
एक बंदर पकड़कर ग्रामीणों ने वन विभाग को सौंपा, दूसरे को पकड़ने की मांग
बहराइच (राष्ट्र की परम्परा)। मिहींपुरवा के मोतीपुर रेंज अंतर्गत ग्राम पंचायत कुड़वा के मजरा जयराम पुरवा, खैरहना पुरवा, तमोलिपुरवा और आसाम रोड के आसपास स्थित गांवों में बंदरों के आतंक से ग्रामीण परेशान हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बंदर अब तक प्रिया रंजन, आरुषि वर्मा, अंशिका, सोनिका, धर्मवीर, राजवीर, अनन्या, ज्योति, निधि लोधी और अंजलि समेत करीब दर्जनों बच्चों को काटकर घायल कर चुके हैं। इससे बच्चों में भय का माहौल है और अभिभावक उन्हें स्कूल भेजने से भी डर रहे हैं।जयराम पुरवा में प्राथमिक विद्यालय संचालित है, जहां आसपास के गांवों के बच्चे भी पढ़ने आते हैं। ग्रामीणों के मुताबिक बंदरों के आतंक के कारण बच्चों का स्कूल आना-जाना भी डर के साये में हो रहा है। बंदर घरों में घुसकर सामान उठा ले जाते हैं। उन्हें भगाने का प्रयास करने पर वे लोगों के पीछे दौड़कर हमला करने की कोशिश करते हैं।ग्राम पंचायत निवासी चिंताराम और तीरथ राम लोधी ने बताया कि बंदरों के आतंक की कई बार वन विभाग के कर्मचारियों को सूचना दी गई, लेकिन समय से कार्रवाई नहीं हुई। मंगलवार को ग्रामीणों ने एकजुट होकर दो बंदरों में से एक को पकड़ लिया। इसके बाद वन विभाग को सूचना देकर बंदर को उनके सुपुर्द कर दिया गया।ग्रामीणों ने बताया कि गांव में अभी एक और बंदर मौजूद है, जो बच्चों के लिए खतरा बना हुआ है। उन्होंने वन विभाग से उसे भी पकड़कर आबादी से दूर जंगल में छोड़ने की मांग की है।आर्थिक सहायता का प्रावधान नहींवन विभाग के रेंज अधिकारी ने बताया कि बंदर वन्यजीवों की उस सूची में शामिल नहीं है, जिसके तहत उसके हमले में घायल होने पर आर्थिक सहायता या अनुदान का प्रावधान है। ग्रामीणों द्वारा पकड़े गए बंदर को आबादी से दूर जंगल में छोड़ा जाएगा।ग्रामीणों का कहना है कि बंदरों का आतंक लंबे समय से बना हुआ है। उन्होंने बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए स्कूल और आबादी के आसपास बंदरों को पकड़ने के लिए प्रभावी कार्रवाई की मांग की है। इस दौरान ग्राम प्रधान प्रतिनिधि शर्मा जीत, तीरथ राम लोधी, चिंताराम वर्मा, मनीष वर्मा समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।
