कहीं पेड़ गिरे तो कहीं मकानों को नुकसान, गांवों की गलियां जलमग्न, जल निकासी व्यवस्था की खुली पोल

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। जिले में बीते दो दिनों से लगातार हो रही बारिश और तेज हवाओं ने जनजीवन की रफ्तार प्रभावित कर दी है। शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक कई स्थानों पर जलभराव की स्थिति बनी हुई है। तेज हवा के कारण कहीं पेड़ और डालियां टूटकर सड़कों पर गिर गईं तो कहीं कच्चे और आवासीय मकानों को नुकसान पहुंचा है। निचले इलाकों में पानी भरने से ग्रामीणों को आवागमन में काफी परेशानी उठानी पड़ रही है।

धान की फसल को सबसे अधिक नुकसान की आशंका

लगातार बारिश और तेज हवा ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। जिले के कई क्षेत्रों में धान की तैयार फसल खेतों में जमीन पर बिछ गई है। तेज हवा के झोंकों से धान की बालियां गिरने और फसल को नुकसान पहुंचने की आशंका बढ़ गई है। खेतों में पानी भर जाने से कटाई का काम भी प्रभावित होने की संभावना है।किसानों का कहना है कि महीनों की मेहनत के बाद तैयार हुई फसल पर मौसम की मार पड़ रही है। यदि बारिश जल्द नहीं थमी और खेतों से पानी की निकासी नहीं हुई तो उत्पादन प्रभावित होने के साथ ही धान के दाने की गुणवत्ता पर भी असर पड़ सकता है।

रास्तों पर गिरे पेड़, आवागमन प्रभावित

तेज हवाओं के चलते जिले के कई हिस्सों में पेड़ और उनकी बड़ी डालियां टूटकर रास्तों पर गिर गईं। इससे कुछ मार्गों पर आवागमन बाधित रहा। कई स्थानों पर पेड़ मकानों के आसपास गिरने से नुकसान की स्थिति बनी। ग्रामीणों और राहगीरों ने पेड़ों की डालियां हटाकर किसी तरह आवागमन बहाल किया।बारिश और तेज हवा के कारण विद्युत व्यवस्था भी प्रभावित हुई। ग्रामीण क्षेत्रों में जल निकासी की व्यवस्था की स्थिति भी बारिश के दौरान सामने आ गई। निचले इलाकों में पानी जमा होने से कई गांवों की गलियां जलमग्न हो गईं। लोगों को पानी के बीच से होकर घरों तक पहुंचना पड़ा।

जल निकासी की व्यवस्था कराने की मांग

ग्रामीणों ने जलभराव वाले स्थानों से तत्काल पानी निकासी की व्यवस्था कराने की मांग की है। उनका कहना है कि कई स्थानों पर नालियों और जल निकासी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के कारण बारिश का पानी लंबे समय तक जमा रहता है, जिससे लोगों को परेशानी उठानी पड़ती है।मौसम खराब रहने से किसानों की नजर अब आसमान पर टिकी है। किसान बारिश थमने और खेतों से पानी निकलने का इंतजार कर रहे हैं, ताकि जमीन पर गिरी धान की फसल को संभाला जा सके और समय से कटाई शुरू हो सके। लगातार बारिश ने किसानों के साथ प्रशासन के सामने भी जल निकासी और प्रभावित क्षेत्रों में राहत व्यवस्था की चुनौती बढ़ा दी है।