मौत का जाम…!
सागर की धरती रो पड़ी, आँखों में है नमी,किसने घोला ज़हर, बाँटी हैं मौत की ग़मी?जाम समझ बढ़े, “ज़िंदगी” हाथ से छूट गई,घर की चौखट सूनी, लाखों उम्मीदें टूट गईं।वो…
निष्पक्ष खबर, सशक्त विचार
सागर की धरती रो पड़ी, आँखों में है नमी,किसने घोला ज़हर, बाँटी हैं मौत की ग़मी?जाम समझ बढ़े, “ज़िंदगी” हाथ से छूट गई,घर की चौखट सूनी, लाखों उम्मीदें टूट गईं।वो…
लेखक – नवनीत मिश्र आज के दौर में मोबाइल फोन ने जीवन को जितना सुविधाजनक बनाया है, उतना ही वह बच्चों के भविष्य के लिए खतरनाक भी साबित हो रहा…
ठंड, तकलीफ़ और उम्मीद: देवरिया में राजेश सिंह दयाल फाउंडेशन का निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर, 1650 मरीजों का इलाज, 100 से अधिक को नई दृष्टि देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)।ग्रामीण भारत में…
गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय परिवार की ओर से सामाजिक दायित्व के तहत गोद लिए गए क्षय रोगियों को पोषण पोटली वितरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह…
सलेमपुर/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। कड़ाके की ठंड में मानवता और संवेदनशीलता की एक अनुकरणीय मिसाल उस समय देखने को मिली, जब हरैया वार्ड में रहने वाले एक परिवार ने देर…
गायघाट के युवाओं ने बनाया उम्मीदों का पुल, 3 किलोमीटर की दूरी हुई 1 किलोमीटर से भी कम राष्ट्र की परम्परा के लिए – प्रवीण कुमार यादव देवरिया (राष्ट्र की…
देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)।समाज के बीच एक नई चेतना जन्म ले रही है — जहाँ मदद किसी दायित्व से नहीं, बल्कि दिल की पुकार से की जा रही है। देवरिया…