“कंधों पर बोझ या हाथों में किताब? बाल श्रम बनाम शिक्षा—क्यों काग़ज़ों तक सिमट गया कानून”
सोमनाथ मिश्रा की कलम से (राष्ट्र की परम्परा)। कानून सख़्त हैं, योजनाएं मौजूद हैं—फिर भी क्यों लाखों बच्चे स्कूल नहीं, काम पर हैं? भारत में बाल श्रम बनाम शिक्षा की…