पांच लोगों ने शपथपत्र देकर गवाही और हस्ताक्षर से किया इनकार, निष्पक्ष जांच की मांग

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। श्याम देउरवा थाने में दर्ज जालसाजी और फ्राड के मुकदमे की विवेचना को लेकर वादी श्याम नारायण तिवारी ने गंभीर आरोप लगाए हैं। गुरुवार को गोरखपुर जर्नलिस्ट्स प्रेस क्लब में आयोजित प्रेसवार्ता में उन्होंने आरोप लगाया कि विवेचक उप निरीक्षक आलोक कुमार राय ने अभियुक्त पक्ष से मिलीभगत कर विवेचना को प्रभावित किया और ऐसे पांच लोगों को गवाह बना दिया, जिन्होंने स्वयं गवाही देने से इनकार किया है।श्याम नारायण तिवारी के अनुसार कथित गवाहों ने नोटरी शपथपत्र देकर कहा है कि उन्होंने मुकदमे में कोई बयान नहीं दिया और विवेचना में दर्शाए गए हस्ताक्षर भी उनके नहीं हैं। उन्होंने बताया कि मामला मुकदमा संख्या 165/2026 की विवेचना से संबंधित है। वादी का दावा है कि विवेचना में जिन पांच लोगों के बयान और हस्ताक्षर दर्शाए गए हैं, उन्होंने शपथपत्र के माध्यम से इन बातों से इनकार किया है।वादी ने यह भी आरोप लगाया कि कथित गवाहों में एक व्यक्ति ऐसा है जो पढ़ा-लिखा नहीं है और सामान्य तौर पर हस्ताक्षर के स्थान पर अंगूठा लगाता है। इसके बावजूद विवेचना में उसके नाम के सामने हस्ताक्षर दर्शाए गए हैं। उन्होंने इसे गंभीर अनियमितता बताते हुए संबंधित दस्तावेजों और हस्ताक्षरों की जांच कराने की मांग की।प्रेसवार्ता में श्याम नारायण तिवारी ने बताया कि उनके पट्टीदार एवं मुकदमे में नामजद सच्चिदानन्द तिवारी, रणजीत तिवारी, राजीव तिवारी आदि पर कथित जालसाजी और फर्जीवाड़े के माध्यम से पैतृक भूमि अपने नाम दर्ज कराने का आरोप है। उनके अनुसार ग्राम बसवार में करीब चार एकड़ 11 डिसमिल तथा कुशीनगर जिले के अहिरौली थाना क्षेत्र के ग्राम मंगलपुर में करीब चार एकड़ पैतृक भूमि है। कुल करीब आठ एकड़ 11 डिसमिल भूमि को लेकर विवाद बताया गया है।वादी का आरोप है कि जमीन के नामांतरण और राजस्व अभिलेखों में दर्ज कराने में कथित रूप से फर्जीवाड़ा किया गया, जिससे उनका परिवार भूमिहीन होने की स्थिति में पहुंच गया। उन्होंने बताया कि मामले को लेकर करीब एक वर्ष तक विभिन्न स्तरों पर शिकायतें की गईं। पुलिस अधिकारियों और आईजीआरएस के माध्यम से भी शिकायतें भेजे जाने का उन्होंने दावा किया। अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने पर न्यायालय की शरण लेने की बात कही। न्यायालय के आदेश के बाद श्यामदेउरवा थाने में संबंधित लोगों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज किया गया।श्याम नारायण तिवारी का आरोप है कि मुकदमा दर्ज होने के बाद विवेचना में मामले से जुड़े दस्तावेजों और आरोपों की समुचित जांच नहीं की गई। इसके बजाय ऐसे लोगों को गवाह के रूप में दर्शाया गया, जिन्होंने बाद में शपथपत्र देकर गवाही और हस्ताक्षर से इनकार किया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि विवेचक ने पर्याप्त जांच किए बिना अंतिम रिपोर्ट (एफआर) लगा दी और मामले को समाप्त करने का प्रयास किया।वादी ने बताया कि अंतिम रिपोर्ट लगाए जाने की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने पुलिस के उच्चाधिकारियों को प्रार्थना पत्र देकर मामले की दोबारा निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। आईजीआरएस के माध्यम से शिकायत किए जाने की भी बात कही। उन्होंने मांग की कि कथित गवाहों के शपथपत्र, हस्ताक्षर और विवेचना में दर्ज बयानों की जांच किसी अन्य अधिकारी से कराई जाए।हालांकि, प्रेसवार्ता में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। विवेचक उप निरीक्षक आलोक कुमार राय अथवा आरोपी पक्ष का पक्ष इस संबंध में सामने नहीं आया है। मामले में पुलिस की जांच और संबंधित दस्तावेजों की जांच के बाद ही आरोपों की वास्तविकता स्पष्ट हो सकेगी।
