मृतक के नाम पर फर्जी व्यक्ति खड़ा कर कराई रजिस्ट्री
डीएम से गुहार के बाद प्रेस क्लब में फूटा परिवार का दर्द, निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग
गोरखपुर(राष्ट्र की परम्परा)
जनपद में जमीन से जुड़े कथित फर्जीवाड़े का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने न केवल रजिस्ट्री प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि प्रशासनिक तंत्र की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर चिंता जताई है। आरोप है कि वर्ष 1996 में मृत हो चुके बृज गोपाल दास शाह के नाम पर वर्ष 2016 में जमीन की रजिस्ट्री कराई गई। इस पूरे प्रकरण में सविता त्रिपाठी का नाम सामने आ रहा है, जिन पर मृत व्यक्ति को जीवित दिखाकर संपत्ति अपने नाम कराने का आरोप लगाया गया है।
मामला कैंपियरगंज क्षेत्र के अलगटपुर स्थित लगभग चार एकड़ मूल्यवान जमीन से जुड़ा हुआ है। पीड़ित परिवार का कहना है कि जमीन के वास्तविक मालिक उस समय अन्य प्रदेश में नौकरी कर रहे थे, जिसका फायदा उठाकर कथित रूप से यह फर्जीवाड़ा किया गया। आरोप है कि मृतक के नाम से मिलता-जुलता एक व्यक्ति खड़ा कर रजिस्ट्री प्रक्रिया पूरी कराई गई।
परिजनों के अनुसार, बृज गोपाल दास शाह की मृत्यु वर्ष 1996 में हो चुकी थी, जिसका प्रमाण सरकारी अभिलेखों में दर्ज है। इसके बावजूद वर्ष 2016 में “बृज गोपाल” नाम के आधार पर रजिस्ट्री कराई गई। उनका कहना है कि दस्तावेजों में नाम की समानता का लाभ उठाकर और पहचान संबंधी कागजातों में हेरफेर कर यह पूरा खेल रचा गया।
परिवार का यह भी कहना है कि इस मामले की जांच पूर्व में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक स्तर से कराई जा चुकी है, जिसमें यह पुष्टि हो चुकी है कि “बृज गोपाल दास” और “बृज गोपाल दास शाह” एक ही व्यक्ति हैं और उनकी मृत्यु 1996 में ही हो गई थी। ऐसे में 2016 में उनके नाम से रजिस्ट्री होना गंभीर सवाल खड़े करता है।
न्याय की मांग को लेकर मृतक के परिजन—पोता, पोती, दामाद एवं अन्य परिजन—जिलाधिकारी दीपक मीणा से मिल चुके हैं और पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग की है। परिजनों ने डीएम को दिए गए प्रार्थना पत्र में फर्जी रजिस्ट्री को निरस्त करने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की अपील की है।
इसके बाद गोरखपुर जर्नलिस्ट्स प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस वार्ता में विजय कृष्ण गर्ग, प्रियमबदा गर्ग, महेंद्र अग्रवाल और सुरेंद्र अग्रवाल सहित अन्य परिजन मौजूद रहे। प्रेस वार्ता के दौरान परिजनों ने भावुक होते हुए कहा, “अगर हमारे मृत बाबा जिंदा हैं, तो उन्हें सामने लाकर खड़ा कर दीजिए। जिनका हमने वर्ष 1996 में अंतिम संस्कार किया, वह अचानक 2016 में जिंदा कैसे हो गए?”
पीड़ित परिवार ने इस पूरे प्रकरण में राजेश यादव पुत्र बैजनाथ यादव, निवासी तिलक नगर, गोरखनाथ को मास्टरमाइंड बताते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि पूरे फर्जीवाड़े की साजिश रचने और उसे अंजाम तक पहुंचाने में उक्त व्यक्ति की मुख्य भूमिका रही है।
पीड़ित परिवार ने मांग की है कि पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए और दोषियों पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह के मामलों पर प्रभावी रोक लग सके।
