कश्मीर, आतंकवाद और सियासत पर कवि संजय एम. तराणेकर की बेबाक अभिव्यक्ति
कश्मीर में अमन की आस और आतंकवाद पर सवाल, सियासत के बीच जनता के दर्द को बयां करती कविता
कश्मीर की सियासत, अनुच्छेद 370 पर बहस और पाकिस्तान के साथ संबंधों को लेकर उठते सवालों के बीच कवि संजय एम. तराणेकर ने अपनी कविता ‘फिर जाग उठा पाक प्रेम!’ के माध्यम से राजनीतिक बयानबाजी, आतंकवाद और आम जनता की पीड़ा को शब्द दिए हैं। कविता में शांति, सुरक्षा, शिक्षा, रोजगार और विकास की जरूरत पर जोर देते हुए कश्मीर के लिए एक बेहतर भविष्य की कामना की गई है।
फिर जाग उठा पाक प्रेम!
कश्मीर की वादियों में फिर, सियासती शोर उठा,
फ़ारूक़ बाबा के बयानों से, सवालिया दौर उठा।
धारा तीन सौ सत्तर गई, पे बहस अभी-भी जारी,
किसकी कैसी नीति रही, जनता की यही तैयारी।
‘आतंकवाद की आग’ में, कितने घर ‘उजड़’ गए,
मासूमों के सपने कितने, आँसू बनके बिखर गए।
शांति का पैगाम जरूरी, आतंक का अंत भी हो,
सीमा पार से आ रहीं, हिंसा का अवसान भी हो।
पाक से प्रेम की बातें, करना इतना आसान नहीं,
जब तक आतंक न मिटता, विश्वास निर्माण नहीं।
नेताओं की बयानबाजी, हल कोई निकलता नहीं,
जनता के दुखदर्द का मरहम, नारों से मिला नहीं।
कश्मीर की युवा पीढ़ी को, शिक्षा-रोजगार चाहिए,
अमन, सुरक्षा और विकास, सुंदर ‘संसार’ चाहिए।
सत्ता हो या विपक्ष यहाँ, कर्तव्य सभी को निभाना,
कश्मीर की खुशहाली खातिर, ‘नया सवेरा’ लाना।
— संजय एम. तराणेकर
कवि, लेखक एवं समीक्षक
इन्दौर-452011, मध्य प्रदेश
