कुशीनगर (राष्ट्र की परम्परा)। कृषि एवं उद्यानिकी क्षेत्र में आधुनिक तकनीक अपनाकर किसान अपनी आय बढ़ाने के साथ-साथ कृषि उपज के प्रसंस्करण और विपणन को भी नई दिशा दे रहे हैं। विकास खण्ड कसया के ग्राम कुड़वा उर्फ दिलीपनगर निवासी कृषक जितेन्द्र कुशवाहा ने प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन (पीएमएफएमई) योजना का लाभ लेकर केले के लिए राइपेनिंग चैम्बर स्थापित किया है। इससे उन्हें स्वरोजगार के साथ बेहतर आय का अवसर मिला है, वहीं क्षेत्र के किसानों को भी स्थानीय स्तर पर अपनी उपज बेचने की सुविधा मिल रही है।जितेन्द्र कुशवाहा बताते हैं कि पहले वह परंपरागत रूप से गन्ना, गेहूं और धान की खेती करते थे। इन फसलों से मेहनत और लागत के बाद उन्हें लगभग 26 से 32 हजार रुपये तक का अनुमानित लाभ प्राप्त होता था। आय बढ़ाने के उद्देश्य से वह कृषि से जुड़े किसी ऐसे व्यवसाय की तलाश में थे, जिससे आसपास के किसानों को भी लाभ मिल सके।इसी दौरान उन्हें उद्यान विभाग द्वारा संचालित पीएमएफएमई योजना की जानकारी मिली। विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों के मार्गदर्शन में उन्होंने केले के व्यवसाय से जुड़कर राइपेनिंग चैम्बर स्थापित करने का निर्णय लिया। इसके लिए बैंक से 5,98,500 रुपये का ऋण स्वीकृत हुआ। योजना के अंतर्गत उन्हें 35 प्रतिशत सब्सिडी के रूप में 2,32,750 रुपये की धनराशि प्राप्त हुई।राइपेनिंग चैम्बर स्थापित होने के बाद जितेन्द्र कुशवाहा आसपास के किसानों से केले की खरीद कर रहे हैं। किसान अपने खेतों में उत्पादित केले को उनके पास लाते हैं और उन्हें नकद मूल्य पर बेचते हैं। इसके बाद केले को राइपेनिंग चैम्बर में वैज्ञानिक एवं नियंत्रित वातावरण में पकाकर बाजार में भेजा जाता है। इससे किसानों को स्थानीय स्तर पर बाजार उपलब्ध हो रहा है और उपज को मांग के अनुसार बाजार तक पहुंचाने में सुविधा मिल रही है।राइपेनिंग चैम्बर के माध्यम से केले को आवश्यकता के अनुसार पकाकर बाजार में भेजना संभव हो रहा है। इससे उपज की गुणवत्ता बनाए रखने और बाजार की मांग के अनुरूप केले उपलब्ध कराने में मदद मिल रही है। साथ ही किसानों को दूर के बाजारों पर निर्भरता कम होने से अपनी उपज की बिक्री के लिए स्थानीय विकल्प मिल गया है।जितेन्द्र कुशवाहा का कहना है कि पीएमएफएमई योजना के तहत विभागीय मार्गदर्शन, बैंक ऋण और सब्सिडी की सहायता से राइपेनिंग चैम्बर स्थापित करना संभव हुआ। अब केले की खरीद, पकाने और विपणन के माध्यम से उन्हें अच्छी आय प्राप्त हो रही है। साथ ही आसपास के किसानों को भी उनकी उपज बेचने के लिए स्थानीय बाजार उपलब्ध हो रहा है।
जितेन्द्र कुशवाहा की पहल कृषि उत्पादन को प्रसंस्करण और बाजार से जोड़ने का उदाहरण बन रही है। उनकी सफलता यह दर्शाती है कि किसान खेती के साथ-साथ कृषि आधारित प्रसंस्करण एवं विपणन गतिविधियों से जुड़कर आय के अतिरिक्त स्रोत विकसित कर सकते हैं। पीएमएफएमई योजना के माध्यम से स्थापित राइपेनिंग चैम्बर उनके लिए आर्थिक आत्मनिर्भरता का साधन बनने के साथ क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा का माध्यम बना है।