
आत्महत्या रोकथाम का संकल्प जीवन के प्रति सकारात्मक सोच और मानसिक स्वास्थ्य जरूरी

वडनगर/गुजरात (राष्ट्र की परम्परा)। विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस के अवसर पर रत्नप्रभा नर्सिंग हॉस्पिटल, वडनगर में मानसिक स्वास्थ्य एवं आत्महत्या रोकथाम को लेकर विशेष जागरूकता सेमिनार आयोजित किया गया। “सुसाइड प्रिवेंशन एंड मेंटल हेल्थ—लाइफ इज ब्यूटीफुल” विषय पर आयोजित कार्यक्रम में 200 से अधिक नर्सिंग विद्यार्थियों ने सहभागिता की।
रत्नप्रभा नर्सिंग हॉस्पिटल के प्राचार्य डॉ. राजेश जोशी के मार्गदर्शन में आयोजित कार्यक्रम में माइंड ट्रेनर एवं साइकोलॉजिस्ट डॉ. राजेश परमार ने विद्यार्थियों को मानसिक स्वास्थ्य, तनाव प्रबंधन, भावनात्मक संतुलन और जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं की जानकारी दी।
डॉ. राजेश परमार ने कहा कि आत्महत्या का विचार कई बार व्यक्ति के गहरे मानसिक तनाव, अकेलेपन, निराशा या भावनात्मक पीड़ा से जुड़ा होता है। ऐसे समय में व्यक्ति को दोष देने या जज करने के बजाय उसकी बात ध्यान से सुनना और उसे भावनात्मक सहयोग देना जरूरी है। समय रहते उचित सहायता उपलब्ध कराकर किसी की जिंदगी बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जा सकती है।
चेतावनी संकेत पहचानने पर जोर
सेमिनार में विद्यार्थियों को मानसिक संकट से गुजर रहे व्यक्ति में दिखाई देने वाले संभावित चेतावनी संकेतों को पहचानने के बारे में बताया गया। साथ ही ऐसे व्यक्ति से संवेदनशील तरीके से बातचीत करने, उसकी बात सुनने तथा जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ मानसिक स्वास्थ्य सहायता लेने के लिए प्रेरित करने की जानकारी दी गई।
डॉ. परमार ने कहा कि नर्सिंग विद्यार्थी भविष्य में स्वास्थ्य सेवाओं का महत्वपूर्ण हिस्सा होंगे। मरीजों और उनके परिजनों के साथ लगातार संपर्क में रहने के कारण वे शारीरिक समस्याओं के साथ मानसिक एवं भावनात्मक परेशानियों को भी पहचान सकते हैं। समय पर संवेदनशील हस्तक्षेप और सही मार्गदर्शन आत्महत्या रोकथाम की दिशा में प्रभावी कदम बन सकता है।
4 लाख से अधिक लोगों तक पहुँचा जागरूकता संदेश
डॉ. राजेश परमार के अनुसार आत्महत्या रोकथाम और मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता अभियान के माध्यम से अब तक 4 लाख से अधिक लोगों को आत्महत्या रोकथाम की शपथ दिलाई जा चुकी है। अभियान का उद्देश्य लोगों को मानसिक पीड़ा को समझने, जरूरतमंद व्यक्ति की बात सुनने और कठिन परिस्थितियों में उसका साथ देने के लिए प्रेरित करना है।
इसी अभियान के तहत रत्नप्रभा नर्सिंग हॉस्पिटल के 200 से अधिक विद्यार्थियों ने भी आत्महत्या रोकथाम की शपथ लेकर जरूरतमंद व्यक्ति के प्रति संवेदनशील रहने और जीवन बचाने में सहयोग करने का संकल्प लिया।
विद्यार्थियों ने लिया जीवन बचाने का संकल्प
कार्यक्रम के समापन पर विद्यार्थियों ने मानसिक परेशानियों से जूझ रहे व्यक्ति की अनदेखी न करने, उसकी बात सहानुभूति से सुनने और आवश्यकता पड़ने पर उसे उचित सहायता तक पहुंचाने की शपथ ली।
कार्यक्रम का संचालन प्रो. नीमा पटेल ने किया। उन्होंने पूरे सत्र को व्यवस्थित एवं प्रभावी ढंग से संचालित किया। इस दौरान “बात करें, सुनें, साथ दें और जीवन बचाएं” का संदेश प्रमुखता से दिया गया।
“लाइफ इज ब्यूटीफुल” के सकारात्मक संदेश के साथ आयोजित सेमिनार का उद्देश्य युवाओं में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता बढ़ाना, आत्महत्या जैसे संवेदनशील विषय पर संवाद को प्रोत्साहित करना और संकट में घिरे व्यक्ति के प्रति संवेदनशील व्यवहार विकसित करना रहा।
प्राचार्य डॉ. राजेश जोशी के मार्गदर्शन और डॉ. राजेश परमार के प्रशिक्षण से विद्यार्थियों को मानसिक स्वास्थ्य एवं आत्महत्या रोकथाम के प्रति अधिक जागरूक और जिम्मेदार बनाने की दिशा में यह कार्यक्रम महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ।
