बोया पेंड़ बबूल का आम कहाँ से होय

करता था सो क्यों किया,
अब करि क्यों पछताय।
बोया पेड़ बबूल का
आम कहां से खाये॥

बुरा मत सोचो, बुरा मत
कहो और बुरा मत देखो,
गांधी जी के तीनों बानरों,
जैसा सबका जीवन होय,
किसी का बुरा जो सोचना
अपना बुरा ही होय,
औरों का भला करो तो,
अपना भला भी होय ॥

मूरख हृदय न चेत
जो गुरु मिलै बिरंचि सम।
फूलहिं फलहिं न बेंत,
जदपि सुधा बरसहिं जलधि॥

मूर्ख व्यक्ति को गलती बतलाना,
उसकी घृणा का पात्र बन जाना है,
विद्वत जन की गलती इंगित करना,
उससे प्रशंसा और सम्मान पाना है।

बुरी सोच पाकर खुद का
मन मैला हो जाता है,
सकारात्मकता तज,
नकारात्मक बन जाता है।

जीवन में दुःख, अशांति, ईर्ष्या, द्वेष
जैसे विध्वंसक विचार बन जाते हैं,
सकारात्मकता से सृजन, शांति, प्रेम
व विकास हम सब अपना पाते हैं ।

लोभ, मोह, स्वार्थ आदि भाव
बुरी सोच के कारक ही होते हैं,
औरों का अहित भी करने में,
तब ऐसे लोग नहीं सकुचाते हैं।

प्रेम और अपनत्व सभी के प्रति
जब मानव मन में पैदा होते हैं,
सबके हित साधन के कारक,
आदित्य तभी सब अपना लेते हैं।

•कर्नल आदि शंकर मिश्र ‘आदित्य’

rkpnews@somnath

Recent Posts

जमाना गया

इक्कीसवीं शताब्दी काछब्बीसवाँ साल आ चुका है,आध्यात्मिकता का स्थान,भौतिकता ने ले लिया है,भारतीय सभ्यता औरहमारी…

46 minutes ago

हीटवेव से फसलों की सुरक्षा के लिए कृषि विभाग ने जारी किए जरूरी दिशा-निर्देश

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। बढ़ते तापमान और संभावित हीटवेव को देखते हुए कृषि विभाग ने…

49 minutes ago

25 से 27 अप्रैल तक होगी होमगार्ड भर्ती परीक्षा, नकलविहीन कराने के सख्त निर्देश

संतकबीरनगर (राष्ट्र की परम्परा)। जनपद के 7 परीक्षा केंद्रों पर 25, 26 और 27 अप्रैल…

52 minutes ago

घर से निकले युवक का शव रेलवे लाइन पर मिला, परिवार में मचा कोहराम

सलेमपुर रेलवे लाइन पर मिला बनकटा निवासी का शव, क्षेत्र में सनसनी देवरिया (राष्ट्र की…

2 hours ago

दिल हुए पत्थर (हिंदी कविता)

✍️ – संजय एम. तराणेकर जहाँ दिल ‘पत्थर’ के हो जाते हैं,वहाँ पे सोना भी…

2 hours ago

बलिया में निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर: 120 लोगों की जांच, 35 ने किया रक्तदान, जानिए ऐसे कैंप का लाभ कैसे लें

सुखपुरा/बलिया (राष्ट्र की परम्परा)। ए.एस.एम. कॉन्वेंट स्कूल के संस्थापक स्व. आनंद सिंह (पिंटू) की पांचवीं…

2 hours ago