जब अधिकारों के साथ कर्तव्यों की समझ विकसित होती है, तब राष्ट्रहित सर्वोपरि बनता है
चंद्रकांत सी. पूजारी, गुजरात किसी भी लोकतांत्रिक राष्ट्र की मजबूती केवल उसके संविधान, कानून या शासन-प्रणाली पर निर्भर नहीं करती, बल्कि उसके नागरिकों की सोच, आचरण और कर्तव्य-बोध पर भी…
