सपा ने उतारे तीन राज्यसभा प्रत्याशी, दो सीटों की स्थिति मजबूत फिर तीसरे उम्मीदवार से बढ़ा मुकाबला

लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए होने वाले चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी (सपा) ने तीन प्रत्याशी मैदान में उतारने का फैसला किया है। विधानसभा में मौजूदा संख्या के हिसाब से सपा दो सीटों पर जीत की स्थिति में बताई जा रही है, ऐसे में तीसरे उम्मीदवार को उतारने के फैसले ने चुनावी मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है।
सपा की बैठक में पार्टी के वरिष्ठ नेता प्रोफेसर रामगोपाल यादव को एक बार फिर राज्यसभा भेजने पर सहमति की जानकारी सामने आई है। इसके अलावा पूर्व मुख्य सचिव आलोक रंजन और सलीम इकबाल को भी प्रत्याशी बनाए जाने की बात कही जा रही है। पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव की मौजूदगी में उम्मीदवारों को लेकर चर्चा हुई।
निर्वाचन आयोग के कार्यक्रम के अनुसार राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन प्रक्रिया 29 सितंबर से शुरू होकर 6 अक्टूबर तक चलेगी। नामांकन पत्रों की जांच 7 अक्टूबर को होगी, जबकि नाम वापसी की अंतिम तारीख 9 अक्टूबर निर्धारित है। मतदान 16 अक्टूबर को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक होगा। मतदान समाप्त होने के बाद मतगणना कर परिणाम घोषित किए जाएंगे।
तीसरे प्रत्याशी के लिए सपा को जुटाने होंगे अतिरिक्त वोट
उत्तर प्रदेश विधानसभा में दलों की मौजूदा संख्या को देखते हुए भाजपा और उसके सहयोगियों की स्थिति मजबूत है। वहीं सपा के पास उपलब्ध विधायकों के आधार पर दो उम्मीदवारों की जीत की संभावना बनती है। ऐसे में तीसरे प्रत्याशी को जिताने के लिए पार्टी को अतिरिक्त मतों का इंतजाम करना होगा।
यही वजह है कि चुनाव में दूसरे दलों के विधायकों की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो सकती है। सपा को अपने तीसरे उम्मीदवार के पक्ष में पर्याप्त प्रथम वरीयता मत जुटाने के लिए राजनीतिक समर्थन हासिल करना होगा। हालांकि अंतिम तस्वीर मतदान और मतगणना के बाद ही स्पष्ट होगी।
पिछले चुनाव की क्रॉस वोटिंग भी बनी चर्चा का विषय
राज्यसभा चुनाव के पिछले अनुभवों को देखते हुए इस बार भी विधायकों के रुख पर राजनीतिक दलों की नजर रहेगी। पिछले चुनाव में क्रॉस वोटिंग की घटनाओं ने सपा की रणनीति को प्रभावित किया था। ऐसे में तीन प्रत्याशियों को मैदान में उतारने के बाद पार्टी के सामने अतिरिक्त वोट जुटाने की चुनौती भी बनी हुई है।
अब सभी दल अपने-अपने विधायकों की संख्या, समर्थन और चुनावी रणनीति को लेकर सक्रिय होंगे। सपा के तीसरे प्रत्याशी के मैदान में आने से राज्यसभा चुनाव में मुकाबले के समीकरण बदलने की संभावना पर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं।