देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)। संत विनोबा स्नातकोत्तर महाविद्यालय में शुक्रवार को महान गांधीवादी विचारक एवं समाज सुधारक संत विनोबा भावे की जयंती श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई गई। कार्यक्रम की शुरुआत महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. अर्जुन मिश्र एवं शिक्षकों द्वारा संत विनोबा भावे की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें नमन करने के साथ हुई। इस दौरान उनके विचारों, सामाजिक योगदान और सर्वोदय दर्शन को याद किया गया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. अर्जुन मिश्र ने कहा कि महात्मा गांधी ने अपने सपनों को साकार करने के लिए विनोबा भावे जैसे व्यक्तित्व को चुना था। विनोबा भावे का मानना था कि गांधीवादी विचारों से जुड़े लोग ही सर्वोदय समाज के निर्माण के सच्चे वाहक बन सकते हैं। वे सामाजिक परिवर्तन के लिए अहिंसात्मक क्रांति के प्रबल समर्थक थे। उन्होंने ग्रामदान आंदोलन के माध्यम से गांधी के विचारों को आगे बढ़ाया और प्रेम, संवाद, त्याग तथा स्वैच्छिक सहयोग को सामाजिक एवं आर्थिक समस्याओं के समाधान का प्रभावी माध्यम बनाया।

राजनीति विज्ञान विभाग के अध्यक्ष डॉ. भूपेश मणि ने कहा कि विनोबा भावे ने महात्मा गांधी के सपनों और विचारों को आत्मसात किया तथा उनके आध्यात्मिक उत्तराधिकारी के रूप में समाज को नई दिशा दी। सर्वोदय और भूदान आंदोलन के माध्यम से उन्होंने सामाजिक समरसता और समानता का संदेश दिया, जिसके कारण उनका नाम भारतीय इतिहास में सदैव स्मरण किया जाता रहेगा।

भूगोल विभाग के अध्यक्ष प्रो. अरविंद कुमार ने कहा कि विनोबा भावे ने भूमिहीन और जरूरतमंद लोगों की समस्याओं को समझते हुए संपन्न लोगों से अपनी भूमि का कुछ हिस्सा दान करने का आह्वान किया। भूदान आंदोलन के माध्यम से उन्होंने जरूरतमंदों तक जमीन पहुंचाने का प्रयास किया।

कार्यक्रम का संचालन डॉ. मंतोष मौर्य ने किया। इस अवसर पर प्रो. वाचस्पति द्विवेदी, डॉ. विवेक मिश्र, डॉ. चंद्रेश बारी, डॉ. तूलिका पांडेय, डॉ. उमेश दूबे, डॉ. अवनीश राव, डॉ. प्रियंका, डॉ. विद्यावती, डॉ. राजकुमार गुप्ता, डॉ. शगुफ्ता, डॉ. दीप्ति, डॉ. ऋचा मिश्रा, डॉ. कृष्ण मुरारी गुप्ता, डॉ. निखिल गौतम, डॉ. पुनीत सिंह, डॉ. अभिनव चौबे, अनिल यादव, विजय चौधरी सहित महाविद्यालय के शिक्षक एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।