ड्रैगन फ्रूट की खेती ने बदली किसान अनिल द्विवेदी की तकदीर, आधे हेक्टेयर से ₹10.80 लाख का शुद्ध लाभ


कुशीनगर (राष्ट्र की परम्परा)। परंपरागत धान और गेहूं की खेती से अपेक्षित आमदनी न मिलने पर कुशीनगर जिले के विशुनपुरा विकासखंड के पड़री पिपरपाती गांव निवासी किसान अनिल द्विवेदी ने बागवानी की ओर कदम बढ़ाया। आधुनिक तकनीक और उद्यान विभाग की योजनाओं का लाभ उठाकर उन्होंने महज 0.50 हेक्टेयर भूमि में ड्रैगन फ्रूट की खेती शुरू की और इससे ₹10,80,157 का शुद्ध लाभ अर्जित किया।
धान-गेहूं से आगे बढ़कर अपनाई नई खेती
किसान अनिल द्विवेदी पहले मुख्य रूप से धान और गेहूं की खेती करते थे। खेती में लागत, मेहनत और आमदनी के बीच अपेक्षित संतुलन नहीं बन पा रहा था। ऐसे में उन्होंने पारंपरिक फसलों के साथ अधिक संभावनाओं वाली बागवानी फसल अपनाने का निर्णय लिया।
इसी क्रम में एकीकृत बागवानी विकास मिशन योजना के तहत ड्रैगन फ्रूट की खेती के लिए उनका पंजीकरण हुआ। उद्यान विभाग के तकनीकी सहयोग और मार्गदर्शन में उन्होंने आधे हेक्टेयर क्षेत्र में ड्रैगन फ्रूट के पौधे लगाए।
ड्रिप सिंचाई से आसान हुआ फसल प्रबंधन
ड्रैगन फ्रूट की खेती में सिंचाई और पौधों की नियमित देखभाल महत्वपूर्ण होती है। अनिल द्विवेदी को ‘पर ड्रॉप मोर क्रॉप’ माइक्रो इरिगेशन योजना के तहत ड्रिप सिंचाई की सुविधा मिली। इससे पौधों तक जरूरत के अनुसार पानी पहुंचाने और सिंचाई व्यवस्था को नियंत्रित तरीके से संचालित करने में मदद मिली।
उद्यान विभाग की ओर से समय-समय पर मिले तकनीकी मार्गदर्शन से उन्होंने पौधों की देखभाल, सिंचाई और उत्पादन से जुड़ी गतिविधियों को व्यवस्थित ढंग से आगे बढ़ाया।
₹18.75 लाख की आय, खर्च घटाने के बाद ₹10.80 लाख लाभ
कृषक के अनुसार ड्रैगन फ्रूट की खेती से उन्हें कुल ₹18,75,000 की आय प्राप्त हुई। खेती पर ₹7,94,843 खर्च हुआ। इस तरह सभी खर्चों को घटाने के बाद उनका शुद्ध लाभ ₹10,80,157 रहा।
आधे हेक्टेयर भूमि से मिली इस आमदनी ने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूती देने के साथ ही अनिल द्विवेदी का भरोसा भी बढ़ाया है कि आधुनिक बागवानी को योजनाबद्ध तरीके से अपनाकर सीमित भूमि से बेहतर आय हासिल की जा सकती है।
दूसरे किसानों को भी आधुनिक खेती का संदेश
अनिल द्विवेदी का कहना है कि किसान पारंपरिक खेती के साथ आधुनिक और बाजार आधारित बागवानी फसलों को भी अपनाएं। सरकारी योजनाओं, तकनीकी मार्गदर्शन और आधुनिक सिंचाई प्रणालियों का सही उपयोग खेती को अधिक लाभकारी बनाने में मदद कर सकता है।
ड्रैगन फ्रूट की खेती से मिली सफलता अब उनके लिए केवल अतिरिक्त आमदनी का माध्यम नहीं, बल्कि कृषि को एक लाभकारी व्यवसाय के रूप में आगे बढ़ाने का आधार बन गई है। उनकी सफलता आसपास के किसानों के लिए भी नई फसलों और आधुनिक कृषि तकनीकों की संभावनाओं का उदाहरण प्रस्तुत करती है।कृषक विवरण: अनिल द्विवेदी, ग्राम पड़री पिपरपाती, विकासखंड विशुनपुरा, जनपद कुशीनगर | क्षेत्रफल: 0.50 हेक्टेयर | शुद्ध लाभ: ₹10,80,157