ब्राजील में लूला की ऐतिहासिक वापसी! पहले राउंड में पिछड़े, दूसरे में पलटी बाजी; ट्रंप के करीबी बोल्सोनारो परिवार को झटका

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नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) ब्राजील की राजनीति में एक बार फिर बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। 80 वर्षीय लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा के चौथी बार राष्ट्रपति चुनाव जीतने का दावा किया जा रहा है। पहले दौर में पिछड़ने के बाद दूसरे दौर में बाजी पलटने की यह कहानी जितनी दिलचस्प है, उतनी ही ब्राजील की राजनीति के बदलते समीकरणों की ओर भी इशारा करती है।
बताया जा रहा है कि लूला ने फ्लावियो बोल्सोनारो को पीछे छोड़कर जीत हासिल की। फ्लावियो, ब्राजील के पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो के बेटे हैं। बोल्सोनारो परिवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का करीबी माना जाता है। ऐसे में इस मुकाबले को केवल दो नेताओं की चुनावी लड़ाई के बजाय ब्राजील की राजनीतिक दिशा से जोड़कर भी देखा जा रहा है।
पहले दौर में पिछड़े, फिर दूसरे दौर में पलटी बाजी
चुनाव के पहले चरण में फ्लावियो बोल्सोनारो को करीब 47 प्रतिशत वोट मिलने की बात कही गई है। शुरुआती बढ़त ने उनके समर्थकों की उम्मीदें बढ़ा दी थीं, लेकिन दूसरे दौर में मुकाबले का रुख बदलने की चर्चा है। इस घटनाक्रम ने चुनावी राजनीति में मतदाताओं के अंतिम फैसले की अहमियत को फिर सामने ला दिया।
ब्राजील में राष्ट्रपति चुनाव के दूसरे दौर में आम तौर पर शीर्ष दो उम्मीदवारों के बीच सीधा मुकाबला होता है, जब पहले दौर में किसी उम्मीदवार को जीत के लिए जरूरी बहुमत नहीं मिलता। ऐसे में पहले चरण की बढ़त अंतिम जीत की गारंटी नहीं होती।
लूला और बोल्सोनारो परिवार के बीच पुरानी राजनीतिक टक्कर
लूला और बोल्सोनारो परिवार के बीच राजनीतिक मुकाबला नया नहीं है। वर्ष 2022 के राष्ट्रपति चुनाव में लूला ने जायर बोल्सोनारो को हराकर सत्ता में वापसी की थी। अब फ्लावियो बोल्सोनारो के साथ मुकाबले की खबर ने इस राजनीतिक संघर्ष को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है।
फ्लावियो को उनके पिता की राजनीतिक विरासत और समर्थक वर्ग का लाभ मिलने की उम्मीद की जा रही थी। वहीं लूला का राजनीतिक अनुभव और उनका पुराना जनाधार चुनावी मुकाबले में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
1989 के बाद चुनावी इतिहास में नया अध्याय?
ब्राजील में 1989 में प्रत्यक्ष राष्ट्रपति चुनाव की वापसी के बाद से चुनावी मुकाबलों में कई बड़े राजनीतिक बदलाव देखने को मिले हैं। पहले दौर में दूसरे स्थान पर रहने वाले उम्मीदवार के दूसरे दौर में जीतने का दावा यदि आधिकारिक नतीजों से पुष्ट होता है, तो इसे देश के चुनावी इतिहास की एक महत्वपूर्ण घटना के रूप में देखा जा सकता है।
हालांकि, इस खबर से जुड़े चुनाव वर्ष, उम्मीदवारों के नाम और अंतिम परिणाम की आधिकारिक पुष्टि आवश्यक है। उपलब्ध विवरण के आधार पर लूला की चौथी जीत और फ्लावियो बोल्सोनारो की उम्मीदवारी को फिलहाल पुष्ट तथ्य की तरह प्रस्तुत करना उचित नहीं होगा।
ब्राजील की राजनीति पर दुनिया की नजर इसलिए भी रहती है, क्योंकि यह लैटिन अमेरिका की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। वहां का नेतृत्व वैश्विक व्यापार, पर्यावरण नीति और अमेरिका सहित अन्य देशों के साथ संबंधों को प्रभावित कर सकता है।