिक महत्व रखता है। भगवान शिव व माता पार्वती के पुनर्मिलन व विवाह का प्रतीक है तीज व्रत। उक्त बातें बताते हुए आचार्य अजय शुक्ल ने कहा कि इस व्रत में सुहागिन महिलाएं पति की दीर्घायु, सुख-समृद्धि और परिवार की मंगलकामना के लिए श्रद्धापूर्वक निर्जला व्रत रखती हैं। वहीं कुंवारी कन्याएं भी अच्छे वर की प्राप्ति की कामना से यह व्रत करती हैं। यह व्रत 14 सितम्बर दिन सोमवार को इस बार मनाया जाएगा।
आचार्य अजय शुक्ल ने बताया कि पौराणिक मान्यता के अनुसार माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी। माता पार्वती की इसी तपस्या और श्रद्धा से जुड़ा हरितालिका तीज का व्रत महिलाओं के लिए आस्था, समर्पण और प्रेम का प्रतीक माना जाता है। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है।
उन्होंने कहा कि तीज व्रत के दौरान महिलाएं प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करती हैं और व्रत का संकल्प लेकर भगवान शिव एवं माता पार्वती का पूजन करती हैं। पूजा में बेलपत्र, फल, फूल, धूप-दीप और नैवेद्य अर्पित किया जाता है। कई स्थानों पर महिलाएं तीज की कथा का श्रवण एवं भजन-कीर्तन भी करती हैं।
तीज केवल धार्मिक पर्व ही नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, पारिवारिक प्रेम और नारी आस्था का भी महत्वपूर्ण प्रतीक है। यह व्रत भाद्रपद मास में मानसूनी हरियाली, उल्लास, और प्रकृति के श्रृंगार से जुड़ा है।