जो समाज अपनी कविता, कला, भाषा को नहीं बचा सकता, वह गुलामी से नहीं बच सकता: प्रो. चित्तरंजन मिश्र
आलोचना का काम जड़ता से टकराना है: प्रो. चित्तरंजन मिश्र मौलिक मेधा अपनी भाषा में पनपती है: प्रो. नन्दकिशोर पाण्डेय गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में चल…
