Sunday, July 5, 2026
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हालपुर गांव में भीषण चोरी, लाखों के गहने व सामान पार

बलिया (राष्ट्र की परम्परा) मनियर थाना क्षेत्र के हालपुर गांव में बीती रात चोरों ने एक बड़ी वारदात को अंजाम देकर पूरे इलाके में सनसनी फैला दी। जानकारी के अनुसार गांव निवासी गुड्डू सिंह के घर उस समय चोरों ने धावा बोला जब पूरा परिवार छठ पर्व की तैयारी में जुटा हुआ था और रात में सभी गहरी नींद में सोए थे। चोरों ने बड़ी ही चालाकी से कटर से खिड़की की ग्रिल काटकर घर में प्रवेश किया और अलमारी व संदूक का ताला तोड़कर लाखों रुपए मूल्य के सोने-चांदी के गहने, बर्तन, कीमती कपड़े और नकदी उड़ा ले गए। सुबह जब परिवार के सदस्य जागे तो घर का सारा सामान बिखरा पड़ा था।

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अलमारी खुली हुई थी और दरवाजे के पास खिड़की कटी हुई दिखाई दी। घटना की जानकारी मिलते ही गांव में अफरा-तफरी मच गई। सूचना पर मनियर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और फिंगरप्रिंट व डॉग स्क्वायड टीम को बुलाकर जांच शुरू की। ग्रामीणों के अनुसार, चोरी की यह घटना देर रात दो बजे से तीन बजे के बीच की बताई जा रही है। गुड्डू सिंह ने बताया कि चोर लगभग दो लाख से अधिक कीमत के गहने, एक लाख की नकदी, नए कपड़े और रसोई के बर्तन लेकर फरार हो गए। आसपास के लोगों ने बताया कि बीते कुछ दिनों से गांव में अजनबी लोगों की आवाजाही देखी जा रही थी, जिससे आशंका है कि चोरी की योजना पहले से बनाई गई थी।

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पुलिस ने अज्ञात चोरों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और आसपास के इलाकों में CCTV फुटेज खंगाले जा रहे हैं। थाना प्रभारी ने बताया कि जल्द ही आरोपितों को पकड़ लिया जाएगा। घटना से पूरे गांव में दहशत का माहौल है और ग्रामीणों ने रात्रि गश्त बढ़ाने की मांग की है।

संदिग्ध हालात में राजेश सिंह ‘मंटू’ की मौत से मचा हड़कंप, गांव में पसरा मातम – पुलिस जांच में जुटी

रविवार की शाम काझा बंधा के पास घायल अवस्था में मिले पिरूआ निवासी राजेश सिंह, परिजनों ने जताई हत्या की आशंका, पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा।

मऊ (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। जनपद के रानीपुर थाना क्षेत्र के ग्राम सभा पिरूआ में रविवार की देर शाम उस समय हड़कंप मच गया जब गांव के निवासी राजेश सिंह उर्फ मंटू सिंह (40 वर्ष) संदिग्ध परिस्थितियों में गंभीर रूप से घायल अवस्था में मिले। उपचार के दौरान उनकी मौत हो जाने से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई।
जानकारी के अनुसार, रविवार की शाम राजेश सिंह अपने घर से काझा बाजार फल-सब्जी लेने गए थे। बताया जा रहा है कि शाम लगभग 6 बजे के करीब काझा बंधा के पास स्थानीय लोगों ने उन्हें सड़क किनारे खून से लथपथ और बेहोश अवस्था में पड़ा देखा। सूचना मिलते ही आसपास के लोग मौके पर पहुंचे और आनन-फानन में परिजनों को खबर दी।

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परिजन व ग्रामीण तुरंत राजेश सिंह को अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। जैसे ही मौत की खबर गांव पहुंची, परिवार में कोहराम मच गया और पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। मृतक के परिवार में दो बेटियां हैं और वह तीन भाइयों में सबसे छोटे थे।

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घटना की जानकारी मिलते ही रानीपुर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और आसपास के लोगों से पूछताछ शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में अभी तक कोई स्पष्ट कारण सामने नहीं आया है, लेकिन परिजनों ने हत्या की आशंका जताई है।
पुलिस का कहना है कि मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मृत्यु का वास्तविक कारण स्पष्ट हो पाएगा। फिलहाल गांव में शोक और दहशत का माहौल बना हुआ है।

पैंक्रियाटिक कैंसर के शुरुआती लक्षण: पैरों में दिखें ये 4 संकेत तो तुरंत हो जाएं सावधान, न करें नजरअंदाज

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी और गलत खानपान की आदतों के चलते कैंसर, हार्ट अटैक और स्ट्रोक जैसे गंभीर रोग तेजी से बढ़ रहे हैं। इनमें सबसे खतरनाक माना जाता है पैंक्रियाटिक कैंसर (Pancreatic Cancer), जिसे साइलेंट किलर के नाम से भी जाना जाता है। यह बीमारी धीरे-धीरे शरीर में घर बना लेती है और शुरुआती चरण में पहचान पाना बेहद मुश्किल होता है।

हाल के शोध बताते हैं कि पेट के अलावा पैरों में दिखने वाले कुछ लक्षण इस जानलेवा बीमारी का शुरुआती संकेत हो सकते हैं। अगर इन संकेतों पर समय रहते ध्यान दिया जाए तो पैंक्रियाटिक कैंसर का समय पर निदान और इलाज संभव है।

पैंक्रियाटिक कैंसर के 4 शुरुआती लक्षण जो पैरों में दिखते हैं

  1. लगातार दर्द या भारीपन का अहसास
    अगर पैरों में बिना किसी कारण के लगातार दर्द या सूजन महसूस हो रही है, तो यह डीप वेन थ्रॉम्बोसिस (DVT) यानी नसों में खून का थक्का जमने का संकेत हो सकता है। यह स्थिति पैंक्रियाटिक कैंसर से जुड़ी होती है, क्योंकि कैंसर शरीर की ब्लड क्लॉटिंग प्रक्रिया को प्रभावित करता है।
  2. अचानक सूजन आना
    एक या दोनों पैरों में अचानक और बिना वजह सूजन आना भी खून के थक्के या ट्यूमर के दबाव के कारण हो सकता है। अगर यह सूजन दर्द, लालिमा या गर्माहट के साथ हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
  3. पैरों में लालिमा और गर्माहट
    पैरों का रंग गहरा लाल या बैंगनी दिखना और उनमें असामान्य गर्माहट महसूस होना रक्त प्रवाह में रुकावट या कैंसर सेल्स की गतिविधि का परिणाम हो सकता है।
  4. नसों में दबाव या झनझनाहट
    पैरों में बार-बार झनझनाहट, भारीपन या जलन का अहसास भी शरीर में टॉक्सिन्स और ब्लड फ्लो रुकने का संकेत हो सकता है, जो पैंक्रियाटिक कैंसर की शुरुआती अवस्था में देखा गया है।

क्यों जरूरी है इन लक्षणों को पहचानना

अमेरिकन कैंसर सोसाइटी के अनुसार, पैंक्रियाटिक कैंसर का सबसे बड़ा खतरा यह है कि यह अक्सर देर से पहचाना जाता है, जब तक यह शरीर में फैल चुका होता है। ऐसे में अगर पैरों में दर्द, सूजन, लालिमा या गर्माहट जैसे लक्षण दिखें, तो इन्हें हल्के में न लें। समय पर डॉक्टर से जांच कराने पर बीमारी का प्रारंभिक निदान और सफल उपचार संभव है।

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज़ और मेडिकल एक्सपर्ट्स की राय पर आधारित है। इसे मेडिकल सलाह का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। किसी भी लक्षण के दिखने पर डॉक्टर या विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें।

लखनऊ रेलवे अस्पताल में लगी आग, धुआं भरने से मची अफरा-तफरी, 22 मरीजों को सुरक्षित निकाला गया

लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। राजधानी लखनऊ के आलमबाग स्थित रेलवे अस्पताल में सोमवार सुबह आग लगने की घटना से अफरा-तफरी मच गई। आग लगने के बाद पूरे अस्पताल में घना धुआं फैल गया, जिससे मरीजों और स्टाफ में हड़कंप मच गया। घटना सुबह करीब साढ़े पांच बजे की बताई जा रही है।

सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया। राहत कार्य के दौरान अस्पताल में भर्ती 22 मरीजों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। फिलहाल किसी के हताहत होने की खबर नहीं है।

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अस्पताल प्रशासन के अनुसार, आग लगने के कारणों का अभी पता नहीं चल सका है, लेकिन प्रारंभिक जांच में शॉर्ट सर्किट की आशंका जताई जा रही है। घटना के बाद रेलवे अधिकारियों और स्थानीय प्रशासन ने अस्पताल का निरीक्षण किया और सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की।

इस हादसे के चलते कुछ समय के लिए अस्पताल की सेवाएं बाधित रहीं, हालांकि अब स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है।

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खौफनाक वारदात: जमीन विवाद में भतीजे ने चाचा को मारी गोली, छठ पर्व पर फैली सनसनी

बेगूसराय/बिहार (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। छठ पर्व के बीच बेगूसराय जिले से एक दिल दहला देने वाली वारदात सामने आई है। बछवारा थाना क्षेत्र के विष्णुपुर दियारा में जमीन विवाद को लेकर भतीजे ने अपने चाचा को गोली मार दी, जिससे पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। घायल व्यक्ति की पहचान सम्शीपुर वार्ड संख्या-3 निवासी 50 वर्षीय राम प्रताप राय के रूप में हुई है। उन्हें गंभीर हालत में निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज जारी है।

पुराना चल रहा था जमीन विवाद

स्थानीय सूत्रों के अनुसार, परिवार के बीच पिछले वर्ष से ही जमीन को लेकर विवाद चल रहा था। इसको लेकर पहले भी दोनों पक्षों के बीच मारपीट और पुलिस केस दर्ज हो चुका था। रविवार सुबह पुलिस ने राम प्रताप राय के दोनों बेटों को गिरफ्तार कर थाने ले गई थी। बताया जाता है कि जब राम प्रताप राय अपने बेटों को छुड़ाकर घर लौट रहे थे, तभी भतीजे और उसके साथियों ने घेरकर फायरिंग कर दी। गोली लगने से वह गंभीर रूप से घायल हो गए, जबकि आरोपी मौके से फरार हो गए।

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डीएसपी बोले – पुराना विवाद ही वजह

घटना की सूचना मिलते ही तेघरा डीएसपी कृष्ण कुमार मौके पर पहुंचे और घटनास्थल का निरीक्षण किया। उन्होंने बताया कि पुराना जमीन विवाद ही गोलीकांड की मुख्य वजह है। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी शुरू कर दी है।

छठ पर्व पर मातम का माहौल

छठ जैसे पवित्र पर्व के दौरान हुई इस घटना से क्षेत्र में शोक और आक्रोश का माहौल है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से सख्त कार्रवाई और दोषियों की शीघ्र गिरफ्तारी की मांग की है।

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राम मंदिर पर हमले की साजिश रच रहा था अदनान, एटीएस और दिल्ली पुलिस की संयुक्त जांच में बड़ा खुलासा

नई दिल्ली/लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने आईएस से जुड़े संदिग्ध आतंकी अदनान को गिरफ्तार किया है, जो अयोध्या के राम मंदिर सहित उत्तर प्रदेश के कई हिंदू धार्मिक स्थलों पर हमले की साजिश रच रहा था। एटीएस की जांच में खुलासा हुआ है कि अदनान पिछले कई महीनों से आतंकी संगठन के संपर्क में था और भारत में आतंकी घटनाओं को अंजाम देने की तैयारी कर रहा था।

एटीएस सूत्रों के अनुसार, भोपाल निवासी अदनान को पहले भी हाईकोर्ट के जज को धमकी देने के मामले में गिरफ्तार किया गया था। पिछले साल जून में उसने वाराणसी के ज्ञानवापी परिसर का सर्वे कराने वाले जज रवि कुमार दिवाकर को धमकी दी थी। उसने इंस्टाग्राम पर जज की फोटो पोस्ट कर लाल रंग से “काफिर” लिखा था और अंग्रेजी में लिखा था – “काफिर का खून हलाल है, जो दीन के लिए लड़ रहे हैं।”

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अदनान को एटीएस ने गिरफ्तार कर जेल भेजा था, लेकिन पांच महीने बाद जमानत पर छूटने के बाद उसने फिर से जिहादी नेटवर्क से संपर्क साध लिया। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने उसे संदिग्ध गतिविधियों के चलते गिरफ्तार किया और एटीएस को सूचित किया। एटीएस की टीम फिलहाल दिल्ली में रहकर उससे लगातार पूछताछ कर रही है।

प्राथमिक जांच में सामने आया है कि अदनान राम मंदिर, काशी, मथुरा और अन्य धार्मिक स्थलों पर हमला करने की योजना बना रहा था। बताया जा रहा है कि उसे सीरिया में बैठे आईएस खलीफा की ओर से वीडियो और संदेश भेजे गए थे, जिनमें यूपी के धार्मिक स्थलों को निशाना बनाने की बात कही गई थी।

वहीं, 21 नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अयोध्या में राम मंदिर ध्वजारोहण कार्यक्रम में शामिल होने जा रहे हैं। इस कार्यक्रम को देखते हुए एटीएस और केंद्रीय एजेंसियों ने सुरक्षा को लेकर अलर्ट जारी कर दिया है। एजेंसियां अदनान के नेटवर्क और संभावित साथियों की तलाश में जुटी हैं।

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ठंडी में सेहत का कवच: आंवला, गुड़ और धूप से बने रहें ऊर्जावान और रोगमुक्त

डाॅ गिरिजेश मिश्र
वरिष्ठ होम्योपैथिक चिकित्सा विशेषज्ञ

ठंडी का मौसम आते ही शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर पड़ने लगती है। ऐसे में ज़रूरी है कि हम अपनी दिनचर्या और खानपान को मौसम के अनुरूप बनाएं। ठंडी हवाओं में अगर कुछ सबसे प्रभावी प्राकृतिक औषधि मानी जाती है, तो वह है आंवला। विटामिन C से भरपूर यह फल न सिर्फ इम्यूनिटी बढ़ाता है, बल्कि त्वचा, बाल और पाचन को भी मजबूत करता है। आइए जानते हैं कि कैसे आप आंवला, गुड़, तिल और धूप के साथ अपने दिन की शुरुआत कर सर्दी के मौसम में तन और मन दोनों को स्वस्थ रख सकते हैं।

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🌞 सुबह की सही शुरुआत करें – रोगों से दूरी बनाएं

  1. गुनगुना पानी + नींबू या आंवला रस (1 चम्मच):
    सुबह खाली पेट इसका सेवन करने से शरीर से टॉक्सिन्स निकलते हैं, पाचन सुधरता है और सर्दी-जुकाम से बचाव होता है।
  2. थोड़ी धूप जरूर लें:
    विटामिन D का प्राकृतिक स्रोत धूप है, जो हड्डियों को मजबूत करती है और मूड को अच्छा रखती है।
  3. योग और प्राणायाम:
    “कपालभाति”, “अनुलोम-विलोम” और “सूर्य नमस्कार” जैसी क्रियाएं शरीर को गर्म, लचीला और ऊर्जावान बनाती हैं।
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  5. 🍽️ दिनभर का भोजन: स्वाद के साथ सेहत का संगम समय क्या खाएं क्यों लाभकारी
    सुबह का नाश्ता आंवला मुरब्बा या चटनी + दलिया / मूंग दाल चीला इम्यूनिटी बढ़ाता है, दिनभर ऊर्जा देता है
    दोपहर का भोजन बाजरे/गेहूं की रोटी, हरी सब्जियाँ (पालक, मेथी, सरसों), सलाद में आंवला पाउडर या नींबू शरीर को गर्म रखता है
    शाम का नाश्ता भुने चने, गुड़-तिल लड्डू, हल्का सूप (पालक/टमाटर) शरीर को पोषण और गर्मी देता है
    रात का भोजन हल्की खिचड़ी या सूप + एक चम्मच घी + हल्दी दूध नींद अच्छी आती है और शरीर रिलैक्स होता है।
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  7. 🌿 आंवले के साथ सर्वोत्तम संयोजन
  8. गुड़ + आंवला: खून की कमी और थकान दूर करता है।
  9. आंवला + शहद: इम्यूनिटी बढ़ाने वाला प्राकृतिक टॉनिक।
  10. आंवला + तुलसी: सर्दी-जुकाम और खांसी में बेहद उपयोगी।
  11. आंवला + घी: त्वचा और बालों की चमक बढ़ाता है।
  12. आंवला अचार / मुरब्बा: स्वादिष्ट और लंबे समय तक उपयोगी।
    💪 स्वस्थ सर्दियों की विशेष दिनचर्या
    रोज़ाना कम से कम 6–8 घंटे की नींद लें।
    ठंड में गुनगुना पानी पिएं, ठंडा पानी अवॉयड करें।
    शरीर को गर्म रखने के लिए तिल, मूंगफली, गुड़ और सूखे मेवे का सेवन करें।
    धूप में प्रतिदिन 15–20 मिनट बैठें।
    गीले कपड़े लंबे समय तक न पहनें।
    रात में सोने से पहले गुनगुना हल्दी दूध जरूर पिएं — यह इम्यूनिटी और नींद दोनों के लिए फायदेमंद है।
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  14. 🩵सर्दियों में सेहत बनाए रखना मुश्किल नहीं, बस थोड़ी समझदारी और प्रकृति के इन वरदानों — आंवला, गुड़, तिल, हल्दी और धूप — को अपने जीवन का हिस्सा बनाना जरूरी है। इन प्राकृतिक तत्वों के साथ आपका शरीर न सिर्फ रोगों से सुरक्षित रहेगा बल्कि मन भी प्रसन्न और ऊर्जावान बना रहेगा।

आस्था, विश्वास व सूर्यदेव की उपासना का वृतपर्व छठपूजा

छठिमैया मोरी विनती बारम्बार,
स्वीकारौ अर्ध्य हमार।
छठिमैया बड़का परब बरत पूजा बा,
यामे कौनो पंडित नाहीं,
कोउ नाहीं पूजारी,
सूरज देवता अर्ध्य लेवत हैं,
डूबत उगत तैयारी,
डूबत सूरजन का पूजत बा
सब भोले नर नारी।
छठिमैया मोरी विनती….

सबय करत बरत औ पूजन,
ना कोउ ऊँच ना नीचा,
लोकगीत पुरबिया गावैं,
गावैं सबय बरतधारी,
सब पकवान घरै मा बनावत
लरिका बिटिया खाईं,
सगरी रात घाट भरि नहावैं
कोऊ ऊँच न नीच जनाईं।
छठिमैया मोरी विनती ……

टोकरियाँ भरि भरि बटत परसदवा
अमीरौ गरीबवा खाई,
बहुतै श्रद्धा भगति करत सब
पूजत सूरज औ छठि माई,
लगातार छत्तीस घंटा तक बरती
बिन खाये पिये रहि जाई,
छठिमैया मोरी विनती बारम्बार,
स्वीकारौ अर्ध्य हमार।

बढ़ै सामाजिक सौहार्द,
सदभाव, आस्था व विश्वास,
शांति, समृद्धि व सादगी आवति
छठिमैया भरती घर द्वार,
पवित्रता का महापरब है,
फ़ूलैं फलैं सब सपरिवार,
आदित्य देत बधाई औ
शुभकामना सब करौ स्वीकार।
छठिमैया मोरी विनती…..

डॉ कर्नल आदि शंकर मिश्र
‘आदित्य’

पैदल सेना दिवस: सीमाओं की मिट्टी में रचा-बसा साहस

हर राष्ट्र की शक्ति उसकी सीमाओं से नहीं, बल्कि उन सिपाहियों से मापी जाती है जो सीमाओं की रक्षा में अपने जीवन का सर्वस्व समर्पित करते हैं। 27 अक्तूबर 1947 का दिन भारतीय इतिहास में उसी अमर समर्पण का साक्षी बना, जब भारतीय पैदल सेना की टुकड़ी श्रीनगर पहुँची और पाकिस्तान समर्थित कबायली हमलावरों के मंसूबे चकनाचूर कर दिए। यही वह क्षण था जिसने न केवल जम्मू-कश्मीर को बचाया, बल्कि स्वतंत्र भारत की सैन्य प्रतिबद्धता की दिशा तय की। इसी ऐतिहासिक घटना की स्मृति में प्रतिवर्ष 27 अक्तूबर को ‘पैदल सेना दिवस’ मनाया जाता है।
भारतीय सेना का सबसे बड़ा और प्राचीनतम अंग है पैदल सेना, The Infantry। यही वह बल है जो दुर्गम पहाड़ियों से लेकर तपते रेगिस्तानों और सर्द सीमांतों तक, हर भूगोल में डटा रहता है। आधुनिक युद्ध तकनीक के इस युग में भी पैदल सैनिक का महत्व अक्षुण्ण है, क्योंकि अंततः युद्ध भूमि पर झंडा किसी मशीन ने नहीं, बल्कि इंसान ने फहराया है।
कश्मीर से लेकर कारगिल तक, सियाचिन से लेकर अरुणाचल के सीमांत तक पैदल सेना के जवानों ने अपने साहस और बलिदान से भारत की सीमाओं को अडिग रखा है। इतिहास साक्षी है कि इन वीरों ने हर चुनौती को मात दी है, चाहे मौसम का प्रकोप हो या दुश्मन का आक्रमण। उनका जीवन अनुशासन, साहस और राष्ट्रनिष्ठा की जीवंत मिसाल है।
पैदल सैनिक केवल सीमा के रक्षक नहीं, बल्कि मानवता के भी प्रहरी हैं। आपदाओं, बाढ़, भूकंप या महामारी, हर संकट में वे राहत और भरोसे के प्रतीक बनकर उतरते हैं। वे ‘शक्ति के साथ संवेदना’ का अद्भुत संगम हैं, जो उन्हें असाधारण बनाता है।
पैदल सेना दिवस हमें केवल गौरव की याद नहीं दिलाता, बल्कि एक प्रश्न भी छोड़ जाता है। क्या हम उन सैनिकों के त्याग का सम्मान अपनी निष्ठा, ईमानदारी और कर्तव्यपरायणता से कर पा रहे हैं? राष्ट्र सेवा केवल सीमा पर नहीं होती; यह हर नागरिक के रोज़मर्रा के कर्म में निहित है।
आज जब हम पैदल सेना दिवस मना रहे हैं, तो यह केवल श्रद्धांजलि का अवसर नहीं, बल्कि संकल्प का भी क्षण है। हमें यह स्मरण रखना होगा कि देश की सीमाएँ केवल सैनिकों के बूते सुरक्षित नहीं रहतीं, बल्कि नागरिकों की जागरूकता और एकता से भी सशक्त होती हैं। उन वीरों को नमन, जिनके कदमों की आहट ने कश्मीर से कन्याकुमारी तक भारत की मिट्टी को गर्व से भर दिया।

तेजस्वी के उभार के पीछे उम्मीद से ज़्यादा विवशता

बिहार की राजनीति हमेशा से गठबंधनों, जातीय समीकरणों और भावनात्मक मुद्दों की प्रयोगशाला रही है। आज जब एक बार फिर राज्य की सियासत तेजस्वी यादव के नेतृत्व के इर्द-गिर्द घूम रही है, तब यह सवाल स्वाभाविक है कि क्या यह समर्थन जन-आकांक्षा की स्वाभाविक स्वीकृति है, या परिस्थितियों की विवशता से उपजी सहमति?
तेजस्वी यादव ने हाल के वर्षों में अपने राजनीतिक कद को निस्संदेह बढ़ाया है। उन्होंने युवा नेतृत्व की छवि गढ़ने की कोशिश की, बेरोजगारी और विकास जैसे मुद्दों को सामने रखा, और यह दिखाने का प्रयास किया कि वे लालू युग की राजनीति से आगे बढ़कर “नई सोच का बिहार” चाहते हैं। किंतु जनादेश या राजनीतिक समर्थन का जो स्वरूप अब बनता दिख रहा है, उसमें उत्साह से अधिक विवशता झलकती है।
विवशता इसलिए कि बिहार की राजनीति में फिलहाल कोई ठोस वैकल्पिक चेहरा नहीं उभर पाया है। सत्ता-विपक्ष दोनों ही अपनी सीमाओं से जूझ रहे हैं — सत्ताधारी दल जनहित के वादों को अमल में उतारने में नाकाम साबित हुआ है, तो विपक्ष के पास तेजस्वी के अलावा कोई प्रभावशाली जननेता नहीं है। परिणामस्वरूप, जनता या गठबंधन सहयोगी दलों की स्वीकृति किसी वैचारिक सहमति से नहीं, बल्कि “कोई बेहतर विकल्प न होने” के कारण बनती दिख रही है।
तेजस्वी यादव के नेतृत्व में राजद ने सामाजिक न्याय की विरासत को नए शब्दों में प्रस्तुत किया है, परंतु अब भी उस पर “परिवारवादी राजनीति” और “आर्थिक अक्षमता” की छाया बनी हुई है। उनके नेतृत्व में सरकार बनने की संभावनाएं तो हैं, पर भरोसे की नींव उतनी मजबूत नहीं दिखती। जनता में एक वर्ग ऐसा है जो बदलाव तो चाहता है, पर इस बदलाव की दिशा को लेकर आश्वस्त नहीं है।
राजनीति में किसी नेता की स्वीकार्यता तब सार्थक होती है, जब वह विश्वास, दृष्टि और परिणामों के आधार पर हो। केवल असंतोष के प्रतिफलस्वरूप किसी को विकल्प मान लेना लोकतंत्र की मजबूती नहीं, बल्कि उसकी सीमाओं का संकेत है। तेजस्वी यादव के लिए यह समय चुनौती और अवसर दोनों हैl वे चाहें तो इस “विवशता भरी स्वीकृति” को “विश्वासपूर्ण नेतृत्व” में बदल सकते हैं, बशर्ते वे शासन की स्थिरता, ईमानदारी और विकास के ठोस प्रमाण प्रस्तुत करें।
बिहार की जनता ने दरवाज़ा खोला है, पर चाबी अब भी संदेह की जेब में है। तेजस्वी को यह सिद्ध करना होगा कि वे केवल सत्ता के उत्तराधिकारी नहीं, बल्कि उम्मीदों के भी हक़दार हैं।

“संवेदनाओं से सजे कदम: देवरिया में समाजसेवा बन रही है परिवर्तन की पहचान”

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)।
समाज के बीच एक नई चेतना जन्म ले रही है — जहाँ मदद किसी दायित्व से नहीं, बल्कि दिल की पुकार से की जा रही है। देवरिया में सामाजिक सरोकारों की ऐसी लहर उठी है, जिसने यह साबित कर दिया कि यदि इरादे नेक हों, तो छोटे-छोटे प्रयास भी बड़े बदलाव की नींव रख सकते हैं।

शहर के युवाओं, शिक्षकों और स्वयंसेवी संस्थाओं ने मिलकर “जनसेवा से जनजागरण” की एक नई परंपरा शुरू की है। कोई अनाथ बच्चों को शिक्षा से जोड़ रहा है, कोई वृद्धाश्रम में सेवा दे रहा है, तो कोई गाँव-गाँव जाकर नशा मुक्ति का संदेश फैला रहा है।
इन पहलों ने न केवल समाज को जोड़ने का काम किया है, बल्कि लोगों के भीतर एक-दूसरे के लिए कुछ करने की भावना को फिर से जगाया है।

स्थानीय संगठन “जनचेतना मंच” की संयोजिका ने बताया —
“समाज तभी मजबूत होगा जब हर व्यक्ति अपने भीतर के नागरिक को जगाए। दूसरों की मदद करना आज सबसे बड़ा धर्म है।”

इसी क्रम में पिछले सप्ताह आयोजित “सेवा से स्वाभिमान तक” कार्यक्रम में दर्जनों युवाओं ने सड़क किनारे सफाई अभियान चलाया, झुग्गी बस्तियों में बच्चों को पढ़ाया और रक्तदान शिविरों में भाग लिया।

इन छोटे-छोटे प्रयासों ने देवरिया को नई दिशा दी है — एक ऐसे शहर के रूप में जहाँ संवेदना ही संस्कृति बन गई है और समाज का हर वर्ग एक-दूसरे के साथ खड़ा है।

यह परिवर्तन केवल सेवा का नहीं, बल्कि समझ और सामूहिक जिम्मेदारी का है — जो बताता है कि जब समाज आगे बढ़ता है, तो राष्ट्र स्वयं विकसित होता है।

प्रशंसा से प्रेरणा तक: सकारात्मक शब्दों का जादू

गोंदिया – कुदरत द्वारा रचित इस खूबसूरत सृष्टि में बेहद शक्तिशाली, बुद्धिमान मानवीय प्राणी की रचना कर उसमें ऐसे अद्भुत गुणों की खान को मन, हृदय, मस्तिष्क रूपी शरीर के हिस्सों में इस तरह समायोजित किया है कि अपनें एक एक गुण शक्ति को पहचान कर उसे निखारा जाए तो श्रेष्ठ मानव की मिसाल कायम करने में देर नहीं लगेगी परंतु हम मानवीय जीव एसी उलझन में फंस कर रह गए हैं कि आज एक मानव ही दूसरे मानव का दुश्मन हो कर उसके हर काम की ऐसी आलोचना करता है कि सकारात्मक भाव, कार्य, गुण, मेहनत को नकारात्मक, निरउपयोगी और बेकार बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ता और अहंकार रूपी मैं मैं का बोध धारण कर उस विकार को अपनी शक्ति समझकर पालते है जबकि हम अपने दोस्तों की तो क्या, दुश्मनों के अच्छे कार्य की अगर थोड़ी सी तारीख प्रशंसा कर दें तो उसके लिए यह औषधि का काम करेगी क्योंकि तारीफ़, प्रशंसा एक फूल की सुगंध रूपी व सार्थक शक्ति है जो मनुष्य की सोई हुई उर्जा को जगा कर मंजिल तक पहुंचाने का काम करती है! जब कोई हमारी तारीफ़ करता है तो हमारे व्यक्तित्व में मिठास घुलने लगती है। प्रशंसा की यह मिठास न केवल कानों में प्रवेश करती है बल्कि मन के द्वारा हृदय में घुल जाती है और हमारे मंजिल तक पहुंचने का कारण बनती है आज के आर्टिकल में हम इसी औषधि तारीफ़ और प्रशंसा रूपी सुगंध का विश्लेषण करेंगे।

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साथियों बात अगर हम तारीफ और प्रशंसा दोनों शब्दों की करें तो दोनों में बहुत सामान्य अंतर हैं, इनमें मुख्य अंतर यह है कि एक तारीफ़ कृतज्ञता, बधाई, प्रोत्साहन या सम्मान की अभिव्यक्ति है, जबकि प्रशंसा एक उचित मूल्यांकन या योग्यता, मूल्य या उत्कृष्टता की मान्यता का अनुमान हैं। इसका उपयोग उस व्यक्ति को धन्यवाद देने के लिए किया जाता है जिसने आपके लिए कुछ अच्छा किया है या कुछ ऐसा किया है जो आपको लगता है कि उसे प्रशंसा या विचार दिया जाना चाहिए। तारीफ का एक अच्छा उदाहरण है – आप वाकई साहसी हैं। प्रशंसा किसी ऐसी चीज़ की मान्यता या चिंता है जो आकर्षक है। किसी वस्तु को अत्यधिक ध्यान में रखना, जैसे मूर्ति का काम, उसकी सराहना करने का एक उदाहरण है। प्रशंसा को कृतज्ञता की भावनाओं के रूप में परिभाषित किया गया है। प्रशंसा का एक उदाहरण है – मैं आपके भारी काम और समर्पण के लिए सार्वजनिक रूप से आपको धन्यवाद देना चाहता हूं।

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साथियों बात अगर हम तारीफ और प्रशंसा के सामर्थ्य व्यक्तित्व के गुणों की करें तो, एक श्लोक आया हैं
अष्टौ गुणा: पुरुषं दीपयन्ति, प्रज्ञा च कौल्यं च दम: श्रतुं च!पराक्रमश्चबहुभाषिता च दानं यथाशक्ति कृतज्ञता च॥
अर्थ-सर्वेश्रेष्ठ आठ गुणों से मनुष्य की बहुत प्रशंसा होती है- (1) बुद्धि, (2) कुलीनता, (3) मन का संयम,(4) ज्ञान, (5) बहादुरी, (6) कम बोलना, (7) दान देना और (8) दूसरे के उपकार को याद रखना। इनका सामूहिक अर्थ, व्यक्ति अपनी बुद्धि का सही तरीके से उपयोग करना जानता है, वह अपनी लाइफ में बहुत सक्सेस पाता है। जो व्यक्ति बिना सोच-समझे कोई काम करता है, उसे अक्सर असफलता का मुंह देखना पड़ता है। जिस व्यक्ति का व्यवहार सरल और सहज होता है, वह भी अपने इस नेचर के कारण प्रसिद्धि पा सकता है। जबकि इसके उलट व्यवहार करने वाला व्यक्ति कभी किसी का प्रिय नहीं होता। जो व्यक्ति अपने मन यानी इंद्रियों को नियंत्रण में रखता है, वह साधु के समान होता है। ऐसा व्यक्ति महान गुरु बनकर भटके हुए मनुष्यों को रास्ता दिखाता है। यही काम करते हुए वह प्रशंसा और प्रसिद्धि पा सकता है।
साथियों ज्ञान यानी नॉलेज। जिस व्यक्ति के पास ज्ञान होता है, वह हर समस्या का सामना कर लेता है। साथ ही वह लोगों को सही सलाह देकर उनकी परेशानियां भी कम करता है। ऐसे लोग अपने नॉलेज के दम पर अलग जगह बनाते हैं और प्रशंसा पाते हैं। जो व्यक्ति पराक्रमी यानी बहादुर होता है वह अपने दम पर प्रसिद्धि पाता है। विषम परिस्थिति में भी ऐसे लोग घबराते नहीं है और दूसरों की भी मदद करते हैं। इनका यही काम इन्हें लोकप्रिय बनाता हैं।जो व्यक्ति हमेशा सोच-समझकर बोलता है, कब क्या बोलना है यह जानता है, वह अपनी लाइफ में काफी प्रसिद्ध होता है। जो ज्यादा बोलते हैं, कब क्या बोलना है यह नहीं जानते, उनका कोई सम्मान नहीं करता। धर्मों में दान करनाअनिवार्य माना गया है। जो व्यक्ति अपनी क्षमता के अनुसार दान करता है वह अपनी लाइफ में सक्सेस भी होता है और फेम भी पाता है। जीवन में कभी न कभी सभी को मदद की जरूर पड़ती है। जो लोग मदद करने वाले को भूल जाते हैं, उन्हें अपने जीवन में हमेशा परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इसके विपरीत जो लोग मदद करने वाले को हमेशा याद रखते हैं और उनके सुख-दुख में साथ देते हैं, वे भी प्रसिद्धि पाते हैं।

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साथियों बात अगर हम तारीफ प्रशंसा की ज़रूरत की करें तो, प्रोत्साहन की जरूरत बच्चों ही नहीं, बडों को भी होती है। घर से लेकर स्कूल-कॉलेज, सार्वजनिक स्थलों और कार्यस्थल तक इसकी आवश्यकता पडती है।शिक्षक की जरा सी तारीफ से बच्चे का आत्मविश्वास बढ सकता है तो पेरेंट्स का प्रोत्साहन उसे बेहतर भविष्य की ओर बढने को प्रेरित करता है। अरे वाह! तुमने तो इतना मुश्किल सवाल हल कर दिखाया, शाबाश! यह छोटा सा वाक्य नन्हे मस्तिष्क पर बडा प्रभाव पैदा करता है। सराहना के चंद लफ्ज रिश्तों को खुशगवार बना सकते हैं। मां, तुम्हारे हाथों में तो कमाल है! बच्चे की छोटी सी तारीफ मां की डिक्शनरी का सबसे खूबसूरत वाक्य बन सकती है।
साथियों बात अगर हम धार्मिक साहित्य पुराणों में तारीफ़ प्रशंसा की करें तो, महाकवि कालिदास लिखते हैं- स्तोत्रं कस्य ना तुष्टये। स्तुति अर्थात् प्रशंसा किसे प्रसन्न नहीं करती है वेदों, पुराणों में देवी-देवताओं की स्तुति के लिए विविध स्तोत्रों की रचना की गई है। रामचरितमानस के किष्किंधा काण्ड में जब हनुमान को सीता की खोज में समुद्र के पार जाना था, वह उदास और गुमसुम से बैठे थे। उस समय रीछराज जामवंत की प्रशंसा प्रोत्साहित करने वाली थी और उन्हें सागर पार जाने का हौसला देने वाली थी।

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साथियों बात अगर हम तारीफ प्रशंसा में एक ट्विस्ट अदृश्य विष करें तो, यहीं से कुछ झंझटें भी शुरू हो जाती हैं, क्योंकि प्रशंसा के भीतर अदृश्य विष छुपा होता है प्रशंसा हमें अच्छे कर्म के लिए प्रेरित कर सकती है या अहंकार पैदा कर गिरा भी सकती है। प्रशंसा को धीर-गंभीर लोग तुरंत पचाने में लग जाते हैं और किसी अच्छे काम के लिए प्रेरित होते हैं। प्रशंसा प्रेरणा बन जाती है। परंतु मूर्ख प्रशंसा सुनकर अहंकार पाल लेते हैं। उनका ‘मैं’ और प्रबल हो जाता है। ‘मैं’ लगभग दूसरी मौत का नाम है। हमें इससे बचना चाहिए, क्योंकि कुछ लोग हमारी प्रशंसा अहंकार बढ़ाकर हमें बर्बाद करने के लिए कर सकते हैं। यही प्रशंसा का जहर है।

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साथियों चापलूसी और तारीफ दोनों का इस्तेमाल किसी की तारीफ करने के लिए किया जाता है। हालाँकि, चापलूसी और तारीफ में बड़ा अंतर है। चापलूसी और तारीफ के बीच मुख्य अंतर ईमानदारी में है। चापलूसी अत्यधिक या निष्ठाहीन प्रशंसा है जबकि तारीफ किसी चीज या किसी की वास्तविक प्रशंसा है। जैसा कि कहानीयों में देखा गया है, एक व्यक्ति आमतौर पर अपने हितों को आगे बढ़ाने के लिए दूसरे की चापलूसी करता है। उसका मकसद उस व्यक्ति से कुछ उधार लेना, किसी चीज के लिए मदद लेना, अपने बारे में सकारात्मक धारणा बनाना या यहां तक कि नुकसान पहुंचाना भी हो सकता है। हालाँकि बहुत से लोग उनकी चापलूसी करते हैं, चापलूसी कभी भी किसी को प्रभावित करने का एक अच्छा तरीका नहीं है। यह व्यक्ति की जिद और बेईमानी को दर्शाता है।
साथियों कुछ लोग ऐसी श्रेणी में आते हैं जो न गंभीर होते हैं और न मूर्ख। इन्हें सहज कह सकते हैं। सबसे अच्छा तरीका यही है। सहजता से सुनिए और भूल जाइए। तब प्रशंसा ऐसा लाभ देगी, जो दिखेगा नहीं लेकिन भविष्य में काम कर जाएगा। आप सहज हैं तो सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि प्रशंसा के समय आपकी सोच, जो हो सो हो, लेकिन आलोचना के समय आप परेशान नहीं होंगे। आलोचना के समय धीर-गंभीर व्यक्ति को भी ताकत लगानी पड़ती है और मूर्ख तो आवेश में आ ही जाते हैं। सहज व्यक्ति दोनों ही स्थिति में अपनी खुशी से सौदा नहीं करेगा।
अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर उसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि तारीफ़ और प्रशंसा औषधि का काम करती है जो हमारे व्यक्तित्व में मिठास, कानों से होते हुए मन के द्वारा हृदय में घुल जाती है,आओ तारीफ़ और प्रशंसा कर हौसला बढ़ाएं- निष्ठाहीन प्रशंसा चापलूसी को छोड़ें।तारीफ़ प्रशंसा रूपी फूल की सुगंध रूपी सार्थक शक्ति मनुष्य की सोई हुई ऊर्जा को जगा कर मंजिल तक पहुंचाया जा सकता है।

-संकलनकर्ता लेखक – एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं , महाराष्ट्र 9284141425

ज्ञान से नवाचार तक: शिक्षा में बदलाव की क्रांति, अब डिग्री नहीं कौशल बनेगा पहचान

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)।
देश के भविष्य की रूपरेखा अब कक्षा में ही लिखी जा रही है। शिक्षा जगत में ऐसा परिवर्तन आरंभ हो चुका है जो केवल पाठ्यक्रम नहीं, बल्कि जीवन और रोजगार दोनों को नई दिशा दे रहा है। पारंपरिक पठन-पाठन की जगह अब स्मार्ट लर्निंग, डिजिटल तकनीक और नवाचार आधारित शिक्षा ने ले ली है। यही वह परिवर्तन है जो भारत को “ज्ञान से विकसित राष्ट्र” की ओर अग्रसर कर रहा है।

अब विद्यालयों में बच्चों को सिर्फ़ डिग्री नहीं, बल्कि कौशल और व्यवहारिक शिक्षा दी जा रही है। शिक्षक ‘ज्ञानदाता’ नहीं, बल्कि ‘मार्गदर्शक’ बनकर विद्यार्थियों को वास्तविक जीवन की चुनौतियों के लिए तैयार कर रहे हैं।

शिक्षकों का कहना है कि नई शिक्षा नीति ने बच्चों को सोचने, तर्क करने और निर्णय लेने की क्षमता दी है। वहीं अभिभावकों का मानना है कि इस बदलाव ने बच्चों में आत्मविश्वास के साथ-साथ समाज के प्रति संवेदनशीलता भी बढ़ाई है।

जिले के कई शिक्षण संस्थानों में अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल लैब्स और प्रोजेक्ट-आधारित लर्निंग जैसी व्यवस्थाएँ लागू की जा रही हैं, जिससे शिक्षा का अर्थ केवल अंक प्राप्त करना नहीं बल्कि सृजनशीलता, नवाचार और रोजगार सृजन बन गया है।

यह परिवर्तन सिर्फ़ शिक्षा का नहीं, बल्कि भारत के उज्ज्वल भविष्य का प्रारंभ है — जहाँ हर छात्र अपने ज्ञान से राष्ट्र निर्माण में योगदान देगा।

विश्वविद्यालय के प्रोफेसर पर शादी का झांसा देकर शोध छात्रा से शारीरिक शोषण का आरोप, एफआईआर दर्ज

Agra News: आगरा में डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के एक प्रोफेसर पर शादी का झांसा देकर शोध छात्रा का शारीरिक शोषण करने का गंभीर आरोप लगा है। बरहन थाना क्षेत्र की रहने वाली पीड़िता ने खंदारी कैंपस स्थित स्कूल ऑफ बेसिक साइंस के केमिस्ट्री विभाग के प्रोफेसर गौतम जैसवार के खिलाफ तहरीर दी है। पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

पीड़िता के अनुसार, वह स्कूल ऑफ बेसिक साइंस में रिसर्च स्कॉलर है और प्रोफेसर गौतम जैसवार उसके को-गाइड थे। पीएचडी के दौरान प्रोफेसर ने उसे शादी का झांसा देकर करीब दो वर्षों तक शारीरिक संबंध बनाए। जब छात्रा ने शादी के लिए दबाव डाला तो आरोपी ने बदनाम करने और शोध में फेल करने की धमकी दी।

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दहशत में आई छात्रा ने परिजनों को पूरी बात बताई और शनिवार रात पुलिस से शिकायत की। प्रारंभिक जांच के बाद रविवार को एफआईआर दर्ज कर ली गई। एसीपी हरीपर्वत अक्षय महाडिक ने बताया कि आरोपों की जांच चल रही है और सबूत जुटाकर जल्द चार्जशीट दाखिल की जाएगी।

रेस्टोरेंट में भीषण आग: चार सिलेंडर फटने से मचा हड़कंप, एक महिला की मौत, कई घायल

Moradabad News: मुरादाबाद में रविवार रात एक रेस्टोरेंट में चार गैस सिलेंडर फटने से भीषण आग लग गई। यह हादसा कटघर थाना क्षेत्र स्थित क्लार्क्स इन होटल के सामने बने एक रेस्टोरेंट में हुआ। धमाकों की आवाज से इलाके में अफरा-तफरी मच गई और आग ने देखते ही देखते इमारत की अन्य मंजिलों को भी अपनी चपेट में ले लिया।

मुरादाबाद के सीएफओ राजीव कुमार पांडे ने बताया कि रात करीब 10 बजे आग लगने की सूचना मिली, जिसके बाद दमकल विभाग की सात गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। रेस्क्यू अभियान के दौरान लगभग 16 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया, जिनमें चार महिलाएं और दो बच्चे शामिल थे। एक कुत्ते को भी जीवित बचाया गया।

जिला अस्पताल के इमरजेंसी चिकित्सा अधिकारी डॉ. जुनैद असारी ने बताया कि कुल सात घायलों को अस्पताल लाया गया, जिनमें से 56 वर्षीय माया नामक महिला को मृत अवस्था में लाया गया था। बाकी मरीजों की स्थिति स्थिर बताई जा रही है। आग लगने के कारणों की जांच की जा रही है।

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