Tag: हिंदी कविता

मौत का जाम…!

सागर की धरती रो पड़ी, आँखों में है नमी,किसने घोला ज़हर, बाँटी हैं मौत की ग़मी?जाम समझ बढ़े, “ज़िंदगी” हाथ से छूट गई,घर की चौखट सूनी, लाखों उम्मीदें टूट गईं।वो…

जीव अविनाशी — जीवन और मृत्यु का शाश्वत सत्य

सच है, सत्य मानो जैसे पाताल में खो गया हो,अब तो झूठ ही जगत पर छाया हुआ प्रतीत होता है।पुरानी कहावत भी आज सच लगती है—“दो टके की पगड़ी, छ:…

राख से उठती लौ: आँसूओं से जन्मी हिम्मत की कहानी

उन दीवारों से पूछो वो ‘रातें’ कैसी थीं,जब ‘रोटी’ भी छुप-छुप के खाती थी।उनके आँसू भी ‘आवाज़’ न करें कहीं,इस डर से हर ‘पीड़ा’ दबाई जाती थी।नन्ही-सी उम्र में सपने…

🟧 विडंबना नहीं तो और क्या

परिचय अपने ही देश में बेघर दर्द झेलना और शरणार्थी जैसा जीवन जीना आज की सबसे बड़ी विडंबना बनता जा रहा है। प्रस्तुत विडंबना कविता समाज के उस सच को…

सच देखो, सच सुनो, सच बोलो: सकारात्मक सोच और सादा जीवन का संदेश

आज के दौर में जब भ्रम, दिखावा और नकारात्मकता तेजी से बढ़ रही है, तब “सच देखो सच सुनो सच बोलो” का संदेश हमें जीवन की वास्तविक दिशा दिखाता है।…

✍️ प्रेम का रंग – त्याग, सहिष्णुता और ईमानदारी की प्रेरक कविता

प्रेम का रंग चढ़ता चला गया,यूँ लगा कि दुनिया हमारी है,त्याग का यत्न जब सीखा तोऐसा लगा कि जन्नत हमारी है।जीवन का साथ निभाता चला गया,समस्याएँ भी सुलझाता चला गया,दहशतगर्दी…

फागुन–चैत की बज उठी शहनाई: वसंत, होली और आम्रकुंज की अमराई का काव्य उत्सव

भारतीय ऋतुओं में वसंत ऋतु केवल मौसम नहीं, बल्कि जीवन में नवचेतना का उत्सव है। फागुन–चैत के आते ही खेत-खलिहान, बाग-बगीचे, वन-उपवन और जन-मन—सब उल्लास से भर उठते हैं। इसी…

निर्विकार प्रेम कविता: भक्ति, धर्म और ईश्वर का सार

— डॉ. कर्नल आदिशंकर मिश्र ‘आदित्य’ प्रेम केवल भावना नहीं, यह भक्ति का स्वरूप है,प्रेम पूजा है, जहां न स्वार्थ है, न अहंकार का रूप है।जब प्रेम निस्वार्थ बन जाए,…

स्थानीय कवियों की रचनाओं ने रचा सांस्कृतिक सौहार्द का इतिहास

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)।गोरखपुर महोत्सव 2026 का समापन स्थानीय कवियों के भावपूर्ण और सामाजिक चेतना से ओतप्रोत कवि सम्मेलन के साथ हुआ। इस साहित्यिक संध्या ने गंगा-जमुनी तहज़ीब, आपसी भाईचारे…

🌿 अकेला रह नहीं पाता

विरह, प्रतीक्षा और स्मृतियों की सजीव कविता अकेला रह नहीं पाताडाकिया अब कोई पातीतुम्हारी क्यों नहीं लातालाख करता हूँ कोशिश मैंअकेला रह नहीं पातामिलन की आस लेकरआज भी बैठा हूँ…

कवि ध्रुवदेव मिश्र ‘पाषाण’ की प्रथम पुण्यतिथि: कविता के जरिए मनुष्यता की अनवरत लड़ाई

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)हिंदी साहित्य के निर्भीक और जनपक्षधर कवि ध्रुवदेव मिश्र ‘पाषाण’ की प्रथम पुण्यतिथि पर साहित्य जगत उन्हें गहरी संवेदना और सम्मान के साथ याद कर रहा…