Sunday, July 5, 2026
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सूर्य उपासना में डूबे विधायक जय मंगल कन्नौजिया — परिवार संग निभाई लोक आस्था की परम्परा

श्रद्धा, अनुशासन और लोक संस्कृति से सराबोर रहा छठ महापर्व का दृश्य

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। आस्था और लोक परंपरा के महापर्व छठ पूजा के अवसर पर सदर विधायक जय मंगल कन्नौजिया ने पूरे श्रद्धा भाव से सूर्य उपासना में हिस्सा लिया।
विधायक अपने निवास से पत्नी पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष सुनीता कन्नौजिया एवं परिजनों के साथ पारंपरिक विधि से छठ का छठ डाल सिर पर रखकर निकले और पैदल यात्रा करते हुए नगर स्थित छठ घाट पहुंचे। रास्ते भर श्रद्धालुओं में भक्ति और उल्लास का अद्भुत माहौल रहा। महिलाएं पारंपरिक गीत गा रही थीं तो पुरुष भक्त सेवा में जुटे थे। छठ घाट पहुंच कर विधायक ने आम श्रद्धालुओं की तरह अस्ताचलगामी सूर्य को अर्ध्य अर्पित किया और प्रदेश में शांति, समृद्धि एवं जनकल्याण की कामना की। उन्होंने कहा छठ पर्व भारतीय संस्कृति में आस्था, अनुशासन और प्रकृति के प्रति सम्मान का प्रतीक है। सूर्य देव और छठी मैया की उपासना से शक्ति, स्वास्थ्य और समृद्धि का वरदान मिलता है। विधायक ने घाट पर पहुंचे श्रद्धालुओं से मुलाकात कर शुभकामनाएं दीं। नगर पालिका द्वारा घाटों पर सुरक्षा, स्वच्छता और प्रकाश व्यवस्था की विशेष तैयारियां की गई थीं। अधिकारीगण भी मौके पर मौजूद रहे।
इस अवसर पर संजीव शुक्ला, राकेश अग्रहरी, पवन कन्नौजिया सहित बड़ी संख्या में महिला व्रतधारी, पुरुष और बच्चे उपस्थित रहे। जगमगाते दीपों की लौ, लोकगीतों की गूंज और सूर्य उपासना का अद्भुत संगम देखकर पूरा घाट भक्ति व लोक संस्कृति से सराबोर नजर आया।

छठ पूजा जाने के दौरान हादसा: कांग्रेस नेता की पत्नी बाइक से गिरकर हुई गंभीर रूप से घायल

बरहज/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। छठ पूजा मनाने के लिए मायके जा रही कांग्रेस नेता की पत्नी सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल हो गईं। सोमवार को बरहज नगर कांग्रेस अध्यक्ष जितेंद्र जायसवाल उर्फ जीतू की पत्नी सुनीता जायसवाल (40 वर्ष) बाइक से पटना घाट की ओर जा रही थीं। नौकटोला मार्ग के समीप एक स्पीड ब्रेकर पर बाइक अनियंत्रित हो गई, जिससे वह सड़क पर गिर पड़ीं और गंभीर रूप से घायल हो गईं।

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घटना के बाद स्थानीय लोगों ने आनन-फानन में उन्हें बड़हलगंज के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया, जहाँ उनका इलाज जारी है।
कांग्रेस नगर अध्यक्ष जितेंद्र जायसवाल ने बताया कि उनकी पत्नी की स्थिति फिलहाल स्थिर है, और डॉक्टरों की टीम लगातार निगरानी कर रही है।

छठ पूजा के अवसर पर यात्रा के दौरान हुई इस दुर्घटना से स्थानीय कांग्रेस कार्यकर्ताओं में चिंता का माहौल है।

छठ पूजा 2025: बलिया में आस्था का सागर उमड़ा, घाटों पर गूंजे छठ मइया के जयकारे

सिकंदरपुर/बलिया (राष्ट्र की परम्परा)। बलिया जिले के ग्रामीण अंचलों में लोक आस्था के महापर्व छठ पूजा की अद्भुत छटा देखने को मिल रही है। गांव-गांव में भक्ति और श्रद्धा का माहौल व्याप्त है। मालदह, बघुड़ी, नवानगर, हुसैनपुर, बनहरा, रामपुर कटराई, मुंडेरा, सरनी और लखनापार समेत दर्जनों गांवों के घाटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी।

महिलाओं ने दो दिनों के कठोर नियमों का पालन करते हुए नंगे पैर घाटों तक पहुंचकर डूबते सूर्य को अर्घ्य अर्पित किया। उनके साथ परिवारजन भी पूरे उत्साह से पूजा में शामिल रहे। घाटों को फूलों, दीपों, केले के पत्तों और रंग-बिरंगी सजावट से सुंदर रूप दिया गया था।

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नदी किनारे जलते दीपों की रौशनी से दृश्य अत्यंत मनमोहक प्रतीत हो रहा था। छठ के पारंपरिक गीतों से पूरा वातावरण भक्तिमय बन गया। महिलाएं अर्घ्य देते समय अपने पुत्रों की दीर्घायु, परिवार की सुख-समृद्धि और समाज के कल्याण की कामना कर रही थीं।

नगर पंचायत से लेकर ग्रामीण इलाकों तक लोगों ने उल्लास के साथ इस महापर्व में भाग लिया। श्रद्धालुओं की भीड़ ने घाटों को आस्था के केंद्र में बदल दिया। सोमवार की सुबह उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देने के बाद व्रती व्रत का पारण करेंगी, जिसके साथ यह महापर्व पूर्ण होगा। पूरे क्षेत्र में “छठ मइया की जय” के जयकारों से भक्तिमय वातावरण छा गया।

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जब चुनाव लड़ने के लिए नीतीश कुमार ने पत्नी से लिए थे 20 हजार रुपये, जानिए 1985 के उस दिलचस्प किस्से की पूरी कहानी

Bihar Assembly Election 2025: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 का बिगुल बज चुका है और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड (JDU) ने अपनी तैयारियां पूरी कर ली हैं। एनडीए गठबंधन के तहत इस बार भाजपा और जेडीयू बराबर सीटों पर चुनाव लड़ेंगी। लेकिन इसी बीच नीतीश कुमार के राजनीतिक सफर से जुड़ा एक पुराना किस्सा फिर चर्चा में है — जब उन्होंने अपनी पत्नी मंजू देवी से 20 हजार रुपये उधार लेकर चुनाव लड़ा था।

1985 का चुनाव और पत्नी का सहयोग
यह घटना 1985 के बिहार विधानसभा चुनाव की है, जब नीतीश कुमार पहली बार पूरी गंभीरता से राजनीति में कदम रख रहे थे। उस वक्त उन्होंने अपनी पत्नी से वादा किया था कि अगर चुनाव हार गए तो राजनीति छोड़ देंगे और किसी पारंपरिक काम में लग जाएंगे। इस वादे के साथ मंजू देवी ने अपने गहनों और बचत से 20 हजार रुपये नीतीश को चुनाव प्रचार के लिए दिए थे।

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नीतीश का संघर्ष और ‘सिंगल मैन’ किताब का जिक्र
वरिष्ठ पत्रकार संकर्षण ठाकुर ने अपनी किताब “Single Man: The Life and Times of Nitish Kumar of Bihar” में इस प्रसंग का विस्तार से जिक्र किया है। उन्होंने लिखा कि नीतीश के लिए यह चुनाव जीवन-मरण जैसा था। मजेदार बात यह थी कि नीतीश ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत में ही उस रकम का विरोध किया था, जो बाद में उन्हें खुद अपनी पत्नी से लेनी पड़ी।

गुंडों की रखवाली में हुआ चुनाव
किताब में यह भी बताया गया कि उस दौर के चुनावों में बूथ कैप्चरिंग आम थी। नीतीश के समर्थकों ने भी कुछ स्थानीय गुंडों की मदद से बूथों की रखवाली करवाई थी ताकि मतदान निष्पक्ष हो सके। यह चुनाव दंड भेद और तनाव से भरा हुआ था।

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बिहार चुनाव 2025 की तैयारियां
इस बार बिहार में विधानसभा चुनाव दो चरणों में होंगे — पहला चरण 6 नवंबर और दूसरा चरण 11 नवंबर को। परिणाम 14 नवंबर को घोषित किए जाएंगे। नीतीश कुमार एक बार फिर सत्ता में वापसी की पूरी कोशिश में जुटे हैं।

दिल्ली तिमारपुर मर्डर केस: घी, तेल और वाइन से रची साजिश — फॉरेंसिक साइंस की छात्रा ने UPSC अभ्यर्थी को दी दर्दनाक मौत

New Delhi: राजधानी दिल्ली के तिमारपुर इलाके में आग से झुलसे एक शव के पीछे की कहानी ने पुलिस के होश उड़ा दिए। जो मामला पहले आगजनी हादसा लग रहा था, वह दरअसल एक सोची-समझी हत्या निकला। इस खौफनाक मर्डर प्लान की मास्टरमाइंड कोई आम लड़की नहीं बल्कि फॉरेंसिक साइंस की छात्रा निकली।

डीसीपी राजा बांठिया ने बताया कि 6 अक्टूबर की रात तिमारपुर की एक बिल्डिंग की चौथी मंजिल पर आग लगी थी। फायर ब्रिगेड को मौके से एक जली हुई लाश मिली, जिसे पहले हादसा माना गया। लेकिन फॉरेंसिक जांच और सीसीटीवी फुटेज ने पूरे केस की दिशा बदल दी।

वीडियो में दो नकाबपोश युवक और एक लड़की को बिल्डिंग से निकलते देखा गया। जांच में सामने आया कि मृतक रामकेश मीणा (32), जो UPSC की तैयारी कर रहा था, उसकी हत्या की गई थी। पुलिस ने कॉल डिटेल और मोबाइल लोकेशन के आधार पर 21 वर्षीय अमृता चौहान, बीएससी फॉरेंसिक साइंस की छात्रा, को मुरादाबाद से गिरफ्तार किया।

हत्या की साजिश और खौफनाक प्लान
पूछताछ में अमृता ने बताया कि उसने अपने पूर्व प्रेमी सुमित कश्यप और साथी संदीप कुमार के साथ मिलकर हत्या की योजना बनाई थी। रामकेश के पास अमृता की आपत्तिजनक वीडियो और तस्वीरें थीं, जिन्हें वह डिलीट नहीं कर रहा था। इसी बात को लेकर उसने यह साजिश रची।

5-6 अक्टूबर की दरम्यानी रात तीनों ने मिलकर रामकेश का गला घोंटकर हत्या की और फिर घी, तेल और वाइन डालकर कमरे में आग लगा दी ताकि यह हादसा लगे। सुमित ने गैस सिलिंडर खुला छोड़ दिया, जिससे धमाका हुआ और शव जलकर राख हो गया।

फॉरेंसिक सबूतों ने खोला राज़
अमृता की निशानदेही पर पुलिस ने हार्ड डिस्क, ट्रॉली बैग, मृतक की शर्ट और दो मोबाइल फोन बरामद किए हैं। पुलिस तीनों आरोपियों से पूछताछ कर रही है और यह जांच रही है कि इस साजिश में कोई और शामिल तो नहीं था।

यह मामला पूरे देश में चर्चा का विषय बना हुआ है क्योंकि इसमें फॉरेंसिक साइंस की छात्रा ने ही अपराध विज्ञान के ज्ञान का इस्तेमाल हत्या छिपाने में किया।

बरहज में दो बच्चों की मां रहस्यमय तरीके से लापता, परिजनों में मचा हड़कंप

देवरिया/उत्तर प्रदेश (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। जिले के बरहज थाना क्षेत्र के मदनपुर कस्बे से एक दो बच्चों की मां के अचानक लापता होने की खबर से इलाके में सनसनी फैल गई है। रविवार को महिला घर से अचानक गायब हो गई, जिसके बाद परिजन उसकी तलाश में जुटे रहे लेकिन अब तक उसका कोई सुराग नहीं मिला है।

परिजनों के अनुसार, महिला रात में घर के कमरे में सो रही थी। सुबह जब पति की नींद खुली तो उसने देखा कि पत्नी कमरे में नहीं थी। आसपास खोजबीन के बाद भी उसका पता नहीं चल सका। लापता महिला के दो छोटे बच्चे हैं — एक पुत्र और एक पुत्री।

घटना की जानकारी मिलते ही परिजनों ने मदनपुर थाना पहुंचकर तहरीर दी। थानाध्यक्ष नंदा प्रसाद ने बताया कि शिकायत दर्ज कर ली गई है और मामले की जांच की जा रही है। पुलिस आसपास के इलाकों में महिला की तलाश कर रही है और संभावित सभी कोणों पर जांच कर रही है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यह घटना रहस्यमय है और पुलिस को जल्द से जल्द महिला का पता लगाना चाहिए।

भागलपुर में दर्दनाक हादसा: छठ घाट बनाते समय गंगा में डूबे चार मासूम, गांव में पसरा मातम

भागलपुर/बिहार (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। लोक आस्था के महापर्व छठ पूजा की तैयारियों के बीच बिहार के भागलपुर जिले से एक दर्दनाक हादसा सामने आया है। नवगछिया अनुमंडल के इस्माइलपुर थाना क्षेत्र के नवटोलिया गांव में छठ घाट तैयार करने के दौरान गंगा नदी में डूबने से चार बच्चों की मौत हो गई। इस हादसे ने पूरे इलाके को गमगीन कर दिया है।

जानकारी के अनुसार, सोमवार दोपहर कुछ बच्चे गांव के पास गंगा तट पर छठ घाट की सफाई और सजावट कर रहे थे। इसी दौरान चारों बच्चे नहाने के लिए नदी में उतर गए। अचानक एक बच्चा गहरे पानी में चला गया, उसे बचाने के प्रयास में बाकी तीन बच्चे भी तेज धारा में बह गए। देखते ही देखते चारों पानी में समा गए।

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स्थानीय लोगों ने शोर सुनकर गोताखोरों की मदद से बच्चों को बाहर निकाला और उन्हें तुरंत इस्माइलपुर अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने जांच के बाद चारों को मृत घोषित कर दिया। मृतकों की पहचान नवटोलिया निवासी मिथिलेश कुमार का पुत्र प्रिंस कुमार (11) और किशोरी मंडल का पुत्र नंदन कुमार (10) के रूप में हुई है। अन्य दो बच्चे पास के छठठु टोला के रहने वाले बताए जा रहे हैं।

घटना की जानकारी मिलते ही इस्माइलपुर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी। वहीं, गोपालपुर के निर्दलीय प्रत्याशी गोपाल मंडल अस्पताल पहुंचे और शोक संतप्त परिवारों से मिलकर संवेदना व्यक्त की। पूरे गांव में मातम पसरा हुआ है, माताएं अपने बच्चों के शवों से लिपटकर रोती-बिलखती रहीं।

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छठ पर्व की खुशियां इस हादसे से मातम में बदल गईं। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि गंगा घाटों पर सुरक्षा व्यवस्था को सख्त किया जाए ताकि भविष्य में ऐसी त्रासदी दोबारा न हो।

भू-अर्थव्यवस्था में भारत की बढ़ती भूमिका: ट्रम्प की टैरिफ पॉलिसी और एशियाई मुद्रा गठजोड़ का प्रभाव

गोंदिया – वैश्विक स्तरपर आज का वैश्विक आर्थिक परिदृश्‍य पहले से कहीं अधिक द्रुत गति से बदल रहा है। भारत, रूस, चीन, मध्यपूर्व एवं दक्षिण-एशियाई अर्थतंत्र, और अमेरिका के बीच चल रही प्रतिस्पर्धा एवं गठबंधनों का मिजाज बदल रहा है। उस बदलते परिदृश्‍य में यह कहावत- सच प्रतीत होती है कि “कल का हर वाक्या तुम्हारा था, आज दास्तान हमारी है।”इसे विशेष रूप से डोनाल्ड ट्रम्प- रूस भारत चीन संदर्भ में प्रस्तुत किया है। अर्थात्, अमेरिका-केंद्रित वैश्विक व्यवस्था का प्रभुत्व कम हो रहा है और रूस भारत चीन उस बदलाव में महत्वपूर्ण भूमिका ले रहा है, या कम-से-कम प्रयासरत है।मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र ऐसा मानता हूं कि क्या वास्तव में रूस भारत चीन भारत ऐसे राजनीतिक कदम उठाते जा रहे हैं जिनकी “गूंज” व्हाइट हाउस तक पहुँच रही है,या पहुँच सकती है ऐसा अनुमान लगाया जा सकता है। दशकों से हम देखते आ रहे हैं कि वैश्विक स्तरपर पारंपरिक रूप से,वैश्विक व्यापार और ऊर्जा सौदे प्रमुख रूप से यूनाइटेड स्टेट्स डॉलर में विनियोजित होते आए हैं,जिसने अमेरिका को न सिर्फ मुद्रा-बल बल्कि वैश्विक वित्त-सिस्टम में असाधारण प्रभुत्व प्रदान किया।लेकिन इस व्यवस्था में कई असंतुलन हैं,उभरती अर्थव्यवस्थाओं को डॉलर- निर्भरता के कारण विनिमय जोखिम, शुल्क- बाधाएं और नियंत्रणों का सामना करना पड़ता है। इसलिए आज हम मीडिया में उपलब्ध जानकार के सहयोग से इस आर्टिकल के माध्यम से चर्चा करेंगे,क़्या ट्रम्प की टैरिफ पॉलिसी और भारत- रूस-चीनी मुद्रा- सहयोग की पहल वर्तमान डॉलर-मॉडल को “डीडॉलराइजेशन” की ओर ले जा रहे हैं ?बता दें क़ि इस आर्टिकल में दिए गए विचार संकेत- तथा दिशासूचक हैं, न कि पूर्णतया प्रमाणित ‘करार’ की तरह।

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साथियों बात अगर हम रूस भारत चीन एवं डॉलर- सत्तात्मक व्यवस्था क़े बदलते परिदृश्‍य में भारत की स्थिति समझने की करें तो,सबसे पहले हम उस बड़े प्रसंग पर दृष्टि डालते हैं जिसमें डॉलर की प्रभुता और उसकी चुनौती दोनों मौजूद हैं। वैश्विक रूप से डॉलर ने दशकों से मुख्य आरक्षित मुद्रा, व्यापार एवं पेट्रोलियम लेनदेन की प्रमुख मुद्रा, और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय व्यवस्था की रीढ़ के रूप में काम किया है।लेकिन अब “डीडॉलराइजेशन” की दिशा में संकेत बढ़ रहे हैं: विशेष रूप से रूस-चीन-भारत जैसे देशों में जो अमेरिकी वेस्टर्न सिस्टम पर अधिक निर्भर नहीं रहना चाहते। भारत इस परिदृश्‍य में महत्वपूर्ण मोड़ पर है। भारत सरकार ने अपनी नीतियों में एक स्पष्ट संकेत दिया है कि भारत अपने मुद्रा-चयन, भुगतान व्यवस्था और विनिमय व्यवस्था में अधिक सक्रिय होना चाहताहै,विशेष रूप से यह कि सिर्फ डॉलर के सहारे नहीं रहें। उदाहरण के लिए, रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया ने हाल में यूएई दिरहम और इंडोनेशियाई रुपिया के लिए रेफरेंस रेट फिक्स करने की घोषणा की है, जिसे “रुपये के टरनेशनलीसैशन” की दिशा में एक कदम माना जा रहा है।iसंभवतः उन्होंने डॉलर प्रभुत्व को चुनौती देने की दिशा में महत्वपूर्ण रणनीतिक कदम उठाए हैं।

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साथियों बातें अगर हम आरबीआई द्वारा रेफरेंस-रेट्स में बदलाव,भारत की मुद्रा और व्यापार रणनीति को समझने की करें तो,“आरबीआई ने यूएई व इंडोनेशिया की करेंसी के लिए रेफरेंस रेट फिक्स कर लिए हैं,इस अवसर पर यह जाना जाना महत्वपूर्ण है कि “रेफरेंस रेट” शब्द का क्या अर्थ है: यह उस मुद्रा के मुकाबले भारतीय रुपया का औपचारिक सार्वजनिक दर होता है, जिसे बैंक,व्यवसाय और एक्सपोर्ट- इम्पोर्ट कंपनियाँ उपयोग कर सकती हैं और जिससे विनिमय जोखिम कम होता है। यह कदम दो मायनों से रणनीतिक है:एक, यह व्यापारियों और एक्सपोर्ट- इम्पोर्टरों को डॉलर के जरिए जाने-माने मध्यस्थता (डॉलर – इंटरमीडिएशन) से बहुत हद तक मुक्त करता है। उदाहरण-स्वरूप, यदि भारत-यूएई व्यापार में दिरहम को सीधे रेफरेंस दर के तहत उपयोग कर सके, तो रुपया दिरहम या दिरहम रुपया लेनदेन आसान हो जाती है।यह मुद्रा- अंतर्राष्ट्रीयकरण की दिशा में संकेत देता है, यानें, भारत यह संदेश देना चाहता है कि रुपया सिर्फ घरेलू मुद्रा नहीं रहेगा, बल्कि व्यापारिक रूप से और वित्‍तीय रूप से विदेशों में अधिक स्वीकार्य हो सकेगा।
साथियों बात अगर हम रूस- भारत तेल लेनदेन एवं चीनी युआन-भुगतान क़े पहलू को समझने की करेंतो,रूसी तेल खरीदी में रूस ने भारत को चीनी करेंसी यूआन में भुगतान करने की सुविधा वाले इस बिंदु का विश्लेषण कुछ-सा जटिल है क्योंकि सच्चाई काफ़ी हद तक संकेतों पर आधारित है और अभी पूर्ण रूप से स्थापित नियम नहीं दिख रहे।मीडिया स्रोत बताते हैं कि रूस-भारत के बीच तेल लेनदेन में कुछ मामलों में चीनी युआन में भुगतान की मांग हो रही है। मीडिया में ऐसी जानकारी आई है कि जुलाई 2023 में हुआ एक समाचार था कि भारतीय रिफाइनर ने कुछ रूसी क्रूड के लिए युआन में भुगतान शुरू किया है। यानें रूस-भारत तेल लेनदेन में युआन में भुगतान मुमकिन हो रहा है और मांग हो रही है, लेकिन यह “स्वीकारात्मक रूप से स्थापित सुविधा” का मंच अभी पूरी तरह तैयार नहीं हुआ है और इसे “रूस ने भारत को चीनी युआन भुगतान की सुविधा दे दी है” के रूप में बहुत निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता। हालाँकि संकेत स्पष्ट हैं कि ऐसा एक प्रारंभिक चरण है। इसका महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि यदि ऐसा स्थायी रूप ले लेता है, तो यह डॉलर-मध्यस्थता को कम कर सकता है और भारत- रूस- चीन के आर्थिक पैंतरे को बदल सकता है, जिससे अमेरिकी डॉलर की प्रभुता पर प्रश्नचिन्ह उठ सकता है।
साथियों बात अगर कर हम इस साल के अंत तक पुतिन-भारत यात्रा, तेल-डिफेंस गठजोड़ एवं डॉलर पर प्रभाव को समझने की करें तो,“इस वर्ष के अंत में व्लादीमिर पुतिन संभवतः भारत आ रहे हैं; तेल-डिफेंस में डील हो सकती है जिससे अमेरिका डॉलर पर प्रभाव पड़ेगा”। इस तरह का विश्लेषण वैश्विक रणनीति एवं भू-राजनीति कामिश्रण है।पहले यह देखना होगा कि क्या पुतिन की भारत यात्रा की पुष्टि हो चुकी है?यदि इस तरह का भारत- रूसटकराव व साझेदारी वास्तव में इस वर्ष के अंत या तदनंतर सक्रिय हो गई, तो यह अर्थ रखती है कि भारत एक भरोसेमंद रणनीतिक साझेदार बनते हुए अमेरिका-मध्यस्थ वैश्विक व्यवस्था (जिसमें डॉलर की भूमिका केंद्रीय थी) से थोड़ा- बहुत विस्थापन कर सकता है। उदाहरण के रूप में,यदि भारत- रूस मिलकर ऐसे समझौते करें जिनमें डॉलर का उपयोग सीमित हो, तकनीकी-प्रतिरक्षा साझेदारी बढ़े, और ऊर्जा लेनदेन गैर-डॉलर में हों, तो इसका डॉलर-मुखी व्यवस्था पर दबाव बनने का अवसर है।पर यह भी याद रखना होगा कि “अमेरिका डॉलर पर असर” तुरंत नहीं आएगा,वैश्विक मुद्रा व वित्त व्यवस्था बड़ी और जटिल है। हालांकि संकेत मिल रहे हैं कि “बहुध्रुवीय” व्यवस्था की दिशा में कदम बढ़ रहे हैं। उदाहरणस्वरूप, ब्रिक्स देशों में स्तरपर नए वित्तीय विपक्षी उपकरण परसटीक विचार हो रहे हैं। इसलिए यदि भारत-रूस तेल- डिफेंस गठजोड़ वास्तव में रूप लेता है, तो उस कदम की गूंज अमेरिक़ी – व्हाइट हाउस तक पहुँच सकती है।लेकिन इस बिंदु को “घटित असर पड़ा है” के रूप में नहीं बल्कि “हो सकता है असर पड़े” के युक्तिसूचक स्वर में लेना उचित होगा।
साथियों बात अगर हम अमेरिका में ट्रम्प के टैरिफ केस और भारत -दूरगामी प्रभाव को समझने की करें तो“नवंबर में सुप्रीम कोर्ट में ट्रम्प टैरिफ पर सुनवाई होगी, लोअर कोर्ट पहले ही खारिज कर चुकी है।” जैसा हमने देखा, अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट ने 5 नवंबर को सुनवाई तय की है। निचली अदालतों (फेडरल सर्किट) ने ट्रम्प के बड़े टैरिफ- उपायों को अवैध पाया है। भारत-प्रसंग में इसका महत्व इसलिए है क्योंकि अमेरिका- केंद्रित वैश्विक व्यापार नियमों में बदलाव यदि आएँ, भारत को अवसर मिल सकता है कि वह तय कर सके अपने व्यापार मुद्राओं -भुगतान माध्यमों को पुनर्समायोजित करे। उदाहरण के लिए, यदि अमेरिकी टैरिफ नियम और वैश्विक व्यापार संरचना अधिक अनिश्चित हुई, तो भारत-रूस-चीन आदि साझेदारियों के लिए समय उपयुक्त बन सकता है। इस तरह, इस सुनवाई एवं निर्णय-परिणाम की गूंज भारत- नेताओं के रणनीतिक विकल्पों पर पड़ सकती है।
अतःअगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि क़्या ट्रम्प की टैरिफ पॉलिसी और भारत-रूस-चीनी मुद्रा- सहयोग की पहल वर्तमान डॉलर-मॉडल को “डीडॉलराइजेशन” की ओर ले जा रहे हैं ? भारत-अमेरिका क़ी आज भू-अर्थव्यवस्था में भारत- मॉडल की बढ़ती उपस्थिति को दर्शाती है-“कल का हर वाक्या तुम्हारा था,आज दास्तान हमारी है”

-संकलनकर्ता लेखक-कर विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतर्राष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि सीए(एटीसी) संगीत माध्यमा एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र 9226229318

“टॉयलेट में मोबाइल? एक आदत जो धीरे-धीरे बिगाड़ रही है आपकी सेहत!”

📱 आज मोबाइल हमारे जीवन का सबसे अहम हिस्सा बन चुका है। सुबह उठते ही सबसे पहले फोन उठाना और रात को सोने से पहले आख़िरी बार स्क्रीन पर नज़र डालना—ये अब लगभग हर व्यक्ति की दिनचर्या बन चुकी है। फोन ने हमें हर तरह से कनेक्ट किया है — ख़रीदारी, बैंकिंग, सोशल मीडिया, मनोरंजन, समाचार, शिक्षा—सब कुछ हमारी उंगलियों पर है।
लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि वही मोबाइल, जो आपकी सुविधा का साधन है, आपकी सेहत के लिए खतरा भी बन सकता है?
दरअसल, आज के समय में लोग फोन से इतने जुड़ चुके हैं कि वे टॉयलेट सीट पर बैठने के दौरान भी उसे अपने से दूर नहीं रखते। यह आदत देखने में भले सामान्य लगे, लेकिन हाइजीन और हेल्थ—दोनों के नजरिए से बेहद खतरनाक है।
🚫 टॉयलेट में मोबाइल चलाना क्यों है खतरनाक?
टॉयलेट में मोबाइल इस्तेमाल करने से दोहरी समस्या पैदा होती है —
एक तरफ यह बैक्टीरियल संक्रमण को आमंत्रण देता है, और दूसरी ओर बवासीर (Piles) जैसी गंभीर समस्या की संभावना कई गुना बढ़ा देता है।
एक हालिया हेल्थ रिसर्च के मुताबिक, जो लोग टॉयलेट में लंबे समय तक मोबाइल पर स्क्रॉल करते रहते हैं, उनमें पाइल्स विकसित होने का खतरा 46% तक अधिक होता है।
🦠 फोन बन जाता है बैक्टीरिया का घर
टॉयलेट में मौजूद हवा और सतहों पर लाखों बैक्टीरिया होते हैं, जो मल त्याग के दौरान हवा में फैल जाते हैं। जब आप उसी जगह फोन इस्तेमाल करते हैं, तो ये बैक्टीरिया आपके डिवाइस की सतह पर चिपक जाते हैं।
बाद में जब आप फोन को चेहरे या हाथ के पास रखते हैं, तो वही जीवाणु शरीर में प्रवेश कर संक्रमण फैलाते हैं।

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📌 स्टडी के अनुसार, फोन की स्क्रीन पर औसतन टॉयलेट सीट से 18 गुना ज़्यादा बैक्टीरिया पाए जाते हैं।
इससे त्वचा संक्रमण, पेट की गड़बड़ी, और यहां तक कि आंखों और कानों के संक्रमण तक का खतरा बढ़ जाता है।
💢 लंबे समय तक बैठना बनता है बवासीर का कारण
बवासीर (Piles) को हिंदी में “अर्श” भी कहा जाता है। यह गुदा और मलाशय की सूजी हुई नसें होती हैं, जो दर्द, जलन और कभी-कभी खून बहने का कारण बनती हैं।
आमतौर पर यह समस्या तब बढ़ती है जब आप टॉयलेट सीट पर ज़रूरत से ज़्यादा समय बिताते हैं।
जब आप मोबाइल चलाते हुए बैठे रहते हैं, तो
पेल्विक एरिया में दबाव बढ़ता है,
गुदा की नसों में ब्लड सर्कुलेशन असंतुलित होता है,
और धीरे-धीरे वहां खून जमने लगता है।
इसका नतीजा होता है — दर्द, सूजन, और खून निकलना — यानी पाइल्स।

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⚠️ पाइल्स के लक्षण पहचानें समय रहते

  1. मल त्यागते समय दर्द या जलन
  2. टॉयलेट पेपर या मल में चमकीला लाल खून दिखाई देना
  3. गुदा के पास सूजन या गांठ महसूस होना
  4. बैठने में तकलीफ़ या खुजली
  5. बार-बार टॉयलेट जाने की ज़रूरत महसूस होना
    यदि ऐसे लक्षण दिखें, तो तुरंत चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए। देर करने पर यह क्रोनिक पाइल्स में बदल सकता है, जिसका इलाज मुश्किल और दर्दनाक दोनों होता है।
    🥗 पाइल्स से बचाव के आसान उपाय
  6. टॉयलेट में मोबाइल बिल्कुल न ले जाएं।
    मल त्याग को जल्दी और स्वाभाविक रखें।
  7. फाइबर युक्त डाइट लें।
    हरी सब्ज़ियां, फल, साबुत अनाज और दही जैसी चीज़ें कब्ज़ कम करती हैं।
  8. पानी खूब पिएं।
    दिन में कम से कम 8-10 गिलास पानी पीने से पाचन बेहतर रहता है।
  9. लंबे समय तक बैठने से बचें।
    ऑफिस या घर में हर एक घंटे में थोड़ा टहलें।
  10. एक्सरसाइज और योग अपनाएं।
    विशेष रूप से मलासन और वज्रासन पेल्विक एरिया के लिए फायदेमंद हैं।
  11. तनाव से दूर रहें।
    स्ट्रेस शरीर के रक्त प्रवाह को प्रभावित करता है और पाचन को कमजोर करता है।
    🧘‍♀️ ‘डिजिटल डिटॉक्स’ की ज़रूरत
    आज जब हर चीज़ डिजिटल है, तब डिजिटल डिटॉक्स यानी कुछ समय के लिए स्क्रीन से दूरी बनाना बेहद ज़रूरी है।
    टॉयलेट मोबाइल चलाने की जगह नहीं है। यह वह स्थान है जहां शरीर से विषाक्त पदार्थ बाहर निकलते हैं—ऐसे में वहां फोन के ज़रिए मानसिक विषाक्तता जोड़ना बुद्धिमानी नहीं।
    हर दिन कुछ घंटे ऐसे रखें जब आप बिना फोन के रहें — न सोशल मीडिया, न कॉल्स, न वीडियो। इससे आपका दिमाग और शरीर दोनों को आराम मिलेगा।
    🩺 विशेषज्ञ क्या कहते हैं
    डॉक्टर्स के अनुसार, टॉयलेट में मोबाइल चलाना शरीर की नेचुरल बॉडी मैकेनिज्म को बाधित करता है।
    फोन पर ध्यान केंद्रित रहने से मल त्याग की प्रक्रिया लंबी होती है, जिससे नसों पर लगातार दबाव पड़ता है।
    इसके अलावा, स्क्रीन की नीली रोशनी मानसिक थकान और तनाव को बढ़ाती है, जिससे शरीर का पाचन तंत्र और कमजोर होता है।
    🌿 निष्कर्ष — “स्मार्टफोन बन सकता है साइलेंट किलर”
    मोबाइल ने हमारी जिंदगी को आसान बनाया है, लेकिन इसका गलत उपयोग शरीर को नुकसान भी पहुंचा सकता है।
    टॉयलेट में मोबाइल ले जाना देखने में मामूली लग सकता है, पर यह धीरे-धीरे आपकी सेहत को खोखला कर देता है।
    संक्रमण, पाइल्स, कब्ज़ और मानसिक थकान — सब कुछ इस एक आदत से जुड़ा है।
    👉 इसलिए अगली बार जब टॉयलेट में फोन लेकर जाने का मन करे, तो खुद से एक सवाल जरूर पूछिए —
    “क्या कुछ मिनट की स्क्रॉलिंग मेरी सेहत से ज़्यादा जरूरी है?”
    🩹 स्वस्थ जीवन के लिए याद रखें:
    मोबाइल को हमेशा साफ रखें।
    टॉयलेट में ले जाना बंद करें।
    संतुलित आहार और नियमित योग करें।
    और सबसे ज़रूरी — शरीर की सुनें, स्क्रीन की नहीं।

उपजिलाधिकारी दिशा ने किया छठ घाटों का निरीक्षण, दिए आवश्यक दिशा-निर्देश

सलेमपुर, देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। लोक आस्था के महापर्व छठ पूजा को लेकर प्रशासनिक तैयारियाँ जोरों पर हैं। इसी क्रम में सोमवार को सलेमपुर उपजिलाधिकारी दिशा श्रीवास्तव ने क्षेत्र के विभिन्न छठ घाटों का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने नदावर घाट पहुंचकर घाट की सफाई, सुरक्षा व्यवस्था, प्रकाश व्यवस्था, बैरिकेडिंग एवं श्रद्धालुओं की सुविधा से संबंधित तैयारियों का बारीकी से जायजा लिया।

निरीक्षण के समय नगर पंचायत अध्यक्ष सलेमपुर श्रीराम यादव एवं अन्य जनप्रतिनिधि तथा अधिकारीगण भी उपस्थित रहे। उपजिलाधिकारी ने नगर पंचायत अधिकारियों को निर्देश दिया कि घाटों की सफाई, प्रकाश व्यवस्था तथा सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम समय रहते पूरे कर लिए जाएं ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

उन्होंने जलस्तर और घाट की भी जांच की तथा विद्युत विभाग को घाटों पर पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

नगर पंचायत अध्यक्ष श्रीराम यादव ने बताया कि नगर पंचायत की टीम दिन-रात सफाई और व्यवस्था में जुटी है ताकि श्रद्धालु छठ महापर्व को सुरक्षित एवं श्रद्धापूर्वक संपन्न कर सकें।

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“बिहार की सियासत में मचा महाभारत: दलबदल, वायरल वीडियो और ‘नचनिया’ बयान से गरमाया माहौल — लोकतंत्र की मर्यादा बनाम सत्ता की महत्वाकांक्षा”

चुनावी मौसम में बिहार की राजनीति बन गई है रंगमंच — जहां गीत, ग्लैमर, आरोप, वीडियो और बयानों का नाटक चल रहा है; जनता सवाल कर रही है — मुद्दे कहाँ हैं?

बिहार की सियासत इन दिनों मानो एक राजनीतिक रणभूमि बन गई है। चुनाव नजदीक आते ही यहां हर दल, हर नेता और हर समर्थक एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप की बौछार कर रहे हैं। कोई राजद (RJD) के नेताओं को तोड़ने का दावा कर रहा है तो कोई NDA के नेताओं को अपनी पार्टी में शामिल कर लेने की कहानी सुना रहा है। इस राजनीतिक बिसात पर हर मोहरा चाल चल रहा है — लेकिन सवाल यह है कि जनता के असली मुद्दे इस शोर में कहां खो गए हैं?
दल बदल का खेल – ‘कुर्सी’ के लिए कोई भी किनारा नहीं बिहार की राजनीति में दल बदल कोई नई बात नहीं, लेकिन इस बार का दौर कुछ ज्यादा ही उग्र दिख रहा है।

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“जो कल विरोध में था, आज स्वागत में है।”
यह वाक्य वर्तमान राजनीतिक माहौल की सटीक झलक पेश करता है।
राजद के वरिष्ठ नेताओं को तोड़ने के दावे हो रहे हैं, वहीं जेडीयू और बीजेपी में भी अंदरूनी खींचतान की चर्चा है। कई नेताओं का कहना है कि यह “वोट बैंक की मजबूरी नहीं, अवसर की राजनीति” है। बिहार का राजनीतिक इतिहास गवाह है कि यहां विचारधारा से ज़्यादा सत्ता की सीढ़ियाँ मायने रखती हैं।
वायरल वीडियो की सियासत – कैमरे से ज्यादा असर सोशल मीडिया का
अब बिहार की राजनीति सिर्फ मंचों और सभाओं में नहीं, बल्कि मोबाइल स्क्रीन पर भी लड़ी जा रही है। किसी का पुराना बयान वायरल किया जा रहा है, तो किसी का वीडियो एडिट कर ‘सच्चाई’ बताई जा रही है।
कभी कहा जाता था कि राजनीति विचारों की लड़ाई है, अब यह वीडियो और वायरलिटी की जंग बन चुकी है।
एक ओर कुछ नेता खुद को “बिहार के सुरक्षित हाथ” बताने में जुटे हैं, तो दूसरी ओर विरोधी दल इन दावों को खारिज करने के लिए सोशल मीडिया का जमकर उपयोग कर रहे हैं। “वीडियो वॉर” अब प्रचार का सबसे शक्तिशाली हथियार बन गया है।

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गीत, ग्लैमर और गुस्सा – अभिनेत्री और गायकों की एंट्री से चुनावी रंगत
इस बार बिहार के चुनावों में गायकों, अभिनेत्रियों और फिल्मी चेहरों की भागीदारी ने माहौल को और चटपटा बना दिया है।
किसी पार्टी ने लोकप्रिय लोकगायक को टिकट दिया है तो कोई अभिनेत्री को मंच पर बुलाकर रैली की शान बढ़ा रहा है।
लेकिन इन सबके बीच, कुछ नेताओं की अमर्यादित टिप्पणियाँ भी चर्चा में हैं। एक सांसद द्वारा प्रतिद्वंद्वी को “नचनिया” कहकर संबोधित करने से मामला और भड़क गया।
राजनीति में शब्दों की मर्यादा जब टूटती है, तो लोकतंत्र की आत्मा आहत होती है।
यह दृश्य बताता है कि चुनावी रणनीति अब सम्मान और मुद्दों की बजाय व्यक्तिगत हमलों और मनोरंजन पर केंद्रित होती जा रही है।
“तीन पहले से हैं” – रिश्तेदारी वाली राजनीति का नया ट्रेंड
सोशल मीडिया पर अब यह भी देखने को मिल रहा है कि कोई किसी अभिनेत्री को ‘रिश्तेदार’ बता रहा है, कोई किसी अभिनेता पर टिप्पणी कर रहा है।
राजनीतिक विमर्श की जगह अब मजाक, मीम और मज़ेदार पोस्टों ने ले ली है।
राजनीतिक दलों की मीडिया टीमों ने अब यह मान लिया है कि लोग विचार से नहीं, मनोरंजन से आकर्षित होते हैं।
यह लोकतंत्र के लिए चिंताजनक संकेत है — जब जनता के सामने मुद्दे हों तो वे मनोरंजन में खो जाएं, तब असली सवालों का जवाब कौन देगा?जनता के असली मुद्दे कहाँ हैं?
इस पूरे शोरगुल में न तो बेरोज़गारी पर बात हो रही है, न शिक्षा या स्वास्थ्य पर।
बिहार आज भी विकास, रोजगार और पलायन जैसी पुरानी समस्याओं से जूझ रहा है।
लेकिन चुनावी मंचों पर इन मुद्दों की बजाय जुमले, जोश और जश्न का माहौल है।
एक राजनीतिक पर्यवेक्षक ने सही कहा —
“बिहार की राजनीति में मुद्दे नहीं, मिज़ाज बदलते हैं — और वही परिणाम तय करते हैं।”
जनता क्या चाहती है – मनोरंजन नहीं, भरोसे की राजनीति
बिहार के मतदाता अब पहले जैसे नहीं रहे।
वे देख रहे हैं कि कौन नेता सिर्फ बयान दे रहा है और कौन असल में विकास की बात कर रहा है।
अब यह दौर ‘फोटोशूट राजनीति’ का नहीं, बल्कि परिणाम दिखाने वाली राजनीति का होना चाहिए।
वक्त आ गया है जब जनता को यह तय करना होगा कि वह लोकतंत्र को तमाशा बनने देगी या उसे जिम्मेदारी से सजाएगी।
राजनीति में अगर मर्यादा और मूल्य लौटे, तभी बिहार की सियासत फिर से ‘बुद्ध भूमि’ कहलाने योग्य बनेगी।
लोकतंत्र की असली परीक्षा
आज बिहार की राजनीति संवेदनाओं से नहीं, सनसनी से संचालित हो रही है।
दल बदल से लेकर वायरल वीडियो तक, नचनिया बयानों से लेकर रिश्तेदारी के दावों तक — हर घटना बताती है कि सत्ता पाने की होड़ में नेताओं ने जनता के असली सरोकारों को किनारे रख दिया है।
लोकतंत्र तभी जीवित रहेगा जब जनता सवाल पूछेगी, जब मतदाता मनोरंजन नहीं, मूल्य आधारित राजनीति चुनेगा।
बिहार की धरती ने हमेशा बदलाव की शुरुआत की है — उम्मीद है, इस बार भी वही होगा।

🌿 त्योहार की थकान मिटाने जाएं इन सुकून भरी जगहों पर – रिलैक्स करें मन, तन और आत्मा

Rkpnews के लिए अभिषेक यादव की प्रस्तुति

त्योहारों की रौनक और व्यस्तता के बाद अक्सर शरीर थक जाता है और मन भी अशांत हो उठता है। लगातार तैयारी, मेहमानों की मेजबानी और भागदौड़ के बाद जब सब शांत हो जाता है, तो खुद के लिए समय निकालना बेहद ज़रूरी हो जाता है।
अगर आप भी अपने मन को फिर से तरोताज़ा करना चाहते हैं और एक यादगार वीकेंड ट्रिप प्लान करने का सोच रहे हैं, तो आज हम आपके लिए लेकर आए हैं पोस्ट-फेस्टिव सुकून भरी ट्रैवल डेस्टिनेशंस, जहां जाकर आपकी सारी थकान गायब हो जाएगी।

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☘️ 1. ऊटी – नीलगिरी की गोद में सुकून का ठिकाना
अगर आप दक्षिण भारत की ओर यात्रा करने का प्लान बना रहे हैं, तो तमिलनाडु का ऊटी (Ooty) आपकी थकान को पलभर में मिटा देगा।
“नीलगिरी की रानी” कहलाने वाला यह हिल स्टेशन अपनी ठंडी हवाओं, हरियाली से ढकी पहाड़ियों और चाय बगानों के लिए प्रसिद्ध है।
यहां की ऊटी झील, बोटैनिकल गार्डन, और डोड्डाबेट्टा पीक पर्यटकों के लिए मुख्य आकर्षण हैं।
कम बजट में भी आप फैमिली या दोस्तों के साथ यहां का आनंद ले सकते हैं।
सुबह-सुबह चाय बगानों के बीच टहलना, बादलों के बीच से झांकती धूप का एहसास – ये पल आपके मन को पूर्ण शांति देंगे।
बेहतरीन यादगार यात्रा बनाने हेतु टिप:
– ऊटी जाने का सबसे अच्छा समय अक्टूबर से मार्च के बीच है।
– स्थानीय मार्केट से हैंडमेड चॉकलेट और अरोमा ऑयल ज़रूर खरीदें।

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🕉️ 2. ऋषिकेश – गंगा तट पर आत्मा की शांति का अनुभव
अगर आप प्रकृति और अध्यात्म दोनों की तलाश में हैं, तो उत्तराखंड का ऋषिकेश (Rishikesh) सबसे बेहतर विकल्प है।
यहां की गंगा आरती, त्रिवेणी घाट, और परमार्थ निकेतन में बैठना मन को गहरी शांति देता है।
ऋषिकेश सिर्फ अध्यात्मिक केंद्र ही नहीं, बल्कि एडवेंचर का हब भी है।
यहां आप रिवर राफ्टिंग, बंजी जंपिंग, और कैंपिंग जैसी गतिविधियों का आनंद ले सकते हैं।
भले ही यहां भीड़ हो, पर जैसे ही आप गंगा किनारे बैठेंगे और मंत्रों की गूंज सुनेंगे – मन के भीतर का सुकून अपने आप लौट आएगा।
बेहतरीन यादगार यात्रा बनाने हेतु टिप:
– सुबह सूर्योदय के समय त्रिवेणी घाट पर बैठना अद्भुत अनुभव देता है।
– ऋषिकेश से 16 किमी आगे शिवपुरी जाकर कम भीड़ और ज्यादा सुकून पा सकते हैं।

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🌄 3. शिवपुरी – ऋषिकेश से आगे, प्रकृति की शांति में बसेरा
अगर आप भीड़ से बचना चाहते हैं, तो शिवपुरी (Shivpuri) एक परफेक्ट विकल्प है।
यह ऋषिकेश से मात्र 16 किमी की दूरी पर स्थित है और यहां का वातावरण एकदम शुद्ध, शांत और प्राकृतिक है।
यहां आप नदी किनारे कैंपिंग कर सकते हैं, बोनफायर का मज़ा ले सकते हैं और तारों भरे आसमान के नीचे रात बिता सकते हैं।
शिवपुरी में हर पल ऐसा लगता है जैसे प्रकृति आपकी आत्मा को गले लगा रही हो।
बेहतरीन यादगार यात्रा बनाने हेतु टिप:
– यहां परफेक्ट सनसेट पॉइंट्स हैं, जहां से गंगा की लहरों पर डूबते सूरज का नज़ारा अविस्मरणीय है।
🐅 4. जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क – जंगल में सुकून और रोमांच का संगम
अगर आप प्रकृति और वाइल्डलाइफ के प्रेमी हैं, तो जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क (Jim Corbett National Park) आपकी छुट्टियों को यादगार बना देगा।
यह भारत का पहला राष्ट्रीय उद्यान है, जहां आप बाघ, हाथी, हिरण, भालू, और तेंदुए को उनके प्राकृतिक आवास में देख सकते हैं।
यहां की जंगल सफारी, रामगंगा नदी किनारे रुकना, और प्रकृति की शुद्ध हवा में सांस लेना आपको शहर की भागदौड़ से दूर ले जाएगा।
सफारी का टिकट लगभग ₹3000 से ₹4000 के बीच होता है, लेकिन यह अनुभव हर पैसे के काबिल है।
बेहतरीन यादगार यात्रा बनाने हेतु टिप:
– सफारी के लिए पहले से ऑनलाइन बुकिंग कर लें।
– कॉर्बेट के पास बने इको रिसॉर्ट्स में ठहरें ताकि प्रकृति से जुड़ाव बना रहे।
🌥️ 5. घनसाली – बादलों की ओट में छिपा सुकून का खजाना
उत्तराखंड का कम चर्चित लेकिन बेहद खूबसूरत स्थान है घनसाली (Ghansali)।
समुद्र तल से 3000 फीट की ऊंचाई पर बसा यह इलाका हरियाली, झरनों और शांत वातावरण से भरा हुआ है।
यहां आप भिलांगना नदी, ग्वील गांव, और गर्कोट जैसी सुंदर जगहों की सैर कर सकते हैं।
यहां का मौसम सालभर सुहावना रहता है और भीड़-भाड़ लगभग ना के बराबर होती है।
बेहतरीन यादगार यात्रा बनाने हेतु टिप:
– यह कपल्स और नेचर लवर्स के लिए बेस्ट ऑफबीट डेस्टिनेशन है।
– अपने कैमरे में यहां के बादलों से घिरे दृश्य कैद करना न भूलें।
🏞️ 6. नैनीताल – झीलों और पहाड़ों के बीच सुकून की घड़ी
नैनीताल (Nainital) का नाम सुनते ही झीलों की शांति और पहाड़ों की ठंडी हवा का एहसास मन में बस जाता है।
यहां की नैनी झील, स्नो व्यू पॉइंट, टिफिन टॉप, और नैना पीक जैसे स्थान आपकी यात्रा को यादगार बना देंगे।
यहां एडवेंचर प्रेमियों के लिए ट्रेकिंग, केबल कार राइड, और बोटिंग जैसी एक्टिविटीज हैं।
नैनीताल हर उम्र के व्यक्ति के लिए एक परफेक्ट डेस्टिनेशन है।
बेहतरीन यादगार यात्रा बनाने हेतु टिप:
– झील किनारे कैफे में बैठकर कॉफी के साथ बादलों को गुजरते देखना अद्भुत एहसास देता है।
– नैना देवी मंदिर में दर्शन कर यात्रा को आध्यात्मिक स्पर्श दें।
🌼 यात्रा को सुकूनभरा और यादगार बनाने के उपाय

  1. डिजिटल डिटॉक्स करें: मोबाइल से थोड़ा दूर रहें, प्रकृति के करीब जाएं।
  2. हल्का भोजन करें: यात्रा के दौरान स्थानीय व्यंजन आज़माएं।
  3. फोटोग्राफी करें, पर जिएं भी: हर दृश्य को कैमरे में नहीं, कुछ को दिल में कैद करें।
  4. स्थानीय लोगों से संवाद करें: हर जगह की संस्कृति और कहानियां आपकी यात्रा को समृद्ध बनाती हैं।
    ✨त्योहारों के बाद खुद को रिलैक्स करना कोई विलासिता नहीं, बल्कि ज़रूरत है।
    ऊटी की चाय की खुशबू, ऋषिकेश का गंगा तट, शिवपुरी की शांति, या कॉर्बेट की जंगल सफारी – हर जगह आपको सुकून, ऊर्जा और आत्म-संतुलन देगी।
    तो इस वीकेंड, बैग पैक करें और किसी ऐसी जगह निकल पड़ें जहां आपका मन मुस्कुराए और आत्मा को शांति मिले।

स्वच्छता अभियान का लग रहा पलीता, सरकार हो रही बदनाम करोड़ों खर्चने के बाद नहीं बदल रही गांवों की सूरत

📰 प्रतिवर्ष 8 करोड़ 20 लाख रुपये खर्च के बाद भी नहीं बदली गांवों की तस्वीर — कोपागंज ब्लॉक में सफाई व्यवस्था ध्वस्त, जिम्मेदार बने मूकदर्शक

रिपोर्ट : धीरेन्द्र त्रिपाठी

मऊ (राष्ट्र की परम्परा )।जनपद के कोपागंज विकास खंड की तस्वीर अभी भी गंदगी से ढकी है, जबकि हर साल सफाई व्यवस्था पर 8 करोड़ 20 लाख रुपये से अधिक खर्च किए जा रहे हैं। सफाई कर्मियों की लंबी-चौड़ी फौज होने के बावजूद गांवों में नालियां बजबजा रही हैं, गलियां कूड़े से पटी हैं और सार्वजनिक स्थलों पर गंदगी का अंबार लगा है। जिले के जिम्मेदार अधिकारी और जनप्रतिनिधि इस जमीनी हकीकत पर आंखें मूंदे बैठे हैं।
🧹 सफाईकर्मी मोबाइल और बाइक में व्यस्त, झाड़ू और फावड़े गायब
पिछले वर्ष जिला मुख्यालय पर सफाई कर्मियों की नियुक्ति के समय ग्रामीणों को उम्मीद थी कि अब उनका गांव भी चमक उठेगा। लेकिन यह सपना जल्द ही टूट गया।
कोपागंज ब्लॉक के 81 गांवों में तैनात 152 सफाईकर्मी अब गांवों की सफाई करने के बजाय मोबाइल पर व्यस्त नजर आते हैं। गांवों की गलियों और नालियों में झाड़ू या फावड़ा चलाने की बजाय इन सफाई कर्मियों के हाथों में अब मोबाइल और मोटरसाइकिल ज्यादा दिखते हैं।

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💰 वेतन पर हर साल 8 करोड़ 20 लाख रुपये खर्च, फिर भी गांव गंदे
प्रत्येक सफाईकर्मी को 45,000 रुपये मासिक वेतन मिलता है। यानी ब्लॉक स्तर पर हर महीने 68 लाख 40 हजार रुपये, और साल भर में 8 करोड़ 20 लाख 80 हजार रुपये से अधिक सफाई पर खर्च होते हैं।
इतनी बड़ी धनराशि खर्च होने के बावजूद गांवों की गलियां और नालियां गंदगी से अटी पड़ी हैं।

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🏚️ सफाई उपकरण बने शोपीस, ठेले और फावड़े खा रहे जंग
ग्राम प्रधानों ने राज्य वित्त की धनराशि से सफाई के लिए कूड़ा ढोने के ठेले, झाड़ू, फावड़े तक की व्यवस्था की थी, लेकिन अब ये उपकरण प्रधानों के दरवाजे की शोभा बढ़ाते हुए जंग खा रहे हैं।
मनरेगा के तहत गांवों में पक्की नालियां, खड़ंजे और अन्य निर्माण कार्य तो हुए, लेकिन उनकी सफाई नहीं हो पा रही है।
🗣️ ग्रामीणों का आरोप – “न सफाई कर्मी दिखते हैं, न साफ नालियां”कोपागंज ब्लॉक के जहनियापुर, कोईरियापार, पारा, भगवानपुर, मीरपुर रहीमाबाद, अन्नूपार, धवरियासाथ, दर्पनरायनपुर, कसारा, महुआर, अलीनगर, खुखुन्दवा, पारा मुबारकपुर, सोडसर, चिश्तीपुर, काछीकला आदि गांवों के ग्रामीणों — राजेश, विनोद, मनोज, कमाल, दिवाकर, प्रवीण, धीरज, पंकज और भोला ने बताया कि
“गांव में सफाई कर्मी महीनों तक नहीं आते। अगर आते भी हैं तो केवल प्रधान या स्कूल के आस-पास हल्की सफाई करके चले जाते हैं।”

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🔎 “सालों से नहीं देखा अपना सफाईकर्मी”
कई गांवों के ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने वर्षों से अपने गांव में तैनात सफाई कर्मी को देखा तक नहीं।
कुछ गांवों में तो लोगों को यह तक नहीं पता कि सफाईकर्मी पुरुष हैं या महिला।
📍गांवों में सफाई की जिम्मेदारी किन क्षेत्रों में है
गांवों में सफाई कर्मियों की जिम्मेदारी होती है —
सार्वजनिक नालियों और खड़ंजों की सफाई
धार्मिक स्थल व विद्यालय प्रांगण की सफाई
गांव के प्रमुख चौराहों और गलियों से कूड़ा उठाना
मुख्य मार्गों पर उगे घास-फूस की सफाई
लेकिन इनमें से अधिकांश कार्य केवल कागजों तक सीमित रह गए हैं।

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🏢 प्रशासन का बयान — “प्रधान और सचिव जिम्मेदार”
इस मामले में एडीओ पंचायत कोपागंज राजकमल ने कहा कि —

“सफाई कर्मियों से काम कराने की जिम्मेदारी ग्राम प्रधान और सेक्रेटरी की है। इनके हस्ताक्षर के बिना उनका वेतन भुगतान नहीं होता। यदि किसी गांव के प्रधान या ग्रामीणों द्वारा शिकायत की जाती है, तो निश्चित रूप से कार्रवाई की जाएगी।”

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📌 सवाल उठता है — आखिर जिम्मेदार कौन?
जब गांवों की सफाई के नाम पर करोड़ों रुपये हर साल खर्च हो रहे हैं, तो आखिर ये पैसा कहां जा रहा है? क्या सिर्फ कागजों में गांवों की सफाई हो रही है, जबकि धरातल पर गंदगी का साम्राज्य कायम है?
ग्रामीणों की बढ़ती नाराजगी और प्रशासन की चुप्पी अब एक बड़ा सवाल बन चुकी है —
“8 करोड़ रुपये हर साल… फिर भी गांव गंदे क्यों?”

हालपुर गांव में भीषण चोरी, लाखों के गहने व सामान पार

बलिया (राष्ट्र की परम्परा) मनियर थाना क्षेत्र के हालपुर गांव में बीती रात चोरों ने एक बड़ी वारदात को अंजाम देकर पूरे इलाके में सनसनी फैला दी। जानकारी के अनुसार गांव निवासी गुड्डू सिंह के घर उस समय चोरों ने धावा बोला जब पूरा परिवार छठ पर्व की तैयारी में जुटा हुआ था और रात में सभी गहरी नींद में सोए थे। चोरों ने बड़ी ही चालाकी से कटर से खिड़की की ग्रिल काटकर घर में प्रवेश किया और अलमारी व संदूक का ताला तोड़कर लाखों रुपए मूल्य के सोने-चांदी के गहने, बर्तन, कीमती कपड़े और नकदी उड़ा ले गए। सुबह जब परिवार के सदस्य जागे तो घर का सारा सामान बिखरा पड़ा था।

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अलमारी खुली हुई थी और दरवाजे के पास खिड़की कटी हुई दिखाई दी। घटना की जानकारी मिलते ही गांव में अफरा-तफरी मच गई। सूचना पर मनियर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और फिंगरप्रिंट व डॉग स्क्वायड टीम को बुलाकर जांच शुरू की। ग्रामीणों के अनुसार, चोरी की यह घटना देर रात दो बजे से तीन बजे के बीच की बताई जा रही है। गुड्डू सिंह ने बताया कि चोर लगभग दो लाख से अधिक कीमत के गहने, एक लाख की नकदी, नए कपड़े और रसोई के बर्तन लेकर फरार हो गए। आसपास के लोगों ने बताया कि बीते कुछ दिनों से गांव में अजनबी लोगों की आवाजाही देखी जा रही थी, जिससे आशंका है कि चोरी की योजना पहले से बनाई गई थी।

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पुलिस ने अज्ञात चोरों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और आसपास के इलाकों में CCTV फुटेज खंगाले जा रहे हैं। थाना प्रभारी ने बताया कि जल्द ही आरोपितों को पकड़ लिया जाएगा। घटना से पूरे गांव में दहशत का माहौल है और ग्रामीणों ने रात्रि गश्त बढ़ाने की मांग की है।

संदिग्ध हालात में राजेश सिंह ‘मंटू’ की मौत से मचा हड़कंप, गांव में पसरा मातम – पुलिस जांच में जुटी

रविवार की शाम काझा बंधा के पास घायल अवस्था में मिले पिरूआ निवासी राजेश सिंह, परिजनों ने जताई हत्या की आशंका, पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा।

मऊ (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। जनपद के रानीपुर थाना क्षेत्र के ग्राम सभा पिरूआ में रविवार की देर शाम उस समय हड़कंप मच गया जब गांव के निवासी राजेश सिंह उर्फ मंटू सिंह (40 वर्ष) संदिग्ध परिस्थितियों में गंभीर रूप से घायल अवस्था में मिले। उपचार के दौरान उनकी मौत हो जाने से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई।
जानकारी के अनुसार, रविवार की शाम राजेश सिंह अपने घर से काझा बाजार फल-सब्जी लेने गए थे। बताया जा रहा है कि शाम लगभग 6 बजे के करीब काझा बंधा के पास स्थानीय लोगों ने उन्हें सड़क किनारे खून से लथपथ और बेहोश अवस्था में पड़ा देखा। सूचना मिलते ही आसपास के लोग मौके पर पहुंचे और आनन-फानन में परिजनों को खबर दी।

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परिजन व ग्रामीण तुरंत राजेश सिंह को अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। जैसे ही मौत की खबर गांव पहुंची, परिवार में कोहराम मच गया और पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। मृतक के परिवार में दो बेटियां हैं और वह तीन भाइयों में सबसे छोटे थे।

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घटना की जानकारी मिलते ही रानीपुर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और आसपास के लोगों से पूछताछ शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में अभी तक कोई स्पष्ट कारण सामने नहीं आया है, लेकिन परिजनों ने हत्या की आशंका जताई है।
पुलिस का कहना है कि मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मृत्यु का वास्तविक कारण स्पष्ट हो पाएगा। फिलहाल गांव में शोक और दहशत का माहौल बना हुआ है।