Thursday, June 25, 2026
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टाटानगर-एर्नाकुलम एक्सप्रेस के दो कोच में लगी भीषण आग, एक यात्री की मौत; फोरेंसिक जांच जारी

आंध्र प्रदेश (राष्ट्र की परम्परा)। आंध्र प्रदेश के येलामांचिली क्षेत्र में टाटानगर-एर्नाकुलम एक्सप्रेस के दो कोच में अचानक आग लगने से हड़कंप मच गया। इस दर्दनाक हादसे में एक यात्री की मौत हो गई, जबकि दर्जनों यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। आग लगने के कारणों का अब तक पता नहीं चल सका है, जिसे लेकर फोरेंसिक टीमें जांच में जुटी हुई हैं।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, उन्हें ट्रेन में आग लगने की सूचना देर रात करीब 12:45 बजे मिली। आग बी-1 कोच समेत दो कोचों में फैली थी। इनमें से एक कोच में 82 यात्री और दूसरे में 76 यात्री सवार थे।

हादसे के बाद आग की चपेट में आए बी-1 कोच से एक शव बरामद किया गया। मृतक की पहचान चंद्रशेखर सुंदरम के रूप में की गई है। घटना के तुरंत बाद रेलवे प्रशासन ने आग प्रभावित दोनों कोचों को ट्रेन से अलग कर दिया और बाकी ट्रेन को उसके गंतव्य एर्नाकुलम की ओर रवाना कर दिया गया।

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रेलवे अधिकारियों ने बताया कि हादसाग्रस्त कोचों में सवार यात्रियों को भी वैकल्पिक व्यवस्था के तहत जल्द उनके गंतव्य की ओर भेजा जाएगा। आग लगने के कारणों का पता लगाने के लिए दो फोरेंसिक टीमें मौके पर जांच कर रही हैं। प्रारंभिक जांच के बाद ही आग के सही कारणों का खुलासा हो सकेगा।

रामानंद सागर: टेलीविजन पर संस्कृति और संस्कारों के अमिट हस्ताक्षर

पुनीत मिश्र


भारतीय टेलीविजन के इतिहास में रामानंद सागर का नाम उस सृजनात्मक क्रांति का प्रतीक है, जिसने छोटे परदे को केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और आध्यात्मिक चेतना का सशक्त मंच बना दिया। दूरदर्शन के माध्यम से दुनिया को भारतीय परंपरा, मर्यादा और जीवन-मूल्यों से परिचित कराने वाले रामानंद सागर ने अपने धारावाहिकों के जरिए करोड़ों दर्शकों के मन में स्थायी स्थान बनाया।
रामानंद सागर मूलतः एक कुशल लेखक थे। साहित्यिक पृष्ठभूमि से आने के कारण उनकी रचनाओं में भाषा की गरिमा, कथानक की गंभीरता और भावनात्मक गहराई सहज रूप से दिखाई देती है। जब उन्होंने टेलीविजन को माध्यम बनाया, तब भी उन्होंने भारतीय सभ्यता की आत्मा से कोई समझौता नहीं किया। यही कारण है कि रामायण जैसे धारावाहिक ने प्रसारण के समय पूरे देश को एक सूत्र में बांध दिया। रविवार की सुबह सड़कों का सूना हो जाना, घरों में दीप-धूप जलाकर टीवी के सामने बैठना—यह सब एक धारावाहिक का नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक युग का निर्माण था।
रामायण के माध्यम से रामानंद सागर ने मर्यादा, कर्तव्य, त्याग और आदर्श जीवन की अवधारणा को जन-जन तक पहुंचाया। यह केवल रामकथा का चित्रण नहीं था, बल्कि भारतीय समाज के नैतिक मूल्यों की पुनर्स्थापना थी। इसी तरह कृष्णा धारावाहिक में उन्होंने श्रीकृष्ण के जीवन दर्शन, कर्मयोग और मानवता के संदेश को अत्यंत सरल और प्रभावी रूप में प्रस्तुत किया।
जय गंगा मैया जैसे धारावाहिकों में भारतीय आस्था और प्रकृति के प्रति श्रद्धा को कथा के माध्यम से उकेरा गया, वहीं विक्रम बेताल में लोककथाओं, नैतिक प्रश्नों और बौद्धिक विमर्श को रोचक शैली में प्रस्तुत किया गया। यह उनकी सृजनात्मक बहुमुखी प्रतिभा का प्रमाण है कि वे पौराणिक, आध्यात्मिक और लोककथात्मक, तीनों ही क्षेत्रों में समान दक्षता रखते थे।
रामानंद सागर का योगदान केवल धारावाहिक निर्माण तक सीमित नहीं था। उन्होंने यह सिद्ध किया कि भारतीय कथाएं वैश्विक मंच पर भी अपनी पहचान बना सकती हैं, बशर्ते उन्हें ईमानदारी, शोध और संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत किया जाए। उनके कार्यों ने आने वाली पीढ़ियों के निर्माता-निर्देशकों को यह राह दिखाई कि लोकप्रियता और मूल्यबोध एक साथ चल सकते हैं।
पद्मश्री सम्मान से अलंकृत रामानंद सागर आज भले ही हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके धारावाहिक आज भी स्मृतियों में जीवित हैं। उनकी जयंती पर यह कहना अनुचित नहीं होगा कि उन्होंने भारतीय टेलीविजन को केवल देखा नहीं जाने वाला माध्यम बनाया, बल्कि उसे जिया जाने वाला अनुभव बना दिया। उनकी रचनाएं आने वाली पीढ़ियों को भी भारतीय संस्कृति, जीवन दर्शन और नैतिकता की प्रेरणा देती रहेंगी।

बांग्लादेश में हिन्दुओं पर लगातार हमले: लोकतंत्र और मानवाधिकारों की अग्निपरीक्षा

बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिन्दू समुदाय पर हो रहे लगातार हमले केवल एक देश की आंतरिक समस्या नहीं हैं, बल्कि यह पूरे दक्षिण एशिया में लोकतांत्रिक मूल्यों, धार्मिक सहिष्णुता और मानवाधिकारों की स्थिति पर गंभीर प्रश्न खड़े करते हैं। पूजा स्थलों पर हमले, घरों और दुकानों में तोड़फोड़, जबरन पलायन और भय का वातावरण। ये घटनाएं किसी एक समय या स्थान तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि समय-समय पर उभरती एक चिंताजनक प्रवृत्ति का रूप ले चुकी हैं।
बांग्लादेश का संविधान सभी नागरिकों को समान अधिकार और धार्मिक स्वतंत्रता की गारंटी देता है। इसके बावजूद जमीनी हकीकत यह बताती है कि हिन्दू समुदाय असुरक्षा और भय के साये में जीने को मजबूर है। चुनावी माहौल, राजनीतिक अस्थिरता या अफवाहों के नाम पर अल्पसंख्यकों को निशाना बनाना यह दर्शाता है कि कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक इच्छाशक्ति में कहीं न कहीं गंभीर कमी है।
इतिहास गवाह है कि बांग्लादेश की सांस्कृतिक पहचान बहुलतावाद और सहअस्तित्व पर आधारित रही है। ऐसे में किसी एक समुदाय को योजनाबद्ध तरीके से हाशिये पर धकेलना न केवल सामाजिक ताने-बाने को कमजोर करता है, बल्कि देश की अंतरराष्ट्रीय छवि को भी आघात पहुंचाता है। यह भी चिंता का विषय है कि कई मामलों में अपराधियों को दंड न मिलना या मामलों का राजनीतिक रंग ले लेना पीड़ितों के न्याय के अधिकार को और भी कमजोर करता है।
इस मुद्दे पर बांग्लादेश सरकार की जिम्मेदारी केवल बयानबाजी तक सीमित नहीं हो सकती। दोषियों पर त्वरित और कठोर कार्रवाई, पीड़ितों के पुनर्वास, धार्मिक स्थलों की सुरक्षा और अल्पसंख्यकों में विश्वास बहाली के लिए ठोस कदम उठाना अनिवार्य है। साथ ही, नागरिक समाज, मीडिया और बुद्धिजीवियों को भी नफरत और अफवाहों के खिलाफ खुलकर खड़ा होना होगा।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय की भूमिका भी यहां महत्वपूर्ण हो जाती है। मानवाधिकार संगठनों और पड़ोसी देशों को कूटनीतिक स्तर पर यह सुनिश्चित करना चाहिए कि बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा केवल एक औपचारिक वादा न रहे, बल्कि व्यवहार में भी दिखाई दे।
किसी भी राष्ट्र की मजबूती उसकी सीमाओं या अर्थव्यवस्था से नहीं, बल्कि इस बात से मापी जाती है कि वह अपने सबसे कमजोर नागरिकों के साथ कैसा व्यवहार करता है। बांग्लादेश में हिन्दुओं पर हो रहे हमले यदि नहीं रुके, तो यह केवल एक समुदाय की हार नहीं होगी, बल्कि लोकतंत्र, मानवता और सहिष्णुता की भी पराजय होगी।

“संविधान, समाज और आध्यात्मिक बाज़ार: भारत से विश्व तक एक वैचारिक पड़ताल”

आधुनिक युग में आध्यात्मिकता का पुनराविष्कार: संभवतः आस्था,पहचान और करियर के बीच बदलता भारतीय समाज- एक समग्र अंतरराष्ट्रीय विश्लेषण

लेखक

गोंदिया – वैश्विक स्तरपर पिछले कुछ वर्षों में भारतीय समाज ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में यह स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है कि आध्यात्मिकता का स्वरूप तीव्र गति से बदल रहा है। एक समय था जब आध्यात्मिकता तप, त्याग, मौन और दीर्घ साधना से जुड़ी मानी जाती थी, वहीं आज आध्यात्मिकता मंच, माइक , कैमरा, सोशल मीडिया और विशाल जनसमूहों के बीच दिखाई देती है। कथावाचक क़े रूप में बाबाजी कहलाने का चलन केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक परिवर्तन का संकेत भी है। यह परिवर्तन न तो पूर्णतः सकारात्मक है और न ही पूर्णतः नकारात्मक,यह आधुनिक समाज की जटिलताओं का प्रतिबिंब है। मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं की गोंदिया महाराष्ट्र मानता हूं कि यह किसी व्यक्ति,संप्रदाय या कथावाचक पर टिप्पणी या व्यंग्य नहीं है,बल्कि समकालीन आध्यात्मिक प्रवृत्तियों की गहरी पड़ताल है।भारतीय संविधान का अनुच्छेद 25 प्रत्येक नागरिक को धर्म मानने,आचरण करने और प्रचार करने की स्वतंत्रता देता है। इसी संवैधानिक अधिकार के अंतर्गत कथावाचक,बाबा और आध्यात्मिक नेतृत्व का उभार संभव है। कोई भी व्यक्ति आध्यात्मिक मार्ग अपनाए, कथा कहे या अनुयायी बनाए,संविधान उसे रोकता नहीं।लेकिन लोकतंत्र केवल अधिकारों का नहीं, बल्कि विवेक,उत्तरदायित्व और जागरूक नागरिकता का भी नाम है।तेज़ी से बदलती अर्थव्यवस्था, प्रतिस्पर्धी जीवनशैली और सामाजिक असुरक्षा के बीच भारतीय नागरिक मानसिक शांति और जीवन अर्थ की तलाश में है। यह तलाश लोकतंत्र के भीतर हो रही है,जहाँ राज्य भौतिक आवश्यकताओं पर केंद्रित है,वहीं नागरिक आध्यात्मिक संतुलन खोज रहा है।यही कारण है कि आध्यात्मिक मंच आज भीड़ खींचते हैं। यह स्थिति लोकतंत्र की विफलता नहीं,बल्कि उसकी मानवीय सीमा को भी दर्शाती है।पारंपरिक भारतीय संस्कृति में कथावाचक समाज का नैतिक शिक्षक होता था,जो रामायण, भागवत और लोककथाओं के माध्यम से मूल्यों का संचार करता था। आज कथावाचक की भूमिका बदल रही है। वह अब केवल संस्कृति का वाहक नहीं,बल्कि एक सार्वजनिक व्यक्तित्व, प्रभावशाली वक्ता और कभी-कभी सामाजिक नेता भी बन जाता है। यह परिवर्तन संस्कृति के स्थिर न रहने, बल्कि समय के साथ रूप बदलने का प्रमाण है।संवैधानिक दृष्टि से आधुनिक युग में यह स्पष्ट दिखता है कि कुछ लोग आध्यात्मिकता को जीवन- समर्पण मानते हैं,जबकि कुछ स्पष्ट रूप से नहीं परंतु कहीं ना कहीं संभवतःछिपे रूप से इसे पेशे और करियर के रूप में अपनाते हैं। संविधान इस अंतर पर निर्णय नहीं देता।लोकतंत्र में यह नागरिक कीस्वतंत्रता है। लेकिन लोकतांत्रिक समाज यह अपेक्षा करता है कि आस्था का उपयोग भय,अंधविश्वास या विभाजन के लिए न हो, बल्कि नैतिकता और सामाजिक सद्भाव के लिए हो।
साथियों बात अगर हम आध्यात्मिकता की ओर बढ़ता आकर्षण:एक वैश्विक सामाजिक प्रवृत्ति इसको समझने की करें तो,आधुनिक युग में व्यक्ति भौतिक प्रगति के शिखर पर पहुँचने के बावजूद मानसिक अस्थिरता, अकेलापन अवसाद और अस्तित्वगत संकट से जूझ रहा है।भारत ही नहीं, अमेरिका, यूरोप, जापान और दक्षिण- पूर्व एशिया जैसे क्षेत्रों में भी योग, ध्यान, माइंडफुलनेस और आध्यात्मिक प्रवचनों की लोकप्रियता तेजी से बढ़ी है। यह आकर्षण बताता है कि आधुनिक जीवनशैली मनुष्य की आंतरिक आवश्यकताओं को पूर्ण रूप सेसंतुष्ट नहीं कर पा रही। ऐसे में आध्यात्मिकता एक मानसिक शरणस्थली के रूप में उभरती है।
साथियों बात अगर हम कथावाचक से बाबाजी तक: पहचान निर्माण की नई प्रक्रिया इसको समझने की करें तो, पारंपरिक भारतीय समाज में कथावाचक होना एक विद्या- साध्य कार्य था, जिसमें शास्त्रों का गहन अध्ययन,गुरु-शिष्य परंपरा और वर्षों की तपस्या आवश्यक मानी जाती थी। किंतु आज कथावाचन कई बार व्यक्तिगत ब्रांडिंग का माध्यम बनता दिख रहा है। कथा कहना अब केवल धार्मिक कर्म नहीं, बल्कि पहचान निर्माण का साधन भी है। आधुनिक संचार माध्यमों ने इस प्रक्रिया को और तीव्र कर दिया है,जहाँ कुछ ही वर्षों में कोई व्यक्ति लाखों अनुयायियों तक पहुँच सकता है।आध्यात्मिक समर्पण या करियर विकल्प:रेखा कहाँ खिंचती है?-वर्तमान समय की एक बड़ी सच्चाई यह है कि आध्यात्मिकता में प्रवेश करने वालों के उद्देश्य समान नहीं हैं।कुछ लोग वास्तव में जीवन को ईश्वर-समर्पित करना चाहते हैं,तो कुछ इसे एक सुरक्षित सम्मानजनक और आर्थिक रूप से स्थिर करियर विकल्प के रूप में देखते हैं। यह द्वंद्व केवल भारत तक सीमित नहीं है; पश्चिमी देशों में भी स्पिरिचुअल कोच, लाइफ गुरु और हीलिंग एक्सपर्ट जैसे पेशे उभर चुके हैं। प्रश्न यह नहीं कि आध्यात्मिकता में करियर गलत है या सही, बल्कि यह है कि क्या इसका मूल उद्देश्य आत्मोन्नति से हटकर बाह्य सफलता बनता जा रहा है?
साथियों बात अगर हम अनसुने नाम, जानी- पहचानी कथाएँ: आस्था का बदलता भूगोल इसको समझने की करें तो, आज अनेक ऐसे कथावाचकों और बाबाओं के नाम सामने आ रहे हैं, जिनका उल्लेख न तो पारंपरिक धर्मग्रंथों में मिलता है और न ही ऐतिहासिक धार्मिक परंपराओं में। फिर भी उनकी कथाओं में श्रोता उमड़ रहे हैं। यह स्थिति दर्शाती है कि आधुनिक समाज में आस्था का आधार केवल शास्त्र या परंपरा नहीं,बल्कि प्रस्तुति, भाषा, भावनात्मक जुड़ाव और व्यक्तिगत करिश्मा भी बन गया है।यह एक नई प्रकारकी भावनात्मक आध्यात्मिकता का उदय है।यह विचार उद्देश्यहीन आलोचना नहीं, समकालीन यथार्थ की स्वीकृति-यह आवश्यक है कि इस विषय पर चर्चा करते समय हम किसी भी कथावाचक या बाबाजी के चरित्र पर प्रश्नचिह्न न लगाएँ। समाज में हर व्यक्ति अपने अनुभव, परिस्थिति और समझ के अनुसार मार्ग चुनता है। यह लेख किसी पर व्यंग्य या टिप्पणी नहीं करता,बल्कि उस यथार्थ को स्वीकार करता है जिसे हम रोज़ देख रहे हैं। आलोचना से अधिक आवश्यक है आत्ममंथन,कि हम किस प्रकार की आध्यात्मिकता की ओर बढ़ रहे हैं।पचास वर्ष पहले और आज: आस्था का केंद्र कैसे बदला-लगभग पाँच दशक पहले तक भारतीय घरों में भगवान की पूजा का केंद्र मूर्तियाँ, ग्रंथ और परंपरागत रीति-रिवाज हुआ करते थे। राम, कृष्ण, शिव, दुर्गा और हनुमान जैसे देवता जीवन के नैतिक मार्गदर्शक माने जाते थे। आज भी उनकी पूजा होती है, किंतु उनके साथ-साथ जीवित बाबाओं की भूमिका कहीं अधिक प्रत्यक्ष और प्रभावशाली हो गई है। देवता अब चित्रों और मंदिरों तक सीमित होते जा रहे हैं, जबकि बाबाजी मंच पर संवाद करते हैं।जीवित बाबाजी का आकर्षण:संवाद, समाधान और तात्कालिकता-आधुनिक मनुष्य तत्काल समाधान चाहता है। जीवित बाबाजी प्रश्नों का उत्तर देते हैं, समस्याओं पर टिप्पणी करते हैं और व्यक्तिगत संबंध का अनुभव कराते हैं। यह अनुभव चित्रों या ग्रंथों से संभव नहीं हो पाता। यही कारण है कि वर्तमान बाबाओं के प्रति आकर्षण बढ़ा है। यह केवल आस्था नहीं, बल्कि संवाद की आवश्यकता भी है।
साथियों बात अगर हम मीडिया और सोशल मीडिया: आध्यात्मिकता का नया मंच इसको समझने की करें तो इलेक्ट्रॉनिक मीडिया टेलीविजन चैनल यूट्यूब, इंस्टाग्राम और फेसबुक ने आध्यात्मिकता को वैश्विक मंच प्रदान किया है। अब कथा सीमित श्रोताओं तक नहीं, बल्कि करोड़ों दर्शकों तक पहुँचती है। यह विस्तार आध्यात्मिक संदेश को लोकतांत्रिक बनाता है, लेकिन साथ ही सतहीकरण का खतरा भी पैदा करता है। गहन साधना की जगह कभी- कभी वायरल कंटेंट प्राथमिकता बन जाता है।आस्था और बाज़ार एक जटिल संबंध- आधुनिक आध्यात्मिकता पूरी तरह बाज़ार से अलग नहीं रह गई है। आश्रम, प्रवचन, कार्यक्रम, पुस्तकें और डिजिटल सब्सक्रिप्शन, ये सभी आर्थिक संरचना का हिस्सा बन चुके हैं।यह न तो पूर्णतः अनुचित है और न ही पूर्णतःउचित;यह समय की मांग का परिणाम है। किंतु प्रश्न यह है कि क्या बाज़ार आस्था को नियंत्रित कर रहा है, या आस्था बाज़ार को दिशा दे रही है?
साथियों बात अगर हम इस विषय कोअंतरराष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य: भारत अकेला नहीं इस रूप में समझने की करें तो,यह परिवर्तन केवल भारतीय समाज तक सीमित नहीं है। अमेरिका में टेली-एवेंजेलिस्ट, यूरोप में स्पिरिचुअल मोटिवेशनल स्पीकर्स और एशिया में ध्यान गुरु,हर जगह आध्यात्मिकता आधुनिक रूप में प्रकट हो रही है। भारत इस वैश्विक प्रवृत्ति का एक प्रमुख केंद्र है, क्योंकि यहाँ आध्यात्मिक विरासत अत्यंत गहरी है।
अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे क़ि विवेकपूर्ण आस्था की आवश्यकता -आधुनिक युग की आध्यात्मिकता न तो पूरी तरह खोखली है और न ही पूरी तरह शुद्ध। यह हमारे समय की उपज है,जहाँ आस्था,पहचान, करियर और बाज़ार एक-दूसरे में गुंथे हुए हैं। आवश्यकता इस बात की है कि समाज विवेकपूर्ण दृष्टि अपनाए, प्रश्न पूछे, पर श्रद्धा का अपमान न करे। आध्यात्मिकता का उद्देश्य अंततः आत्मबोध, करुणा और नैतिक जीवन होना चाहिए,चाहे वह मंदिर में मिले या मंच पर।

-संकलनकर्ता लेखक – क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए (एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्

नया साल, पुरानी पीड़ा और नया हौसला: नूतन वर्ष मनाएंगे

नूतन वर्ष मनाएंगे


साल नया और हाल पुराना
कुछ सुनना कुछ उन्हें सुनाना
कुछ पाया कुछ खोया सबने
जैसा था अपनाया हमने
शिकवे और गिले थे सारे
उनमें भी सब रहे हमारे
जद्दोजहद रही रोटी की
बात वही किस्मत खोटी की
रीति प्रीति है बदली-बदली
रिश्तों में अब अदलाबदली
हानि लाभ हावी रिश्तों पर
खुद का स्वार्थ आज है ऊपर
प्रेम समर्पण त्याग पुराना
बदल गया सब ताना-बाना
किस कंधे पर सिर रख रोऊं
वो मेरा मैं उसका होऊं
कहाँ गए खुशियों के आंसू
जिनके संग सुख-दुःख मैं बांटू
कहाँ गई यादों की हिचकी
आती है अब अक्सर सिसकी
नए साल में अरमानों के
बीज नया हम फिर बोयेंगे
आस और विश्वास लिए हम
मधुर स्वप्न में फिर खोंयेंगे
दोहराएंगे वही कहावत
गिरती चढ़ती चींटी का
नया हौंसला फिर लेकर हम
नूतन वर्ष मनाएंगे..।।
नूतन वर्ष मनाएंगे..।।

~ विजय कनौजिया

कड़ाके की ठंड के चलते योगी सरकार का बड़ा निर्णय, 12वीं तक के स्कूल 1 जनवरी तक बंद


लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)उत्तर प्रदेश में लगातार बढ़ती ठंड और शीतलहर को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विद्यार्थियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए एक अहम फैसला लिया है। प्रदेश सरकार ने कक्षा 1 से 12वीं तक के सभी सरकारी, सहायता प्राप्त, मान्यता प्राप्त और निजी स्कूलों को 1 जनवरी तक बंद रखने का आदेश जारी किया है। यह निर्णय बच्चों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए लिया गया है, ताकि अत्यधिक ठंड के कारण होने वाली बीमारियों से उन्हें बचाया जा सके।
प्रदेश के कई जिलों में न्यूनतम तापमान में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। सुबह और देर रात के समय घना कोहरा, शीतलहर और ठंडी हवाएं लोगों की दिनचर्या को प्रभावित कर रही हैं। खासकर छोटे बच्चों और किशोरों के लिए यह मौसम जोखिम भरा साबित हो सकता है। इसी को देखते हुए मुख्यमंत्री ने शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि आदेश का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए।
सरकारी आदेश के अनुसार, सभी बोर्डों से संबद्ध स्कूलों पर यह निर्णय लागू होगा। हालांकि, विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षा संस्थानों को लेकर स्थानीय प्रशासन परिस्थितियों के अनुसार अलग निर्णय ले सकता है। कई जिलों में पहले से ही स्कूलों के समय में बदलाव किया गया था, लेकिन ठंड की तीव्रता को देखते हुए अब पूर्ण अवकाश का निर्णय लिया गया है।
अभिभावकों ने सरकार के इस कदम का स्वागत किया है। उनका कहना है कि सुबह के समय अत्यधिक ठंड में बच्चों का स्कूल जाना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है। वहीं, शिक्षा विभाग ने संकेत दिए हैं कि यदि ठंड का प्रकोप जारी रहा तो आगे भी अवकाश की अवधि बढ़ाई जा सकती है।

जसीडीह-झाझा रेल खंड पर बड़ा रेल हादसा, ट्रैक बहाली में जुटा रेलवे

जसीडीह-झाझा रेल खंड पर मालगाड़ी पटरी से उतरी, अप-डाउन ठप, 17 ट्रेनें रद्द, 35 डायवर्ट


आसनसोल रेल मंडल के अंतर्गत आने वाले जसीडीह-झाझा रेल खंड पर शनिवार देर रात एक बड़ी रेल दुर्घटना हो गई। टेलवा हॉल्ट के समीप टेलवा ब्रिज पर एक मालगाड़ी के पटरी से उतरने के बाद इस रूट पर अप और डाउन दोनों लाइनों पर ट्रेन संचालन पूरी तरह बाधित हो गया है। हादसे के बाद से लंबी दूरी और लोकल ट्रेनों की आवाजाही ठप है, जिससे हजारों यात्री कड़ाके की ठंड में भारी परेशानियों का सामना कर रहे हैं।
रेल सेवा ठप, यात्री बेहाल
मालगाड़ी के डिरेल होते ही रेलवे प्रशासन ने सुरक्षा कारणों से इस सेक्शन पर सभी ट्रेनों का परिचालन तत्काल प्रभाव से रोक दिया। स्टेशन परिसरों पर यात्रियों की भीड़ जमा हो गई है। कई यात्री मजबूरी में सड़क मार्ग का सहारा ले रहे हैं, जबकि कई लोग स्टेशन पर ही इंतजार कर रहे हैं।
रेलवे की रेस्क्यू टीम मौके पर
पूर्व रेलवे और आसनसोल मंडल के वरिष्ठ अधिकारी, इंजीनियरिंग और दुर्घटना राहत दल घटनास्थल पर पहुंच चुके हैं। रेलवे प्रशासन के अनुसार, लाइन क्लियरेंस और ट्रैक बहाली का कार्य युद्धस्तर पर जारी है, ताकि जल्द से जल्द ट्रेन सेवा को सामान्य किया जा सके।
17 ट्रेनें रद्द, 35 से अधिक ट्रेनों के रूट बदले
पूर्व रेलवे द्वारा जारी आधिकारिक बुलेटिन के अनुसार, दुर्घटना के कारण 17 ट्रेनों को रद्द कर दिया गया है, जबकि 35 से अधिक ट्रेनों को वैकल्पिक मार्गों से चलाया जा रहा है। इससे यात्रियों की यात्रा अवधि बढ़ सकती है।
रद्द की गई प्रमुख ट्रेनें
13005 हावड़ा–अमृतसर एक्सप्रेस (28.12.2025)
13155 कोलकाता–सीतामढ़ी एक्सप्रेस
13029 हावड़ा–मोकामा एक्सप्रेस
12369 हावड़ा–देहरादून कुंभ एक्सप्रेस
13105 सियालदह–बलिया एक्सप्रेस
जसीडीह–झाझा, देवघर–झाझा सहित कई MEMU ट्रेनें
(कुल 17 ट्रेनें रद्द)
लंबी दूरी की ट्रेनें बदले मार्ग से संचालित
हावड़ा–प्रयागराज विभूति एक्सप्रेस, हावड़ा–राजेंद्र नगर एक्सप्रेस, मौर्य एक्सप्रेस, राजधानी, दुरंतो, पूर्वा एक्सप्रेस समेत कई प्रमुख ट्रेनें धनबाद, गया, भागलपुर, रामपुरहाट और किऊल होकर चलाई जा रही हैं। कुछ ट्रेनों के ठहराव में भी अस्थायी बदलाव किया गया है।
रेलवे ने जारी किए हेल्पलाइन नंबर
यात्रियों की सहायता के लिए रेलवे ने विभिन्न स्टेशनों पर हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं—
आसनसोल: 8250423803
लाहाबोन: 9046239257
सिमुलतला: 9046239218
जसीडीह: 7654517819
मधुपुर: 9332062170
दुर्गापुर: 9046239223
यात्री अपनी ट्रेन की स्थिति और वैकल्पिक व्यवस्थाओं की जानकारी इन नंबरों पर संपर्क कर प्राप्त कर सकते हैं।
कब तक बहाल होगी सेवा?
रेलवे अधिकारियों का कहना है कि ट्रैक मरम्मत और सुरक्षा जांच पूरी होने के बाद ही ट्रेन सेवा बहाल की जाएगी। फिलहाल यात्रियों से अपील की गई है कि यात्रा से पहले ट्रेन की स्थिति की पुष्टि अवश्य करें।

सोम देव का अवतरण: समुद्र मंथन से चन्द्र तक की अद्भुत यात्रा

🌙 धर्म, अमृत और शीतलता का अद्भुत संगम: समुद्र मंथन में चन्द्र देव की दिव्य उत्पत्ति और महिमा


(एक शास्त्रोक्त, भावनात्मक और रहस्यमयी कथा )
🔱 प्रस्तावना
सनातन धर्म की कथाएँ केवल इतिहास नहीं, बल्कि चेतना की वे धाराएँ हैं, जिनमें ब्रह्मांड का गूढ़ ज्ञान समाया है। समुद्र मंथन ऐसी ही एक विराट ब्रह्मकथा है, जिसमें देव, दानव, विष, अमृत, लक्ष्मी, धन्वंतरि और अनेक दिव्य रत्न प्रकट हुए। इन्हीं रत्नों में एक अत्यंत शीतल, सौम्य और मनोवैज्ञानिक प्रभाव रखने वाले देव का आविर्भाव हुआ — चन्द्र देव।
हम उसी शास्त्रोक्त क्षण का वर्णन करेंगे, जब समुद्र मंथन के कोलाहल से चन्द्र देव प्रकट हुए और सृष्टि को मानसिक संतुलन, सौंदर्य तथा समय की गणना का आधार प्रदान किया।

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🌊 समुद्र मंथन: जब ब्रह्मांड ने करवट ली
भागवत पुराण, विष्णु पुराण और महाभारत के अनुसार, देवताओं और असुरों ने मिलकर क्षीरसागर का मंथन किया। मंदराचल पर्वत मथनी बना, वासुकी नाग रस्सी बने और स्वयं भगवान विष्णु कूर्म अवतार में आधार बने।
मंथन से क्रमशः हलाहल विष, कामधेनु, ऐरावत, कल्पवृक्ष, लक्ष्मी, धन्वंतरि और अमृत निकले।
इसी क्रम में, जब समुद्र का मंथन अपनी चरम अवस्था में पहुँचा, तब एक दिव्य शीतल प्रकाश समुद्र से प्रकट हुआ — वह थे चन्द्र देव।

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🌙 चन्द्र देव की शास्त्रोक्त उत्पत्ति कथा
शास्त्रों के अनुसार, चन्द्र देव को सोम भी कहा जाता है। वे समुद्र मंथन से उत्पन्न हुए, इसलिए उन्हें समुद्र तनय कहा गया।
“क्षीरसागरात् समुत्पन्नः सोमो लोकप्रकाशकः।”
(विष्णु पुराण)
उनका तेज सूर्य की भांति दाहक नहीं, बल्कि शीतल और मन को शांति देने वाला था। देवताओं ने उनका स्वागत किया, ऋषियों ने स्तुति की और सृष्टि ने पहली बार मानसिक संतुलन का अनुभव किया।

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🕉️ चन्द्र की महिमा: मन, समय और रस का अधिपति
चन्द्र केवल ग्रह नहीं, बल्कि मन के स्वामी हैं।
वैदिक ज्योतिष में कहा गया है —
“चन्द्रमा मनसो जातः”
अर्थात चन्द्र से ही मन की उत्पत्ति मानी गई है।
चन्द्र की महिमा के प्रमुख आयाम:
🌙 मन, भावनाओं और स्मृति के कारक
🌿 औषधियों, वनस्पतियों और रस के अधिपति

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तिथि, मास और पंचांग के आधार
💧 जल तत्व और शीतलता के प्रतीक
इसी कारण चन्द्र को सोम कहा गया — अमृत स्वरूप।
🔱 चन्द्र और शिव: महिमा की सर्वोच्च समानता
समुद्र मंथन के समय जब हलाहल विष निकला, तब भगवान शिव ने उसे कंठ में धारण किया। विष की उष्णता को शांत करने के लिए चन्द्र देव को शिव के मस्तक पर स्थान मिला।
यहीं से चन्द्र बने — चन्द्रशेखर शिव के आभूषण।
यह दर्शाता है कि चन्द्र केवल ग्रह नहीं, बल्कि वैराग्य, संयम और संतुलन के प्रतीक हैं।

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🌌 चन्द्र की कथा में मानवीय भावनाएँ
शास्त्रों में चन्द्र की कथा केवल देवत्व नहीं, बल्कि मानवीय दुर्बलताओं का भी दर्शन कराती है।
27 नक्षत्र कन्याओं से विवाह, दक्ष प्रजापति का श्राप, क्षय रोग और फिर भगवान विष्णु द्वारा दिया गया वरदान —
ये सब दर्शाते हैं कि जीवन में उतार-चढ़ाव भी ईश्वरीय योजना का हिस्सा हैं।
🪔 चन्द्र की भक्ति और आध्यात्मिक प्रभाव
जो व्यक्ति चन्द्र देव की उपासना करता है, उसके जीवन में:
मानसिक शांति आती है
अवसाद और भय दूर होता है
माता से संबंध मधुर होते हैं
जल और औषधि से लाभ मिलता है
सोमवार व्रत, चन्द्र मंत्र और शिव भक्ति — ये तीनों चन्द्र को प्रसन्न करने के श्रेष्ठ उपाय हैं।

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सूर्य देव का शास्त्रीय रहस्य: आत्मा से धर्म तक की दिव्य यात्रा🌠 कथा का दार्शनिक संदेश
समुद्र मंथन की कथा हमें सिखाती है कि —
अमृत पाने से पहले विष सहना पड़ता है।
चन्द्र देव की शीतलता बताती है कि
संसार की अग्नि को केवल शांति ही संतुलित कर सकती है।
आज के अशांत, तनावग्रस्त युग में चन्द्र की महिमा और भी प्रासंगिक हो जाती है।

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समापन
एपिसोड–8 की यह कथा केवल पढ़ने के लिए नहीं, अनुभव करने के लिए है।
चन्द्र देव की शीतल किरणें आज भी मनुष्य के भीतर उतरकर उसे स्थिरता और संतुलन प्रदान करती हैं।
यही सनातन धर्म की शाश्वत शक्ति है —
जो युग बदलने पर भी मार्ग दिखाती है।

आज का दिन किन 5 राशियों के लिए रहेगा बेहद शुभ

29 दिसंबर 2025 का दैनिक राशिफल (मेष से मीन तक) | Aaj Ka Rashifal in Hindi
पंडित सत्य प्रकाश पाण्डेय द्वारा प्रस्तुत
वैदिक ज्योतिष के अनुसार, सोमवार 29 दिसंबर 2025 का दिन भगवान शिव को समर्पित है। आज ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति कुछ राशियों के लिए उन्नति और लाभ का संकेत दे रही है, वहीं कुछ राशियों को संयम और सावधानी से काम लेने की आवश्यकता होगी।
यह राशिफल सरल, प्रभावी और SEO फ्रेंडली भाषा में तैयार किया गया है, ताकि पाठक न केवल भविष्यफल जानें बल्कि उसे आत्मसात भी कर सकें।

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मेष राशि (Aries ♈)
अक्षर: चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ
आज का दिन आत्मविश्लेषण और निर्णय का है। सपनों और वास्तविकता के बीच संतुलन बनाना आपके लिए लाभकारी रहेगा।
कार्य/व्यवसाय: नई योजनाओं पर काम शुरू हो सकता है। साझेदारी में धैर्य जरूरी।
शिक्षा: प्रतियोगी छात्रों को मेहनत का फल मिलेगा।
कला/संगीत: रचनात्मकता में निखार आएगा।
राजनीति/प्रशासन: नेतृत्व क्षमता उभरेगी।
आर्थिक स्थिति: खर्च पर नियंत्रण रखें।
शुभ रंग: लाल
शुभ अंक: 9
पूज्य देवता: भगवान शिव

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वृषभ राशि (Taurus ♉)
अक्षर: ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो
आज अनुशासन और समय प्रबंधन से सफलता मिलेगी।
कार्य/व्यवसाय: रुके हुए काम पूरे होंगे।
शिक्षा: एकाग्रता बढ़ेगी।
कला: धैर्य से अभ्यास लाभ देगा।
राजनीति: छवि मजबूत होगी।
धन: स्थिरता बनी रहेगी।
शुभ रंग: सफेद
शुभ अंक: 6
पूजा: माता लक्ष्मी

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मिथुन राशि (Gemini ♊)
अक्षर: का, की, कु, घ, ङ, छ, के, को, हा
आज चुनौतियां ही आपकी ताकत बनेंगी।
कार्य/व्यवसाय: संचार कौशल से लाभ।
शिक्षा: लेखन, मीडिया से जुड़े छात्रों के लिए श्रेष्ठ दिन।
कला/संगीत: नए प्रयोग सफल।
राजनीति: जनसंपर्क मजबूत।
धन: आय के नए स्रोत।
शुभ रंग: हरा
शुभ अंक: 5
पूजा: भगवान गणेश

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कर्क राशि (Cancer ♋)
अक्षर: ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो
आज भावनात्मक संतुलन जरूरी है।
कार्य: दबाव में निर्णय न लें।
शिक्षा: निरंतरता बनाए रखें।
कला: संवेदनशील रचनाएं।
प्रशासन: संयम से लाभ।
धन: सामान्य स्थिति।
शुभ रंग: सफेद
शुभ अंक: 2
पूजा: भगवान शिव

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सिंह राशि (Leo ♌)
अक्षर: मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे
आज आत्मविश्वास आपकी सबसे बड़ी पूंजी है।
कार्य/व्यवसाय: नेतृत्व के अवसर।
शिक्षा: प्रदर्शन शानदार।
कला: मंच से प्रशंसा।
राजनीति: प्रभाव बढ़ेगा।
धन: लाभ के संकेत।
शुभ रंग: सुनहरा
शुभ अंक: 1
पूजा: सूर्य देव
कन्या राशि (Virgo ♍)
अक्षर: टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो
आज स्वास्थ्य और मानसिक शांति प्राथमिकता हो।
कार्य: योजना से काम करें।
शिक्षा: विश्लेषणात्मक विषयों में लाभ।
कला: अभ्यास जरूरी।
प्रशासन: सतर्कता आवश्यक।
धन: खर्च बढ़ सकता है।
शुभ रंग: हरा
शुभ अंक: 5
पूजा: माता सरस्वती

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तुला राशि (Libra ♎)
अक्षर: रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते
आज संतुलन और सौंदर्य दोनों साथ चलेंगे।
कार्य: टीमवर्क से सफलता।
शिक्षा: कला और लॉ से जुड़े छात्रों के लिए अच्छा।
कला: रचनात्मक दिन।
राजनीति: संवाद से लाभ।
धन: स्थिति मजबूत।
शुभ रंग: गुलाबी
शुभ अंक: 6
पूजा: माता दुर्गा
वृश्चिक राशि (Scorpio ♏)
अक्षर: तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू
आज गोपनीयता और सतर्कता जरूरी है।
कार्य: रिसर्च व जांच में सफलता।
शिक्षा: गहन अध्ययन लाभकारी।
कला: रहस्यमयी विषय।
प्रशासन: जिम्मेदारी बढ़ेगी।
धन: पर्याप्त।
शुभ रंग: मरून
शुभ अंक: 8
पूजा: भगवान हनुमान
धनु राशि (Sagittarius ♐)
अक्षर: ये, यो, भा, भी, भू, धा, फा, ढा, भे
आज दीर्घकालिक योजनाओं का दिन है।
कार्य: निवेश सोच-समझकर।
शिक्षा: उच्च शिक्षा में प्रगति।
कला: दर्शन व लेखन।
राजनीति: वैचारिक मजबूती।
धन: भविष्य सुरक्षित।
शुभ रंग: पीला
शुभ अंक: 3
पूजा: भगवान विष्णु
मकर राशि (Capricorn ♑)
अक्षर: भो, जा, जी, खी, खू, खे, खो, गा, गी
आज धैर्य से बड़ा लाभ मिलेगा।
कार्य: जिम्मेदारियां बढ़ेंगी।
शिक्षा: अनुशासन से सफलता।
कला: मेहनत रंग लाएगी।
प्रशासन: उच्च अधिकारी प्रसन्न।
धन: संतुलन जरूरी।
शुभ रंग: नीला
शुभ अंक: 4
पूजा: शनिदेव

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कुंभ राशि (Aquarius ♒)
अक्षर: गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा
आज विचारों में स्पष्टता जरूरी है।
कार्य: तकनीकी क्षेत्र में लाभ।
शिक्षा: नवाचार सफल।
कला: आधुनिक प्रयोग।
राजनीति: नई सोच से पहचान।
धन: मध्यम।
शुभ रंग: आसमानी
शुभ अंक: 11
पूजा: भगवान शिव

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मीन राशि (Pisces ♓)
अक्षर: दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची
आज आत्मिक और भौतिक संतुलन का दिन है।
कार्य: सीनियर्स से सहयोग।
शिक्षा: कला व आध्यात्मिक विषयों में लाभ।
कला/संगीत: प्रेरणा मिलेगी।
राजनीति: सहानुभूति से लाभ।
धन: सलाह लेकर निवेश करें।
शुभ रंग: पीला
शुभ अंक: 7
पूजा: भगवान विष्णु

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डिस्क्लेमर
यह ज्योतिषीय आलेख किसी भी राष्ट्र या संस्था द्वारा प्रमाणित नहीं है। यह सामान्य ग्रह-नक्षत्रों पर आधारित है। अपनी जन्मकुंडली का विश्लेषण किसी योग्य ज्योतिष विशेषज्ञ से अवश्य कराएं।

शुभ मुहूर्त में उठाया गया एक कदम, बदल सकता है आने वाला वर्ष

पंचांग 29 दिसंबर 2025: सोमवार का संपूर्ण द्रिक पंचांग | पौष शुक्ल नवमी–दशमी | Rahu Kaal, शुभ-अशुभ मुहूर्त
आज का पंचांग – 29/12/2025 (सोमवार)

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📌 तिथि
शुक्ल पक्ष नवमी – सुबह 10:12 AM तक
शुक्ल पक्ष दशमी – 10:12 AM से अगले दिन 07:51 AM तक
📌 विक्रम संवत – 2082 (कालयुक्त संवत्सर)
📌 शक संवत – 1947 (विश्वावसु)
📌 चंद्र मास – पौष (अमांत व पूर्णिमांत)
📌 वार – सोमवार

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🌙 नक्षत्र, योग व करण
नक्षत्र
रेवती – सुबह 07:40 AM तक (गण्डमूल)
अश्विनी – 07:41 AM से अगले दिन 06:04 AM तक
योग
परिघ – 07:36 AM तक
शिव – 07:36 AM से अगले दिन 04:31 AM तक
सिद्ध – 04:31 AM के बाद
करण
कौलव – 10:12 AM तक
तैतिल – 10:12 AM से 09:06 PM तक
गर – 09:06 PM के बाद

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☀️ सूर्य व 🌕 चंद्रमा का समय
सूर्योदय – 07:11 AM
सूर्यास्त – 05:46 PM
चन्द्रोदय – 01:07 PM
चन्द्रास्त – 02:29 AM (30 दिसंबर)
सूर्य राशि – धनु
चंद्र राशि –
07:40 AM तक मीन
उसके बाद मेष

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अशुभ काल (महत्वपूर्ण सावधानी)
राहुकाल – 08:30 AM – 09:50 AM
यमगण्ड – 11:09 AM – 12:28 PM
कुलिक – 01:48 PM – 03:07 PM
दुर्मुहूर्त –
12:49 PM – 01:32 PM
02:56 PM – 03:39 PM
वर्ज्यम् – 02:20 AM – 03:50 AM

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शुभ काल व श्रेष्ठ मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त – 05:35 AM – 06:23 AM
अभिजीत मुहूर्त – 12:07 PM – 12:49 PM
अमृत काल – 11:21 PM – 12:50 AM
👉 सर्वार्थसिद्धि योग
अश्विनी नक्षत्र व सोमवार के संयोग से सुबह 07:41 AM के बाद शुभ कार्यों के लिए अनुकूल समय माना जाता है।

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🧭 दिशा शूल व यात्रा विचार
🚫 यात्रा वर्जित दिशा – पूर्व दिशा (सोमवार)
यदि यात्रा आवश्यक हो तो क्या करें?
दही या गुड़ खाकर यात्रा प्रारंभ करें।

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लाभकारी दिशा – उत्तर एवं पश्चिम
इन दिशाओं में यात्रा से कार्यसिद्धि व लाभ की संभावना बढ़ती है।
🌿 आज का भावार्थ (संक्षिप्त फल)
आज का दिन संयम, धैर्य और आत्मनिरीक्षण का है।
रेवती से अश्विनी में चंद्रमा का प्रवेश नई शुरुआत, साहस और कर्मशीलता का संकेत देता है।
शिव योग मन को स्थिरता देता है, जबकि सिद्ध योग प्रयासों को परिणाम तक पहुँचाने में सहायक होता है।

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📝 नोट: इस पंचांग में किसी भी प्रकार की त्रुटि के लिए राष्ट्र की परम्परा उत्तरदायी नहीं है। किसी भी महत्वपूर्ण निर्णय से पूर्व कृपया योग्य ज्योतिषाचार्य या विद्वान से परामर्श अवश्य लें।

राष्ट्र निर्माण में संत, कलाकार और वैज्ञानिकों की भूमिका

जब 29 दिसंबर ने छीन लिए युगपुरुष: इतिहास के अमर हस्ताक्षर जिनकी स्मृति आज भी जीवित है

भारतीय इतिहास में कुछ तिथियाँ केवल कैलेंडर की तारीख नहीं होतीं, वे स्मृतियों, योगदानों और विरासतों की वाहक बन जाती हैं। 29 दिसंबर भी ऐसी ही एक भावनात्मक तिथि है, जब देश ने आध्यात्म, कला, विज्ञान, संगीत और चिकित्सा के क्षेत्र में अमूल्य योगदान देने वाली महान विभूतियों को खोया। ये सभी व्यक्तित्व आज भले ही हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनका कार्य, विचार और समाज के प्रति समर्पण आज भी पथप्रदर्शक है। आइए 29 दिसंबर को हुए इन महत्वपूर्ण निधन पर विस्तार से दृष्टि डालते हैं।

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स्वामी विश्वेशतीर्थ (निधन: 29 दिसंबर 2019)
स्वामी विश्वेशतीर्थ जी एक प्रतिष्ठित हिंदू संत और पेजावर मठ (उडुपी परंपरा) के प्रमुख थे। उनका जन्म कर्नाटक राज्य के दक्षिण कन्नड़ क्षेत्र में हुआ माना जाता है। उन्होंने धार्मिक शिक्षा, वैदिक परंपरा और सामाजिक समरसता को जीवन का लक्ष्य बनाया।
स्वामी जी न केवल आध्यात्मिक गुरु थे, बल्कि वे शिक्षा, राष्ट्रवाद और सामाजिक सेवा के प्रबल समर्थक भी रहे। राम जन्मभूमि आंदोलन से लेकर हिंदू समाज को संगठित करने तक, उनका योगदान राष्ट्रीय स्तर पर स्मरणीय है। सरल जीवन, ओजस्वी वाणी और निर्भीक विचारों के कारण वे लाखों श्रद्धालुओं के लिए प्रेरणा बने। उनका जीवन त्याग, तप और धर्मनिष्ठा का प्रतीक रहा।

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मंजीत बावा (निधन: 29 दिसंबर 2008)
मंजीत बावा आधुनिक भारतीय कला जगत के अत्यंत चर्चित और मौलिक चित्रकार थे। उनका जन्म धुरी, जिला संगरूर, पंजाब, भारत में हुआ था। उन्होंने भारतीय पौराणिक कथाओं, पशु-पक्षियों और प्रकृति को अपनी विशिष्ट शैली में चित्रित किया।
उनकी कला में रंगों की सादगी और विषयों की गहराई एक अनूठा संतुलन प्रस्तुत करती है। मंजीत बावा ने भारतीय कला को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्हें कई राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हुए। भारतीय चित्रकला को नई संवेदना और दृष्टि देने वाले इस कलाकार का निधन कला जगत के लिए अपूरणीय क्षति रहा।

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शिवराज रामशरण (निधन: 29 दिसंबर 2003)
शिवराज रामशरण एक समर्पित भारतीय वैज्ञानिक थे, जिन्होंने विज्ञान और अनुसंधान के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया। उनका जन्म भारत में हुआ और उन्होंने देश की वैज्ञानिक प्रगति के लिए विभिन्न अनुसंधान परियोजनाओं में कार्य किया।
वे विज्ञान को समाजोपयोगी बनाने के पक्षधर थे और नई पीढ़ी को वैज्ञानिक सोच से जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध रहे। अनुसंधान, शिक्षा और बौद्धिक विकास में उनका योगदान भले ही आम जन में कम चर्चित हो, लेकिन भारतीय विज्ञान जगत में उनका स्थान सम्मानजनक रहा। उनका जीवन अनुशासन, अध्ययन और राष्ट्रहित के लिए समर्पण का उदाहरण था।

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पंडित ओंकारनाथ ठाकुर (निधन: 29 दिसंबर 1967)
पंडित ओंकारनाथ ठाकुर हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत के महान गायक, शिक्षाशास्त्री और सांस्कृतिक चिंतक थे। उनका जन्म झज्जर, हरियाणा, भारत में हुआ था। वे ग्वालियर घराने की परंपरा से जुड़े और अपनी सशक्त गायकी के लिए प्रसिद्ध हुए।
उन्होंने संगीत को केवल मंच तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे राष्ट्रीय चेतना से जोड़ा। “वंदे मातरम्” की उनकी प्रस्तुति आज भी ऐतिहासिक मानी जाती है। संगीत शिक्षा के क्षेत्र में भी उनका योगदान अतुलनीय रहा। उनका जीवन भारतीय सांस्कृतिक अस्मिता और संगीत साधना का उज्ज्वल प्रतीक था।

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हकीम अजमल ख़ाँ (निधन: 29 दिसंबर 1927)
हकीम अजमल ख़ाँ यूनानी चिकित्सा पद्धति के विश्वविख्यात चिकित्सक और राष्ट्रवादी विचारधारा के समर्थक थे। उनका जन्म दिल्ली, भारत में हुआ था। उन्होंने यूनानी चिकित्सा को वैज्ञानिक आधार प्रदान किया और उसे आधुनिक युग से जोड़ा।
वे केवल चिकित्सक ही नहीं, बल्कि शिक्षाविद, स्वतंत्रता आंदोलन के समर्थक और जामिया मिल्लिया इस्लामिया के संस्थापकों में से एक थे। समाज सेवा, शिक्षा और राष्ट्रीय एकता के लिए उनका योगदान अद्वितीय रहा। भारतीय चिकित्सा इतिहास में उनका नाम स्वर्ण अक्षरों में अंकित है।

29 दिसंबर: इतिहास के पन्नों में अमर वे नाम

29 दिसंबर: इतिहास के पन्नों में अमर वे नाम, जिनके जन्म ने भारत और विश्व को दिशा दी

29 दिसंबर केवल एक तारीख नहीं, बल्कि यह उन महान व्यक्तित्वों की जन्मतिथि है, जिनकी प्रतिभा, विचार और कर्मों ने समाज, साहित्य, सिनेमा, राजनीति और संस्कृति को नई पहचान दी। इस दिन जन्मे लोग अपने-अपने क्षेत्र में युगद्रष्टा सिद्ध हुए। आइए इतिहास के इन महत्वपूर्ण जन्मदिनों पर विस्तार से प्रकाश डालते हैं—

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सुधीश पचौरी (जन्म: 29 दिसंबर 1948)
जन्म स्थान: उत्तर प्रदेश, भारत
सुधीश पचौरी हिन्दी साहित्य के प्रख्यात आलोचक, वरिष्ठ मीडिया समीक्षक, स्तंभकार और सांस्कृतिक विश्लेषक रहे। उन्होंने उत्तर आधुनिक विमर्श, मीडिया अध्ययन और समकालीन साहित्यिक आलोचना को नई दृष्टि दी। पत्रकारिता और अकादमिक जगत में उनकी पहचान निर्भीक विश्लेषण और तार्किक लेखन के लिए रही।
पचौरी जी ने साहित्य को केवल भावनाओं तक सीमित न रखकर सामाजिक, राजनीतिक और मीडिया संरचनाओं से जोड़ा। उनके लेख विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रमों का हिस्सा बने। भारत में मीडिया आलोचना को गंभीर वैचारिक आधार देने में उनका योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।

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वीरेन्द्र वीर विक्रम शाह (जन्म: 29 दिसंबर 1944)
जन्म स्थान: काठमांडू, नेपाल
वीरेन्द्र वीर विक्रम शाह नेपाल के राजा और दक्षिण एशिया के प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते हैं। उनके शासनकाल में नेपाल ने संवैधानिक राजतंत्र की दिशा में कदम बढ़ाया। उन्होंने लोकतांत्रिक सुधारों, सामाजिक संतुलन और अंतरराष्ट्रीय संबंधों को मजबूत करने का प्रयास किया।
राजा वीरेन्द्र को एक सौम्य, दूरदर्शी और शांति प्रिय शासक के रूप में याद किया जाता है। भारत-नेपाल संबंधों को मजबूत बनाने में भी उनकी भूमिका रही। दक्षिण एशियाई राजनीति में उनका योगदान आज भी ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है।

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राजेश खन्ना (जन्म: 29 दिसंबर 1942)
जन्म स्थान: अमृतसर, पंजाब, भारत
राजेश खन्ना हिन्दी सिनेमा के पहले “सुपरस्टार” कहलाए। उन्होंने फिल्म उद्योग में लोकप्रियता की परिभाषा ही बदल दी। आराधना, आनंद, कटी पतंग, अमर प्रेम जैसी फिल्मों ने उन्हें जनमानस का चहेता बना दिया।
उनकी अभिनय शैली, संवाद अदायगी और भावनात्मक अभिव्यक्ति ने करोड़ों दर्शकों के दिलों पर अमिट छाप छोड़ी। सामाजिक विषयों को फिल्मों के माध्यम से आम जनता तक पहुँचाने में उनका बड़ा योगदान रहा। भारतीय सिनेमा के इतिहास में उनका नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है।

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रामानन्द सागर (जन्म: 29 दिसंबर 1917)
जन्म स्थान: लाहौर (तत्कालीन भारत, अब पाकिस्तान)
रामानन्द सागर भारतीय सिनेमा और टेलीविजन के महान निर्माता-निर्देशक थे। उन्हें विशेष रूप से ऐतिहासिक धारावाहिक रामायण के लिए जाना जाता है, जिसने भारतीय टेलीविजन की दिशा बदल दी।
उनके कार्य ने धार्मिक और सांस्कृतिक मूल्यों को जन-जन तक पहुँचाया। रामायण केवल एक धारावाहिक नहीं, बल्कि भारतीय समाज की भावनात्मक आस्था बन गया। साहित्य, इतिहास और मनोरंजन को जोड़ने में उनका योगदान अद्वितीय रहा।

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कुप्पाली वेंकटप्पा पुटप्पा (कुवेम्पु) (जन्म: 29 दिसंबर 1904)
जन्म स्थान: शिवमोग्गा जिला, कर्नाटक, भारत
कुवेम्पु कन्नड़ साहित्य के महान कवि, लेखक और दार्शनिक थे। उन्हें ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उन्होंने कन्नड़ भाषा को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई।
उनकी रचनाओं में मानवतावाद, प्रकृति प्रेम और सामाजिक चेतना स्पष्ट दिखाई देती है। कर्नाटक की सांस्कृतिक आत्मा को शब्द देने वाले कुवेम्पु का योगदान भारतीय साहित्य में अमर है।

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दीनानाथ मंगेशकर (जन्म: 29 दिसंबर 1900)
जन्म स्थान: गोवा, भारत
दीनानाथ मंगेशकर मराठी रंगमंच के प्रसिद्ध अभिनेता, शास्त्रीय गायक और नाट्य संगीतकार थे। वे स्वर कोकिला लता मंगेशकर के पिता थे।
उन्होंने भारतीय संगीत और रंगमंच को समृद्ध किया। नाट्य संगीत को लोकप्रिय बनाने में उनका विशेष योगदान रहा। संगीत परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुँचाने में उनकी भूमिका ऐतिहासिक है।

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डब्ल्यू. सी. बनर्जी (जन्म: 29 दिसंबर 1844)
जन्म स्थान: कोलकाता, पश्चिम बंगाल, भारत
डब्ल्यू. सी. बनर्जी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रथम अध्यक्ष थे। वे एक प्रतिष्ठित वकील और स्वतंत्रता आंदोलन के शुरुआती विचारकों में शामिल थे।
उन्होंने संवैधानिक तरीकों से भारतीयों के अधिकारों की आवाज़ उठाई। भारतीय राजनीति में संगठित राष्ट्रीय चेतना विकसित करने में उनका योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है।

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गिरिधर शर्मा चतुर्वेदी (जन्म: 29 दिसंबर 1881)
जन्म स्थान: उत्तर प्रदेश, भारत
गिरिधर शर्मा चतुर्वेदी हिन्दी साहित्य के प्रतिष्ठित लेखक और चिंतक थे। उन्होंने सामाजिक यथार्थ, नैतिक मूल्यों और सांस्कृतिक विषयों पर लेखन किया।
उनकी रचनाएँ साहित्य को समाज से जोड़ने का कार्य करती हैं। हिन्दी गद्य और आलोचना के क्षेत्र में उनका योगदान उल्लेखनीय है।

🔢 आज का अंक राशिफल, जानें मूलांक 1 से 9 तक का भाग्य, करियर, धन और भविष्य

पंडित सुधीर तिवारी (अंतिम बाबा) द्वारा प्रस्तुत


अंक ज्योतिष के अनुसार व्यक्ति की जन्म तिथि उसके स्वभाव, सोच, कर्म और भविष्य की दिशा तय करती है। जिस प्रकार नाम से राशि निकलती है, उसी तरह जन्म तारीख को इकाई अंक तक जोड़कर जो संख्या प्राप्त होती है, वही आपका मूलांक कहलाता है।
उदाहरण के लिए – 8, 17 और 29 तारीख को जन्मे जातकों का मूलांक 8 होता है।
आइए जानते हैं 29 दिसंबर 2025 का मूलांक 1 से 9 तक का विस्तृत अंक राशिफल, जिसमें शामिल है –
✔ करियर और व्यवसाय
✔ शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षा
✔ कला, संगीत व रचनात्मक क्षेत्र
✔ राजनीति और प्रशासन
✔ आर्थिक स्थिति
✔ शुभ रंग, शुभ अंक
✔ पूज्य देवी-देवता

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🔴 मूलांक 1 (सूर्य)
आज का दिन जिम्मेदारी और निर्णयों का है।
करियर / व्यवसाय: नेतृत्व से जुड़े कार्यों में सफलता मिलेगी, लेकिन जल्दबाज़ी से बचें।
शिक्षा: प्रतियोगी छात्रों को धैर्य से पढ़ाई करनी होगी।
कला / संगीत: रचनात्मकता में ठहराव के बाद नई प्रेरणा मिलेगी।
राजनीति / प्रशासन: वरिष्ठों से सहयोग मिलेगा।
आर्थिक स्थिति: खर्च सोच-समझकर करें।
शुभ रंग: लाल
शुभ अंक: 1
पूजा करें: सूर्य देव की

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🟠 मूलांक 2 (चंद्र)
भावनाएं हावी रहेंगी, संतुलन जरूरी है।
करियर: टीमवर्क से लाभ मिलेगा।
शिक्षा: मन भटकेगा, ध्यान साधना जरूरी।
कला / संगीत: भावनात्मक अभिव्यक्ति शानदार रहेगी।
राजनीति: पर्दे के पीछे काम करने से लाभ।
आर्थिक स्थिति: सामान्य, निवेश टालें।
शुभ रंग: सफेद
शुभ अंक: 2
पूजा करें: मां दुर्गा

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🟡 मूलांक 3 (गुरु)
बुद्धि और सलाह से काम बनेगा।
करियर: निर्णय सोच-समझकर लें।
शिक्षा: शिक्षक और मार्गदर्शक से लाभ।
कला: लेखन, भाषण में सफलता।
राजनीति: मान-सम्मान बढ़ेगा।
आर्थिक स्थिति: जोखिम से बचें।
शुभ रंग: पीला
शुभ अंक: 3
पूजा करें: भगवान विष्णु

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🟢 मूलांक 4 (राहु)
मेहनत अधिक, फल धीरे-धीरे मिलेगा।
करियर: तकनीकी और प्रबंधन कार्यों में लाभ।
शिक्षा: ध्यान भटक सकता है।
कला: धैर्य से आगे बढ़ें।
प्रशासन: नियमों का पालन जरूरी।
आर्थिक स्थिति: खर्च नियंत्रण में रखें।
शुभ रंग: नीला
शुभ अंक: 4
पूजा करें: गणेश जी

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🔵 मूलांक 5 (बुध)
भागदौड़ और नई संभावनाओं का दिन।
करियर: संचार और व्यापार में लाभ।
शिक्षा: नए विषय सीखने का योग।
कला: मीडिया, लेखन, संगीत में प्रगति।
राजनीति: जनसंपर्क मजबूत होगा।
आर्थिक स्थिति: आय-व्यय संतुलित रखें।
शुभ रंग: हरा
शुभ अंक: 5
पूजा करें: भगवान गणेश

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🟣 मूलांक 6 (शुक्र)
रिश्तों और सुख-सुविधाओं का दिन।
करियर: कला, फैशन, होटल उद्योग में लाभ।
शिक्षा: क्रिएटिव स्टूडेंट्स को सफलता।
कला / संगीत: बेहतरीन दिन।
राजनीति: जनसमर्थन मिलेगा।
आर्थिक स्थिति: खर्च बढ़ सकता है।
शुभ रंग: गुलाबी
शुभ अंक: 6
पूजा करें: मां लक्ष्मी

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मूलांक 7 (केतु)
आत्ममंथन और एकांत का दिन।
करियर: रिसर्च और आध्यात्मिक क्षेत्रों में लाभ।
शिक्षा: गहरी पढ़ाई के लिए श्रेष्ठ समय।
कला: साधना से जुड़ा काम करें।
राजनीति: बयानबाज़ी से बचें।
आर्थिक स्थिति: स्थिर।
शुभ रंग: बैंगनी
शुभ अंक: 7
पूजा करें: भगवान शिव

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मूलांक 8 (शनि)
जिम्मेदारियां बढ़ेंगी, धैर्य जरूरी।
करियर: प्रशासन और श्रम से जुड़े काम सफल।
शिक्षा: अनुशासन से ही सफलता।
कला: संघर्ष के बाद पहचान।
राजनीति: दबाव के बावजूद प्रभाव बना रहेगा।
आर्थिक स्थिति: देरी से लाभ।
शुभ रंग: काला
शुभ अंक: 8
पूजा करें: शनिदेव

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🔴 मूलांक 9 (मंगल)
ऊर्जा और कार्यसिद्धि का दिन।
करियर: अधूरे काम पूरे होंगे।
शिक्षा: प्रतियोगी छात्रों के लिए अच्छा।
कला: मंच और प्रदर्शन से लाभ।
राजनीति: साहसिक निर्णय फायदेमंद।
आर्थिक स्थिति: धन आगमन के योग।
शुभ रंग: केसरिया
शुभ अंक: 9
पूजा करें: हनुमान जी

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📌 विशेष सूचना– यह अंक राशिफल पंडित सुधीर तिवारी (अंतिम बाबा) द्वारा सामान्य गणना पर आधारित है। यह किसी राष्ट्र या परंपरा द्वारा प्रमाणित नहीं है। अपनी व्यक्तिगत जन्मकुंडली अवश्य किसी योग्य विशेषज्ञ से दिखाएं।

जब एक ही तारीख़ ने युद्ध, विज्ञान, राजनीति और मानव त्रासदी की अमिट कहानियाँ लिख दीं

29 दिसंबर का इतिहास: जब एक ही तारीख़ ने युद्ध, विज्ञान, राजनीति और मानव त्रासदी की अमिट कहानियाँ लिख दीं

इतिहास केवल तिथियों का संग्रह नहीं होता, बल्कि वह मानव सभ्यता की स्मृति होता है। 29 दिसंबर ऐसी ही एक तारीख है, जिसने विश्व राजनीति, प्राकृतिक आपदाओं, खेल, विज्ञान और सामाजिक परिवर्तन की कई गहरी छापें छोड़ी हैं। आइए जानते हैं इस दिन घटी उन महत्वपूर्ण घटनाओं के बारे में, जिन्होंने दुनिया की दिशा और सोच को प्रभावित किया।

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2012 – पेशावर के पास आतंकवादी हमला
29 दिसंबर 2012 को पाकिस्तान के पेशावर के समीप आतंकवादियों द्वारा किया गया हमला देश की सुरक्षा व्यवस्था के लिए एक बड़ा झटका था। इस हमले में 21 सुरक्षाकर्मियों की जान चली गई। यह घटना दक्षिण एशिया में बढ़ते आतंकवाद, कट्टरपंथ और आंतरिक अस्थिरता का प्रतीक बनी। इस हमले ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आतंकवाद के विरुद्ध साझा रणनीति की आवश्यकता को और प्रबल किया।

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2008 – प्रसिद्ध चित्रकार मंजीत बाबा का निधन
भारतीय कला जगत के लिए 29 दिसंबर 2008 एक दुखद दिन था। प्रसिद्ध चित्रकार मंजीत बाबा का निधन हो गया। उनकी कलाकृतियाँ सामाजिक यथार्थ, मानवीय संवेदना और सांस्कृतिक चेतना की जीवंत अभिव्यक्ति थीं। उन्होंने समकालीन भारतीय कला को नई दिशा दी और युवा कलाकारों के लिए प्रेरणा बने।

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2006 – चीन का राष्ट्रीय रक्षा श्वेत पत्र
29 दिसंबर 2006 को चीन ने राष्ट्रीय रक्षा पर श्वेत पत्र जारी किया। यह दस्तावेज़ उसकी सैन्य नीति, रणनीतिक सोच और वैश्विक भूमिका को स्पष्ट करने वाला था। इस श्वेत पत्र ने एशिया-प्रशांत क्षेत्र में शक्ति संतुलन, सुरक्षा नीति और सैन्य पारदर्शिता पर अंतरराष्ट्रीय बहस को जन्म दिया।
2004 – इंडोनेशिया में सुनामी का कहर
29 दिसंबर 2004 तक हिंद महासागर में आई विनाशकारी सुनामी के कारण इंडोनेशिया में मृतकों की संख्या 60,000 तक पहुँच चुकी थी। यह प्राकृतिक आपदा आधुनिक इतिहास की सबसे भयावह त्रासदियों में गिनी जाती है। इस घटना ने आपदा प्रबंधन, वैश्विक मानवीय सहायता और तटीय सुरक्षा प्रणालियों की कमियों को उजागर किया।

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2002 – पाकिस्तान पर्यटकों को भारत भ्रमण की अनुमति
भारत-पाक संबंधों के इतिहास में 29 दिसंबर 2002 एक सकारात्मक संकेत लेकर आया। पाकिस्तान ने अपने नागरिकों को भारत के तीन शहरों में घूमने की अनुमति दी। यह कदम दोनों देशों के बीच तनाव के बावजूद लोगों-से-लोगों के संपर्क बढ़ाने की दिशा में एक छोटा लेकिन महत्वपूर्ण प्रयास था।
1998 – अमेरिकी वैज्ञानिक रेगर स्क्रेबर का निधन
29 दिसंबर 1998 को रेगर स्क्रेबर, जो परमाणु बम निर्माण से जुड़े शुरुआती अमेरिकी वैज्ञानिकों में शामिल थे, का निधन हुआ। उनका जीवन विज्ञान की शक्ति और उसकी नैतिक जिम्मेदारियों पर प्रश्नचिह्न लगाता है। वे उस दौर के साक्षी थे जब विज्ञान ने मानवता को अभूतपूर्व शक्ति दी, लेकिन भारी जोखिम भी।

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1996 – नाटो के विरुद्ध रूस-चीन सहमति
शीत युद्ध के बाद की वैश्विक राजनीति में 29 दिसंबर 1996 महत्वपूर्ण रहा। रूस और चीन ने नाटो के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने के लिए सहयोग पर सहमति जताई। यह घटना बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था की नींव को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम थी।
1989 – वाक्लाव हाबेल का ऐतिहासिक चुनाव
29 दिसंबर 1989 को वाक्लाव हाबेल चेकोस्लोवाकिया के राष्ट्रपति चुने गए। वे 1948 के बाद पहले ग़ैर-साम्यवादी राष्ट्रपति थे। यह घटना ‘वेलवेट रिवोल्यूशन’ की परिणति थी और पूर्वी यूरोप में लोकतंत्र की वापसी का प्रतीक बनी।

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1988 – ऑस्ट्रेलिया में डाक संग्रहालय बंद
ऑस्ट्रेलिया में विक्टोरियाई पोस्ट ऑफिस संग्रहालय का 29 दिसंबर 1988 को बंद होना सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण पर बहस का कारण बना। यह संग्रहालय डाक व्यवस्था के इतिहास और संचार क्रांति की कहानी कहता था।
1988 – सिद्धार्थनगर ज़िले का गठन
उत्तर प्रदेश में सिद्धार्थनगर ज़िले का गठन बस्ती ज़िले के उत्तरी भाग को अलग करके किया गया। यह प्रशासनिक निर्णय क्षेत्रीय विकास, बेहतर शासन और स्थानीय पहचान को सशक्त करने के उद्देश्य से लिया गया था।

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1985 – श्रीलंका में भारतीयों को नागरिकता
29 दिसंबर 1985 को श्रीलंका सरकार ने 43,000 भारतीय मूल के लोगों को नागरिकता प्रदान की। यह निर्णय दशकों से चले आ रहे नागरिकता विवाद को सुलझाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम था और मानवाधिकारों की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना गया।
1984 – कांग्रेस की ऐतिहासिक चुनावी जीत
1984 के आम चुनावों में कांग्रेस ने स्वतंत्र भारत के इतिहास का सबसे बड़ा बहुमत हासिल किया। इसी चुनाव में तेलुगु देशम पार्टी 28 सीटें जीतकर सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी बनी, जिसने क्षेत्रीय राजनीति के उभार को दर्शाया।

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1983 – सुनील गावस्कर की ऐतिहासिक पारी
भारतीय क्रिकेट के स्वर्णिम पलों में 29 दिसंबर 1983 का नाम दर्ज है। सुनील गावस्कर ने वेस्टइंडीज के खिलाफ 236 रन की यादगार टेस्ट पारी खेली, जिसने उन्हें विश्व क्रिकेट के महान बल्लेबाजों में स्थापित किया।
1980 – अलेक्सी कोसिगिन का निधन
सोवियत संघ के पूर्व प्रधानमंत्री अलेक्सी कोसिगिन का 29 दिसंबर 1980 को निधन हुआ। वे सोवियत आर्थिक सुधारों और प्रशासनिक नीति के एक महत्वपूर्ण स्तंभ माने जाते थे।

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1978 – स्पेन का नया संविधान
29 दिसंबर 1978 को स्पेन का संविधान लागू हुआ, जिसने देश को तानाशाही से लोकतंत्र की ओर अग्रसर किया। यह संविधान नागरिक अधिकारों, संवैधानिक राजशाही और आधुनिक स्पेन की नींव बना।
1977 – मुंबई में ड्राइव-इन थिएटर
बंबई (अब मुंबई) में विश्व का सबसे बड़ा ओपन-एयर ड्राइव-इन थिएटर 29 दिसंबर 1977 को खुला। यह शहरी मनोरंजन संस्कृति में एक अनोखा प्रयोग था।

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1975 – ब्रिटेन में समान अधिकार कानून
29 दिसंबर 1975 को ब्रिटेन में महिला-पुरुष समान अधिकार कानून लागू हुआ। यह लैंगिक समानता की दिशा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर था।
1972 – विमान दुर्घटना और कोलकाता मेट्रो
एक ओर अमेरिका के फ्लोरिडा में ईस्टर्न एयरलाइंस त्रिस्टार विमान दुर्घटना में 101 लोगों की मृत्यु हुई, वहीं दूसरी ओर भारत में कोलकाता मेट्रो रेल परियोजना का कार्य शुरू हुआ—एक त्रासदी और एक प्रगति, दोनों का संगम।

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1911 – सुन यात-सेन और मंगोलिया
29 दिसंबर 1911 को सुन यात-सेन चीन गणराज्य के राष्ट्रपति बने और मंगोलिया किंग वंश के शासन से मुक्त हुआ। यह एशिया के राजनीतिक इतिहास में निर्णायक मोड़ था।
1530 – हुमायूँ का उत्तराधिकार
मुग़ल सम्राट बाबर के निधन के बाद 29 दिसंबर 1530 को हुमायूँ उसका उत्तराधिकारी बना। यह मुग़ल साम्राज्य के भविष्य की दिशा तय करने वाला क्षण था।

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निष्कर्ष– 29 दिसंबर की घटनाएँ यह सिद्ध करती हैं कि इतिहास केवल अतीत नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य को समझने की कुंजी है। यह तारीख़ मानव संघर्ष, उपलब्धि और परिवर्तन की जीवंत मिसाल है।

ग्रामीण अभियंत्रण विभाग के एकाउंटेंट ओम प्रकाश राय का हृदय गति रुकने से निधन, शोक की लहर

बलिया (राष्ट्र की परम्परा)। ग्रामीण अभियंत्रण विभाग बलिया में डिविजनल एकाउंटेंट पद पर कार्यरत ओम प्रकाश राय का रविवार शाम हृदय गति रुकने से निधन हो गया। उनके आकस्मिक निधन की सूचना मिलते ही विभागीय अधिकारियों, कर्मचारियों तथा पैतृक गांव नरही सहित पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई।
ओम प्रकाश राय नरही गांव के निवासी थे और अपने सरल स्वभाव, ईमानदार कार्यशैली तथा मिलनसार व्यक्तित्व के लिए पहचाने जाते थे। प्राप्त जानकारी के अनुसार, रविवार को वह अपने पैतृक गांव नरही स्थित आवास पर पहुंचे थे। शाम के समय अचानक उन्हें घबराहट महसूस हुई। परिजन उन्हें तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र नरही ले गए, जहां चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार शुरू किया, लेकिन इलाज के दौरान ही उनकी हृदय गति रुक गई और चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
निधन की खबर मिलते ही परिजनों में कोहराम मच गया और घर में शोक का माहौल व्याप्त हो गया। वहीं ग्रामीण अभियंत्रण विभाग बलिया के अधिकारी और कर्मचारी भी इस दुखद समाचार से स्तब्ध रह गए। सहकर्मियों ने उन्हें एक कर्मठ, अनुशासित और जिम्मेदार अधिकारी के रूप में याद किया, जिनकी विभागीय कार्यों में अहम भूमिका रही।
निधन की सूचना पर बड़ी संख्या में ग्रामीण, रिश्तेदार, परिचित और शुभचिंतक उनके आवास पर पहुंचकर शोक संवेदना व्यक्त कर रहे हैं। क्षेत्र के गणमान्य लोगों ने उनके असामयिक निधन को समाज और विभाग के लिए अपूरणीय क्षति बताया है। सभी ने दिवंगत आत्मा की शांति तथा शोक संतप्त परिवार को संबल प्रदान करने की प्रार्थना की।
परिजनों के अनुसार, ओम प्रकाश राय का अंतिम संस्कार सोमवार को उनके पैतृक गांव नरही में किया जाएगा, जिसमें बड़ी संख्या में ग्रामीणों, शुभचिंतकों और विभागीय कर्मचारियों के शामिल होने की संभावना है। उनके निधन से परिवार, विभाग और समाज ने एक सज्जन और जिम्मेदार व्यक्ति को खो दिया है।