Friday, July 3, 2026
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40 की उम्र पार करते ही पुरुष और महिलाओं को कराने चाहिए ये जरूरी हेल्थ टेस्ट, देखें अलग-अलग लिस्ट

जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, शरीर की कार्यप्रणाली में बदलाव आने लगते हैं। खासकर 40 की उम्र के बाद हार्ट डिजीज, डायबिटीज, थायराइड और कैंसर जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए इस उम्र में नियमित स्वास्थ्य जांच करवाना बेहद जरूरी है। विशेषज्ञों के अनुसार पुरुषों और महिलाओं को 40 की उम्र के बाद अलग-अलग टेस्ट जरूर कराने चाहिए ताकि बीमारियों का समय रहते पता चल सके।

पुरुषों के लिए 40 की उम्र के बाद जरूरी हेल्थ टेस्ट

  1. PSA टेस्ट (Prostate-Specific Antigen Test) – यह ब्लड टेस्ट प्रोस्टेट कैंसर के शुरुआती संकेतों की पहचान में मदद करता है।
  2. DRE (Digital Rectal Examination) – डॉक्टर प्रोस्टेट ग्रंथि की जांच करते हैं ताकि किसी असामान्यता का पता लगाया जा सके।
  3. प्रोस्टेट बायोप्सी – टिशू का नमूना लेकर कैंसर की पुष्टि की जाती है।
  4. यूरिन टेस्ट – मूत्राशय कैंसर या संक्रमण का पता लगाने के लिए समय-समय पर यह जांच जरूरी है।
  5. ब्लड शुगर टेस्ट – डायबिटीज के खतरे को पहचानने के लिए यह बेसिक लेकिन जरूरी जांच है।

महिलाओं के लिए 40 की उम्र के बाद जरूरी हेल्थ टेस्ट

  1. CBC टेस्ट (Complete Blood Count) – यह टेस्ट शरीर में रेड ब्लड सेल्स, व्हाइट ब्लड सेल्स और हीमोग्लोबिन की मात्रा बताता है। एनीमिया या संक्रमण की पहचान में मदद करता है।
  2. किडनी फंक्शन टेस्ट (KFT) – ब्लड में क्रिएटिनिन, यूरिया और यूरिक एसिड की मात्रा मापी जाती है ताकि किडनी की कार्यप्रणाली का पता चल सके।
  3. मैमोग्राम टेस्ट – स्तन कैंसर की शुरुआती जांच के लिए बेहद जरूरी टेस्ट। यह किसी गांठ या असामान्यता का पता लगाने में मदद करता है।
  4. CA 15-3 टेस्ट – ब्लड में स्तन कैंसर से जुड़े प्रोटीन के स्तर की जांच करता है।
  5. CEA टेस्ट (Carcinoembryonic Antigen Test) – कोलन या रेक्टल कैंसर की जांच के लिए किया जाता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इन जांचों को नियमित रूप से करवाने से न केवल गंभीर बीमारियों का समय रहते पता चलता है, बल्कि उनका इलाज भी आसान हो जाता है।

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दिल्ली में बड़े स्तर पर IAS और DANICS अफसरों के तबादले, 16 अधिकारियों को मिली नई जिम्मेदारी — देखें पूरी लिस्ट

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा)। दिल्ली सरकार ने मंगलवार (4 नवंबर) को प्रशासनिक स्तर पर बड़ा फेरबदल किया है। इस दौरान भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) और दिल्ली, अंडमान एंड निकोबार द्वीप समूह सिविल सेवा (DANICS) के 16 अधिकारियों के तबादले किए गए हैं। उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने इस व्यापक बदलाव को मंजूरी दी है। अब इन अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।

नई नियुक्तियों की पूरी लिस्ट

हेमंत कुमार (IAS, AGMUT-2013) – स्पेशल CEO (DDMA) और स्पेशल सेक्रेटरी (अर्बन डेवलपमेंट) का अतिरिक्त प्रभार।

सुनील अंचिपाका (IAS, AGMUT-2014) – स्पेशल कमिश्नर (ट्रेड एंड टैक्सेज) और स्पेशल सेक्रेटरी (रेवेन्यू)।

एडा राजा बाबू (IAS, AGMUT-2014) – स्पेशल रजिस्ट्रार (कोऑपरेटिव सोसायटीज़)।

यश चौधरी (IAS, AGMUT-2017) – स्पेशल सेक्रेटरी (हेल्थ)।

अमोल श्रीवास्तव (IAS, AGMUT-2018) – डिप्टी कमिश्नर (ईस्ट) और स्पेशल सेक्रेटरी (लैंड एंड बिल्डिंग)।

कनिका (IAS, AGMUT-2022) – एसडीएम (अलिपुर)।

रघवेंद्र मीना (IAS, AGMUT-2022) – एसडीएम (करावल नगर)।

DANICS अधिकारियों में तबादले

के.सी. सुरेंद्र (DANICS-2001) – डिप्टी कमिश्नर (एमसीडी)।

धर्मेंद्र कुमार (DANICS-2008) – मुख्यमंत्री कार्यालय में अतिरिक्त सचिव व DCCWS के एडमिनिस्ट्रेटर।

प्रशांत कुमार (DANICS-2010) – मैनेजिंग डायरेक्टर (DCHFC)।

नरेंद्र एस. पाटी त्रिपाठी (DANICS-2011) – संयुक्त सचिव (प्रशासनिक सुधार) व कला, संस्कृति और भाषा विभाग की अतिरिक्त जिम्मेदारी।

मुकेश रजोरा (DANICS-2013) – एडीएम (मुख्यालय), राजस्व विभाग।

राधेश्याम मीना (DANICS-2017) – डायरेक्टर (दिल्ली जल बोर्ड)।

टपदिया श्रीकांत राजेंद्र प्रसाद (DANICS-2018) – डिप्टी कमिश्नर (फूड सेफ्टी विभाग)।

अमोध बर्थवाल (DANICS-2022) – एसडीएम (विवेक विहार)।

इसके अलावा, पुराने आदेश में संशोधन करते हुए अरुण कुमार झा (DANICS-2009) का पदनाम एडिशनल कमिश्नर (फूड एंड सिविल सप्लाईज) कर दिया गया है।

यह फेरबदल दिल्ली प्रशासनिक ढांचे को और सशक्त बनाने तथा विभागीय कार्यों में तेजी लाने के उद्देश्य से किया गया है।

माँ-ममता से देवता-मंत्र तक: बाल रूप में गणेश जी की उत्पत्ति

गणेश जी की विराट उत्पत्ति – बाल्यकाल की कुछ झलकियाँ

हिंदू धर्म के श्री-चिह्न, साहस- बुद्धि- समृद्धि के प्रथम देवता गणेश जी की कथा सिर्फ एक पुरानी दंतकथा नहीं बल्कि जीवन-ज्ञान, भक्ति और प्रतीकात्मकता का भंडार है। आज हम उनके बाल्यकाल से लेकर उत्पत्ति-कथा तक एक भाव-भरा सफर आपके समक्ष प्रस्तुत कर रहे हैं ताकि आप इस दिव्यता की गहराइयों में उतर सकें।

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उत्पत्ति – एक ममता-सृष्टि
पौराणिक ग्रंथों में, विशेष रूप से शिव पुराण (कुमार-खंड, रुद्र-संहित) के अनुसार, यह कथा इस प्रकार है कि माँ पर्वती ने स्नान के पश्चात् स्वयं के शरीर से निकली गोद लेप (यमुना-जल या गंगाजल मिश्रित लेप) से एक बालक की रचना करी।
उन्होंने उस बालक को आदेश दिया कि “मेरे स्नान-कक्ष का द्वार तुम रखो, किसी को प्रवेश न देने देना।”

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यह बालक ही गणेश जी हैं, जिनका नाम बाद में “गणाध्यक्ष” अथवा “गणपति” हुआ — गणों के अधिपति।
यह प्रसंग हमें सिखाता है कि भक्ति-ममता से जन्मे कर्म की शक्ति कैसी होती है। माँ पर्वती का स्नेह, उसके द्वारा किया गया निर्माण, एक मात्र उद्देश्य से था — स्वयं को सुरक्षित रखना; इस प्रकार उस बालक की भूमिका-प्रप्ति में “सेवक” की तरह आरंभ हुआ।
द्वारपाल की भूमिका और परिणति
जब उस बालक ने माँ-पर्वती के द्वारपाल के रूप में कार्य आरम्भ किया, तब उनके पिता शिव जी (महादेव) वहां आए। बालक ने आदेश के अनुरूप उन्हें प्रवेश नहीं दिया। यह घटना बड़ी अपूर्व थी — क्योंकि शाश्वत शिव स्वयं उस द्वार को पार करना चाहते थे।
शिव को क्रोध आने पर उन्होंने बालक का वध कर दिया।
इससे पर्वती अत्यंत क्षुब्ध हुईँ और संहार की चेतावनी दे कर कहने लगीं कि उनका पुत्र जीवित न हुआ तो तीनों लोकों का अस्त-व्यस्त हो जाएगा।

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शिव ने अपनी गणों को आदेश दिया कि उत्तर दिशा से प्रथम मिलने वाले जीव का सिर लाओ — वे मिले एक हाथी से। उस हाथी का सिर बालक के शरीर पर लगाया गया और उसे पुनर्जीवित किया गया। इस प्रकार बालक को हाथी-वदन प्राप्त हुआ और वे गणों के प्रमुख (‘गणाध्यक्ष’) घोषित हुए।
यह कथा हमें सिखाती है कि सजगता (द्वारपाल होना), आत्म-हृदय का समर्पण (माँ-पर्वती के प्रति) और दिव्य न्याय (शिव का क्रोध-विनियमन) — ये सब मिलकर एक महान रूप का निर्माण करते हैं।

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बाल्यकाल एवं प्रतीक-शिक्षा
बाल रूप में गणेश जी की देह में हाथी का सिर, एक दाँत टूटा हुआ, छोटे-छोटे हाथ-पैर तथा उनकी प्रिय सवारी—चूहे—से हमें गहरा संदेश मिलता है। उनके बड़े कान, व्यापक विचार-दृष्टि; छोटे-छोटे आँख-मुँह में समाहित दृढ़ ध्यान; एक हाथ में मोदक (प्रसन्नता), दूसरे में अंकुश — वे सभी प्रतीक हैं।
बाल रूप-गणपति (बाल-गणपति) के रूप में उन्हें माँ-पर्वती की गोद में, खेल-खिलौने के बीच चित्रित किया जाता है।
यह दर्शाता है कि दिव्यता खेल-मुक्त नहीं, बल्कि आस्था-भाव से ओत-प्रोत है।

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हमारे लिए संदेश
–जीवन में जब हम किसी काम का आरंभ करते हैं, तो प्रथम पूजा-आराधना जैसे-वैसे होती है — उसी प्रकार, गणेश जी को प्रथम पूज्य मानना हमें बताता है कि किसी भी नए आरम्भ में विवेक, भक्ति और स्वयं-संकल्प की भूमिका होती है।
– द्वारपाल बनने की कथा हमें यह सिखाती है कि “स्वयं की सीमा” तय करना, अपना कर्तव्य समझना एवं उचित समय पर कह देना—सभी मानव जीवन में आवश्यक गुण हैं।
– उनके हाथी-सिर और टूटे दाँत का प्रतीक हमें याद दिलाता है कि असाधारणता सिर्फ आकार-अंग से नहीं, बल्कि समर्पित वचन-धारा और वास्तविकता-विश्वास से आती है।
आशा है, इस पहले एपिसोड में आपने गणेश जी की उत्पत्ति-कथा के भीतर छुपे भाव-विभोर संदेशों को महसूस किया होगा। अगले भाग में हम गणेश जी की उपकथाएँ, उनकी बाल लीला, और किस प्रकार उन्होंने विघ्न हरण एवं बुद्धि-प्रतीक बनकर मानव जीवन में स्थान पाया—इस पर विस्तार से चर्चा करेंगे।y

लेख – एपिसोड 1

🌕 त्रिपुरारी पूर्णिमा 2025: जब महादेव ने किया था त्रिपुरासुर का संहार, गंगा स्नान और दीपदान से मिलता है दस यज्ञों का फल

वाराणसी/काशी(राष्ट्र की परम्परा डेस्क) कार्तिक माह की पूर्णिमा का दिन हिन्दू धर्म में अत्यंत शुभ और पुण्यकारी माना गया है। इसे त्रिपुरारी पूर्णिमा या देव दीपावली के रूप में भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव ने त्रिपुरासुर नामक राक्षस का वध किया था, इसलिए इसे त्रिपुरी पूर्णिमा कहा जाता है।

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इस वर्ष कार्तिक पूर्णिमा की तिथि 4 नवंबर की रात 10:36 बजे से शुरू होकर 5 नवंबर की शाम 6:48 बजे तक रहेगी। इस दिन गंगा स्नान, दीपदान, व्रत और पूजा का अत्यंत विशेष महत्व है।
🕉️ कार्तिक पूर्णिमा का धार्मिक महत्व
पुराणों के अनुसार, इस दिन गंगा स्नान करने से दस यज्ञों के समान फल प्राप्त होता है। ब्रह्मा, विष्णु, महेश, अंगिरा और आदित्य ने इसे महापवित्र पर्व कहा है।
मत्स्य पुराण के अनुसार, इसी दिन भगवान विष्णु ने मत्स्यावतार धारण किया था, इसलिए यह दिन विष्णु भक्तों के लिए भी अत्यंत मंगलकारी है।

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प्रमुख योग:
यदि कृतिका नक्षत्र हो तो महाकार्तिकी पूर्णिमा बनती है।
यदि रोहिणी नक्षत्र हो तो इसका फल और भी अधिक शुभ होता है।
कृतिका में चंद्रमा और विशाखा पर सूर्य होने से पद्मक योग बनता है, जो पुष्कर जैसे तीर्थों में भी दुर्लभ है।
🔱 त्रिपुरासुर वध की कथा
एक बार त्रिपुर नामक राक्षस ने एक लाख वर्ष तक प्रयागराज में कठोर तप किया। ब्रह्माजी से वर प्राप्त करने के बाद वह देवताओं पर अत्याचार करने लगा। जब उसने कैलाश पर्वत पर चढ़ाई कर दी, तब भगवान महादेव ने ब्रह्मा और विष्णु की सहायता से उसका संहार किया।
इस विजय दिवस को ही त्रिपुरारी पूर्णिमा कहा जाता है। इसी दिन से दीपदान और शिव आराधना का विशेष प्रचलन प्रारंभ हुआ।

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🪔 कार्तिक पूर्णिमा पर क्या करें
✅ गंगा स्नान करें:
प्रातःकाल गंगा या किसी पवित्र नदी में स्नान करना अत्यंत पुण्यदायक माना गया है। यह पापों का नाश करता है।
दीपदान करें:
सायंकाल घर, मंदिर या नदी तट पर दीप जलाएं। कहा गया है— “दीपदानं सहस्रेषु यज्ञकोटिफलं लभेत।”
दीपदान से जीवन में प्रकाश, समृद्धि और शांति आती है।
व्रत व पूजा:
इस दिन भगवान शिव, विष्णु, माता लक्ष्मी और तुलसी की पूजा करनी चाहिए। “ॐ नमः शिवाय” और “ॐ नारायणाय नमः” का जाप करना शुभ होता है।

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दान-पुण्य:
अन्न, वस्त्र, स्वर्ण, गौ, रथ या वृष का दान करने से जीवन में लक्ष्मी की कृपा और पापों से मुक्ति मिलती है।
🚫 कार्तिक पूर्णिमा पर क्या नहीं करें
❌ क्रोध, झूठ और कटु वाणी से बचें।
❌ मांस, शराब और तामसिक भोजन का सेवन न करें।
❌ गंगा या नदी के जल को प्रदूषित न करें।
❌ संकल्पित दीपक को बुझने न दें।
🌸 धार्मिक आस्था और आध्यात्मिक संदेश
कार्तिक पूर्णिमा का पर्व केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और प्रकाश का उत्सव है। यह दिन बताता है कि अंधकार पर प्रकाश और अधर्म पर धर्म की विजय सदा संभव है।
देव दीपावली के रूप में यह दिन काशी नगरी को हजारों दीपों की ज्योति से जगमग कर देता है।

इतिहास के दीप: 5 नवम्बर को जन्मे राष्ट्रभक्तों की प्रेरक गाथा

“5 नवम्बर के उजियारे दीप—जिन्होंने राष्ट्र, समाज और ज्ञान की दिशा बदली”


भारत का इतिहास उन विभूतियों से आलोकित है जिन्होंने अपने कर्म, संघर्ष और विचारों से समाज में अमिट छाप छोड़ी। 5 नवम्बर को जन्मे ऐसे ही अनेक महान व्यक्ति हैं, जिन्होंने स्वतंत्रता संग्राम से लेकर राजनीति, साहित्य और विज्ञान तक में देश का गौरव बढ़ाया। आइए जानें इन पांच प्रेरणास्रोत व्यक्तित्वों के जीवन, शिक्षा और योगदान की विस्तृत झलक —

चित्तरंजन दास (जन्म : 5 नवम्बर 1870, कलकत्ता, पश्चिम बंगाल)
चित्तरंजन दास, जिन्हें “देशबंधु” के नाम से जाना जाता है, भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के ऐसे महान सेनानी थे जिन्होंने राष्ट्र की चेतना को प्रज्वलित किया। कलकत्ता के एक शिक्षित बंगाली परिवार में जन्मे दास ने इंग्लैंड से कानून की शिक्षा प्राप्त की और वकालत में ख्याति अर्जित की। उन्होंने महात्मा गांधी के असहयोग आंदोलन को बंगाल में नई दिशा दी और स्वदेशी आंदोलन के प्रबल समर्थक बने। “बंगाल स्वराज्य पार्टी” के संस्थापक के रूप में उन्होंने कांग्रेस में नई ऊर्जा का संचार किया। चित्तरंजन दास का जीवन देशसेवा, न्याय और स्वाभिमान का प्रतीक रहा।

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बनारसी दास गुप्ता (जन्म : 5 नवम्बर 1917, भिवानी, हरियाणा)
बनारसी दास गुप्ता स्वतंत्रता सेनानी और हरियाणा राज्य के प्रख्यात नेता थे। भिवानी जिले के एक साधारण परिवार से निकलकर उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भाग लिया और जेल भी गए। भारत की स्वतंत्रता के बाद उन्होंने राजनीति में प्रवेश किया और हरियाणा के मुख्यमंत्री के रूप में जनसेवा की नई मिसाल कायम की। वे समाज सुधार, शिक्षा प्रसार और ग्रामीण विकास के प्रबल पक्षधर रहे। उनके कार्यकाल में हरियाणा ने औद्योगिक और सामाजिक प्रगति के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियाँ हासिल कीं। उनकी सादगी और जनता से जुड़ाव आज भी प्रेरणा देता है।

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उदयराज सिंह (जन्म : 5 नवम्बर 1921, ग्वालियर, मध्य प्रदेश)
उदयराज सिंह हिन्दी साहित्य जगत के उस उज्ज्वल नक्षत्र थे जिन्होंने शब्दों के माध्यम से भारतीय संस्कृति की गहराइयों को उकेरा। ग्वालियर के राजघराने से ताल्लुक रखने वाले सिंह ने आधुनिक हिन्दी गद्य को भाव, भाषा और विषयवस्तु की दृष्टि से नया आयाम दिया। उनकी रचनाओं में सामाजिक यथार्थ, मानवीय संवेदना और भारतीय परंपरा का सुंदर संगम दिखाई देता है। उन्होंने अनेक पत्रिकाओं में लेखन कर साहित्य को समृद्ध किया। उनका योगदान हिन्दी भाषा की सृजनशीलता और गरिमा को बढ़ाने में मील का पत्थर सिद्ध हुआ।

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अर्जुन सिंह (जन्म : 5 नवम्बर 1930, चाहू गाँव, मैहर, मध्य प्रदेश)
अर्जुन सिंह भारतीय राजनीति के उस अध्याय का नाम हैं जिन्होंने शिक्षा और सामाजिक न्याय के क्षेत्र में ऐतिहासिक पहल की। मध्य प्रदेश के मैहर में जन्मे सिंह ने प्रारंभिक शिक्षा वहीं प्राप्त की और बाद में राजनीति में कदम रखा। वे मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री और केंद्र सरकार में मानव संसाधन विकास मंत्री रहे। उनके कार्यकाल में शिक्षा के अधिकार और पिछड़े वर्गों के आरक्षण से जुड़ी नीतियाँ ऐतिहासिक रहीं। उन्होंने राजनीति को सेवा और समर्पण का माध्यम माना। अर्जुन सिंह का जीवन समाज में समान अवसर और शिक्षा विस्तार की भावना का प्रतीक है।

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सुहास पांडुरंग सुखात्मे (जन्म : 5 नवम्बर 1938, मुंबई, महाराष्ट्र)
भारतीय विज्ञान जगत में सुहास पांडुरंग सुखात्मे का नाम सम्मान के साथ लिया जाता है। मुंबई में जन्मे सुखात्मे ने इंजीनियरिंग और परमाणु विज्ञान की शिक्षा प्राप्त की। वे भारत सरकार के परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड के अध्यक्ष रहे और सुरक्षित परमाणु ऊर्जा के उपयोग में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने तकनीकी शिक्षा और वैज्ञानिक अनुसंधान के क्षेत्र में नई दिशा दी। एक शिक्षक और लेखक के रूप में उन्होंने विज्ञान को जनसुलभ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनका जीवन समर्पण, अनुशासन और राष्ट्रनिर्माण का उदाहरण है।
5 नवम्बर के ये नायक केवल अपने क्षेत्र के प्रतिनिधि नहीं, बल्कि राष्ट्र की आत्मा के प्रतीक हैं। उन्होंने दिखाया कि समर्पण, शिक्षा और कर्म के बल पर व्यक्ति समाज की दिशा बदल सकता है। इन विभूतियों की जीवनगाथा हमें यह संदेश देती है — “राष्ट्र की उन्नति तभी संभव है जब हम अपने कर्तव्यों को ही अपना धर्म मानें।”

सलेमपुर में विधानसभा निर्वाचन संबंधी प्रशिक्षण संपन्नउपजिलाधिकारी ने सुपरवाइजरों और बी.एल.ओ. को दी महत्वपूर्ण जानकारियां

सलेमपुर, देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)।

मंगलवार को जी.एम. एकेडमी सलेमपुर में विधानसभा 341 सलेमपुर के सुपरवाइजरों एवं बी.एल.ओ. (बूथ लेवल अधिकारियों) को निर्वाचन से संबंधित विशेष प्रशिक्षण दिया गया। यह प्रशिक्षण उपजिलाधिकारी सलेमपुर के निर्देशन में संपन्न हुआ, जिसमें तहसीलदार सलेमपुर सहित समस्त सुपरवाइजर व बी.एल.ओ. उपस्थित रहे।

प्रशिक्षण सत्र के दौरान उपजिलाधिकारी ने निर्वाचन कार्यों में पारदर्शिता, सटीकता और समयबद्धता बनाए रखने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक बी.एल.ओ. की भूमिका मतदाता सूची के पुनरीक्षण और नए मतदाताओं के पंजीकरण में अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। इसलिए सभी अधिकारी अपने दायित्वों को पूरी ईमानदारी और निष्ठा से निभाएं।

तहसीलदार सलेमपुर ने प्रशिक्षण के दौरान उपस्थित अधिकारियों को निर्वाचन आयोग द्वारा जारी नवीन दिशा-निर्देशों से अवगत कराया और उन्हें अपने-अपने क्षेत्र में मतदाता सूची के सत्यापन कार्य को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए।

इस अवसर पर उपजिलाधिकारी ने बताया कि प्रशिक्षण का उद्देश्य विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सभी बूथों पर निर्वाचन प्रक्रिया को सुचारु एवं निष्पक्ष रूप से संपन्न कराना है। उन्होंने कहा कि त्रुटिरहित मतदाता सूची ही निष्पक्ष चुनाव की नींव होती है।

कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी सुपरवाइजरों और बी.एल.ओ. ने निर्वाचन संबंधी कार्यों को पूरी जिम्मेदारी के साथ करने का संकल्प लिया।

राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष ने किया महिला व किशोरियों से संवाद

महिला सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल

मऊ (राष्ट्र की परम्परा)। उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष चारु चौधरी ने ग्रामीण विकास संस्थान, हाथिनी के प्रांगण में आयोजित महिला एवं किशोरी सशक्तिकरण सम्मेलन में भाग लिया।
कार्यक्रम के दौरान चारु चौधरी ने महिलाओं और किशोरियों को शिक्षित, आत्मनिर्भर और सशक्त बनने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि महिलाएं जब आत्मनिर्भर होंगी, तभी समाज और राष्ट्र सशक्त बन पाएगा।
उन्होंने राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं, मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना, महिला सशक्तिकरण मिशन और स्वयं सहायता समूह योजना आदि की जानकारी देते हुए महिलाओं से इन योजनाओं का अधिकतम लाभ उठाने का आह्वान किया।
इस के बाद उन्होंने इटौरा ग्राम पंचायत में ग्रामीण महिलाओं और किशोरियों से संवाद किया तथा ग्रामीण 📰 राज्य महिला आयोग उपाध्यक्ष ने महिला व किशोरियों से किया संवाद

महिला सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल — चारु चौधरी का मऊ में कार्यक्रम

मऊ (राष्ट्र की परम्परा)। उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष एवं उपराज्यमंत्री स्तर की पदाधिकारी चारु चौधरी ने ग्रामीण विकास संस्थान, हाथिनी के प्रांगण में आयोजित महिला एवं किशोरी सशक्तिकरण सम्मेलन में भाग लिया।

कार्यक्रम के दौरान चारु चौधरी ने महिलाओं और किशोरियों को शिक्षित, आत्मनिर्भर और सशक्त बनने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि “महिलाएं जब आत्मनिर्भर होंगी, तभी समाज और राष्ट्र सशक्त बन पाएगा।”

उन्होंने राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं — मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना, महिला सशक्तिकरण मिशन और स्वयं सहायता समूह योजना — की जानकारी देते हुए महिलाओं से इन योजनाओं का अधिकतम लाभ उठाने का आह्वान किया।

इसके बाद उन्होंने इटौरा ग्राम पंचायत में ग्रामीण महिलाओं और किशोरियों से संवाद किया तथा ग्रामीण विकास संस्थान द्वारा महिला एवं किशोरी सशक्तिकरण के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की सराहना की।

चारु चौधरी ने संस्थान परिसर में पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया।

इस अवसर पर ग्रामीण विकास संस्थान के निदेशक शमीम अब्बासी ने मुख्य अतिथि का स्वागत किया और संस्थान की गतिविधियों का परिचय दिया। कार्यक्रम का संचालन अच्छे लाल कुशवाहा ने किया।

कार्यक्रम में वसीम अब्बासी, अर्शी फ़ातिमा, आमिर सिद्दीकी, मनोज तिवारी, सन्तोष त्रिपाठी, जवाहर लाल, वंदना सिंह, मीरा सिंह, निशा, संजय राय, साजिद, फैज़ान, सुभेदार राम सहित अनेक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
संस्थान द्वारा महिला एवं किशोरी सशक्तिकरण के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की सराहना की। इस दौरान श्रीमती चौधरी ने संस्थान परिसर में पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया।
इस अवसर पर ग्रामीण विकास संस्थान के निदेशक शमीम अब्बासी ने मुख्य अतिथि का स्वागत किया और संस्थान की गतिविधियों का परिचय दिया। कार्यक्रम का संचालन अच्छे लाल कुशवाहा ने किया।
कार्यक्रम में वसीम अब्बासी, अर्शी फ़ातिमा, आमिर सिद्दीकी, मनोज तिवारी, सन्तोष त्रिपाठी, जवाहर लाल, वंदना सिंह, मीरा सिंह, निशा, संजय राय, साजिद, फैज़ान, सुभेदार राम सहित अनेक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

जिला गंगा समिति मऊ के तत्वावधान में मनाया गया गंगा उत्सव

साइकिल रैली, स्वच्छता अभियान एवं विविध प्रतियोगिताओं के माध्यम से दिया स्वच्छ गंगा का संदेश

मऊ ( राष्ट्र की परम्परा )गंगा, आस्था और एकात्मकता का सार आइए गंगा संग मनाएँ नदियों का त्यौहार” के संदेश के साथ मंगलवार को सरयू तट रामघाट, दोहरीघाट में “गंगा उत्सव” बड़े उत्साह और उल्लास के साथ मनाया गया। यह कार्यक्रम जिला गंगा समिति, मऊ के तत्वावधान में आयोजित किया गया, जिसका उद्देश्य गंगा नदी के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाना, नदी स्वच्छता को प्रोत्साहित करना तथा स्थानीय जनमानस को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ना था।

कार्यक्रम की शुरुआत विक्ट्री इंटर कॉलेज परिसर से साइकिल रैली के रूप में हुई, जिसे उपजिलाधिकारी घोसी अशोक कुमार सिंह ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। रैली में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ शामिल हुए, जिन्होंने “स्वच्छता ही सेवा”“नदी हमारी जीवनरेखा”“गंगा हमारी पहचान” और “नदियाँ हैं जीवन का आधार” जैसे प्रेरक नारे लगाते हुए शहरवासियों को नदी स्वच्छता का संदेश दिया। यह रैली नगर के प्रमुख मार्गों से होते हुए रामघाट पहुँची, जहाँ विद्यार्थियों ने स्वच्छता अभियान चलाकर घाट परिसर की सफाई की और स्थानीय नागरिकों को स्वच्छता एवं नदी संरक्षण के प्रति प्रेरित किया।

इस अवसर पर उप जिलाधिकारी अशोक कुमार सिंह ने कहा कि गंगा हमारी संस्कृति और आस्था की जीवनधारा है। इसे स्वच्छ रखना हमारा सामाजिक और नैतिक दायित्व है। आज की युवा पीढ़ी द्वारा गंगा स्वच्छता के लिए की जा रही पहल अत्यंत सराहनीय है। उन्होंने सभी से गंगा और अन्य नदियों को प्रदूषणमुक्त रखने का संकल्प लेने का आह्वान किया।

गंगा उत्सव के अंतर्गत कॉलेज परिसर में साइकिलोथॉन, सेमिनार, प्रश्नोत्तरी एवं रंगोली प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया। विद्यार्थियों ने गंगा नदी के महत्व, जल संरक्षण, पर्यावरण संतुलन और सतत विकास पर अपने विचार प्रस्तुत किए। सेमिनार में वक्ताओं ने कहा कि गंगा केवल एक नदी नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और जीवनदायिनी शक्ति का प्रतीक है। इसे निर्मल और अविरल बनाए रखना हर नागरिक का उत्तरदायित्व है।

नगर पंचायत अध्यक्ष विनय कुमार जायसवाल ने अपने संबोधन में कहा कि गंगा उत्सव केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि यह समाज को गंगा संरक्षण और पर्यावरण जागरूकता के प्रति संवेदनशील बनाने का अभियान है। जब हर नागरिक गंगा की स्वच्छता के लिए संकल्प लेगा, तभी निर्मल गंगा हरित भारत का सपना साकार होगा।

कार्यक्रम का संचालन एवं संयोजन डॉ. हेमंत कुमार यादव, जिला परियोजना अधिकारी, जिला गंगा समिति मऊ द्वारा किया गया। उन्होंने कहा कि गंगा संरक्षण में सरकार के साथ समाज के प्रत्येक वर्ग की भागीदारी आवश्यक है। जब जनता स्वेच्छा से जुड़ती है, तभी स्थायी पर्यावरणीय परिवर्तन संभव होता है।

कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती की वंदना से हुआ। उपजिलाधिकारी घोसी ने रैली और रंगोली प्रतियोगिता में भाग लेने वाले विद्यार्थियों को गंगा कैप पहनाकर सम्मानित किया तथा रैली को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। रंगोली प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को दोहरीघाट थाना की महिला कांस्टेबल सुश्री प्रिया और प्रज्ञा द्वारा प्रथम, द्वितीय और तृतीय पुरस्कार प्रदान किए गए।

इस अवसर पर विद्यालय के प्रबंधक धर्मेंद्र राय, प्रधानाचार्य डॉ. शाश्वतानंद पांडे, जे.आर.एफ. सुधीर कनौजिया, करुणेश मिश्रा, आज़ाद जायसवाल, अर्जुन सिंह, आनंद राय, रत्नेश पांडे, शिवम गुप्ता, सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ, स्थानीय नागरिक और पर्यावरण प्रेमी उपस्थित रहे।

“गंगा अमृत है – इसे स्वच्छ रखें, संरक्षित रखें” के सामूहिक संकल्प के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

🚀 भारत के मंगल अभियान से लेकर मुग़ल विजय तक — एक दिन, अनेक कहानियाँ

5 नवंबर का इतिहास: मानवता, विज्ञान और साहस की अद्भुत यात्रा

भारत और विश्व के इतिहास में 5 नवंबर का दिन अनेक निर्णायक घटनाओं और उपलब्धियों से भरा हुआ है। इस दिन घटित कई घटनाएँ न केवल देशों की राजनीतिक दिशा तय करती हैं बल्कि विज्ञान, समाज और संस्कृति के पन्नों पर स्थायी छाप छोड़ती हैं। आइए जानें, 5 नवंबर के दिन घटित वे प्रमुख घटनाएँ जिन्होंने मानव सभ्यता को नई दिशा दी।

1️⃣ 1556 – पानीपत के दूसरे युद्ध में हेमू की हार और अकबर का उदय
5 नवंबर 1556 को पानीपत के मैदान में मुग़ल शासक अकबर की सेना ने हेमू को परास्त किया। यह युद्ध भारतीय इतिहास का निर्णायक मोड़ साबित हुआ। इस विजय ने भारत में मुगल साम्राज्य की नींव को मज़बूत किया और अकबर ने एक समावेशी, धार्मिक सहिष्णुता पर आधारित शासन की शुरुआत की। यह युद्ध भारत के मध्यकालीन इतिहास का अहम अध्याय है।

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2️⃣ 1630 – स्पेन और इंग्लैंड के बीच शांति समझौता
17वीं सदी में यूरोप युद्धों की आग में झुलस रहा था। ऐसे में 5 नवंबर 1630 को स्पेन और इंग्लैंड के बीच शांति समझौते पर हस्ताक्षर हुए, जिसने यूरोपीय राजनीति में स्थिरता लाने की दिशा में नया अध्याय जोड़ा। इस समझौते ने व्यापार और समुद्री मार्गों की सुरक्षा को सुनिश्चित किया।
3️⃣ 1639 – अमेरिका में पहले डाकघर की स्थापना
मैसाच्युसेट्स में 5 नवंबर 1639 को अमेरिका का पहला डाकघर स्थापित हुआ। यह अमेरिकी संचार व्यवस्था की शुरुआत थी, जिसने बाद में सूचना और प्रशासन के विकास में अभूतपूर्व योगदान दिया। यह कदम आधुनिक डाक सेवाओं का जनक माना जाता है।

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4️⃣ 1811 – अल सल्वाडोर का स्वतंत्रता संग्राम
मध्य अमेरिकी देश एल सल्वाडोर ने 5 नवंबर 1811 को स्पेन के विरुद्ध अपना पहला स्वतंत्रता संघर्ष आरंभ किया। यह आंदोलन लातिन अमेरिका में उपनिवेशवाद के विरुद्ध जागरूकता की शुरुआत था। इस संघर्ष ने पूरे क्षेत्र में स्वतंत्रता की चिंगारी भड़काई।
5️⃣ 1920 – इंडियन रेडक्रॉस सोसाइटी की स्थापना
भारत में मानवीय सेवा और राहत कार्यों की प्रतीक संस्था ‘इंडियन रेडक्रॉस सोसाइटी’ की स्थापना 5 नवंबर 1920 को हुई। इस संस्था ने प्राकृतिक आपदाओं, युद्धों और स्वास्थ्य संकटों में अमूल्य योगदान दिया। यह भारत में सेवा, संवेदना और समर्पण की भावना का जीवंत उदाहरण है।
6️⃣ 1930 – साहित्यकार सिंक्लेयर लेविस को नोबेल पुरस्कार
अमेरिकी लेखक सिंक्लेयर लेविस को 5 नवंबर 1930 को उनकी रचना “बाबिट” के लिए साहित्य का नोबेल पुरस्कार मिला। उन्होंने पूंजीवादी समाज के दोहरे मानदंडों और नैतिक पतन को कलात्मक ढंग से प्रस्तुत किया। उनका साहित्य आज भी समाज की आत्मा को झकझोरता है।

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7️⃣ 1951 – अमेरिका का नेवाडा परमाणु परीक्षण
इस दिन अमेरिका ने नेवाडा परीक्षण केंद्र में परमाणु परीक्षण किया, जिसने परमाणु शक्ति संतुलन के युग की शुरुआत की। यह प्रयोग विश्व राजनीति को दो ध्रुवों में बाँटने वाला साबित हुआ और परमाणु सुरक्षा की वैश्विक बहस को जन्म दिया।
8️⃣ 1961 – नेहरू की न्यूयॉर्क यात्रा
भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने 5 नवंबर 1961 को न्यूयॉर्क की यात्रा की। यह यात्रा भारत की गुटनिरपेक्ष विदेश नीति को अंतरराष्ट्रीय मंच पर मजबूत करने के उद्देश्य से की गई थी। नेहरू ने इस दौरे से भारत की शांतिपूर्ण विकास नीति को नई पहचान दिलाई।

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9️⃣ 1995 – इस्रायली प्रधानमंत्री यित्जाक रॉबिन की हत्या
5 नवंबर 1995 को यित्जाक रॉबिन की गोली मारकर हत्या कर दी गई। वे इस्रायल-फिलिस्तीन शांति प्रक्रिया के प्रणेता थे। उनकी हत्या ने मध्य पूर्व की शांति को गहरा आघात पहुंचाया और इस्रायली राजनीति को नया मोड़ दिया।
🔟 2013 – भारत का मंगल अभियान (Mars Orbiter Mission)
भारत ने 5 नवंबर 2013 को इसरो के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से मंगलयान का सफल प्रक्षेपण किया।
यह एशिया का पहला और विश्व का चौथा सफल मंगल मिशन था।
इस मिशन ने भारत को “स्पेस पावर नेशन” की श्रेणी में खड़ा किया।
कम बजट और उच्च दक्षता के कारण यह विश्वभर में प्रशंसा का विषय बना।
यह दिन भारत के वैज्ञानिक इतिहास में “लाल ग्रह पर भारतीय तिरंगे की उड़ान” के रूप में सदा अमर रहेगा।

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🌍 इतिहास के इस दिन से सीख 5 नवंबर हमें यह सिखाता है कि इतिहास केवल घटनाओं की सूची नहीं है, बल्कि यह मानवता की निरंतर यात्रा है — संघर्ष से निर्माण तक, युद्ध से शांति तक, और धरती से अंतरिक्ष तक। यह दिन हर वर्ष हमें याद दिलाता है कि परिवर्तन और प्रगति ही मानव जीवन की स्थायी पहचान है।

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✍️ 5 नवंबर का दिन विज्ञान, राजनीति, समाज और संस्कृति के अद्भुत संगम का प्रतीक है। इस दिन की घटनाएँ दिखाती हैं कि समय चाहे मध्यकाल हो या आधुनिक युग, मानवता ने हमेशा नई ऊँचाइयों की तलाश की है। इतिहास के पन्नों में दर्ज यह दिन आज भी प्रेरणा, संघर्ष और सृजन की मिसाल बना हुआ है।

गढ़िया रंगीन की भूमि 2 लाख 70 हजार में हुई नीलाम अनिल कुमार के नाम ठेका

शाहजहांपुर (राष्ट्र की परम्परा)l थाना गढ़िया रंगीन क्षेत्र की पुलिस विभाग को वर्ष 2011 में आवंटित भूमि की नीलामी मंगलवार को पूरी पारदर्शिता के साथ सम्पन्न हुई। यह नीलामी पुलिस अधीक्षक शाहजहांपुर के पत्रांक क-06/2018, 17 अक्टूबर 2025 के अनुपालन में आयोजित की गई। नीलामी प्रक्रिया की अध्यक्षता क्षेत्राधिकारी तिलहर द्वारा की गई, जबकि प्रतिसार निरीक्षक रिजर्व पुलिस लाइन शाहजहांपुर की मौजूदगी में सम्पूर्ण कार्यवाही सम्पन्न करायी गई।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, गाटा संख्या 452 की कुल 08 हेक्टेयर (लगभग 122 बीघा) भूमि को दिसम्बर 2024 से दिसम्बर 2025 तक (एक वर्ष की अवधि हेतु) कृषि कार्य के लिए ठेके पर दिया जाना प्रस्तावित था। इस भूमि की नीलामी में कुल सात प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। बोली प्रक्रिया के दौरान ग्राम रपड़िया नवादा निवासी अनिल कुमार पुत्र नत्थूलाल ने सर्वाधिक ₹2,70,000 की बोली लगाकर ठेका अपने नाम किया। वहीं ग्राम पहाड़पुर निवासी समोद सिंह पुत्र रामपाल सिंह ने ₹2,65,000 की द्वितीय सर्वाधिक बोली लगाई।
नीलामी की पूरी प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी ढंग से सम्पन्न हुई। इस दौरान कार्यक्रम की वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी कराई गई ताकि प्रक्रिया का संपूर्ण अभिलेख सुरक्षित रहे। पुलिस विभाग के अधिकारियों ने बताया कि ठेका धनराशि शीघ्र ही राजकीय कोष में जमा कराई जाएगी।
इस नीलामी से विभाग को अतिरिक्त राजस्व प्राप्त होगा और भूमि का कृषि कार्यों में सदुपयोग सुनिश्चित किया जाएगा। स्थानीय लोगों ने पारदर्शी नीलामी की सराहना करते हुए कहा कि इससे क्षेत्र में विश्वास और निष्पक्षता का माहौल बनता है।

महिला बंदियों के बच्चों के समग्र विकास हेतु जिला कारागार का निरीक्षण

संयुक्त निगरानी समिति ने लिया सुविधाओं का जायजा

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)l जिला कारागार देवरिया का निरीक्षण मंगलवार को अपर जिलाधिकारी (प्र0) जैनेन्द्र सिंह की अध्यक्षता में गठित संयुक्त निगरानी समिति द्वारा किया गया। निरीक्षण का उद्देश्य महिला बंदियों के साथ आवासित 0 से 6 वर्ष तक की आयु वर्ग के बच्चों के समग्र विकास एवं संरक्षण को सुनिश्चित करना था।

निरीक्षण टीम में जेल अधीक्षक प्रेमसागर शुक्ला, जेलर राजकुमार, वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. आर.के. श्रीवास्तव, खण्ड शिक्षा अधिकारी देवमुनी वर्मा, बाल विकास परियोजना अधिकारी रत्नेश पाण्डेय, बाल कल्याण समिति सदस्य विरेन्द्र मणि त्रिपाठी एवं मंत्री सिंह, तथा संरक्षण अधिकारी जयप्रकाश तिवारी सम्मिलित रहे।

निरीक्षण के दौरान समिति के सदस्यों ने ‘सुरक्षित बचपन योजना’ के अंतर्गत कारागार में रह रहे बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, देखरेख, मनोरंजन, मनोसामाजिक परामर्श एवं भावनात्मक सहयोग से संबंधित व्यवस्थाओं का अवलोकन किया। यह निरीक्षण मा० उच्च न्यायालय, इलाहाबाद द्वारा पारित आदेश (क्रिमिनल मिस बेल अप्लीकेशन संख्या-25993/2024 रेखा बनाम उ.प्र. राज्य एवं संख्या-11262/2025 संतोष बनाम उ.प्र. राज्य) दिनांक 22 जुलाई 2025 के अनुपालन में किया गया।

निरीक्षण के समय 07 बच्चे कारागार में आवासित पाए गए। डॉ. आर.के. श्रीवास्तव ने सभी बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण कर आवश्यक पौष्टिक आहार एवं विटामिन्स उपलब्ध कराने के सुझाव दिए। खण्ड शिक्षा अधिकारी ने बच्चों को शिक्षा विभाग की योजनाओं से जोड़ने की जानकारी दी, जबकि बाल विकास परियोजना अधिकारी ने बच्चों को आंगनवाड़ी केंद्रों से आच्छादित करने की प्रक्रिया बताई।

संरक्षण अधिकारी ने महिला बंदियों के साथ रह रहे बच्चों के लिए स्पॉन्सरशिप योजना एवं मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना (सामान्य) के प्रावधानों की जानकारी दी।
इस अवसर पर अपर जिलाधिकारी (प्र0) ने निर्देश दिया कि शासनादेश में निहित प्रावधानों के अनुसार नियमित निरीक्षण सुनिश्चित करते हुए संबंधित विभाग आवश्यक कार्यवाही करें।

निरीक्षण के दौरान उपस्थित अधिकारीगण – गीता रानी (डिप्टी जेलर) एवं अमित कुमार उपाध्याय (महिला कल्याण विभाग) उपस्थित रहे।

फ्लाईओवर और विरासत गलियारा का निरीक्षण

व्यापारियों से की बातचीत दुकानदारों के पुनर्वास का दिया निर्देश

गोरखपुर(राष्ट्र क़ी परम्परा)l मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को गोरखपुर शहर के विकास कार्यों की प्रगति का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने सिक्स लेन फ्लाईओवर परियोजना और विरासत गलियारा के निर्माण कार्य का जायजा लिया। मुख्यमंत्री ने पांडेय हाता, घंटाघर, बक्शीपुर, अलीनगर, जटाशंकर से लेकर धर्मशाला तक चल रहे कार्यों की निरीक्षण की और अधिकारियों को तेजी से और गुणवत्तापूर्ण तरीके से कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मौके पर मौजूद अधिकारियों से कहा कि यह परियोजनाएँ गोरखपुर शहर के सौंदर्यीकरण और यातायात व्यवस्था को नई दिशा देने वाली हैं। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने विशेष रूप से यह निर्देश दिया कि जिन दुकानदारों की दुकानें सड़क चौड़ीकरण में पूरी तरह समाप्त हो गई हैं या जिनकी दुकानें दो से तीन फीट बची हैं, उन प्रभावित व्यापारियों को जीडीए (गोरखपुर विकास प्राधिकरण) के माध्यम से सरकारी जमीन पर बनाए जाने वाले कॉम्प्लेक्स में दुकानें आवंटित की जाएं। मुख्यमंत्री ने कहा कि “व्यापारियों को विस्थापन का शिकार नहीं बनने दिया जाएगा, बल्कि उन्हें बेहतर और सुरक्षित स्थान पर पुनर्वासित किया जाएगा।”
निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने व्यापारियों से भी बातचीत की और उनकी समस्याओं को सुना। उन्होंने कहा कि विकास कार्य शहर के हर नागरिक के हित में किए जा रहे हैं। सरकार का लक्ष्य है कि गोरखपुर न केवल एक स्मार्ट सिटी बने, बल्कि सांस्कृतिक और ऐतिहासिक दृष्टि से भी आकर्षण का केंद्र बने।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया कि निर्माण कार्य के दौरान ट्रैफिक और जनसुविधा पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। उन्होंने कहा कि कार्य स्थलों पर सुरक्षा मानकों का पूर्ण पालन सुनिश्चित किया जाए और रात के समय भी प्रकाश व्यवस्था उचित रखी जाए ताकि दुर्घटनाओं की संभावना न रहे।
विरासत गलियारा परियोजना की जानकारी देते हुए अधिकारियों ने बताया कि यह परियोजना 555.56 करोड़ रुपये की लागत से बन रही है। कुल 3.50 किलोमीटर लंबे दो लेन के इस गलियारे को 27 अप्रैल 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस परियोजना के पूरा होने से गोरखपुर शहर को एक नया स्वरूप मिलेगा, जो पर्यटन और व्यापारिक दृष्टि से भी लाभकारी होगा।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया कि सभी विकास कार्यों में पारदर्शिता और गुणवत्ता बनी रहे। उन्होंने कहा कि “हर कार्य जनता की सुविधा और शहर के समग्र विकास को ध्यान में रखकर किया जाए। किसी भी स्तर पर अनियमितता पाए जाने पर जिम्मेदार अधिकारी के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।
मुख्यमंत्री के निरीक्षण के दौरान एडीजी जोन मुथा अशोक जैन, डीआईजी रेंज एस. चनप्पा, मंडलायुक्त अनिल ढींगरा, जिलाधिकारी दीपक मीणा, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक राज करण नय्यर, एसपी सिटी, एडीएम सिटी अंजनी कुमार सिंह, एडीएम वित्त विनीत कुमाऊ सिंह, एडीएम प्रशासन सहदेव मिश्र, एसीएम प्रथम प्रशान्त बर्मा-द्वितीय राजू कुमार, एसडीएम सदर दीपक गुप्ता, डिप्टी कलेक्टर/तहसीलदार सदर ज्ञान प्रताप सिंह सहित अन्य प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी मौजूद रहे।
निरीक्षण के दौरान पूरे क्षेत्र में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था रही। पुलिस और प्रशासन के अधिकारी अपने-अपने स्थानों पर मुस्तैदी से तैनात रहे। मुख्यमंत्री के आगमन को लेकर चप्पे-चप्पे पर सुरक्षा के सख्त इंतज़ाम किए गए थे। “गोरखपुर अब उत्तर प्रदेश का नया विकास मॉडल बनेगा। हमारी प्राथमिकता है कि हर नागरिक को बेहतर सुविधा, स्वच्छ वातावरण और सुगम यातायात व्यवस्था मिले। विकास के साथ हर वर्ग का सम्मान और सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी।

ग्राम पंचायत गनेशपुर में महंगे दामों पर समान खरीद कर किया गया फर्जीवाड़ा

महराजगंज(राष्ट्र की परम्परा)। नौतनवा ब्लॉक क्षेत्र की ग्राम पंचायत गनेशपुर में पंचम वित्त से हुई खरीद में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का मामला उजागर हुआ है। अपलोड बिल बाउचर के अनुसार जिम्मेदारों ने सीएम डैशबोर्ड पर महंगे दामों पर बिल अपलोड कर सरकारी धन का दुरुपयोग किया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार 14 अगस्त 2025 वाउचर संख्या- P 13 के तहत ग्राम पंचायत में स्वच्छता कार्य के नाम पर फर्म बजरंग इंटरप्राइजेज, गोरखपुर को ₹28,400 का भुगतान किया गया है। इस वाउचर के अंतर्गत अपलोड बिल संख्या 130 में एक ठेला ₹16,000, चार कुदाल ₹4,000, चार कांटा ₹4,000, चार फावड़ा ₹2,400, तीन वाइपर ₹600, चार झाड़ू ₹600 और एक जोड़ी जूता ₹800 की खरीद दर्ज है।
ग्रामीणों का कहना है कि यह खरीद पूरी तरह फर्जी और मनमानी दरों पर की गई है। बाजार में अच्छी गुणवत्ता का फावड़ा या कुदाल ₹300 से ₹400 में आसानी से उपलब्ध है, जबकि पंचायत द्वारा इन्हें कई गुना अधिक कीमत पर खरीदा दिखाया गया है। इससे स्पष्ट है कि सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया है। इसी प्रकार वाउचर संख्या P- 1, 05 अप्रैल 2025 पर फर्म बजरंग इंटरप्राइजेज, राजेंद्र नगर, गोरखपुर को ₹46,299 का भुगतान दर्शाया गया है। बिल संख्या 139, 02 मार्च 2025 में फिनाइल, ब्लीचिंग पाउडर, वाइपर, एंटी-लार्वा केमिकल और खरपतवार नाशक मीरा-71 की खरीद दिखाई गई है। इसमें भी भारी हेराफेरी सामने आई है — मीरा-71 को ₹320 प्रति पीस की दर से खरीदा दिखाया गया, जबकि यही उत्पाद बाजार में ₹80 से ₹90 में उपलब्ध है।
ग्रामीणों का आरोप है कि ब्लॉक स्तर पर बैठे जिम्मेदार अधिकारी यदि समय-समय पर सीएम डैशबोर्ड पर अपलोड वाउचर और बिलों की जांच करते, तो इस तरह की फर्जी खरीद को रोका जा सकता था। लेकिन लापरवाही के चलते पंचायत में भ्रष्टाचार और सरकारी धन की बंदरबांट होती रही। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि इस मामले की उच्चस्तरीय जांच कर जिम्मेदारों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में पंचायतों में इस तरह की मनमानी पर अंकुश लगाया जा सके। फिलहाल यह देखना बाकी है कि जिला प्रशासन और ब्लॉक स्तर के अधिकारी इस गंभीर मामले पर क्या कदम उठाते हैं।

सागौन के बागीचे में पेड़ से लटकता मिला चालीस वर्षीय व्यक्ति का शव

पारिवारिक विवाद की आशंका, मृतक की पत्नी सहित परिजनों का रो- रोकर बुरा हाल

महराजगंज(राष्ट्र की परम्परा)। परसा मलिक थाना क्षेत्र के ग्राम पंचायत विषखोप टोला पेंडारी में मंगलवार की सुबह उस वक्त सनसनी फैल गई जब ग्रामीणों ने गांव के दक्षिण स्थित सागौन के बागीचे में एक व्यक्ति का शव पेड़ की डाल से लटकता देखा।
सुबह टहलने गये ग्रामीणों ने जैसे ही शव को देखा, तो शोर मचा दिया। देखते ही देखते मौके पर भारी भीड़ जुट गई। सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और क्षेत्राधिकारी को अवगत कराया।
मृतक की पहचान रामदास गौड़ 40 वर्ष पुत्र जगदेव गौड़, निवासी विषखोप टोला पेंडारी के रूप में हुई है। पुलिस ने शव को पेड़ से नीचे उतरवा कर कब्जे में लिया और पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
ग्रामीणों ने बताया कि सोमवार की शाम मृतक रामदास का अपनी पत्नी से किसी बात को लेकर विवाद हुआ था। विवाद की सूचना पर 112 पुलिस टीम मौके पर पहुंची थी और दोनों को समझा-बुझाकर मामला शांत कराया गया था। परंतु मंगलवार की सुबह रामदास का शव गांव से कुछ दूरी पर सागौन के बागीचे में पेड़ से लटका मिला।मृतक अपने पीछे दो पुत्र और एक पुत्री छोड़ गया है। बताया जा रहा है कि उसने अभी सिर्फ अपने बड़े बेटे की ही शादी की थी।
इस संबंध में वरिष्ठ उपनिरीक्षक महेन्द्र सिंह ने बताया कि शव को कब्जे में लेकर पंचनामे की कार्रवाई की गई है। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। रिपोर्ट आने के बाद ही मृत्यु का कारण स्पष्ट हो सकेगा।
ग्रामीण क्षेत्र में हुई इस घटना से पूरे गांव में शोक और सन्नाटा का माहौल है। पुलिस सभी पहलुओं की जांच में जुटी हुई है।

वृद्धाश्रम में हुआ स्वास्थ्य परीक्षण, कंबल व फल वितरण

11 बुजुर्ग चिन्हित, स्वास्थ्य विभाग कराएगा मोतियाबिंद सर्जरी

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)l मुख्य चिकित्साधिकारी के सौजन्य से मेहाड़ा पुरवा स्थित वृद्धाश्रम में मंगलवार को निशुल्क स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया, जिसमें बुजुर्गों के स्वास्थ्य की जांच के साथ कंबल व फल वितरण भी किया गया। जिलाधिकारी दिव्या मित्तल एवं मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. अनिल कुमार गुप्ता ने स्वयं उपस्थित होकर बुजुर्गों को कंबल व फल वितरित किए।

स्वास्थ्य शिविर में बीपी, शुगर, रक्त जांच एवं नेत्र परीक्षण किया गया। चिकित्सकों द्वारा आवश्यक परामर्श व दवाएँ प्रदान की गईं। जांच के दौरान 11 बुजुर्गों में मोतियाबिंद की पुष्टि हुई, जिनकी सर्जरी स्वास्थ्य विभाग द्वारा कराई जाएगी।

जिलाधिकारी दिव्या मित्तल ने कहा कि “बुज़ुर्ग माता-पिता के समान हैं, उनकी सेवा में जो संतोष मिलता है वह अन्य किसी कार्य में नहीं। जिला प्रशासन बुज़ुर्गों की सेवा व सुरक्षा के लिए सदैव तत्पर रहेगा।” उन्होंने बुजुर्गों से ठंड से बचाव, नियमित भोजन एवं समय-समय पर स्वास्थ्य जांच की अपील की।

मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. अनिल कुमार गुप्ता ने कहा कि “बुज़ुर्गों की सेवा सबसे बड़ा धर्म है। इस आयु में बीपी, शुगर, जोड़ों का दर्द एवं मौसमी बीमारियाँ सामान्य हैं, इसलिए संतुलित आहार व नियमित जांच जरूरी है।” उन्होंने बताया कि आश्रमों में भविष्य में भी नियमित स्वास्थ्य शिविर आयोजित किए जाएंगे।

कार्यक्रम में नोडल अधिकारी डॉ. अश्वनी पाण्डेय, मुख्य चिकित्साधिकारी की पत्नी उमा गुप्ता, आश्रम प्रबंधक विजय शुक्ला सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।