Friday, July 10, 2026
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चिराग पासवान का राजनीतिक तंज – “दिल्ली जैसी राजनीति”

पटना (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)बिहार की राजनीति एक बार फिर गर्मा गई है। जनसुराज पार्टी (JSP) के संस्थापक प्रशांत किशोर ने हाल ही में एनडीए के घटक दल भाजपा और जदयू के कई नेताओं पर गंभीर आरोप लगाए। इसके बाद उनके करीबी और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के अध्यक्ष व केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने उन्हें राजनीतिक रूप से अरविंद केजरीवाल जैसा करार दिया। चिराग ने सीधे नाम लिए बिना कहा कि “दिल्ली में ऐसी राजनीति पहले हो चुकी है”। प्रशांत किशोर के बयानों और चिराग की प्रतिक्रिया ने राज्य की राजनीति में नए समीकरणों और पुराने रिश्तों को सुर्खियों में ला दिया है।
लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के अध्यक्ष चिराग पासवान और प्रशांत किशोर की दोस्ती पुरानी है। बावजूद इसके, जदयू नेताओं पर हमलावर हुए प्रशांत किशोर की तुलना करते हुए चिराग ने अप्रत्यक्ष रूप से कहा कि उनकी राजनीति का अंदाज दिल्ली की राजनीति से मिलता-जुलता है।
प्रशांत किशोर ने एनडीए के दो बड़े दलों—भारतीय जनता पार्टी (BJP) और जनता दल यूनाइटेड (JDU)—के प्रमुख चेहरों सम्राट चौधरी, अशोक चौधरी, मंगल पांडे, दिलीप जायसवाल और संजय जायसवाल पर भ्रष्टाचार और प्रशासनिक विफलताओं को लेकर निशाना साधा था।

चिराग पासवान ने इन आरोपों को लेकर प्रत्यक्ष टिप्पणी नहीं की, लेकिन अरविंद केजरीवाल के अंदाज से तुलना कर साफ संकेत दे दिया कि बिहार की राजनीति अब नई दिशा में आगे बढ़ रही है।

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मध्यप्रदेश: बुरहानपुर अस्पताल में नाबालिग ने बच्ची को फेंका, कचरे के ढेर पर गिरी, हालत स्थिर

मध्यप्रदेश/बुरहानपुर (राष्ट्र की परम्परा)। ज़िला अस्पताल बुरहानपुर में रविवार सुबह एक चौंकाने वाली घटना सामने आई। जानकारी के अनुसार, एक नाबालिग लड़की ने अस्पताल के वॉशरूम में बच्ची को जन्म देने के बाद कथित रूप से नवजात को अस्पताल की बालकनी से नीचे फेंक दिया।

सौभाग्य से नवजात बच्ची नीचे पड़े कचरे और प्लास्टिक के ढेर पर गिरी, जिससे उसकी जान बच गई। बच्ची के गले में हल्की चोट आई है। डॉक्टरों ने उसे तुरंत विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई (SNCU) में भर्ती कराया, जहां उसकी हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है।

पुलिस ने शुरू की जांच

अस्पताल सूत्रों का कहना है कि नाबालिग प्रसव के बाद घबराई हुई थी और इसी दौरान उसने यह कदम उठाया। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी।

लालबाग थाना प्रभारी अमित सिंह यादव ने बताया कि – “घटना की परिस्थितियों की जांच की जा रही है। विस्तृत जानकारी जांच पूरी होने पर सामने आएगी।”

घटना ने उठाए सुरक्षा पर सवाल

यह मामला अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था और नाबालिग गर्भधारण जैसी गंभीर सामाजिक समस्या पर कई सवाल खड़े करता है।

मासूम की जान गई, 5 महीने में दूसरी दर्दनाक घटना

राजकोट में कुत्तों का कहर, 5 वर्षीय बच्चे की मौत, प्रशासन पर सवाल

राजकोट (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। शहर के बाहरी इलाके टॉपर वेरावल में सोमवार सुबह एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई। रिश्तेदार के घर आए 5 वर्षीय मासूम बच्चे पर अचानक आवारा कुत्तों ने हमला कर दिया। हमले में बच्चे की मौके पर ही मौत हो गई। महज़ पांच महीने के भीतर यह दूसरी घटना है, जब आवारा कुत्तों ने मासूम की जान ले ली है। इस हादसे ने स्थानीय लोगों में भय और आक्रोश दोनों बढ़ा दिए हैं, वहीं प्रशासन पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं कि आखिर कुत्तों के आतंक पर काबू क्यों नहीं पाया जा रहा।
सोमवार सुबह टॉपर वेरावल इलाके में 5 वर्षीय मासूम पर झुंड में आए आवारा कुत्तों ने हमला कर दिया।
5 महीने पहले भी राजकोट में इसी तरह के हमले में एक बच्चे की मौत हुई थी। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द आवारा कुत्तों की बढ़ती समस्या पर ठोस कदम उठाए जाएं।

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नेपाल में सियासी भूचाल: जेन-जी आंदोलन जांच तेज, पूर्व पीएम ओली समेत 5 बड़े नेताओं के पासपोर्ट जब्त

काठमांडू (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। नेपाल की अंतरिम प्रधानमंत्री सुशीला कार्की की सरकार ने जेन-जी आंदोलन (Gen-Z Protest) की जांच को नया मोड़ देते हुए बड़ा फैसला सुनाया है। सरकार ने पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और चार शीर्ष अफसरों के पासपोर्ट निलंबित कर दिए हैं। इस कार्रवाई के बाद अब ये सभी नेता विदेश तो छोड़िए, राजधानी काठमांडू से बाहर भी बिना विशेष अनुमति के नहीं जा सकेंगे।
21 सितंबर को गठित विशेष जांच आयोग की सिफारिश पर यह कदम उठाया गया है। आयोग आंदोलन के दौरान हुई गोलीबारी और सुरक्षा बलों की ज्यादती की पड़ताल कर रहा है।
🔴 किन नेताओं पर गिरी गाज?
सूत्रों के अनुसार पासपोर्ट निलंबन की कार्रवाई जिन नेताओं व अधिकारियों पर हुई है, उनमें शामिल हैं:
पूर्व पीएम केपी शर्मा ओली
पूर्व गृहमंत्री रमेश लेखक
तत्कालीन गृह सचिव गोकरणमणि दुवाड़ी
खुफिया विभाग के प्रमुख हुत्राज थापा
काठमांडू के पूर्व मुख्य जिला अधिकारी छबी रिजाल
🔥 क्या है जेन-जी आंदोलन?
8 सितंबर को युवाओं ने भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और सोशल मीडिया बैन के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन छेड़ा था।
पहले ही दिन पुलिस फायरिंग में 19 प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई।
दो दिनों तक चले दमन में यह आंकड़ा 75 तक पहुंच गया।
हिंसा के बाद भारी जनदबाव में तत्कालीन पीएम ओली को इस्तीफा देना पड़ा और सुप्रीम कोर्ट की पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की को अंतरिम सरकार की कमान मिली।
💰 मनी लॉन्ड्रिंग की नई जांच
नेपाल का मनी लॉन्ड्रिंग विभाग भी सक्रिय हो गया है।
जांच एजेंसियों ने ओली, शेर बहादुर देउबा, पुष्पकमल दहल ‘प्रचंड’ और ऊर्जा मंत्री दीपक खड़का के ठिकानों से जली हुई करेंसी और संदिग्ध दस्तावेज जब्त किए हैं।
शुरुआती जांच में गंभीर वित्तीय अनियमितताओं और संदिग्ध लेन-देन के सबूत सामने आए हैं।
🗣️ ओली का पलटवार
पद से हटने के बाद ओली ने दावा किया कि आंदोलन में स्वचालित हथियारों का इस्तेमाल हुआ था, जबकि ऐसी बंदूकें साधारण पुलिस बल के पास नहीं होतीं। उन्होंने स्वतंत्र और पारदर्शी जांच की मांग रखी।
राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि पासपोर्ट जब्ती और यात्रा प्रतिबंध इस बात का संकेत है कि सरकार अब किसी बड़े नेता को बचाने के मूड में नहीं है। वहीं, मनी लॉन्ड्रिंग जांच ने सियासी गलियारों में हलचल और तेज कर दी है।
आगामी दिनों में जांच आयोग की रिपोर्ट और आर्थिक अपराधों की जांच से नेपाल की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

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तनाव से सहयोग की ओर: भारत और कनाडा के रिश्तों में आई गर्माहट

भारत-कनाडा रिश्तों में नई ऊर्जा: जयशंकर और अनीता आनंद की मुलाकात से बढ़ी उम्मीदें

न्यूयॉर्क/नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)भारत और कनाडा के बीच पिछले वर्ष खालिस्तानी विवाद से बिगड़े संबंध अब तेजी से पटरी पर लौटते दिख रहे हैं। न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर और कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद की मुलाकात ने द्विपक्षीय रिश्तों में नई जान फूंक दी है। इस मुलाकात को दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली और सहयोग के नए अध्याय की शुरुआत माना जा रहा है।

राजनयिक संबंधों की बहाली से बढ़ी उम्मीद
हाल ही में भारत ने वरिष्ठ राजनयिक दिनेश पटनायक को कनाडा में नया उच्चायुक्त नियुक्त किया। पटनायक ने कनाडा की गवर्नर जनरल मैरी साइमन को अपने परिचय पत्र सौंपकर दोनों देशों के बीच संबंध मजबूत करने पर चर्चा की। इसी तरह, दोनों देशों द्वारा एक-दूसरे की राजधानी में दूतों की नियुक्ति ने यह संकेत दिया है कि रिश्ते अब सामान्य स्थिति की ओर बढ़ रहे हैं।

जब रिश्ते पहुंचे थे तल्खी की चरम पर
साल 2023 में खालिस्तानी नेता हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के बाद दोनों देशों के संबंध गंभीर संकट में आ गए थे। तत्कालीन प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने भारत पर आरोप लगाए, जिसके बाद राजनयिकों को वापस बुलाना पड़ा और संबंध ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुँच गए।

मार्क कार्नी की जीत से बदला समीकरण
इस साल अप्रैल में कनाडा में हुए संसदीय चुनाव में मार्क कार्नी की जीत ने माहौल बदल दिया। जून 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कार्नी की कनानास्किस में हुई मुलाकात ने संबंधों को नया मोड़ दिया। दोनों नेताओं ने सहयोग बढ़ाने और राजनयिक स्तर पर स्थिरता बहाल करने पर सहमति जताई।

भविष्य की राह: शिक्षा, व्यापार और सुरक्षा पर फोकस
जयशंकर और आनंद की हालिया वार्ता ने साफ कर दिया कि भारत और कनाडा अब अतीत की कड़वाहट पीछे छोड़कर व्यापार, शिक्षा, तकनीकी और सुरक्षा सहयोग जैसे अहम क्षेत्रों में आगे बढ़ना चाहते हैं। आने वाले महीनों में उच्च स्तरीय वार्ताओं से ठोस नतीजे निकलने की उम्मीद है।

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ऑपरेशन मुस्कान बना उम्मीद की किरण

मुंगेर पुलिस की अनोखी पहल: दुर्गा पूजा पर 78 गुमशुदा मोबाइल लौटाकर लोगों के चेहरों पर खिली मुस्कान

मुंगेर,(राष्ट्र की परम्परा डेस्क) बिहार। दुर्गा पूजा के पावन अवसर पर मुंगेर पुलिस ने ऐसी मिसाल पेश की जिसने पूरे जिले में विश्वास और खुशी का माहौल बना दिया। पुलिस ने चोरी और गुम हुए 78 मोबाइल फोन बरामद कर उनके असली मालिकों को सौंप दिया। लगभग 18 लाख रुपये मूल्य के इन मोबाइलों की वापसी ने पीड़ितों को ऐसा तोहफ़ा दिया, जिसे वे जिंदगीभर नहीं भूल पाएंगे। यह पहल “ऑपरेशन मुस्कान” के तहत की गई, जिसका मुख्य उद्देश्य लोगों की गुमशुदा संपत्ति को वापस दिलाकर उनके चेहरे पर मुस्कान लौटाना है।
कार्यक्रम के दौरान पुलिस कप्तान सैयद इमरान मसूद की मौजूदगी में मोबाइल मालिकों को जब उनके फोन वापस मिले, तो कई लोग भावुक हो उठे। उन्होंने कहा कि वे कभी उम्मीद नहीं कर रहे थे कि उनका फोन मिल पाएगा, लेकिन पुलिस ने उनकी जिंदगी का यह त्यौहार और भी खास बना दिया।
एसपी मसूद ने बताया कि मोबाइल सिर्फ तकनीक का साधन नहीं, बल्कि इसमें लोगों की यादें, निजी जानकारी और अहम दस्तावेज होते हैं। ऐसे में फोन को उसके वास्तविक मालिक तक पहुंचाना पुलिस-जनता के बीच भरोसे को और मजबूत करता है।

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बिहार में सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण की नई क्रांति: तीन नये बराज को मंजूरी

पटना (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)बिहार के किसानों और बाढ़ प्रभावित इलाकों के लिए राहत की बड़ी खबर है। राज्य में जल संसाधन और सिंचाई क्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने तीन नये बराज (Barrages) बनाने की मंजूरी दे दी है। इनमें दो बराज बागमती नदी पर और एक बराज महानंदा नदी पर बनेगा। इस फैसले से बिहार न सिर्फ सिंचाई के क्षेत्र में आत्मनिर्भर होगा, बल्कि बाढ़ प्रबंधन और जल संरक्षण में भी मजबूत कदम रखेगा।
✅ दिल्ली में उच्च स्तरीय बैठक में हरी झंडी
नई दिल्ली में केंद्रीय जल आयोग की परियोजना मूल्यांकन समिति की उच्च स्तरीय बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी मिली। तय हुआ कि बागमती नदी पर ढेंग और कटौंझा, जबकि महानंदा नदी पर तैयबपुर में बराज बनाए जाएंगे।
✅ चार प्रमुख नदियों पर दूसरा बराज
बिहार की चार बड़ी नदियों पर दूसरे बराज के निर्माण का निर्णय भी लिया गया है –
कोसी नदी पर डागमारा
गंडक नदी पर अरेराज
बागमती नदी पर ढेंग और कटौंझा
महानंदा नदी पर तैयबपुर
इसके साथ ही सकरी नदी (बकसोती), मसान नदी और अवसाने नदी पर भी बराज निर्माण की योजना आगे बढ़ रही है।
✅ पुराने बराजों का आधुनिकीकरण भी होगा
नये प्रोजेक्ट्स के साथ-साथ मौजूदा बराज और नहर प्रणाली को अपग्रेड करने पर भी जोर दिया जा रहा है। इसमें –
कमला नहर प्रणाली का उन्नयन
सोन नदी पर इन्द्रपुरी बराज का आधुनिकीकरण
नाटा वीयर को बराज में बदलने की योजना
विशेषज्ञों का मानना है कि नये बराजों के निर्माण से –
सिंचाई क्षमता में भारी बढ़ोतरी होगी
बाढ़ नियंत्रण को नई मजबूती मिलेगी
जल संरक्षण में बड़ी उपलब्धि मिलेगी
उत्तर बिहार के लाखों किसानों को सीधा लाभ मिलेगा

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पटना को मिला ट्रैफिक से निजात का विकल्प, जल्द शुरू होगी मेट्रो सेवा

पटना मेट्रो का सपना पूरा होने के कगार पर, विधानसभा चुनाव से पहले उद्घाटन की उलटी गिनती

पटना, (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) बिहार की राजधानी पटना के लाखों यात्रियों का लंबे समय से इंतजार अब खत्म होने वाला है। विधानसभा चुनाव से पहले पटना मेट्रो का पहला चरण संचालन के लिए लगभग तैयार है। रेड लाइन पर सोमवार को हुआ फाइनल ट्रायल रन सफल रहा, और अब अगले 48 घंटों में आम जनता के लिए उद्घाटन तिथि का ऐलान किया जाएगा। अनुमान है कि 6 या 7 अक्टूबर को इस ऐतिहासिक परियोजना का उद्घाटन हो सकता है।
निरीक्षण और सुरक्षा समीक्षा
फाइनल ट्रायल रन के दौरान मेट्रो रेल संरक्षा आयुक्त (CMRS) जनक कुमार गर्ग ने न्यू आईएसबीटी, जीरो माइल और भूतनाथ रोड स्टेशनों का गहन निरीक्षण किया। उनके साथ नगर विकास एवं आवास विभाग के सचिव अभय कुमार सिंह और पीएमआरसीएल की एडीएमडी अभिलाषा शर्मा भी मौजूद रहीं। सुरक्षा मानकों की जांच पूरी होने के बाद रिपोर्ट दो दिन में सौंपी जाएगी, जिसके बाद औपचारिक उद्घाटन की तारीख तय होगी।
पहला चरण : तीन स्टेशन
न्यू आईएसबीटी – जीरो माइल – भूतनाथ रोड
पूरी तरह एलिवेटेड कॉरिडोर
ट्रेन हर 20 मिनट पर उपलब्ध
रोज़ाना 40–42 फेरे
संचालन समय: सुबह 8 बजे से रात 10 बजे तक
किराया संरचना:
न्यू आईएसबीटी से जीरो माइल – ₹15
न्यू आईएसबीटी से भूतनाथ रोड – ₹30
अत्याधुनिक सुविधाएं
वातानुकूलित कोच (कुल 3)
एक ट्रेन में 1,092 यात्री (147 बैठकर, 945 खड़े होकर)
महिलाओं और दिव्यांगों के लिए 12–12 सीटें आरक्षित
स्वचालित दरवाजे और आपातकालीन पैनिक बटन
मोबाइल-लैपटॉप चार्जिंग पॉइंट
डिस्प्ले बोर्ड और पब्लिक अनाउंसमेंट सिस्टम
स्टेशनों पर विशेष इंतजाम
लिफ्ट और एस्केलेटर
ऑटोमैटिक टिकट काउंटर
डिजिटल सूचना बोर्ड
खानपान स्टॉल और विश्राम क्षेत्र
दिव्यांग और वरिष्ठ नागरिकों के लिए विशेष व्यवस्था
सीसीटीवी निगरानी और सुरक्षा बलों की तैनाती
अंतिम परीक्षण और शेष कार्य
ट्रायल रन के दौरान मेट्रो को 40 किमी/घंटा की रफ्तार से चलाया गया। डिपो, कंट्रोल रूम, कमांड सेंटर और स्टेशनों की मशीनरी की पूरी जांच हुई। हालांकि अधिकांश कार्य पूरे हो चुके हैं, लेकिन न्यू आईएसबीटी और जीरो माइल स्टेशन के प्रवेश द्वार पर फिनिशिंग टच अभी जारी है।
पटना की ट्रैफिक समस्या का समाधान
पटना मेट्रो की शुरुआत से राजधानी के व्यस्त यातायात पर दबाव घटेगा। लोगों को सुरक्षित, तेज़ और आधुनिक सार्वजनिक परिवहन का नया विकल्प मिलेगा। यह कदम न सिर्फ़ शहर की सूरत बदलेगा बल्कि विधानसभा चुनाव से पहले सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धियों में गिना जाएगा।

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“बुढ़ापे की अकेलापन: जीवन का सबसे कठिन समय

धर्मेंद्र का परिवार बड़ा और सुशोभित है। दो पत्नियां, छह बच्चे, तेरह नाती-पोते और तीन दामाद। लेकिन फिर भी, अपने विशाल फार्म हाउस में वह अकेले रहते हैं, केवल कुछ नौकरों की संगति में। यह तस्वीर केवल धर्मेंद्र की नहीं, बल्कि आज की अधिकांश परिवारों की भी है। यह दिखाता है कि चाहे अमीर हो या गरीब, जीवन के अंतिम पड़ाव में हर इंसान अकेला रह जाता है।

बचपन और युवावस्था में जीवन परिवार और दोस्तों की गर्माहट से भरा रहता है। बच्चे बड़े होते हैं, उनका विवाह होता है, वे अपने-अपने करियर और परिवार में व्यस्त हो जाते हैं। लेकिन वृद्धावस्था में यही बच्चे भी अपने जीवन में इतने व्यस्त हो जाते हैं कि बुजुर्ग अक्सर अकेले रह जाते हैं। जड़ें, जो हमेशा स्थिर रहती हैं, वहीं रह जाती हैं; जीवन के पेड़ की शाखें अलग-अलग दिशाओं में फैल जाती हैं।

वृद्धावस्था केवल शरीर की कमजोरी का नाम नहीं है, बल्कि यह मानसिक और भावनात्मक एकाकीपन का समय भी है। इंसान अपने जीवन की उपलब्धियों, रिश्तों और परिवार के बीच जब पीछे मुड़कर देखता है, तो अक्सर अपने आप से सवाल करता है – क्या यही जीवन का अंतिम सच है? क्या बुढ़ापा हमेशा अकेलेपन और निर्भरता का प्रतीक होगा?

मैं उस समय के प्रवेश द्वार पर खड़ा हूँ। भविष्य की अनिश्चितताओं को देख कर भयभीत होता हूँ। बचपन में मां-बाप की देखभाल की ज़रूरत होती है, युवावस्था में जिम्मेदारियों का बोझ होता है, और वृद्धावस्था में अकेलेपन और निर्भरता का सामना करना पड़ता है।

खैर, जीवन की यह कथा राम द्वारा रची गई व्यवस्था जैसी ही है। “होइहैं वही जो राम रचि राखा” – अर्थात जो होना लिखा है, वही होगा। वृद्धावस्था को बचपन जैसी सरलता और शांति के साथ कैसे जिया जाए, यह हर व्यक्ति के लिए व्यक्तिगत चुनौती है। यह समय केवल शरीर की देखभाल नहीं, बल्कि मानसिक संतुलन, आत्मिक शांति और समाजिक जुड़ाव की भी मांग करता है।

इस जीवन-यात्रा में एक बात स्पष्ट है – अकेलापन अनिवार्य नहीं, लेकिन सतत प्रयासों और समाजिक जुड़ाव से इसे कम किया जा सकता है। बच्चों और परिवार के साथ समय बिताना, मित्रों और समाज में सक्रिय रहना, अपने शौक और रुचियों को जीवित रखना वृद्धावस्था को बेहतर बना सकता है।

जीवन के अंतिम पड़ाव में भी खुशियों और संतोष को खोजा जा सकता है। अकेलेपन की भावना को स्वीकार करना और उसे सकारात्मक ऊर्जा में बदलना वृद्धावस्था को सहज और मूल्यवान बना सकता है। धर्मेंद्र जैसे कई लोग यही संदेश हमें देते हैं कि जीवन का सबसे कठिन समय भी सही दृष्टिकोण और मानसिक तैयारी से सुंदर बनाया जा सकता है।
बुढ़ापा अकेलापन नहीं, बल्कि जीवन के अनुभवों और आत्मिक शांति का समय होना चाहिए। जीवन के इस पड़ाव में हमें अपने आप से सच्चे संवाद करने की, परिवार और समाज से जुड़ने की और आत्मसंतोष प्राप्त करने की आवश्यकता है। यही वृद्धावस्था की वास्तविक सफलता है।

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अस्पतालों की भीड़: मरीज की पीड़ा और स्वास्थ्य सेवा की चुनौती

भारत में स्वास्थ्य क्षेत्र लगातार बदल रहा है, लेकिन आम जनता की समस्या ज्यों की त्यों बनी हुई है। चिकित्सक की अधिकता और निजी अस्पतालों में इलाज की ऊँची कीमतें मरीज और उनके परिवार पर भारी बोझ डाल रही हैं। वहीं सरकारी अस्पतालों में रोगियों की भारी भीड़, लंबी प्रतीक्षा समय और सीमित संसाधन जनता के लिए एक बड़ी चुनौती बन गए हैं। इस परिस्थिति में मरीज की जेब ही नहीं, बल्कि उसकी जिंदगी भी प्रभावित होती है।

आज की व्यस्त जीवनशैली और बढ़ती बीमारियों के चलते लोग जल्दी इलाज चाहते हैं, लेकिन निजी अस्पतालों के भारी खर्च इसे असंभव बना देते हैं। एक साधारण बीमारी का इलाज भी कभी-कभी मरीज की पॉकेट पर भारी पड़ जाता है। महंगे दवा और चिकित्सकीय शुल्क गरीब और मध्यम वर्ग के लिए एक बड़ी बाधा बनते जा रहे हैं। गंभीर बीमारी या आईसीयू में भर्ती होने पर स्थिति और भी विकट हो जाती है। मरीज के परिजन आर्थिक बोझ के साथ मानसिक तनाव से भी जूझते हैं।

वहीं, सरकारी अस्पतालों में स्थिति थोड़ी अलग है। यहां इलाज अपेक्षाकृत सस्ता या निशुल्क होता है, लेकिन भारी भीड़ और संसाधनों की कमी मरीजों की सेवा को प्रभावित करती है। डॉक्टरों की संख्या सीमित होने के कारण प्रतिदिन हजारों रोगी उनसे उपचार प्राप्त करने के लिए आते हैं। इस भीड़ में रोगियों को उचित समय और ध्यान नहीं मिल पाता, जिससे गंभीर मरीजों की जान तक खतरे में पड़ जाती है।

सरकार और नीति निर्माताओं के लिए यह आवश्यक है कि स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधार लाया जाए। केवल डॉक्टरों की संख्या बढ़ाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि अस्पतालों में बुनियादी सुविधाओं, दवाओं और आईसीयू बेड की पर्याप्त संख्या सुनिश्चित करना भी अनिवार्य है। साथ ही, निजी अस्पतालों में इलाज की कीमतों पर नियंत्रण और बीमा योजनाओं का प्रभावी संचालन मरीजों के लिए राहत का साधन बन सकता है।

जनमानस की नजर में स्वास्थ्य सेवा की गुणवत्ता और उसकी पहुँच सबसे बड़ी चिंता है। हर मरीज को उसकी बीमारी के अनुसार उचित इलाज मिलना चाहिए, न कि उसकी आर्थिक स्थिति के अनुसार। यदि मरीज की जेब कमजोर हो तो उसका जीवन भी जोखिम में पड़ जाता है। इसलिए आवश्यक है कि स्वास्थ्य सेवाओं को लोकतांत्रिक और समावेशी बनाया जाए।

अंततः, इलाज की महंगाई और अस्पतालों की भीड़ जैसी समस्याओं से निपटना केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि समाज और जनता का भी दायित्व है कि वे स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाएं, बीमारियों के प्रति सचेत रहें और समय पर जांच करवाएं। यदि ऐसा नहीं किया गया तो मरीज की जिंदगी सस्ती इलाज की अनुपलब्धता और महंगे निजी खर्च के बीच फँसकर और अधिक कठिन हो जाएगी।

स्वास्थ्य सेवा केवल सुविधा नहीं, बल्कि जीवन की मूलभूत जरूरत है। इसे सस्ती, सुलभ और प्रभावी बनाने के लिए तुरंत और ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है। नहीं तो मरीज की जेब और उनकी जिंदगी दोनों ही भारी बोझ तले दबती रहेंगी।

अक्टूबर के पहले सप्ताह में भारत की बेमिसाल यात्राएँ: हिल स्टेशन से धार्मिक स्थलों तक का सफर”

अक्टूबर का महीना भारत में यात्रा के लिए सबसे खूबसूरत समय माना जाता है। बरसात का मौसम विदा ले चुका होता है और सर्दियों की पहली ठंडक धीरे-धीरे महसूस होने लगती है। खासकर अक्टूबर के पहले सप्ताह में मौसम सुहाना और मनमोहक होता है। न उमस होती है और न ही ज्यादा ठंड। यह समय परिवार या मित्रों के साथ यात्रा पर निकलने के लिए बिल्कुल उपयुक्त होता है। अगर आप प्राकृतिक सौंदर्य, ऐतिहासिक धरोहरों या धार्मिक स्थलों की सैर का आनंद लेना चाहते हैं, तो अक्टूबर का यह सप्ताह आपके लिए एक स्वर्णिम अवसर है।
आइए जानते हैं कुछ प्रमुख स्थलों के बारे में, जहाँ आप अक्टूबर के पहले सप्ताह में घूम सकते हैं, साथ ही यात्रा की जानकारी, खर्च, स्थानीय व्यंजन, त्योहार और उपयोगी टिप्स भी।

  1. शिमला और मनाली (हिमाचल प्रदेश)
    हिमाचल की राजधानी शिमला और मनाली अक्टूबर की शुरुआत में पर्यटकों से भर जाते हैं। यहाँ का ठंडा और सुकूनभरा मौसम मन को भा जाता है। हरे-भरे देवदार के जंगल, बर्फ से ढकी चोटियां और एडवेंचर गतिविधियां मनाली को खास बनाती हैं।
    यात्रा की जानकारी:
    हवाई मार्ग: भुंतर हवाई अड्डा (मनाली के पास) और जुब्बल हवाई अड्डा (शिमला के पास)।
    रेल मार्ग: कालका-शिमला टॉय ट्रेन और मनाली तक कालका से बस/टैक्सी।
    सड़क मार्ग: दिल्ली और चंडीगढ़ से सीधे बस या कार।
    खर्च का विवरण:
    मिड-रेंज: ₹10,000–15,000 प्रति व्यक्ति (3–4 दिन)।लक्ज़री ट्रिप: ₹20,000+ (होटल, फ्लाइट, एडवेंचर एक्टिविटी)।स्थानीय व्यंजन: सिद्दू, ट्राउट फिश, कढ़ी-चावल।
    यात्रा टिप्स:हल्के ऊनी कपड़े और जैकेट साथ रखें।एडवेंचर एक्टिविटी के लिए एडवांस बुकिंग करें।
  2. नैनीताल और मसूरी (उत्तराखंड)
    उत्तराखंड के नैनीताल और मसूरी अक्टूबर में बेहद खूबसूरत दिखते हैं। नैनी झील का शांत वातावरण और मसूरी का कैम्प्टी फॉल पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर देता है। पहाड़ी हवा, झील के किनारे नाव की सैर और चारों ओर हरियाली इस मौसम में मन को बहुत भाती है।
    यात्रा की जानकारी:रेल: काठगोदाम रेलवे स्टेशन।सड़क मार्ग: दिल्ली से नैनीताल या मसूरी तक बस या कार।हवाई मार्ग: जॉली ग्रांट हवाई अड्डा, देहरादून। खर्च का विवरण:मिड-रेंज: ₹8,000–12,000।लक्ज़री ट्रिप: ₹15,000+। स्थानीय व्यंजन: आलू के गुटके, भट्ट की चुड़कानी, जलेबी।
    यात्रा टिप्स:झील के पास लंबी सैर के लिए आरामदायक जूते पहनें।फोटोग्राफी के लिए सुबह और शाम का समय सबसे अच्छा होता है।
  3. जयपुर और उदयपुर (राजस्थान)
    राजस्थान का मौसम अक्टूबर में यात्रा के लिए बेहद अनुकूल होता है। जयपुर के ऐतिहासिक किले, हवेलियां और रंगीन बाजार भारतीय संस्कृति का अनुभव कराते हैं। उदयपुर की झीलें और महल रोमांटिक एहसास जगाते हैं।
    यात्रा की जानकारी:हवाई मार्ग: जयपुर और उदयपुर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे।
    रेल मार्ग: जयपुर और उदयपुर रेलवे स्टेशन।
    सड़क मार्ग: दिल्ली, अजमेर, कोटा से सड़क कनेक्टिविटी।
    खर्च का विवरण:मिड-रेंज ₹10,000–15,000।
    लक्ज़री ट्रिप: ₹20,000+।
    स्थानीय व्यंजन: दाल-बाटी-चूरमा, गट्टे की सब्जी, प्याज़ की कचोरी।
    त्योहार:नवरात्रि और दशहरा विशेष उत्सव।
    जोधपुर में मारवाड़ फेस्टिवल अक्टूबर में आयोजित होता है।
    यात्रा टिप्स:धूप से बचने के लिए सनस्क्रीन और हैट साथ रखें।ऐतिहासिक स्थलों के लिए गाइडबुक या स्थानीय गाइड लें।
  4. दार्जिलिंग और गंगटोक (पूर्वोत्तर भारत)
    पूर्वोत्तर भारत की वादियों में अक्टूबर का मौसम सबसे रमणीय होता है। दार्जिलिंग की चाय बागान, टॉय ट्रेन की सैर और हिमालय की बर्फीली चोटियां अद्भुत अनुभव देती हैं। गंगटोक में बौद्ध मठ और झरने दर्शनीय हैं।
    यात्रा की जानकारी:हवाई मार्ग: बागडोगरा हवाई अड्डा। रेल मार्ग: न्यू जलपाईगुड़ी (एनजेपी) रेलवे स्टेशन।सड़क मार्ग: दार्जिलिंग और गंगटोक के लिए टैक्सी या बस।
    खर्च का विवरण:मिड-रेंज ₹12,000–18,000।
    लक्ज़री ट्रिप: ₹25,000+।
    स्थानीय व्यंजन: मोमो, थुकपा, चाय।
    त्योहार: दार्जिलिंग टी फेस्टिवल अक्टूबर में शुरू।
    यात्रा टिप्स:
    ठंडी हवा के लिए जैकेट और स्वेटर साथ रखें।
    ऊँचाई के अनुसार एडजस्ट करने के लिए पहले दिन हल्का भोजन करें।
  5. वाराणसी और प्रयागराज (उत्तर प्रदेश)
    आध्यात्मिक यात्रा के लिए वाराणसी और प्रयागराज का अक्टूबर में दौरा अत्यंत सुखद होता है। गंगा आरती और संगम का दृश्य मन को शांति और ऊर्जा दोनों देता है।
    यात्रा की जानकारी: हवाई मार्ग: वाराणसी हवाई अड्डा।
    रेल मार्ग: वाराणसी और प्रयागराज रेलवे स्टेशन।
    सड़क मार्ग: स्थानीय बस और टैक्सी सेवा।
    खर्च का विवरण: ₹6,000–10,000 (2–3 दिन)। स्थानीय व्यंजन: बनारसी पान, कचौड़ी-जलेबी, लस्सी। त्योहार: दशहरा, नवरात्रि और गंगा स्नान महोत्सव।
    यात्रा टिप्स: आरती और घाटों के दर्शन सुबह-सुबह करें।धार्मिक स्थल पर अनुशासन और सफाई का ध्यान रखें।
  6. पुरी और कोणार्क (ओडिशा)
    समुद्र तट की सैर के लिए पुरी और कोणार्क उत्कृष्ट स्थल हैं। जगन्नाथ मंदिर और सूर्य मंदिर बहुत आकर्षक हैं।
    यात्रा की जानकारी:
    हवाई मार्ग: भुवनेश्वर हवाई अड्डा।
    रेल मार्ग: पुरी रेलवे स्टेशन।
    सड़क मार्ग: भुवनेश्वर से सड़क मार्ग।
    खर्च का विवरण:₹8,000–12,000 (3 दिन)।
    स्थानीय व्यंजन: खिचड़ी, चिंगुड़ी मलाई करी, समुद्री भोजन।त्योहार: दशहरा, रथ यात्रा और पुरी उत्सव।यात्रा टिप्स:समुद्र तट पर हल्के कपड़े और सनस्क्रीन लें।मंदिर दर्शन के लिए सुबह का समय उत्तम होता है।
  7. कूर्ग और ऊटी (दक्षिण भारत)
    कर्नाटक का कूर्ग और तमिलनाडु का ऊटी अक्टूबर में बेहद खूबसूरत और शांत होते हैं। कॉफी बागान, हरी वादियां और शांति यहाँ के प्रमुख आकर्षण हैं।
    यात्रा की जानकारी:हवाई मार्ग: मैसूर और कोयंबटूर हवाई अड्डे।सड़क मार्ग: कार या बस सेवा।खर्च का विवरण:₹10,000–18,000 (3–4 दिन)।स्थानीय व्यंजन: फिल्टर कॉफी, पांडि करी, ऊटी चॉकलेट।
    यात्रा टिप्स:लंबी पैदल सैर और कॉफी बागान की यात्रा के लिए आरामदायक जूते।मौसम सुहाना होने पर फोटोग्राफी के लिए सुबह और शाम का समय लें।
    यात्रा के सामान्य सुझाव
  8. होटल और यात्रा की बुकिंग पहले ही कर लें।
  9. हल्के ऊनी कपड़े और जैकेट साथ रखें।
  10. स्थानीय गाइड से शहर और इतिहास के बारे में जानें।
  11. कैश और डिजिटल पेमेंट का विकल्प साथ रखें।
  12. एडवेंचर और फोटोग्राफी के लिए सुबह-शाम का समय उत्तम।
    अक्टूबर का पहला सप्ताह यात्राओं के लिए स्वर्णिम समय है। मौसम सुहाना होता है, प्राकृतिक सुंदरता अपने चरम पर होती है और हर जगह पर्यटकों का स्वागत उत्साह से होता है। चाहे आप हिल स्टेशन का आनंद लेना चाहें, ऐतिहासिक धरोहरों की सैर करना चाहें या धार्मिक यात्रा पर निकलें – यह समय हर प्रकार की यात्रा के लिए उत्तम है। सही गंतव्य चुनकर आप इस अक्टूबर अपने सफर को अविस्मरणीय बना सकते हैं।
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‘अखिलेश बड़े नेता, हम छोटी गली में रहने वाले खादिम’ – आजम खां का तंज

रामपुर (राष्ट्र की परम्परा)। सपा मुखिया अखिलेश यादव के 8 अक्तूबर को रामपुर दौरे की खबर पर पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और वरिष्ठ नेता आजम खां ने चुटकी ली है। उन्होंने कहा कि उन्हें इस दौरे की जानकारी सिर्फ मीडिया रिपोर्ट्स से हुई है। तंज कसते हुए आजम खां ने कहा – “बड़े लोगों का छोटी गली में रहने वाला यह खादिम खैर मकदम करता है।”

दिल्ली से इलाज कर लौटे आजम खां

आजम खां हाल ही में दिल्ली के एक अस्पताल में तीन दिन भर्ती रहने के बाद रामपुर लौटे हैं। सीतापुर जेल से रिहाई के बाद वह लगातार स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं। सोमवार को वह जौहर यूनिवर्सिटी भी पहुंचे।

अखिलेश यादव के दौरे पर प्रतिक्रिया

जब एक समाचार एजेंसी ने अखिलेश यादव के रामपुर दौरे को लेकर सवाल किया तो आजम खां ने कहा – “हां, इसकी जानकारी हमें मीडिया से ही मिली। हम तो छोटी सी गली में रहते हैं, जहां कई बार पानी भर जाता है। बड़े लोग आएंगे तो अच्छा लगेगा।”

जेल में बिताए दिन और नींबू का अचार

पूर्व राज्यसभा सांसद शाहिद सिद्दीकी के आरोपों पर सफाई देते हुए आजम खां ने कहा कि यह निराधार हैं। उन्होंने बताया कि सीतापुर जेल में रहते हुए वह खाने-पीने को लेकर बहुत सतर्क रहते थे।
आजम खां ने कहा – “मैं खुद खाना बना नहीं सकता था। दिन में एक पतली रोटी और रात में आधी रोटी खाता था। पेट भरने के लिए नींबू से अचार बनाकर खा लिया करता था।”

सपा में उठने लगे सवाल

अखिलेश यादव के रामपुर दौरे और आजम खां की प्रतिक्रिया को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। पार्टी कार्यकर्ताओं का मानना है कि आजम खां का यह बयान सपा की अंदरूनी खींचतान की ओर इशारा करता है।

पानीपत: होमवर्क न करने पर बच्चे को उल्टा लटकाने वाला वैन चालक और प्रधानाचार्य गिरफ्तार

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पानीपत (राष्ट्र की परम्परा)। हरियाणा के पानीपत जिले में सृजन पब्लिक स्कूल में कक्षा दो के छात्र के साथ बर्बरता का मामला सामने आया है। होमवर्क न करने पर बच्चे को उल्टा लटकाने के आरोप में स्कूल वैन चालक अजय (24) और स्कूल की प्रधानाचार्य रेनू (44) को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। कोर्ट ने दोनों को दो दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया है।

एसआईटी गठित, आरोपी चालक का कबूलनामा

पानीपत पुलिस ने मामले की गंभीरता देखते हुए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है। पूछताछ में वैन चालक अजय ने कबूला कि उसने बच्चे को प्रधानाचार्य रेनू के कहने पर उल्टा लटकाया और पीटा भी। अजय ने बताया कि घटना का वीडियो भी बनाया गया था, जिसे बाद में इंस्टाग्राम पर अपलोड कर दिया गया।

बिना मान्यता के चल रहा था स्कूल, सील किया गया

जिला शिक्षा अधिकारी राकेश बूरा ने टीम के साथ छापेमारी कर स्कूल को सील कर दिया। जांच में सामने आया कि यह स्कूल बिना मान्यता के चल रहा था। पहले यह गांव ददलाना में था और एक साल पहले जटलाना रोड पर शिफ्ट किया गया था।

मानवाधिकार आयोग ने जताई नाराजगी

घटना पर हरियाणा मानवाधिकार आयोग के चेयरमैन ललित बत्रा पानीपत पहुंचे और पुलिस-प्रशासन से मीटिंग कर रिपोर्ट ली। उन्होंने निर्देश दिया कि जिले में चल रहे सभी बिना मान्यता वाले स्कूलों को तुरंत बंद कराया जाए और ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

हिमाचल प्रदेश में फिर लौट रही रौनक: दशहरा सीजन से बढ़ेगी सैलानियों की चहल-पहल

शिमला (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। प्राकृतिक आपदा के एक माह बाद हिमाचल प्रदेश के पर्यटन स्थल धीरे-धीरे सैलानियों से गुलजार होने लगे हैं। शिमला, मनाली, डलहौजी, कसौली और धर्मशाला में पर्यटकों की आवाजाही बढ़ने से पर्यटन कारोबारियों के चेहरे फिर खिल उठे हैं।

होटलों में बढ़ी ऑक्यूपेंसी, एडवांस बुकिंग शुरू

जुलाई-अगस्त और सितंबर के पहले हफ्ते में जहां होटल ऑक्यूपेंसी महज 10% तक सीमित थी, वहीं अब यह 25–30% पहुंच चुकी है। दशहरा और दिवाली सीजन को देखते हुए अक्टूबर में निगम और निजी होटलों में एडवांस बुकिंग चल रही है।

मनाली से रोहतांग दर्रा के लिए सोमवार को 90 पर्यटक वाहन परमिट लेकर पहुंचे। दशहरा उत्सव के दौरान मनाली और कुल्लू घाटी में पर्यटन कारोबार में और इजाफा होने की संभावना है।

वोल्वो बसों की आवाजाही से बढ़ी उम्मीद

कुल्लू-मनाली होटल कारोबारियों का कहना है कि फिलहाल मनाली में ऑक्यूपेंसी 10–15% है, लेकिन वोल्वो बस सेवा शुरू होने के बाद पर्यटकों की संख्या तेजी से बढ़ेगी। मंडी से कुल्लू तक वोल्वो का संचालन शुरू हो गया है और जल्द ही मनाली तक बसें नियमित चलने लगेंगी।

खज्जियार-डलहौजी में भी लौट रही रौनक

प्राकृतिक आपदा से प्रभावित खज्जियार और डलहौजी में इस वीकेंड पर होटलों की ऑक्यूपेंसी 20–25% तक पहुंच गई। हालांकि, द्रम्मण से लेकर डलहौजी और खज्जियार तक कई सड़कों की हालत अब भी खराब है, जिससे पर्यटकों को असुविधा हो रही है। इसके बावजूद पर्यटक इन हिल स्टेशनों का रुख करने लगे हैं।

डलहौजी होटल एसोसिएशन अध्यक्ष नरेंद्र पुरी और खज्जियार होटल एसोसिएशन अध्यक्ष देसराज शर्मा ने बताया कि धीरे-धीरे पर्यटक लौटने लगे हैं, जिससे स्थानीय कारोबारियों को राहत मिली है।

पर्यटन कारोबार पटरी पर लौटने की उम्मीद

शिमला होटलियर एसोसिएशन के उपाध्यक्ष प्रिंस कुकरेजा ने कहा कि भारत-पाकिस्तान तनाव और प्राकृतिक आपदा ने पर्यटन उद्योग को बुरी तरह प्रभावित किया था। अब हालात सामान्य हो रहे हैं और ऑक्यूपेंसी 25–30% तक पहुंच गई है। अक्टूबर सीजन की एडवांस बुकिंग से कारोबारियों को बड़ी राहत मिली है।

मानहानि केस में कंगना रनौत पर कोर्ट सख्त, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की अर्जी खारिज

भटिंडा (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। पंजाब के भटिंडा जिले की अदालत ने सोमवार को अभिनेत्री और बीजेपी सांसद कंगना रनौत को मानहानि मामले में तगड़ा झटका दिया है। अदालत ने उनकी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से पेश होने की अर्जी को खारिज करते हुए 27 अक्टूबर को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया है।

क्या है मानहानि का मामला?

यह मामला साल 2020-21 के किसान आंदोलन से जुड़ा है। कंगना रनौत ने सोशल मीडिया पर एक री-ट्वीट किया था, जिसमें भटिंडा जिले के गांव की रहने वाली महिंदर कौर (73) की तुलना शाहीन बाग आंदोलन की बुजुर्ग महिला बिलकिस बानो से की थी।
महिंदर कौर का आरोप है कि इस पोस्ट से उनकी छवि धूमिल हुई और सामाजिक प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची।

शिकायतकर्ता का पक्ष

महिंदर कौर की ओर से पेश एडवोकेट रघुबीर सिंह बेनीवाल ने अदालत से कहा कि कानून के अनुसार शुरुआती सुनवाई में आरोपी को उपस्थित रहना जरूरी है। इसलिए कंगना को छूट नहीं दी जा सकती। उन्होंने यह भी अनुरोध किया कि अनुपस्थित रहने पर उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया जाए।

कंगना की दलील खारिज

कंगना रनौत के वकील ने दलील दी थी कि वह वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश होना चाहती हैं, लेकिन अदालत ने दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद यह अर्जी खारिज कर दी।

अगली सुनवाई

अब कंगना रनौत को 27 अक्टूबर को व्यक्तिगत रूप से भटिंडा कोर्ट में पेश होना होगा। अदालत ने साफ कर दिया है कि अनुपस्थित रहने की स्थिति में उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो सकती है।