Thursday, June 25, 2026
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अवैध गतिविधियों पर शिकंजा, अपराधियों में हड़कंप

देवरिया पुलिस का ‘मार्निंग वॉकर चेकिंग’ अभियान: 377 लोग और 229 वाहन जांचे गए, सुरक्षा व्यवस्था को मिली मजबूती

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। जनपद में शांति, सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ करने के उद्देश्य से देवरिया पुलिस ने सुबह एक विशेष ‘मार्निंग वॉकर चेकिंग अभियान’ चलाया। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाना, संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखना और आम नागरिकों के बीच सुरक्षा का भरोसा कायम करना रहा।

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पुलिस अधीक्षक संजीव सुमन के निर्देशन में यह अभियान प्रातः 5 बजे से 8 बजे तक संचालित किया गया। इस दौरान जिले के सभी थाना प्रभारी और थानाध्यक्ष अपने-अपने थाना क्षेत्रों में सक्रिय रहे। मॉर्निंग वॉक पर निकले नागरिकों से पुलिस अधिकारियों ने सीधे संवाद किया, उनकी समस्याएं सुनीं और मित्र पुलिसिंग की भावना को मजबूत किया।

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अभियान के अंतर्गत संदिग्ध व्यक्तियों और वाहनों की सघन जांच की गई। चोरी की आशंका वाली गाड़ियों की जांच, तीन सवारी चलने वाले वाहनों पर कार्रवाई, मॉडिफाइड साइलेंसर लगे दोपहिया वाहनों का चालान, नाबालिगों द्वारा वाहन चलाने पर रोक तथा अवैध गतिविधियों पर विशेष निगरानी रखी गई। इसके साथ ही अवैध असलहा और मादक पदार्थों की रोकथाम के लिए तलाशी व पूछताछ भी की गई।

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पुलिस आंकड़ों के अनुसार, जनपद के 20 प्रमुख स्थानों पर चेकिंग करते हुए कुल 377 व्यक्तियों और 229 वाहनों की जांच की गई। इस पहल से स्थानीय नागरिकों और मॉर्निंग वॉकरों में सुरक्षा को लेकर सकारात्मक संदेश गया, जिसकी उन्होंने खुले तौर पर सराहना की।
देवरिया पुलिस ने स्पष्ट किया है कि जनता की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और ऐसे सघन चेकिंग अभियान आगे भी नियमित रूप से जारी रहेंगे।

यूथ कांग्रेस झारखंड को मिला नया नेतृत्व

कुमार गौरव उर्फ सोनू सिंह बने झारखंड प्रदेश यूथ कांग्रेस अध्यक्ष, संगठन में नई ऊर्जा का संचार


रांची (राष्ट्र की परम्परा)।झारखंड की राजनीति में युवाओं की भागीदारी को मजबूती देने की दिशा में इंडियन यूथ कांग्रेस ने बड़ा कदम उठाया है। संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु चिब ने कुमार गौरव उर्फ सोनू सिंह को झारखंड प्रदेश यूथ कांग्रेस का नया प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया है। यह नियुक्ति तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई है। उनके साथ संगठनात्मक ढांचे को और सशक्त करने के उद्देश्य से कुलदीप कुमार रवि को वरिष्ठ उपाध्यक्ष तथा आशुतोष कुमार को प्रदेश उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

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यूथ कांग्रेस द्वारा जारी आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि यह निर्णय संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने और प्रदेश के युवाओं को सक्रिय राजनीति से जोड़ने के उद्देश्य से लिया गया है। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि कुमार गौरव उर्फ सोनू सिंह के नेतृत्व में यूथ कांग्रेस झारखंड में नई ऊर्जा, नई सोच और नए संकल्प के साथ आगे बढ़ेगी।

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नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष कुमार गौरव उर्फ सोनू सिंह लंबे समय से संगठनात्मक कार्यों में सक्रिय रहे हैं और युवाओं के बीच उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है। उनकी नियुक्ति को कांग्रेस के भविष्य की राजनीति के लिहाज से अहम माना जा रहा है। पार्टी को उम्मीद है कि वे मल्लिकार्जुन खड़गे, सोनिया गांधी और राहुल गांधी के नेतृत्व में संगठन को और अधिक धार देंगे तथा युवाओं की आवाज को मजबूती से आगे बढ़ाएंगे।

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इस अवसर पर कांग्रेस के युवा नेता एवं समाजसेवी इंदरजीत सिंह ने नई टीम को बधाई देते हुए कहा कि यह नियुक्ति झारखंड में कांग्रेस संगठन को नई दिशा देगी। उन्होंने विश्वास जताया कि युवा नेतृत्व के हाथों में संगठन आने से बेरोजगारी, शिक्षा, महंगाई और सामाजिक न्याय जैसे मुद्दों पर मजबूती से संघर्ष किया जाएगा।
झारखंड प्रदेश यूथ कांग्रेस में हुए इस बदलाव को आगामी राजनीतिक रणनीति और युवा केंद्रित आंदोलनों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

गड्ढों से जर्जर फुलवरिया–रामनगर–सिसवा राजा मार्ग, हर सफर जानलेवा

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। सदर ब्लॉक अंतर्गत फुलवरिया–रामनगर–सिसवा राजा मार्ग की हालत बद से बदतर होती जा रही है। जगह-जगह गहरे गड्ढे, उखड़ी गिट्टियां और धंसी हुई सड़क इस मार्ग को हादसों का रास्ता बना चुकी हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि अब इस सड़क पर हर सफर जान जोखिम में डालने जैसा हो गया है।

बरसात के बाद हालात और भयावह

ग्रामीणों के अनुसार, बरसात के बाद सड़क की स्थिति और भी खतरनाक हो गई है। दोपहिया वाहन फिसल रहे हैं, साइकिल सवार गिरकर घायल हो रहे हैं और चारपहिया वाहन पलटने की घटनाएं सामने आ रही हैं। रात के समय स्ट्रीट लाइट की कमी के कारण गड्ढे दिखाई नहीं देते, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

इलाके की जीवनरेखा बनी सड़क

यह सड़क केवल गांवों को जोड़ने का मार्ग नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की जीवनरेखा है। इसी रास्ते से

• स्कूली बच्चे रोजाना विद्यालय जाते हैं

• मरीजों को अस्पताल पहुंचाया जाता है

• ग्रामीण बाजार और दैनिक जरूरतों के लिए आवाजाही करते हैं

ग्रामीणों का कहना है कि एंबुलेंस और आपातकालीन वाहन भी इस सड़क पर हिचकोले खाते हुए चलते हैं, जिससे मरीजों की जान पर खतरा बना रहता है।

मरम्मत को लेकर सिर्फ आश्वासन

स्थानीय लोगों का आरोप है कि सड़क की मरम्मत के लिए कई बार संबंधित विभाग और जनप्रतिनिधियों को अवगत कराया गया, लेकिन अब तक सिर्फ आश्वासन ही मिले हैं। कोई ठोस कार्रवाई न होने से लोगों में भारी नाराजगी है।

स्थानीय ग्रामीण विपिन सिंह, घनश्याम सिंह, सत्येंद्र पटेल, सर्वेश पटेल और रामनरेश यादव सहित अन्य लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द मरम्मत कार्य शुरू नहीं हुआ तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे।

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बड़े हादसे का इंतजार कर रहा प्रशासन?

ग्रामीणों का कहना है कि यह सड़क किसी बड़ी दुर्घटना को न्योता दे रही है। सवाल यह उठ रहा है कि क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे के बाद ही जागेगा? क्षेत्रवासियों ने मांग की है कि

• तत्काल गड्ढों को भरा जाए

• सड़क की मरम्मत कराई जाए

• स्थायी समाधान किया जाए

ताकि आमजन को राहत मिल सके और हर सफर सुरक्षित बन सके।

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सीतापुर में नवविवाहित कपल की संदिग्ध मौत: 22 दिन पहले लव मैरिज, एक ही पेड़ से लटके मिले पति-पत्नी के शव

सीतापुर (राष्ट्र की परम्परा)। उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। हरगांव थाना क्षेत्र के अनिया कलां गांव में स्थित महामाई मंदिर के पास रविवार सुबह नवविवाहित पति-पत्नी के शव एक ही पेड़ से लटके मिले। दोनों ने 22 दिन पहले इसी मंदिर में प्रेम विवाह किया था।

घटना के बाद गांव में शोक और सनसनी का माहौल है। पुलिस ने मामले को संदिग्ध मानते हुए जांच शुरू कर दी है और हत्या की आशंका से भी इनकार नहीं किया है।

तीन साल का प्रेम, परिवार के खिलाफ शादी

मृतकों की पहचान खुशीराम (22) और मोहिनी (19) के रूप में हुई है, जो आपस में पट्टीदार (चचेरे रिश्ते) थे। परिजनों के अनुसार, दोनों के बीच पिछले तीन वर्षों से प्रेम संबंध था, लेकिन रिश्तेदारी के कारण शादी को सामाजिक स्वीकृति नहीं मिल पा रही थी।

इसके बावजूद दोनों ने 6 दिसंबर को महामाई मंदिर में गुपचुप तरीके से शादी कर ली। बाद में जानकारी मिलने पर दोनों परिवारों ने मजबूरी में इस विवाह को स्वीकार कर लिया था।

सुबह घर से निकले, फिर नहीं लौटे

परिजनों के मुताबिक, रविवार तड़के करीब 5 बजे खुशीराम और मोहिनी घर से निकले। जब काफी देर तक दोनों वापस नहीं लौटे तो खोजबीन शुरू की गई। कुछ ही समय बाद घर से करीब एक किलोमीटर दूर उसी पेड़ पर दोनों के शव मिले, जिसके नीचे उन्होंने सात फेरे लिए थे।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार

सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। इंस्पेक्टर बलवंत शाही ने बताया कि फिलहाल परिजनों की ओर से किसी पर आरोप नहीं लगाया गया है और हर पहलू से जांच की जा रही है।

शादी की बधाई देने वाले बने अंतिम संस्कार के साक्षी

परिजनों ने बताया कि शादी के बाद रिश्तेदार दूर-दराज से बधाई देने आए थे। अभी दुल्हन के हाथों की मेंहदी भी नहीं सूखी थी कि घर में मातम पसर गया। जो लोग कुछ दिन पहले शादी की खुशियां मना रहे थे, वही अब अंतिम संस्कार में शामिल हुए।

फिलहाल पुलिस सभी बिंदुओं पर जांच कर रही है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही स्थिति साफ हो सकेगी।

पर्यावरण संकट के खिलाफ सड़क पर उतरे संगठन, मानव श्रृंखला बनाकर जताया विरोध

हिमालय–अरावली बचाओ अभियान: रांची में वामपंथी संगठनों ने बनाई मानव श्रृंखला, सुप्रीम कोर्ट की नई परिभाषा का विरोध

रांची (राष्ट्र की परम्परा)।देश के पर्वतीय और वन क्षेत्रों को बचाने की मांग को लेकर रांची के अल्बर्ट एक्का चौक पर सोमवार को वामपंथी संगठनों ने जोरदार प्रदर्शन किया। भाकपा (माले), झारखंड जनाधिकार महासभा, आइसा, ऐपवा, आदिवासी संघर्ष मोर्चा समेत कई सामाजिक संगठनों ने “अरावली बचाओ, हिमालय बचाओ, पर्यावरण बचाओ” के नारों के साथ मानव श्रृंखला बनाकर केंद्र सरकार और सुप्रीम कोर्ट की हालिया सिफारिशों का विरोध दर्ज कराया।
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा अरावली पर्वतमाला को केवल 100 मीटर ऊंचाई के आधार पर परिभाषित करने से पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंचने का खतरा है। संगठनों का कहना है कि इस नई परिभाषा से 100 मीटर से कम ऊंचाई वाली पहाड़ियों पर खनन और बड़े निर्माण कार्यों के लिए रास्ता खुल जाएगा, जिससे जल, जंगल और जमीन पर सीधा हमला होगा।

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नेताओं ने कहा कि अरावली और हिमालय केवल पहाड़ नहीं, बल्कि देश की जलवायु संतुलन की रीढ़ हैं। इन क्षेत्रों में खनन, जंगलों की कटाई और औद्योगिक परियोजनाओं से न सिर्फ स्थानीय आदिवासी समुदायों की आजीविका प्रभावित होगी, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी गंभीर संकट पैदा होगा। वक्ताओं ने दिल्ली जैसे महानगरों में बढ़ते प्रदूषण का हवाला देते हुए कहा कि जंगलों के विनाश का सीधा असर देशभर में महसूस किया जा रहा है।

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प्रदर्शन के दौरान झारखंड के बड़कागांव से लेकर सारंडा तक हो रही जंगल कटाई का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। संगठनों ने आरोप लगाया कि सरकार पूंजीपतियों के हित में प्राकृतिक संसाधनों का दोहन कर रही है। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि नीतियों में बदलाव नहीं हुआ तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा और सड़कों पर उतरकर जनआंदोलन तेज किया जाएगा।
इस मौके पर मनोज भक्त, सिवेंदु सेन, नंदिता भट्टाचार्य, आरएन सिंह, अलमा खलखो, एती तिर्की, एलिना होरो सहित बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता और नागरिक मौजूद रहे।

शादी के कुछ दिनों बाद छाया मातम: पहले पत्नी की मौत, दो दिन बाद पति ने भी की खुदकुशी

बंगलूरू (राष्ट्र की परम्परा)। कर्नाटक की राजधानी बंगलूरू से एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जहां एक नवविवाहित जोड़े की दो दिनों के अंतराल में मौत हो गई। जानकारी के मुताबिक सूरज शिवन्ना और गणवी की शादी 29 अक्टूबर को बंगलूरू में हुई थी। शादी के बाद दोनों श्रीलंका हनीमून पर गए थे, लेकिन आपसी विवाद के चलते वे बीच में ही लौट आए।

ससुराल में प्रताड़ना का आरोप

गणवी के परिजनों का आरोप है कि शादी के बाद ससुराल पहुंचने पर उसे स्वीकार नहीं किया गया, उसके साथ अपमानजनक व्यवहार हुआ और दहेज को लेकर मानसिक प्रताड़ना दी गई। इसके बाद गणवी मायके लौट आई।

मंगलवार को उसकी तबीयत अचानक बिगड़ गई, जिसके बाद उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों ने उसकी स्थिति गंभीर बताई और गुरुवार को उसकी मौत हो गई।

नागपुर में पति की भी मौत

पत्नी की मौत और परिजनों द्वारा लगाए गए आरोपों के बाद सूरज शिवन्ना अपनी मां के साथ बंगलूरू से करीब 1000 किलोमीटर दूर नागपुर पहुंचे थे। इसके दो दिन बाद सूरज की होटल के कमरे में मौत हो गई। इसी घटना में उनकी मां ने भी खुद को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की, जिन्हें गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

परिजनों का प्रदर्शन, पुलिस जांच जारी

गणवी की मौत के बाद उसके परिजनों ने सूरज और उसके परिवार पर गंभीर आरोप लगाते हुए दहेज उत्पीड़न और उकसावे का मामला दर्ज कराया है। बंगलूरू में ससुराल के बाहर प्रदर्शन कर गिरफ्तारी की मांग भी की गई।

फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है, दोनों परिवारों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं और सभी पहलुओं की गहराई से पड़ताल की जा रही है।

आज असम दौरे पर अमित शाह, विकास परियोजनाओं का करेंगे उद्घाटन

असम (राष्ट्र की परम्परा)। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सोमवार को एक दिवसीय असम दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वे राज्य में करोड़ों रुपये की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन करेंगे और एक जनसभा को संबोधित भी करेंगे। गृह मंत्री के इस दौरे को असम के विकास और केंद्र–राज्य समन्वय के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

कोहरे के कारण टला था दौरा

अमित शाह को रविवार रात अहमदाबाद से गुवाहाटी पहुंचना था, लेकिन घने कोहरे के कारण उनकी फ्लाइट उड़ान नहीं भर सकी। इसके चलते उनका दौरा एक दिन के लिए टाल दिया गया और अब वे सोमवार को असम पहुंचेंगे।

विकास परियोजनाओं पर रहेगा फोकस

असम दौरे के दौरान गृह मंत्री राज्य में चल रही और प्रस्तावित बुनियादी ढांचा व विकास योजनाओं की समीक्षा करेंगे। इसके साथ ही वे कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं का उद्घाटन कर जनता को उनकी सौगात देंगे।

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जनसभा को करेंगे संबोधित

अपने दौरे के दौरान अमित शाह एक बड़ी जनसभा को भी संबोधित करेंगे, जहां वे केंद्र सरकार की नीतियों, असम के विकास कार्यों और भविष्य की योजनाओं को लेकर अपना संदेश देंगे।

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तेज रफ्तार पिकअप की टक्कर से शिक्षक की मौत, जलालीपुर चट्टी पर दर्दनाक सड़क हादसा


सिकंदरपुर /बलिया(राष्ट्र की परम्परा)।रविवार देर रात सिकंदरपुर थाना क्षेत्र के जलालीपुर चट्टी पर एक भीषण सड़क दुर्घटना में बाइक सवार शिक्षक की मौके पर ही मौत हो गई। मनियर की ओर से तेज गति में आ रही पिकअप वाहन ने सामने से जोरदार टक्कर मार दी, जिससे शिक्षक गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे के बाद घटनास्थल पर अफरा-तफरी मच गई और स्थानीय लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई।

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मृतक की पहचान प्राथमिक विद्यालय एकईल नंबर–3 में कार्यरत सहायक अध्यापक राजेश कुमार यादव (45) के रूप में हुई है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, शिक्षक अपनी बाइक से सिकंदरपुर की ओर जा रहे थे, तभी जलालीपुर चट्टी के पास पिकअप वाहन ने अनियंत्रित गति में सामने से टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि वे सड़क पर दूर जा गिरे और बाइक पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई।

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घटना के तुरंत बाद स्थानीय लोगों ने मानवीय संवेदना दिखाते हुए घायल शिक्षक को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सिकंदरपुर पहुंचाया, जहां चिकित्सकों ने प्राथमिक परीक्षण के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। खबर मिलते ही अस्पताल परिसर में शोक की लहर दौड़ गई।
सूचना पर सिकंदरपुर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। दुर्घटना में शामिल पिकअप वाहन को भी जब्त कर लिया गया है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है और लापरवाही पाए जाने पर चालक के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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राजेश कुमार यादव सिकंदरपुर कस्बे में किराए के मकान में अपने परिवार के साथ रहते थे। उनके परिवार में पत्नी और दो पुत्र हैं। अचानक हुई इस दुर्घटना से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। पत्नी और बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल है।
शिक्षक की मौत की खबर मिलते ही शिक्षा विभाग के अधिकारी, सहकर्मी और शुभचिंतक उनके आवास पर पहुंचकर शोक संवेदना व्यक्त कर रहे हैं। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से तेज रफ्तार वाहनों पर सख्त नियंत्रण की मांग की है। पूरे क्षेत्र में इस हादसे को लेकर गहरा शोक व्याप्त है।

8 घंटे पुलिस हिरासत में रहा बेटा, बाबरी मस्जिद शैली की नींव रखने वाले हुमायूं कबीर ने दी चेतावनी

Murshidabad News: पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में नवगठित जनता उन्नयन पार्टी (JUP) के अध्यक्ष और भरतपुर से विधायक हुमायूं कबीर एक बार फिर विवादों में हैं। उनके बेटे गुलाम नबी आजाद उर्फ सोहेल को एक पुलिसकर्मी पर कथित हमले के आरोप में रविवार (28 दिसंबर 2025) को पुलिस ने हिरासत में लिया था। हालांकि, करीब 8 घंटे बाद उसे रिहा कर दिया गया।

पुलिसकर्मी पर हमले का आरोप

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह घटना मुर्शिदाबाद जिले में स्थित कबीर के आवास पर हुई, जहां तैनात निजी सुरक्षा अधिकारी (PSO) कांस्टेबल जुम्मा खान ने आरोप लगाया कि विधायक के बेटे ने उस पर हमला किया। शिकायत के आधार पर शक्तिपुर पुलिस थाने में मामला दर्ज कर सोहेल को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया।

TMC ने झाड़ा पल्ला

तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने बयान जारी कर कहा कि यह एक संज्ञेय अपराध है और पुलिस ने कानून के तहत कार्रवाई की है। पार्टी ने स्पष्ट किया कि इस पूरे घटनाक्रम से उसका कोई संबंध नहीं है।

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नई पार्टी और पुराना विवाद

गौरतलब है कि तृणमूल कांग्रेस से निलंबन के बाद हुमायूं कबीर ने अपनी नई राजनीतिक पार्टी जनता उन्नयन पार्टी बनाई है। हाल ही में वह उस समय चर्चा में आए थे, जब उन्होंने मुस्लिम बहुल मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद शैली की मस्जिद की आधारशिला रखी थी।

कबीर का दावा है कि इस कार्यक्रम के बाद पुलिस ने उनके आवास को घेर लिया। उन्होंने कहा कि कथित घटना के समय वह घर पर मौजूद नहीं थे।

हुमायूं कबीर के गंभीर आरोप

बरहामपुर में पत्रकारों से बात करते हुए हुमायूं कबीर ने आरोप लगाया कि पुलिस ने तृणमूल कांग्रेस के इशारे पर उनके बेटे को झूठे मामले में फंसाया। उन्होंने कहा,

“मेरे बेटे ने अपने ही घर में एक पुलिसकर्मी के प्रवेश पर आपत्ति जताई, जिससे कानून प्रवर्तन एजेंसियां नाराज हो गईं।”

कबीर ने चेतावनी देते हुए कहा कि राजनीतिक उत्पीड़न के खिलाफ 1 जनवरी को मुर्शिदाबाद में पुलिस अधीक्षक कार्यालय का घेराव किया जाएगा। उन्होंने साफ शब्दों में कहा,
“वे मुझे डरा नहीं सकते, मैं वरिष्ठ अधिकारियों से जवाब मांगूंगा।”

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गर्भपात के बाद नाबालिग की हालत गंभीर, दुष्कर्म का सनसनीखेज मामला उजागर


बरहज/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)बरहज थाना क्षेत्र से मानवता को शर्मसार कर देने वाला एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसमें एक नाबालिग किशोरी के साथ लंबे समय से दुष्कर्म कर उसे गर्भवती बनाए जाने और बाद में गुपचुप तरीके से गर्भपात कराए जाने का आरोप है। गर्भपात के बाद किशोरी की हालत अचानक बिगड़ने पर पूरे मामले का खुलासा हुआ, जिससे क्षेत्र में आक्रोश और चिंता का माहौल है।

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जानकारी के अनुसार, पूरब राम जानकी मार्ग के समीप स्थित एक गांव में रहने वाले एक अधेड़ व्यक्ति ने किशोरी की मानसिक स्थिति का लाभ उठाकर उसके साथ बार-बार अनाचार किया। गर्भ ठहरने के बाद आरोपी ने अपनी पत्नी के सहयोग से किसी निजी चिकित्सालय में किशोरी को भर्ती कराकर गर्भपात करवा दिया। यह पूरा घटनाक्रम परिजनों की जानकारी से बाहर रखा गया।

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घटना उस समय सामने आई जब किशोरी के शरीर से अत्यधिक रक्तस्राव होने लगा और उसकी तबीयत तेजी से बिगड़ने लगी। हालत नाजुक देख परिजन तत्काल उसे चिकित्सक के पास ले गए। उपचार के दौरान किशोरी ने अपने साथ हुए अत्याचार की पूरी आपबीती परिजनों को सुनाई। यह सुनकर परिवार स्तब्ध रह गया।

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इसके बाद परिजन रविवार की सुबह किशोरी को साथ लेकर थाने पहुंचे और लिखित शिकायत देकर आरोपी के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग की। मामले की गंभीरता को देखते हुए विधिक प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और पीड़िता का चिकित्सकीय परीक्षण कराया गया है। घटना ने एक बार फिर नाबालिगों की सुरक्षा और अवैध गर्भपात जैसे संवेदनशील मुद्दों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

मेक्सिको में बड़ा रेल हादसा: ओक्साका में इंटरओशनिक ट्रेन पटरी से उतरी, 13 की मौत, 98 घायल

मेक्सिको (राष्ट्र की परम्परा)। मेक्सिको के ओक्साका राज्य में रविवार (28 दिसंबर) को एक भीषण रेल दुर्घटना सामने आई, जहां इंटरओशनिक ट्रेन के पटरी से उतरने के कारण कम से कम 13 लोगों की मौत हो गई, जबकि 98 यात्री घायल हो गए। हादसे में कई लोगों की हालत गंभीर बताई जा रही है।

न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, मेक्सिको की नौसेना ने बताया कि ट्रेन में कुल 250 लोग सवार थे, जिनमें 9 चालक दल के सदस्य और 241 यात्री शामिल थे। हादसे के बाद 193 यात्रियों को सुरक्षित निकाल लिया गया, जबकि 36 घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

चिवेला और निजांडा के बीच हुआ हादसा

अधिकारियों के मुताबिक यह दुर्घटना ओक्साका राज्य के चिवेला और निजांडा शहरों के बीच हुई। घटना के तुरंत बाद राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया गया और घायलों को नजदीकी अस्पतालों में पहुंचाया गया।

राष्ट्रपति क्लाउडिया शिनबाम का बयान

मेक्सिको की राष्ट्रपति क्लाउडिया शिनबाम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर बताया कि 5 घायलों की हालत गंभीर बनी हुई है। उन्होंने कहा कि मृतकों के परिजनों की सहायता के लिए वरिष्ठ अधिकारियों को मौके पर भेजा गया है।

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जांच शुरू

मेक्सिको की अटॉर्नी जनरल अर्नेस्टिना गोडॉय रामोस ने जानकारी दी कि इस दर्दनाक हादसे की आधिकारिक जांच शुरू कर दी गई है और दुर्घटना के कारणों की पड़ताल की जा रही है।

इंटरओशनिक ट्रेन का महत्व

इंटरओशनिक ट्रेन का उद्घाटन वर्ष 2023 में पूर्व राष्ट्रपति एंड्रेस मैनुअल लोपेज ओब्रेडोर ने किया था। यह ट्रेन इंटरओशनिक कॉरिडोर परियोजना का अहम हिस्सा है, जिसका उद्देश्य पैसिफिक पोर्ट सलीना क्रूज को खाड़ी तट के कोएत्जाकोआल्कोस से जोड़ना है।

यह परियोजना दक्षिणी मेक्सिको में यात्री और माल ढुलाई को बढ़ावा देने के साथ-साथ एक ऐसे रणनीतिक व्यापार गलियारे के रूप में विकसित की जा रही है, जो भविष्य में पनामा नहर के विकल्प के रूप में उभर सके।

पीपा पुल निर्माण में देरी से बढ़ी जनता की मुश्किलें

पीपा पुल निर्माण में देरी से देवारा क्षेत्र की जनता बेहाल, आवागमन बना बड़ी समस्या

बरहज (राष्ट्र की परम्परा)सरयू नदी पर पीपा पुल का निर्माण कार्य समय पर पूरा न होने से देवारा क्षेत्र के लोगों की परेशानियां लगातार बढ़ती जा रही हैं। शासन से बार-बार मांग और काफी मशक्कत के बाद दियारा क्षेत्र के निवासियों के लिए 16 दिसंबर से सरयू नदी पर पीपा पुल लगाने का कार्य शुरू तो किया गया, लेकिन 18 दिन बीत जाने के बावजूद यह कार्य अब तक अधूरा है। इसके चलते देवारा वासियों को रोजमर्रा के आवागमन में गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

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विशुनपुर देवार के ग्राम प्रधान ओमप्रकाश यादव ने बताया कि गांव सहित आसपास के क्षेत्रों से सैकड़ों लोग रोजाना बरहज बाजार और अन्य जनपदों में आवश्यक कार्यों के लिए आते-जाते हैं। वर्तमान में लोगों को नाव के सहारे ही नदी पार करनी पड़ रही है, लेकिन कड़ाके की ठंड के कारण नावों का संचालन काफी देर से शुरू होता है और शाम ढलते ही बंद कर दिया जाता है। इससे मजदूरों, व्यापारियों, छात्रों और बीमार लोगों को भारी दिक्कत हो रही है।

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स्थानीय निवासी विजय कुमार, शिव नारायण और छोटे लाल भारती का कहना है कि रोजमर्रा की जरूरतों के लिए बरहज बाजार और जनपद मुख्यालय आना-जाना मजबूरी है, लेकिन नाव संचालन की सीमित समयावधि के कारण कई बार जरूरी काम अधूरे रह जाते हैं। पीपा पुल का अधर में लटका निर्माण लोगों की नाराजगी बढ़ा रहा है।
इस संबंध में लोक निर्माण विभाग के अभियंता अखिलेश राम ने बताया कि अब तक सरयू नदी में 26 पीपे बांधे जा चुके हैं। नदी का पाट लंबा होने के कारण यह स्पष्ट कहना कठिन है कि पुल से आवागमन कब शुरू हो सकेगा। हालांकि, विभाग द्वारा कार्य को जल्द पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है।

छुट्टा पशुओं के आतंक से प्रशासन से स्थायी समाधान की मांग

छुट्टा पशुओं के आतंक से कुसहरा गांव के किसान त्रस्त, सैकड़ों एकड़ रबी फसल तबाह

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)जंगल कौड़िया विकासखंड के कुसहरा गांव सहित आसपास के करीब दो दर्जन गांवों में छुट्टा पशुओं की समस्या किसानों के लिए गंभीर संकट बन चुकी है। खुलेआम घूम रहे सैकड़ों की संख्या में छुट्टा पशु खेतों में घुसकर रबी की खड़ी फसलों को लगातार नुकसान पहुंचा रहे हैं। इससे किसानों की वर्षों की मेहनत और पूंजी कुछ ही घंटों में बर्बाद हो जा रही है।

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क्षेत्र में गेहूं, जौ, सरसों, आलू, मटर, दलहन और तिलहन जैसी प्रमुख रबी फसलें बड़े पैमाने पर नष्ट हो चुकी हैं। राप्ती और रोहिन नदियों के बीच स्थित तलहटी इलाके में बसे गांवों में पशुओं का दबाव लगातार बढ़ रहा है। किसान बताते हैं कि पशु झुंड बनाकर खेतों में प्रवेश करते हैं और पूरी फसल को रौंद देते हैं। अब तक सैकड़ों एकड़ फसल के बर्बाद होने से किसानों की आर्थिक स्थिति डगमगा गई है।
स्थानीय किसान राम सिंह, विजय सिंह, शंभू गौड़, राकेश गुप्ता, संदलू कनौजिया और रामवृक्ष सदई निषाद का कहना है कि रबी की खेती के लिए उन्हें कर्ज लेना पड़ता है। बीज, खाद, सिंचाई और मजदूरी पर हजारों रुपये खर्च होते हैं, लेकिन फसल कटाई से पहले ही छुट्टा पशु सारी उम्मीदें तोड़ देते हैं। इससे कर्ज चुकाना तो दूर, परिवार का भरण-पोषण भी मुश्किल होता जा रहा है।

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रात के समय हालात और भयावह हो जाते हैं। ठंड और कोहरे के बावजूद किसान पूरी रात खेतों में अलाव जलाकर, टॉर्च और लाठियों के सहारे पहरा देते हैं। इसके बावजूद पशु खेतों में घुस ही जाते हैं। कई परिवारों में बच्चों और बुजुर्गों को भी निगरानी में लगाया जा रहा है, जिससे पढ़ाई और सामान्य जीवन प्रभावित हो रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र बड़ा होने के कारण व्यक्तिगत या सामूहिक स्तर पर फसलों की सुरक्षा संभव नहीं रह गई है। एक खेत से पशु भगाने पर वे दूसरे खेत में घुस जाते हैं। यदि यही स्थिति बनी रही तो खेती किसानों के लिए घाटे का सौदा बन जाएगी।

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किसानों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से मांग की है कि छुट्टा पशुओ की समस्या का स्थायी समाधान किया जाए। गौशालाओं की संख्या और क्षमता बढ़ाई जाए, पशुओं को पकड़कर वहां भेजने की नियमित व्यवस्था हो तथा फसल क्षति का आकलन कर मुआवजा दिया जाए।
समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो जंगल कौड़िया क्षेत्र में किसानों की आजीविका पर गहरा संकट खड़ा हो सकता है।

शिक्षा में असमानता: सपनों पर भारी होती अमीरी-गरीबी की खाई

(शिक्षा डेस्क – राष्ट्र की परम्परा)
शिक्षा को किसी भी समाज की प्रगति और समानता की सबसे सशक्त आधारशिला माना जाता है। यही वह माध्यम है, जो व्यक्ति को उसकी सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि से ऊपर उठकर आगे बढ़ने का अवसर देता है। लेकिन आज भारत में शिक्षा में असमानता एक ऐसी सच्चाई बन चुकी है, जो लाखों बच्चों के सपनों पर अमीरी-गरीबी की भारी दीवार खड़ी कर रही है। सवाल यह नहीं कि शिक्षा उपलब्ध है या नहीं, सवाल यह है कि क्या गुणवत्तापूर्ण शिक्षा हर बच्चे तक समान रूप से पहुंच पा रही है?
अमीर और गरीब की दो अलग दुनिया
आज देश की शिक्षा व्यवस्था दो स्पष्ट हिस्सों में बंटी दिखाई देती है। एक तरफ शहरों के महंगे निजी स्कूल, इंटरनेशनल बोर्ड, स्मार्ट क्लासरूम, एआई आधारित लर्निंग और महंगी कोचिंग सुविधाओं से लैस बच्चे हैं। दूसरी ओर सरकारी स्कूलों और दूरदराज़ के ग्रामीण क्षेत्रों में पढ़ने वाले वे छात्र हैं, जिनके लिए आज भी शिक्षक की नियमित उपस्थिति, साफ कक्षाएं और पाठ्यपुस्तकें एक चुनौती बनी हुई हैं।
शिक्षा में असमानता केवल संसाधनों की नहीं, बल्कि अवसरों की भी असमानता है। जहां संपन्न वर्ग का बच्चा बचपन से प्रतियोगी माहौल में ढल जाता है, वहीं गरीब तबके का छात्र बुनियादी सुविधाओं के अभाव में संघर्ष करता रहता है।
कोरोना काल ने बढ़ाई खाई
कोरोना महामारी ने इस असमानता को और गहरा कर दिया। ऑनलाइन शिक्षा ने जहां आर्थिक रूप से सक्षम परिवारों के बच्चों को निरंतर पढ़ाई से जोड़े रखा, वहीं डिजिटल संसाधनों के अभाव में लाखों गरीब छात्र शिक्षा व्यवस्था से बाहर हो गए। स्मार्टफोन, इंटरनेट कनेक्शन और घर में पढ़ने के अनुकूल वातावरण की कमी ने उन्हें पीछे धकेल दिया।
कई क्षेत्रों में बच्चों को मजबूरी में मजदूरी, घरेलू काम या पारिवारिक जिम्मेदारियां संभालनी पड़ीं। यह स्थिति स्पष्ट रूप से दिखाती है कि डिजिटल डिवाइड भी शिक्षा में असमानता का एक बड़ा कारण बन चुका है।
प्रतियोगी परीक्षाएं और कोचिंग संस्कृति
आज सफलता का पैमाना बन चुकी प्रतियोगी परीक्षाएं भी इस असमानता को बढ़ावा दे रही हैं। महंगी कोचिंग, टेस्ट सीरीज़, पर्सनल मेंटरशिप और ऑनलाइन कोर्स केवल उन्हीं छात्रों की पहुंच में हैं, जो भारी फीस चुका सकते हैं।
प्रतिभा और मेहनत के बावजूद गरीब और ग्रामीण छात्र इस दौड़ में पिछड़ जाते हैं। शिक्षा में असमानता का सबसे खतरनाक रूप यही है, जब योग्यता से अधिक आर्थिक स्थिति सफलता का निर्धारक बन जाए।
सरकारी योजनाएं: प्रयास लेकिन पर्याप्त नहीं
सरकार ने शिक्षा में समानता लाने के लिए छात्रवृत्ति, मध्याह्न भोजन योजना, मुफ्त किताबें, यूनिफॉर्म और डिजिटल शिक्षा जैसे कई कदम उठाए हैं। इन योजनाओं से स्कूलों में नामांकन बढ़ा है, लेकिन गुणवत्ता का सवाल अब भी बना हुआ है।
शिक्षकों की कमी, प्रशिक्षण का अभाव, निगरानी तंत्र की कमजोरी और स्थानीय जरूरतों के अनुरूप पाठ्यक्रम का न होना—ये सभी कारण सरकारी प्रयासों के प्रभाव को सीमित कर देते हैं। जब तक शिक्षा की गुणवत्ता में समान सुधार नहीं होगा, तब तक शिक्षा में असमानता खत्म नहीं हो सकती।
समाधान की दिशा
इस गंभीर समस्या से निपटने के लिए केवल नीतियों की घोषणा नहीं, बल्कि ठोस क्रियान्वयन की जरूरत है।
सरकारी स्कूलों में आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और डिजिटल संसाधनों का विस्तार
ग्रामीण और गरीब छात्रों के लिए मुफ्त या कम लागत की कोचिंग व्यवस्था
स्थानीय भाषा में गुणवत्तापूर्ण ई-लर्निंग कंटेंट
शिक्षकों की समयबद्ध नियुक्ति और निरंतर प्रशिक्षण
शिक्षा को कौशल और रोजगार से जोड़ने वाली व्यावहारिक नीति
इन कदमों से ही शिक्षा को वास्तव में समान अवसर का माध्यम बनाया जा सकता है।
निष्कर्ष
यदि शिक्षा में असमानता इसी तरह बढ़ती रही, तो इसका सीधा असर सामाजिक असंतुलन, बेरोजगारी और आर्थिक विषमता पर पड़ेगा। शिक्षा को बाजार की वस्तु बनने से बचाकर उसे सामाजिक न्याय का औजार बनाना समय की मांग है।
हर बच्चे का सपना उसकी जेब से नहीं, उसकी क्षमता से तय होना चाहिए। जब तक यह सिद्धांत जमीन पर लागू नहीं होगा, तब तक विकसित और समावेशी भारत का सपना अधूरा रहेगा।

यूपी में भीषण शीतलहर का प्रकोप, कक्षा 1 से 12 तक के सभी स्कूल 1 जनवरी तक बंद; सीएम योगी के सख्त निर्देश

लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा)। उत्तर प्रदेश में कड़ाके की ठंड, घने कोहरे और भीषण शीतलहर के चलते जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो गया है। बच्चों की सुरक्षा को सर्वोपरि मानते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के सभी बोर्डों (UP Board, CBSE, ICSE) के कक्षा 1 से 12 तक के सभी विद्यालयों को 1 जनवरी 2026 तक बंद रखने के आदेश जारी किए हैं।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि शीतलहर के दौरान किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इस अवधि में प्रदेश के सभी स्कूल पूर्णतः बंद रहेंगे।

मैदान में उतरेंगे अफसर, व्यवस्थाओं की निगरानी

सीएम योगी ने शासन और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे स्वयं क्षेत्रों का भ्रमण कर जमीनी हालात का जायजा लें। साथ ही सार्वजनिक स्थलों, चौराहों और रैन बसेरों में अलाव, कंबल और आश्रय की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया है।

मुख्यमंत्री के प्रमुख निर्देश

• कोई भी व्यक्ति ठंड में खुले आसमान के नीचे सोने को मजबूर न हो

• सभी रैन बसेरों में कंबल, बिस्तर और साफ-सफाई की पुख्ता व्यवस्था हो

• जरूरतमंदों को समय पर राहत सामग्री और सुरक्षित आश्रय मिले

लखनऊ में भी स्कूल बंद, डीएम ने जारी किया आदेश

घने कोहरे, गलन और तापमान में लगातार गिरावट को देखते हुए लखनऊ जिलाधिकारी विशाख जी ने राजधानी में प्री-प्राइमरी से कक्षा 12 तक के सभी विद्यालयों को 1 जनवरी तक बंद रखने के आदेश जारी किए हैं।
डीएम के अनुसार, यह अवकाश 29 दिसंबर से 1 जनवरी 2026 तक लागू रहेगा। इसमें परिषदीय, सहायता प्राप्त, मान्यता प्राप्त सभी बोर्डों के स्कूल, कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय, राजकीय व अशासकीय विद्यालय शामिल हैं।

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37 जिलों में घने कोहरे का ऑरेंज अलर्ट

मौसम विभाग के अनुसार, उत्तर प्रदेश में अगले तीन दिनों तक ठंड और कोहरे से राहत मिलने की संभावना नहीं है। सोमवार के लिए प्रदेश के 37 जिलों में घने कोहरे का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।

वहीं प्रयागराज, वाराणसी, कानपुर, लखनऊ समेत 12 जिलों में शीत दिवस की चेतावनी दी गई है। रविवार को आगरा, प्रयागराज, कानपुर और सहारनपुर में दृश्यता शून्य रही, जबकि मेरठ और इटावा में न्यूनतम तापमान 6.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

अति शीत दिवस की चेतावनी वाले जिले

प्रयागराज, वाराणसी, भदोही, बहराइच, सीतापुर, हरदोई, कानपुर नगर, उन्नाव, लखनऊ, बाराबंकी, रायबरेली, अयोध्या और आसपास के क्षेत्र।

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