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राजनीतिक बयानबाज़ी के शोर में दबती आम जनता की ज़रूरतें — ज़मीन पर उतरे बिना अधूरा रह गया विकास

भारत में आज विकास सबसे ज़्यादा बोले जाने वाले शब्दों में से एक है, लेकिन ज़मीन पर इसके मायने लगातार धुंधले होते जा रहे हैं। मंचों, रैलियों और सोशल मीडिया…