भारत-रूस रिश्तों की गर्माहट: मोदी-पुतिन की मुलाकात में व्यापार से लेकर ऊर्जा तक सहयोग पर मंथन


नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा)। 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले भारत मंडपम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की अहम द्विपक्षीय मुलाकात हुई। दोनों नेताओं ने गर्मजोशी से एक-दूसरे का अभिवादन किया। प्रधानमंत्री मोदी ने पुतिन को गले लगाकर स्वागत किया, जिसके बाद दोनों नेताओं के बीच विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर बातचीत हुई।
बैठक में भारत-रूस के रणनीतिक संबंधों को और मजबूत करने के साथ राजनीतिक, आर्थिक, रक्षा, ऊर्जा, अंतरिक्ष और कौशल विकास जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई। दोनों देशों के बीच व्यापार और औद्योगिक साझेदारी को नई गति देने के अवसरों पर भी विचार किया गया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूसी राष्ट्रपति को प्राचीन तमिल ग्रंथ ‘तिरुक्कुरल’ का रूसी अनुवाद भेंट किया। तमिल साहित्य की यह कालजयी कृति नीति, सदाचार और जीवन मूल्यों पर केंद्रित है और दुनिया की अनेक भाषाओं में उपलब्ध है। रूसी भाषा में इसका अनुवाद दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक जुड़ाव का भी प्रतीक माना जा रहा है।
बैठक के बाद दोनों नेताओं ने भारत मंडपम में आयोजित INNOPROM प्रदर्शनी का अवलोकन किया। यह प्रदर्शनी भारत और रूस के बीच औद्योगिक एवं तकनीकी सहयोग की संभावनाओं को सामने रखने वाला महत्वपूर्ण मंच रही। विमानन, हेलिकॉप्टर, विनिर्माण और अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में साझेदारी बढ़ाने पर विशेष जोर दिखाई दिया।
रूसी पक्ष की ओर से नागरिक उड्डयन में भारत को लंबे समय से भरोसेमंद साझेदार बताया गया। भविष्य में दूरदराज के क्षेत्रों में यात्री परिवहन, मेडिकल इमरजेंसी सेवाओं और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के लिए हेलिकॉप्टर क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की संभावनाएं भी सामने रखी गईं। रूस के SJ-100 विमान के उत्पादन से जुड़े सहयोग में भारतीय प्रबंधन और रूसी इंजीनियरिंग विशेषज्ञता को साथ लाने की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई।
राष्ट्रपति पुतिन ने प्रधानमंत्री मोदी को आगामी 24वें भारत-रूस शिखर सम्मेलन के लिए रूस आने का निमंत्रण दिया, जिसे प्रधानमंत्री ने स्वीकार कर लिया। विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों के साथ बदलते वैश्विक परिदृश्य और आपसी हित से जुड़े मुद्दों पर भी विचार-विमर्श किया।
इस बीच ब्रिक्स बिजनेस फोरम में विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने भारत की आर्थिक क्षमता को रेखांकित करते हुए कहा कि देश तेजी से बढ़ते बाजार, मजबूत विनिर्माण आधार, कुशल मानव संसाधन, डिजिटल क्षमताओं और मजबूत स्टार्टअप एवं इनोवेशन इकोसिस्टम के साथ वैश्विक साझेदारों के लिए बड़े अवसर उपलब्ध करा रहा है। उन्होंने ब्रिक्स के अगले चरण को मजबूत कारोबारी दृष्टिकोण देने में उद्योग जगत की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।
ब्रिक्स सम्मेलन में शामिल होने के लिए रूस, युगांडा और नाइजीरिया समेत कई देशों के प्रतिनिधि नई दिल्ली पहुंचे हैं। युगांडा की उपराष्ट्रपति जेसिका अलुप्पो और नाइजीरिया की विदेश मंत्री बियानका ओडुमेगू-ओजुक्वू सहित साझेदार देशों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी से सम्मेलन का दायरा और व्यापक हुआ है। रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव भी भारतीय राजधानी पहुंचे हैं।
ब्रिक्स से जुड़े प्रतिनिधियों ने बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था, विकासशील देशों की भूमिका, आपसी व्यापार और ग्लोबल साउथ की आवाज को मजबूत करने पर जोर दिया। दक्षिण अफ्रीका और ब्राजील के प्रतिनिधियों ने भारत के साथ व्यापार एवं द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं को महत्वपूर्ण बताया।
दिल्ली में सम्मेलन को लेकर प्रदर्शित ब्रिक्स इंडिया 2026 का लोगो भी आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। कमल और ‘नमस्ते’ की भारतीय सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों के माध्यम से तैयार डिजाइन में सदस्य देशों के बीच सहयोग, सम्मान और साझा विकास का संदेश देने का प्रयास किया गया है।
प्रधानमंत्री मोदी ने ब्रिक्स सम्मेलन से पहले उम्मीद जताई कि नई दिल्ली में जुटने वाले वैश्विक नेताओं के बीच विश्व कल्याण से जुड़े मुद्दों पर सकारात्मक और सार्थक संवाद होगा। भारत की मेजबानी में आयोजित यह सम्मेलन कूटनीतिक, आर्थिक और रणनीतिक स्तर पर देश की बढ़ती भूमिका को सामने रखने का महत्वपूर्ण अवसर माना जा रहा है।