Category: कविता

ज्ञान

चरित्र की महिमा शांत स्थिर होती हैआचरण जैसे भी हों अनुसरण होते हैंज्ञान व पैसा बहती धारा के किनारे हैंएक दूसरे से बिलकुल अलग होते हैं। ज्ञान देना यहाँ सब…

जननीजन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयशी

जो भी कहूँ जितना भी कहूँ,बेहतर से बेहतर शब्द चुनू,महिला शक्ति की महिमा में,श्रद्धारूपिणी की गरिमा में। जन्म के समय वो महिला थी,जिसने थाम लिया था हाथों में,डाक्टर, नर्स, दाई…

प्रयास हमें बहुत कुछ सिखा जाते हैं

— डॉ. कर्नल आदिशंकर मिश्र ‘आदित्य’ छोटी-छोटी बूंदें जब निरंतर बरसती हैं,तो तालाब और पोखरे सब भर जाते हैं।नदियों का पानी धारा बन बहता है,और आखिर समुद्र में जा मिलता…

युद्ध विभीषिका

युद्ध की विभीषिका में युवा सैनिक,जिसे जानते नहीं उसे जान से मारते हैं,वे न उसे प्रेम करते हैं न घृणा करते हैं,बस किसी का बर्बर आदेश मानते हैं। और ऐसे…

अच्छा पेड़–अच्छा फल

✍️ डा० कर्नल आदि शंकर मिश्र ‘आदित्य’ ‘विद्या वाचस्पति’ जीवन सफ़र उनके लिए सुहावना है,जो इस सफ़र का आनंद उठाते हैं।कठिन वही बना लेते हैं राहों को,जो तुलना में अपना…

हम या आप

अपना हाथ देखूँ, हाथ अपना है,पर स्वयं तो हाथ नहीं हूँ मैं,ऐसे ही अपना पैर देखूँ,पर पैर भी स्वयं नहीं हूँ मैं,अपना सिर भी देखूँ,पर सिर भी स्वयं नहीं हूँ…

सच देखो, सच सुनो, सच बोलो: सकारात्मक सोच और सादा जीवन का संदेश

आज के दौर में जब भ्रम, दिखावा और नकारात्मकता तेजी से बढ़ रही है, तब “सच देखो सच सुनो सच बोलो” का संदेश हमें जीवन की वास्तविक दिशा दिखाता है।…

✍️ प्रेम का रंग – त्याग, सहिष्णुता और ईमानदारी की प्रेरक कविता

प्रेम का रंग चढ़ता चला गया,यूँ लगा कि दुनिया हमारी है,त्याग का यत्न जब सीखा तोऐसा लगा कि जन्नत हमारी है।जीवन का साथ निभाता चला गया,समस्याएँ भी सुलझाता चला गया,दहशतगर्दी…

फागुन–चैत की बज उठी शहनाई: वसंत, होली और आम्रकुंज की अमराई का काव्य उत्सव

भारतीय ऋतुओं में वसंत ऋतु केवल मौसम नहीं, बल्कि जीवन में नवचेतना का उत्सव है। फागुन–चैत के आते ही खेत-खलिहान, बाग-बगीचे, वन-उपवन और जन-मन—सब उल्लास से भर उठते हैं। इसी…

सच और झूठ का विकल्प

✍️ डॉ० कर्नल आदिशंकर मिश्र ‘आदित्य’ सच बोलना मानव की मूल प्रवृत्ति है,सच से ही जीवन में पवित्रता सृजित है।झूठ सुनकर जब मन व्यथित हो जाता है,तो झूठ कहने से…

शिव भक्ति साहित्य में नया आयाम: आदित्य–शिव स्तुति

आदित्य–शिव स्तुति: महादेव की दिव्य आराधना में ओतप्रोत काव्यलेखक: डॉ. कर्नल आदि शंकर मिश्र ‘आदित्य’🔱 भूमिकाआदित्य–शिव स्तुति भगवान शिव के सगुण-निर्गुण स्वरूप, उनके महाकाल रूप, औंकार तत्व और कैलासवासी भोलेनाथ…

निर्विकार प्रेम कविता: भक्ति, धर्म और ईश्वर का सार

— डॉ. कर्नल आदिशंकर मिश्र ‘आदित्य’ प्रेम केवल भावना नहीं, यह भक्ति का स्वरूप है,प्रेम पूजा है, जहां न स्वार्थ है, न अहंकार का रूप है।जब प्रेम निस्वार्थ बन जाए,…

संत से पूछिए क्रोध क्या होता है

✍️ डाॅ. कर्नल आदिशंकर मिश्र ‘आदित्य’ जीत–हार का तजुर्बा अजीब होता है,जीत पर सारी दुनिया गले लगाती है,हार के बाद तो नज़दीक नहीं आती,बल्कि अनावश्यक मुँह चिढ़ाती है। असफलता पर…

सुप्रभात तो एक बहाना है: आस्था, धैर्य और जीवन दर्शन पर प्रेरक कविता

लेखक: डॉ. कर्नल आदिशंकर मिश्र, ‘आदित्य’ सुप्रभात तो एक बहाना हैजब सूर्य की कृपा होती है, सूर्य कीकिरणें प्रकाश देती हैं, भगवान कीकृपा से ही उसके दर्शन हो सकते हैंऔर…

आत्मविश्वास व परोपकार

• डॉ. कर्नल आदिशंकर मिश्र ‘आदित्य’ दर्पण का काम ही है सबको सबकीसूरत दिखाना चाहे अच्छी हो या नहीं,कितना निरपेक्ष है दर्पण का सिद्धांत,कितना लाजवाब है दर्पण का किरदार। दर्पण…