विश्व शिक्षक दिवस विशेष: सरकारी स्कूलों में पढ़ाई के साथ बच्चों को मिल रहे खेल और सीखने के नए अवसर


मऊ, (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। सरकारी विद्यालयों में पढ़ाई को बच्चों के लिए अधिक रुचिकर और अनुभव आधारित बनाने की दिशा में नए प्रयोग देखने को मिल रहे हैं। मऊ के दो कंपोजिट सरकारी विद्यालयों में जागृति और चैतन्य कुल की पहल से बच्चों को नियमित पढ़ाई के साथ खेल, गतिविधियों, अभिव्यक्ति, शैक्षिक यात्राओं और अलग-अलग क्षेत्रों के लोगों से सीखने के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इसका उद्देश्य बच्चों की रुचि और सीखने की अलग-अलग जरूरतों को समझते हुए शिक्षा को उनके लिए सहज बनाना है।
शिक्षा विभाग की सहमति के बाद सितंबर 2025 से चैतन्य कुल के स्पर्श लीडर इन विद्यालयों में बच्चों और शिक्षकों के साथ काम कर रहे हैं। उनकी भूमिका शिक्षक का स्थान लेना नहीं, बल्कि शिक्षकों के साथ मिलकर गतिविधि आधारित सीखने के नए तरीके विकसित करना है। बच्चों की रुचि, व्यवहार और सीखने की जरूरत को समझकर एफएलएन, खेल, अभिव्यक्ति और रुचि आधारित गतिविधियों को कक्षा की पढ़ाई से जोड़ा जा रहा है।
इस पहल में बच्चों को विद्यालय की चारदीवारी से बाहर सीखने का अवसर भी दिया जा रहा है। शैक्षिक यात्राओं के दौरान साइंस सिटी, मेट्रो, रेलवे स्टेशन और शहर की विभिन्न व्यवस्थाओं को बच्चों के सीखने के अनुभव से जोड़ा गया। वहीं अल्टीमेट फ्रिस्बी जैसे खेलों के माध्यम से बच्चों को प्रतियोगिता, टीमवर्क और नेतृत्व की समझ विकसित करने का अवसर मिला। बच्चों ने लखनऊ में राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में भी हिस्सा लिया।
खास बात यह है कि लड़कियों की खेलों में भागीदारी को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। खेल और गतिविधियों के जरिए उन्हें नेतृत्व करने, निर्णय लेने और टीम के साथ काम करने का अनुभव मिल रहा है। इससे शिक्षा का दायरा केवल किताब और कक्षा तक सीमित न रहकर व्यवहारिक अनुभवों तक पहुंच रहा है।
चैतन्य कुल के संस्थापक सत्यम श्रीवास्तव के अनुसार, बच्चे के व्यवहार को केवल अनुशासन के नजरिये से देखने के बजाय उसकी परिस्थितियों, रुचियों और सीखने के तरीके को समझना जरूरी है। उनका कहना है कि जब शिक्षक यह समझने का प्रयास करता है कि बच्चा किस परिस्थिति से विद्यालय आ रहा है और किस तरीके से वह बेहतर सीख सकता है, तब पढ़ाने की प्रक्रिया अधिक प्रभावी बन सकती है।
अभिभावकों ने भी बच्चों में बदलाव महसूस होने की बात कही है। अरुण कुमार ने बताया कि पहले उनका बच्चा विद्यालय की पढ़ाई के अलावा अन्य गतिविधियों में ज्यादा रुचि नहीं लेता था, लेकिन अब घर लौटकर विद्यालय में हुई गतिविधियों के बारे में बताता है और खुद कुछ नया करने की इच्छा जाहिर करता है। अभिभावक शिवकुमारी के मुताबिक, खेल और अन्य गतिविधियों में भागीदारी से बच्चों में बोलने तथा लोगों के सामने अपनी बात रखने का आत्मविश्वास बढ़ा है।
संविलियन विद्यालय शाहपुर के प्रधानाचार्य बाबूराम ने बताया कि स्पर्श लीडर बच्चों के साथ अतिरिक्त गतिविधियों में सहयोग कर रहे हैं। इससे बच्चों को सीखने के नए अवसर मिल रहे हैं और शिक्षकों को भी गतिविधि आधारित शिक्षण के नए तरीके आजमाने में मदद मिल रही है।
मऊ के इन सरकारी विद्यालयों में हो रहे प्रयोग यह दिखाते हैं कि शिक्षा केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित नहीं है। खेल, संवाद, यात्राएं, रचनात्मक गतिविधियां और व्यवहारिक अनुभव भी बच्चों की सीखने की प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकते हैं।